आयोजना (पंचवर्षीय योजना) (अर्थव्यवस्था)

Total Questions: 43

41. निम्नलिखित में से कौन-सा पंचवर्षीय योजनाओं का एक लक्ष्य नहीं था? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) सुरक्षा
Solution:
  • भारत में पंचवर्षीय योजना का लक्ष्य निष्पक्षता, आत्मनिर्भरता और विकास था, जबकि सुरक्षा इसका लक्ष्य नहीं था।
  • मुख्य लक्ष्य
    • पंचवर्षीय योजनाओं के चार प्रमुख लक्ष्य थे जो सभी योजनाओं में समान रूप से मौजूद रहे।
    • विकास का अर्थ आर्थिक वृद्धि से था, आधुनिकीकरण ने तकनीकी प्रगति पर जोर दिया
    • आत्मनिर्भरता ने आयात पर निर्भरता कम करने का उद्देश्य रखा
    • समानता ने सभी वर्गों के लिए समावेशी विकास सुनिश्चित किया।​
  • गैर-लक्ष्य उदाहरण
    • उच्च जनसंख्या वृद्धि पंचवर्षीय योजनाओं का लक्ष्य नहीं था
    • क्योंकि योजनाएँ जनसंख्या नियंत्रण को समस्या मानती थीं
    • इसी तरह, वैश्वीकरण प्रारंभिक योजनाओं में अनुपस्थित रहा, क्योंकि फोकस स्वदेशी विकास पर था।​
  • योजनाओं का संदर्भ
    • प्रथम योजना (1951-56) ने कृषि और सिंचाई पर ध्यान दिया
    • द्वितीय ने भारी उद्योगों को बढ़ावा दिया। बाद की योजनाएँ जैसे पंचम ने गरीबी हटाओ पर केंद्रित रहीं
    • लेकिन सभी ने ऊपर बताए चार लक्ष्यों का पालन किया। कुल 12 योजनाएँ 1951 से 2017 तक चलीं।​

42. 1956 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने ....... का आधार बनाया। [CHSL (T-I) 09 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) द्वितीय पंचवर्षीय योजना
Solution:
  • वर्ष 1956 के औद्योगिक नीति प्रस्ताव ने द्वितीय पंचवर्षीय योजना को आधार बनाया।
  • ध्यातव्य है कि भारत में द्वितीय पंचवर्षीय योजना की अवधि 1 अप्रैल, 1956 से 31 मार्च, 1961 तक थी।
  • इस योजना का उद्देश्य देश में औद्योगीकरण की प्रक्रिया प्रारंभ करना था।
  • नीति का आधारभूत ढांचा
    • अनुसूची A के 17 उद्योग राज्य के एकाधिकार में थे, जैसे रेलवे, परमाणु ऊर्जा और भारी इंजीनियरिंग।
    • अनुसूची B के 12 उद्योगों में निजी क्षेत्र भाग ले सकता था
    • लेकिन राज्य नियंत्रण के अधीन, जबकि अनुसूची C के बाकी उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुले थे पर लाइसेंस आवश्यक था।​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • प्रस्ताव ने सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी ताकि भारी उद्योगों का तेजी से विकास हो सके
    • जो महालनोबिस मॉडल पर आधारित था। इसने औद्योगिक लाइसेंस राज की शुरुआत
    • जहां नए उद्योग या विस्तार के लिए सरकारी अनुमति जरूरी थी
    • पिछड़े क्षेत्रों में इकाइयों को रियायतें दी गईं।
    • निजी क्षेत्र का नियमन आर्थिक शक्ति के विकेंद्रीकरण और क्षेत्रीय समानता के लिए किया गया।​
  • ऐतिहासिक महत्व
    • 1948 के प्रस्ताव का विस्तार करते हुए, 1956 का IPR ने राज्य पूंजीवाद को मजबूत किया और आत्मनिर्भरता बढ़ाई।
    • यह 1991 की उदारीकरण नीति तक प्रासंगिक रहा, जिसने लाइसेंस राज समाप्त किया।
    • कुल मिलाकर, इसने मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल स्थापित किया।​

43. किस पंचवर्षीय योजना के बाद से सार्वजनिक क्षेत्रक पर बहुत अधिक जोर नहीं दिया गया? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) नौवीं योजना
Solution:
  • नौवीं पंचवर्षीय योजना में सर्वोच्च प्राथमिकता न्यायपूर्ण वितरण एवं समानता के साथ विकास को दिया गया
  • नौवीं योजना के बाद से सार्वजनिक क्षेत्र पर बहुत अधिक जोर नहीं दिया गया।
  • नौवीं योजना का संदर्भ
    • इस योजना में सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुखता में कमी आई क्योंकि नीतियां निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने पर केंद्रित हुईं।
    • इसका लक्ष्य 6.5% विकास दर था, लेकिन वास्तविक उपलब्धि 5.4% रही।
    • कृषि, ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन जैसे क्षेत्रों पर फोकस रहा
    • परंतु भारी उद्योगों में सार्वजनिक निवेश घटा।​
  • पूर्व योजनाओं में सार्वजनिक क्षेत्र का जोर
    • प्रारंभिक योजनाओं (पहली से आठवीं तक) में सार्वजनिक क्षेत्र को अर्थव्यवस्था का इंजन माना गया।
    • उदाहरणस्वरूप, दूसरी योजना (1956-61) महालनोबिस मॉडल पर आधारित थी
    • जो भारी उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र पर केंद्रित रही।
    • चौथी और पांचवीं योजनाओं में भी सार्वजनिक निवेश प्रमुख था।
    • छठी योजना (1980-85) से औद्योगिकीकरण के पैटर्न में कुछ बदलाव आया
    • लेकिन नौवीं तक सार्वजनिक क्षेत्र ही प्रभुत्व में रहा।​
  • उदारीकरण का प्रभाव
    • 1991 के आर्थिक सुधारों ने निजीकरण को बढ़ावा दिया, जो नौवीं योजना में स्पष्ट दिखा।
    • निजी क्षेत्र को आर्थिक गतिविधियों में अधिक भूमिका दी गई
    • जबकि शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में भी निजी भागीदारी बढ़ी।
    • इसके फलस्वरूप सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का विनिवेश शुरू हुआ।​
  • बाद की प्रगति
    • दसवीं (2002-07) और ग्यारहवीं (2007-12) योजनाओं में भी निजीकरण जारी रहा।
    • बारहवीं योजना (2012-17) ने समावेशी विकास पर जोर दिया
    • लेकिन योजना आयोग 2014 में भंग हो गया। जनवरी 2015 से नीति आयोग ने विकेंद्रीकृत योजना अपनाई
    • जिसमें राज्य सरकारों और निजी क्षेत्र की भूमिका बढ़ी।