उद्योग क्षेत्र (अर्थव्यवस्था)

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1. निम्नलिखित में से कौन उदारीकरण की प्रमुख विशेषता नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 20 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के इक्विटी शेयरों का हिस्सा जनता को बेचना
Solution:
  • उदारीकरण का अर्थ है बाजार को मुक्त करना अथवा उस पर से अनावश्यक सरकारी नियंत्रण को कम करना।
  • इसकी विशेषता लघु उद्योग के लिए माल का अनारक्षण, औद्योगिक लाइसेंसिंग को समाप्त करना तथा कीमतों के निर्धारण की स्वायत्ता, ब्याज दरों एवं टैरिफ में कमी आदि है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के इक्विटी शेयरों का हिस्सा जनता को बेचना इसका हिस्सा नहीं है।
  • उदारीकरण की प्रमुख विशेषताएं
    • उदारीकरण की मुख्य विशेषताएं सरकारी हस्तक्षेप घटाने, बाजार को स्वतंत्रता देने और आर्थिक विकास को गति प्रदान करने पर केंद्रित हैं।
    • औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली को समाप्त या सरलीकृत करना, ताकि नए उद्योग आसानी से स्थापित हो सकें।
    • वस्तुओं और सेवाओं के आयात-निर्यात पर लगी बाधाओं (जैसे कोटा, परमिट) को हटाना या कम करना।​​
    • ब्याज दरों, टैरिफ और करों में कमी लाना, जिससे व्यापार सस्ता और प्रतिस्पर्धी बने।​
    • निजी क्षेत्र को अधिक क्षेत्रों में प्रवेश की अनुमति देना और सार्वजनिक क्षेत्र के एकाधिकार को समाप्त करना (जैसे रक्षा, परमाणु ऊर्जा को छोड़कर)।​
    • विदेशी निवेश और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को प्रोत्साहन, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के द्वार खोलना।
    • बाजार की मांग-आपूर्ति शक्तियों को कीमत निर्धारण की स्वतंत्रता देना, सरकारी नियंत्रण हटाना।​
    • नियमों में नम्यता लाना, नौकरशाही हस्तक्षेप कम करना और पारदर्शी प्रशासन स्थापित करना।​
    • ये विशेषताएं आर्थिक विकास को बाधित करने वाली पुरानी नीतियों (जैसे लाइसेंस राज) को दूर करने पर जोर देती हैं
    • जिससे आत्मनिर्भरता, प्रतिस्पर्धा और रोजगार सृजन बढ़े।
  • उदारीकरण की प्रमुख विशेषता नहीं: निजीकरण
    • निम्नलिखित में से "सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के इक्विटी शेयरों का हिस्सा जनता को बेचना" (Disinvestment of public sector enterprises by selling equity shares to the public) उदारीकरण की प्रमुख विशेषता नहीं है।​
    • यह निजीकरण (Privatization) की विशेषता है, जहां सार्वजनिक क्षेत्र के स्वामित्व या नियंत्रण को निजी हाथों में स्थानांतरित किया जाता है।
    • उदाहरणस्वरूप, भारत पेट्रोलियम, LIC या एयर इंडिया जैसे उपक्रमों में सरकारी हिस्सेदारी बेचना निजीकरण का हिस्सा है।​
    • उदारीकरण में निजीकरण शामिल हो सकता है, लेकिन यह मुख्य रूप से नियंत्रण ढीला करने (Deregulation) पर केंद्रित है
    • निजीकरण LPG का अलग स्तंभ है।
  • उदारीकरण का अर्थ और पृष्ठभूमि
    • उदारीकरण से तात्पर्य आर्थिक गतिविधियों पर सरकारी प्रतिबंधों को कम करना है, ताकि बाजार स्वयं अर्थव्यवस्था को निर्देशित करे।
    • भारत में 1991 के संकट (भुगतान संतुलन की कमी, उच्च मुद्रास्फीति) के बाद मनमोहन सिंह सरकार ने इसे अपनाया।
    • इससे पहले, 1950-80 के दशक में 'लाइसेंस परमिट राज' था, जहां हर उद्योग के लिए सरकारी अनुमति जरूरी थी।
    • उदारीकरण ने औद्योगिक क्षेत्रक, वित्तीय क्षेत्रक, विदेशी व्यापार और निवेश को प्रभावित किया।​
  • उदारीकरण के उद्देश्य
    • आर्थिक विकास की रुकावटें दूर करना, जैसे नौकरशाही और सरकारी हस्तक्षेप।​
