आयोजना (पंचवर्षीय योजना) (अर्थव्यवस्था)Total Questions: 4311. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के संदर्भ में सही कथन की पहचान करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)](i) प्रथम पंचवर्षीय योजना में कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।(ii) दूसरी पंचवर्षीय योजना में उद्योग को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई।(a) (i) और (ii) दोनों(b) न तो (i) और न ही (ii)(c) केवल (ii)(d) केवल (i)Correct Answer: (a) (i) और (ii) दोनोंSolution:प्रथम पंचवर्षीय योजना वर्ष 1951 से 1956 की अवधि के लिए थी। इस योजना में कृषि को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गईजबकि दूसरी पंचवर्षीय योजना वर्ष 1956 से 1961 की अवधि के लिए थी।इस योजना का मुख्य उद्देश्य बुनियादी और भारी उद्योगों के विकास पर विशेष जोर देने के साथ-साथ तेजी से औद्योगीकरण था।पंचवर्षीय योजनाओं का परिचयजिसका उद्देश्य कृषि, सिंचाई और ऊर्जा क्षेत्रों पर जोर देना था।कुल 12 योजनाओं में तीन वार्षिक योजनाएँ (1966-1969) भी शामिल हैं, जिन्हें गैर-योजना अवधि कहा जाता है।समाप्ति और उत्तराधिकारी2014 में योजना आयोग भंग हो गया और 1 जनवरी 2015 को नीति आयोग की स्थापना हुई।बारहवीं योजना 2017 में समाप्त हुई, उसके बाद पंचवर्षीय योजनाएँ बंद कर दी गईं।अब नीति आयोग 'रणनीतिक विकास लक्ष्य' (3 वर्षीय कार्य योजना, 7 वर्षीय रणनीति) पर काम करता है।उपलब्धियाँ और चुनौतियाँइन योजनाओं ने औसतन 6% वार्षिक विकास दर हासिल की, गरीबी को 50% से घटाकर 20% तक कम किया।हालांकि, कुछ योजनाएँ (जैसे तीसरी) युद्धों और सूखे के कारण असफल रहीं।कुल मिलाकर, इन्होंने भारत को आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाने में योगदान दिया।12. औद्योगीकरण की दिशा में दूसरी पंचवर्षीय योजना का प्रमुख दृष्टिकोण क्या था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)](a) महंगाई को नियंत्रित करने के लिए जन उपभोग की वस्तुओं पर जोर(b) ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए कुटीर उद्योग का विस्तार(c) शहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों के सृजन के लिए बुनियादी ढांचे पर जोर(d) भारी उद्योग का आधार बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तारCorrect Answer: (d) भारी उद्योग का आधार बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तारSolution:दूसरी पंचवर्षीय योजना का मुख्य उद्देश्य बुनियादी और भारी उद्योगों के विकास पर विशेष जोर देने के साथ-साथ तेजी से औद्योगीकरण करना था।अर्थात इसका दृष्टिकोण भारी उद्योग का आधार बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार था।योजना का समयकालयह योजना 1 अप्रैल 1956 से 31 मार्च 1961 तक चली। प्रथम योजना के विपरीत, जहां कृषि पर फोकस थाइसने औद्योगिक आधार मजबूत करने को प्राथमिकता दी।योजना का कुल व्यय 48 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया, जिसमें भारी उद्योगों को सर्वोच्च प्राथमिकता मिली।महालनोबिस मॉडलप्रशांत चंद्र महालनोबिस द्वारा विकसित यह मॉडल रूसी (सोवियत) औद्योगीकरण पर आधारित था।इसमें पूंजीगत वस्तुओं (मशीनरी, इस्पात) के उत्पादन पर निवेश को प्राथमिकता दी गई ताकि दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित हो।