निर्देश:- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (प्रश्न 1 -से 5) के उत्तर दीजिए।
पुराने समय में जो लोग देश की सेवा करना चाहते थे, वे ही राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था। बहुत से लोगों ने आजादी के आन्दोलन में जुड़कर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी, परिवार का सुख त्याग दिया था और यहाँ तक कि अपने प्राणों का मोह तक छोड़ दिया था। कितने ही सच्चे देशभक्त इस आज़ादी की नींव में समा गए और इतिहास में इनका नाम तक नहीं है। आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेतागिरी का लोभ निःसन्देह मनुष्य को पतित बनाता जा रहा है। सारा देश नेतृत्व की अभिलाषा का शिकार होता जा रहा 2 है। भाषण, गर्जन, तिकड़म और छल के झूठे वायदों और धोखे की कसमों से सारा सार्वजनिक वातावरण कोलाहलपूर्ण हो गया है। जहाँ देखो वहीं नेताजी नजर आएँगे। लगता यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अब नेता बनना चाहता है, भले ही उसका कोई अनुगमन करने वाला न हो। देश की सारी सुविधाओं का उपयोग करते हुए ये अपने आप को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझते। विदेश जाकर महँगा इलाज कराते हैं। सत्ता में आने के लिए लम्बे-लम्बे भाषण दिए जाते हैं, गर्जना की जाती है, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे की कसमें खाई जाती हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछाला जाता है। येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। ऐसे राजनेता देश के युवकों को गलत दिशा दिखाते हैं; परन्तु अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। ये अच्छी तरह समझते हैं कि मुफ्त की चीजों के लालच में जनता उनको वोट दे ही देगी। ये कभी नहीं चाहेंगे कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।
Correct Answer: (d) शिक्षित लोग अपने वोट की असली कीमत पहचानते हैं और जाति और धर्म के आधार पर बनाए गए नेताओं के समीकरणों को बिगाड़ देते हैं।
Solution:नेता कभी नहीं चाहते कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें; क्योंकि शिक्षित लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहते हैं तथा वे वोट की असली कीमत पहचानते हैं। वे जाति एवं धर्म के आधार पर तथा मुफ्त की चीजों की लालच पर वोट नहीं करते और नेताओं के समीकरण बिगाड़ देते हैं।