सांस्कृतिक गतिविधियां (परम्परागत सामान्य ज्ञान) भाग-I

Total Questions: 50

31. निम्नलिखित में से कौन-सा नृत्य भारतीय राज्य उड़ीसा में मुख्य रूप से नहीं किया जाता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भवाई
Solution:
  • भवाई भारतीय राज्य राजस्थान एवं गुजरात का एक पारंपरिक, लोकप्रिय लोकनृत्य है।
  • इसमें मुंगल, तबला, ढोलक, बांसुरी, पखावज, रबाब, मंजीरा आदि वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया जाता है।
  • विकल्पों का विवरण
    • प्रश्न में संभावित विकल्पों (कथकली, गोटीपुआ, पाइका, दशकथिया) में से कथकली ओडिशा से बाहर का है।
    • कथकली: केरल का शास्त्रीय नृत्य, जो विस्तृत मेकअप, वेशभूषा और रामायण-महाभारत की कथाओं पर आधारित है। इसमें पुरुष नर्तक स्त्री भूमिकाएँ भी निभाते हैं।​
    • गोटीपुआ: ओडिशा का पारंपरिक नृत्य, जहाँ युवा लड़के महिलाओं के वेश में acrobatic प्रदर्शन करते हैं, मुख्यतः जगन्नाथ मंदिर से जुड़ा।
    • पाइका: ओडिशा का मार्शल आर्ट आधारित नृत्य, योद्धाओं की वीरता दर्शाता है, विशेषकर कोरापुट क्षेत्र में।​
    • दशकथिया (या दलखाई): ओडिशा का लोक नृत्य, दशहरा उत्सव पर आदिवासी महिलाएँ करती हैं।​
  • ओडिशा के अन्य प्रमुख नृत्य
    • ओडिशा अपनी समृद्ध नृत्य परंपरा के लिए जाना जाता है।
    • ओडिसी: भारत का प्रमुख शास्त्रीय नृत्य, मंदिरों (जैसे पुरी का जगन्नाथ) से उत्पन्न, नाट्यशास्त्र पर आधारित। गुरु केलुचरण महापात्र ने इसका पुनरुद्धार किया।
    • छऊ: ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र का मुखौटा नृत्य, महाकाव्यों की कहानियाँ दर्शाता।​
    • घुमुर: आदिवासी समुदायों का नृत्य, ढोल-मंजीरा के साथ।​
    • ये नृत्य ओडिशा की संस्कृति, भक्ति और योद्धा भावना को प्रतिबिंबित करते हैं।
    • कथकली का ओडिशा से कोई सीधा संबंध नहीं, क्योंकि यह दक्षिण भारत की कथा-प्रधान शैली है।

32. 'कलासम' भारत के निम्नलिखित में से किस शास्त्रीय नृत्य की एक नृत्य अनुक्रम है? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) कथकली
Solution:
  • 'कलासम' एक नृत्य अनुक्रम है, जो केरल स्थित शास्त्रीय नृत्य 'कथकली' में किया जाता है।
  • कथकली एक शास्त्रीय नृत्य है, जिसकी उत्पत्ति 17वीं शताब्दी में केरल में हुई थी।
  • कथकली का परिचय
    • कथकली 17वीं शताब्दी में केरल में विकसित एक नृत्य-नाट्य शैली है, जो रामायण, महाभारत और पुराणों की कथाओं को जीवंत करती है।
    • इसमें नर्तक मुखाभिनय, हस्तमुद्राओं और शरीर की गतियों से पूरी कहानी बयान करते हैं, बिना बोले।
    • विस्तृत मेकअप (जैसे चट्टम चूड़ी), भारी वेशभूषा और रंगीन स्कल कैप इसकी पहचान हैं।
  • कलासम क्या है?
    • कलासम कथकली का एक शुद्ध नृत्य (नृत्य) अनुक्रम है, जो ऊर्जावान और तीव्र गतियों पर आधारित होता है।
    • यह प्रदर्शन के शुरुआती भाग में आता है, जहां नर्तक ताल और लय पर जटिल पैरों की थिरकन, कूद और घुमाव दिखाते हैं।
    • यह दर्शकों का ध्यान आकर्षित करने और नाट्य की शुरुआत के लिए महत्वपूर्ण है।
  • कथकली की संरचना
    • कथकली प्रदर्शन कई अनुक्रमों में बंटा होता है: कलासम (प्रारंभिक नृत्य), तोट्टम (पूजा नृत्य), फिर पुराप्रदर्शिनी (कहानी का परिचय)।
    • संगीत मंडलम और नॉर्थ (ढोलक जैसा) पर आधारित होता है, साथ ही वाचालिक (गायन)।
    • रात भर चलने वाले ये प्रदर्शन सामूहिक होते हैं, पुरुष नर्तक स्त्री भूमिकाएं भी निभाते हैं।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • कृष्णनाट्टम और कोडियाट्टम से प्रेरित, कथकली को कलामंडलम ने वैश्विक पहचान दी।
    • प्रसिद्ध कलाकार: कलामंडलम कृष्णन नायर। आज भी केरल के मंदिरों और उत्सवों में जीवित।

