उद्योग क्षेत्र (अर्थव्यवस्था)

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11. एक लघु उद्यम वह है, जिसमें संयंत्र और मशीनरी में निवेश किस राशि से अधिक नहीं होता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 10 करोड़ रु.
Solution:
  • उन उद्योगों को लघु उद्योग की श्रेणी में रखते हैं, जिन उद्योगों में निवेश 10 करोड़ और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक है।
  • वर्तमान परिभाषा
    • विनिर्माण उद्यमों में लघु उद्यम वह माना जाता है जहां संयंत्र और मशीनरी में मूल निवेश 25 लाख रुपये से अधिक होता है
    • लेकिन 5 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होता। यह सीमा MSMED अधिनियम के तहत वर्गीकृत है
    • जो उद्योगों को सूक्ष्म (1 करोड़ तक), लघु (5 करोड़ तक) और मध्यम (10 करोड़ तक) में बांटती है।
    • सेवा क्षेत्र में यह सीमा अलग है, जहां लघु उद्यम के लिए 2 करोड़ रुपये तक की सीमा है।
  • ऐतिहासिक परिवर्तन
    • पहले लघु उद्योग की सीमा 1 करोड़ रुपये थी, जो पुराने मानदंडों (जैसे 2013 के आसपास) के अनुसार लागू थी।
    • 2006 के MSMED अधिनियम के बाद इसे बढ़ाकर 5 करोड़ किया गया
    • अधिक उद्यम इस श्रेणी में आ सकें और सरकारी लाभ प्राप्त कर सकें। हाल के वर्षों में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ है।
  • पात्रता और लाभ
    • इस सीमा के अंदर आने वाले उद्यमों को प्राथमिकता ऋण, सब्सिडी, टैक्स छूट और Udyam पोर्टल पर पंजीकरण जैसे लाभ मिलते हैं।
    • निवेश की गणना मूल्य पर आधारित होती है, न कि टर्नओवर पर (हालांकि टर्नओवर भी एक मानदंड है)।
    • उदाहरणस्वरूप, एक छोटी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट जो 4 करोड़ की मशीनरी में निवेश करती है, लघु उद्यम के अंतर्गत आती है।

12. लघु उद्योग को परिभाषित करने के लिए एक मानदंड क्या है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) एक इकाई की संपत्ति पर अधिकतम निवेश की अनुमति
Solution:
  • लघु उद्योग को परिभाषित करने के लिए एक मानदंड के रूप में एक इकाई की संपत्ति पर अधिकतम निवेश की अनुमति देता है
  • अर्थात लघु इकाई के लिए 10 करोड़ रुपये के निवेश के मानदंड को परिभाषित किया गया है।
  • मुख्य मानदंड
    • सूक्ष्म उद्यम: संयंत्र/मशीनरी में निवेश 1 करोड़ रुपये तक और टर्नओवर 5 करोड़ रुपये तक।
    • लघु उद्यम: संयंत्र/मशीनरी में निवेश 10 करोड़ रुपये तक और टर्नओवर 50 करोड़ रुपये तक।
    • यह निवेश मूल्य स्वामित्व, पट्टे या किराए पर आधारित होता है।
    • बिक्री मात्रा या कर्मचारियों की संख्या अब मुख्य मानदंड नहीं है।
  • ऐतिहासिक विकास
    • 1950: अधिकतम निवेश सीमा 5 लाख रुपये।​
    • पुरानी परिभाषा (2006 से पहले): संयंत्र/मशीनरी में 1 करोड़ रुपये तक (कुछ क्षेत्रों में 5 करोड़ तक)।​
    • 2006 अधिनियम: लघु उद्यम के लिए 5 करोड़ तक निवेश (25 लाख से अधिक)।​
    • समय के साथ सीमाएं बढ़ीं ताकि अधिक उद्यम शामिल हो सकें।​
  • महत्व
    • ये उद्योग भारत की अर्थव्यवस्था का आधार हैं, जो 30% औद्योगिक उत्पादन और 40% निर्यात योगदान देते हैं।
    • सरकार Udyam पोर्टल के माध्यम से पंजीकरण और लाभ प्रदान करती है।​

