उद्योग क्षेत्र (अर्थव्यवस्था)

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21. निम्नलिखित में से कौन-सी औद्योगिक नीति संकल्प 1956 के तहत वर्गीकृत एक उद्योग श्रेणी नहीं है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) सहकारी क्षेत्र के उद्योग
Solution:
  • औद्योगिक नीति संकल्प 1956 के तहत औद्योगीकरण के विकास की प्रक्रिया में सरकारी क्षेत्र द्वारा निभाई गई भूमिका का विरोध किया गया है
  • इसके उद्योग श्रेणी में आने वाले क्षेत्र - अग्रणी सार्वजनिक क्षेत्र वाले उद्योग और पूरक भूमिका निभाने वाले निजी क्षेत्र, निजी क्षेत्र के उद्योग तथा राज्य के विशिष्ट स्वामित्व वाले उद्योग शामिल हैं।
  • नीति का पृष्ठभूमि
    • जो समाजवादी पैटर्न ऑफ सोसाइटी के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया।
    • इसने उद्योगों को राज्य के नियंत्रण, मिश्रित क्षेत्र और निजी क्षेत्र के आधार पर वर्गीकृत किया
    • आर्थिक विकास संतुलित हो। कुल 17 उद्योग अनुसूची A में, 12 अनुसूची B में और शेष अनुसूची C में रखे गए।
  • तीन मुख्य श्रेणियाँ
  • अनुसूची A (राज्य एकाधिकार)
    • ये 17 उद्योग पूरी तरह राज्य के स्वामित्व और नियंत्रण में थे, क्योंकि ये राष्ट्रीय सुरक्षा, आधारभूत संरचना से जुड़े थे।
    • उदाहरण: हथियार और गोला-बारूद निर्माण, परमाणु ऊर्जा, रेलवे परिवहन, लोहा-इस्पात, कोयला, खनिज तेल, भारी मशीनरी।
    • निजी क्षेत्र को इनमें प्रवेश की अनुमति नहीं थी।​​
  • अनुसूची B (मिश्रित क्षेत्र)
    • ये 12 उद्योग राज्य द्वारा प्राथमिक रूप से विकसित किए जाने थे, लेकिन निजी क्षेत्र की सीमित भागीदारी संभव थी यदि राज्य की क्षमता अपर्याप्त हो।
    • उदाहरण: एल्यूमीनियम, अन्य उर्वरक, एंटीबायोटिक्स।
    • राज्य नए उद्यम शुरू करता, निजी क्षेत्र मौजूदा इकाइयों का विस्तार कर सकता था।
  • अनुसूची C (निजी क्षेत्र)
    • शेष सभी उद्योग (लगभग सैकड़ों) निजी क्षेत्र के लिए खुले थे, राज्य केवल सहायता या नियमन करता।
    • उदाहरण: उपभोक्ता वस्तुएँ, हल्के उद्योग जैसे कागज, सीमेंट, ऑटोमोबाइल। राज्य राष्ट्रीय हित में हस्तक्षेप कर सकता था।
  • गैर-श्रेणी उदाहरण
    • यदि विकल्पों में "अनुसूची D" या "निजी क्षेत्र एकाधिकार" जैसी कोई श्रेणी हो
    • तो वह 1956 नीति के तहत वर्गीकृत नहीं है। एक अन्य गलत उदाहरण हो सकता है
    • कुटीर उद्योग" या "सेवा क्षेत्र", क्योंकि नीति मुख्यतः बड़े/माध्यम उद्योगों पर केंद्रित थी।
    • चार श्रेणी वाली वर्गीकरण (जैसे रक्षा, भारी, खनिज, परिवहन) कुछ स्रोतों में वर्णित है लेकिन आधिकारिक रूप से A, B, C ही मान्य हैं।
  • नीति का प्रभाव
    • इस वर्गीकरण ने सार्वजनिक क्षेत्र को मजबूत बनाया, जिससे भारी उद्योगों का विकास हुआ
    • लेकिन निजी क्षेत्र सीमित रहा। बाद में 1991 की उदारीकरण नीति ने इन्हें समाप्त कर दिया।
    • यह नीति पंचवर्षीय योजनाओं (विशेषकर दूसरी योजना) का आधार बनी।

22. भारत में सार्वजनिक क्षेत्र का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र कौन-सा है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) राउरकेला इस्पात संयंत्र
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में सार्वजनिक क्षेत्र का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र राउरकेला इस्पात संयंत्र था।
  • इस इस्पात संयंत्र की स्थापना द्वितीय पंचवर्षीय योजना के दौरान किया गया था। यह ओडिशा राज्य में स्थित है।
  • स्थापना और इतिहास
    • राउरकेला इस्पात संयंत्र की स्थापना 3 फरवरी 1959 को पश्चिम जर्मन (तत्कालीन पश्चिमी जर्मनी) औद्योगिक निगमों की सहायता से की गई थी।
