सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 50

21. भारत में 'आधुनिक नृत्य का जनक' किसे जाना जाता है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (III-पाली), Phase-XI 27 जून, 2023 (IV-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) उदय शंकर
Solution:
  • उदय शंकर को देश में आधुनिक नृत्य के विकास में उनके योगदान के लिए भारत में आधुनिक नृत्य के जनक के रूप में जाना जाता है।
  • उदय शंकर ने वर्तमान उत्तराखंड के अल्मोड़ा में पहला भारतीय नृत्य विद्यालय 'उदय शंकर नृत्य एवं संगीत अकादमी' भी स्थापित किया।
  • आधुनिक नृत्य की शुरुआत
    • 1920-30 के दशक में उदय शंकर ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य (जैसे कथकली, भरतनाट्यम, मणिपुरी) को पश्चिमी बैले, लोक और जनजातीय तत्वों के साथ मिलाया।
    • यह मिश्रण आधुनिक भारतीय नृत्य की नींव बना।
    • उन्होंने फ्रांस में 'प्रिक्स डी रोम' छात्रवृत्ति पर अध्ययन किया और वहाँ साइमन बार्बियरे व एलिस बोन्नर जैसे सहयोगियों के साथ काम किया।
    • रवींद्रनाथ टैगोर ने उनका स्वागत किया और भारत लौटने पर प्रदर्शन कला विद्यालय खोलने को प्रेरित किया।
    • 1930 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड (अब हिमालय क्षेत्र) में उन्होंने उदय शंकर इंडिया कल्चरल सेंटर स्थापित किया
    • जो पहला भारतीय नृत्य केंद्र था। यहाँ कथकली गुरु शंकरण नम्बूदरी, भरतनाट्यम के कंडप्पा पिल्लई
    • मणिपुरी के अम्बी सिंह और संगीतकार उस्ताद अलाउद्दीन खान जैसे विशेषज्ञों को आमंत्रित किया।
  • प्रमुख योगदान
    • उदय शंकर ने नृत्य को मंदिरों या दरबारों से निकालकर मंचीय कला बनाया। उनके प्रदर्शन यूरोप, अमेरिका और भारत में लोकप्रिय हुए
    • जिससे भारतीय नृत्य वैश्विक पटल पर आया। उन्होंने विष्णु दास शिराली व तिमिर बारान के साथ नए संगीत टेम्पलेट बनाए।
    • उनकी शैली ने नृत्य को व्यापक दर्शकों के लिए सुलभ बनाया, जो शास्त्रीय कठोरता से परे थी।
    • गुरु बिपिन सिंह जैसे अन्य कलाकार शास्त्रीय परंपराओं पर केंद्रित रहे, जबकि उदय शंकर नवाचार के प्रणेता बने।
  • विरासत
    • उदय शंकर की मृत्यु 26 सितंबर 1977 को हुई।
    • उनके कार्य ने समकालीन नृत्य को प्रभावित किया
    • जैसे शांतिनिकेतन और अन्य संस्थानों में।
    • वे भारत में नृत्य पुनर्जागरण के प्रतीक हैं, जिन्होंने परंपरा को आधुनिकता से जोड़ा

22. निम्नलिखित में से कौन अपने नवीन दृष्टिकोण और कार्यों के साथ आधुनिक नृत्य की अवधारणा को भारत में लाने वाले/वाली पहले/पहली व्यक्ति थे/थी? [MTS (T-I) 07 जुलाई, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) उदय शंकर
Solution:
  • उदय शंकर अपने नवीन दृष्टिकोण और कार्यों के साथ आधुनिक नृत्य की अवधारणा को भारत में लाने वाले पहले व्यक्ति थे
  • इसीलिए उन्हें भारत में आधुनिक नृत्य का जन्मदाता कहा जाता है।
  • वर्ष 1971 में उन्हें भारत सरकार ने दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया था।
  • प्रारंभिक जीवन
    • उदय शंकर का जन्म 8 दिसंबर 1900 को उदयपुर, राजस्थान में हुआ था।​