    • बाजार शक्तियों को स्वतंत्रता, प्रतिस्पर्धा बढ़ाना और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बनाना।
    • विदेशी पूंजी और प्रौद्योगिकी को आकर्षित करना, निर्यात बढ़ाना।​
    • कर्ज बोझ कम करना और वैश्विक एकीकरण।​
  • भारत पर प्रभाव
    • उदारीकरण ने भारतीय अर्थव्यवस्था को बदल दिया। सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि दर 1991 से पहले 3-4% से बढ़कर 6-8% हो गई।​
    • सकारात्मक: विदेशी निवेश बढ़ा (FDI स्टॉक 2025 तक $1 ट्रिलियन के करीब), निर्यात दोगुना, IT-टेलीकॉम जैसे क्षेत्र फले।​
    • नकारात्मक: असमानता बढ़ी, छोटे उद्योगों पर दबाव, कृषि उपेक्षित रही।​
    • 2026 तक, LPG मॉडल जारी है, लेकिन आत्मनिर्भर भारत अभियान के साथ संतुलन बनाया जा रहा है।

2. उदारीकरण के लिए निम्नलिखित में से किस विधि का उपयोग किया जा सकता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) अधिकांश उद्योगों में लाइसेंसिंग अनिवार्यता को समाप्त करना
Solution:
  • उदारीकरण के लिए जिस विधि का उपयोग किया जा सकता है, वह है
  • अधिकांश उद्योगों में लाइसेंसिंग अनिवार्यता को समाप्त करना, विदेशी व्यापार के लिए अवसर तथा विदेशी निवेश आदि निधि का प्रयोग करना।
  • उदारीकरण के प्रमुख उपाय
    • लाइसेंसिंग प्रणाली को सरल और न्यूनतम बनाना, जिससे उद्योगों को स्थापना के लिए कम अनुमतियाँ चाहिए।​
    • आयात-निर्यात नीतियों को उदार बनाना, जैसे कोटा और उच्च शुल्क हटाना।​
    • वस्तुओं एवं सेवाओं के आवागमन पर लगी बाधाओं को समाप्त करना।​
    • कीमत नियंत्रण हटाकर उत्पादकों को मूल्य निर्धारण की स्वतंत्रता देना।
    • इंस्पेक्टर राज समाप्त करना और नियामक बोर्डों को सीमित करना।​
    • ये उपाय उद्योगों को बाजार शक्तियों पर निर्भर बनाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, भारत में औद्योगिक लाइसेंस केवल 6-18 उद्योगों तक सीमित कर दिए गए।​
  • भारत में उदारीकरण की प्रक्रिया
    • भारत में उदारीकरण 1991 की नई आर्थिक नीति का हिस्सा था
    • जिसमें LPG (Liberalization, Privatization, Globalization) मॉडल अपनाया गया।
    • वित्त मंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यह शुरू हुआ।​
    • वित्तीय क्षेत्र में बैंकों को ब्याज दरें स्वतंत्र रूप से तय करने की अनुमति दी गई।
    • बीमा क्षेत्र में निजी प्रवेश की अनुमति मिली। सार्वजनिक क्षेत्र को रक्षा, रेलवे जैसे सामरिक क्षेत्रों तक सीमित किया गया।
  • उदारीकरण के उद्देश्य और लाभ
    • उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, नौकरशाही कम करना और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाना है।
    • इससे GDP वृद्धि हुई, विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ा।​
    • हानियाँ भी हैं, जैसे असमानता बढ़ना और छोटे उद्योगों पर दबाव।
    • फिर भी, यह बाजार अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण का माध्यम बना।​
  • कार्यान्वयन की विधियाँ विस्तार से
    • प्रशासनिक सुधार: परमिट-लाइसेंस शासन समाप्त, पारदर्शिता बढ़ाना।​
    • कर सुधार: कर दरें घटाकर निवेश आकर्षित करना।
    • निजीकरण संयोजन: सार्वजनिक कंपनियों के शेयर बेचना (विनिवेश)।​
    • विनियमन: स्टॉक मार्केट को SEBI जैसे नियामक नियंत्रित करना।​
    • ये विधियाँ चरणबद्ध रूप से लागू की जाती हैं ताकि अर्थव्यवस्था स्थिर रहे।
    • भारत में 1991 से 2026 तक यह प्रक्रिया जारी है, हालाँकि कोविड के बाद कुछ नियंत्रण बढ़े।​

3. निम्नलिखित में से कौन-सा, भारत में पहली बार निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए औद्योगिक गतिविधियों को आरक्षित करने का कारण बना? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) औद्योगिक नीति संकल्प, 1956
