उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय

Total Questions: 14

11. उच्च न्यायालयों की कुछ रिट (Writs) जारी करने की शक्ति भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद के तहत शामिल की गई है? [MTS (T-I) 16 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) अनुच्छेद 226
Solution:
  • संविधान का अनुच्छेद 226 प्रत्येक उच्च न्यायालय को अपने अधिकार क्षेत्र के भीतर किसी भी व्यक्ति या प्राधिकरण को बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, उत्प्रेषण, और अधिकार पृच्छा सहित रिट जारी करने का अधिकार देता है।
  • उच्च न्यायालय यह रिट मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए और किसी अन्य उद्देश्य (अर्थात कानूनी अधिकारों के प्रवर्तन) के लिए भी जारी कर सकता है।
  • यह शक्ति सर्वोच्च न्यायालय की रिट शक्ति (अनुच्छेद 32) से अधिक व्यापक है।
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण, परमादेश, प्रतिषेध, अधिकार पृच्छा, उत्प्रेषण या उनमें से किसी के रूप में रिट जारी करने की शक्ति प्रदान करता है।
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 226 उच्च न्यायालयों को भारत के संविधान, 1949 के भाग III द्वारा गारंटीकृत किसी भी बुनियादी मौलिक अधिकार को लागू करने की शक्ति और क्षमता देता है, या किसी अन्य कारण से।
  • अनुच्छेद 226 के तहत, एक रिट याचिका किसी भी उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती है
  • जिसके अधिकार क्षेत्र में कार्रवाई का कारण पूरी तरह या आंशिक रूप से उत्पन्न होता है।
  • यह मायने नहीं रखता कि जिस प्राधिकारी के खिलाफ रिट याचिका दायर की गई है वह उसके क्षेत्र में है या नहीं।
    Other Information
  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 224 उच्च न्यायालयों में अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित है।
  •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 220 उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों को वेतन और भत्ते के भुगतान से संबंधित है।
  •  भारतीय संविधान का अनुच्छेद 222 न्यायाधीशों के एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरण से संबंधित है।
  • अनुच्छेद 226 का विवरण
  • यह अनुच्छेद Part III (मौलिक अधिकार) के अधिकारों के प्रवर्तन के साथ-साथ किसी भी अन्य उद्देश्य के लिए उच्च न्यायालयों को रिट जारी करने की अनुमति देता है।
  • उच्च न्यायालय इस शक्तियों का प्रयोग उन क्षेत्रों के संबंध में करता है जिनके अंतर्गत वह अधिकार क्षेत्र रखता है
  • भले ही संबंधित सरकार या प्राधिकारी का स्थान या व्यक्ति का निवास स्थान उस क्षेत्र में न हो।
  • यह अनुच्छेद उच्च न्यायालयों को सर्वोच्च न्यायालय से भिन्न रूप में न्यायिक समीक्षा और हस्तक्षेप करने का अधिकार देता है, परंतु यह अपील का माध्यम नहीं है।
  • प्रमुख रिट प्रकार
  • बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)
  • परमादेश (Mandamus)
  • प्रतिषेध (Prohibition)
  • अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto)
  • उत्प्रेषण (Certiorari)
  • इन रिट के माध्यम से न्यायालय सरकारी और प्रशासनिक कार्यवाहियों की वैधता की जांच करता है और कानून का पालन करने के लिए आदेश जारी करता है।
  • उच्च न्यायालय इस अनुच्छेद के तहत व्यापक क्षेत्राधिकार रखें हैं.​​

12. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय है? [CHSL (T-I) 21 मार्च, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) कलकत्ता
Solution:
  • कलकत्ता, बंबई (मुंबई), और मद्रास (चेन्नई) उच्च न्यायालयों की स्थापना 1862 में हुई थी, जो भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम
  • 1861 के तहत स्थापित होने वाले पहले तीन उच्च न्यायालय थे।
  • इनमें से, कलकत्ता उच्च न्यायालय की स्थापना सबसे पहले 2 जुलाई, 1862 को हुई थी, जिससे यह भारत का सबसे पुराना उच्च न्यायालय बन गया।
  • इलाहाबाद उच्च न्यायालय की स्थापना 1866 में हुई थी।
  • यह 1861 के भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम के प्रावधानों के तहत स्थापित किया गया था।
  • कलकत्ता उच्च न्यायालय को मूल रूप से फोर्ट विलियम में उच्च न्यायालय के रूप में जाना जाता था।
  • यह पश्चिम बंगाल राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के केंद्र शासित प्रदेश पर अधिकार क्षेत्र रखता है।
  • कलकत्ता उच्च न्यायालय के पहले मुख्य न्यायाधीश सर बार्न्स पीकॉक थे।
    Other Information
  •  भारतीय उच्च न्यायालय अधिनियम, 1861
    • यह अधिनियम भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना के लिए ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया था।
    • कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास के उच्च न्यायालय इस अधिनियम के तहत स्थापित होने वाले पहले उच्च न्यायालय थे।
    • इसका उद्देश्य प्रेसीडेंसियों में सर्वोच्च न्यायालयों को समाप्त करना और उन्हें उच्च न्यायालयों से बदलना था।
  •  कलकत्ता उच्च न्यायालय का अधिकार क्षेत्र
    •  न्यायालय पश्चिम बंगाल और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में उत्पन्न होने वाले दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों की सुनवाई करता है।
    •  इसके क्षेत्र में अधीनस्थ न्यायालयों पर इसका अपीलीय अधिकार क्षेत्र भी है।
  • वास्तुशिल्प महत्व
    • कलकत्ता उच्च न्यायालय की इमारत येप्रेस, बेल्जियम में क्लॉथ हॉल पर आधारित है।
    • संरचना गोथिक पुनर्जागरण वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।
  •  अन्य ऐतिहासिक उच्च न्यायालय
    • बॉम्बे और मद्रास के उच्च न्यायालय भी 1862 में स्थापित किए गए थे, जो उन्हें भारत के कुछ सबसे पुराने न्यायालय बनाते हैं।
    • ये न्यायालय अंग्रेजी न्यायिक व्यवस्था के अनुरूप थे।

13. न्यायाधीशों को एक उच्च न्यायालय से दूसरे उच्च न्यायालय में स्थानांतरित करने का अधिकार किसके पास है? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) भारत के राष्ट्रपति
Solution:
  • संविधान के अनुच्छेद 222 के अनुसार, किसी न्यायाधीश को एक उच्च न्यायालय से दूसरे में स्थानांतरित करने की शक्ति भारत के राष्ट्रपति के पास होती है।
  • हालाँकि, राष्ट्रपति यह निर्णय भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से परामर्श करने के बाद लेते हैं
  • जैसा कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित 'कॉलेजियम प्रणाली' में किया जाता है।
  •  भारत के राष्ट्रपति :-
    •  राष्ट्रपति का चुनाव एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य और राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के
      निर्वाचित सदस्य शामिल होते हैं।
    •  राष्ट्रपति का कार्यकाल पाँच वर्ष का होता है और वह पुनः निर्वाचित हो सकता है।
    • भारित के राष्ट्रपति भारत सरकार की कार्यकारी प्रमुख हैं और भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च सेनापति भी हैं।
      Other Information
  •  सर्वोच्च न्यायालय का सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए जिम्मेदार होता है।
  •  भारत का मुख्य न्यायाधीश सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के प्रशासन के लिए जिम्मेदार है।
  •  भारत का कानून मंत्री भारत की कानूनी प्रणाली से संबंधित कानूनों और नीतियों के निर्माण और कार्यान्वयन के लिए जिम्मेदार है।
  • संवैधानिक प्रावधान
    • CJI की सिफारिश निर्णायक होती है, और स्थानांतरण न्यायिक स्वतंत्रता, प्रशासनिक दक्षता तथा निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से किया जाता है।​
  • प्रक्रिया
    • CJI स्थानांतरण प्रस्ताव की समीक्षा के लिए संबंधित उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों तथा कॉलेजियम से परामर्श करते हैं।
    • केंद्रीय कानून मंत्री सिफारिश को प्रधानमंत्री के माध्यम से राष्ट्रपति को भेजते हैं, जिनके अनुमोदन के बाद न्याय विभाग राजपत्र में अधिसूचना जारी करता है।
    • स्थानांतरित न्यायाधीश को कानून द्वारा निर्धारित मुआवजा भत्ता प्राप्त होता है।​

