Solution:राजा राममोहन राय ने 1815 में कलकत्ता में आत्मीय सभा की स्थापना की।
• इन्होंने दार्शनिक विषयों पर चर्चा और परिचर्चा सत्र आयोजित करने तथा स्वतंत्र एवं सामूहिक सोच और सामाजिक सुधार को बढ़ावा देने का काम किया।
• आत्मीय सभा की नींव को कोलकाता में आधुनिक युग की शुरुआत माना जाता है।
• राजा राममोहन राय ने 1828 ई. में कोलकाता में ब्रह्म समाज की स्थापना की। इन्हें भारत में पुनर्जागरण एवं राष्ट्रवाद का जनक माना जाता है।
• प्रार्थना समाज महाराष्ट्र में 31 मार्च 1867 को स्थापित एक प्रमुख सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलन था। डॉ. आत्माराम पांडुरंग द्वारा स्थापित और महादेव गोविंद रानाडे व आर.जी. भंडारकर द्वारा पोषित, इसका उद्देश्य एकश्वरवाद (एक ईश्वर में विश्वास), जाति प्रथा का विरोध, महिला शिक्षा, और विधवा पुनर्विवाह को बढ़ावा देना था। यह आंदोलन महाराष्ट्र के भक्ति संतों से प्रेरित था।
• आर्य समाज 1875 में बंबई (मुंबई) में स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित एक हिंदू सुधारवादी आंदोलन है। इसका मुख्य उद्देश्य वेदों की सर्वोच्चता स्थापित करना, मूर्तिपूजा, अंधविश्वास, और जातिगत भेदभाव का विरोध करना था।
• धर्म सभा 1830 में राधाकांत देव द्वारा कलकत्ता में स्थापित एक रूढ़िवादी हिंदू संगठन था, जिसका मुख्य उद्देश्य सती प्रथा पर प्रतिबंध जैसे ब्रिटिश सामाजिक सुधारों का विरोध करना और पारंपरिक हिंदू रीति-रिवाजों की रक्षा करना था। यह राजा राममोहन राय के ब्रह्म समाज के सुधारवादी विचारों के विरुद्ध एक प्रतिक्रिया थी।