13. औद्योगिक लाइसेंसिंग पांच उद्योगों के लिए अनिवार्य है। निम्नलिखित में से कौन-सा उद्योग उन पांच उद्योगों में से एक नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 16 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (e) कुटीर उद्योग और शराब
Solution:
  • वर्ष 1991 में नई आर्थिक नीति के बाद पांच उद्योगों को छोड़कर बाकी सभी उद्योगों के लिए औद्योगिक लाइसेंसिंग समाप्त कर दी गई।
  • DPIIT की वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार, वर्तमान में चार उद्योग ऐसे हैं जिनके लिए लाइसेंस अनिवार्य है।
  • वे चार उद्योग हैं-इलेक्ट्रॉनिक एयरोस्पेस और रक्षा उपकरण, निर्दिष्ट खतरनाक रसायन, औद्योगिक विस्फोटक, तंबाकू से बनी सिगार तथा सिगरेट ।
  • कुटीर उद्योग तथा शराब इसमें शामिल नहीं हैं।
  • अनिवार्य लाइसेंस वाले पांच उद्योग
    • ये पांच उद्योग निम्नलिखित हैं, जिनमें उत्पादन, भंडारण या वितरण से पहले केंद्र सरकार से लाइसेंस प्राप्त करना जरूरी होता है:
    • औद्योगिक विस्फोटक: इसमें डायनामाइट, बारूद, नाइट्रोसेलुलोज जैसे खतरनाक पदार्थ शामिल हैं
    • जो खनन, निर्माण या विध्वंस में प्रयुक्त होते हैं। इनके सख्त नियम खतरों को रोकने के लिए हैं।​
    • शराब (मादक पेय): आसवन और ब्रूअरी प्रक्रिया से बनी पेय शराब या औद्योगिक शराब के उत्पादन पर गुणवत्ता, दुरुपयोग रोकथाम और वितरण नियंत्रण के लिए लाइसेंस आवश्यक है।
    • सिगरेट और तंबाकू उत्पाद: सिगरेट, सिगार तथा अन्य निर्मित तंबाकू विकल्पों के निर्माण में स्वास्थ्य चेतावनियों, मानकीकरण और विज्ञापन प्रतिबंधों के पालन हेतु लाइसेंस जरूरी।​
    • खतरनाक रसायन: विषाक्त या ज्वलनशील रसायनों के उत्पादन पर पर्यावरण संरक्षण और दुर्घटना रोकथाम के लिए नियंत्रण।
    • दवाइयाँ और फार्मास्यूटिकल्स: औषधियों के निर्माण में गुणवत्ता, सुरक्षा तथा ड्रग पॉलिसी अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य।
  • कुटीर उद्योग क्यों शामिल नहीं?
    • कुटीर उद्योग इन पांच में से एक नहीं है। ये पारंपरिक, घर-आधारित छोटे पैमाने के उद्योग हैं
    • जैसे हस्तबुनाई, मिट्टी के बर्तन, हस्तशिल्प आदि, जो न्यूनतम मशीनरी या हाथ से चलते हैं।
    • इनकी घरेलू प्रकृति के कारण ये औद्योगिक लाइसेंस नियमों से मुक्त रहते हैं तथा इन्हें प्रोत्साहन दिया जाता है रोजगार सृजन हेतु।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1991 की नई आर्थिक नीति ने लाइसेंस राज को समाप्त कर अधिकांश उद्योगों को मुक्त किया।
    • पहले सैकड़ों उद्योगों के लिए लाइसेंस जरूरी थे, लेकिन 1999 तक घटकर 6 रह गए
    • अब केवल ये 5 बचे हैं। उद्देश्य संतुलित विकास, पर्यावरण सुरक्षा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • लाइसेंस आवेदन केंद्र सरकार के उद्योग मंत्रालय या संबंधित विभागों (जैसे पेट्रोलियम मंत्रालय खतरनाक रसायनों के लिए) से किया जाता है।
    • उल्लंघन पर जुर्माना या कारावास हो सकता है।
    • छोटे उद्योगों या MSME को कई छूटें मिलती हैं, लेकिन ये पांच अपवाद हैं।

14. औद्योगिक नीति संकल्प में उद्योगों को ....... श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है। [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) तीन
Solution:
