आयोजना (पंचवर्षीय योजना) (अर्थव्यवस्था)Total Questions: 4331. भारत की दूसरी पंचवर्षीय योजना ....... पर केंद्रित थी। [CHSL (T-I) 16 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) प्रत्यक्ष विदेशी निवेश(b) त्वरित औद्योगीकरण(c) अदायगी संतुलन(d) परिवार नियोजन कार्यक्रमCorrect Answer: (b) त्वरित औद्योगीकरणSolution:भारत में दूसरी पंचवर्षीय योजना का मुख्य फोकस त्वरित औद्योगीकरण की प्रक्रिया शुरू करना था।ध्यातव्य है कि इसका कार्यकाल वर्ष 1956 से वर्ष 1961 तक था।मुख्य विशेषताएंइस योजना का कुल बजट लगभग 4,800 करोड़ रुपये था, जो पहली योजना से अधिक था।विकास लक्ष्य 4.5% की वार्षिक वृद्धि दर रखा गया, जो वास्तव में 4.27% रहा। योजना के उपाध्यक्ष वी.टी. कृष्णामाचारी थे।प्राथमिकताएंभारी उद्योगों जैसे इस्पात, लोहा, कोयला और मशीनरी पर विशेष फोकस।सार्वजनिक क्षेत्र में निवेश बढ़ाकर निजी क्षेत्र से कम निर्भरता।बुनियादी ढांचे का विकास, जैसे बांध और ऊर्जा परियोजनाएं।पहली योजना से अंतरपहली योजना कृषि, सिंचाई और बुनियादी ढांचे पर केंद्रित थीजबकि दूसरी ने औद्योगीकरण को प्राथमिकता दी।पहली का बजट 5,467 करोड़ था, लेकिन दूसरी ने उद्योगों को बढ़ावा देकर अर्थव्यवस्था को बदलने का प्रयास किया।उपलब्धियांइस्पात संयंत्र जैसे भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर स्थापित हुए।औद्योगिक उत्पादन बढ़ा और आत्मनिर्भरता की नींव पड़ी।हालांकि, विदेशी मुद्रा संकट और युद्ध के कारण कुछ लक्ष्य अधूरे रहे।प्रभावयह योजना भारत की औद्योगिक अर्थव्यवस्था का मील का पत्थर बनी।इसने लंबे समय तक आर्थिक विकास की दिशा निर्धारित की।32. आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को पहली बार ....... पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया था। [CGL (T-I) 02 दिसंबर, 2022 (II-पाली)](a) तीसरी(b) पांचवीं(c) पहली(d) दूसरीCorrect Answer: (a) तीसरीSolution:आत्मनिर्भरता के उद्देश्य को पहली बार तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-1966) में शामिल किया गया था।इस योजना को गॉडगिल योजना के नाम से भी जाना जाता है।यह योजना भारत में पड़े सूखे और दो युद्धों (वर्ष 1962 का भारत-चीन युद्ध और वर्ष 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध) के कारण प्रभावित हुई थी।तीसरी पंचवर्षीय योजना का परिचयतीसरी पंचवर्षीय योजना भारत की आर्थिक नियोजन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण थीजो 1 अप्रैल 1961 से 31 मार्च 1966 तक चली। इस योजना को "गाडगिल योजना" भी कहा जाता है।इसका मुख्य फोकस अर्थव्यवस्था को स्वावलंबी बनाने पर था, ताकि देश बाहरी सहायता पर निर्भर न रहे।आत्मनिर्भरता का समावेशइस योजना में आत्मनिर्भरता को स्पष्ट रूप से राष्ट्रीय लक्ष्य के रूप में पहली बार शामिल किया गया।योजना के दस्तावेजों में कहा गया कि भारत को न केवल तेजी से विकास करना चाहिएबल्कि स्वयं-उत्पादक बनना चाहिए।1962 के भारत-चीन युद्ध ने इस आवश्यकता को और उजागर कियाजिससे रक्षा और औद्योगिक क्षेत्रों में स्वदेशी उत्पादन पर जोर बढ़ा।