33. गिद्दा और भांगड़ा भारत के किस राज्य के लोक नृत्य हैं? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) पंजाब
Solution:
  • गिद्दा और भांगड़ा भारत के पंजाब राज्य के लोक नृत्य हैं। गिद्दा एक महिला लोक नृत्य है
  • जबकि भांगड़ा एक पुरुष लोक नृत्य है। दोनों नृत्य विभिन्न सांस्कृतिक त्योहारों के दौरान किए जाते हैं।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • गिद्दा महिलाओं का पारंपरिक नृत्य है, जो प्राचीन काल से चला आ रहा है और रिंग डांस के रूप में जाना जाता था।​
    • ये नृत्य पश्चिमी पंजाब (अब पाकिस्तान में) से फैले, लेकिन भारत के पंजाब में सबसे प्रमुख हैं।
  • भांगड़ा की विशेषताएं
    • भांगड़ा पुरुषों द्वारा किया जाने वाला ऊर्जावान नृत्य है
    • जिसमें ढोल की तेज थाप पर छलांगें, घुमाव और जोरदार चालें शामिल हैं।
    • यह फसल कटाई का जश्न मनाता है, जहां नर्तक लुंगी, पगड़ी और चमकीले वस्त्र पहनते हैं।
    • आधुनिक भांगड़ा में पॉप संगीत मिश्रित हो गया है, जो वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय है—डीजे रेखा जैसी कलाकारों ने इसे अमेरिका में फैलाया।​
    • यह सामूहिक नृत्य है, जो जीवन की खुशी और समृद्धि का प्रतीक है।​
  • गिद्दा की विशेषताएं
    • गिद्दा महिलाओं का घेरे में किया जाने वाला नृत्य है
    • जिसमें ताली बजाना, लयबद्ध चालें और बोलियां (हास्यपूर्ण छंद) गाना प्रमुख है। ढोल या डंडा वाद्ययंत्रों पर यह प्रस्तुत होता है।
    • यह दैनिक जीवन, प्रेम, त्योहारों और व्यंग्य पर आधारित गीतों से भरपूर होता है, जो पंजाबी महिलाओं की भावनाओं को व्यक्त करता है।​
    • वेशभूषा में सलवार कमीज, चूड़ियां और दुपट्टा होता है, जो इसे रंगीन बनाता है।​
  • प्रदर्शन और महत्व
    • दोनों नृत्य बैसाखी, लोहड़ी, विवाह और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में होते हैं। भांगड़ा पुरुषों का, गिद्दा महिलाओं का, लेकिन कभी-कभी मिश्रित भी।
    • ये पंजाबी पहचान के प्रतीक हैं, जो ऊर्जा, एकता और खुशी दर्शाते हैं—विश्व भर के पंजाबी समुदाय इन्हें जीवित रखते हैं।

