अपठित गद्यांश (अवतरण)/पद्यांश (Part-5)

Total Questions: 48

11. 'समय का सदुपयोग' का क्या अर्थ है? [UPSSSC राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद् परीक्षा, 2018 (II)]

निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश के बाद प्रश्न (1-5) दिए गए हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सबसे उचित उत्तर चुनें।

समय का आदर करना ही उसका सदुपयोग करना है। जो व्यक्ति समय की सही कीमत जान लेता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त कर पाता है। यह धन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। धन खोने पर वापस पाया जा सकता है, परन्तु बीता हुआ समय नहीं लौटाया जा सकता। छात्रों के जीवन में इसका अधिक महत्त्व है। जो छात्र इस उम्र में समय की कद्र करना सीख जाते हैं, वह भविष्य में तरक्की की ऊँचाइयों को छू लेते हैं। चाणक्य, गाँधीजी, अशोक आदि ने समय का सदुपयोग कर अपने पैरों के निशान छोड़ दिए। जीवन का प्रत्येक क्षण भविष्य का निर्माता है। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझ पाते, वे केवल हाथ मलते रह जाते हैं। हम चाहे विश्राम कर लें, परन्तु समय कभी विश्राम नहीं करता। समय के प्रति सजगता मानव जीवन के लिए उपयोगी है। अतः छात्रों को समय की कीमत व पहचानकर इसका सार्थक उपयोग करना चाहिये।

 

Correct Answer: (b) उसे व्यर्थ न करना
Solution:'समय का सदुपयोग' का अर्थ है 'उसे व्यर्थ न करना'।

12. छात्रों के लिए समय का सदुपयोग अधिक आवश्यक क्यों है? [UPSSSC राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद् परीक्षा, 2018 (II)]

निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश के बाद प्रश्न (1-5) दिए गए हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सबसे उचित उत्तर चुनें।

समय का आदर करना ही उसका सदुपयोग करना है। जो व्यक्ति समय की सही कीमत जान लेता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त कर पाता है। यह धन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। धन खोने पर वापस पाया जा सकता है, परन्तु बीता हुआ समय नहीं लौटाया जा सकता। छात्रों के जीवन में इसका अधिक महत्त्व है। जो छात्र इस उम्र में समय की कद्र करना सीख जाते हैं, वह भविष्य में तरक्की की ऊँचाइयों को छू लेते हैं। चाणक्य, गाँधीजी, अशोक आदि ने समय का सदुपयोग कर अपने पैरों के निशान छोड़ दिए। जीवन का प्रत्येक क्षण भविष्य का निर्माता है। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझ पाते, वे केवल हाथ मलते रह जाते हैं। हम चाहे विश्राम कर लें, परन्तु समय कभी विश्राम नहीं करता। समय के प्रति सजगता मानव जीवन के लिए उपयोगी है। अतः छात्रों को समय की कीमत व पहचानकर इसका सार्थक उपयोग करना चाहिये।

 

Correct Answer: (a) जो इसकी महत्ता समझते हैं वह सफल होते हैं।
Solution:छात्रों के लिए समय का सदुपयोग अधिक आवश्यक इसलिए है 'कि जो इसकी महत्ता समझते हैं, वह सफल होते हैं।'

13. समय धन से अधिक महत्त्वपूर्ण क्यों है? [UPSSSC राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद् परीक्षा, 2018 (II)]

निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश के बाद प्रश्न (1-5) दिए गए हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सबसे उचित उत्तर चुनें।

समय का आदर करना ही उसका सदुपयोग करना है। जो व्यक्ति समय की सही कीमत जान लेता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त कर पाता है। यह धन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। धन खोने पर वापस पाया जा सकता है, परन्तु बीता हुआ समय नहीं लौटाया जा सकता। छात्रों के जीवन में इसका अधिक महत्त्व है। जो छात्र इस उम्र में समय की कद्र करना सीख जाते हैं, वह भविष्य में तरक्की की ऊँचाइयों को छू लेते हैं। चाणक्य, गाँधीजी, अशोक आदि ने समय का सदुपयोग कर अपने पैरों के निशान छोड़ दिए। जीवन का प्रत्येक क्षण भविष्य का निर्माता है। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझ पाते, वे केवल हाथ मलते रह जाते हैं। हम चाहे विश्राम कर लें, परन्तु समय कभी विश्राम नहीं करता। समय के प्रति सजगता मानव जीवन के लिए उपयोगी है। अतः छात्रों को समय की कीमत व पहचानकर इसका सार्थक उपयोग करना चाहिये।