    • उन्होंने लंदन के रॉयल कॉलेज ऑफ आर्ट में कला का अध्ययन किया, जहाँ पश्चिमी नृत्य और चित्रकला से परिचित हुए।
    • भारतीय लोक नृत्य और शास्त्रीय रूपों की गहरी समझ के साथ, उन्होंने इनका मिश्रण शुरू किया।​
  • नवीन दृष्टिकोण
    • उदय शंकर ने पारंपरिक भारतीय नृत्य (जैसे कथक, भरतनाट्यम) को पश्चिमी आधुनिकता से जोड़ा, जिससे नृत्य अधिक अभिव्यंजक और दर्शक-मैत्रीपूर्ण बना।
    • उनके प्रदर्शनों में भावनात्मक गहराई, सामाजिक संदेश और रंगीन मंचन शामिल थे, जो शास्त्रीय सीमाओं से परे थे।
    • पाब्लो पिकासो और इगोर स्ट्राविंस्की जैसे कलाकारों के साथ सहयोग ने उनके कार्य को वैश्विक स्तर दिया।​
  • प्रमुख कार्य और संस्थान
    • 1930 में अल्मोड़ा, उत्तराखंड में उदय शंकर इंडिया कल्चरल सेंटर की स्थापना की, जो आधुनिक नृत्य प्रशिक्षण का पहला केंद्र बना।
    • वहाँ उन्होंने नृत्य-नाटक जैसे "काली पूजा", "शिव-तांडव" बनाए, जो लोक और शास्त्रीय तत्वों का अनूठा संयोजन थे।​
    • 1939 तक सेंटर ने नई पीढ़ी के नर्तकों को तैयार किया, जिसमें शांतिबर्धन जैसे शिष्य शामिल थे।​
  • विरासत और सम्मान
    • उनके प्रयासों ने भारत में समकालीन नृत्य को जन्म दिया, जो शास्त्रीय रूपों से अलग अधिक स्वतंत्र था।
    • 1971 में पद्म विभूषण से सम्मानित हुए।​
    • उनकी शैली ने नरेंद्र शर्मा, सचिन शंकर, मेनका, राम गोपाल और मृणालिनी साराभाई जैसे कलाकारों को प्रभावित किया।​

23. खेमराज को लोक संगीत और 'कुद' नृत्य में उनके योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। यह लोकनृत्य किस राज्य केंद्रशासित प्रदेश का है? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) जम्मू और कश्मीर
Solution:
  • 'कुद' जम्मू और कश्मीर केंद्रशासित प्रदेश का एक सामुदायिक नृत्य शैली है।
  • इस विशेष लोक नृत्य में योगदान के लिए खेमराज को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
  • कुद नृत्य का मूल
    • कुद नृत्य जम्मू क्षेत्र के मध्य पर्वतीय इलाकों में प्रचलित एक सामुदायिक लोक नृत्य है
    • खासकर जम्मू और कश्मीर से जुड़ा हुआ। यह मुख्य रूप से वर्षा ऋतु में मक्का की फसल कटाई के बाद किया जाता है
    • जब ग्रामीण स्थानीय ग्रामदेवता मंदिर के आसपास इकट्ठा होते हैं।
    • नृत्य का उद्देश्य देवता को फसलों, पशुओं और बच्चों को प्राकृतिक आपदाओं से बचाने के लिए धन्यवाद देना होता है।​
  • प्रदर्शन की विशेषताएं
    • यह नृत्य पुरुषों द्वारा किया जाता है, जिसमें लयबद्ध मुद्राएं, पैरों की थाप और घुमावदार हाव-भाव शामिल होते हैं।
    • 20-30 सदस्यों का समूह रात भर अलाव के चारों ओर नाचता है, जो त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर होता है।
    • संगीत में नरसिंगा, छैनै, बांसुरी और ढोल जैसे वाद्ययंत्रों का उपयोग होता है, जो नर्तकों की गतिविधियों को निर्देशित करते हैं।​​
  • खेमराज का योगदान
    • कलाकार खेमराज को लोक संगीत और कुद नृत्य में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला।
    • उन्होंने इस नृत्य रूप को संरक्षित और प्रचारित करने में अहम भूमिका निभाई।