    • लगभग 19,000 एकड़ भूमि आदिवासी निवासियों से प्राप्त कर इसकी नींव रखी गई
    • जो भारत की औद्योगिक आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
    • यह संयंत्र सार्वजनिक क्षेत्र का पहला एकीकृत इस्पात संयंत्र था
    • जो कच्चे माल से लेकर तैयार इस्पात उत्पाद तक पूर्ण प्रक्रिया करता है।
  • उत्पादन क्षमता
    • इसकी वर्तमान उत्पादन क्षमता 4.5 मिलियन टन हॉट मेटल, 4.2 मिलियन टन कच्चा इस्पात और 3.9 मिलियन टन बिक्री योग्य इस्पात है।
    • शुरू में 10 लाख टन क्षमता के साथ स्थापित यह संयंत्र देश के सबसे बड़े इस्पात संयंत्रों में शुमार है। यह फ्लैट इस्पात उत्पादन में प्रमुख भूमिका निभाता है।
  • विशेषताएं और योगदान
    • RSP SAIL का एकमात्र संयंत्र है जो बिजली क्षेत्र के लिए सिलिकॉन इस्पात और तेल-गैस क्षेत्र के लिए उच्च गुणवत्ता वाले पाइप बनाता है।
    • यह जंगरोधी इस्पात और विशेष मिश्र धातुओं के उत्पादन में भी अग्रणी रहा है।
    • संयंत्र ने भारत की इस्पात क्षमता को मजबूत किया और पूर्वी भारत के औद्योगिक विकास को गति दी।

23. इनमें से कौन-सा औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली के पतन के कारणों में से एक है? [CHSL (T-I) 8 अगस्त, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) बड़े औद्योगिक घरानों ने प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए लाइसेंस का लाभ उठाया
Solution:
  • प्रश्नगत दिए गए विकल्पों में से विकल्प (c) 'बड़े औद्योगिक घरानों ने प्रतिस्पर्धा को रोकने के लिए लाइसेंस का लाभ उठाया' औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली के पतन के प्रमुख कारणों में से एक है।
  • प्रणाली का परिचय
    • औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली 1951 के औद्योगिक विकास और नियमन अधिनियम के तहत शुरू हुई
    • जो नई इकाइयों की स्थापना, विस्तार या स्थानांतरण के लिए सरकारी अनुमति मांगती थी।
    • इसका उद्देश्य आर्थिक शक्ति का एकाधिकारीकरण रोकना, छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना और संतुलित विकास सुनिश्चित करना था।
    • हालांकि, यह 1947 से 1991 तक चली और कई विफलताओं से ग्रस्त रही।
  • प्रमुख पतन कारण
    • नौकरशाही देरी और भ्रष्टाचार: लाइसेंस प्राप्त करने में वर्षों लग जाते थे, जिससे भ्रष्टाचार बढ़ा और रिश्वतखोरी आम हो गई।
    • बड़े घराने लाइसेंस हासिल कर छोटे प्रतियोगियों को रोकते थे।
    • प्रतिस्पर्धा की कमी और अक्षमता: प्रणाली ने प्रवेश बाधाएं पैदा कीं, जिससे नवाचार रुका, उत्पादकता घटी और एकाधिकार बढ़ा। औद्योगिक वृद्धि धीमी रही।
    • आर्थिक संकट: 1991 में विदेशी मुद्रा भंडार घटकर दो सप्ताह के आयात के बराबर रह गया, जिसने उदारीकरण को मजबूर किया।
    • लाइसेंसिंग ने निवेश हतोत्साहित किया।
    • क्षमता विस्तार में बाधा: विस्तार या विविधीकरण के लिए अनुमति की जरूरत ने उद्योगों को छोटा रखा और तकनीकी प्रगति रोकी।
  • MCQ संदर्भ में सही विकल्प
    • प्रश्न "इनमें से कौन-सा औद्योगिक लाइसेंसिंग प्रणाली के पतन के कारणों में से एक है?" अक्सर ऐसे विकल्पों पर आधारित होता है:
    • बड़े औद्योगिक घरानों ने प्रतिस्पर्धा रोकने के लिए लाइसेंस का लाभ उठाया (सही, क्योंकि यह भ्रष्टाचार और एकाधिकार का प्रमुख फल/कारण था)।
    • अधिकांश लाइसेंस पिछड़े राज्यों द्वारा उपयोग किए गए (गलत, क्योंकि यह स्थापित केंद्रों के पक्ष में थी)।
    • अधिकांश लाइसेंस आयात के लिए थे (गलत, आयात प्रतिबंधित था)।
    • यह 'फॉलआउट' या पतन का प्रमुख कारण था, जिसने प्रणाली की आलोचना बढ़ाई।
  • 1991 में समाप्ति