Solution:
  • औद्योगिक नीति संकल्प, 1956 औद्योगीकरण के विकास की प्रक्रिया में सरकारी क्षेत्र द्वारा निभाई गई प्रमुख भूमिका का विरोध था।
  • यह भारत में पहली बार निजी और सार्वजनिक क्षेत्रों के लिए औद्योगिक गतिविधियों को आरक्षित करने का कारण बना।
  • वर्ष 1956 का औद्योगिक नीति संकल्प, योजना आयोग की वैकल्पिक पंचवर्षीय योजना का आधार बना।
  • नीति का ऐतिहासिक संदर्भ
    • जैसे रेलवे, परमाणु ऊर्जा, पूरी तरह राज्य के स्वामित्व वाले), अनुसूची B (12 उद्योग, जैसे एल्यूमिनियम, उर्वरक, जहां राज्य की प्रमुख भूमिका), और अनुसूची C (शेष उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुले)।
    • इसने पहली बार स्पष्ट रूप से निजी क्षेत्र को सीमित करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी।
  • प्रमुख विशेषताएं और प्रभाव
    • सार्वजनिक क्षेत्र का विस्तार: नीति ने भारी उद्योगों को राज्य के नियंत्रण में रखा ताकि आत्मनिर्भरता बढ़े और पूंजीगत वस्तुओं का उत्पादन हो सके।
    • उदाहरणस्वरूप, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया (सेल) और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (भेल) जैसे संस्थान इसी नीति से प्रेरित हुए।​
    • निजी क्षेत्र का नियमन: निजी क्षेत्र को लाइसेंस राज के तहत विनियमित किया गया
    • जहां उत्पादन वृद्धि या नई इकाइयों के लिए सरकारी अनुमति जरूरी थी।
    • इससे क्षेत्रीय असंतुलन कम करने और छोटे पैमाने के उद्योगों को बढ़ावा मिला।
    • मिश्रित अर्थव्यवस्था: सार्वजनिक क्षेत्र 'आदेश के क्षेत्र' के रूप में और निजी क्षेत्र 'विकास के क्षेत्र' के रूप में कार्य करने को कहा गया।​
  • पूर्ववर्ती नीतियों से तुलना
    • 1948 की नीति ने उद्योगों को चार वर्गों (राज्य के एकाधिकार वाले, मिश्रित, विनियमित, अविभाजित) में बांटा, लेकिन आरक्षण स्पष्ट नहीं था।
    • उद्योग विकास एवं विनियमन अधिनियम 1951 ने नियंत्रण की रूपरेखा दी, पर आरक्षण 1956 में ही पहली बार लागू हुआ।
    • 1945 की नीति (स्वतंत्रता पूर्व) मुख्यतः प्रोत्साहन पर केंद्रित थी।​
  • दीर्घकालिक परिणाम
    • इस नीति ने 1991 के उदारीकरण तक भारत की औद्योगिक संरचना को आकार दिया
    • लेकिन लाइसेंस राज ने निजी निवेश को बाधित किया।
    • 1991 में नई नीति ने सार्वजनिक क्षेत्र को केवल 8 उद्योगों तक सीमित कर दिया।
    • कुल मिलाकर, 1956 का संकल्प समाजवादी मॉडल पर आधारित भारत के औद्योगिक विकास की नींव बना।

4. औद्योगिक नीति संकल्प 1956 की अनुसूची A में ऐसे उद्योग शामिल हैं, जो ....... होंगे। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) विशेष रूप से राज्य के स्वामित्व में
Solution:
  • औद्योगिक नीति संकल्प, 1956 की अनुसूची-ए में ऐसे उद्योग शामिल हैं
  • जो विशेष रूप से राज्य के स्वामित्व में (सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित) हैं। इसमें 17 उद्योग शामिल थे, जो राज्य की विशेष जिम्मेदारी थे।
  • अनुसूची A के उद्योग
    • नीति ने स्पष्ट रूप से 17 उद्योगों को सूचीबद्ध किया, जो राज्य के एकाधिकार वाले थे:
    • हथियार और गोला-बारूद
    • परमाणु ऊर्जा
    • लोहा और इस्पात
    • भारी इंजीनियरिंग और मशीनरी
    • भारी कास्टिंग और फोर्जिंग
    • महत्वपूर्ण खनिज (जैसे कोयला, खनिज तेल)
    • रेलवे परिवहन
    • समुद्री परिवहन
    • हवाई परिवहन
    • टेलीग्राफ, वायरलेस और प्रसारण
    • मुद्रा प्रेसिंग
    • रक्षा उत्पादन।
    • ये उद्योग राष्ट्रीय हितों से जुड़े थे, जहां निजी क्षेत्र की भागीदारी जोखिमपूर्ण मानी गई।
  • नीति का ऐतिहासिक महत्व
