आनुवंशिकता (जीव विज्ञान)

Total Questions: 6

1. केंद्रीय डॉग्मा के लिए सही क्रम चुनें। [CHSL (T-I) 06 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) DNA प्रतिकृति, mRNA प्रतिलेखन, प्रोटीन स्थानांतरण
Solution:
  • फ्रांसिस क्रिक के अनुसार, आनुवंशिक सूचनाओं का एकदिशीय संप्रेषण केंद्रीय डॉग्मा कहलाता है।
  • यह संप्रेषण DNA प्रतिकृति, mRNA प्रतिलेखन तथा प्रोटीन स्थानांतरण के अनुक्रम में होता है।
  • केंद्रीय डॉग्मा का मूल सिद्धांत
    • केंद्रीय डॉग्मा यह बताता है कि आनुवंशिक सूचना का प्रवाह एक दिशा में होता है
    • पहले DNA में, फिर RNA में, और अंत में प्रोटीन में।​
    • इसे संक्षेप में ऐसे लिखा जाता है
    • DNA → RNA → Protein, जहाँ हर तीर एक विशिष्ट जैव-रासायनिक प्रक्रिया को दर्शाता है।​
  • सही क्रम: चरणवार
  • DNA प्रतिकृति
    • DNA से ही DNA की दूसरी प्रति बनती है
    • ताकि कोशिका विभाजन के समय प्रत्येक नई कोशिका को पूरा जीनोम मिल सके।​
    • यह चरण आनुवंशिक सामग्री की सटीक कॉपी सुनिश्चित करता है
    • जिसे DNA polymerase जैसे एंजाइम catalyse करते हैं।​
  • ट्रांस्क्रिप्शन
    • किसी जीन के DNA अनुक्रम की जानकारी को mRNA में कॉपी किया जाता है; इसे ही ट्रांस्क्रिप्शन कहते हैं।​
    • मुख्य उपचरण: Initiation (प्रारम्भ), Elongation (विस्तार) और Termination (समापन), जिनमें RNA  प्रमोटर से बाइन्ड होकर RNA स्ट्रैंड बनाता है।​
  • ट्रांसलेशन
    • mRNA पर उपस्थित कोडॉन क्रम को पढ़कर राइबोसोम और tRNA की मदद से अमीनो अम्लों की श्रृंखला (पॉलीपेप्टाइड/प्रोटीन) का निर्माण होता है।​
    • यहाँ 4-लेटर न्यूक्लियोटाइड भाषा को 20-लेटर अमीनो अम्ल भाषा में ‘अनुवादित’ किया जाता है
    • जिससे विशिष्ट प्रोटीन बनता है।​
  • प्रवाह को ऐसे याद रखें
    • सामान्य वाक्य: “DNA बनाता है RNA, और RNA बनाता है प्रोटीन” – यही केंद्रीय डॉग्मा है।​
    • अधिक विस्तार से क्रम:
    • DNA (जानकारी का भंडार) → DNA प्रतिकृति
    • DNA → mRNA (ट्रांस्क्रिप्शन)
    • mRNA → प्रोटीन (ट्रांसलेशन)​
  • अपवाद और आधुनिक दृष्टि
    • क्लासिकल केंद्रीय डॉग्मा एकदिशीय प्रवाह दिखाता है
    • लेकिन कुछ अपवाद जैसे रेट्रोवायरस में RNA से DNA (Reverse transcription) भी पाया जाता है।​
    • फिर भी परीक्षा के दृष्टिकोण से केंद्रीय डॉग्मा के सही क्रम के रूप में प्राय
    • DNA प्रतिकृति → ट्रांस्क्रिप्शन → ट्रांसलेशन ही पूछा और माना जाता है।​

2. पॉलीसोम के राइबोसोम की क्या भूमिका होती है? [CHSL (T-I) 03 जून, 2022 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) mRNA का प्रोटीन में रूपांतरण करने में मदद करना
Solution:
  • पॉलीसोम (Polysome) या पॉलीराइबोसोम
    • यह एक mRNA अणु से जुड़े कई राइबोसोम की एक श्रृंखला होती है।
    • एक पॉलीसोम पर कई राइबोसोम एक ही mRNA अणु का एक साथ अनुवाद करते हैं
    • जिससे एक ही समय में प्रोटीन की कई प्रतियां बन पाती हैं।
  • राइबोसोम (Ribosomes)
    • कोशिका के वे अंगक हैं
    • जो प्रोटीन संश्लेषण जिसे स्थानांतरण / Translation कहा जाता है के लिए जिम्मेदार होते हैं।
    • वे mRNA पर मौजूद आनुवंशिक कोड को पढ़ते हैं और अमीनो एसिड को जोड़कर प्रोटीन बनाते हैं।
    • इसलिए, पॉलीसोम के राइबोसोम की मुख्य भूमिका mRNA का प्रोटीन में रूपांतरण करने में मदद करना है
  • पॉलीसोम क्या है?