14. भारत के संविधान के अनुच्छेद ....... के अनुसार, देश के सभी उच्च न्यायालयों के लिए अंग्रेजी आधिकारिक भाषा है। [CGL (T-I) 17 अगस्त, 2021 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) 348(1)
Solution:
  • अनुच्छेद 348(1) स्पष्ट रूप से कहता है कि जब तक संसद कानून द्वारा अन्यथा प्रावधान न करे, सर्वोच्च न्यायालय और सभी उच्च न्यायालयों में सभी कार्यवाहियाँ अंग्रेजी भाषा में होंगी।
  • अनुच्छेद 348(2) राज्यपाल को राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाही में हिंदी या राज्य की अन्य आधिकारिक भाषा के उपयोग की अनुमति देने का अधिकार देता है
  • लेकिन निर्णय, डिक्री या आदेश (Judgements, Decrees or Orders) हमेशा अंग्रेजी में ही पारित किए जाएंगे, जिसका अधिकृत हिंदी अनुवाद उपलब्ध कराया जा सकता है।
  • अनुच्छेद 348 का पाठ
    •  यह प्रावधान उच्च न्यायालयों में विधेयकों, अधिनियमों, निर्णयों, डिक्रियों और आदेशों के मसौदे तैयार करने के लिए भी अंग्रेजी के उपयोग को अनिवार्य बनाता है।
    • अनुच्छेद 348(3) आगे स्पष्ट करता है कि उच्च न्यायालय के किसी निर्णय, डिक्री या आदेश पर यह प्रावधान लागू नहीं होगा, जिससे अपवाद की गुंजाइश रहती है।​
  • अपवाद और लचीलापन
    • अनुच्छेद 348(2) के तहत, किसी राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से उच्च न्यायालय की कार्यवाहियों में हिंदी या राज्य की आधिकारिक भाषा के उपयोग को अधिकृत कर सकता है।
    • हालांकि, ऐसे मामलों में भी निर्णय, डिक्री या आदेश अंग्रेजी में देने अनिवार्य हैं, या कम से कम उनका अंग्रेजी अनुवाद संलग्न होना चाहिए।
    • राजभाषा अधिनियम, 1963 की धारा 7 इस प्रावधान को मजबूत करती है, जो उच्च न्यायालयों में क्षेत्रीय भाषाओं के सीमित उपयोग की अनुमति देती है
    • लेकिन अंग्रेजी को प्राथमिकता सुनिश्चित करती है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारतीय संविधान सभा ने अनुच्छेद 343 के साथ हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया, लेकिन 15 वर्षों तक अंग्रेजी के समानांतर उपयोग को बरकरार रखा।
    • उच्च न्यायालयों में अंग्रेजी की निरंतरता का कारण विधिक परंपराओं की एकरूपता और अंतरराष्ट्रीय मानकों से सामंजस्य था, जो ब्रिटिश काल से चली आ रही है।
    • गुजरात उच्च न्यायालय जैसे मामलों में भी इसकी पुष्टि हुई है, जहां अदालत ने अंग्रेजी को उच्च न्यायपालिका की आधिकारिक भाषा बताया।​
  • व्यावहारिक प्रभाव
    • यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि पूरे देश में उच्च न्यायालयों की कार्यवाहियां एकसमान रहें, जिससे अपील और समीक्षा में सुगमता हो।
    • कुछ राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार में हिंदी का सीमित उपयोग होता है, लेकिन निर्णय हमेशा अंग्रेजी या द्विभाषी रूप में जारी होते हैं।
    • संसद द्वारा संशोधन न होने से यह व्यवस्था आज भी बरकरार है।​