 

Correct Answer: (c) धन वापस मिल जायेगा पर समय नहीं।
Solution:समय धन से अधिक महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि धन वापस मिल जाएगा परन्तु समय नहीं।

14. निम्न में से कौन-सा विकल्प सजगता का पर्यायवाची नहीं है? [UPSSSC राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद् परीक्षा, 2018 (II)]

निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश के बाद प्रश्न (1-5) दिए गए हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सबसे उचित उत्तर चुनें।

समय का आदर करना ही उसका सदुपयोग करना है। जो व्यक्ति समय की सही कीमत जान लेता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त कर पाता है। यह धन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। धन खोने पर वापस पाया जा सकता है, परन्तु बीता हुआ समय नहीं लौटाया जा सकता। छात्रों के जीवन में इसका अधिक महत्त्व है। जो छात्र इस उम्र में समय की कद्र करना सीख जाते हैं, वह भविष्य में तरक्की की ऊँचाइयों को छू लेते हैं। चाणक्य, गाँधीजी, अशोक आदि ने समय का सदुपयोग कर अपने पैरों के निशान छोड़ दिए। जीवन का प्रत्येक क्षण भविष्य का निर्माता है। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझ पाते, वे केवल हाथ मलते रह जाते हैं। हम चाहे विश्राम कर लें, परन्तु समय कभी विश्राम नहीं करता। समय के प्रति सजगता मानव जीवन के लिए उपयोगी है। अतः छात्रों को समय की कीमत व पहचानकर इसका सार्थक उपयोग करना चाहिये।

 

Correct Answer: (a) प्रमाद
Solution:'सजगता' का पर्यायवाची 'प्रमाद' नहीं है। सतर्कता, होशियारी तथा चौकन्नापन आदि सजगता के पर्यायवाची हैं।

15. इस अनुच्छेद का सबसे उपयुक्त शीर्षक बताएँ। [UPSSSC राज्य कृषि उत्पादन मण्डी परिषद् परीक्षा, 2018 (II)]

निर्देशः नीचे दिए गए गद्यांश के बाद प्रश्न (1-5) दिए गए हैं। इस गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और चार विकल्पों में से प्रत्येक प्रश्न का सबसे उचित उत्तर चुनें।

समय का आदर करना ही उसका सदुपयोग करना है। जो व्यक्ति समय की सही कीमत जान लेता है, वही जीवन में सफलता प्राप्त कर पाता है। यह धन से भी अधिक महत्त्वपूर्ण है। धन खोने पर वापस पाया जा सकता है, परन्तु बीता हुआ समय नहीं लौटाया जा सकता। छात्रों के जीवन में इसका अधिक महत्त्व है। जो छात्र इस उम्र में समय की कद्र करना सीख जाते हैं, वह भविष्य में तरक्की की ऊँचाइयों को छू लेते हैं। चाणक्य, गाँधीजी, अशोक आदि ने समय का सदुपयोग कर अपने पैरों के निशान छोड़ दिए। जीवन का प्रत्येक क्षण भविष्य का निर्माता है। जो लोग इसके महत्त्व को नहीं समझ पाते, वे केवल हाथ मलते रह जाते हैं। हम चाहे विश्राम कर लें, परन्तु समय कभी विश्राम नहीं करता। समय के प्रति सजगता मानव जीवन के लिए उपयोगी है। अतः छात्रों को समय की कीमत व पहचानकर इसका सार्थक उपयोग करना चाहिये।

 

Correct Answer: (b) छात्र जीवन और समय
Solution:उक्त अनुच्छेद का सबसे उपयुक्त शीर्षक 'छात्र जीवन और समय' है।

16. नेता क्यों नहीं चाहते कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें? सबसे सही तर्कयुक्त उत्तर कौन-सा है? [PET (Exam) 2022]

