उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय (भारतीय राजव्यवस्था एवं शासन)

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31. किस उच्च न्यायालय ने यह फैसला दिया है कि एक ही बार में तीन बार तलाक कहने से तलाक होना गैर-कानूनी है? [39th B.P.S.C. (Pre) 1994]

Correct Answer: (b) इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Solution:इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने रहमतुल्ला बनाम स्टेट ऑफ यू.पी., 1994 के मामले में यह निर्णय दिया था कि एक ही बार में तीन तलाक कहने से तलाक होना गैर-कानूनी है, क्योंकि इस प्रकार का तलाक पवित्र कुरान तथा भारतीय संविधान के प्रावधानों, दोनों के विरुद्ध है। मुस्लिम महिलाएं (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत एक ही बार में तीन बार तलाक कहने को संज्ञेय अपराध घोषित किया गया है।

32. 2008 में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश कौन बने ? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (a) राजीव गुप्ता
Solution:2 फरवरी, 2008 को न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बने थे। इससे पहले वे उत्तराखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश थे।

33. 'विधि आयोग' के किस अध्यक्ष ने अपनी रिपोर्ट में समर्थन किया है कि "प्रत्येक उच्च न्यायालय के एक-तिहाई न्यायाधीश दूसरे राज्य से होने चाहिए"? [Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (c) न्यायाधीश एच.आर. खन्ना
Solution:आठवें विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश एच. आर. खन्ना ने आयोग की 80वीं रिपोर्ट 'न्यायाधीशों की नियुक्तियों के तरीके' में उच्च न्यायालय के एक-तिहाई न्यायाधीश दूसरे राज्य से होने की सिफारिश की थी।

34. जिला न्यायाधीश शब्द संविधान के किस अनुच्छेद में आया है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2016]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 233
Solution:भारतीय संविधान के भाग VI के अध्याय 6 के अनुच्छेद 233 में जिला न्यायाधीश (District Judges) शब्द का उल्लेख किया गया है, जिसके अंतर्गत जिला न्यायाधीशों की नियुक्ति का प्रावधान है। अनुच्छेद 230 उच्च न्यायालयों की अधिकारिता के संघ राज्यक्षेत्रों पर विस्तार से तथा अनुच्छेद 231 दो या अधिक राज्यों के लिए एक ही उच्च न्यायालय की स्थापना से संबंधित है, जबकि अनुच्छेद 232 का 7वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1956 द्वारा निरसन कर दिया गया है। अनुच्छेद 233 के अतिरिक्त अनुच्छेद 233-क, 234, 235 तथा 236 में भी जिला न्यायाधीश का उल्लेख है।

35. भारत के संविधान के अनुसार, जिला न्यायाधीश अभिव्यक्ति के अंतर्गत सम्मिलित नहीं होगा- [I.A.S. (Pre) 1996]

Correct Answer: (c) अधिकरण न्यायाधीश
Solution:अनुच्छेद 236 (क) के अनुसार, जिला न्यायाधीश अभिव्यक्ति के अंतर्गत शामिल हैं- नगर सिविल न्यायालय का न्यायाधीश, अपर जिला न्यायाधीश, संयुक्त जिला न्यायाधीश, सहायक जिला न्यायाधीश, लघुवाद न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश, मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट, अपर मुख्य प्रेसीडेंसी मजिस्ट्रेट, सेशन न्यायाधीश, अपर सेशन न्यायाधीश और सहायक सेशन न्यायाधीश। अधिकरण न्यायाधीश इसमें शामिल नहीं हैं

36. नीचे दो वक्तव्य दिए गए हैं। एक को कथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है : [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2021]

कथन (A): जिला न्यायाधीश जिले का सबसे बड़ा न्यायिक अधिकारी होता है।

कारण (R) : जिला न्यायाधीश के पास न्यायिक एवं प्रशासनिक दोनों प्रकार की शक्तियां होती हैं। उनके पास जिले के अन्य सभी अधीनस्थ न्यायालयों के ऊपर पर्यवेक्षी शक्ति भी होती है।

उपर्युक्त दो वक्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा सही है?

Correct Answer: (a) दोनों कथन (A) तथा कारण (R) सही हैं तथा कथन (A) का सही स्पष्टीकरण कारण (R) है।
Solution:संविधान के अनुच्छेद 233 के तहत जिला न्यायाधीश की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा उस राज्य के संबंध में अधिकारिता का प्रयोग करने वाले उच्च न्यायालय से परामर्श करके की जाती है। जिला न्यायाधीश जिले का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी होता है, जिसके पास न्यायिक एवं प्रशासनिक दोनों प्रकार की शक्तियां होती हैं। जिला न्यायाधीश के पास जिले के अन्य सभी अधीनस्थ न्यायालयों के ऊपर पर्यवेक्षी शक्ति भी होती है। इस प्रकार कथन (A) तथा कारण (R) दोनों सही हैं तथा कथन (A) का सही स्पष्टीकरण कारण (R) है।

37. भारत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : [I.A.S. (Pre) 2021]

1. न्यायिक हिरासत का अर्थ है कि अभियुक्त संबंधित मजिस्ट्रेट की हिरासत में है और ऐसे अभियुक्त को पुलिस स्टेशन के हवालात में रखा जाता है न कि जेल में।

2. न्यायिक हिरासत के दौरान, मामले के प्रभारी पुलिस अधिकारी, न्यायालय की अनुमति के बिना संदिग्ध व्यक्ति से पूछताछ नहीं कर सकते।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/कौन-से सही है/हैं?

