Correct Answer: (c) कालबेलिया
Solution:- कालबेलिया लोक गीत और नृत्य शैली कालबेलिया समुदाय के जीवन के पारंपरिक रहन-सहन की अभिव्यक्ति है।
- यह राजस्थान राज्य से संबंधित है। कालबेलिया नृत्य के गीत आमतौर पर लोक कथा और पौराणिक कथाओं पर आधारित होते हैं।
- वर्ष 2010 में यूनेस्को द्वारा राजस्थान के कालबेलिया लोक गीत और नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
- राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति में कई जीवंत लोक नृत्य शामिल हैं, लेकिन उपयोगकर्ता के प्रश्न में "निम्नलिखित लोक नृत्यों में से कौन-सा" का उल्लेख है
- जो संभवतः विकल्पों की सूची को संदर्भित करता है। हालांकि, कोई विशिष्ट सूची प्रदान नहीं की गई है
- इसलिए मैं राजस्थान से जुड़े प्रमुख लोक नृत्यों की पूर्ण विस्तृत जानकारी दे रहा हूँ। ये नृत्य राज्य की परंपराओं, त्योहारों और जनजातीय जीवन को दर्शाते हैं।
- प्रमुख लोक नृत्य
- राजस्थान के लोक नृत्य मुख्य रूप से महिलाओं, पुरुषों या मिश्रित समूहों द्वारा किए जाते हैं
- जो त्योहारों जैसे होली, दीवाली, नवरात्रि और विवाहों पर प्रस्तुत होते हैं। इनमें घूमर सबसे प्रसिद्ध है।
- घूमर: महिलाओं द्वारा किया जाने वाला गोलाकार घुमावदार नृत्य, रंग-बिरंगे घाघरों में। यह शालीनता और उत्सव का प्रतीक है, ढोल और सारंगी के साथ।
- भवाई: महिलाएँ सिर पर 7-8 मटके या तलवारें संतुलित कर नृत्य करती हैं, जो कुशलता दिखाता है।
- कालबेलिया: सापेरा जनजाति का सर्पिल नृत्य, UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त, तेज लय पर।
- गेर (गैर): पुरुषों का तलवारबाजी वाला समूह नृत्य, वीरता का प्रतीक।
- कच्ची घोड़ी: पुरुष घोड़ों के बिना नकली सवारी कर नृत्य करते हैं, शादियों में लोकप्रिय।
- प्रस्तुति शैली
- इन नृत्यों में पारंपरिक वेशभूषा जैसे घाघरा-चोली, पगड़ी और आभूषण प्रमुख हैं।
- वाद्ययंत्रों में मंडल, ढोलक, सारंगी और चंग का उपयोग होता है। अवसरों पर समुदाय एकत्र होकर इन्हें करता है।
- सांस्कृतिक महत्व
- ये नृत्य राजस्थान की पहचान हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RAS में महत्वपूर्ण हैं। घूमर को राज्य नृत्य घोषित किया गया है।