  • औद्योगिक नीति संकल्प, 1956 में उद्योगों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है- (1) सरकारी उद्योग, (2) निजी उद्योग, (3) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग।
  • चार श्रेणियाँ
    • उद्योगों का वर्गीकरण मिश्रित अर्थव्यवस्था के सिद्धांत पर आधारित था, जिसमें सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों की भूमिकाएँ स्पष्ट की गईं।
    • सामरिक उद्योग (Strategic Industries): तीन उद्योग—हथियार एवं गोला-बारूद निर्माण, परमाणु ऊर्जा उत्पादन, तथा रेलवे परिवहन।
    • ये पूर्णतः सरकारी क्षेत्र के लिए आरक्षित थे।
    • बुनियादी उद्योग (Basic Industries): छह उद्योग—कोयला, लोहा-इस्पात, विमान निर्माण, जहाज निर्माण, टेलीफोन/टेलीग्राफ उपकरण, तथा खनिज तेल।
    • नए उपक्रम केवल राज्य द्वारा शुरू किए जा सकते थे, मौजूदा निजी इकाइयों को जारी रखने की अनुमति।
    • महत्वपूर्ण उद्योग (Important Industries): 18 उद्योग जैसे मशीन टूल्स, उर्वरक, सीमेंट, कागज, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग, रबर, अलौह धातु।
    • निजी क्षेत्र को अनुमति लेकिन सरकारी नियोजन एवं नियमन के अधीन।
    • अन्य उद्योग (Other Industries): शेष सभी उद्योग, जो पूरी तरह निजी क्षेत्र के लिए खुले थे।
  • उद्देश्य एवं पृष्ठभूमि
    • यह नीति स्वतंत्रता के ठीक बाद जारी की गई, जब अर्थव्यवस्था कृषि-प्रधान थी। मुख्य लक्ष्य थे
    • उद्योगों का संतुलित विकास, रोजगार सृजन, असमानताओं का न्यूनीकरण, तथा सामाजिक न्याय।
    • स्वतंत्रता पूर्व ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध यह समाजवादी-पूँजीवादी मॉडल था।
  • 1956 के संकल्प से तुलना
    • 1956 के औद्योगिक नीति संकल्प (दूसरा प्रमुख) ने उद्योगों को तीन श्रेणियों में विभाजित किया
    • Schedule A (17 उद्योग, पूर्ण सरकारी), Schedule B (12 उद्योग, सार्वजनिक-सह-निजी), Schedule C (शेष निजी)।
    • 1948 की चार श्रेणियों से यह अधिक समाजवादी था, भारी उद्योगों पर सरकारी जोर।
  • प्रभाव एवं महत्व
    • 1948 की नीति ने लाइसेंस राज की नींव रखी, सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत किया।
    • इसने भिलाई, दुर्गापुर जैसे इस्पात संयंत्रों का मार्ग प्रशस्त किया।
    • हालांकि, निजी क्षेत्र पर नियंत्रण से विकास धीमा पड़ा, जिसे 1991 की उदारीकरण नीति ने बदला।

15. मशीनें, उपकरण, सामग्रियां और भवन किस प्रकार के माल के उदाहरण हैं? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) पूंजीगत माल
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में मशीनें, उपकरण, सामग्रियां और भवन पूंजीगत वस्तु (माल) के उदाहरण हैं।
  • पूंजीगत वस्तुओं की परिभाषा
    • पूंजीगत वस्तुएं वे संपत्तियां हैं जिनका उपयोग अन्य वस्तुओं या सेवाओं के उत्पादन में किया जाता है।​
    • इनका जीवनकाल लंबा होता है और ये बार-बार उत्पादन में लगाई जाती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, एक कारखाने की मशीनें सालों तक काम करती रहती हैं।
    • ये अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं क्योंकि ये उत्पादकता बढ़ाती हैं।​
  • इन वस्तुओं के प्रकार