    • पॉलीसोम, जिसे पॉलीराइबोसोम भी कहा जाता है, एक ऐसी संरचना है
    • जिसमें एक ही मैसेंजर RNA (mRNA) अणु पर कई राइबोसोम बंधे होते हैं।
    • ये राइबोसोम mRNA के कोडिंग भाग पर एक साथ चलते हैं
    • विभिन्न स्थानों पर प्रोटीन संश्लेषण (अनुवाद) करते हैं।
    • इससे एक mRNA से कई प्रतियां बनने वाली प्रोटीन कॉपी बनाई जा सकती हैं, जो कोशिका की ऊर्जा बचाता है।​
  • राइबोसोम की संरचना
    • राइबोसोम दो मुख्य उपयूनिट से बने होते हैं: छोटी उपयूनिट (जो mRNA को पढ़ती है
    • बड़ी उपयूनिट (जो अमीनो एसिड जोड़कर पॉलीपेप्टाइड बनाती है
    • प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में 70S राइबोसोम (30S + 50S) और यूकेरियोटिक में 80S (40S + 60S) पाए जाते हैं।
    • पॉलीसोम में ये राइबोसोम mRNA से जुड़कर डबल-रो या 3D संरचना बनाते हैं।​
  • प्रोटीन संश्लेषण में भूमिका
    • पॉलीसोम के राइबोसोम mRNA के कोडॉन को पढ़ते हैं, tRNA द्वारा लाए गए अमीनो एसिड को पेप्टाइड बंधों से जोड़ते हैं।
    • प्रक्रिया में इनिशिएशन, इलॉन्गेशन और टर्मिनेशन चरण होते हैं
    • जहां कई राइबोसोम समानांतर रूप से काम करते हैं। इससे कोशिका तेजी से प्रोटीन बना पाती है
    • जैसे विकास या तनाव की स्थिति में।​
  • प्रकार और स्थान
    • मुक्त पॉलीसोम: कोशिकाद्रव्य में, साइटोप्लाज्मिक प्रोटीन बनाते हैं।
    • बद्ध पॉलीसोम: एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER) पर, स्रावी या झिल्ली प्रोटीन बनाते हैं।
    • प्रोकैरियोटिक में डबल-पंक्ति, यूकेरियोटिक में घनी 3D संरचना होती है।​
  • महत्वपूर्ण लाभ
    • पॉलीसोम प्रोटीन उत्पादन को तेज और कुशल बनाते हैं
    • जीन अभिव्यक्ति को नियंत्रित करते हैं।
    • पॉलीसोमल प्रोफाइलिंग जैसी तकनीकें इनकी गतिविधि मापकर अनुवाद दर का अध्ययन करती हैं।
    • कोशिका वृद्धि, मरम्मत और प्रतिकृति के लिए ये आवश्यक हैं।​

3. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल भारत में व्यावसायिक खेती के लिए स्वीकृत एकमात्र आनुवंशिकतः रूपांतरित (GM) फसल है? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) बीटी कपास
Solution:
  • बीटी कपास एकमात्र आनुवंशिक रूप से रूपांतरित (GM) फसल है
  • जिसकी भारत में व्यावसायिक रूप से खेती की जा सकती है।
  • आनुवंशिक रूप से संशोधित फसलें कृषि में उपयोग किए जाने वाले पौधे हैं
  • जिनमें से DNA को आनुवंशिकी इंजीनियरिंग विधियों का उपयोग करके संशोधित किया गया है।
  • भारत में इसका उपयोग पहली बार वर्ष 2002 में किया गया था
  • स्वीकृति का इतिहास
    • जो कपास के प्रमुख कीट बॉलवर्म (bollworm) के खिलाफ प्राकृतिक विष (टॉक्सिन) उत्पन्न करती है।
    • 2026 तक, भारत में GM फसलों के मामले में बीटी कपास ही एकमात्र ऐसी फसल बनी हुई है
    • जिसकी व्यावसायिक खेती व्यापक रूप से जारी है