निर्देश:- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे  गए प्रश्नों (प्रश्न 1 -से 5) के उत्तर दीजिए।

पुराने समय में जो लोग देश की सेवा करना चाहते थे, वे ही राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था। बहुत से लोगों ने आजादी के आन्दोलन में जुड़कर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी, परिवार का सुख त्याग दिया था और यहाँ तक कि अपने प्राणों का मोह तक छोड़ दिया था। कितने ही सच्चे देशभक्त इस आज़ादी की नींव में समा गए और इतिहास में इनका नाम तक नहीं है। आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेतागिरी का लोभ निःसन्देह मनुष्य को पतित बनाता जा रहा है। सारा देश नेतृत्व की अभिलाषा का शिकार होता जा रहा 2 है। भाषण, गर्जन, तिकड़म और छल के झूठे वायदों और धोखे की कसमों से सारा सार्वजनिक वातावरण कोलाहलपूर्ण हो गया है। जहाँ देखो वहीं नेताजी नजर आएँगे। लगता यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अब नेता बनना चाहता है, भले ही उसका कोई अनुगमन करने वाला न हो। देश की सारी सुविधाओं का उपयोग करते हुए ये अपने आप को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझते। विदेश जाकर महँगा इलाज कराते हैं। सत्ता में आने के लिए लम्बे-लम्बे भाषण दिए जाते हैं, गर्जना की जाती है, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे की कसमें खाई जाती हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछाला जाता है। येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। ऐसे राजनेता देश के युवकों को गलत दिशा दिखाते हैं; परन्तु अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। ये अच्छी तरह समझते हैं कि मुफ्त की चीजों के लालच में जनता उनको वोट दे ही देगी। ये कभी नहीं चाहेंगे कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

 

Correct Answer: (d) शिक्षित लोग अपने वोट की असली कीमत पहचानते हैं और जाति और धर्म के आधार पर बनाए गए नेताओं के समीकरणों को बिगाड़ देते हैं।
Solution:नेता कभी नहीं चाहते कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें; क्योंकि शिक्षित लोग अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहते हैं तथा वे वोट की असली कीमत पहचानते हैं। वे जाति एवं धर्म के आधार पर तथा मुफ्त की चीजों की लालच पर वोट नहीं करते और नेताओं के समीकरण बिगाड़ देते हैं।

17. निम्नलिखित में आज़ादी से पूर्व के नेताओं की कौन-सी विशेषता थी, जो आज के नेताओं में दिखाई नहीं पड़ती? सबसे सही तर्कयुक्त उत्तर कौन-सा है? [PET (Exam) 2022]

निर्देश:- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे  गए प्रश्नों (प्रश्न 1 -से 5) के उत्तर दीजिए।

पुराने समय में जो लोग देश की सेवा करना चाहते थे, वे ही राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था। बहुत से लोगों ने आजादी के आन्दोलन में जुड़कर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी, परिवार का सुख त्याग दिया था और यहाँ तक कि अपने प्राणों का मोह तक छोड़ दिया था। कितने ही सच्चे देशभक्त इस आज़ादी की नींव में समा गए और इतिहास में इनका नाम तक नहीं है। आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेतागिरी का लोभ निःसन्देह मनुष्य को पतित बनाता जा रहा है। सारा देश नेतृत्व की अभिलाषा का शिकार होता जा रहा 2 है। भाषण, गर्जन, तिकड़म और छल के झूठे वायदों और धोखे की कसमों से सारा सार्वजनिक वातावरण कोलाहलपूर्ण हो गया है। जहाँ देखो वहीं नेताजी नजर आएँगे। लगता यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अब नेता बनना चाहता है, भले ही उसका कोई अनुगमन करने वाला न हो। देश की सारी सुविधाओं का उपयोग करते हुए ये अपने आप को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझते। विदेश जाकर महँगा इलाज कराते हैं। सत्ता में आने के लिए लम्बे-लम्बे भाषण दिए जाते हैं, गर्जना की जाती है, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे की कसमें खाई जाती हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछाला जाता है। येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। ऐसे राजनेता देश के युवकों को गलत दिशा दिखाते हैं; परन्तु अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। ये अच्छी तरह समझते हैं कि मुफ्त की चीजों के लालच में जनता उनको वोट दे ही देगी। ये कभी नहीं चाहेंगे कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