    • मशीनें: फैक्ट्रियों में उत्पाद बनाने के लिए इस्तेमाल होती हैं, जैसे लेथ मशीन या कन्वेयर बेल्ट। ये बड़े पैमाने पर सामान तैयार करने में मदद करती हैं।
    • उपकरण: छोटे टूल्स जैसे ड्रिल, वेल्डिंग मशीन या हैंड टूल्स, जो निर्माण या मरम्मत में सहायक होते हैं।​
    • सामग्रियां: कच्चे माल जैसे स्टील या सीमेंट, जो अंतिम उत्पाद बनाने के लिए मशीनों में डाले जाते हैं। ये मध्यवर्ती चरण की पूंजीगत वस्तुएं हैं।
    • भवन: फैक्ट्री, गोदाम या कार्यालय भवन, जो उत्पादन स्थल प्रदान करते हैं। इनका निर्माण लंबे समय के लिए होता है।​
  • आर्थिक महत्व
    • ये वस्तुएं निवेश को बढ़ावा देती हैं और जीडीपी वृद्धि में योगदान करती हैं।
    • उद्योगों में इनकी कमी से उत्पादन रुक सकता है। भारत जैसे विकासशील देशों में मशीनरी आयात पूंजीगत निवेश का बड़ा हिस्सा है।
    • भंडारण और रखरखाव के लिए विशेष उपकरण जैसे रैक या फोर्कलिफ्ट भी इन्हीं की श्रेणी में आते हैं।​
  • उदाहरण और अनुप्रयोग
    • उद्योग स्तर पर: ऑटोमोबाइल प्लांट में मशीनें कार असेंबल करती हैं।
    • कृषि में: ट्रैक्टर और सिंचाई उपकरण पूंजीगत हैं।
    • निर्माण में: क्रेन और भवन पूरे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करते हैं।​
    • ये वस्तुएं स्थायी होती हैं और मूल्यह्रास (depreciation) के कारण समय के साथ घिसती हैं।

16. सेल (SAIL) की सहायक कंपनी की पहचान कीजिए, जो कोलकाता-आसनसोल रेलवे लाइन के किनारे स्थित है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (IISCO)
Solution:
  • सेल की एक सहायक कंपनी इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (अब इस्को स्टील प्लांट) बर्नपुर में दामोदर नदी के किनारे पर स्थित है।
  • इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (ISCO)
    • इंडियन आयरन एंड स्टील कंपनी (ISCO) है। यह पश्चिम बंगाल के बर्नपुर में अवस्थित है
    • जो आसनसोल से करीब 4 किलोमीटर दूर है और कोलकाता-आसनसोल रेल मार्ग पर बनपुर स्टेशन के निकट पड़ता है।​
  • कंपनी का इतिहास
    • ISCO की स्थापना 1918 में हुई थी, जो भारत के प्रारंभिक इस्पात उद्योगों में से एक थी।
    • 2006 में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) ने इसे अधिग्रहण कर लिया
    • जिससे यह SAIL की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी बन गई।
    • बर्नपुर का यह संयंत्र 2,500 एकड़ क्षेत्र में फैला है और लंबे समय से इस्पात उत्पादन का केंद्र रहा है।
  • उत्पाद और संचालन
    • ISCO स्टील प्लेट, रेल, स्ट्रक्चरल स्टील तथा वायर रॉड जैसे उत्पादों का निर्माण करता है।
    • यह SAIL के अन्य संयंत्रों जैसे भिलाई स्टील प्लांट के साथ मिलकर भारतीय रेलवे को रेल ट्रैक और लंबे वेल्डेड रेल पैनल की आपूर्ति करता है।
    • बर्नपुर संयंत्र कोलकाता-आसनसोल रेल लाइन के कारण कच्चे माल और उत्पादों के परिवहन में रणनीतिक लाभ प्राप्त करता है।
  • SAIL के अन्य संदर्भ
    • SAIL एक महारत्न सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम है, जिसके पास 5 एकीकृत इस्पात संयंत्र, 3 विशेष स्टील संयंत्र और 1 सहायक कंपनी जैसे ISCO शामिल हैं।
    • अन्य सहायक कंपनियां जैसे महाराष्ट्र इलेक्ट्रोस्मेल्ट लिमिटेड (महाराष्ट्र में) भिन्न स्थानों पर हैं
    • जबकि ISCO विशेष रूप से इस रेल मार्ग से जुड़ा है।