Correct Answer: (b) केवल 2
Solution:दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC), 1973 (जिसे 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' से प्रतिस्थापित किया गया है, जो 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी होगी) के तहत पुलिस हिरासत (Police Custody) का तात्पर्य है कि अभियुक्त, प्रभारी पुलिस अधिकारी या संबंधित जांच एजेंसी के अधिकारी की हिरासत में है तथा उसे पुलिस स्टेशन के हवालात में या अधिकारी की हिरासत में रखा जाता है। इसके विपरीत न्यायिक हिरासत (Judicial Custody) का अर्थ है कि अभियुक्त, संबंधित मजिस्ट्रेट की हिरासत में है तथा ऐसी स्थिति में अभियुक्त को केंद्रीय या राज्य कारागार में रखा जाता है। इस प्रकार, कथन 1 सही नहीं है। न्यायिक हिरासत के दौरान, मामले के प्रभारी पुलिस अधिकारी/जांच अधिकारी, न्यायालय की अनुमति के बिना संदिग्ध व्यक्ति (अभियुक्त) से पूछताछ नहीं कर सकते। हालांकि, न्यायालय अपने समक्ष प्रस्तुत किए गए तथ्यों के आधार पर आवश्यक समझने पर संबंधित अधिकारी को अभियुक्त से पूछताछ की अनुमति दे सकता है। इस प्रकार कथन 2 सही है।

38. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: [I.A.S. (Pre) 2023]

कथन I: भारत में, दैनंदिन जेल प्रशासन के लिए, जेलों का अनुरक्षण राज्य सरकारें अपने नियमों और विनियमों से करती हैं।

कथन II: भारत में, जेल का नियंत्रण जेल अधिनियम, 1894 द्वारा किया जाता है, जिससे जेल का विषय स्पष्ट रूप से प्रांतीय सरकारों के नियंत्रण में रहा।

उपर्युक्त कथनों के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा एक सही है?

Correct Answer: (a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है
Solution:भारत में जेलों का नियंत्रण कारागार अधिनियम, 1894 के तहत किया जाता है। इस अधिनियम ने प्रांतीय सरकारों (राज्य सरकारों) को जेलों के संबंध में नियम बनाने की शक्ति प्रदान की है। साथ ही संविधान की 7वीं अनुसूची के अंतर्गत 'कारागार' संबंधी विषय को राज्य सूची की प्रविष्टि संख्या 4 में रखा गया है। अतः भारत में, दैनंदिन जेल-प्रशासन के लिए, जेलों का अनुरक्षण एवं प्रबंधन राज्य सरकारों द्वारा स्वयं के नियमों/विनियमों द्वारा किया जाता है। इस प्रकार कथन I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन II, कथन I की सही व्याख्या करता है।

39. भारत के संदर्भ में. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - [I.A.S. (Pre) 2022]

1 सरकारी विधि अधिकारी और विधिक फर्म अधिवक्ता के रूप में मान्यता प्राप्त हैं, किंतु कॉर्पोरेट वकील और पेटेंट न्यायवादी अधिवक्ता की मान्यता से बाहर रखे गए हैं।

2. विधिज्ञ परिषदों (बार कौंसिलों) को विधिक शिक्षा और विधि महाविद्यालयों की मान्यता के बारे में नियम अधिकथित करने की शक्ति है।

उपर्युक्त कथनों में कौन-सा/से सही है/हैं?

Correct Answer: (b) केवल 2
Solution:अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के प्रावधानों के अनुसार, राज्य विधिज्ञ परिषदों (State Bar Councils) की सूची (Roll) में अधिवक्ता (Ad- vocate) के रूप में पंजीकृत व्यक्ति (विधि स्नातक) ही 'अधिवक्ता' के रूप में मान्यता प्राप्त हैं। अतः सरकारी विधि अधिकारी, विधिक फर्म, कॉर्पोरेट वकील और पेटेंट न्यायवादी इत्यादि अधिवक्ता की श्रेणी में नहीं आते हैं। अतः कथन 1 असत्य है। अधिवक्ता अधिनियम, 1961 के तहत बार कौंसिलों को अपने पेशे को स्व-विनियमित करने, प्रवेश और नामांकन संबंधी नियम बनाने, व्यावसायिक आचरण का मानक तय करने और विधिक शिक्षा एवं विधि महाविद्यालयों को मान्यता के बारे में नियम अधिकथित करने आदि की शक्ति प्राप्त है। इसी संदर्भ में बार कौंसिल ऑफ इंडिया द्वारा विधिक शिक्षा के मानदंडों और विधि डिग्रियों की मान्यता संबंधी नियम (Rules of Legal Education, 2008) बनाए गए हैं। अतः कथन 2 सत्य है।

40. लोक अदालतों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक सही है? [I.A.S. (Pre) 2010]

Correct Answer: (d) उपर्युक्त में से कोई-सा भी कथन सही नहीं है।
Solution:लोक अदालतों में सामान्य न्यायालयों में लंबित मामलों का दोनों पक्षों के मध्य समझौते के आधार पर निपटारा किया जाता है। इनमें दीवानी मामलों के साथ-साथ कतिपय (प्रशम्य) आपराधिक मामलों पर भी विचार किया जाता है। लोक अदालतों में वर्तमान या सेवानिवृत्त व्यायिक अधिकारी अथवा विधिक ज्ञान रखने वाला सम्माननीय व्यक्ति पीठासीन अधिकारी होता है तथा सामान्यतः एक वकील एवं एक सामाजिक कार्यकर्ता इसके सदस्य होते हैं।