प्रमुख उद्देश्य और प्राथमिकताएँकृषि क्षेत्र, विशेष रूप से गेहूँ उत्पादन में वृद्धि पर ध्यान केंद्रित।औद्योगिक क्षमता का विस्तार और बुनियादी ढांचे का विकास।लक्षित विकास दर 5.6% रखी गई, लेकिन वास्तविक विकास दर केवल 2.4% रही।चुनौतियाँ और परिणामयोजना की विफलता के कारण सूखा, युद्ध और आर्थिक दबाव थेजिसके फलस्वरूप 1966-69 तक "योजना अवकाश" घोषित करना पड़ा।फिर भी, इसने आत्मनिर्भरता की अवधारणा को स्थापित कियाजो बाद की योजनाओं (जैसे चौथी और पांचवीं) में आगे विकसित हुई।33. स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता की प्रगतिशील उपलब्धि ....... पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य था। [C.P.O.S.I. (T-I) 09 नवंबर, 2022 (I-पाली)](a) पांचवीं(b) दूसरी(c) तीसरी(d) चौथीCorrect Answer: (d) चौथीSolution:स्थिरता के साथ विकास और आत्मनिर्भरता की प्रगतिशील उपलब्धि चौथी पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य था।चौथी पंचवर्षीय योजनायह योजना भारत की आर्थिक नीतियों में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुईजब देश ने विदेशी सहायता पर निर्भरता कम करने और स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने पर जोर दिया।योजना की पृष्ठभूमिचौथी पंचवर्षीय योजना 1 अप्रैल 1969 से 31 मार्च 1974 तक चलीजो तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के नेतृत्व में लागू हुई।इसकी शुरुआत तब हुई जब भारत ने 1965 के भारत-पाक युद्ध और सूखे जैसी चुनौतियों से उबरने के बाद स्थिर आर्थिक विकास की दिशा में कदम बढ़ाया।योजना का लक्ष्य राष्ट्रीय आय में 5.5% की औसत वार्षिक वृद्धि दर हासिल करना थासाथ ही समाज के कमजोर वर्गों के लिए न्यूनतम आवश्यकताओं का प्रावधान सुनिश्चित करना।प्रमुख उद्देश्यस्थिरता के साथ विकास: मुद्रास्फीति नियंत्रण, मूल्य स्थिरता और संतुलित आर्थिक वृद्धि पर फोकस किया गयाजिसमें कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए गहन कृषि विकास कार्यक्रम शुरू किया गया।आत्मनिर्भरता की प्रगतिशील प्राप्ति: आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution) को प्राथमिकता दी गईताकि भारी उद्योगों, रक्षा और कृषि में स्वदेशी उत्पादन बढ़े तथा विदेशी आयात पर निर्भरता घटे।अन्य लक्ष्य: सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को संगठित करनापिछड़े क्षेत्रों में उद्योग स्थापना और आर्थिक शक्ति के केंद्रीकरण को रोकने के लिए एक्ट लागू करना।क्षेत्रीय प्राथमिकताएंयोजना में कृषि को प्राथमिकता मिली, जहां हरित क्रांति के तहत गेहूं और चावल उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया गया।औद्योगिक विकास के लिए भारी उद्योगों और बुनियादी ढांचे (जैसे स्टील प्लांट्स) को बढ़ावा दिया गयाजबकि सामाजिक न्याय के लिए गरीबी कम करने और रोजगार सृजन पर ध्यान केंद्रित किया गया।