    • हाल के रेल परियोजनाएं आसनसोल-टाटा क्षेत्र में कोयला-लोहा परिवहन को बढ़ावा देंगी
    • जो बर्नपुर जैसे SAIL इकाइयों को लाभ पहुंचाएंगी।​

17. आधुनिक औद्योगिक प्रणाली के उदय से पहले भारतीय निर्यात में मुख्य रूप से ....... जैसे निर्माण शामिल थे। [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) सूती और रेशमी वस्त्र
Solution:
  • आधुनिक औद्योगिक प्रणाली के उदय से पहले भारतीय निर्यात में मुख्य रूप से सूती और रेशमी वस्त्र जैसे निर्माण शामिल थे।
  • भारत में सर्वप्रथम 1818 ई. में फोर्ट ग्लास्टर (कलकत्ता) में सूती वस्त्र मिल लगाई गई थी
  • परंतु यह असफल रही। भारत में सफल सूती वस्त्र मिल की स्थापना 1854 ई. में बंबई में स्थापित की गई थी।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    •  ये उत्पाद कुटीर उद्योगों और कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित होते थे
    • जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ थे। ईस्ट इंडिया कंपनी जैसे व्यापारिक संगठनों ने इन्हीं कपड़ों की मांग पर भारत में अपनी उपस्थिति स्थापित की।
  • प्रमुख निर्यात वस्तुएँ
    • सूती कपड़े: ढाका मलमल, सूरत का सूती वस्त्र और मसूलीपट्टनम का चिंट्ज़ विश्व प्रसिद्ध थे।
    • रेशमी कपड़े: कोचीन और अन्य क्षेत्रों से रेशम के उत्पाद निर्यात होते थे।​
    • अन्य हस्तशिल्प: मिट्टी के बर्तन, पीतल-तांबे के काम, रंगाई और कांस्य वस्तुएँ भी महत्वपूर्ण थीं, लेकिन कपड़े प्रमुख रहे।​
    • ये निर्यात बंदरगाहों जैसे सूरत, हुगली और मसूलीपट्टनम से होते थे, जहाँ भारतीय व्यापारी, बैंकर और आपूर्ति सौदागर सक्रिय थे।
  • व्यापार नेटवर्क
    • भारतीय व्यापारी उत्पादन में निवेश करते, आंतरिक क्षेत्रों से माल इकट्ठा कर निर्यातकों तक पहुँचाते।
    • यूरोपीय मांग के कारण ये कपड़े सस्ते समुद्री मार्ग से निर्यात होते, जो भारत को वैश्विक व्यापार का केंद्र बनाते।
    • हालांकि, ब्रिटिश औपनिवेशिक काल में यह प्रणाली धीरे-धीरे कच्चे माल निर्यात (कपास, नील) की ओर खिसक गई।
  • आधुनिक औद्योगीकरण का प्रभाव
    • 18वीं सदी के अंत तक ब्रिटिश औद्योगिक क्रांति ने भारतीय हस्तशिल्प को प्रतिस्पर्धा में पीछे धकेल दिया।
    • भारत से अब कच्चा माल (कपास, जूट) निर्यात होने लगा, जबकि तैयार मशीन-निर्मित ब्रिटिश कपड़े आयात होते।
    • इससे विऔद्योगीकरण हुआ, लेकिन पूर्व-औद्योगिक निर्यात मुख्यतः हस्तनिर्मित कपड़ा-केंद्रित रहे।
  • अन्य विकल्पों का खंडन
    • इलेक्ट्रिकल या हल्की मशीनरी: ये आधुनिक औद्योगिक उत्पाद थे, प्राचीन काल में असंभव।​
    • रसायन: औद्योगिक रासायनिक उद्योग बाद में विकसित हुए।​
    • यह प्रणाली भारत को 'स्वर्ण पक्षी' बनाती थी, जब तक औपनिवेशिक शोषण ने इसे बदल नहीं दिया।​

18. किस औद्योगिक नीति में अति लघु उद्योग/इकाई के लिए निवेश सीमा बढ़ाकर 2 लाख रुपये की गई? [CGL (T-I) 14 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) 1980
Solution:
  • औद्योगिक नीति, 1980 लघु उद्योगों को बढ़ावा देने तथा उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से प्रारंभ की गई थी।
  • इस नीति के तहत अति लघु उद्योग/इकाई के लिए निवेश सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई।
