सुभाष चंद्र बोस और आजाद सिंह फौज (आधुनिक भारतीय इतिहास)

Total Questions: 6

1. 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद, किसने अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की थी? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (III-पाली), MTS (T-I) 12 सितंबर, 2023 (III-पाली), Phase-XI 28 जून, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) सुभाष चंद्र बोस
Solution:
  • वर्ष 1939 में त्रिपुरी संकट के बाद कांग्रेस की अध्यक्षता से त्यागपत्र देने के पश्चात सुभाष चंद्र बोस ने 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की। यह संगठन वामपंथी विचारधारा पर आधारित था।
  •  उन्होंने इसे कांग्रेस के भीतर असंतुष्ट और क्रांतिकारी गुटों को एकजुट करने के लिए बनाया था ताकि स्वतंत्रता संग्राम को नई दिशा मिल सके।
  • कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा
  • अप्रैल 1939 में, कांग्रेस के त्रिपुरी अधिवेशन के दौरान, सुभाष चंद्र बोस को महात्मा गांधी के समर्थकों से तीव्र विरोध का सामना करना पड़ा।
  • इससे वे असहज हो गए और कांग्रेस अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा देने के बाद वे स्वतंत्रता आंदोलन में नई रणनीतियों और क्रांतिकारी विचारों को अपनाने के लिए प्रतिबद्ध हुए।
  • अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना
  • मई-जुलाई 1939 के बीच, बोस ने कांग्रेस के भीतर ही फारवर्ड ब्लॉक की स्थापना की। यह संगठन उन कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए एक मंच था
  • जो गांधी के नरम दल की नीतियों से असहमत थे और जिन्हें स्वराज के लिए तत्काल और क्रांतिकारी कदम उठाने पर जोर था।
  • फॉरवर्ड ब्लॉक का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम को और अधिक सक्रिय, लोकतांत्रिक और राष्ट्रवादी बनाना था।
  • इसका पहला अखिल भारतीय सत्र 22 जून 1939 को बॉम्बे (मुंबई) में हुआ, जिसमें इसका संविधान और कार्यक्रम अपनाया गया।
  • फॉरवर्ड ब्लॉक का महत्व
  • फॉरवर्ड ब्लॉक ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह संगठन ब्रिटिश शासन के खिलाफ एक क्रांतिकारी गुट के रूप में उभरा जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने कई बार प्रतिबंधित भी किया।
  • इसके सदस्य आजाद हिंद फौज के गठन और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान आजादी की लड़ाई में सक्रिय रूप से शामिल रहे।
  • आज भी फॉरवर्ड ब्लॉक भारत के वामपंथी और राष्ट्रवादी राजनीतिक दलों में एक स्थापित पार्टी है।
  • इस प्रकार, 1939 में कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर सुभाष चंद्र बोस ने अखिल भारतीय फॉरवर्ड ब्लॉक की स्थापना की, जिससे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम को एक नई रणनीतिक और क्रांतिकारी दिशा मिली

2. निम्नलिखित में से किस वर्ष में सुभाष चंद्र बोस को भारतीय स्वतंत्रता लीग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) 1943
Solution:
  • सुभाष चंद्र बोस जून, 1943 में टोक्यो पहुंचे उसके बाद रास बिहारी बोस ने सुभाष चंद्र बोस के पक्ष में भारतीय स्वतंत्रता लीग के अध्यक्ष पद से त्यागपत्र दे दिया।
  • उन्हें भारतीय स्वतंत्रता लीग का अध्यक्ष बनाया गया और वे आजाद हिंद फौज के नेता बने।
  • भारतीय स्वतंत्रता लीग एक राजनीतिक संगठन था जिसका गठन भारत के बाहर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को संगठित करने के लिए किया गया था।
  • बोस के नेतृत्व में, भारतीय राष्ट्रीय सेना ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अक्ष शक्तियों के साथ मिलकर ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन से भारत को मुक्त करने के लिए लड़ाई लड़ी।
    Other Information
  • सुभाष चंद्र बोस:
    •  सुभाष चंद्र बोस एक प्रमुख भारतीय राष्ट्रवादी नेता थे जिन्होंने सक्रिय रूप से ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के लिए लड़ाई लड़ी।
    •  स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए बोस का दृष्टिकोण महात्मा गांधी के अहिंसक सविनय अवज्ञा आंदोलन की तुलना में अधिक कट्टरपंथी और उग्रवादी था।
    •  वे अपने प्रसिद्ध नारे "मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा!" के लिए जाने जाते हैं।
    •  बोस के प्रयासों और भारतीय राष्ट्रीय सेना के उनके नेतृत्व ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  •  भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA):
    •  द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान दक्षिण पूर्व एशिया में 1942 में भारतीय राष्ट्रवादियों द्वारा भारतीय राष्ट्रीय सेना का गठन किया   गया था।
    •  यह शुरू में कैप्टन मोहन सिंह द्वारा स्थापित किया गया था, लेकिन बाद में सुभाष चंद्र बोस द्वारा पुनर्गठित और नेतृत्व        किया गया।
    •   जापान और अन्य अक्ष शक्तियों की मदद से भारत में ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने का प्रयास किया।
    •   बर्मा और भारत में INA के अभियान हालांकि अंततः असफल रहे, कई भारतीयों को प्रेरित किया और स्वतंत्रता की        बढ़ती मांग में योगदान दिया।
  •  भारतीय स्वतंत्रता आदोलन:
    •  भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन भारत में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को समाप्त करने के उद्देश्य से गतिविधियों और प्रयासों की एक श्रृंखला थी।
    •  इसमें विभिन्न रणनीतियाँ शामिल थीं, जिनमें अहिंसक विरोध, सविनय अवज्ञा और उग्रवादी अभियान शामिल थे।
    •  आंदोलन में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और कई अन्य नेताओं की भागीदारी देखी गई।
    •  आंदोलन ने अंततः 15 अगस्त, 1947 को भारत को स्वतंत्रता दिलाई।

3. 'टाइगर लीजन' या 'फ्री इंडिया लीजन' के संस्थापक कौन थे? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सुभाष चंद्र बोस
Solution:
  • वर्ष 1942 में सुभाष चंद्र बोस ने, जर्मनी के जनरल इर्विन रोमेल के उत्तरी अफ्रीका अभियान के दौरान पकड़े गए भारतीय युद्धबंदियों को और अन्य भारतीय स्वयंसेवकों को मिलाकर एक दल का गठन किया गया।
  • इसे ही 'द इंडियन लीजन' के नाम से जाना गया। 'द इंडियन लीजन' को ही अन्य नाम 'फ्री इंडियन लीजन' या 'टाइगर लीजन' के नाम से जाना जाता है।
  • 'टाइगर लीजन' या 'फ्री इंडिया लीजन' :-
    •  टाइगर लीजन' या 'फ्री इंडिया लीजन' के संस्थापक सुभाष चंद्र बोस थे।
    • इस सेना का गठन द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान धुरी राष्ट्रों की सहायता से भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराने के उद्देश्य से किया गया था।
    • इस सेना में दक्षिण पूर्व एशिया में जापानी सेना द्वारा पकड़े गए भारतीय युद्ध कैदी और जर्मनी में निर्वासित भारतीय नागरिक शामिल थे।
    • इस सेना को भारतीय सेना और आज़ाद हिंद फौज के नाम से भी जाना जाता था।
  • सुभाष चंद्र बोस :-
    • उन्हें नेता जी के नाम से भी जाना जाता है।
    • वह भारत में ब्रिटिश शासन के विरोधी एक भारतीय राष्ट्रवादी थे।
    • सशस्त्र प्रतिरोध के समर्थक, वह 1930 और 1940 के दशक में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक अग्रणी व्यक्ति बन गए।
      Other Information
  • विनायक दामोदर सावरकर :-
    • वह एक प्रमुख भारतीय स्वतंत्रता कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ थे।
  •  सोहन सिंह भाखना :-
    •  वह एक सिख राजनीतिक और धार्मिक नेता थे, जिन्होंने गदर आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
  • लाला हरदयाल :-
    •  वह एक क्रांतिकारी और लेखक थे, जिन्होंने गदर पार्टी की स्थापना की थी।

4. भारत के निम्नलिखित स्वतंत्रता सेनानियों में से किसने वर्ष 1943 में भारतीय राष्ट्रीय सेना 'आजाद हिंद फौज' (जिसे 1942 में रास बिहारी बोस और कैप्टन-जनरल मोहन सिंह ने बनाया था) को पुनर्जीवित किया? [MTS (T-I) 06 जुलाई, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) सुभाष चंद्र बोस
Solution:
  • सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1943 में भारतीय राष्ट्रीय सेना 'आजाद हिंद फौज' (जिसे 1942 में रास बिहारी बोस और कैप्टन-जनरल मोहन सिंह ने बनाया था) को पुनर्जीवित किया।
  • 4 जुलाई, 1943 को रास बिहारी बोस ने आजाद हिंद फौज की कमान सुभाष चंद्र बोस को सौंप दी।
  • 21 अक्टूबर, 1943 को सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में स्वतंत्र भारत की अस्थायी सरकार (आजाद हिंद सरकार) का गठन किया था।
  • इस सेना की स्थापना मूल रूप से वर्ष 1942 में कैप्टन मोहन सिंह और रास बिहारी बोस ने की थी, परंतु मोहन सिंह के नेतृत्व में यह सेना अधिक सक्रिय और संगठित नहीं रह सकी।
  • जब सुभाष चंद्र बोस ने दक्षिण पूर्व एशिया में पहुंच कर इसका नेतृत्व संभाला, तब उन्होंने इसे पूरी तरह से पुनः संगठित किया और इसे एक प्रभावशाली राष्ट्रवादी शक्ति के रूप में स्थापित किया।
  •  उन्होंने 'दिल्ली चलो!' और 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' जैसे प्रसिद्ध नारे दिए, जो आज भी स्वतंत्रता संग्राम के प्रतीक हैं।
  • बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज ने ब्रिटिश सरकार के खिलाफ युद्ध किया और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा की।
  • कैप्टन मोहन सिंह ने 1942 में इस सेना की स्थापना की थी, जब उन्होंने जापान के साथ मिलकर भारतीय बंदी सैनिकों को एकजुट करके सेना का प्रारंभ किया था।
  • लेकिन मोहन सिंह की कमजोर नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक दिक्कतों के कारण सेना विफल होने की कगार पर पहुंच गई थी।
  • इसके बाद सुभाष चंद्र बोस ने 1943 में इस सेना को पुनर्जीवित कर उसकी वास्तविक क्षमता को जगाया और इसे स्वतंत्रता संग्राम की एक प्रभावशाली शक्ति बनाया।
  • सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज ने दक्षिण पूर्व एशिया में ब्रिटिश और कामनवेल्थ सेनाओं के खिलाफ युद्ध की और भारत की आजादी के लिए संघर्ष किया।
  • उनकी यह सेना जापानी सेना के सहयोग से काम कर रही थी, लेकिन उसका उद्देश्य केवल जापान के लिए लड़ना नहीं था
  • बल्कि भारत को ब्रिटिश शासन से मुक्त कराना था।
  • इस प्रकार, भारतीय राष्ट्रीय सेना 'आजाद हिंद फौज' का पुनर्गठन और पुनर्जीवन वर्ष 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा किया गया था
  • जो कि स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। यह पुनर्जीवन सेना को नई ऊर्जा, संगठनात्मक सशक्तता और राष्ट्रीय उद्देश्य प्रदान करने वाला था

5. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सुभाष चंद्र बोस द्वारा उद्धृत किया गया था? [CGL (T-I) 21 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।
Solution:
  • सुभाष चंद्र बोस द्वारा उद्धृत किया गया था-तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।
  •  यह नारा 1944 में भारतीय राष्ट्रीय सेना के सदस्यों को दिया गया था और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बोस की क्रांतिकारी भावनाओं को दर्शाता है।
  • इस कथन का उद्देश्य था भारतवासियों में देशभक्ति और स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने का जज़्बा जगाना।
  • इसके अलावा, बोस के कई प्रेरणादायक और राष्ट्रीय चेतना जगाने वाले विचार भी प्रसिद्ध हैं, जैसे कि संघर्ष के बिना जीवन का आधा स्वाद खत्म हो जाता है
  • सफलता असफलता के स्तंभ पर खड़ी होती है, और जो अपनी ताकत पर भरोसा करते हैं
  • वे आगे बढ़ते हैं। ये कथन युवाओं और स्वतंत्रता सेनानियों को हिम्मत और प्रेरणा देते रहे हैं।
  • बोस के उद्धृत अन्य प्रेरक कथन इस प्रकार हैं:
    • "अगर जीवन में संघर्ष न रहे, किसी भी भय का सामना न करना पड़े, तो जीवन का आधा स्वाद ही समाप्त हो जाता है।"
    • "सफलता हमेशा असफलता के स्तंभ पर खड़ी होती है, इसलिए किसी को भी असफलता से घबराना नहीं चाहिए।"
    • "शाश्वत नियम याद रखें- यदि आप कुछ पाना चाहते हैं, तो आपको कुछ देना होगा।"
    • "अगर कभी झुकने की नौबत आए तो वीरों की तरह झुको।"
    • सुभाष चंद्र बोस के ये विचार देशभक्ति, आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत के महत्व को बखूबी दर्शाते हैं और आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
    • उनकी यह सोच भारत की आजादी की लड़ाई में एक प्रबल प्रेरक शक्ति थी और उन्होंने देश के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया।
    • इस प्रकार, यदि किसी कथन का सीधे तौर पर उल्लेख किया जाए जो बोस से जोड़ा जाता है,
    • तो वह होगा "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा," जो उनके क्रांतिकारी दृष्टिकोण का सार है और स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रभावशाली नारे में से एक है.

6. निम्नलिखित में से किस स्वतंत्रता सेनानी ने प्रसिद्ध नारा "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" दिया था? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 8 मार्च, 2014 (II-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 दिसंबर, 2020 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) सुभाष चंद्र बोस
Solution:
  • सुभाष चंद्र बोस द्वारा उद्धृत किया गया था-तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।
  • "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" नारा प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस ने दिया था।
  • यह नारा 1944 में उन्होंने बर्मा (म्यांमार) में भारतीय राष्ट्रीय सेना के सदस्यों को संबोधित करते हुए दिया था
  • इस वक्तव्य का उद्देश्य था देश के युवाओं में देशभक्ति का जज़्बा और अपने प्राणों की आहुति देकर आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने की प्रेरणा देना।
  • यह नारा आज भी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रेरक और क्रांतिकारी नारे के रूप में जाना जाता है।
  • जो जापान के सहयोग से अंग्रेजों से लड़ने के लिए स्थापित की गई थी। इस सेना के कारण आजादी की लड़ाई में एक नया जोश और शक्ति आई। बोस का मानना था
  • स्वतंत्रता के लिए बलिदान आवश्यक है और इसी भावना को जगाने के लिए उन्होंने वह युद्ध नारा दिया था।
  • इसके अलावा, बोस ने जय हिन्द' का नारा भी दिया, जो राष्ट्रीयता और देशभक्ति के प्रतीक बन गया।
  • सुभाष चंद्र बोस का यह नारा न केवल आजादी की लड़ाई के दौरान लोगों को प्रोत्साहित करता था, बल्कि आज भी युवाओं में देशभक्ति की भावना को जागृत करता है।
  • उनका यह संदेश है कि देश की आजादी के लिए अगर कोई अपना खून दे सकता है
  • तो देश भी उसे स्वतंत्रता और सम्मान देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आजादी के लिए अपने जीवन का बलिदान किया और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका अनमोल रही।
  • इस प्रकार, "तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा" नारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम से जुड़ा हुआ है
  • जो भारत के एक महान क्रांतिकारी और स्वतंत्रता सेनानी थे.​​