 

Correct Answer: (d) आज़ादी से पूर्व के नेता देश की सेवा करने के लिए राजनीति में आते थे।
Solution:आज़ादी के पूर्व समय के लोग देश की सेवा करने के लिए राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था।

18. ये नेता येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। नेताओं का गन्तव्य कौन-सा है? सबसे सही तर्कयुक्त उत्तर कौन-सा है? [PET (Exam) 2022]

निर्देश:- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे  गए प्रश्नों (प्रश्न 1 -से 5) के उत्तर दीजिए।

पुराने समय में जो लोग देश की सेवा करना चाहते थे, वे ही राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था। बहुत से लोगों ने आजादी के आन्दोलन में जुड़कर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी, परिवार का सुख त्याग दिया था और यहाँ तक कि अपने प्राणों का मोह तक छोड़ दिया था। कितने ही सच्चे देशभक्त इस आज़ादी की नींव में समा गए और इतिहास में इनका नाम तक नहीं है। आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेतागिरी का लोभ निःसन्देह मनुष्य को पतित बनाता जा रहा है। सारा देश नेतृत्व की अभिलाषा का शिकार होता जा रहा 2 है। भाषण, गर्जन, तिकड़म और छल के झूठे वायदों और धोखे की कसमों से सारा सार्वजनिक वातावरण कोलाहलपूर्ण हो गया है। जहाँ देखो वहीं नेताजी नजर आएँगे। लगता यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अब नेता बनना चाहता है, भले ही उसका कोई अनुगमन करने वाला न हो। देश की सारी सुविधाओं का उपयोग करते हुए ये अपने आप को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझते। विदेश जाकर महँगा इलाज कराते हैं। सत्ता में आने के लिए लम्बे-लम्बे भाषण दिए जाते हैं, गर्जना की जाती है, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे की कसमें खाई जाती हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछाला जाता है। येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। ऐसे राजनेता देश के युवकों को गलत दिशा दिखाते हैं; परन्तु अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। ये अच्छी तरह समझते हैं कि मुफ्त की चीजों के लालच में जनता उनको वोट दे ही देगी। ये कभी नहीं चाहेंगे कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

 

Correct Answer: (b) जनता द्वारा दिए गए वोटों से चुना जाना।
Solution:सत्ता में आने के लिए नेता लम्बे-लम्बे भाषण देते हैं, गर्जना करते हैं, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे करते हैं तथा झूठी कसमें खाते हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछालते हैं। यानि येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग कर अपने गन्तव्य (सत्ता) तक पहुँच जाते हैं। इस गन्तव्य पर, वे जनता द्वारा दिए गए वोटों के द्वारा पहुँचते हैं।

19. अनुच्छेद के आधार पर बताइए कि आजकल के अधिकांश नेतागण वोट पाने के लिए जनता की कौन-सी दुर्बलता का फायदा उठाते हैं? सबसे सही उत्तर कौन-सा है? [PET (Exam) 2022]

निर्देश:- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे  गए प्रश्नों (प्रश्न 1 -से 5) के उत्तर दीजिए।

पुराने समय में जो लोग देश की सेवा करना चाहते थे, वे ही राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था। बहुत से लोगों ने आजादी के आन्दोलन में जुड़कर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी, परिवार का सुख त्याग दिया था और यहाँ तक कि अपने प्राणों का मोह तक छोड़ दिया था। कितने ही सच्चे देशभक्त इस आज़ादी की नींव में समा गए और इतिहास में इनका नाम तक नहीं है। आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेतागिरी का लोभ निःसन्देह मनुष्य को पतित बनाता जा रहा है। सारा देश नेतृत्व की अभिलाषा का शिकार होता जा रहा 2 है। भाषण, गर्जन, तिकड़म और छल के झूठे वायदों और धोखे की कसमों से सारा सार्वजनिक वातावरण कोलाहलपूर्ण हो गया है। जहाँ देखो वहीं नेताजी नजर आएँगे। लगता यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अब नेता बनना चाहता है, भले ही उसका कोई अनुगमन करने वाला न हो। देश की सारी सुविधाओं का उपयोग करते हुए ये अपने आप को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझते। विदेश जाकर महँगा इलाज कराते हैं। सत्ता में आने के लिए लम्बे-लम्बे भाषण दिए जाते हैं, गर्जना की जाती है, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे की कसमें खाई जाती हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछाला जाता है। येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। ऐसे राजनेता देश के युवकों को गलत दिशा दिखाते हैं; परन्तु अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। ये अच्छी तरह समझते हैं कि मुफ्त की चीजों के लालच में जनता उनको वोट दे ही देगी। ये कभी नहीं चाहेंगे कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