    • यह पुरस्कार उनके द्वारा जम्मू क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखने के प्रयासों को मान्यता देता है।
  • अन्य संबंधित नृत्य
    • जम्मू और कश्मीर के अन्य लोकप्रिय नृत्य रऊफ और हिक्कत हैं।
    • यह नृत्य रूप जम्मू की समृद्ध लोक परंपरा का हिस्सा है, जो सामुदायिक एकता और आध्यात्मिक कृतज्ञता को दर्शाता है।

24. पुरी के जगन्नाथ मंदिर में किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली को चित्रित किया गया है? [CGL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली), Phase-XI 27 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ओडिसी
Solution:
  • पुरी के जगन्नाथ मंदिर में 'ओडिसी' शास्त्रीय नृत्य शैली को चित्रित किया गया है।
  • ओडिसी नृत्य शैली को चित्रित किया गया है।
    • जो इसे इस शास्त्रीय नृत्य का जीवंत दर्पण बनाता है। यह चित्रण मुख्य रूप से मंदिर के नाटमंडप (नृत्य कक्ष) में देखने को मिलता है
    • जहाँ नर्तकियों की त्रिभंगी मुद्रा, जटिल फुटवर्क और अभिनयपूर्ण हस्ताक्षर अमर हो गए हैं।
  • ओडिसी का मंदिर से संबंध
    • ओडिसी नृत्य ओडिशा की पुरी जगन्नाथ मंदिर परंपराओं से निकला है
    • विशेषकर महारी (देवदासी नृत्य) और गोटीपुआ (बालक नर्तक) शैलियों से।
    • मंदिर में महारी नर्तकियाँ भगवान जगन्नाथ की सेवा में नृत्य करती थीं, और इन्हीं की मुद्राएँ मंदिर की शिला लेखों व चित्रों में संरक्षित हैं।
    • नाटमंदिर इस नृत्य का केंद्र रहा, जहाँ त्योहारों पर ओडिसी प्रस्तुतियाँ होती हैं।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • ओडिसी की जड़ें 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी हैं, जब ओडिशा के राजा चोडगंग देव और अनंतवर्मन चोडगंग ने मंदिर निर्माण के साथ नृत्य परंपराओं को बढ़ावा दिया।
    • यह नृत्य नाट्यशास्त्र पर आधारित है और वैष्णव भक्ति से प्रेरित, जिसमें भगवान जगन्नाथ की कथाएँ प्रमुख हैं।
    • ब्रिटिश काल में यह लुप्तप्राय हो गया, किंतु 20वीं शताब्दी में गुरु कालूराम, गुरु देवप्रसाद दास जैसे कलाकारों ने इसे पुनर्जीवित किया।
  • ओडिसी की विशेषताएँ
    • त्रिभंगी मुद्रा: शरीर सिर, धड़ और कमर पर तीन जगह मुड़ा होता है, जो मंदिर की मूर्तियों में प्रमुख है।​
    • मुद्राएँ और भाव: 751 करहस्त (हस्ताक्षर) और नव रसों का प्रयोग, जो मंदिर चित्रणों से प्रेरित।​
    • संगीत: ओडिशा रागों, तालों (चौप, त्रिताल) पर आधारित, मंदिर भजनों से जुड़ा।​
    • भंगी: कोमल, मध्यम या दृढ़ भंगी, जो नर्तकी की सुंदरता दर्शाती।
  • मंदिर में चित्रण के उदाहरण
    • मंदिर के बाहरी दीवारों पर ओडिसी की मगढ़, भरमरी जैसी मुद्राएँ उकेरी गई हैं
    • जबकि आंतरिक कक्षों में आलापदापी, सत्रिया प्रभावित भाव दिखते हैं। ये चित्र न केवल सौंदर्यपूर्ण हैं
    • बल्कि नृत्य शिक्षा के स्रोत भी, जो ओडिसी गुरुकुलों में अध्ययन किए जाते हैं। जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान ये मुद्राएँ जीवंत हो उठती हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • ये चित्रण ओडिशा की भक्ति संस्कृति को दर्शाते हैं, जहाँ नृत्य भगवान से संवाद का माध्यम है।