    • 1991 की नीति ने 18 उद्योगों को छोड़कर लाइसेंसिंग समाप्त कर दी
    • MRTP सीमाएं हटा दीं और FDI को प्रोत्साहन दिया। इससे अर्थव्यवस्था में तेजी आई।

24. उद्योग के निम्नलिखित वर्गीकरण आधारों में से कौन-सा कपास, जूट, ऊन, रेशम वस्त्र, रबर, चाय, चीनी, कॉफी, खाद्य तेल उत्पादों पर लागू होता है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (IV-पाली]

Correct Answer: (b) कृषि आधारित उद्योग
Solution:
  • 'कृषि आधारित उद्योग' उन उद्योगों को कहते हैं, जो कच्चे माल के रूप में कृषि उत्पादों पर बहुत अधिक निर्भर रहते हैं
  • जो उद्योग खनिजों और अयस्कों के निष्कर्षण व प्रसंस्करण पर निर्भर होते हैं जैसे धातुकर्म और खनन आदि 'खनिज आधारित उद्योग' हैं।
  • अर्थव्यवस्था की वृद्धि और विकास के लिए जिम्मेदार कारक जैसे पेट्रोलियम, इस्पात आदि प्रमुख उद्योग में शामिल हैं।
  • 'उपभोक्ता उद्योग' वे उद्योग हैं, जो व्यक्तियों द्वारा प्रत्यक्ष उपभोग के लिए वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करते हैं, जैसे-वस्त्र, खाद्य पदार्थ आदि।
  • कृषि आधारित उद्योग
    • उद्योगों का वर्गीकरण कच्चे माल के स्रोत के आधार पर किया जाता है, जिसमें कृषि आधारित और खनिज आधारित प्रमुख हैं।
    • कपास, जूट, ऊन, रेशम वस्त्र, रबर, चाय, चीनी, कॉफी तथा खाद्य तेल सभी कृषि उत्पादों या कृषि से प्राप्त कच्चे माल पर निर्भर उद्योग हैं
    • इसलिए ये "कृषि आधारित उद्योग" वर्ग में आते हैं।
  • कृषि आधारित उद्योग क्या हैं?
    • कृषि आधारित उद्योग वे हैं जो कृषि फसलों, पशुपालन या वन उत्पादों को कच्चे माल के रूप में उपयोग करते हैं।
    • इनमें प्राथमिक प्रसंस्करण से लेकर तैयार उत्पाद बनाने तक की प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं।
    • भारत जैसे कृषि प्रधान देश में ये उद्योग ग्रामीण रोजगार के प्रमुख स्रोत हैं और अर्थव्यवस्था में 50% से अधिक योगदान देते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप:
    • कपास से सूती वस्त्र उद्योग।
    • जूट से बैग और पैकेजिंग सामग्री।
    • ऊन से ऊनी वस्त्र।
    • रेशम से रेशमी कपड़े।
    • रबर से टायर और रबर उत्पाद।
    • चाय, कॉफी से पेय उद्योग।
    • चीनी मिलें गन्ने से शर्करा उत्पादन।
    • खाद्य तेल जैसे सरसों, सोयाबीन या मूंगफली से वनस्पति तेल।
  • भारत में इन उद्योगों का महत्व
    • ये उद्योग भारत के 60% निर्यात में योगदान देते हैं
    • विशेषकर कपड़ा (दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक) और चाय (विश्व में प्रमुख उत्पादक)।
    • रोजगार: 5 करोड़ से अधिक लोगों को सीधे रोजगार, ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अवसर।
    • चुनौतियाँ: मौसमी निर्भरता, कम उत्पादकता, जलवायु परिवर्तन।
    • सरकार की योजनाएँ जैसे PMKVY और किसान क्रेडिट कार्ड इनकी मजबूती के लिए हैं।
  • प्रत्येक उत्पाद का विस्तार
    • कपास वस्त्र: कपास की फसल से यार्न और कपड़े; भारत विश्व का 25% उत्पादन।​
    • जूट: जूट पौधे से पैकेजिंग; प. बंगाल प्रमुख।​
    • ऊन: भेड़ों से ऊन; जम्मू-कश्मीर, राजस्थान केंद्र।​
    • रेशम वस्त्र: रेशमकीट से; कर्नाटक अग्रणी।​
    • रबर: रबर वृक्ष के लेटेक्स से; केरल 90% उत्पादन।​
    • चाय/कॉफी: पत्तियों/बीन्स प्रसंस्करण; असम, केरल प्रमुख।​
    • चीनी: गन्ना क्रशिंग; उत्तर प्रदेश शीर्ष।​
    • खाद्य तेल: बीज निष्कर्षण; गुजरात, आंध्र।​
    • यह वर्गीकरण NCERT कक्षा 10 भूगोल और UPSC पाठ्यक्रम का हिस्सा है
    • जो उद्योगों को कच्चे माल के आधार पर परिभाषित करता है।