    • 1948 की नीति ने उद्योगों को चार वर्गों में बांटा था लेकिन आरक्षण अस्पष्ट था।
    • 1956 ने पहली बार स्पष्ट वर्गीकरण किया, जिससे सार्वजनिक क्षेत्र मजबूत हुआ।
    • इसने भिलाई, राउरकेला, दुर्गापुर स्टील प्लांट्स जैसे प्रोजेक्ट्स को जन्म दिया।
    • लाइसेंस राज के साथ यह मिश्रित अर्थव्यवस्था की नींव बनी।
  • प्रभाव और परिवर्तन
    • सकारात्मक: भारी उद्योगों में आत्मनिर्भरता बढ़ी, जैसे सेल और भेल का विकास।
    • नकारात्मक: निजी निवेश सीमित हुआ, अक्षमता बढ़ी।
    • कुल मिलाकर, यह नीति ने भारत को औद्योगिक आधार प्रदान किया लेकिन उदारीकरण की आवश्यकता भी उजागर की।

5. औद्योगिक नीति संकल्प, 1956 के तहत कितने उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) 17
Solution:
  • औद्योगिक नीति संकल्प, 1956 के तहत 17 उद्योगों को सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया है, इन्हें अनुसूची-ए में रखा गया है।
  • नीति का पृष्ठभूमि
    • इसका मुख्य उद्देश्य समाजवादी पैटर्न की स्थापना करना
    • आर्थिक विकास को गति देना और भारी उद्योगों पर राज्य का नियंत्रण सुनिश्चित करना था।
    • यह नीति सभी पंचवर्षीय योजनाओं का आधार बनी रही।
  • उद्योगों का वर्गीकरण
    • नीति ने उद्योगों को तीन अनुसूचियों में बांटा:
    • अनुसूची A: 17 उद्योग जो पूर्णतः राज्य के स्वामित्व और नियंत्रण में आरक्षित थे। इनमें रक्षा, परमाणु ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल थे।​​
    • अनुसूची B: 12 उद्योग जहां राज्य नए उद्यम स्थापित करेगा, लेकिन निजी क्षेत्र को पूरक भूमिका निभाने का अवसर मिलेगा।​
    • अनुसूची C: शेष सभी उद्योग, जो सामान्यतः निजी क्षेत्र के लिए खुले थे।​
    • यह वर्गीकरण ने "कमांडिंग हाइट्स" को सार्वजनिक क्षेत्र के हवाले करने का सिद्धांत अपनाया।​
  • अनुसूची A के 17 आरक्षित उद्योग
    • ये उद्योग राष्ट्र की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माने गए और इन्हें केवल सार्वजनिक क्षेत्र के लिए आरक्षित किया गया। सूची इस प्रकार है:​​
    • हथियार और गोला-बारूद तथा संबद्ध उपकरण।
    • परमाणु ऊर्जा और परमाणु ईंधन।
    • भारी कास्टिंग और फोर्जिंग वाले भारी संयंत्र।
    • लौह और इस्पात।
    • कोयला।
    • लौह अयस्क।
    • तांबा, सीसा और जस्ता अयस्क।
    • मशीनरी और उपकरण निर्माण उद्योग को छोड़कर अन्य खनिज तेल।
    • खनिज ईंधन और खनिज तेल रिफाइनरी।
    • समुद्री परिवहन।
    • हवाई परिवहन।
    • रेलवे परिवहन।
    • नदी परिवहन।
    • पनबिजली (बुनियादी स्थापना को छोड़कर)।
    • बिजली उत्पादन, संचरण और वितरण।
    • लौह अयस्क के अलावा अन्य खनिजों का खनन।
    • रक्षा उद्योग।
    • ये उद्योग पांच प्रमुख वर्गों में बांटे गए थे: रक्षा, भारी उद्योग, खनिज, परिवहन-संचार और विद्युत।​
  • नीति की विशेषताएं और प्रभाव
    • नीति ने राज्य की भूमिका को मजबूत किया, विशेषकर भारी उद्योगों में।
    • कर्मचारियों-प्रबंधन सहयोग, पिछड़े क्षेत्रों में सुविधाएं और संतुलित विकास पर जोर दिया।
    • इससे सार्वजनिक क्षेत्र मजबूत हुआ, लेकिन बाद में 1991 की उदारीकरण नीति ने इन आरक्षणों को कम किया।
  • बाद के परिवर्तन
    • हालांकि मूल रूप से 17 थे, समय के साथ कुछ उद्योगों से आरक्षण हटाया गया
    • लेकिन 1956 के संकल्प के तहत आरक्षण संख्या 17 ही मानी जाती है।
    • यह नीति ने भारत को आत्मनिर्भर बनाने का आधार दिया।​

6. एमएसएमई 2020 की नई परिभाषा के अनुसार, मध्यम उद्योग का पण्यावर्त (टर्नओवर) कितनी राशि से अधिक नहीं होना चाहिए? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 250 करोड़ रु.