उपलब्धियां और चुनौतियांयोजना ने औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि दर्ज की और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रगतिलेकिन 1971 के भारत-पाक युद्ध तथा 1973 के वैश्विक तेल संकट ने वित्तीय बोझ बढ़ाया।वास्तविक विकास दर लक्ष्य से कम रही, फिर भी इसने भारत की आर्थिक नीतियों को आत्मनिर्भरता-केंद्रित बनायाजो बाद की योजनाओं का आधार बनी।कुल मिलाकर, चौथी योजना ने स्थिरता और स्वावलंबन को भारतीय नियोजन का मूलमंत्र स्थापित किया।34. प्रथम पंचवर्षीय योजना में निम्नलिखित में से कौन से क्षेत्र पर मुख्य फोकस था? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)](a) औद्योगिक क्षेत्र(b) सार्वजनिक क्षेत्र(c) सेवा क्षेत्र(d) कृषि क्षेत्रCorrect Answer: (d) कृषि क्षेत्रSolution:प्रश्नगत विकल्पों में, प्रथम पंचवर्षीय योजना के दौरान मुख्य जोर कृषि उत्पादन पर दिया गया था।इस योजना का कार्यकाल 1951-56 तक था। यह पंचवर्षीय योजना हैरॉड-डोमर मॉडल पर आधारित थी।योजना का समयकाल और पृष्ठभूमिभारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 8 दिसंबर 1951 को संसद में इसे प्रस्तुत कियाजबकि गुलजारीलाल नंदा योजना आयोग के पहले उपाध्यक्ष थे।यह योजना हैरोड-डोमर मॉडल पर आधारित थी, जिसका लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 2.1% वार्षिक वृद्धि थालेकिन वास्तविक वृद्धि 3.6% रही। उस समय देश द्वितीय विश्व युद्ध, विभाजन और खाद्यान्न संकट से जूझ रहा थाइसलिए आत्मनिर्भरता पर जोर दिया गया।मुख्य फोकस क्षेत्र: कृषिइस योजना में कुल व्यय का 31% कृषि और सिंचाई पर खर्च किया गयाजो सबसे अधिक था। खाद्य उत्पादन में आत्मनिर्भरता मुख्य उद्देश्य थाक्योंकि खाद्यान्न की कमी गंभीर समस्या थी।बड़ी सिंचाई परियोजनाओं जैसे भाखड़ा नांगल, हीराकुंड, दामोदर घाटी और व्यास परियोजनाओं की शुरुआत हुईजिनसे सिंचाई क्षमता बढ़ी। सामुदायिक विकास कार्यक्रम (1952) भी ग्रामीण कृषि विकास के लिए शुरू हुआ।अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रऊर्जा और उद्योग: पांच इस्पात संयंत्रों (जैसे दुर्गापुर, भिलाई की नींव) की शुरुआत हुई, लेकिन कृषि के बाद प्राथमिकता थी।सामाजिक सेवाएं: शिक्षा, स्वास्थ्य और शरणार्थी पुनर्वास पर ध्यानजिसमें राष्ट्रीय आय 18% और प्रति व्यक्ति आय 11% बढ़ी।लक्ष्य: मुद्रास्फीति नियंत्रण, शरणार्थी पुनर्वास और सर्वांगीण विकास।उपलब्धियां और आलोचनायोजना ने खाद्य उत्पादन बढ़ाया और बुनियादी ढांचे को मजबूत कियालेकिन औद्योगिक विकास सीमित रहा। अर्थशास्त्री के.एन. राज को इसके वास्तुकार कहा जाता है।यह आंशिक रूप से सफल रही, जिसने बाद की योजनाओं के लिए आधार तैयार किया।35. नौवीं और दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान वास्तविक विकास दर क्रमशः ....... और ....... थी [C.P.O.S.I. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)](a) 5.4 प्रतिशत, 7.6 प्रतिशत(b) 7.2 प्रतिशत, 8.4 प्रतिशत(c) 6.5 प्रतिशत, 8.1 प्रतिशत(d) 7.2 प्रतिशत, 7.6 प्रतिशतCorrect Answer: (a) 5.4 प्रतिशत, 7.6 प्रतिशतSolution:नौवीं और दसवीं पंचवर्षीय योजना के दौरान वास्तविक विकास दर क्रमशः 5.4 प्रतिशत और 7.6 प्रतिशत थी।