34. कालबेलिया नृत्य आमतौर पर भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य में किया जाता है? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (IV-पाली), CGL (T-I) 08 जुलाई, 2022 (II-पाली), MTS (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) राजस्थान
Solution:
  • कालबेलिया लोक गीत और नृत्य शैली कालबेलिया समुदाय के जीवन के पारंपरिक रहन-सहन की अभिव्यक्ति है।
  • यह राजस्थान राज्य से संबंधित है। कालबेलिया नृत्य के गीत आमतौर पर लोक कथा और पौराणिक कथाओं पर आधारित होते हैं।
  • वर्ष 2010 में यूनेस्को द्वारा राजस्थान के कालबेलिया लोक गीत और नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
  • उत्पत्ति और इतिहास
    • कालबेलिया नृत्य राजस्थानी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है, जो समुदाय की सांपों से जुड़ी जीवनशैली को दर्शाता है।
    • इसकी शुरुआत राजस्थान के पश्चिमी जिलों जैसे जोधपुर, जैसलमेर, बाड़मेर और पूर्वी जिलों जैसे जयपुर, पुष्कर से हुई।
    • यूनेस्को ने 2010 में इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया।
  • प्रदर्शन शैली
    • नृत्य सांप की तरह लहराती गतियों, तेज घुमावों (फिरकनी) और कलाबाजियों जैसे आंखों से अंगूठी उठाना या मुंह से पैसे उठाना पर आधारित होता है।
    • यह आनंदमय अवसरों जैसे विवाह, त्योहारों पर किया जाता है और दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।​​
  • वेशभूषा और संगीत
    • महिलाएं काले घाघरे, लाल-काली कढ़ाई वाले ओढ़नी, चांदी के गहने, कांच की चूड़ियां और घुंघरू पहनती हैं।
    • संगीत कालबेलिया लोकगीतों पर होता है, जो प्रेम, प्रकृति और जीवन पर आधारित होते हैं।​
  • प्रसिद्ध कलाकार और महत्व
    • गुलाबो सपेरा जैसी नृत्यांगनाओं ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई।
    • यह नृत्य राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है
    • अन्य लोकनृत्यों जैसे घूमर, भवाई के साथ राज्य की कला का प्रतीक है।​

35. नीलिमा कालबेलिया नृत्य करती हैं। यह नृत्य शैली किस राज्य से संबंधित है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) राजस्थान
Solution:
  • कालबेलिया लोक गीत और नृत्य शैली कालबेलिया समुदाय के जीवन के पारंपरिक रहन-सहन की अभिव्यक्ति है।
  • यह राजस्थान राज्य से संबंधित है। कालबेलिया नृत्य के गीत आमतौर पर लोक कथा और पौराणिक कथाओं पर आधारित होते हैं।
  • वर्ष 2010 में यूनेस्को द्वारा राजस्थान के कालबेलिया लोक गीत और नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
  • वेशभूषा और प्रदर्शन
    • नर्तकियां काले लहंगे पहनती हैं, जिनमें चांदी के रिबन और कढ़ाई वाले पैटर्न होते हैं; घूमते समय ये सांपों जैसी लगते हैं।
    • नृत्य तेज घुमावों, मुड़ने और कामुक मुद्राओं से भरपूर होता है
    • जो जनजाति की खानाबदोश जीवनशैली को दर्शाता है। यह सामूहिक उत्सवों, विवाहों और धार्मिक अवसरों पर किया जाता है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • यह नृत्य कालबेलिया संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है
    • जो उनके सर्प-शिकार और जहर संग्रह की परंपराओं को जीवंत रखता है।
    • 2010 में यूनेस्को ने इसे मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सूची में शामिल किया
    • जिससे इसकी वैश्विक पहचान बढ़ी। राजस्थान के जिले जैसे जोधपुर से विशेष रूप से जुड़ा, लेकिन पूरे राज्य में प्रचलित।
  • नीलिमा का संदर्भ
    • नीलिमा नामक नर्तक कालबेलिया शैली प्रस्तुत करती हैं
    • जो इसकी राजस्थानी जड़ों को पुष्ट करता है। यह नृत्य आधुनिक मंचों पर भी लोकप्रिय हो रहा है।