    • ओडिसी को 1958 में शास्त्रीय मान्यता मिली, और आज यह वैश्विक है, किंतु पुरी मंदिर इसका मूल स्रोत बना हुआ।
    • पर्यटक मंदिर के इन चित्रों को देखकर ओडिसी की उत्पत्ति समझ सकते हैं।

25. 'जोनपा लेगसो' (Joenpa Legso) ....... का एक स्वागत नृत्य है। [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) भूटान
Solution:
  • जोनपा लेगसो (Joenpa Legso) 'भूटान' का एक स्वागत नृत्य है।
  • नृत्य का विवरण
    • यह नृत्य आमतौर पर महिलाओं द्वारा किया जाता है
    • जो अपनी पारंपरिक पोशाक 'किरा' (लंबी पोशाक) और 'टेगो' (जैकेट) पहनती हैं।
    • हाथों और पैरों की सुंदर, लयबद्ध हरकतें इसकी मुख्य विशेषता हैं
    • नर्तकियां प्रदर्शन को और आकर्षक बनाने के लिए स्कार्फ या रूमाल का उपयोग करती हैं।
  • प्रदर्शन के अवसर
    • जोनपा लेगसो को शादियों, त्योहारों और आधिकारिक समारोहों जैसे विभिन्न अवसरों पर प्रस्तुत किया जाता है।
    • यह नृत्य अतिथियों को शुभकामनाएं देता है और भूटान की सांस्कृतिक समृद्धि को दर्शाता है।​​
  • सांस्कृतिक महत्व
    • भूटान में यह स्वागत गीत और नृत्य विशेष अवसरों पर भाग्यशाली माना जाता है
    • जैसे भारत-भूटान मैत्री के 50 वर्ष पूरे होने पर प्रदर्शित किया गया। यह हिमालयी क्षेत्र की परंपराओं को जीवंत रखता है

26. धालो, भारत के किस राज्य का लोकनृत्य है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) गोवा
Solution:
  • धालो (Dhalo) नृत्य 'गोवा' राज्य के सबसे लोकप्रिय नृत्यों में से एक है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, धालो पौष मास के समय मनाया जाने वाला लोकनृत्य है।
  • उत्पत्ति और समय
    • यह हिंदू पौष महीने (दिसंबर-जनवरी) की पूर्णिमा रात्रि में शुरू होता है, जो पांच से नौ दिनों तक चलता है।
    • त्योहार "दलयाची पूनव" के नाम से जाना जाता है और शुरुआती सर्दियों में आयोजित किया जाता है।
  • प्रदर्शन स्थल और तैयारी
    • नृत्य एक पवित्र खुले स्थान "मांड" पर होता है
    • जहां जूते पहनना वर्जित है। गांव का नेता "मांडकन्न" पृथ्वी माता की पूजा कर त्योहार की शुरुआत करता है।
    • महिलाएं साधारण पारंपरिक वेशभूषा में भाग लेती हैं
    • कभी-कभी पुरुषों के वेश में भी। रात्रि में गाने और नृत्य शुरू होते हैं, जो आधी रात तक चलते हैं।
  • नृत्य शैली
    • बारह से चौदह महिलाएं दो समानांतर पंक्तियों में खड़ी होकर एक-दूसरे का सामना करती हैं।
    • वे कंधे से कंधा मिलाकर या हाथों को पीछे लपेटकर जुड़ती हैं और सामूहिक रूप से गाती-झूमती हैं।
    • हरकतें धीमी, चिकनी और लयबद्ध होती हैं—पंक्तियां आगे-पीछे झुकती हैं, एक-दूसरे को प्रणाम करती हैं। ढोल जैसी ताल वाद्ययंत्रों पर नृत्य होता है।
  • गीत और थीम्स
    • महिलाएं जीवन की कहानियां, समकालीन समाज, कृष्ण लीला, रामायण या महाभारत पर आधारित गीत गाती हैं।
    • कभी आधुनिक मराठी-हिंदी गाने भी शामिल होते हैं।
    • पहले छह रातों में नृत्य-कहानी कहन पर जोर, अंतिम दिन फैंसी ड्रेस में पुरुषों की नकल।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • धालो गोवा की पुर्तगाली-भारतीय संस्कृति का मिश्रण दर्शाता है, जो फुगड़ी, देखनी जैसे अन्य नृत्यों से अलग है।