25. भारत की आजादी के समय, औद्योगिक क्षेत्र ....... तक ही सीमित था। [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) सूती वस्त्र और जूट
Solution:
  • भारत की आजादी के समय औद्योगिक क्षेत्र सूती वस्त्र और जूट तक ही सीमित था।
  • भारत में प्रथम सूती वस्त्र मिल 1818 ई. में फोर्ट ग्लास्टर (कलकत्ता) में स्थापित की गई थी
  • जबकि प्रथम जूट मिल 1855 ई. में रिसरा (प. बंगाल) में स्थापित की गई थी।
  • औद्योगिक स्थिति का अवलोकन
    • स्वतंत्रता प्राप्ति पर भारत का औद्योगिक आधार बेहद कमजोर और अविकसित था
    • जो ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों का प्रत्यक्ष परिणाम था। देश के अधिकांश उद्योग पारंपरिक हस्तशिल्प, सूती कपड़ा मिलों और जूट उद्योग तक सीमित थे
    • जबकि भारी उद्योग जैसे इस्पात, मशीनरी या रसायनिक उत्पादन लगभग不存在 थे।
    • ब्रिटिश शासन ने भारत को कच्चे माल (जैसे कपास, जूट) का निर्यातक और ब्रिटेन के तैयार माल का आयातक बनाने की नीति अपनाई
    • जिससे स्वदेशी उद्योगों का विनाश हो गया।
  • प्रमुख उद्योगों का विवरण
    • सूती वस्त्र उद्योग: यह सबसे प्रमुख था, मुख्य रूप से बॉम्बे (मुंबई) और अहमदाबाद में केंद्रित।
    • 1947 तक लगभग 400 मिलें कार्यरत थीं, लेकिन ये भी पुरानी तकनीक पर निर्भर थीं और विदेशी आयात से प्रतिस्पर्धा झेल रही थीं।
    • जूट उद्योग: बंगाल (कोलकाता क्षेत्र) में सांद्रित, जो मुख्य रूप से निर्यात-उन्मुख था।
    • यह पाकिस्तान विभाजन के बाद बुरी तरह प्रभावित हुआ क्योंकि जूट के उत्पादन क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) चले गए।​
    • अन्य सीमित क्षेत्र: चाय, कॉफी बागान और कुछ सीमेंट/चीनी मिलें विद्यमान थीं
    • लेकिन ये उपभोक्ता-उद्योग थे, न कि पूंजीगत। लोहा-इस्पात जैसे भारी उद्योगों में टाटा आयरन एंड स्टील कंपनी (Jamshedpur) एकमात्र उल्लेखनीय उदाहरण था।​
    • कुल औद्योगिक उत्पादन का लगभग 17% ही आधुनिक कारखानों से आता था, बाकी लघु-उद्योग और हस्तशिल्प पर निर्भर।​
  • ब्रिटिश नीतियों का प्रभाव
    • ब्रिटिशों ने भारतीय हस्तशिल्प (जैसे कपड़ा बुनाई, धातु कार्य) को नष्ट करने के लिए उच्च कर लगाए और मशीनीकृत ब्रिटिश वस्तुओं को सस्ते आयात की अनुमति दी
    • जिसे 'वि-औद्योगीकरण' कहा जाता है। भारत को ब्रिटेन का 'कच्चे माल का स्रोत' बनाया गया
    • जबकि आधुनिक उद्योगों में निवेश न्यूनतम रखा। बुनियादी ढांचा (परिवहन, बिजली) अपर्याप्त था
    • कुशल श्रमिकों की कमी थी, और पूंजी की उपलब्धता सीमित। परिणामस्वरूप, 85% आबादी कृषि पर निर्भर हो गई।
  • स्वतंत्रता के बाद चुनौतियाँ
    • औद्योगिक क्षेत्र की यह सीमितता आत्मनिर्भरता की कमी दर्शाती थी, क्योंकि देश आयात पर निर्भर था।
    • नेहरू सरकार ने प्रथम पंचवर्षीय योजना से भारी उद्योगों पर जोर दिया
    • लेकिन प्रारंभिक स्थिति ने विकास को कठिन बना दिया। यह स्थिति ब्रिटिश शोषण की विरासत थी।

26. निम्नलिखित में से कौन-सा सार्वजनिक क्षेत्रक का एक उद्योग है? [CHSL (T-I) 9 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) भेल
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में 'भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लि. (भेल : BHEL)' सार्वजनिक क्षेत्र का उद्योग है।
  • इसकी स्थापना वर्ष 1964 में हुई थी। यह ऊर्जा, उद्योग तथा बुनियादी अधोसंरचना के क्षेत्र में कार्यरत भारत का सबसे बड़ा इंजीनियरिंग एवं विनिर्माण उद्यम है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र की परिभाषा
    • सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योगों में सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 51% होती है, जो उन्हें PSU (Public Sector Undertakings) बनाती है।
    • ये उद्योग भारी पूंजी निवेश वाले क्षेत्रों जैसे ऊर्जा, रक्षा, स्टील और परिवहन में सक्रिय रहते हैं।
    • उदाहरण के लिए, BHEL (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड) विद्युत उपकरण निर्माण में प्रमुख है।
  • प्रमुख उदाहरण
    • BHEL: यह भारी विद्युत मशीनरी बनाती है और पूरी तरह सरकारी स्वामित्व वाली कंपनी है।​
    • SAIL (स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड): इसमें बोकारो स्टील प्लांट जैसे संयंत्र शामिल हैं
    • जो इस्पात उत्पादन करते हैं। बोकारो लौह इस्पात उद्योग सार्वजनिक क्षेत्र का क्लासिक उदाहरण है।​
    • रेलवे और HAL (हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड): रेलवे पूरी तरह सरकारी है, जबकि HAL विमान निर्माण में विशेषज्ञ है।
    • अन्य: ONGC (तेल और गैस), NTPC (बिजली) और IOC (पेट्रोलियम)।​
  • निजी क्षेत्र से अंतर
    • निजी क्षेत्र के उद्योग जैसे टाटा स्टील (TISCO), बजाज ऑटो, डाबर या JK सीमेंट निजी कंपनियों द्वारा संचालित होते हैं
    • जहां लाभ मुख्य लक्ष्य होता है। सार्वजनिक क्षेत्र में सरकार घाटे को भी सब्सिडी से पूरा करती है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • स्वतंत्र भारत में नेहरू युग में सार्वजनिक क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई।
    • 1956 की औद्योगिक नीति में 17 उद्योगों को आरक्षित किया गया
    • जो अब घटकर आणविक ऊर्जा, रक्षा और रेलवे तक सीमित हैं।
    • 2001 के बाद निजीकरण बढ़ा, लेकिन ये उद्योग रीढ़ बने हुए हैं।​
  • महत्व और चुनौतियाँ
    • ये उद्योग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार देते हैं और रणनीतिक क्षेत्रों को मजबूत करते हैं।
    • हालांकि, नौकरशाही और घाटे चुनौतियाँ हैं। वर्तमान में (2026 तक) सरकार निजीकरण पर जोर दे रही है।​

27. निम्नलिखित में से कौन-सा कृषि आधारित उद्योग (Agro-Based Industry) है? [MTS (T-I) 20 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) चीनी
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में 'चीनी उद्योग' कृषि आधारित उद्योग है।
  • जिन उद्योगों का आधार और कच्चा माल कृषि उत्पादों से प्राप्त होता है, उन्हें कृषि आधारित उद्योग कहते हैं।
  • कृषि आधारित उद्योग की परिभाषा
    • कृषि आधारित उद्योग कृषि उपज जैसे गन्ना, कपास, चावल, दूध आदि से सीधे जुड़े होते हैं।
    • इनमें प्राथमिक प्रसंस्करण (जैसे आटा बनाना) से लेकर विनिर्माण (जैसे कपड़ा बनाना) तक की गतिविधियाँ शामिल हैं।
    • ये उद्योग कृषि को लाभकारी बनाते हैं और किसानों को अतिरिक्त आय देते हैं।
  • प्रमुख उदाहरण
    • भारत में कृषि आधारित उद्योगों के मुख्य उदाहरण निम्न हैं:
    • चीनी उद्योग: गन्ने से चीनी बनाना, जो प्राथमिक कृषि आधारित उद्योग का प्रमुख उदाहरण है।​
    • कपड़ा उद्योग: कपास से सूती वस्त्र बनाना, भारत का सबसे बड़ा कृषि आधारित उद्योग।
    • चावल मिलिंग: धान से चावल निकालना।​
    • डेयरी उद्योग: दूध से पनीर, दही आदि उत्पाद।​
    • वनस्पति तेल उद्योग: तिलहन से तेल निकालना।​
    • जूट उद्योग: जूट फसल से बोरे-थैले बनाना।​
    • चाय-कॉफी प्रसंस्करण: पत्तियों को संसाधित करना।​
    • ये उद्योग कुल औद्योगिक उत्पादन का बड़ा हिस्सा बनाते हैं।​
  • प्रकार
    • कृषि आधारित उद्योगों को चार मुख्य प्रकारों में बाँटा जाता है:
    • कृषि उत्पाद प्रसंस्करण इकाइयाँ: चावल मिल, दाल मिल आदि।
    • कृषि उत्पाद विनिर्माण इकाइयाँ: चीनी मिल, बेकरी, कपड़ा कारखाना।