ये आंकड़े सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की औसत वार्षिक वृद्धि दर को दर्शाते हैंजो लक्ष्यों से कम या अधिक रहने के कारण महत्वपूर्ण हैं। नीचे इन योजनाओं का विस्तृत विवरण दिया गया है।नौवीं पंचवर्षीय योजना (1997-2002)इस योजना का लक्ष्य 6.5% की जीडीपी वृद्धि था, लेकिन वास्तविक उपलब्धि केवल 5.4% रहीजो आर्थिक चुनौतियों जैसे कृषि क्षेत्र की कमजोर वृद्धि (लक्ष्य 3.9% के विरुद्ध 2.1%) और वैश्विक मंदी से प्रभावित हुई।औद्योगिक क्षेत्र में 4.5% की वृद्धि हुई, जो 3% लक्ष्य से अधिक थी, जबकि सेवा क्षेत्र ने 7.8% की मजबूत प्रदर्शन किया।योजना का फोकस कृषि, ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन पर थालेकिन निर्यात लक्ष्य (14.5%) के विरुद्ध केवल 7.4% वृद्धि हुई।दसवीं पंचवर्षीय योजना (2002-2007)लक्ष्य 8% (या कुछ स्रोतों में 8.1%) था, जबकि वास्तविक वृद्धि 7.6% रहीजो सभी योजनाओं में सबसे अधिक थी और आर्थिक सुधारों, सेवा क्षेत्र boom तथा वैश्विक व्यापार वृद्धि से संभव हुई।इसने गरीबी अनुपात को 5% कम किया, साक्षरता दर बढ़ाई, वन क्षेत्र का विस्तार किया80 मिलियन रोजगार सृजन का लक्ष्य रखा।क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने और लैंगिक समानता पर जोर दिया गयाजिससे दिल्ली जैसे राज्यों में उच्च विकास दर्ज हुआ।36. भारत की पंचवर्षीय योजनाओं को ध्यान में रखते हुए, निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]I. रोलिंग (आवर्ती) योजना छठी पंचवर्षीय योजना से पहले पेश किया गयाII. महालनोबिस योजना- द्वितीय पंचवर्षीय योजना(a) केवल I(b) न तो I और न ही II(c) केवल II(d) I और II दोनोंCorrect Answer: (d) I और II दोनोंSolution:भारत में पांचवीं पंचवर्षीय योजना (वर्ष 1974-78) और छठी पंचवर्षीय योजना (वर्ष 1980-85) के बीच रोलिंग (आवर्ती) योजना (वर्ष 1978-80) में प्रस्तुत किया गया थाजबकि द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-61) प्रो. पी.सी. महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी।पहली से तीसरी योजनाजिसका लक्ष्य 2.1% विकास था और वास्तविक 3.6% प्राप्त हुआ।दूसरी योजना (1956-1961) ने महालनोबिस मॉडल के आधार पर भारी उद्योगों को प्राथमिकता दीलक्ष्य 4.5% और उपलब्धि 4.27% रही ।तीसरी योजना (1961-1966) आत्मनिर्भरता पर केंद्रित थी, लेकिन युद्धों के कारण असफल रही ।चौथी से छठी योजनाचौथी योजना (1969-1974) ने गरीबी हटाओ और हरित क्रांति को बढ़ावा दिया, लक्ष्य 5.7% था।पाँचवीं योजना (1974-1978/79) गरीबी उन्मूलन और आत्मनिर्भरता पर जोर देती रहीलेकिन 1978 में समय से पहले समाप्त हुई ।छठी योजना (1980-1985) ने गरीबी न्यूनीकरण और आधुनिकीकरण को लक्ष्य बनायाजिसमें 5.2% लक्ष्य के विरुद्ध 5.7% विकास हुआ ।सातवीं से नौवीं योजनासातवीं योजना (1985-1990) रोजगार सृजन और तकनीकी विकास पर केंद्रित रहीजीडीपी लक्ष्य 5% के विरुद्ध 6.02% प्राप्त।आठवीं योजना (1992-1997) ने उदारीकरण के बाद मानव विकास और रोजगार को प्राथमिकता दी ।