Correct Answer: (a) सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी में वृद्धि
Solution:- सकल घरेलू उत्पाद में उद्योग क्षेत्र की हिस्सेदारी में वृद्धि, औद्योगिक क्षेत्र पर नीतियों के प्रभाव की पहचान करने के लिए एक अच्छा संकेतक है।
- मुख्य संकेतक: GDP हिस्सेदारी
- GDP में उद्योग क्षेत्र (विनिर्माण, खनन, बिजली आदि) की हिस्सेदारी नीतियों के प्रभाव का प्राथमिक मापक है।
- नीतियां जैसे लाइसेंस राज हटाना या FDI प्रोत्साहन लागू होने पर यदि यह हिस्सेदारी बढ़ती है
- तो यह दर्शाता है कि उत्पादन क्षमता मजबूत हुई है।
- उदाहरणस्वरूप, 1991 की औद्योगिक नीति के बाद निवेश बढ़ा, जिससे औद्योगिक उत्पादन में तेजी आई।
- अन्य प्रमुख संकेतक
- नीतियों के व्यापक प्रभाव को समझने के लिए निम्नलिखित संकेतकों का उपयोग होता है:
- FDI और निवेश प्रवाह: विदेशी प्रत्यक्ष निवेश में वृद्धि (जैसे 2014-15 में $45.14 बिलियन से 2021-22 में $84.83 बिलियन) नीतियों की आकर्षकता दर्शाता है।
- औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP): मासिक उत्पादन वृद्धि दर नीतिगत बदलावों का त्वरित प्रतिबिंब है।
- निर्यात वृद्धि: निर्यात-उन्मुख नीतियां जैसे PLI योजना से निर्यात बढ़ना सकारात्मक प्रभाव दिखाता है।
- रोजगार सृजन: विनिर्माण क्षेत्र में नौकरियां बढ़ना, हालांकि "रोजगार-विहीन विकास" एक चुनौती रही है।
- भारत के संदर्भ में उदाहरण
- भारत में 1991 की उदारीकरण नीति ने लाइसेंसिंग समाप्त कर निवेश बढ़ाया, जिससे GDP में उद्योग हिस्सेदारी प्रभावित हुई
- हालांकि 2013-14 के 16.7% से 2023-24 में 15.9% गिरकर चुनौतियां उजागर कीं।
- मेक इन इंडिया और PLI जैसी हालिया नीतियां विनिर्माण को 25% GDP लक्ष्य तक ले जाने का प्रयास कर रही हैं।
- बुनियादी ढांचा (परिवहन, ऊर्जा) भी नीतिगत प्रभावक है।
- चुनौतियां और सुधार
- नीतियां अक्सर अक्षमता पैदा करती हैं, जैसे आयात प्रतिस्थापन से निम्न गुणवत्ता।
- प्रभाव मापने के लिए बहु-संकेतकी दृष्टिकोण अपनाएं—केवल GDP पर्याप्त नहीं।
- क्षेत्रीय असमानताएं और समयपूर्व वि-औद्योगीकरण जैसे मुद्दे भी विचारणीय हैं।
- दीर्घकालिक विश्लेषण से नीतियां आत्मनिर्भरता बढ़ाती दिखती हैं।