    • यह सामुदायिक एकता, रीति-रिवाज और कला का संगम है
    • जो परिवार की रक्षा की प्रार्थना करता है। गोवा के अलावा अन्य राज्यों से इसका कोई संबंध नहीं।

27. 'अलारिप्पु' नृत्य भारत के निम्नलिखित में से किस शास्त्रीय नृत्य का रूप है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) भरतनाट्यम
Solution:
  • 'अलारिप्पु' नृत्य भरतनाट्यम शास्त्रीय नृत्य का एक रूप है।
  • अलारिप्पु का शाब्दिक अर्थ है-फूलों से सजावट। यह ध्वनि अक्षरों के पठन के साथ शुद्ध नृत्य संयोजन का एक अमूर्त खंड है।
  • अलारिप्पु भरतनाट्यम का हिस्सा है।
    • यह भारत के प्रमुख शास्त्रीय नृत्यों में से एक, भरतनाट्यम का पहला नृत्य अंश है, जो प्रदर्शन की शुरुआत में किया जाता है।
  • अलारिप्पु का अर्थ और महत्व
    • अलारिप्पु का शाब्दिक अर्थ "फूल का खिलना" है, जहां "अलार" का मतलब फूल और "इप्पु" का मतलब खिलना या खुलना होता है।
    • यह नृत्य नर्तक के शरीर, मन और आत्मा के जागरण का प्रतीक है, जो मंदिर, दर्शकों और गुरु को सम्मान देते हुए प्रदर्शन की शुरुआत करता है।
    • यह पूरी तरह शुद्ध नृत्ता (लयबद्ध अमूर्त नृत्य) पर आधारित होता है, जिसमें कोई अभिनय या भाव-भंगिमा नहीं होती।​
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • अलारिप्पु की रचना 19वीं शताब्दी में तंजौर राज दरबार के चार भाइयों—तंजौर क्वार्टेट (चिन्नय्या, पोनाय्या, शिवानंदम और वासियम्मा)—ने पांच विभिन्न तालों (चतुष्र, तिस्र, खंड, मिश्र और संगीर्ण) में की थी।
    • भरतनाट्यम खुद तमिलनाडु के मंदिरों से निकला सबसे प्राचीन शास्त्रीय नृत्य है
    • जिसका उल्लेख प्राचीन तमिल महाकाव्य सिलप्पादिकारम में मिलता है। यह नृत्य दक्षिण भारत की धार्मिक और आध्यात्मिक परंपराओं को दर्शाता है।​
  • प्रदर्शन की संरचना
    • अलारिप्पु मृदंगम की लय पर किया जाता है, जिसमें नट्टुवनार (मौखिक ताल वाचक) साथ देते हैं।
    • यह खड़े समभंगा मुद्रा से शुरू होता है, जिसमें गर्दन, कंधे और बाजुओं की चालें आती हैं; फिर अर्ध-मंडली और पूर्ण मंडली स्थितियां अपनाई जाती हैं।
    • सभी प्रमुख और लघु अंगों की गतियां शामिल होती हैं, तीन गतियों (धीमी, मध्यम, तेज) में सोल्लुकट्टु सिलेबल्स पर।
    • अंत में छोटा अदावु या तीरमानम आता है, जो धीरे-धीरे तीव्र होकर चरम पर पहुंचता है।​
  • भरतनाट्यम में स्थान
    • भरतनाट्यम का पारंपरिक क्रम अलारिप्पु से शुरू होता है
    • उसके बाद जातिस्वरम, वर्णम, पदम और तिल्लाना आते हैं। यह नृत्य नर्तक के लिए वार्म-अप की तरह कार्य करता है
    • जो शरीर को लचीला बनाता है। संगीत नाटक अकादमी द्वारा मान्यता प्राप्त आठ शास्त्रीय नृत्यों में भरतनाट्यम तमिलनाडु से है
    • जबकि अन्य जैसे कथकली (केरल), कुचिपुड़ी (आंध्र प्रदेश) या ओडिसी (ओडिशा) अलग हैं।

28. वर्ष 2020 के लिए संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (अकादमी पुरस्कार) मीनाक्षी चितरंजन को निम्नलिखित में से किसमें उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया ? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) भरतनाट्यम