    • जबकि अन्य GM फसलों जैसे बीटी बैंगन को 2009 में मंजूरी के बाद 2010 में सुरक्षा चिंताओं के कारण रद्द कर दिया गया।​
  • तकनीकी विवरण
    • बीटी कपास में क्राय (cry) जीन डाला जाता है, जो कीट के पाचन तंत्र को नष्ट करने वाला प्रोटीन बनाता है
    • जिससे कीटनाशकों की आवश्यकता 30-50% तक कम हो जाती है।
    • भारत कपास उत्पादन में विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है, और बीटी कपास ने 2002 से उत्पादकता में वृद्धि की है
    • कपास क्षेत्रफल 2002 के 1.6 करोड़ हेक्टेयर से बढ़कर 2025 तक लगभग 1.2 करोड़ हेक्टेयर हो गया
    • जिसमें 95% से अधिक बीटी किस्में हैं। हालांकि, गैर-खाद्य फसल होने के कारण इसे प्राथमिकता मिली
    • जबकि GM खाद्य फसलों (जैसे GM सरसों या GM चावल) को अभी तक व्यावसायिक मंजूरी नहीं मिली है।​
  • विनियमन प्रक्रिया
    • भारत में GM फसलों का नियमन जेनेटिक इंजीनियरिंग एप्रेजल कमिटी (GEAC) द्वारा किया जाता है
    • जो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत कार्य करती है।
    • GEAC ने बीटी कपास को सीमित क्षेत्र परीक्षण (confined field trials) के बाद व्यावसायिक रिलीज की अनुमति दी।
    • अन्य प्रस्तावित GM फसलें जैसे हर्बिसाइड-टॉलरेंट (HT) कपास या GM धान अभी परीक्षण चरण में हैं
    • लेकिन पर्यावरण, स्वास्थ्य और जैव-सुरक्षा संबंधी चिंताओं के कारण पूर्ण मंजूरी लंबित है।​
  • लाभ और विवाद
    • बीटी कपास ने किसानों की आय बढ़ाई, कीटनाशक उपयोग घटाया और निर्यात को बढ़ावा दिया
    • भारत अब कपास निर्यातक बन गया है। फिर भी, विवाद बने हुए हैं
    • कीट-प्रतिरोध विकसित होना, गैर-लक्षित प्रभाव, जैव-विविधता हानि और कॉर्पोरेट निर्भरता (मुख्यतः Monsanto जैसे कंपनियों
    • सुप्रीम कोर्ट ने 2013 में HT बीटी कपास पर रोक लगाई थी, लेकिन 2024 तक स्थिति यथावत है।​
  • वर्तमान स्थिति (जनवरी 2026)
    • 2025-26 में भी बीटी कपास ही एकमात्र व्यावसायिक GM फसल है
    • हालांकि GM सरसों (DMH-11) पर निर्णय लंबित है।
    • लगभग 20 GM फसलों के सीमित परीक्षण चल रहे हैं, लेकिन कोई नई व्यावसायिक मंजूरी नहीं।​

4. जो हिन जिओ नाम के एक अमेरिकी कोशिका-आनुवंशिकी विज्ञानी ने किस वर्ष में एक शोध प्रकाशित किया था, जिसमें 2n = 46 को मानव गुणसूत्रों की सटीक संख्या के रूप में परिभाषित किया गया था? [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) 1956
Solution:
  • मानव कोशिकाओं में गुणसूत्रों की सटीक संख्या 46 (या 2n = 46) होती है
  • जिसमें 22 जोड़ी ऑटोसोम और एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र (XX या XY) शामिल होते हैं।
  • इससे पहले, यह व्यापक रूप से माना जाता था कि मनुष्यों में 48 गुणसूत्र होते हैं।
  • यह खोज मानव आनुवंशिकी और साइटोजेनेटिक्स के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर थी।
  • शोध का विवरण