मॉडल ने उत्पादक क्षेत्रों में संतुलित निवेश पर बल दिया, जिसमें भारी उद्योग पहले आते थे।प्रमुख उद्देश्यराष्ट्रीय आय में 25% कुल वृद्धि (प्रतिवर्ष 5%) लक्ष्य रखा गया।भारी उद्योगों जैसे इस्पात, कोयला, बिजली और मशीनरी का तेजी से विकास।आत्मनिर्भरता बढ़ाना, आयात कम करना और रोजगार सृजन।छोटे एवं घरेलू उद्योगों का समर्थन, लेकिन भारी उद्योग मुख्य फोकस।औद्योगिक नीतियांऔद्योगिक नीति संकल्प 1956 लॉन्च किया गयाजिसमें उद्योगों को तीन क्षेत्रों में बांटा: सार्वजनिक (भारी उद्योग), मिश्रित और निजी।भिलाई (रूस सहायता), राउरकेला (जर्मनी) और दुर्गापुर (ब्रिटेन) में इस्पात संयंत्र स्थापित हुए।पनबिजली परियोजनाएं, कोयला उत्पादन वृद्धि और रेलवे विस्तार प्रमुख उपलब्धियां रहीं।उपलब्धियां व चुनौतियांयोजना 96% लक्ष्य हासिल कर 4.27% वार्षिक विकास दर प्राप्त की।औद्योगिक उत्पादन 31% बढ़ा, लेकिन कृषि उपेक्षित रही जिससे खाद्यान्न संकट बढ़ा।मुद्रास्फीति नियंत्रण और संतुलन की कमी चुनौतियां बनीं। फिर भीइसने भारत को औद्योगिक अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया।13. परिवार-नियोजन कार्यक्रम किस पंचवर्षीय योजना में प्रारंभ किया गया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली), दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)](a) चौथी पंचवर्षीय योजना(b) दूसरी पंचवर्षीय योजना(c) सातवीं पंचवर्षीय योजना(d) पांचवीं पंचवर्षीय योजनाCorrect Answer: (a) चौथी पंचवर्षीय योजनाSolution:वर्ष 1952 में राष्ट्रीय परिवार नियोजन कार्यक्रम शुरू किया गया थाहालांकि चौथी पंचवर्षीय योजना के दौरान ही इस कार्यक्रम के कार्यान्वयन को सबसे अधिक महत्व दिया गया था।इस कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में जनसंख्या वृद्धि को कम करना था।कार्यक्रम का प्रारंभपहली पंचवर्षीय योजना में परिवार नियोजन को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ा गया।भारत ने स्वतंत्रता के तीसरे वर्ष ही जनसंख्या नियंत्रण को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाया।चौथी योजना में प्रमुखताचौथी पंचवर्षीय योजना (1969-1974) में परिवार नियोजन को प्रमुख राष्ट्रीय उद्देश्य के रूप में स्थापित किया गया।इस दौरान आधुनिक गर्भनिरोधक विधियों, संस्था-आधारित कार्यक्रमों और 15-44 वर्ष आयु वर्ग के 60% दंपत्तियों के बंध्यकरण का लक्ष्य रखा गया।जनसंख्या स्थिरीकरण को आर्थिक विकास से जोड़ा गया।उद्देश्य और विकासकार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य छोटे परिवार अपनाना, अंतराल विधि का प्रचार और गर्भनिरोधकों की उपलब्धता सुनिश्चित करना था।बाद की योजनाओं जैसे सातवीं में अंतर-जन्म अंतराल पर जोर दिया गयाजबकि 1977 में इसे परिवार कल्याण कार्यक्रम नाम दिया गया।राष्ट्रीय जनसंख्या नीति 2000 ने इसे स्वैच्छिक और सूचित विकल्पों पर आधारित बनाया।उपलब्धियाँ और चुनौतियाँइस कार्यक्रम ने जन्म दर को कम कियालेकिन शुरुआती दशकों में जबरन बंध्यकरण जैसी विवादास्पद नीतियों का सामना करना पड़ा।वर्तमान में यह प्रजनन स्वास्थ्य, शिक्षा और महिला सशक्तिकरण पर केंद्रित है2045 तक जनसंख्या स्थिरीकरण का लक्ष्य रखते हुए।