Solution:
  • वर्ष 2020 के लिए संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड (अकादमी पुरस्कार) मीनाक्षी चितरंजन को शास्त्रीय नृत्य 'भरतनाट्यम' में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
  • पुरस्कार का विवरण
    • संगीत नाटक अकादमी भारत की राष्ट्रीय संगीत, नाटक और नृत्य अकादमी है, जो कला के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रतिवर्ष पुरस्कार प्रदान करती है
    • यह पुरस्कार 2020 मीनाक्षी चितरंजन को भरतनाट्यम शैली में उनके लंबे समय से किए जा रहे कार्यों, प्रदर्शनों और शिक्षण के लिए दिया गया।
    • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2023 में 2019, 2020 और 2021 के पुरस्कारों का एक साथ वितरण किया
    • जिसमें मीनाक्षी चितरंजन का नाम स्पष्ट रूप से भरतनाट्यम श्रेणी में उल्लिखित है।
  • मीनाक्षी चितरंजन का योगदान
    • मीनाक्षी चितरंजन एक प्रसिद्ध भरतनाट्यम नृत्यांगना हैं
    • जिन्होंने इस शास्त्रीय नृत्य रूप को संरक्षित करने, प्रचारित करने और नई पीढ़ी को प्रशिक्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
    • आधिकारिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, उनका चयन भरतनाट्यम में विशेषज्ञता और योगदान के आधार पर हुआ।
    • विकिपीडिया जैसे स्रोतों में भी 2020 के प्राप्तकर्ताओं की सूची में उनका नाम भरतनाट्यम के अंतर्गत दर्ज है।
  • पुरस्कार वितरण संदर्भ
    • यह पुरस्कार महामारी के कारण विलंबित हो गया और 2023 में औपचारिक रूप से प्रदान किया गया।
    • समारोह में अन्य कलाकारों के साथ उनका सम्मान किया गया, जो नृत्य, संगीत और रंगमंच के विभिन्न क्षेत्रों से थे।
    • यह पुरस्कार अकादमी की ओर से कला के संवर्धन का प्रतीक है, जिसमें नकद राशि, शाल, ताम्रपत्र और अंगवस्त्र शामिल होते हैं।​

29. होजागिरी नृत्य शैली को बढ़ावा देने के लिए सत्यराम रियांग को पद्मश्री प्राप्त हुआ था। वह निम्नलिखित में से किस राज्य से संबंधित हैं? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) त्रिपुरा
Solution:
  • सत्यराम रियांग त्रिपुरा के एक लोक कलाकार हैं। होजागिरी नृत्य शैली को बढ़ावा देने के लिए उन्हें वर्ष 2021 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया।
  • वर्ष 2004 में, सत्यराम रियांग को प्रतिष्ठित संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
  • होजागिरी नृत्य का परिचय
    • होजागिरी नृत्य त्रिपुरा राज्य का एक पारंपरिक आदिवासी लोकनृत्य है
    • जो मुख्य रूप से रियांग (ब्रू) जनजाति की महिलाओं द्वारा किया जाता है।
    • इस नृत्य में नृत्यांगनाएं सिर पर मिट्टी के घड़े या बोतल को संतुलित रखते हुए गाती-बजाती और नाचती हैं
    • जो उनकी कुशलता और सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है।
    • यह नृत्य विशेष रूप से जन्म, विवाह और धार्मिक उत्सवों पर प्रस्तुत किया जाता है।
  • सत्यराम रियांग का जीवन और योगदान
    • सत्यराम रियांग (1943-2023) त्रिपुरा के दक्षिण जिले के दशमी रियांग पारा गांव के निवासी थे