36. निम्नलिखित लोक नृत्यों में से कौन-सा राजस्थान से संबंधित है? [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 08 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) कालबेलिया
Solution:
  • कालबेलिया लोक गीत और नृत्य शैली कालबेलिया समुदाय के जीवन के पारंपरिक रहन-सहन की अभिव्यक्ति है।
  • यह राजस्थान राज्य से संबंधित है। कालबेलिया नृत्य के गीत आमतौर पर लोक कथा और पौराणिक कथाओं पर आधारित होते हैं।
  • वर्ष 2010 में यूनेस्को द्वारा राजस्थान के कालबेलिया लोक गीत और नृत्य को मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
  • राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति में कई जीवंत लोक नृत्य शामिल हैं, लेकिन उपयोगकर्ता के प्रश्न में "निम्नलिखित लोक नृत्यों में से कौन-सा" का उल्लेख है
  • जो संभवतः विकल्पों की सूची को संदर्भित करता है। हालांकि, कोई विशिष्ट सूची प्रदान नहीं की गई है
  • इसलिए मैं राजस्थान से जुड़े प्रमुख लोक नृत्यों की पूर्ण विस्तृत जानकारी दे रहा हूँ। ये नृत्य राज्य की परंपराओं, त्योहारों और जनजातीय जीवन को दर्शाते हैं।
  • प्रमुख लोक नृत्य
    • राजस्थान के लोक नृत्य मुख्य रूप से महिलाओं, पुरुषों या मिश्रित समूहों द्वारा किए जाते हैं
    • जो त्योहारों जैसे होली, दीवाली, नवरात्रि और विवाहों पर प्रस्तुत होते हैं। इनमें घूमर सबसे प्रसिद्ध है।​
    • घूमर: महिलाओं द्वारा किया जाने वाला गोलाकार घुमावदार नृत्य, रंग-बिरंगे घाघरों में। यह शालीनता और उत्सव का प्रतीक है, ढोल और सारंगी के साथ।
    • भवाई: महिलाएँ सिर पर 7-8 मटके या तलवारें संतुलित कर नृत्य करती हैं, जो कुशलता दिखाता है।
    • कालबेलिया: सापेरा जनजाति का सर्पिल नृत्य, UNESCO द्वारा मान्यता प्राप्त, तेज लय पर।​
    • गेर (गैर): पुरुषों का तलवारबाजी वाला समूह नृत्य, वीरता का प्रतीक।​
    • कच्ची घोड़ी: पुरुष घोड़ों के बिना नकली सवारी कर नृत्य करते हैं, शादियों में लोकप्रिय।
  • प्रस्तुति शैली
    • इन नृत्यों में पारंपरिक वेशभूषा जैसे घाघरा-चोली, पगड़ी और आभूषण प्रमुख हैं।
    • वाद्ययंत्रों में मंडल, ढोलक, सारंगी और चंग का उपयोग होता है। अवसरों पर समुदाय एकत्र होकर इन्हें करता है।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • ये नृत्य राजस्थान की पहचान हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे RAS में महत्वपूर्ण हैं। घूमर को राज्य नृत्य घोषित किया गया है।

37. 'दलखाई' भारत के निम्नलिखित में से किस राज्य का लोक नृत्य है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) ओडिशा
Solution:
  • 'दलखाई' पश्चिमी ओडिशा के महत्वपूर्ण और लोकप्रिय लोक नृत्यों में से एक है
  • जो मुख्यतः बारगढ़, संबलपुर, झारसुगुड़ा, देवगढ़, बलांगीर, सोनपुर और बौध जिलों में किया जाता है। यह नृत्य मुख्यतः रामायण और महाभारत पर आधारित है।
  • प्रदर्शन के अवसर
    • यह नृत्य दशहरा, भाईजिंटिया, फागुन पुनी, नुआखाई और कटाई के मौसम जैसे त्योहारों पर किया जाता है।
    • देवी दुर्गा को प्रसन्न करने के उद्देश्य से भी इसका आयोजन होता है।
    • ऊर्जावान प्रदर्शन फसल उत्सवों और सामुदायिक समारोहों में ओडिशा की सांस्कृतिक धरोहर को जीवंत बनाते हैं।
  • शैली और संगीत
    • नृत्य तेज़ गति वाली चालें, समकालिक कदम, ऊर्जावान हाथ के इशारे और गोलाकार formation की विशेषता रखता है।
    • इसे ढोल, नगाड़ा, निशान, हारमोनियम जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ लोक गीतों पर किया जाता है।
    • गीत ओडिया भाषा में होते हैं, जिनके विषय प्रेम, प्रकृति, राधा-कृष्ण, रामायण और महाभारत पर आधारित हैं।
  • सांस्कृतिक महत्व
    • दलखाई ओडिशा की आदिवासी संस्कृति का प्रतीक है, जो उच्च ऊर्जा और जीवंतता से क्षेत्र की विरासत को दर्शाता है।
    • यह घुमरा, छऊ, रनप्पा जैसे अन्य लोक नृत्यों के साथ राज्य की समृद्ध परंपराओं का हिस्सा है। नर्तकियां रंगीन वेशभूषा पहनती हैं, जो उत्सवों में उत्साह बढ़ाती हैं।