  • नीति का पृष्ठभूमि
    • क्योंकि ये रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पहले 1977 की नीति में लघु इकाइयों की परिभाषा दी गई थी
    • लेकिन निवेश सीमा बहुत सीमित थी। 1980 में इसे ₹2 लाख तक बढ़ाया गया, जिससे अधिक उद्यमी व्यवसाय शुरू कर सके।
  • निवेश सीमा में बदलाव
    • पहले अति लघु या छोटे उद्योगों की निवेश सीमा ₹1 लाख या उससे कम थी।
    • 1980 नीति ने इसे स्पष्ट रूप से ₹2 लाख कर दिया, जो संयंत्र और मशीनरी पर लागू हुआ।
    • यह वृद्धि उद्योगों को आधुनिक उपकरण खरीदने और उत्पादकता बढ़ाने में मददगार साबित हुई।
  • अन्य प्रमुख प्रावधान
    • नीति ने लघु उद्योगों के लिए कई सहायता उपाय पेश किए:
    • उत्पादों का आरक्षण: 500 से अधिक आइटम लघु उद्योगों के लिए आरक्षित।
    • कच्चे माल पर सब्सिडी: आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्राथमिकता।
    • प्राथमिकता ऋण: बैंकों से सस्ते ऋण की व्यवस्था।
    • तकनीकी सहायता: प्रशिक्षण और मार्केटिंग में मदद।
    • ये कदम बड़े उद्योगों से प्रतिस्पर्धा कम करने और स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने के लिए थे।​
  • प्रभाव और महत्व
    • इस नीति से लाखों नई इकाइयां स्थापित हुईं, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में।
    • यह जनता पार्टी सरकार के बाद इंदिरा गांधी सरकार द्वारा लाई गई थी
    • जो आर्थिक समावेश पर केंद्रित थी। आज भी यह लघु उद्योग विकास का आधार मानी जाती है
    • हालांकि वर्तमान MSME सीमाएं बहुत ऊंची हैं (जैसे सूक्ष्म के लिए ₹1 करोड़ तक)।

19. औद्योगिक क्षेत्र पर नीतियों के प्रभाव की पहचान करने के लिए एक अच्छा संकेतक क्या है? [C.P.O.S.I. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी में वृद्धि
Solution:
  • सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी में वृद्धि, औद्योगिक क्षेत्र पर नीतियों के प्रभाव की पहचान करने के लिए एक अच्छा संकेतक है।
  • मुख्य संकेतक: GDP हिस्सेदारी
    • GDP में उद्योग क्षेत्र (विनिर्माण, खनन, बिजली आदि) की हिस्सेदारी नीतियों के प्रभाव का प्राथमिक मापक है।
    • नीतियां जैसे लाइसेंस राज हटाना या FDI प्रोत्साहन लागू होने पर यदि यह हिस्सेदारी बढ़ती है
    • तो यह दर्शाता है कि उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।
    • उदाहरणस्वरूप, 1991 की औद्योगिक नीति के बाद निवेश बढ़ा, जिससे औद्योगिक उत्पादन में तेजी आई।
  • अन्य प्रमुख संकेतक
    • नीतियों के व्यापक प्रभाव को समझने के लिए निम्नलिखित संकेतकों का उपयोग होता है:
    • FDI और निवेश प्रवाह: विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि (जैसे 2014-15 में $45.14 बिलियन से 2021-22 में $84.83 बिलियन) नीतियों की आकर्षकता दर्शाता है।​
    • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): मासिक उत्पादन वृद्धि दर नीतिगत बदलावों का त्वरित प्रतिबिंब है।
    • निर्यात वृद्धि: निर्यात-उन्मुख नीतियां जैसे PLI योजना से निर्यात बढ़ना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है।​
    • रोजगार सृजन: विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां बढ़ना, हालांकि "रोजगार-विहीन विकास" एक चुनौती रही है।​