    • कृषि इनपुट विनिर्माण इकाइयाँ: उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्र।
    • कृषि सेवा केंद्र: ट्रैक्टर मरम्मत आदि।
  • महत्व
    • ये उद्योग 70% ग्रामीण आबादी को रोजगार देते हैं। कृषि उत्पादों की कीमत बढ़ाते हैं, निर्यात को बढ़ावा देते हैं
    • खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। उदाहरणस्वरूप, कपड़ा उद्योग निर्यात में अग्रणी है।​
  • चुनौतियाँ
    • कच्चे माल की अनियमित आपूर्ति, पुरानी तकनीक और कम पूंजी बाधाएँ हैं। मौसमी निर्भरता भी समस्या है।​
  • सरकारी प्रयास
    • मेगा फूड पार्क योजना से आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित हो रहा है। अन्य योजनाएँ जैसे PMKSY किसानों को जोड़ती हैं।​

28. निम्नलिखित में से कौन-सा संयुक्त क्षेत्र के उद्योग का एक उदाहरण है? [MTS (T-I) 13 जून, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) मारुति उद्योग लिमिटेड
Solution:
  • जिन उद्योगों का स्वामित्व और नियंत्रण सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्रों के द्वारा किया जाता है
  • उसे संयुक्त क्षेत्र के उद्योग कहते हैं। प्रश्नगत विकल्पों में मारुति उद्योग लिमिटेड संयुक्त क्षेत्र का उद्योग है।
  • संयुक्त क्षेत्र के उद्योग क्या हैं?
    • संयुक्त क्षेत्र के उद्योग वे उद्योग हैं जिनमें सार्वजनिक क्षेत्र (सरकार) और निजी क्षेत्र दोनों मिलकर निवेश करते हैं
    • प्रबंधन में भाग लेते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के संसाधनों, विशेषज्ञता और पूंजी को जोड़कर बड़े पैमाने की परियोजनाओं को कुशलता से चलाना है
    • जोखिम कम करना तथा आर्थिक विकास को गति देना।
    • भारत जैसे मिश्रित अर्थव्यवस्था वाले देश में यह अवधारणा 1980 के दशक में लोकप्रिय हुई।
  • संयुक्त क्षेत्र उद्योग की प्रमुख विशेषताएँ
    • इनमें इक्विटी पूंजी में सरकार की हिस्सेदारी कम से कम 26% और निजी क्षेत्र की भी समान न्यूनतम हिस्सेदारी होती है।
    • प्रबंधन बोर्ड में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि होते हैं, जो निर्णय लेते हैं।
    • ये उद्योग अक्सर रणनीतिक क्षेत्रों जैसे पेट्रोलियम, ऑटोमोबाइल, उर्वरक और रसायन में स्थापित होते हैं जहाँ निजी क्षेत्र अकेले निवेश करने से हिचकता है।
    • लाभांश और जोखिम दोनों पक्षों में साझा होते हैं, जो पारदर्शिता सुनिश्चित करता है।
  • प्रसिद्ध उदाहरण
    • भारत में मारुति उद्योग लिमिटेड (अब मारुति सुजुकी) एक क्लासिक उदाहरण है।
    • 1981 में भारत सरकार और जापान की सुजुकी मोटर कॉर्पोरेशन के संयुक्त उद्यम के रूप में स्थापित, इसने भारतीय ऑटो उद्योग को क्रांति ला दी।
    • शुरू में सरकार की 74% हिस्सेदारी थी, जो बाद में बदली।
    • ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) भी प्रमुख उदाहरण है, जहाँ भारत सरकार प्रमुख शेयरधारक है
    • निजी/संस्थागत निवेशक भागीदार। यह तेल और गैस क्षेत्र में कार्यरत है।​
    • अन्य उदाहरणों में गुजरात स्टेट फर्टिलाइज़र कंपनी, हल्दिया पेट्रोकेमिकल्स, मंगलौर रिफाइनरी तथा कन्टेनर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CONCOR) शामिल हैं।
  • संभारत में संयुक्त क्षेत्र का महत्व
    • ये उद्योग भारत की औद्योगिक नीति (विशेषकर 1991 के उदारीकरण से पहले) का हिस्सा थे
    • जिन्होंने विदेशी तकनीक और पूंजी को आकर्षित किया।
    • उदाहरणस्वरूप, मारुति ने किफायती कारें लाकर मध्यम वर्ग को वाहन उपलब्ध कराए।
    • हालांकि, 2000 के बाद निजीकरण बढ़ने से कई संयुक्त उद्यम पूर्ण निजी या सार्वजनिक हो गए।