38. रायगढ़ घराना निम्नलिखित में से किस नृत्य शैली से संबंधित है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) कथक
Solution:
  • 'रायगढ़ घराना' कथक नृत्य शैली से संबंधित है। रायगढ़ घराना सभी घरानों के मुकाबले नया माना जाता है।
  • उत्पत्ति और संस्थापक
    • रायगढ़ घराना के संस्थापक राजा चक्रधर सिंह थे, जिन्होंने 20वीं सदी के प्रारंभ में लखनऊ और जयपुर घरानों के आचार्यों को आमंत्रित कर इसकी नींव रखी।​​
    • उन्होंने रायगढ़ को कला का केंद्र बनाया, जहां कथक नृत्य और शास्त्रीय संगीत को संरक्षण मिला।
    • यह घराना 1978 में औपचारिक रूप से प्रचारित हुआ, जब दोनों घरानों के तत्वों का मिश्रण तैयार किया गया।​
  • विशेषताएं
    • रायगढ़ घराना लयबद्ध जटिलता, सुंदर चाल, विस्तृत फुटवर्क और चक्करों के लिए प्रसिद्ध है।
    • इसमें तत्कार (जटिल फुटवर्क), लयकारी (लय विविधता) और 380 मात्राओं वाली तालों का नृत्य प्रमुख है, जो शब्दात्मक, काव्यात्मक और दृश्यात्मक होते हैं।​
    • यह हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत से प्रेरित रचनाओं को एकीकृत करता है, जिसमें भावपूर्ण हाव-भाव और चेहरे के भाव शामिल हैं।​​
  • ऐतिहासिक महत्व और चुनौतियां
    • स्वतंत्रता के बाद इसकी प्रमुखता घटी, लेकिन यह भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्धि को दर्शाता है।​
    • रायगढ़ को "छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक नगरी" कहा जाता है, जहां गणेश पूजा के दौरान कथक प्रदर्शन होते हैं।​
    • आधुनिक समय में संरक्षण की चुनौतियां हैं, फिर भी यह कथक की विविधता को जीवित रखे हुए है।​

39. बोरगीत किस भारतीय शास्त्रीय नृत्य शैली से संबंधित है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (IV-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सत्रिया
Solution:
  • 'बोरगीत' सत्रिया शास्त्रीय नृत्य शैली से संबंधित है। यह असम के भक्ति संगीत की एक शैली है, जो भगवान कृष्ण की स्तुति के लिए बनाई गई है।
  • सत्त्रिया नृत्य का परिचय
    • सत्त्रिया नृत्य असम राज्य से उत्पन्न भारत की आठ मान्यता प्राप्त शास्त्रीय नृत्य शैलियों में से एक है।
    • इसे 15वीं शताब्दी में संत-कवि श्रीमंत शंकरदेव ने वैष्णव भक्ति आंदोलन के हिस्से के रूप में विकसित किया था
    • जो असम के सत्रों (मठों) में प्रदर्शित होता था। यह नृत्य मुख्य रूप से भगवान कृष्ण की लीला और भक्ति रस पर केंद्रित है, जिसमें नृत्य, संगीत और अभिनय का समन्वय होता है।
  • बोरगीत क्या है?
    • बोरगीत असमिया शब्द "बोर" (महान) और "गीत" (गीत) से बना है, जो शंकरदेव और उनके शिष्य माधवदेव द्वारा रचित भक्ति गीत हैं।
    • ये ब्रजभाषा में लिखे गए हैं और शास्त्रीय रागों पर आधारित होते हैं, जो कृष्ण की स्तुति करते हैं।
    • सत्त्रिया प्रदर्शन में बोरगीत संगीत का आधार प्रदान करता है, जो नृत्य को आध्यात्मिक गहराई देता है।
  • बोरगीत का सत्त्रिया में उपयोग
    • सत्त्रिया नृत्य में बोरगीत के साथ लयबद्ध गतियां, हस्तमुद्राएं और भावाभिनय किया जाता है।
    • यह नृत्य दो मुख्य मुद्राओं—त्रिभंग (शरीर के तीन भागों में वक्रता) और चौक (चौकोर स्थिति)—पर आधारित है।
    • बोरगीत प्रदर्शन को और समृद्ध करते हैं खोल (दो मुख वाला ढोल), मंजीरा, झांझ, बांसुरी, वायलिन और हारमोनियम जैसे वाद्ययंत्र।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • शंकरदेव ने बोरगीत को अंकिया नाट (भक्ति नाटक) के साथ जोड़ा, जो सत्त्रिया को धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से मजबूत बनाता है।
    • 2000 में सत्त्रिया को शास्त्रीय नृत्य का दर्जा मिला।
    • प्रमुख कलाकारों में मोनिराम दत्ता और मुक्तियार बारबन जैसे नाम शामिल हैं। यह पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक धरोहर को दर्शाता है।