Solution:
  • एमएसएमई 2020 की नई परिभाषा के अनुसार, मध्यम उद्योग जिनमें 50 करोड़ रुपये से अधिक नहीं का निवेश और 250 करोड़ रुपये से अधिक नहीं का टर्नओवर है
  • परिभाषा का पृष्ठभूमि
    • भारत सरकार ने 1 जून 2020 से एमएसएमई अधिनियम 2006 में संशोधन कर नई श्रेणीकरण प्रणाली लागू की
    • जिसमें निवेश के साथ-साथ टर्नओवर को भी आधार बनाया गया।
    • इससे पहले केवल निवेश पर आधारित था।
    • मध्यम उद्योग के लिए टर्नओवर 250 करोड़ रुपये और निवेश 50 करोड़ रुपये की सीमा तय की गई।
    • यह बदलाव उद्योगों को सरकारी योजनाओं, ऋण गारंटी और सब्सिडी जैसे लाभों के लिए पात्र बनाता है।
  • महत्वपूर्ण लाभ
    • मध्यम उद्योगों को प्राथमिकता क्षेत्र ऋण, क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) के तहत बिना गारंटी ऋण, और विभिन्न सब्सिडी मिलती हैं।
    • टर्नओवर 250 करोड़ तक रखने से ये इकाइयां बड़े उद्योगों से अलग रहकर विशेष छूट प्राप्त करती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, COVID राहत पैकेज में इन्हें 10 करोड़ तक के ऋण पर पूर्ण गारंटी कवर मिला।​
  • हालिया अपडेट नोट
    • ध्यान दें कि 2025 में केंद्रीय बजट के बाद संशोधन हुए, जहां मध्यम उद्योग का टर्नओवर 500 करोड़ तक बढ़ा दिया गया।
    • लेकिन प्रश्न स्पष्ट रूप से "2020 की नई परिभाषा" का उल्लेख करता है, इसलिए सीमा 250 करोड़ रुपये ही लागू होती है।
    • वर्तमान में (जनवरी 2026), Udyam रजिस्ट्रेशन अपडेटेड मानदंडों पर आधारित है, लेकिन 2020 संस्करण के लिए 250 करोड़ मानक है।

7. भारतीय नीति संकल्पना 1956 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग अनुसूची A श्रेणी का हिस्सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) खनन
Solution:
  • भारतीय नीति संकल्पना 1956 के अनुसार, अनुसूची-ए के अंतर्गत आने वाले कुछ क्षेत्रों में हथियार और गोला बारूद, परमाणु ऊर्जा, लोहा और इस्पात, भारी मशीनरी, खनिज तेल और कोयला आदि शामिल हैं।
  • अनुसूची A का महत्व
    • अनुसूची A के उद्योग वे थे जिनका विकास और नियंत्रण पूरी तरह से राज्य (सरकार) के हाथों में होना था
    • क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए महत्वपूर्ण माने गए।
    • इस श्रेणी में कुल 17 उद्योग शामिल थे, जो भारी उद्योग, रक्षा, ऊर्जा और खनन जैसे क्षेत्रों को कवर करते थे।
    • नीति का उद्देश्य समाजवादी पैटर्न पर आधारित मिश्रित अर्थव्यवस्था स्थापित करना था
    • जहां राज्य ने इन क्षेत्रों में निजी क्षेत्र को प्रवेश की अनुमति नहीं दी।
  • अनुसूची A के उद्योगों की पूर्ण सूची
    • हथियार और गोला-बारूद (Arms and Ammunition)।
    • परमाणु ऊर्जा (Atomic Energy)।
    • लोहा और इस्पात (Iron and Steel)।
    • भारी इंजीनियरिंग और मशीनरी (Heavy Engineering and Machine Tools)।