    • फिर भी, ये रक्षा, ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में प्रासंगिक बने हुए हैं।
  • निष्कर्ष में (पूर्ण विवरण के लिए)
    • प्रश्न में विकल्प न दिए जाने पर सामान्यतः मारुति उद्योग लिमिटेड को ही संयुक्त क्षेत्र का प्रतीक माना जाता है
    • क्योंकि यह परीक्षाओं और पाठ्यक्रमों में बार-बार आता है। यदि विशिष्ट विकल्प जैसे HAL, SAIL, अमूल या OIL दिए हों
    • तो मारुति या OIL सही होते। यह मॉडल भारत की आर्थिक प्रगति में महत्वपूर्ण रहा।

29. लघु पैमाने की इकाइयों को बड़े पैमाने की इकाइयों से किस आधार पर अलग किया जाता है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) निवेश की राशि
Solution:
  • लघु पैमाने की इकाइयों को बड़े पैमाने की इकाइयों से निवेश की राशि के आधार पर अलग किया जाता है।
  • निवेश एक महत्वपूर्ण कारक है, क्योंकि छोटे पैमाने की इकाइयों के पास आमतौर पर बड़े पैमाने की इकाइयों की तुलना में धन और संसाधनों तक पहुंच कम होती है।
  • निवेश की राशि: प्राथमिक आधार
    • भारत जैसे देशों में, लघु पैमाने की इकाइयों (Small Scale Industries - SSI) की परिभाषा मूल रूप से निश्चित पूँजी निवेश पर आधारित होती है।
    • उदाहरण के लिए, उद्योग विभाग या MSME (Micro, Small and Medium Enterprises) अधिनियम के तहत, लघु उद्योग वह होते हैं
    • जिनमें प्लांट, मशीनरी और उपकरणों पर निवेश एक निश्चित सीमा (जैसे ₹1 करोड़ से ₹50 करोड़ तक, उद्योग के अनुसार) से कम होता है।
    • बड़े पैमाने की इकाइयों में यह निवेश बहुत अधिक होता है, जो लाखों-करोड़ों तक पहुँच सकता है।​
    • यह भेदभाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि कम निवेश वाली इकाइयाँ व्यक्तिगत बचत, बैंक ऋण या सरकारी अनुदान पर निर्भर रहती हैं
    • जबकि बड़े उद्योग स्टॉक मार्केट, विदेशी निवेश या बड़े ऋणों से पूँजी जुटाते हैं।
    • परिणामस्वरूप, लघु इकाइयों को संसाधनों की कमी के कारण अधिक कुशलता से काम करना पड़ता है।​
  • अन्य सहायक मापदंड
    • हालाँकि निवेश मुख्य आधार है, कुछ अन्य कारक भी अंतर स्पष्ट करते हैं:
    • उत्पादन मात्रा: लघु इकाइयों में उत्पादन सीमित (कम मात्रा में) होता है, जबकि बड़े पैमाने पर बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है।​
    • श्रम शक्ति: लघु इकाइयों में 10-50 कर्मचारी होते हैं, जबकि बड़े उद्योगों में सैकड़ों-हजारों।​
    • प्रौद्योगिकी और यंत्रीकरण: लघु इकाइयों में कम मशीनरी और अधिक पारंपरिक विधियाँ, बड़े पैमाने पर उन्नत तकनीक।​
    • बाजार क्षेत्र: लघु उद्योग स्थानीय/क्षेत्रीय बाजार पर केंद्रित, बड़े उद्योग राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय।​
  • भारत में वैधानिक परिभाषा और परिवर्तन
    • भारत सरकार ने समय-समय पर MSME विकास अधिनियम 2006 के माध्यम से परिभाषाएँ अपडेट की हैं। वर्तमान में (2026 तक), लघु उद्योग:
    • विनिर्माण क्षेत्र में प्लांट पर निवेश < ₹10 करोड़ और टर्नओवर < ₹50 करोड़।
    • सेवा क्षेत्र में निवेश < ₹5 करोड़ और टर्नओवर < ₹50 करोड़।
    • ये सीमाएँ उद्योग-विशेष के अनुसार भिन्न हो सकती हैं, जैसे खाद्य प्रसंस्करण या कपड़ा उद्योग में अलग।
    • बड़े उद्योग इन सीमाओं से ऊपर आते हैं। यह वर्गीकरण सरकारी सब्सिडी, ऋण सुविधाएँ और नीतियों (जैसे प्राथमिकता क्षेत्र उधार) के लिए आधार प्रदान करता है।​
    • लघु इकाइयों को बढ़ावा देने का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार सृजन, क्षेत्रीय असंतुलन कम करना और बड़े उद्योगों के पूरक के रूप में कार्य करना है।
