उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा, 2022 विधि

Total Questions: 70

21. निम्नलिखित में से किस विधिशास्त्री को अंग्रेजी विधिशास्त्र का पिता कहा जाता है?

Correct Answer: (a) ऑस्टिन
Solution:अंग्रेजी विधिशास्त्र के जनक जॉन ऑस्टिन को माना जाता है। उन्होंने विधि के सैद्धान्तिक अध्ययन को विधिशास्त्र के रूप में परिभाषित किया और विश्लेषणात्मक विधिवाद नामक विधिशास्त्र के एक स्कूल की नींव रखी।

22. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित करें और सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए।

सूची-Iसूची-II
(A)बोरहिल बनाम यंगIमानहानि
(B)स्टर्जेस बनाम बिडगमेनIIउपद्रव
(C)ग्लाउसेस्टर बनाम ग्रामर स्कूलIIIअसावधानी
(D)न्यूस्टेड बनाम लन्दन एक्सप्रेस न्यूज़पेपर्सIVडैम्नम साइन इंजूरिया

कूट :

Correct Answer: (d) (A)-III, (B) -II, (C)-IV, (D)-I
Solution:सही सुमेल इस प्रकार है:-

(i)बोरहिल बनाम् यंग असावधानी
(ii) स्टर्जेस बनाम् बिजमैन उपताप
(iii) ग्लाउसेस्टर बनाम् ग्रामर स्कूल डेमनम साइन इंजुरिया
(iv) न्यूज्स्टीड बनाम् लन्दन एक्सप्रेस न्यूजपेपर्स मानहानि

23. वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 निम्नलिखित में से किस एक का प्रावधान नहीं करता है?

Correct Answer: (a) पब्लिक पार्क
Solution:वन्य जीव संरक्षण अधिनियम, 1972 पब्लिक पार्क का प्रावधान नहीं करता है। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य वन्यजीवों और उनकी आवास की रक्षा करना है, जिसमें राष्ट्रीय उद्यान, अभ्यारण्य और संरक्षित क्षेत्र शामिल हैं।

24. "पूर्णदायित्व के सिद्धान्त" का प्रतिपादन करते हुए भारत के उच्चतम न्यायालय के निम्न किस मुख्य न्यायाधीश द्वारा निदेशक वाद एम. सी. मेहता बनाम भारत संघ (1986) में निर्णय दिया गया?

Correct Answer: (d) न्यायमूर्ति पी. एन. भगवती
Solution:एम. सी. मेहता बनाम् भारत संघ (1986) के मामले में न्यायाधीशों की एक तीन सदस्यीय पीठ ने निर्णय सुनाया था, जिसमें मुख्य न्यायाधीश पी.एन. भगवती, न्यायमूर्ति डी.पी. मदन और न्यायमूर्ति जी. ओझा शामिल थे।

इस मामलें में मुख्य न्यायाधीश पी. एन. भगवती ने पूर्णदायित्व के सिद्धान्त का प्रतिपादन किया। इस मामले में अदालत ने श्रीराम फूड्स एण्ड फर्टिलाइजर्स के स्वामित्व वाले क्लोरीन संयंत्र को पुनः खोलने की अनुमति दी जानी चाहिए या नहीं, इस पर विचार किया था।

25. निम्नलिखित में से कौन अपराध की सही अवस्था है?

Correct Answer: (b) आशय, तैयारी, प्रयास, कृत की पूर्णता
Solution:अपराध कारित करने का सही क्रम है- आशय, तैयारी, प्रयास और कृत की पूर्णता

26. जहाँ कि किसी करार के दोनों पक्षकार ऐसी तथ्य की बात के बारे में, जो करार के लिए मर्मभूत है, भूल में हो, वह करार

Correct Answer: (c) शून्य है
Solution:भारतीय संविदा अधिनियम 1872 की धारा 20 के अनुसार जहाँ किसी करार के दोनों पक्षकार ऐसे तथ्य के बारे में जो करार के लिए मर्मभूत है, भूल में हो तो करार शून्य होगा। इस धारा का उद्देश्य उन परिस्थितियों में न्याय प्रदान करना है जहाँ एक पक्षकार को करार के लिए महत्वपूर्ण तथ्य के बारे में जानकारी नहीं होती है।

27. निम्नलिखित में से किसने मान्यता के घोषणात्मक सिद्धान्त का समर्थन नहीं किया?

Correct Answer: (a) ऑस्टिन
Solution:मान्यता का घोषणात्मक सिद्धांत यह कहता है कि राज्य का अस्तित्व और कानूनी अधिकार पहले से मौजूद होते हैं और मान्यता केवल एक औपचारिक स्वीकृति है, जो पहले से मौजूद तथ्यों की पुष्टि करती है। इसके समर्थकों में विगनर हाल, फिशर, ब्रियल आदि थे। ऑस्टिन ने इसका समर्थन नहीं किया था।

28. हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 17 के अनुसार द्विविवाह भारतीय दण्ड संहिता, 1860 की किस धारा धाराओं के अन्तर्गत दण्डनीय अपराध है?

Correct Answer: (a) धारा 494 एवं 495
Solution:हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 17 के अनुसार यदि कोई व्यक्ति पहले विवाहित होने के बावजूद दूसरा विवाह करता है, तो वह विवाह शून्य होगा और उस पर भारतीय दण्ड संहिता की धारा 494 और 495 लागू होंगी।

29. निम्नलिखित में से किस परिस्थिति में असम्भवता का सिद्धान्त लागू नहीं होगा?

Correct Answer: (c) कुल व्यवसायिक कठिनाइयाँ
Solution:व्यवसायिक कठिनाइयों पर संविदा के नैराश्य सिद्धान्त लागू नही होता है। जबकि परिकल्पित घटना का घटित न होना, पक्षकार की मृत्यु या अक्षमता तथा विषयवस्तु का नष्ट हो जाना, संविदा को असंभव बना देता है अतः इस पर संविदा के नैराश्य का सिद्धान्त लागू होता है।

30. भारत के किस राज्य में प्रथम लोक अदालत प्रारम्भ किया गया?

Correct Answer: (a) गुजरात
Solution:लोक अदालत वैकल्पिक विवाद निवारण तंत्रों में से एक है, यह एक ऐसा मंच है जहाँ लंबित विवादों मामलों या सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा समझौता किया जाता है। भारत में पहला लोक अदालत शिविर 1982 में गुजरात में आयोजित किया गया था हांलाकि इसे वैधानिक दर्जा विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 द्वारा दिया गया।