आधुनिक भारत का इतिहास (रेलवे) भाग-II

Total Questions: 50

11. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का लखनऊ अधिवेशन कब हुआ। जिसमें नरम दल (राष्ट्रवादी पार्टी) और गरम दल (उग्र) के भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में संगठित हो गए? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 18.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (4) 1916
Solution:

लखनऊ में दिसंबर 1916 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के बीच लखनऊ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
• अंबिका चरण मजू‌मदार लखनऊ अधिवेशन 1916 के समय भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष थे।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महत्वपूर्ण अधिवेशन (1885-1947)
• पहला अधिवेशन (1885, बंबई): व्योमेश चंद्र बनर्जी (72 प्रतिनिधियों ने भाग लिया)।
• दूसरा अधिवेशन (1886, कलकत्ता): दादाभाई नौरोजी।
• तीसरा अधिवेशन (1887, मद्रास): सैयद बदरुद्दीन तैय्यबजी (पहले मुस्लिम अध्यक्ष)।
• चौथा अधिवेशन (1888, इलाहाबाद): जॉर्ज यूल (पहले अंग्रेज अध्यक्ष)।
• 1896 (कलकत्ता): रहीमतुल्ला सयानी, पहली बार 'वंदे मातरम' गाया गया।
• 1906 (कलकत्ता): दादाभाई नौरोजी (स्वराज का प्रस्ताव)।
• 1907 (सूरत): रासबिहारी घोष (कांग्रेस में पहली फूट-नरम दल और गरम दल)।
• 1911 (कलकत्ता): बिशन नारायण धर, पहली बार 'जन गण मन' गाया गया।
• 1916 (लखनऊ): अंबिका चरण मजूमदार (कांग्रेस-लीग समझौता और नरम-गरम दल का विलय)।
• 1917 (कलकत्ता): एनी बेसेंट (पहली महिला अध्यक्ष)।
• 1920 (नागपुर): सी. विजय राघवाचार्य (असहयोग आंदोलन का प्रस्ताव)।
• 1924 (बेलगाम): महात्मा गांधी (गांधीजी की एकमात्र अध्यक्षता)।
• 1925 (कानपुर): सरोजिनी नायडू (पहली भारतीय महिला अध्यक्ष)।
• 1929 (लाहौर): जवाहरलाल नेहरू (पूर्ण स्वराज का प्रस्ताव)।
• 1931 (कराची): सरदार वल्लभभाई पटेल (मौलिक अधिकारों का प्रस्ताव)।
• 1938 (हरिपुरा): सुभाष चंद्र बोस।
• 1946 (मेरठ): जे.बी. कृपलानी (स्वतंत्रता के समय अध्यक्ष)।

12. आज़ादी की लड़ाई के समय भारत माता का चित्र बनाने के लिए किसे जाना जाता है? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 18.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (2) अवनींद्रनाथ टैगोर
Solution:

• आज़ादी की लड़ाई (स्वदेशी आंदोलन) के समय 1905 में 'भारत माता' का पहला और सबसे प्रसिद्ध चित्र प्रसिद्ध बंगाली कलाकार अवनिंद्रनाथ टैगोर (Abanindranath Tagore) ने बनाया था। इस पेंटिंग में उन्होंने भारत माता को एक देवी के रूप में केसरिया वस्त्र पहने हुए चित्रित किया था, जो भारतीय राष्ट्रवाद का प्रतीक बनी।
• उनके चार हाथों में रुद्राक्ष की माला, श्वेत वस्त्र (कपड़ा), धान की बालियाँ और पांडुलिपि (वेद) थीं, जो भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक समृद्धि का प्रतिनिधित्व करते थे।
• बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय के वर्ष 1882 के उपन्यास आनंद मठ में मातृभूमि, वंदेमातरम का भजन था।

13. वर्ष 1853 में, डलहौजी ने कहाँ के कपास उत्पादक प्रदेशों पर अधिकार कर लिया था? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 18.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (2) बेरार
Solution:

लार्ड डलहौजी ने जिस मुख्य साधन के माध्यम से विलय की अपनी नीति को लागू किया वह थी 'व्यपगत का सिद्धांत'।
• कच्चे कपास की ब्रिटेन की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए, डलहौजी ने वर्ष 1853 में कपास उत्पादक प्रांत बरार को निजाम से छीन लिया।

14. 'आत्मीय सभा' की शुरूआत किसने की? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 18.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (1) राजा राममोहन राय
Solution:

राजा राममोहन राय (1772–1833 (इन्हें 'भारतीय पुनर्जागरण का जनक' भी कहा जाता है) आधुनिक भारत के महान समाज सुधारक और बंगाल नवजागरण के जनक माने जाते हैं। उन्होंने सती प्रथा, बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया तथा स्त्री शिक्षा और विधवा पुनर्विवाह के पक्ष में आवाज़ उठाई। राजा राम मोहन राय ने वर्ष 1815 में 'आत्मीय सभा', वर्ष 1821 में कलकत्ता यूनिटेरियन एसोसिएशन और वर्ष 1828 में ब्रह्म सभा की स्थापना की जो बाद में ब्रह्म समाज बन गई। उनके प्रयासों से 1829 में सती प्रथा का उन्मूलन संभव हुआ।

15. वर्ष 1859-60 में, नील विद्रोह में, बंगाल के किसानों ने ____ फसल उगाने से इंकार कर दिया। [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 19.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (3) इंडिगो (नील)
Solution:

