असहयोग आंदोलन (UPPCS)

Total Questions: 48

31. असहयोग आंदोलन 1920 में प्रारंभ हुआ था। बताइए यह कब समाप्त हुआ? [U.P. P.C.S. (Pre) 1990, M.P.P.C.S. (Pre) 2006]

Correct Answer: (c) 1922
Solution:4 फरवरी, 1922 को गोरखपुर के निकट चौरी-चौरा की घटना हुई थी और गांधीजी ने 12 फरवरी, 1922 को बारदोली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाकर असहयोग आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की थी। चौरी चौरा की घटना के समय गांधीजी गुजरात के बारदोली में सामूहिक सत्याग्रह द्वारा सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ करने की तैयारी कर रहे थे।

32. दिल्ली में 24 फरवरी, 1922 को आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की बैठक में असहयोग आंदोलन वापस लेने के लिए गांधीजी के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव किसने प्रस्तुत किया था? [U.P. P.C.S. (Mains) 2002]

Correct Answer: (d) डॉ. मुंजे
Solution:असहयोग आंदोलन 1 अगस्त, 1920 को प्रारंभ हुआ किंतु 4 फरवरी, 1922 को हुए चौरी-चौरा कांड के कारण महात्मा गांधी ने इसे वापस ले लिया। इसी परिप्रेक्ष्य में 24 फरवरी, 1922 को आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस समिति की दिल्ली में बैठक हुई, जिसमें ऐसी सभी गतिविधियों पर रोक लगा दी गई, जिनसे कानून का उल्लंघन होता है। इसी अधिवेशन में असहयोग आंदोलन वापस लेने के कारण बालाकृष्ण शिवरमन मुंजे के द्वारा गांधी जी के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाया गया।

33. असहयोग आंदोलन के स्थगन-संबंधी घटनाओं का सही क्रम इंगित करें। [40th B.P.S.C. (Pre) 1995]

(i) चौरी-चौरा में पुलिस गोलीकांड

(ii) उग्र भीड़ द्वारा पुलिस थाना को जलाना

(iii) गांधी जी द्वारा आंदोलन का स्थगन

(iv) गांधी जी की गिरफ्तारी

निम्नलिखित कूटों में से अपना उत्तर चुने -

Correct Answer: (a) i, ii, iii एवं iv
Solution:4 फरवरी, 1922 को चौरी-चौरा में कांग्रेस और खिलाफत का एक जुलूस निकला। कुछ पुलिस वालों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, परिणाम स्वरूप जुलूस में शामिल एक जत्थे ने पुलिस पर हमला बोल दिया। पुलिस ने गोली चलाई, फलतः भीड़ उत्तेजित हो गई और पुलिस पर हमला बोल दिया, सिपाही भागकर थाने में घुसे, तो भीड़ ने थाने में आग लगा दी। इस घटना की खबर मिलते ही गांधीजी ने आंदोलन वापस लेने का निर्णय लिया तथा 12 फरवरी, 1922 को असहयोग आंदोलन समाप्त हो गया। आंदोलन की समाप्ति के बाद गांधीजी की स्थिति थोड़ी कमजोर हो गई थी। सरकार ने इस स्थिति का फायदा उठाकर 10 मार्च, 1922 को उन्हें गिरफ्तार कर 6 वर्ष की सजा दी। इस प्रकार विकल्प (a) सही उत्तर है।

34. असहयोग आंदोलन के दौरान बिहार में कृषकों का नेतृत्व किसने किया ? [65th B.P.S.C. (Pre) 2019]

Correct Answer: (a) स्वामी विद्यानंद
Solution:स्वामी विद्यानंद बिहार के किसान नेता थे। असहयोग आंदोलन (1920- 22) के दौरान बिहार में कृषकों का नेतृत्व स्वामी विद्यानंद ने किया, विशेषकर उत्तर बिहार के कई जिलों में खासकर राजा दरभंगा के इलाकों में स्वामी विद्यानंद रैयतों को अपने अधिकार के बारे में सचेत कर रहे थे।

35. बिहार के किस वकील ने असहयोग आंदोलन के समय अपनी लाभप्रद वकालत छोड़ दी थी? [60th to 62nd B.P.S.C. (Pre) 2016]

Correct Answer: (b) राजेंद्र प्रसाद
Solution:प्रश्नगत विकल्पों में से असहयोग आंदोलन के दौरान राजेंद्र प्रसाद द्वारा अपनी लाभप्रद वकालत छोड़ दी गई। इनके भाई महेंद्र प्रसाद द्वारा भी आंदोलन के समर्थन में राय साहब की उपाधि तथा अवैतनिक मजिस्ट्रेट के पद को त्याग दिया गया।