    • यह खोज जो हिन तजियो और उनके सहयोगी अल्बर्ट लीवान (Albert Levan) ने की थी।
    • इससे पहले 1923 से मानव गुणसूत्रों की संख्या को 48 माना जाता था
    • लेकिन बेहतर तकनीकों जैसे कोल्चिसिन का उपयोग करके मेटाफेज़ में गुणसूत्रों का स्पष्ट अध्ययन संभव हुआ।
    • उनका पेपर स्वीडन के लुंड विश्वविद्यालय से जुड़ा था और Hereditas पत्रिका में प्रकाशित हुआ।​
  • महत्वपूर्ण तथ्य
    • गुणसूत्र संरचना: 22 जोड़े समजात (ऑटोसोमल) गुणसूत्र और 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (XX या XY)।​
    • तकनीकी योगदान: कोल्चिसिन ने कोशिका विभाजन को मध्यावस्था में रोका, जिससे गुणसूत्रों की गिनती आसान हुई।​
    • प्रभाव: इस खोज ने आनुवंशिकी, आनुवंशिक रोगों (जैसे डाउन सिंड्रोम) की समझ को क्रांतिकारी रूप दिया।​

5. सभी मनुष्यों की कोशिकाओं के केंद्रक में गुणसूत्रों के ....... जोड़े होते हैं। [MTS (T-I) 19 जून, 2023 (I-पाली), CHSL (T-I) 29 जनवरी, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 23
Solution:
  • अधिकांश सामान्य मानव कोशिकाओं के केंद्रक में गुणसूत्रों के 23 जोड़े होते हैं, जिससे कुल 46 गुणसूत्र बनते हैं।
  • इनमें से 22 जोड़े अलिंगसूत्र (autosomes) होते हैं (जो लैंगिक लक्षणों के अलावा अन्य लक्षणों को नियंत्रित करते हैं)।
  • एक जोड़ी लिंग गुणसूत्र (sex chromosomes) होते हैं
  • जो व्यक्ति के लिंग को निर्धारित करते हैं (महिलाओं में XX और पुरुषों में XY)।
  • यह 1956 में जो हिन जिओ और अल्बर्ट लेवन द्वारा स्थापित सटीक संख्या है।
  • गुणसूत्रों की कुल संख्या
    • मानव कोशिकाओं के केंद्रक में कुल 46 गुणसूत्र मौजूद होते हैं
    • जो 23 जोड़ों में व्यवस्थित रहते हैं। इनमें 22 जोड़े स्वायत्त गुणसूत्र (ऑटोसोम) होते हैं
    • जो शरीर के सभी कार्यों को नियंत्रित करते हैं
    • जबकि 1 जोड़ा लिंग गुणसूत्र (महिलाओं में XX और पुरुषों में XY) लिंग निर्धारण करता है।
    • प्रत्येक जोड़े का एक गुणसूत्र माता से और दूसरा पिता से प्राप्त होता है, जो आनुवंशिक विविधता सुनिश्चित करता है।​
  • गुणसूत्रों की संरचना
    • गुणसूत्र डीएनए (डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) से बने धागानुमा ढांचे होते हैं
    • जो हिस्टोन प्रोटीनों के चारों ओर कसकर लिपटे रहते हैं।
    • कोशिका विभाजन (माइटोसिस या मियोसिस) के दौरान ये स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं
    • अन्यथा क्रोमैटिन के रूप में संघनित रहते हैं। प्रत्येक गुणसूत्र के अंत में टेलोमियर होते हैं
    • जो डीएनए को क्षति से बचाते हैं, और मध्य में सेंट्रोमियर होता है जो विभाजन में सहायक होता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • कायिक कोशिकाओं में: सभी शरीरिक कोशिकाओं (जैसे त्वचा, मांसपेशी) में डिप्लॉइड (2n=46) गुणसूत्र होते हैं।