14. निम्नलिखित में से कौन-सा पंचवर्षीय योजनाओं में औद्योगिक विकास पर बल देने का कारण नहीं था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) उद्योग समग्र समृद्धि को बढ़ावा देता है(b) उद्योग को उच्च निवेश की आवश्यकता नहीं है(c) उद्योग आधुनिकीकरण को बढ़ावा देता है(d) उद्योग कृषि की तुलना में अधिक स्थिर रोजगार प्रदान करता हैCorrect Answer: (b) उद्योग को उच्च निवेश की आवश्यकता नहीं हैSolution:भारत की पंचवर्षीय योजनाओं में औद्योगिक विकास पर बल देने का कारण यह थास्वतंत्रता के बाद देश के विकास की शुरुआत में औद्योगीकरण की अहम भूमिका थी।इसमें उद्योग समग्र समृद्धि को बढ़ावा, उद्योग आधुनिकीकरण को बढ़ावा, उद्योग कृषि की तुलना में अधिक स्थिर रोजगार आदि के विकास पर बल देने के कारणों में शामिल था।इसके कारणों में उद्योग को उच्च निवेश की आवश्यकता शामिल नहीं था।पहली पंचवर्षीय योजना का फोकसपहली योजना हर로드-डोमर मॉडल पर आधारित थी और इसका उद्देश्य खाद्य संकट से निपटना था।इसमें कुल व्यय का लगभग 44% हिस्सा कृषि और सिंचाई पर खर्च किया गयाजबकि उद्योगों को केवल 18% आवंटन मिला।भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी जैसी परियोजनाएँ शुरू हुईं, लेकिन भारी उद्योगों पर जोर नहीं दिया गया।यह योजना औद्योगिक विकास का कारण नहीं थी।अन्य योजनाओं में औद्योगिक जोरदूसरी योजना (1956-61) ने महालनोबिस मॉडल के तहत भारी उद्योगों (इस्पात, कोयला, मशीनरी) पर प्रमुख बल दियाजिसमें भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर स्टील प्लांट स्थापित हुए।तीसरी योजना (1961-66) ने कृषि के साथ उद्योगों को संतुलित प्राथमिकता दी।चौथी से आगे की योजनाएँ (जैसे छठी, सातवीं, आठवीं) ने उत्पादकता, रोजगार और प्रौद्योगिकी के माध्यम से औद्योगिक वृद्धि पर निरंतर ध्यान केंद्रित किया।कारण क्यों औद्योगिक विकास पर जोर दिया गयाऔद्योगिक विकास के पीछे मुख्य कारण थे: (1) सोवियत मॉडल से प्रेरणा, जो पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन पर आधारित था(2) आत्मनिर्भरता और आयात निर्भरता कम करना; (3) लंबी अवधि की आर्थिक वृद्धि के लिए मजबूत आधार बनाना।हालांकि, पहली योजना में कृषि प्रधान देश की वास्तविकता के कारण उद्योगों को स्थगित किया गया।विकल्पों का विश्लेषण (सामान्यतः पूछे जाने वाले)यदि विकल्प हैं जैसे: (a) दूसरी योजना, (b) तीसरी योजना, (c) पहली योजना, (d) चौथी योजनातो सही उत्तर पहली पंचवर्षीय योजना हैक्योंकि यह औद्योगिक विकास पर बल देने का कारण नहीं थी।बाकी योजनाएँ स्पष्ट रूप से औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देती रहीं।15. पंचवर्षीय योजनाओं के वित्तपोषण के संदर्भ में सार्वजनिक क्षेत्र के मुकाबले निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध वित्त के स्रोतों में कौन-सा शामिल नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) इक्विटी पूंजी के रूप में विदेशी फंड(b) व्यक्तियों की बचत(c) सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान(d) करCorrect Answer: (d) करSolution:पंचवर्षीय योजनाओं के वित्तपोषण के संदर्भ में सार्वजनिक क्षेत्र के मुकाबले निजी क्षेत्र के लिए उपलब्ध वित्त के स्रोतों में 'कर' को शामिल नहीं किया गया थाजबकि सार्वजनिक क्षेत्र के वित्तीय संस्थान, व्यक्तियों की बचत, इक्विटी पूंजी के रूप में विदेशी फंड आदि को शामिल किया गया था। जबकि सार्वजनिक क्षेत्र के स्रोतों में कर राजस्व, उधार, घाटे का वित्तपोषण और बजटीय सहायता प्रमुख हैं।निजी क्षेत्र के लिए कराधान (taxation) शामिल नहीं हैक्योंकि यह सरकार का प्राथमिक राजस्व स्रोत है जो सार्वजनिक क्षेत्र की योजनाओं के लिए उपयोग किया जाता है।सार्वजनिक क्षेत्र के वित्त स्रोतसार्वजनिक क्षेत्र की पंचवर्षीय योजनाओं का वित्तपोषण मुख्यतः सकल बजटीय सहायताराजस्व (आयकर, उत्पाद शुल्क, केंद्रीय उत्पादन शुल्क आदि), सार्वजनिक उधार (सरकारी बांड और ट्रेजरी बिल)घाटे का वित्तपोषण (बैंकों से उधार या मुद्रा स्फीति) से होता था।योजना आयोग के दस्तावेजों के अनुसार, पहली से लेकर ग्यारहवीं योजना तक सार्वजनिक क्षेत्र पर व्यय का सबसे बड़ा हिस्सा कराधान और उधार से आता रहा।उदाहरणस्वरूप, दूसरी पंचवर्षीय योजना में सार्वजनिक क्षेत्र के लिए लगभग 48% संसाधन घरेलू बचत (कर सहित) से जुटाए गए।निजी क्षेत्र के वित्त स्रोतनिजी क्षेत्र पंचवर्षीय योजनाओं में सहायक भूमिका निभाता थाइसलिए इसके वित्त स्रोत स्वाभाविक और बाजार आधारित थे। इनमें शामिल थे:स्व-वित्तपोषण: कंपनियों के संचित लाभ और मूल्यह्रास भत्ते।पूंजी बाजार: शेयर बाजार से इक्विटी पूंजी और डिबेंचर से ऋण।बैंकिंग ऋण: वाणिज्यिक बैंकों से टर्म लोन।विदेशी सहायता: कुछ मामलों में विदेशी मुद्रा ऋण या इक्विटी।दूसरी पंचवर्षीय योजना के अनुमानों के अनुसार, निजी क्षेत्र के औद्योगिक विकास के लिए संसाधन मुख्यतः इन स्रोतों से जुटाए गएबिना सरकारी कर निर्भरता के।कराधान क्यों नहीं है निजी क्षेत्र का स्रोत?कराधान सरकार का विशेषाधिकार है, जो सार्वजनिक व्यय के लिए राजस्व उत्पन्न करता है।निजी क्षेत्र कर चुकाता है, लेकिन वह उसका वित्त स्रोत नहीं बनाता—बल्कि कर सरकार को जाता हैजो सार्वजनिक योजनाओं (जैसे बुनियादी ढांचा) के लिए उपयोग करती है।योजना आयोग की रिपोर्टों में स्पष्ट है कि निजी क्षेत्र के निवेश का वित्तपोषण "घरेलू निजी बचत" से आता थायदि कर को निजी स्रोत माना जाए, तो यह मिश्रित अर्थव्यवस्था के सिद्धांत (सार्वजनिक-निजी साझेदारी) का उल्लंघन होगा।16. बारहवीं योजना निम्नलिखित में से किस वर्ष में पूरी हुई थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) 2014(b) 2017(c) 2015(d) 2016Correct Answer: (b) 2017Solution:भारत सरकार की 12वीं पंचवर्षीय योजना (वर्ष 2012-17) भारत की अंतिम पंचवर्षीय योजना थीजो वर्ष 2017 में पूरी हुई। इस योजना के तहत विकास दर का लक्ष्य 8% था।योजना की समयावधिवित्तीय वर्ष के आधार पर भारतीय योजनाएं हमेशा अप्रैल से मार्च तक चलती थींइसलिए 2017 का अर्थ वित्तीय वर्ष 2016-17 का समापन है।यह योजना मनमोहन सिंह सरकार के अंतिम वर्षों और नरेंद्र मोदी सरकार के प्रारंभिक दौर में कार्यान्वित हुई।समाप्ति का कारण2014 में योजना आयोग भंग होने और नीति आयोग की स्थापना के बाद पंचवर्षीय योजनाओं का दौर समाप्त हो गया।बारहवीं योजना को अंतिम योजना के रूप में चुना गया ताकि संक्रमण सुचारू रहे।मार्च 2017 में इसका औपचारिक समापन हुआजिसके बाद भारत ने लंबी अवधि की योजनाओं के बजाय NITI आयोग के माध्यम से 3-वर्षीय एक्शन प्लान, 7-वर्षीय रणनीति और 15-वर्षीय विजन अपनाया।प्रमुख उद्देश्य और उपलब्धियांविकास दर लक्ष्य: 8% जीडीपी वृद्धि, जो तेज, सतत और समावेशी विकास पर केंद्रित था।क्षेत्रीय फोकस: बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, शिक्षा, स्वास्थ्य, और रोजगार सृजन (50 मिलियन गैर-कृषि नौकरियां)।उपलब्धियां: कुपोषण में कमी, ग्रामीण विद्युतीकरणलैंगिक समानता में प्रगति, हालांकि लक्ष्य से कम विकास दर (लगभग 6-7%) हासिल हुई वैश्विक मंदी के कारण।17. हैरॉड-डोमर विकास मॉडल, बचत और निवेश की भूमिका को प्रमुखता से दर्शाने के लिए जाना जाता है। भारत की कौन-सी पंचवर्षीय योजना इस मॉडल पर आधारित थी ? [CHSL (T-I) 27 जुलाई, 2023 (II-पाली)](a) दूसरी(b) चौथी(c) तीसरी(d) पहलीCorrect Answer: (d) पहलीSolution:पहली पंचवर्षीय योजना 'हैरॉड-डोमर मॉडल' पर आधारित थी।इस योजना का उद्देश्य अर्थव्यवस्था के संतुलित विकास की प्रक्रिया आरंभ करना था।इस योजना में कृषि को उच्च प्राथमिकता दी गई।हैरोड-डोमर मॉडल का सारहैरोड-डोमर मॉडल, जिसे रॉय हैरोड और एव्से डोमर ने 1939-40 के दशक में विकसित कियाआर्थिक वृद्धि को निवेश पर केंद्रित करता है।सूत्र के अनुसार, जहां विकास दर, बचत दर और पूंजी-आउटपुट अनुपात हैमॉडल बताता है कि अधिक बचत और कुशल निवेश से पूंजी संचय बढ़ता हैजो उत्पादन वृद्धि को प्रेरित करता है।भारत जैसे विकासशील देश में, स्वतंत्रता के बाद की अस्थिर अर्थव्यवस्था में यह मॉडल प्रासंगिक थाक्योंकि यह बुनियादी ढांचे और कृषि में निवेश को प्राथमिकता देता था।पहली पंचवर्षीय योजना का आधारपहली योजना ने हैरोड-डोमर के सिद्धांतों को अपनाते हुए कुल व्यय का 44.6% कृषि और सिंचाई पर, 17.8% परिवहन-संचार पर और शेष उद्योग व सामाजिक सेवाओं पर आवंटित किया।लक्ष्य 2.1% वार्षिक राष्ट्रीय आय वृद्धि था, लेकिन वास्तविक उपलब्धि 3.6% रहीजो मॉडल की प्रभावशीलता दर्शाती है।योजना ने भोजन असुरक्षा, शरणार्थी संकट और मुद्रास्फीति का सामना करते हुए अर्थव्यवस्था को स्थिर किया।योजना की प्रमुख विशेषताएंकृषि केंद्रित दृष्टिकोण: भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी जैसी परियोजनाओं से सिंचाई बढ़ाई गईजिससे खाद्यान्न उत्पादन 51 से 65 मिलियन टन पहुंचा।निवेश रणनीति: सार्वजनिक क्षेत्र में 25,690 करोड़ रुपये का निवेशजिसमें निजी क्षेत्र भी सहभागी रहा, पूंजी गठन को बढ़ावा दिया।सामाजिक प्रभाव: साक्षरता और स्वास्थ्य पर ध्यान, जिससे गरीबी उन्मूलन की नींव पड़ी।उपलब्धियां और सीमाएंयोजना सफल रही क्योंकि औद्योगिक उत्पादन 7.2% बढ़ा और बेरोजगारी घटी, लेकिन पूंजी-गहन होने से रोजगार सृजन सीमित रहा।बाद में दूसरी योजना (1956-61) नेहरू-महालनोबिस मॉडल अपनायाजो भारी उद्योगों पर केंद्रित था। कुल मिलाकर, पहली योजना ने नियोजित विकास की अवधारणा को मजबूत किया।18. भारत में आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया किस पंचवर्षीय योजना में प्रारंभ की गई थी ? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (II-पाली)](a) पांचवीं(b) छठी(c) दसवीं(d) आठवींCorrect Answer: (b) छठीSolution:भारत में आर्थिक सुधारों की प्रक्रिया छठी पंचवर्षीय योजना में प्रारंभ की गई थी।छठी पंचवर्षीय योजना की कालावधि वर्ष 1980-85 तक थी।इस पंचवर्षीय योजना में 5.2 प्रतिशत वृद्धि दर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जबकि प्राप्ति 5.7 प्रतिशत की रही।आठवीं योजना का पृष्ठभूमिआठवीं पंचवर्षीय योजना अप्रैल 1990 में शुरू होने वाली थीलेकिन 1991 के भुगतान संतुलन संकट के कारण इसे 1992 में लागू किया गया।योजना का लक्ष्य 5.6% वार्षिक विकास दर था, जो वास्तव में 6.8% तक पहुंच गया।इसमें आर्थिक उदारीकरण, औद्योगिक विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर दिया गयाजिसमें निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ाई गई।प्रमुख आर्थिक सुधारऔद्योगिक लाइसेंस राज का अंत: अधिकांश उद्योगों के लिए लाइसेंस की आवश्यकता समाप्त कर दी गईजिससे निजी उद्यमिता को बढ़ावा मिला।व्यापार नीति में उदारीकरण: आयात शुल्क कम किया गयानिर्यात प्रोत्साहन दिया गया और विदेशी व्यापार को सरल बनाया गया।निजीकरण और विनिवेश: सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में निजी निवेश को अनुमति दी गई और कुछ इकाइयों का विनिवेश शुरू हुआ।विदेशी निवेश को प्रोत्साहन: प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सीमाएं ढीली की गईं, जिससे वैश्विक पूंजी का प्रवाह बढ़ा।पूर्ववर्ती योजनाओं से अंतरपिछली योजनाएं (जैसे सातवीं योजना 1985-1990) मुख्यतः सार्वजनिक क्षेत्र, आयात प्रतिस्थापन और मिश्रित अर्थव्यवस्था पर केंद्रित थीं।छठी योजना (1980-1985) में सीमित उदारीकरण की शुरुआत हुईजैसे मूल्य नियंत्रण हटाना, लेकिन पूर्ण LPG मॉडल आठवीं में ही आया।इससे पहले की योजनाओं में लक्ष्य आत्मनिर्भरता और भारी उद्योग थेजबकि आठवीं ने बाजार सुधारों को प्राथमिकता दी।प्रभाव और उपलब्धियांइन सुधारों ने भारत की GDP वृद्धि को तेज कियामुद्रास्फीति नियंत्रित की और विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाया।रोजगार सृजन, कृषि विविधीकरण, स्वास्थ्य सुविधाएं और बुनियादी ढांचे पर भी ध्यान दिया गया।हालांकि, असमानता बढ़ने जैसी आलोचनाएं भी रहीं, लेकिन यह भारत की आर्थिक उदारीकरण यात्रा का आधार बनी।19. पंचवर्षीय योजनाओं में, 'योजना अवकाश' की अवधि ....... के बीच थी। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (III-पाली)](a) 1974-1979(b) 1969-1974(c) 1961-1966(d) 1966-1969Correct Answer: (d) 1966-1969Solution:भारत में तृतीय पंचवर्षीय योजना (1961-66) और चतुर्थ पंचवर्षीय योजना (1969-74) के बीच की अवधि को योजना अवकाश (1966-69) कहा जाता है।ध्यातव्य है कि योजना अवकाश की अवधि में एकवर्षीय योजनाएं संचालित की गईं।योजना अवकाश का संदर्भ इस दौरान 'योजना अवकाश' (Plan Holiday) घोषित किया गयाजो तीसरी और चौथी योजना के बीच का विराम था। इस अवधि में कोई पंचवर्षीय योजना लागू नहीं हुई।कारणयोजना अवकाश का मुख्य कारण 1962 का भारत-चीन युद्ध, 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध, लगातार सूखा, संसाधनों की कमी, बढ़ती महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन थे।इन संकटों से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई, जिससे लंबी अवधि की योजना बनाने में बाधा आई।तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में सरकार ने अल्पकालिक उपायों पर ध्यान केंद्रित किया।इस दौरान की व्यवस्था1966-67, 1967-68 और 1968-69 के लिए तीन वार्षिक योजनाएँ लागू की गईं।इनमें नई कृषि नीति अपनाई गईजिसमें उच्च उपज वाले बीज, उर्वरक वितरण, सिंचाई विस्तार और मृदा संरक्षण पर जोर दिया गया।इससे खाद्यान्न उत्पादन संकट को टाला गया।