नौवीं योजना (1997-2002) ने विकास के साथ सामाजिक न्याय पर फोकस किया, पीवी नरसिम्हा राव के नेतृत्व में ।दसवीं से बारहवीं योजनादसवीं योजना (2002-2007) ने 8% विकास लक्ष्य रखा, जो प्राप्त भी हुआ।ग्यारहवीं योजना (2007-2012) का थीम "तीव्र और समावेशी विकास" थालक्ष्य 9% के विरुद्ध 8% हासिल । बारहवीं योजना (2012-2017) तेज, समावेशी और सतत विकास पर केंद्रित रहीजिसके बाद 2015 में योजना आयोग भंग होकर नीति आयोग स्थापित हुआ ।समग्र उद्देश्यपंचवर्षीय योजनाओं के चार मुख्य उद्देश्य थे: विकास (Growth), आधुनिकीकरण (Modernization), आत्मनिर्भरता (Self-reliance) और समता (Equity) ।इन्होंने भारत को कृषि से उद्योग-प्रधान अर्थव्यवस्था की ओर मोड़ा, गरीबी कम की और बुनियादी ढाँचे को मजबूत किया।2017 के बाद नीति आयोग ने रणनीतिक नीतियाँ अपनाईं।37. भारत में किस अवधि को योजना अवकाश के रूप में वर्णित किया गया है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)](a) 1990 से 1993(b) 1966 से 1969(c) 1947 से 1950(d) 1956 से 1960Correct Answer: (b) 1966 से 1969Solution:संसाधनों में कमी और तृतीय पंचवर्षीय योजना की असफलता के कारण चौथी योजना को अंतिम रूप देने में देरी हुई।इसलिए इसके स्थान पर चौथी योजना के प्रारूप को ध्यान में रखते हुएवर्ष 1966 से 1969 तक तीन वार्षिक योजनाएं बनाई गईं। इस अवधि को योजना अवकाश कहा गया।कारणजो 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और लगातार दो वर्षों (1965-1966) के भयंकर सूखे से प्रभावित हुई।इन घटनाओं ने अर्थव्यवस्था को गहरे संकट में डाल दियाजिसमें मुद्रास्फीति बढ़ी, संसाधन कम पड़े और खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित हुआ।सरकार ने रुपये का अवमूल्यन भी किया ताकि निर्यात बढ़ेलेकिन समग्र आर्थिक अस्थिरता के कारण चौथी पंचवर्षीय योजना को स्थगित कर दिया गया।विशेषताएँइस तीन वर्षीय अवधि (1966-67, 1967-68, 1968-69) में कोई पूर्ण पंचवर्षीय योजना नहीं चलीबल्कि तीन अलग-अलग वार्षिक योजनाएँ लागू की गईं।ये योजनाएँ चौथी पंचवर्षीय योजना के प्रारूप पर आधारित थींजिनमें अर्थव्यवस्था को स्थिर करने, कृषि उत्पादकता बढ़ाने (हरित क्रांति की शुरुआत), आत्मनिर्भरता पर जोर और उद्योग-कृषि संतुलन पर ध्यान दिया गया।योजना आयोग ने इस期间 संसाधनों का सीमित उपयोग किया और तात्कालिक संकट निवारण पर फोकस रखा।प्रभावयोजना अवकाश ने अर्थव्यवस्था को कुछ हद तक स्थिर किया, लेकिन विकास दर कम रही।इस期间 खाद्यान्न आयात बढ़ा और गरीबी उन्मूलन जैसे दीर्घकालिक लक्ष्य प्रभावित हुए।हालांकि, इसने हरित क्रांति को गति दी, जिसमें उच्च उपज वाली बीजों, उर्वरकों और सिंचाई पर जोर दिया गया।1969 में चौथी पंचवर्षीय योजना शुरू हुई, जो गरीबी हटाओ पर केंद्रित थी।अन्य संदर्भकभी-कभी 1990-92 को भी अनौपचारिक रूप से योजना अवकाश कहा जाता हैभुगतान संतुलन संकट के कारण), लेकिन आधिकारिक रूप से 1966-69 ही योजना अवकाश है।पंचवर्षीय योजनाएँ 2017 में समाप्त हो गईं और नीति आयोग ने तीन वर्षीय कार्य योजनाओं का दौर शुरू किया।38. भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य क्या थे? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (II-पाली)](a) सामाजिक कल्याण, स्वावलंबन, समानता तथा औद्योगिक विकास(b) औद्योगीकरण, शहरीकरण, विकास तथा आत्मनिर्भरता(c) निर्धनता उन्मूलन, शहरीकरण, स्वावलंबन तथा आधुनिकीकरण(d) संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा समानताCorrect Answer: (d) संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा समानताSolution:भारत में पंचवर्षीय योजनाएं तत्कालीन यूएसएसआर (वर्तमान में रूस) में प्रचलित योजनाओं के आधार पर तैयार की गईं।भारत में पंचवर्षीय योजनाओं के प्रमुख उद्देश्य संवृद्धि, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता तथा समानता थे।सामान्य उद्देश्ययोजना आयोग द्वारा तैयार ये योजनाएँ कृषि, उद्योग, बुनियादी ढांचे, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में संसाधन आवंटन पर केंद्रित रहीं।उदाहरणस्वरूप, प्रारंभिक योजनाओं ने कृषि पर जोर दियाजबकि बाद की योजनाओं ने उद्योगों और मानव विकास को प्राथमिकता दी।प्रत्येक योजना के प्रमुख उद्देश्यभारत में कुल 12 पंचवर्षीय योजनाएँ (1951-2017) लागू हुईं, जिनमें कुछ वार्षिक योजनाएँ भी शामिल रहीं।नीचे एक तालिका में प्रत्येक का मुख्य फोकस दर्शाया गया है:उपलब्धियाँ और चुनौतियाँइन योजनाओं ने औसतन 6% वार्षिक GDP वृद्धि सुनिश्चित की, हरित क्रांति से खाद्यान्न आत्मनिर्भरता प्राप्त हुईऔद्योगिक आधार मजबूत हुआ।हालांकि, युद्ध, सूखा और वैश्विक मंदी जैसी बाधाओं से कुछ योजनाएँ (जैसे तृतीय) असफल रहीं।2017 में योजना आयोग भंग होकर नीति आयोग बनाजो अब लचीली रणनीतियों पर काम करता है।कुल मिलाकर, ये योजनाएँ भारत को नियोजित अर्थव्यवस्था का मॉडल प्रदान करने वाली साबित हुईं।39. इनमें से कौन-सा पंचवर्षीय योजनाओं के लक्ष्यों में से एक नहीं है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)](a) वैश्वीकरण(b) आधुनिकीकरण(c) आत्मनिर्भरता(d) संवृद्धिCorrect Answer: (a) वैश्वीकरणSolution:भारत में पंचवर्षीय योजना वर्ष 1951 से शुरू की गई थी। ध्यातव्य हैभारत में पंचवर्षीय योजनाओं का लक्ष्य आत्मनिर्भरता, संवृद्धि और आधुनिकीकरण थाजबकि वैश्वीकरण का संबंध नई आर्थिक नीति से थापंचवर्षीय योजनाओं के चार मुख्य लक्ष्यये उद्देश्य भारत की नियोजित अर्थव्यवस्था की नींव थे, जो 1951 से 2017 तक चले:आर्थिक विकास: राष्ट्रीय आय और GDP में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित करना, औसतन 5-6% वार्षिक लक्ष्य के साथ।प्रारंभिक योजनाओं में यह कृषि और उद्योग के माध्यम से प्राप्त किया गया।आधुनिकीकरण: नई तकनीकों, उत्पादकता बढ़ाने और सामाजिक परिवर्तन (जैसे लिंग समानता) को बढ़ावा देना।यह केवल मशीनरी तक सीमित न होकर सामाजिक दृष्टिकोण में बदलाव पर केंद्रित था।आत्मनिर्भरता: आयात पर निर्भरता कम करना, विशेषकर खाद्यान्न और भारी उद्योगों में।तीसरी योजना से यह प्रमुख लक्ष्य बना।