    • कणिकीय कोशिकाओं में: शुक्राणु और अंडाणु में केवल आधे (n=23) गुणसूत्र होते हैं।
    • असामान्यताएं: गुणसूत्र संख्या में बदलाव (जैसे डाउन सिंड्रोम में 47 गुणसूत्र) आनुवंशिक विकार पैदा कर सकता है।
    • ये गुणसूत्र जीनों के वाहक होते हैं, जो शरीर के विकास, कार्य और वंशानुगति को नियंत्रित करते हैं।​
  • उत्पत्ति और खोज
    • गुणसूत्र शब्द ग्रीक "क्रोमा" (रंग) और "सोमा" (शरीर) से आया है
    • क्योंकि ये विशेष रंगों से आसानी से रंग जाते हैं।
    • इन्हें पहली बार 1842 में कार्ल वॉन नेगेली ने पौधों में देखा।
    • मानव गुणसूत्रों की सटीक गिनती 1956 में जो एक्सप्लोरेशन द्वारा निर्धारित हुई।​

6. मेंडल को ....... के रूप में जाना जाता है। [CHSL (T-I) 15 जनवरी, 2017 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) जेनेटिक्स के जनक
Solution:
  • मेंडल का जीवन परिचय
    • ग्रेगर जोहान मेंडल का जन्म 22 जुलाई 1822 को ऑस्ट्रिया के हेंडेनरेज़ गांव में एक किसान परिवार में हुआ था।
    • वे एक ऑगस्टिनियन भिक्षु, जीवविज्ञानी, गणितज्ञ और मौसम वैज्ञानिक थे
    • जो ब्रून (वर्तमान चेक गणराज्य) के सेंट थॉमस ऐब्बे में मठाधीश भी बने।
    • 6 जनवरी 1884 को उनका निधन हो गया, लेकिन उनके कार्य की सराहना उनके जीवनकाल में कम ही हुई।​
  • प्रमुख योगदान: मेंडल के नियम
    • मेंडल ने 1856 से 1863 के बीच लगभग 28,000 मटर के पौधों पर प्रयोग किए।
    • उन्होंने सात लक्षण चुने—बीज का रंग, आकार, फली का रंग, आकार, फूल की स्थिति, तने की ऊंचाई और फूल का रंग।
    • इनसे उन्होंने दो मुख्य नियम प्रतिपादित किए:
    • पृथक्करण का नियम (Law of Segregation): प्रत्येक लक्षण के लिए दो एलील (कारक) होते हैं
    • जो युग्मक बनाते समय अलग हो जाते हैं।
    • उदाहरण: ऊंचे (TT) और बौने (tt) पौधे के संकरण से पहली पीढ़ी (F1) सब ऊंची होती है
    • लेकिन दूसरी पीढ़ी (F2) में 3:1 अनुपात (ऊंचे:बौने) मिलता है।​
    • स्वतंत्र अपव्यूहण का नियम: विभिन्न लक्षणों के एलील युग्मक बनाते समय स्वतंत्र रूप से वितरित होते हैं।
    • द्विसंकर संकरण में 9:3:3:1 अनुपात प्राप्त होता है।​
  • प्रयोगों की विधि
    • मेंडल ने आत्मपरागण (self-pollination) को रोकने के लिए मटर के फूलों के नर भाग हटाए और नियंत्रित परागण किया।
    • उन्होंने शुद्ध रेखा (pure breeding lines) से शुरू किया
    • जैसे हमेशा गोल बीज वाले पौधे।
    • परिणामों का गणितीय विश्लेषण किया, जो संभाव्यता पर आधारित था।​
  • प्रभाव और विरासत
    • मेंडल के सिद्धांत 1865-66 में प्रस्तुत हुए
    • लेकिन 1900 में ह्यूगो डी व्रीज़, कार्ल कोरेंज़ और एरिक टशर्माल्क ने इन्हें पुनःखोजा।
    • ये नियम पौधों, जंतुओं और मनुष्यों पर लागू होते हैं
    • जिससे फसल सुधार, पशुपालन और आनुवंशिकी में क्रांति आई।
    • अपवाद जैसे लिंकेज बाद में मिले, लेकिन मेंडलवाद आज भी मौलिक है।​