अन्य योजना अवकाशमुख्य 'योजना अवकाश' 1966-69 को ही संदर्भित किया जाता हैलेकिन बाद में पाँचवीं योजना (1974-78) के बाद 1978-80 और सातवीं योजना (1985-90) के बाद 1990-92 में भीवार्षिक योजनाओं की अवधि रही। ये पूर्ण 'अवकाश' नहीं थे।प्रभावइस अवकाश ने अर्थव्यवस्था को स्थिर करने में मदद की, लेकिन पंचवर्षीय योजनाओं की निरंतरता प्रभावित हुई।चौथी योजना 1969 से शुरू हुई।कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएँ 2017 तक चलीं, फिर नीति आयोग ने इन्हें बदल दिया।20. प्रधानमंत्री रोजगार योजना किस पंचवर्षीय योजना के दौरान शुरू की गई थी ? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)](a) दसवीं पंचवर्षीय योजना(b) नौवीं पंचवर्षीय योजना(c) सातवीं पंचवर्षीय योजना(d) आठवीं पंचवर्षीय योजनाCorrect Answer: (d) आठवीं पंचवर्षीय योजनाSolution:भारत में आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) में वर्ष 1993 में प्रधानमंत्री रोजगार योजना शुरू की गई थी।योजना का उद्देश्यPMRY का मुख्य लक्ष्य शिक्षित बेरोजगार युवाओं, विशेषकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना था।योजना के तहत विनिर्माण, सेवा क्षेत्र और व्यापार क्षेत्रों में छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए रियायती ऋण और सब्सिडी दी जाती थी।यह योजना केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित थीराज्य स्तर पर जिला उद्योग केंद्रों (DIC) के माध्यम से लागू की जाती थी।पंचवर्षीय योजना का संदर्भभारत की आठवीं पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1992 से 31 मार्च 1997 तक चली।इस योजना की थीम "आर्थिक उदारीकरण और मानव विकास" पर केंद्रित थीजिसमें रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढांचे का विकास प्रमुख था।PMRY को 15 अगस्त 1993 को स्वतंत्रता दिवस पर घोषित किया गया2 अक्टूबर 1993 (गांधी जयंती) से पूरे देश में लागू किया गया।इस प्रकार यह आठवीं योजना के प्रारंभिक वर्ष में ही शुरू हुई।पात्रता मानदंडआयु: 18 से 35 वर्ष (महिलाओं और SC/ST/OBC के लिए छूट)।शिक्षा: न्यूनतम VIII कक्षा उत्तीर्ण।पारिवारिक आय: ग्रामीण क्षेत्रों में 25,000 रुपये वार्षिक से कम, शहरी में 40,000 रुपये से कम।योजना के तहत अधिकतम 1 लाख रुपये तक का ऋण (25% मार्जिन मनी सब्सिडी के रूप में) प्रदान किया जाता था।कार्यान्वयन और उपलब्धियांयोजना का कार्यान्वयन वित्त मंत्रालय के विभाग ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज और खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) के सहयोग से होता था।1993 से 2008 तक चली इस योजना से लाखों युवाओं को लाभ मिला, लेकिन बाद में इसे प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) में विलय कर दिया गया, जो 2008 में शुरू हुआ।आठवीं योजना में रोजगार सृजन पर विशेष जोर दिया गयाजिसमें PMRY के अलावा अन्य योजनाएं जैसे IRDP और TRYSEM भी शामिल थीं।अन्य संबंधित तथ्यआठवीं योजना ने आर्थिक सुधारों (1991 के बाद) को मजबूत कियाजिसमें उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण शामिल थे।योजना ने ग्रामीण युवाओं को उद्यमिता की ओर प्रोत्साहित कियालेकिन चुनौतियां जैसे ऋण वसूली और प्रशिक्षण की कमी रहीं।यह योजना आठवीं पंचवर्षीय योजना की सफल पहल थीजिसने स्वरोजगार को बढ़ावा देकर बेरोजगारी दर को कम करने में योगदान दिया।Submit Quiz« Previous12345Next »