    • भारी कास्टिंग और फोर्जिंग (Heavy Castings and Forgings)।
    • महत्वपूर्ण खनिज (Atomic Minerals जैसे यूरेनियम आदि)।
    • कोयला (Coal)।
    • लौह अयस्क (Iron Ore)।
    • खनिज तेल (Mineral Oils)।
    • रेलवे परिवहन (Railway Transport)।
    • समुद्री परिवहन (Sea Transport)।
    • वायु परिवहन (Air Transport)।
    • उद्योग का नाम | समूह |
    • हथियार और गोला-बारूद | रक्षा |
    • परमाणु ऊर्जा | ऊर्जा |
    • लोहा और इस्पात | भारी उद्योग || भारी इंजीनियरिंग | भारी उद्योग |
    • कोयला | खनिज |
    • खनिज तेल | खनिज |
    • रेलवे परिवहन | परिवहन
  • नीति का ऐतिहासिक संदर्भ
    • यह नीति अप्रैल 1956 में संसद द्वारा पारित की गई, जो 1948 की IPR का विस्तार थी। 1948 में उद्योगों को केवल चार क्षेत्रों में बांटा गया था
    • लेकिन 1956 ने अधिक स्पष्ट वर्गीकरण किया ताकि दूसरी पंचवर्षीय योजना (1956-61) के लक्ष्यों—भारी उद्योगों पर जोर—को पूरा किया जा सके।
    • अनुसूची B में 12 उद्योग थे (जैसे एल्यूमीनियम, उर्वरक), जहां निजी क्षेत्र को सीमित भूमिका मिली, जबकि अनुसूची C शेष सभी उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुला था।
  • प्रभाव और विरासत
    • इस नीति ने सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत किया, जिससे भिलाई, राउरकेला जैसे इस्पात संयंत्र बने
    • लेकिन बाद में 1991 के उदारीकरण ने इन प्रतिबंधों को हटाया।
    • फिर भी, अनुसूची A के सिद्धांत आज भी रक्षा और परमाणु जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में दिखते हैं।

8. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग का उदाहरण नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी
Solution:
  • टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी एक निजी क्षेत्र की कंपनी है न कि सार्वजनिक क्षेत्र की। शेष सभी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हैं।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी में सरकार की हिस्सेदारी सर्वाधिक (कम से कम 51%) होती है।
  •  ये राष्ट्रीय महत्व के क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, रक्षा, तेल-गैस, स्टील आदि में कार्यरत होते हैं।
  • उपयोगकर्ता ने पूछा है कि "निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग का उदाहरण नहीं है
  • लेकिन विकल्प स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए हैं, इसलिए सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्नों के आधार पर विस्तार से समझाते हैं
  • जैसे कि टेस्टबुक जैसे स्रोतों में NSE (नेशनल स्टॉक एक्सचेंज) को गलत उदाहरण के रूप में लिया जाता है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र उद्योग क्या हैं?
    • सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग (Public Sector Undertakings - PSUs) वे कंपनियां हैं जो केंद्र या राज्य सरकार के स्वामित्व, नियंत्रण और प्रबंधन में होती हैं।
    • इनकी स्थापना आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता के लिए की जाती है।
    • भारत में ये महारत्न, नवरत्न और मिनीरत्न श्रेणियों में वर्गीकृत होते हैं। उदाहरण: ONGC, IOCL, NTPC, SAIL, Coal India आदि।
  • प्रमुख उदाहरण
    • तेल और गैस क्षेत्र: Indian Oil Corporation Ltd (IOCL), Bharat Petroleum Corporation Ltd (BPCL), Oil and Natural Gas Corporation (ONGC), GAIL।
    • ये पेट्रोलियम उत्पादों के शोधन, वितरण और खोज में लगे हैं।​
    • ऊर्जा और बिजली: National Thermal Power Corporation (NTPC), Power Grid Corporation of India, Bharat Heavy Electricals Ltd (BHEL)।
    • NTPC देश की थर्मल पावर का बड़ा हिस्सा उत्पादित करता है।​
    • इस्पात और खनन: Steel Authority of India Ltd (SAIL), Coal India Ltd, NMDC। SAIL भारत का सबसे बड़ा स्टील उत्पादक है।
    • रक्षा और एयरोस्पेस: Hindustan Aeronautics Ltd (HAL), Bharat Electronics Ltd (BEL)। HAL लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर बनाती है।​
  • गैर-सार्वजनिक क्षेत्र का उदाहरण
    • निम्नलिखित में से NSE (National Stock Exchange) सार्वजनिक क्षेत्र का उदाहरण नहीं है। NSE एक स्टॉक एक्सचेंज है
    • जो 1992 में स्थापित हुआ और इसका स्वामित्व विभिन्न निजी संस्थानों, बैंकों और विदेशी निवेशकों के पास है
    • सरकार की बहुमत हिस्सेदारी नहीं है। यह निजी क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। अन्य संभावित गलत उदाहरण हो सकते हैं
    • जैसे Reliance Industries या Tata Steel, जो पूरी तरह निजी हैं।
    • सार्वजनिक क्षेत्र में सरकार का नियंत्रण प्रमुख होता है, जबकि निजी क्षेत्र में निजी निवेशक।

9. स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में राज्य के पास उन उद्योगों का पूर्ण नियंत्रण था, जो ....... थे। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण
Solution:
  • स्वतंत्रता के समय भारत में बहुत कम उद्योग थे, अधिकांश उद्योग सूती वस्त्र, पटसन, आदि तक ही सीमित थे।
  • स्वतंत्रता के प्रारंभिक वर्षों में राज्य के पास उन उद्योगों का पूर्ण नियंत्रण था, जो अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण थे।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत को 1947 में स्वतंत्रता मिलने के बाद अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि-आधारित थी
    • लेकिन औद्योगिक विकास सीमित था। ब्रिटिश काल में स्थापित कुछ उद्योगों को सरकार ने तुरंत अपने नियंत्रण में ले लिया
    • राष्ट्रीय हितों की रक्षा हो सके। इनमें कोयला, लोहा-इस्पात, पेट्रोलियम, रेलवे, रक्षा और भारी मशीनरी जैसे क्षेत्र प्रमुख थे।
  • प्रमुख उद्योग और नियंत्रण का कारण
    • सरकार ने छह बुनियादी उद्योगों (कोयला, लोहा-इस्पात, इस्पात, सीमेंट, पेट्रोलियम, बिजली) पर विशेष ध्यान दिया और नए उपक्रम स्थापित किए।
    • राष्ट्रीयकरण की नीति अपनाई गई, जिसमें निजी क्षेत्र के महत्वपूर्ण उद्योगों को सार्वजनिक स्वामित्व में बदला गया।
    • उदाहरणस्वरूप, रेलवे और परमाणु ऊर्जा पूरी तरह राज्य के अधीन थे।
    • इसका उद्देश्य संसाधनों का समान वितरण, एकाधिकार रोकना और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना था।
  • औद्योगिक नीतियां
    • स्वतंत्रता के तुरंत बाद औद्योगिक नीति संकल्प 1948 जारी किया गया, जिसमें मिश्रित अर्थव्यवस्था का मॉडल अपनाया गया।
    • अनुसूची A के उद्योग (रक्षा, परमाणु ऊर्जा, भारी उद्योग) पूर्ण रूप से राज्य के नियंत्रण में रखे गए।
    • लाइसेंस राज लागू किया गया, जहां नए उद्योग या उत्पादन वृद्धि के लिए सरकारी अनुमति जरूरी थी।
    • यह 1951 के उद्योग (विकास एवं विनियमन) अधिनियम से मजबूत हुआ।​
  • पंचवर्षीय योजनाओं का योगदान
    • पहली पंचवर्षीय योजना (1951-56) से राज्य ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSUs) स्थापित किए
