उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा, 2022 विधि

Total Questions: 70

11. कार्यवाही हेतु व्यय और कार्यवाही के दौरान व्यय से सम्बन्धित मामलों का निस्तारण यथा सम्भव 60 दिनों में हो, यह प्रावधान हिन्दी विवाह अधिनियम, 1955 में अन्तःस्थापित किया गया

Correct Answer: (d) अधिनियम सं. 49, 2001 द्वारा
Solution:हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 24 के अन्तर्गत अंतरिम भरण-पोषण और कार्यवाही के व्यय के लिए आवेदनों का निपटारा 60 दिनों के भीतर करने का प्रावधान विवाह कानून संशोधन अधिनियम, 2001 (अधिनियम संख्या 49, 2001) द्वारा जोड़ा गया था।

12. "लोक अदालत" और "स्थायी लोक अदालत" की शक्तियाँ विधिक सेवा प्राधिकारी अधिनियम, 1987 में से किस धारा में वर्णित है?

Correct Answer: (b) धारा 22
Solution:विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 22 लोक अदालत और स्थायी लोक अदालत को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत सिविल न्यायालयों के समान शक्तियाँ प्रदान करता है। इन शक्तियों में गवाहों का बुलाना, दस्तावेजों की खोज करना, शपथ पर साक्ष्य प्राप्त करना, और सार्वजनिक अभिलेखों की मांग करना शामिल है।

13. अनुच्छेद 21A के अन्तर्गत शिक्षा का अधिकार सम्मिलित किया गया था

Correct Answer: (d) 86वें संविधान संशोधन द्वारा
Solution:86वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2002 के द्वारा संविधान में अनुच्छेद 21A को जोड़कर शिक्षा के अधिकार को मौलिक अधिकार बनाया गया। इस अनुच्छेद द्वारा 6 से 14 वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान किया गया।

14. किसे "राष्ट्रों की विधि का जनक' कहा जाता है?

Correct Answer: (a) ग्रोटियश
Solution:गो ग्रोटियश को राष्ट्रों की विधि का जनक माना जाता है। हगो ग्रोटियश एक उच्च विधिवेत्ता थे जिन्होंने अपनी पुस्तक 'ऑन द लॉ ऑफ वार एण्ड पीस' में अन्तर्राष्ट्रीय कानून से मध्ययुगीन धर्मशास्त्र को हटाया और राष्ट्रों के कानून की आवधारणा विकसित किया।

15. निम्नलिखित में से कौन अपकृत्यात्मक दायित्व के सामान्य सिद्धान्त के अन्तर्गत नहीं आता है?

Correct Answer: (d) संप्रभु कोई गलती नहीं कर सकता
Solution:अपकृत्यात्मक दायित्व के सामान्य सिद्धान्त में डैमनम साइन इंजुरिया, वॉलेन्टी नॉन फिट इंजुरिया और इंजुरिया साइन डैमनम आते हैं, लेकिन संप्रभू कोई गलती नहीं कर सकता, अपकृत्यात्मक दायित्व में नही आता। यह राजकीय प्रतिरक्षा से जुड़ा है न कि सामान्य अपकृत्यात्मक दायित्व से।

16. लोक अदालत की सभी कार्यवाहियाँ न्यायिक कार्यवाही होगी निम्नलिखित में से किसके अर्थ में?

Correct Answer: (c) धारा 193, 219 एवं 228 भा. द. स., 1860
Solution:विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 19(5) के अनुसार, लोक अदालत की सभी कार्यवहियां भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 193, धारा 219 और धारा 228 के अर्थ में न्यायिक कार्यवाही मानी जाती है।

17. "सद्भावपूर्वक" भारतीय दण्ड संहिता में परिभाषित है

Correct Answer: (d) धारा 52 के अन्तर्गत
Solution:भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 52 सद्भावपूर्वक की व्याख्या करती है। इस धारा के अनुसार, सद्भावपूर्वक से तात्पर्य है किसी कार्य को उचित सावधानी, ध्यान और विश्वास के साथ करना।

18. कोई पति, अलग रह रही या पृथकता के डिक्री या अन्यथा रूप में अलग रह रही अपनी पत्नी के साथ उसकी सहमति के बिना यौन सम्बन्ध बनाता है, तो वह भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा में दण्डित किया जाएगा?

Correct Answer: (a) धारा 376B
Solution:भारतीय दण्ड संहिता 1860 की धारा 376B के अनुसार जो कोई अपनी पत्नी के साथ जो पृथककरण की डिक्री के अधीन या अन्यथा पृथक् रह रही हो, उसकी सहमति के बिना मैथुन करेगा वह दोनों में से किसी भांति के कारास से जिसकी अवधि 2 वर्ष से कम की नहीं होगी किन्तु जो 7 वर्ष तक की हो सकेगी, दण्डित किया जायेगा और जुर्माने से भी दण्डनीय होगा।

19. निम्नलिखित में से कौन सही सुमेलित है?

सूची-Iसूची-II
(a)अपकृत्य विधिपर्सी एच. विनफील्ड
(b)राइट इन परसोनमअपकृत्य
(c)टॉर्टमफ्रेंच शब्द
(d)अपकृत्यों की विधिजॉन ऑस्टिन
Correct Answer: (a)
Solution:अपकृत्य विधि का सिद्धान्त पर्सी एच. विनफिल्ड ने दिया था। राइट इन परसोनम अर्थात् व्यक्तिगत अधिकार एक कानूनी अधिकार है जो किसी व्यक्ति के पास किसी अन्य विशिष्ट व्यक्ति या समूह के विरूद्ध होता है। 'टॉर्टम' एक लैटिन शब्द है जिसे 'टॉर्ट' शब्द व्युत्पन्न हुआ है। अपकृत्य विधि को 'अपकृत्यों की विधि' आस्टिन ने नहीं बल्कि सामण्ड ने कहा था।

20. विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की निम्नलिखित में से कौन-सी धारा में यह प्रावधान है। कि लोक अदालत द्वारा दिया गया प्रत्येक पंचाट वाद के सभी पक्षकारों पर अन्तिम और बाध्यकारी होगा?

Correct Answer: (a) धारा 21 (2)
Solution:विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 की धारा 21 (2) में प्रावधान है कि लोक अदालत द्वारा दिया गया प्रत्येक निर्णय अंतिम और बाध्यकारी होता और उसके खिलाफ किसी भी न्यायालय में अपील नहीं किया जा सकता है।