उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा चयन आयोग असिस्टेंट प्रोफेसर परीक्षा, 2022 विधि

Total Questions: 70

31. निम्नलिखित में से कौन अन्तर्राष्ट्रीय विधि का अपेक्षाकृत सर्वाधिक महत्व का स्रोत है?

Correct Answer: (c) संधियाँ का रूढ़ियाँ
Solution:अन्तर्राष्ट्रीय विधि का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत अन्तर्राष्ट्रीय संधियाँ हैं। अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) के संविधि के अनुच्छेद 38 (1) (a)में संधियों को अन्तर्राष्ट्रीय विधि के प्राथमिक स्त्रोत के रूप में स्वीकार किया गया है।

32. "स्वामित्व किसी चीज पर सम्पूर्ण नियंत्रण है।" स्वामित्व की यह परिभाषा दिया गया है

Correct Answer: (a) हालैण्ड द्वारा
Solution:हॉलैण्ड ने स्वामित्व को "किसी चीज का पूर्ण नियंत्रण" के रूप में परिभाषित किया है। उन्होंने स्वामित्व को किसी व्यक्ति के पास किसी वस्तु पर मौजूद सभी अधिकारों के समूह के रूप में देखा,

जिसमें उसका उपयोग करने, उसका आनंद लेने तथा उसका निपटान करने का अधिकार भी शामिल है। सॉमण्ड के अनुसार, स्वामित्व का अर्थ है एक व्यक्ति, एक वस्तु के बीच संबंध जिसमें व्यक्ति को उस वस्तु पर अधिकार प्राप्त होता है।

यह अधिकार अनिश्चित उपयोग के लिए, अनियन्त्रित निपटान के लिए और असीमित अवधि के लिए होता है। रेनर के अनुसार, स्वामित्व की दो अवधारणाओं को मान्यता दी जानी चाहिए - सार्वजनिक और निजी ।

33. निम्नलिखित में से कौन-सा मूलाधिकार आपात उद्घोषणा की अवधि में स्थगित नहीं किया जा सकता है?

I. अनुच्छेद 20
II. अनुच्छेद 21

सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (b) I एवं II दोनों
Solution:भारतीय संविधान के अनुच्छेद 359 के अनुसार, अनुच्छेद 20 और 21 को छोड़कर अन्य सभी मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन को राष्ट्रपति के आदेश द्वारा निलंबित किया जा सकता है।

34. किस वाद में लार्ड कॉलरिज ने अन्तर्राष्ट्रीय विधि को इस प्रकार परिभाषित किया है "राष्ट्रों की विधि उन प्रथाओं का संग्रह है जिन्हें सभ्य समाज एक दूसरे के व्यवहारों में पालन करने के लिए सहमत है?

Correct Answer: (c) क्वीन बनाम केयान
Solution:लॉर्ड कॉलरिज ने क्वीन बनाम् केयान के वाद में अन्तर्राष्ट्रीय कानून को "उन प्रथाओं के संग्रह के रूप में परिभाषित किया है, जिनका पालन सभ्य राष्ट्र एक-दूसरे के साथ अपने व्यवहार में करने के लिए सहमत हुये है।"

इस परिभाषा का उल्लेख अन्य मामलों में किया गया है, जैसे वेस्ट रैण्ड सेंट्रल गोल्ड माइनिंग केस तथा एस एस लोटस । किन्तु पहली बार इस परिभाषा का उल्लेख क्वीन बनाम् केयान केस में हुआ था, इसलिए सही उत्तर क्वीन बनाम केयान होगा।

35. राइलैंड्स बनाम फ्लेचर में कठोर दायित्व का नियम किसके द्वारा स्थापित किया गया था?

Correct Answer: (c) न्यायमूर्ति ब्लैक बर्न
Solution:कठोर दायित्व की अवधारणा की उत्पत्ति अंग्रेजी मामले रायलैंड्स बनाम् फ्लेचर (1868) में हुई थी। यह सिद्धांत जस्टिस ब्लैक बर्न द्वारा स्थापित किया गया था। यद्यपि उन्होंने इसे पूर्ण दायित्व कहा था किन्तु बाद में विधिक विद्वान विनफिल्ड ने इसे कठोर दायित्व कहा।

जस्टिस पी.एन. भगवती ने एम सी मेहता बनाम भारत संघ (1985) के मामले में कठोर दायित्व के सिद्धान्त पर विचार किया और इसे पूर्ण दायित्व के सिद्धान्त से जोड़ा।

36. निम्नलिखित में से विधि का कौन-सा प्रावधान लोक अदालत के द्वारा न्यायिक समझौते को प्रतिष्ठापित करता है?

Correct Answer: (d) सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 89
Solution:सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 की धारा 89 लोक अदालत के द्वारा न्यायिक समझौते को स्थापित करती है। यह धारा न्यायालय को वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR) तरीकों जैसे कि मध्यस्थता, सुलह, और लोक अदालत को मामला भेजने के लिए सशक्त करती है।

यदि लोक अदालत के माध्यम से समझौता होता है, तो न्यायालय उस समझौते को न्यायिक समझौते के रूप में मान्यता देगा।

37. पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के उद्देश्य हैं

1.पर्यावरण का सुरक्षा
2. पर्यावरण का सुधार
3. मानव के लिए खतरनाक चीजों से रक्षोपाय

सही उत्तर चुनिएः

Correct Answer: (b) 1 और 2 दोनों
Solution:पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 का उद्देश्य पर्यावरण की सुरक्षा और संवर्धन करना है। यह कानून केन्द्र सरकार को विभिन्न रूपों में पर्यावरण प्रदूषण को रोकने और क्षेत्र विशिष्ट पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान करने के लिये निकायों की स्थापना करने का अधिकार देता है।

38. "बाह्य नैतिकता आकांक्षा की नैतिकता है।" यह कथन किसका है?

Correct Answer: (d) लान, एल. फुलर
Solution:लोन. एल. फुलर कहते हैं कि बाध्य नैतिकता आकांक्षा की नैतिकता है जबकि आंतरिक नैतिकता कर्तव्य की नैतिकता है।

39. "विधि का विकास एक क्रमिक एवं जैविक प्रक्रिया है।" इसे किसने कहा था?

Correct Answer: (b) सैविनी
Solution:ऐतिहासिक न्यायशास्त्र स्कूल के प्रमुख विधिशास्त्री सैविनी ने कहा था कि विधि का विकास एक क्रमिक एवं जैविक प्रक्रिया है। उनका मानना था कि कानून समाज के भीतर स्वाभाविक रूप से विकसित होता है, भाषा की तरह 'वोक्सजेइस्ट' (जनभावना) से प्रभावित होता है।

40. संविदा विधि, 1872 की निम्नलिखित कौन-सी धारा इसका समर्थन करती है कि एक प्रस्थापना की प्रतिग्रहण की संसूचना संविदा गठित करने के लिए आवश्यक नहीं होता है?

Correct Answer: (d) धारा 4
Solution:भारतीय संविदा अधिनियम, 1872 की धारा 4 प्रस्ताव की स्वीकृति की संसूचना और उसके पूर्ण होने का प्रावधान करती है।

धारा 4 के अनुसार हर परिस्थिति में ये आवश्यक नही होता कि प्रस्ताव की स्वीकृति की संसूचना प्रस्तावक को दी जाये। प्रस्ताव में उल्लिखित शत का पालन संविदा गठित करने के लिए पर्याप्त है।