    • एक प्रमुख लोक कलाकार व होजागिरी नृत्य के प्रचारक थे।
    • उन्होंने इस नृत्य शैली को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, साथ ही आदिवासी लोक संस्कृति के संरक्षण में योगदान दिया।
    • 1986 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला था।
  • पद्मश्री सम्मान
    • जनवरी 2021 में सत्यराम रियांग को कला क्षेत्र में होजागिरी नृत्य को बढ़ावा देने के लिए भारत का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मश्री प्रदान किया गया।
    • यह सम्मान त्रिपुरा के लिए गौरवपूर्ण था, क्योंकि वे इस राज्य से तीसरे प्राप्तकर्ता बने।
    • पुरस्कार की घोषणा 25 जनवरी 2021 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर हुई थी।
  • त्रिपुरा से संबंध की पुष्टि
    • सभी स्रोत स्पष्ट रूप से सत्यराम रियांग को त्रिपुरा से जोड़ते हैं, न कि सिक्किम, मणिपुर या असम से।
    • त्रिपुरा में रियांग जनजाति की मजबूत उपस्थिति के कारण यह नृत्य यहां की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
    • उनके कार्य ने पूरे पूर्वोत्तर भारत की आदिवासी कला को समृद्ध किया।

30. ......., दक्षिण मालाबार में प्रचलित एक मुखौटा नृत्य है। [CGL (T-I) 20 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) कुम्मत्तिकली
Solution:
  • कुम्मत्तिकली दक्षिण मालाबार में प्रचलित एक मुखौटा नृत्य है।
  • उत्पत्ति और क्षेत्र
    • कुम्मत्तिकली मुख्य रूप से केरल के त्रिशूर जिले, पलक्कड़ जिले और दक्षिण मालाबार के अन्य हिस्सों में लोकप्रिय है।
    • यह ओणम त्योहार (मलयालम कैलेंडर का नववर्ष) के दौरान विशेष रूप से प्रदर्शित होता है।
    • नर्तक घर-घर जाकर लोगों का मनोरंजन करते हैं और छोटे-मोटे उपहार एकत्र करते हैं।
  • वेशभूषा और मुखौटे
    • नर्तक भारी, रंग-बिरंगे लकड़ी के मुखौटे पहनते हैं, जो कृष्ण, नारद मुनि, किरात (शिव का रूप), और दारिका (राक्षस) जैसे पात्रों के चेहरे दर्शाते हैं।
    • ये मुखौटे आमतौर पर जैकफ्रूट के पेड़ (कटहल) या सैप्रोफाइट की लकड़ी से बनाए जाते हैं और चटख रंगों से सजाए जाते हैं।
    • नर्तक काले रंग की पारंपरिक वेशभूषा, घंटियां बंधे पैर और हाथों में लाठी या कृपाण लिए नृत्य करते हैं।
  • प्रदर्शन शैली
    • नृत्य ताल वाद्यों जैसे ढोलक, मंजीरा और छूटियों पर आधारित होता है।
    • नर्तक गायन, नृत्य और अभिनय का मिश्रण प्रस्तुत करते हैं, जिसमें हास्य, नाटकीयता और लोकगीत शामिल होते हैं।
    • यह सामुदायिक उत्सव का रूप ले लेता है, जहां सड़कों पर जुलूस निकलते हैं।​
  • कथानक और विषय
    • कुम्मत्तिकली के विषय रामायण की कथाओं, दारिका वध (दारिका राक्षस का वध), शिव की कथाओं तथा लोककथाओं जैसे मंजन नायर पट्टू से प्रेरित होते हैं।
    • यह धार्मिक और सांस्कृतिक संदेशों को मनोरंजक ढंग से प्रसारित करता है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य केरल की लोक संस्कृति का अभिन्न अंग है, जो सामुदायिक एकता और त्योहार की खुशी को दर्शाता है।
    • ओणम जैसे अवसरों पर यह पर्यटकों को भी आकर्षित करता है। अन्य मुखौटा नृत्यों से तुलना करें तो: