अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी Part – III

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21. जेट हवाई यान नीचे के स्ट्रेटोस्फियर में बड़ी सरलता और आसानी से उड़ता है। इसकी क्या निर्दिष्ट व्याख्या हो सकती है? [I.A.S. (Pre) 2011 U.P.P.C.S. (Mains) 2013]

(i) नीचे के स्ट्रेटोस्फियर में बादल और पानी की वाष्प नहीं होती है।

(ii) नीचे के स्ट्रेटोस्फियर में लंब रूपी (Vertical) हवाएं नहीं होती है।

उक्त व्याख्या में कौन सही है/है?

Correct Answer: (c) (i) एवं (i) दोनों
Solution:

कथन (i): निचले समताप मंडल (स्ट्रेटोस्फियर) में वायुमंडलीय अशांति (turbulences) कम होती है क्योंकि यहाँ बादल और जलवाष्प (जो मौसम संबंधी घटनाओं का कारण बनते हैं) लगभग नगण्य होते हैं। इससे उड़ान बहुत smoother हो जाती है।

कथन (ii): निचले समताप मंडल में ऊर्ध्वाधर हवाएँ (vertical winds) या एयर करेंट (air currents) भी बहुत कम होती हैं। क्षोभमंडल (troposphere) के विपरीत, जहाँ संवहन धाराएँ (convection currents) और तीव्र ऊर्ध्वाधर गति होती है, समताप मंडल में हवाएँ मुख्य रूप से क्षैतिज रूप से चलती हैं। यह स्थिरता भी जेट विमानों के लिए सुगम उड़ान में सहायक होती है।

22. किस सिद्धांत पर जेट इंजन कार्य करता है? [U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2013]

Correct Answer: (a) रैखिक संवेग संरक्षण
Solution:

जेट इंजन न्यूटन के गति के तीसरे नियम और रैखिक संवेग संरक्षण (conservation of linear momentum) के सिद्धांत पर कार्य करता है। जेट इंजन बड़ी मात्रा में गर्म गैसों को पीछे की ओर उच्च वेग से बाहर निकालता है। इस निष्कासित गैस के पीछे की ओर संवेग के कारण, इंजन पर आगे की ओर एक बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया बल (thrust) उत्पन्न होता है, जो विमान को आगे बढ़ाता है।

23. निम्नलिखित सिद्धांत पर रकिट कार्य करता है- [U.P.P.C.S. (Mains) 2014 U.P.R.O/A.R.O. (Mains) 2021]

Correct Answer: (c) संवेग संरक्षण
Solution:रॉकेट के ऊपर जाने का सिद्धांत, संवेग संरक्षण पर आधारित है। रॉकेट से गैसे अत्यधिक वेग से पीछे की ओर निकलती है. जो रॉकेट के ऊपर उठने के लिए आवश्यक संवेग प्रदान करती है। संवेग संरक्षण नियम के अनुसार-एक वस्तु में जितना संवेग परिवर्तन होता है, दूसरी में उतना ही संवेग परिवर्तन विपरीत दिशा में हो जाता है।

24. स्ट्रैटेलाइट होता है- [U.P.R.O/A.R.O. (Pre) 2016]

Correct Answer: (c) अधिक ऊंचाई पर समतापमंडल में स्थापित वायुपोत
Solution:स्ट्रैटेलाइट अधिक ऊंचाई पर समतापमंडल में स्थापित एक वायुपोत (Airship) है, जो विभिन्न प्रकार के बेतार संचार सिग्नलों को प्रसारित करने हेतु एक स्थायी प्लेटफॉर्म के रूप में कार्य करता है। स्ट्रैटेलाइट सिद्धांततः एक उपग्रह के ही समान है, हालांकि यह किसी कक्षा के बजाए समतापमंडल में स्थापित किया जाता है, जिससे दो-तरफा उच्च गति का डाटा संचार अधिक प्रभावी रूप से संपादित होता है।

25. क्रायोजेनिक ताप से आशय है, उस ताप से जो ..... है। [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003]

Correct Answer: (c)-150°C से कम
Solution:बहुत कम ताप (-150°C से कम) तथा इस ताप पर तत्वों के व्यवहार के अध्ययन को क्रायोजेनिक्स (Cryogenics) कहते हैं

26. न्यून तापमानों (क्रायोजेनिक्स) का अनुप्रयोग होता है- [I.A.S. (Pre) 1999]

Correct Answer: (a) अंतरिक्ष यात्रा शल्यकर्म एवं चुम्बकीय प्रोत्थापन में
Solution:

अंतरिक्ष यात्रा: रॉकेट इंजनों में तरल हाइड्रोजन और तरल ऑक्सीजन जैसे क्रायोजेनिक ईंधन का उपयोग किया जाता है।

शल्यकर्म (सर्जरी): क्रायोसर्जरी (Cryosurgery) एक ऐसी तकनीक है जिसमें ऊतकों को नष्ट करने के लिए अत्यधिक ठंडे तापमान का उपयोग किया जाता है, जैसे कि कुछ प्रकार के कैंसर का इलाज।

चुम्बकीय प्रोत्थापन (Magnetic Levitation - Maglev): मैग्लेव ट्रेनों में अतिचालकता (superconductivity) का उपयोग होता है, जिसके लिए बहुत कम (क्रायोजेनिक) तापमान की आवश्यकता होती है ताकि शून्य विद्युत प्रतिरोध प्राप्त किया जा सके।

27. निम्नतापी इंजनों का अनुप्रयोग होता है- [I.A.S. (Pre) 1995 U.P.P.C.S. (Pre) 2006]

Correct Answer: (c) रॉकेट में प्रौद्योगिकी
Solution:क्रायोजेनिक शब्द ग्रीक भाषा के शब्द क्रायोस से बना है, जिसका अर्थ है हिम-शीत (आइस-कोल्ड) यानी बर्फ की तरह शीतल या निम्न ताप। प्राय शून्य डिग्री सेल्सियस से 150 डिग्री नीचे के ताप को क्रायोजेनिक ताप कहते हैं। 150°C तापमान पर भरे प्रणोदकों का सरलता से ईंधन के रूप में प्रयोग करने वाला इंजन 'क्रायोजेनिक इंजन' कहलाता है। क्रायोजेनिक इंजनों का प्रयोग रॉकेट प्रौद्योगिकी में होता है।

28. निम्नतापी इंजन प्रयोग में लाते हैं- [U.P.P.C.S.(Mains) 2004]

Correct Answer: (b) द्रव ऑक्सीजन ऑक्सीकारक के रूप में तथा द्रव हाइड्रोजन ईंधन के रूप में।
Solution:निम्नतापी या क्रायोजेनिक इंजनों में सामान्यतः द्रव ऑक्सीजन ऑक्सीकारक (Oxidizer) के रूप में तथा द्रव हाइड्रोजन ईंधन (Fuel) के रूप में प्रयुक्त होती है। क्रायोजेनिक इंजन की सहायता से ही जी. एस. एल. वी रॉकेट में प्रयुक्त होने वाले प्रणोदक (ऑक्सीजन और हाइड्रोजन) को न्यून तापमान पर द्रव अवस्था में रखा जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी पर आधारित इंजनों में द्रव प्रणोदकों का प्रयोग किया जाता है। चूंकि द्रव अवस्था में गैसै सघन होती है, इसलिए इसे गैसीय अवल्या की अपेक्षा अधिक सरलता से नियंत्रित किया जा सकता है। निम्नतापी इंजन (क्रायोजेनिक इंजन) का प्रयोग स्पेस शटल में किया जाता है।

29. क्रायोजेनिक इंजन का इस्तेमाल होता है- [U.P. P.C.S. (Pre) 1993]

Correct Answer: (c) स्पेस शटल में
Solution:निम्नतापी या क्रायोजेनिक इंजनों में सामान्यतः द्रव ऑक्सीजन ऑक्सीकारक (Oxidizer) के रूप में तथा द्रव हाइड्रोजन ईंधन (Fuel) के रूप में प्रयुक्त होती है। क्रायोजेनिक इंजन की सहायता से ही जी. एस. एल. वी रॉकेट में प्रयुक्त होने वाले प्रणोदक (ऑक्सीजन और हाइड्रोजन) को न्यून तापमान पर द्रव अवस्था में रखा जाता है। इस प्रकार स्पष्ट है कि क्रायोजेनिक प्रौद्योगिकी पर आधारित इंजनों में द्रव प्रणोदकों का प्रयोग किया जाता है। चूंकि द्रव अवस्था में गैसै सघन होती है, इसलिए इसे गैसीय अवल्या की अपेक्षा अधिक सरलता से नियंत्रित किया जा सकता है। निम्नतापी इंजन (क्रायोजेनिक इंजन) का प्रयोग स्पेस शटल में किया जाता है।

30. निम्नलिखित में से किसको रॉकेट नोदकों के रूप में प्रयोग नहीं किया जाता है? [U.P.P.S.C. (GIC) 2009]

Correct Answer: (d) मिट्टी का तेल
Solution:

द्रव हाइड्रोजन (Liquid Hydrogen): यह एक सामान्य और अत्यधिक कुशल रॉकेट ईंधन है, खासकर क्रायोजेनिक इंजनों में।

द्रव ऑक्सीजन (Liquid Oxygen): यह एक सामान्य ऑक्सीकारक है जो द्रव हाइड्रोजन और अन्य ईंधनों के साथ प्रयोग किया जाता है।

द्रव हाइड्राजीन (Liquid Hydrazine): यह भी एक रॉकेट ईंधन है, जिसका उपयोग अक्सर उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों में प्रणोदक (propellant) के रूप में किया जाता है, खासकर छोटे थ्रस्टर्स के लिए।

मिट्टी का तेल (Kerosene): हालांकि कुछ रॉकेट इंजन (जैसे फाल्कन 9 के मर्लिन इंजन) में रिफाइंड मिट्टी के तेल (जैसे RP-1) का उपयोग ईंधन के रूप में किया जाता है, लेकिन सामान्य "मिट्टी का तेल" सीधे रॉकेट नोदक के रूप में इस्तेमाल नहीं होता है। अन्य तीन विकल्प सीधे और व्यापक रूप से रॉकेट प्रणोदकों के रूप में उपयोग किए जाते हैं, जबकि मिट्टी का तेल (जैसे कि घरों में उपयोग होता है) अपने कच्चे रूप में रॉकेट के लिए उपयुक्त नहीं होता। यदि विशेष रूप से रॉकेट-ग्रेड मिट्टी का तेल (RP-1) का उल्लेख होता, तो वह एक ईंधन होता। लेकिन सामान्य "मिट्टी का तेल" नहीं।