40. छऊ लोक नृत्य की कितनी प्रमुख शैलियां हैं? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 3
Solution:
  • छउ लोक नृत्य की 'तीन' प्रमुख शैलियां हैं। इनकी तीन अलग- अलग शैलियां सरायकेला, पुरुलिया और मयूरभंज के क्षेत्रों से हैं
  • पहले दो सरायकेला व पुरुलिया में मुखौटे का उपयोग किया जाता है, जबकि मयूरभंज शैली में मुखौटे का प्रयोग नहीं किया जाता है।
  • उत्पत्ति और महत्व
    • यह मुख्य रूप से झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के क्षेत्रों में विकसित हुआ, जहां इसे चैत्र पर्व जैसे उत्सवों में प्रदर्शित किया जाता है।
    • नृत्य पुरुष कलाकारों द्वारा किया जाता है, जो रामायण, महाभारत या स्थानीय लोककथाओं की कहानियां मुखौटों और अभिनय के माध्यम से जीवंत करते हैं।
  • सरायकेला छऊ
    • यह शैली झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले से जुड़ी है और गजपति शासनकाल में विकसित हुई।
    • यहां रंग-बिरंगे भव्य मुखौटे पहने जाते हैं, जो पात्रों की भावनाओं को उजागर करते हैं।
    • नृत्य में मार्शल तत्व जैसे युद्ध मुद्राएं प्रमुख हैं, और यह गुरु-शिष्य परंपरा से संचालित होता है।
  • पुरुलिया छऊ
    • पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले का यह रूप बाघमुंडी के भूमिज राजाओं के संरक्षण में फला-फूला। मुखौटे यहां भी महत्वपूर्ण हैं
    • जो चमकीले रंगों और नक्काशी से सजे होते हैं।
    • प्रदर्शन में ढोल, धमसा और खड़का जैसे वाद्ययंत्रों का उपयोग होता है, तथा यह सामुदायिक उत्सवों का अभिन्न हिस्सा है।
  • मयूरभंज छऊ
    • ओडिशा के मयूरभंज क्षेत्र की यह शैली मुखौटों के बिना की जाती है, जहां नर्तक चेहरे के भावों से अभिव्यक्ति देते हैं।
    • यह सबसे प्राचीन रूप माना जाता है और इसमें कोमल मुद्राओं के साथ शक्तिशाली घुमाव प्रमुख हैं। लोक वाद्यों का भरपूर उपयोग होता है, जो नृत्य को जीवंत बनाता है।
  • साझा विशेषताएं
    • तीनों शैलियों में समानताएं हैं जैसे पुरुष नर्तक, लोक वाद्य (ढोल, नागरा, खड़का), और मार्शल कला के तत्व।
    • हालांकि, क्षेत्रीय भिन्नताओं के कारण मुखौटों का उपयोग (सरायकेला और पुरुलिया में हां, मयूरभंज में नहीं) और शैलीगत मुद्राएं अलग हैं।
    • यह नृत्य मुंडा, भूमिज, महतो जैसे समुदायों से जुड़ा है और यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल है।