समता: आय असमानता घटाना, गरीबी उन्मूलन और सामाजिक न्याय।बाद की योजनाओं (जैसे पंचम: गरीबी हटाओ) में यह प्रधानता पाई।यदि प्रश्न के विकल्प जैसे "विकास, आधुनिकीकरण, आत्मनिर्भरता, समानता" हैं, तो सभी लक्ष्य हैं।संभवतः भ्रमित विकल्प कुछ और (जैसे "निजीकरण" या "उदारीकरण") हो सकता हैजो 1991 के बाद की नीतियों से जुड़ा है, न कि पंचवर्षीय योजनाओं से।विकल्पों का विश्लेषण (सामान्य MCQ संदर्भ में)मान लें मानक विकल्प: (क) विकास (ख) आधुनिकीकरण (ग) आत्मनिर्भरता (घ) कुछ असंबद्ध (जैसे "बाजार सुधार")।तब कोई भी इन चार में से लक्ष्य नहीं छोड़ता, लेकिन प्रश्न की प्रकृति MCQ वाली हैजहाँ एक भ्रामक जोड़ा जाता है। वास्तविकता में सभी चार मान्य हैं।योजना आयोग के दस्तावेज़ों के अनुसार, ये चार ही अपरिहार्य थे।ऐतिहासिक संदर्भ और महत्वये लक्ष्य सोवियत मॉडल से प्रेरित थे, जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में।आधुनिकीकरण को कभी अस्वीकार नहीं किया गया—यह उत्पादकता और सामाजिक सुधार का आधार था।2017 में नीति आयोग के आने से ये समाप्त हुईं, लेकिन इनका प्रभाव आज भी (2026 में) बुनियादी ढांचे में दिखता है।यदि विशिष्ट विकल्प बताएँ, तो सटीक उत्तर दिया जा सकता है।40. निम्नलिखित में से किस पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन में तेजी से वृद्धि करना था ? [CGL (T-I) 24 जुलाई, 2023 (I-पाली)](a) पांचवीं पंचवर्षीय योजना(b) छठी पंचवर्षीय योजना(c) सातवीं पंचवर्षीय योजना(d) आठवीं पंचवर्षीय योजनाCorrect Answer: (c) सातवीं पंचवर्षीय योजनाSolution:सातवीं पंचवर्षीय योजना का उद्देश्य खाद्यान्न उत्पादन में तेजी से वृद्धि करना था।इसकी अवधि वर्ष 1985-90 थी, जबकि लक्षित एवं वास्तविक वृद्धि दर क्रमशः 5.0 एवं 6.0 प्रतिशत रही।ध्यातव्य है कि यह योजना प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यकाल के दौरान प्रस्तुत की गई थी।योजना का कालखंडसातवीं पंचवर्षीय योजना 1985 से 1990 तक चली। इसका फोकस 'खाद्य, कार्य और उत्पादकता' पर थाजिसमें खाद्यान्न उत्पादन को प्राथमिकता दी गई ताकि देश आत्मनिर्भर बने।खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य 1984-85 के 155 मिलियन टन से बढ़ाकर 200 मिलियन टन करना थाजो कृषि विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।मुख्य उद्देश्यइस योजना ने खाद्यान्न उत्पादन के साथ-साथ रोजगार सृजन और उत्पादकता वृद्धि पर जोर दिया।सामाजिक न्याय के माध्यम से आर्थिक विकास, कृषि उत्पादकता में सुधार और बुनियादी ढांचे जैसे सिंचाईबिजली व सड़कों का विस्तार प्रमुख लक्ष्य थे।प्रौद्योगिकी उन्नयन से उद्योग व कृषि दोनों क्षेत्रों में उत्पादकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।उपलब्धियां और आंकड़ेयोजना का लक्ष्य विकास दर 5% था, लेकिन वास्तविक दर 6.01% रही और प्रति व्यक्ति आय में 3.7% वृद्धि हुई।यह राजीव गांधी के नेतृत्व में लागू हुई और बड़े पैमाने पर समाजवाद, गरीबी उन्मूलन व ऊर्जा उत्पादन पर केंद्रित रही।Submit Quiz« Previous12345Next »