 

Correct Answer: (d) चुनाव जीतने के लिए जनता को मुफ्त की चीजें देने का वायदा करते हैं।
Solution:आजकल के अधिकांश नेतागण वोट पाने के लिए जनता की गरीबी एवं बेरोजगारी का फायदा उठाते हैं तथा चुनाव जीतने के लिए जनता को मुफ्त की चीजें देने का वायदा करते हैं।

20. नेता लोग पार्टी क्यों बदलते हैं? सबसे सही तर्कयुक्त उत्तर कौन-सा है? [PET (Exam) 2022]

निर्देश:- निम्नलिखित अनुच्छेद को पढ़कर पूछे  गए प्रश्नों (प्रश्न 1 -से 5) के उत्तर दीजिए।

पुराने समय में जो लोग देश की सेवा करना चाहते थे, वे ही राजनीति में आते थे। वे अपने भविष्य की चिन्ता छोड़कर देश की निःस्वार्थ सेवा में लग जाते थे। आज़ादी की लड़ाई के समय तक लोगों के अन्दर सच्चा देश प्रेम था। बहुत से लोगों ने आजादी के आन्दोलन में जुड़कर सरकारी नौकरी तक छोड़ दी थी, परिवार का सुख त्याग दिया था और यहाँ तक कि अपने प्राणों का मोह तक छोड़ दिया था। कितने ही सच्चे देशभक्त इस आज़ादी की नींव में समा गए और इतिहास में इनका नाम तक नहीं है। आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता पड़ने पर ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं। नेतागिरी का लोभ निःसन्देह मनुष्य को पतित बनाता जा रहा है। सारा देश नेतृत्व की अभिलाषा का शिकार होता जा रहा 2 है। भाषण, गर्जन, तिकड़म और छल के झूठे वायदों और धोखे की कसमों से सारा सार्वजनिक वातावरण कोलाहलपूर्ण हो गया है। जहाँ देखो वहीं नेताजी नजर आएँगे। लगता यह है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अब नेता बनना चाहता है, भले ही उसका कोई अनुगमन करने वाला न हो। देश की सारी सुविधाओं का उपयोग करते हुए ये अपने आप को किसी राजा-महाराजा से कम नहीं समझते। विदेश जाकर महँगा इलाज कराते हैं। सत्ता में आने के लिए लम्बे-लम्बे भाषण दिए जाते हैं, गर्जना की जाती है, तिकड़म और छल के झूठे वायदे और धोखे की कसमें खाई जाती हैं, दूसरी पार्टियों पर कीचड़ उछाला जाता है। येन-केन प्रकारेण साम, दाम, दण्ड और भेद नीतियों का प्रयोग करके अपने गन्तव्य तक पहुँच जाते हैं। ऐसे राजनेता देश के युवकों को गलत दिशा दिखाते हैं; परन्तु अपने बच्चों को विदेश में पढ़ने भेजते हैं। ये अच्छी तरह समझते हैं कि मुफ्त की चीजों के लालच में जनता उनको वोट दे ही देगी। ये कभी नहीं चाहेंगे कि लोग शिक्षित होकर अपने अधिकारों के प्रति जागरूक बनें।

 

Correct Answer: (b) स्वार्थ सिद्धि के लिए पुरानी पार्टी छोड़कर नई पार्टी में आना।
Solution:आज भी हमारे देश में अनगिनत नेता हैं, जो अलग-अलग पार्टी के साथ जुड़े हुए हैं। आवश्यकता एवं स्वार्थ सिद्धि के कारण ये लोग तुरन्त पार्टी बदलकर दूसरी पार्टी में चले जाते हैं।