  • भारत के संदर्भ में उदाहरण
    • भारत में 1991 की उदारीकरण नीति ने लाइसेंसिंग समाप्त कर निवेश बढ़ाया, जिससे GDP में उद्योग हिस्सेदारी प्रभावित हुई
    • हालांकि 2013-14 के 16.7% से 2023-24 में 15.9% गिरकर चुनौतियां उजागर कीं।
    • मेक इन इंडिया और PLI जैसी हालिया नीतियां विनिर्माण को 25% GDP लक्ष्य तक ले जाने का प्रयास कर रही हैं।
    • बुनियादी ढांचा (परिवहन, ऊर्जा) भी नीतिगत प्रभावक है।
  • चुनौतियां और सुधार
    • नीतियां अक्सर अक्षमता पैदा करती हैं, जैसे आयात प्रतिस्थापन से निम्न गुणवत्ता।
    • प्रभाव मापने के लिए बहु-संकेतकी दृष्टिकोण अपनाएं—केवल GDP पर्याप्त नहीं।
    • क्षेत्रीय असमानताएं और समयपूर्व वि-औद्योगीकरण जैसे मुद्दे भी विचारणीय हैं।
    • दीर्घकालिक विश्लेषण से नीतियां आत्मनिर्भरता बढ़ाती दिखती हैं।

20. औद्योगिक नीति, 1956 की अनुसूची A में कितने उद्योगों को सूचीबद्ध किया गया था? [CGL (T-I) 18 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) 17
Solution:
  • औद्योगिक नीति, 1956 के तहत अनुसूची A में 17 उद्योगों को सूचीबद्ध किया गया है
  • जबकि अनुसूची-B में 12 उद्योगों को सूचीबद्ध किया गया है। A तथा B अनुसूचियों में शामिल नहीं किए गए उद्योगों को अनुसूची-C में शामिल किया गया है।
  • नीति का संक्षिप्त परिचय
    • जो स्वतंत्र भारत की दूसरी प्रमुख औद्योगिक नीति थी।
    • यह नीति समाजवादी पैटर्न पर आधारित 'मिश्रित अर्थव्यवस्था' को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई थी।
    • उद्योगों को तीन श्रेणियों—अनुसूची A, B और C—में विभाजित किया गया।
    • अनुसूची A राज्य के एकाधिकार वाले उद्योग थे, जहां निजी क्षेत्र को प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
  • अनुसूची A के उद्योग
    • अनुसूची A में कुल 17 उद्योग शामिल थे, जिनका विकास पूरी तरह से राज्य की जिम्मेदारी था।
    • ये रणनीतिक महत्व के थे और राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना से जुड़े थे। मुख्य उद्योग निम्नलिखित थे:
    • हथियार और गोला-बारूद
    • परमाणु ऊर्जा
    • लोहा और इस्पात
    • भारी इंजीनियरिंग और मशीनरी निर्माण
    • भारी कास्टिंग और फोर्जिंग
    • कोयला उद्योग
    • खनिज तेल
    • लौह अयस्क की खदानें
    • तांबा, सीसा और जस्ता की खदानें
    • जिप्सम और सोने की खदानें
    • रेलवे परिवहन
    • समुद्री परिवहन
    • वायु परिवहन
    • विमान निर्माण
    • विद्युत उत्पादन, पारेषण और वितरण
    • टेलीफोन, तार और वायरलेस उपकरण
    • खनिज ईंधन और खनिज तेल शोधन।
  • अन्य अनुसूचियां
    • अनुसूची B में 12 उद्योग थे, जैसे एल्यूमीनियम, उर्वरक, रसायन, ऑटोमोबाइल आदि
    • जहां राज्य प्राथमिक भूमिका निभाता लेकिन निजी क्षेत्र को सहयोग की अनुमति थी।
    • अनुसूची C में शेष सभी उद्योग निजी क्षेत्र के लिए खुले थे। यह वर्गीकरण औद्योगिक विकास को नियोजित बनाने के लिए था।
  • नीति का महत्व
    • यह नीति ने सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत किया और पंचवर्षीय योजनाओं के साथ संरेखित हुई।
    • इससे भारी उद्योगों में राज्य निवेश बढ़ा, लेकिन बाद में 1991 की उदारीकरण नीति ने इसे बदला।