    • हालांकि, बिक्री या क्षेत्रफल जैसे कारक परिभाषित नहीं हैं, क्योंकि एक लघु इकाई उच्च बिक्री वाली हो सकती है यदि वह निचे बाजार में विशेषज्ञ हो।​
  • वैश्विक संदर्भ
    • अन्य देशों में भी यही सिद्धांत लागू होता है:
    • अमेरिका में SBA (Small Business Administration) कर्मचारियों की संख्या (500 तक) और औसत राजस्व पर आधारित।
    • यूरोपीय संघ में कर्मचारी संख्या (50-250) और टर्नओवर।
    • लेकिन भारत जैसे विकासशील देशों में निवेश सबसे सरल और प्रभावी मापदंड है।​
  • लाभ और चुनौतियाँ
    • लघु इकाइयाँ लचीली, कम जोखिम वाली और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुकूल होती हैं
    • लेकिन सीमित संसाधनों के कारण R&D में पिछड़ जाती हैं।
    • बड़े उद्योग विकास और नवाचार में आगे रहते हैं। यह वर्गीकरण आर्थिक नीतियों का आधार है।

30. 18वें आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं (15 वर्ष और उससे अधिक आयु) के बीच बेरोजगारी दर जनवरी-मार्च, 2023 में घटकर ....... हो गई। [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) 9.2%
Solution:
  • 18वें आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में महिलाओं के बीच बेरोजगारी दर जनवरी मार्च, 2023 में घटकर 9.2 प्रतिशत हो गई है
  • जो अब घटकर जनवरी - मार्च, 2024 में 8.5 प्रतिशत हो गई है। PLFS वार्षिक रिपोर्ट, जुलाई, 2022 जून, 2023 में यह 7.5 प्रतिशत दर्ज है।
  • PLFS का परिचय
    • PLFS राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO), सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा संचालित एक प्रमुख सर्वेक्षण है।
    • यह 2017-18 से शुरू हुआ और शहरी क्षेत्रों के लिए त्रैमासिक (Quarterly) तथा पूरे देश के लिए वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है।
    • सर्वेक्षण श्रम बल भागीदारी दर (LFPR), श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR) और बेरोजगारी दर (UR) जैसे प्रमुख संकेतकों को मापता है।
    • जनवरी-मार्च 2023 की रिपोर्ट ने शहरी रोजगार की सकारात्मक तस्वीर पेश की।
  • शहरी महिलाओं के लिए मुख्य आंकड़े
    • जनवरी-मार्च 2023 में शहरी महिलाओं की UR 9.2% रही, जो जनवरी-मार्च 2024 में घटकर 8.5% हो गई।
    • कुल शहरी UR इस तिमाही में 6.8% के आसपास रही, जिसमें पुरुषों की UR 6.0% थी।​
    • महिलाओं की LFPR में वृद्धि दर्ज की गई, जो 2022 के 21.7% से बढ़कर 2023 में लगभग 24.0% हो गई (जुलाई-सितंबर डेटा से संकेत)।​
  • तुलनात्मक विश्लेषण
    • यह कमी कुल शहरी UR के घटने के साथ मेल खाती है, जो 2023 की शुरुआती तिमाहियों में 6.6-6.8% तक रही।
    • पुरुषों में UR मामूली रूप से स्थिर या बढ़ी (6.0% से 6.1%)।
    • बाद की रिपोर्टों (2024) में महिला UR और घटी, लेकिन लैंगिक अंतर बरकरार रहा—महिलाओं की UR पुरुषों से दोगुनी।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में UR सामान्यतः कम (2.5-5%) रही।
  • व्यापक संदर्भ और प्रभाव
    • PLFS डेटा से पता चलता है कि COVID-19 के बाद शहरी रोजगार सुधरा, विशेषकर महिलाओं में वेतनभोगी नौकरियों (52-54%) में।
    • हालांकि, युवा बेरोजगारी (15-29 वर्ष) और कौशल अंतर चुनौतियाँ बनी रहीं।
    • 2023-24 वार्षिक रिपोर्ट में राष्ट्रीय UR 3.2% (महिलाएँ) रही। सरकार की योजनाएँ जैसे PMKVY और MGNREGA ने इसमें योगदान दिया।
  • बाद की प्रगति
    • 2024 की अप्रैल-जून तिमाही में शहरी UR 6.6% घटी, महिला LFPR 25.2% रही।
    • 2023-24 PLFS में शहरी LFPR 52.0% और UR 5.1% दर्ज। यह सकारात्मक रुझान दर्शाता है
    • लेकिन महिला श्रमिकों की अनौपचारिक रोजगारी (आकस्मिक श्रम 11%) पर निर्भरता बनी।