नील विद्रोह (नील बिद्रोहो) बंगाल में 1859-60 में हुआ था और यह किसानों द्वारा ब्रिटिश बागान मालिकों के खिलाफ विद्रोह था, जिन्होंने उन्हें उन शतों के तहत नील उगाने के लिए मजबूर किया था जो किसानों के लिए बहुत प्रतिकूल थे।
• भारतीय नील की यूरोपीय देशों में अत्यधिक मांग थी, मुख्य रूप से नील के पौधे से निकाले गए इसके जीवंत और टिकाऊ नीले रंग के कारण।
• नील की खेती से इंकार कर नौल किसानों ने बंगाल के नादिया जिले में विद्रोह कर दिया।
• नील विद्रोह का नेतृत्व बंगाल के नादिया जिले के उग्र नेताओं विष्णु बिस्वास और दिगंबर बिस्वास ने किया था।

16. ____के वास्को डी गामा ने यूरोप से भारत के लिए नया समुद्री मार्ग खोजा था। [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 19.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (1) पुर्तगाल
Solution:

वास्को डी गामा को केप ऑफ गुड होप के रास्ते पश्चिमी यूरोप से पूर्व की ओर समुद्री मार्ग की खोज करने का श्रेय दिया जाता है।
• 20 मई, 1498 को भारत के पश्चिमी समुद्री तट कोझिकोड (कालीकट), केरल पहुंचे। ।

17. वर्ष 1938 में किसकी अध्यक्षता में राष्ट्रीय योजना समिति की स्थापना की गई थी? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 19.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (3) जवाहरलाल नेहरू
Solution:

राष्ट्रीय योजना समिति (National Planning Committee - NPC) की स्थापना 1938 में कांग्रेस अध्यक्ष सुभाष चंद्र बोस की पहल पर, जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में की गई थी।
• इसका मुख्य उद्देश्य स्वतंत्रता-पूर्व भारत में आर्थिक विकास, औद्योगिकरण, गरीबी उन्मूलन और बेरोजगारी को दूर करने के लिए एक राष्ट्रीय योजना तैयार करना था।
•  17 दिसंबर 1938 को बॉम्बे में आयोजित पहली बैठक के साथ, इस समिति ने भारत की भावी विकास दृष्टि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसने बाद के पंचवर्षीय योजनाओं का आधार रखा।

18. वर्ष 1922-23 में स्वराज पार्टी के पहले अध्यक्ष कौन थे? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 19.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (1) चित्तरंजन दास
Solution:

स्वराज पार्टी की स्थापना 1 जनवरी 1923 को देशबंधु चित्तरंजन दास (अध्यक्ष) और मोतीलाल नेहरू (सचिव) ने कांग्रेस के भीतर की थी। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शासन का विरोध करते हुए विधान परिषदों में प्रवेश कर स्वशासन (स्वराज) प्राप्त करना था। यह असहयोग आंदोलन के स्थगन के बाद एक महत्वपूर्ण राजनैतिक दल बना।

19. निम्नलिखित में से कौन सी संधि प्रथम आंग्ल- मराठा से संबंधित थी? [RRB RPF कांस्टेबल परीक्षा, 19.02.2019 (द्वितीय पाली)]

Correct Answer: (1) सालबाई की संधि
Solution:

सालबाई की संधि, जिसने प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध को समाप्त किया, पर 17 मई 1782 में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मराठों के बीच हस्ताक्षर किए गए।
• इसने एंग्लो-मराठा युद्ध को समाप्त कर दिया, अंग्रेजों और मराठों के बीच यथास्थिति बहाल कर दी गई और कंपनी द्वारा साल्सेट और भरोंच का नियंत्रण बरकरार रखा गया।

• मद्रास की संधि 4 अप्रैल 1769 को मैसूर के हैदर अली और ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी (लॉर्ड हैरी वेरेलस्ट) के बीच हुई एक महत्वपूर्ण संधि थी, जिसने प्रथम एंग्लो-मैसूर युद्ध (1767-69) का अंत किया। इस संधि ने हैदर अली की प्रमुखता को स्थापित किया और अंग्रेजों को अपनी अपमानजनक स्थिति स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा।

• मंगलौर की संधि (Treaty of Mangalore) 11 मार्च, 1784 को ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के बीच हुई थी, जिसने द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध (Second Anglo-Mysore War) का अंत किया और दोनों पक्षों द्वारा कब्जे में लिए गए क्षेत्रों को वापस करने तथा युद्धबंदियों को रिहा करने की शर्त रखी, जिससे दक्षिण भारत में अस्थायी शांति स्थापित हुई और टीपू सुल्तान ने एक भारतीय शासक के रूप में अंग्रेजों के बराबर बैठकर संधि की शर्तों पर बातचीत की।

• पेरिस की संधि (Treaty of Paris) कई संधियों को संदर्भित करती है, जिनमें सबसे प्रमुख 1783 की संधि है जिसने अमेरिकी क्रांति को समाप्त किया और संयुक्त राज्य अमेरिका को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता दी, तथा 1763 की संधि जिसने सात वर्षीय युद्ध (फ्रेंच और भारतीय युद्ध) को समाप्त किया और फ्रांस से कनाडा सहित बड़ी मात्रा में फ्रांसीसी क्षेत्र ब्रिटेन को हस्तांतरित कर दिए।

20. 1912 में सिविल सेवाओं के संबंध में रॉयल कमीशन के गठन के समय वाइसराय कौन था? [RRB NTPC CBT-1 परीक्षा, 30.12.2020 (प्रथम पाली)]

Correct Answer: (3) लॉर्ड हार्डिंग
Solution:

इस कमीशन की नियुक्ति 1912 ई. में उच्च पदों पर, विशेष रूप से इण्डियन सिविल सर्विस में भारतीयों की भर्ती की समस्या पर विचार करने के उद्देश्य से की गई थी।
• लॉर्ड हार्डिंग द्वितीय 1910 से 1916 तक भारत के वायसराय के रूप में कार्य किया।