    • जैसे भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL), स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC)।
    • इनका फोकस तेज औद्योगीकरण पर था, जो अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते थे।
    • राज्य नियंत्रण ने निजी क्षेत्र को विनियमित किया, लेकिन बाद में लाइसेंस राज की आलोचना हुई क्योंकि इसने विकास को धीमा कर दिया।
    • 1980 के दशक से उदारीकरण शुरू हुआ।​
  • प्रभाव और चुनौतियां
    • इस नीति से भारत ने आर्थिक स्थिरता हासिल की, लेकिन भारी उद्योगों की कमी और विदेशी निवेश प्रतिबंध ने वृद्धि को प्रभावित किया।
    • स्वतंत्रता के समय उपभोक्ता उद्योग (सूती वस्त्र, जूट, चीनी) प्रमुख थे, लेकिन भारी उद्योग राज्य के हाथों में केंद्रित हो गए।
    • कुल मिलाकर, यह नीति ने मजबूत औद्योगिक आधार तैयार किया।

10. निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त क्षेत्र उद्योग का उदाहरण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) ऑयल इंडिया लिमिटेड
Solution:
  • संयुक्त क्षेत्र के उद्योगों का स्वामित्व और संचालन राज्यों और व्यक्तियों अथवा व्यक्तियों के समूह द्वारा होता है।
  • ऑयल इंडिया लिमिटेड संयुक्त क्षेत्र उद्योग का उदाहरण है, क्योंकि इस पर सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का संयुक्त स्वामित्व है
  • संयुक्त क्षेत्र उद्योग की परिभाषा
    • इनकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य बड़े पैमाने के जोखिम भरे प्रोजेक्ट्स में दोनों पक्षों की विशेषज्ञता का उपयोग करना है
    • जैसे भारी उद्योग या तकनीकी क्षेत्र। उदाहरणस्वरूप, 1981 में भारत सरकार और जापान की सुजुकी कंपनी के सहयोग से मारुति उद्योग लिमिटेड की शुरुआत हुई,
    • जो ऑटोमोबाइल क्षेत्र में संयुक्त क्षेत्र का क्लासिक उदाहरण है।
    • ये उद्योग निजी क्षेत्र के जोखिम से बचाते हैं और सार्वजनिक क्षेत्र को कुशल प्रबंधन प्रदान करते हैं।
    • भारत की औद्योगिक नीति 1956 और बाद की नीतियों में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही, हालाँकि उदारीकरण (1991) के बाद इनकी संख्या घटी है।
  • प्रमुख उदाहरण
    • भारत में संयुक्त क्षेत्र उद्योगों के लोकप्रिय उदाहरण निम्न हैं:
    • मारुति उद्योग लिमिटेड (वर्तमान में मारुति सुजुकी): भारत सरकार (सार्वजनिक) और सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन (निजी विदेशी) का संयुक्त उद्यम।
    • यह छोटी कारों के उत्पादन में अग्रणी रहा और भारतीय मध्यम वर्ग को सस्ती गाड़ियाँ उपलब्ध कराईं।
    • ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL): सरकार और निजी निवेशकों का सहयोग, तेल खोज और उत्पादन में सक्रिय।​
    • गुजरात एल्कलीज़ और गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर: राज्य सरकार और निजी क्षेत्र का मिश्रण, रसायन और उर्वरक क्षेत्र में।
    • अन्य: कन्टेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकॉर), हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स, मंगलौर रिफाइनरी।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • भारत में संयुक्त क्षेत्र की अवधारणा 1970-80 के दशक में विकसित हुई, जब निजी क्षेत्र बड़े उद्योगों से हिचकता था।
    • औद्योगिक नीति संकल्प 1991 ने निजीकरण को बढ़ावा दिया, फिर भी मारुति जैसे उदाहरण सफल रहे।
    • आजकल ये विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) के रूप में विकसित हो गए हैं।​
    • वर्तमान में (2026 तक), संयुक्त उद्यम रक्षा, ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में जारी हैं, लेकिन शुद्ध 'संयुक्त क्षेत्र उद्योग' की श्रेणी धुंधली हो गई है।
  • लाभ और चुनौतियाँ
  • लाभ:
    • जोखिम साझा, पूँजी बढ़ोतरी।
    • तकनीकी हस्तांतरण (जैसे सुजुकी से मारुति को)।
    • रोजगार सृजन और आर्थिक विकास।​
  • चुनौतियाँ:
    • निर्णय लेने में देरी (दो मालिकों के हित भिन्न)।
    • सरकारी हस्तक्षेप से निजी दक्षता प्रभावित।
    • उदारीकरण के बाद कई निजी क्षेत्र में परिवर्तित।​