36. निम्नलिखित घटनाओं का सही क्रम नीचे दिए गए कूट से बतलाइए- [U.P. P.C.S. (Pre) 2001]

1. चौरी-चौरा कांड

2. असहयोग आंदोलन का स्थगन

3. बारदोली प्रस्ताव

कूट :

Correct Answer: (c) 1, 3, 2
Solution:प्रश्नगत घटनाओं का सही क्रम-

(i) चौरी-चौरा कांड-4 फरवरी, 1922

(ii) बारदोली प्रस्ताव-12 फरवरी, 1922

(iii) असहयोग आंदोलन का स्थगन-1922 में बारदोली में कांग्रेस की बैठक हुई, जिसमें असहयोग आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया और आंदोलन समाप्त हो गया।

इस प्रकार विकल्प (c) सही उत्तर है।

37. 1923-28 के काल में भारतीय राजनीति में क्रांतिकारी कार्यविधियों की पुनरावृत्ति (Revial) का कारण था- [41st B.P.S.C. (Pre) 1996]

Correct Answer: (b) गांधीजी द्वारा असहयोग आंदोलन का स्थगन
Solution:वर्ष 1922 के बाद असहयोग आंदोलन के स्थगन और देश में किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि के अभाव से बहुत से क्षमतावान राष्ट्रवादी युवाओं का मोहभंग हो गया। ये गांधीजी के नेतृत्व और अहिंसात्मक संघर्ष की राजनीति से भी असंतुष्ट थे। ये रूस, चीन, आयरलैंड, तुर्की, मिस्र आदि में कहीं भी होने वाले क्रांतिकारी आंदोलन और विद्रोह से अनुप्राणित होकर हिंसात्मक माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकने के लिए प्रयासरत थे। इस कारण यह काल भारतीय राजनीति में क्रांतिकारी कार्यविधियों की पुनरावृत्ति का काल माना जाता है।

38. असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों के लिए जलाए जाने पर किसने महात्मा गांधी को लिखा कि 'यह निष्ठुर बर्बादी' है? [U.P. U.D.A./L.D.A. (Pre) 2002, U.P. P.C.S. (Pre) 2003, U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004, U.P. P.C.S. (Mains) 2010]

Correct Answer: (b) रबींद्रनाथ टैगोर
Solution:रबींद्रनाथ टैगोर ने आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन के विपरीत रचनात्मक कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया, जिसके कारण उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के विपरीत गांधीजी को रचनात्मक कार्यक्रम अपनाने की बात अपने पत्र में कही। असहयोग आंदोलन के दौरान रबींद्रनाथ टैगोर ने विदेशी वस्त्रों को जलाए जाने को 'अविवेकी या निष्ठुर बर्बादी' कहा था।

39. निम्नलिखित में से किसने असहयोग आंदोलन के दौरान विदेशी वस्त्रों के जलाए जाने का विरोध किया था? [U.P.P.C.S. (Mains) 2013]

Correct Answer: (a) रबींद्रनाथ टैगोर
Solution:रबींद्रनाथ टैगोर ने आंदोलन एवं विरोध प्रदर्शन के विपरीत रचनात्मक कार्यक्रम को विशेष महत्व प्रदान किया, जिसके कारण उन्होंने विदेशी वस्त्रों की होली जलाने के विपरीत गांधीजी को रचनात्मक कार्यक्रम अपनाने की बात अपने पत्र में कही। असहयोग आंदोलन के दौरान रबींद्रनाथ टैगोर ने विदेशी वस्त्रों को जलाए जाने को 'अविवेकी या निष्ठुर बर्बादी' कहा था।

40. निम्नलिखित संस्थाओं में से कौन असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान स्थापित की गई? [U.P. P.C.S. (Mains) 2005]

1. काशी विद्यापीठ

2. गुजरात विद्यापीठ

3. जामिया मिलिया

4. काशी हिंदू विश्वविद्यालय

कूट :

Correct Answer: (c) केवल 1, 2 तथा 3
Solution:असहयोग आंदोलन (1920-22) के दौरान काशी विद्यापीठ बनारस में वर्ष 1921 में, गुजरात विद्यापीठ अहमदाबाद में वर्ष 1920 में तथा जामिया मिलिया इस्लामिया अलीगढ़ में वर्ष 1920 में, जो बाद में दिल्ली ले जाया गया, स्थापित हुए। मदन मोहन मालवीय ने वर्ष 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना की थी और वर्ष 1919 से वर्ष 1939 तक वे इसके कुलपति बने रहे।