ऊष्मा एवं ऊष्मागतिकी (भौतिक विज्ञान)Total Questions: 101. निम्नलिखित में से कौन-सा चरण जल चक्र में शामिल नहीं होता है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (III-पाली)](a) वाष्पन(b) अवक्षेपण(c) संघनन(d) जलयोजनCorrect Answer: (d) जलयोजनSolution:जलयोजन का चरण जल चक्र में शामिल नहीं हैजबकि वाष्पन, संघनन तथा अवक्षेपण जल चक्र की प्रक्रिया का परिणाम है।रसायन विज्ञान में जब कोई पदार्थ जल से रासायनिक अभिक्रिया करता है, तो उसे जलयोजन अभिक्रिया कहा जाता है। यह चक्र सूर्य की ऊर्जा से संचालित होता हैइसमें मुख्य रूप से वाष्पीकरण, संघनन, वर्षा, अपवाह, अंतःस्रावन और वाष्पोत्सर्जन जैसे चरण शामिल होते हैं।प्रश्न अधूरा लगता है क्योंकि विकल्प नहीं दिए गए हैंलेकिन सामान्यतः जल चक्र से बाहर "जलयोजन" (hydration) को गिना जाता हैजो मानव शरीर में जल की पूर्ति से संबंधित है, न कि पर्यावरणीय जल संचरण से।जल चक्र के मुख्य चरणजल चक्र के सात प्रमुख चरण होते हैंजो जल को पृथ्वी की सतह से वायुमंडल और वापस सतह तक ले जाते हैं।वाष्पीकरण (evaporation) में सूर्य की गर्मी से समुद्र, नदियों और झीलों का जल वाष्प बनकर वायुमंडल में जाता है।वाष्पोत्सर्जन (transpiration) पौधों की पत्तियों से जल वाष्प के रूप में निकलना है।संघनन (condensation) में वायुमंडलीय जलवाष्प ठंडा होकर जल की बूंदों या बर्फ के कणों में बदल जाता हैजिससे बादल बनते हैं। वर्षा या अवक्षेपण (precipitation) बादलों से वर्षा, बर्फ, ओले आदि के रूप में जल का पृथ्वी पर लौटना है।अपवाह (runoff) और अंतःस्रावन (infiltration) में वर्षा का जल नदियों-झीलों में बहता है या मिट्टी में समा जाता है।जल चक्र से बाहर का चरणजलयोजन जल चक्र का हिस्सा नहीं है क्योंकि यह जैविक प्रक्रिया हैजिसमें जीवों (जैसे मनुष्य) के शरीर में खोए जल की पूर्ति भोजन या पेय से होती है।जल चक्र भौतिक-रासायनिक प्रक्रियाओं पर आधारित हैजबकि जलयोजन शारीरिक आवश्यकता है।अन्य संभावित विकल्प जैसे प्रकाशसंश्लेषण या श्वसन भी जल चक्र से असंबंधित हैं।चक्र का महत्वयह चक्र जल की उपलब्धता बनाए रखता हैमौसम नियंत्रित करता है और पारिस्थितिकी संतुलन करता है।जल की कुल मात्रा अपरिवर्तित रहती है, केवल रूप बदलता है।मानवीय गतिविधियाँ जैसे प्रदूषण इसे प्रभावित कर सकती हैं।2. हवा के गर्म होने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है? [CHSL (T-I) 17 मार्च, 2023 (I-पाली)]I. यह फैलती है और अधिक स्थान घेरती है।II. गर्म करने पर यह भारी हो जाती है।(a) केवल I(b) I और II दोनों(c) न तो I और न ही II(d) केवल IICorrect Answer: (a) केवल ISolution:हवा गर्म होने पर फैलती है और अधिक स्थान घेरती हैगर्म करने पर इसका घनत्व कम हो जाता हैजिससे यह ठंडी हवा की समान मात्रा की तुलना में हल्की हो जाती हैठंडा करने पर यह संकुचित हो जाती है। अतः केवल कथन (1) सत्य है।वैज्ञानिक कारणघनत्व कम होता है, और यह ठंडी हवा की तुलना में हल्की हो जाती है।यह प्रक्रिया संवहन (convection) का आधार बनाती है, जहां गर्म हवा ऊपर उठती है।गलत धारणाएंकई लोग सोचते हैं कि गर्म हवा भारी हो जाती है, लेकिन यह गलत है।गर्म करने पर हवा का घनत्व घटता है, इसलिए यह हल्की होती हैऊपर की ओर विस्थापित हो जाती है । उदाहरणस्वरूप, गरम हवा के गुब्बारे इसी सिद्धांत पर उड़ते हैं।व्यावहारिक प्रभाववातावरण में यह प्रक्रिया मौसम निर्माण में महत्वपूर्ण हैजैसे गर्मी की लहरों या तूफानों में। उच्च दबाव वाले क्षेत्रों में नीचे उतरती हवा गर्म होकर स्थिरता पैदा करती है ।भारत जैसे क्षेत्रों में गर्मियों में 'लू' इसी कारण चलती है ।संबंधित प्रक्रियाएंहवा गर्म होने पर चालन (conduction), संवहन (convection) और विकिरण (radiation) द्वारा ऊष्मा ग्रहण करती है।भूमि से संपर्क में निचली परतें गर्म होती हैं, फिर ऊपर उठकर वायुमंडलीय परिसंचरण बनाती हैं ।जलवायु परिवर्तन से ग्रीनहाउस गैसें इस प्रक्रिया को बढ़ा रही हैं ।3. निम्नलिखित में से किस कारक में कमी होने से वाष्पीकरण की दर में वृद्धि होती है? [CGL (T-I) 20 अप्रैल, 2022 (III-पाली)](a) द्रव की सतह के ऊपर पवन की गति(b) संबंधित द्रव की मुक्त सतह का क्षेत्रफल(c) परिवेशी तापमान(d) आर्द्रताCorrect Answer: (d) आर्द्रताSolution:वायुमंडलीय आर्द्रता एवं तापमान में प्रत्यक्ष संबंध है।वायु में किसी निश्चित समय पर जलवाष्प धारण करने की शक्ति उसके तापमान पर निर्भर करती है।आर्द्रता में कमी होने से वाष्पीकरण की दर में वृद्धि होती है।वाष्पीकरण के प्रमुख कारकवाष्पीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें द्रव सतह से गैस अवस्था में बदलता है।इसकी दर चार मुख्य कारकों पर निर्भर करती है:तापमान: उच्च तापमान पर अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ती है, जिससे वाष्पीकरण तेज होता है ।सतह क्षेत्र: बड़ा सतह क्षेत्र अधिक अणुओं को वाष्पित होने का अवसर देता है ।वायु गति: तेज हवा वाष्पित कणों को दूर ले जाती है, जिससे दर बढ़ती है ।आर्द्रता: कम आर्द्रता वाष्पीकरण को बढ़ावा देती है, जबकि अधिक आर्द्रता इसे रोकती है ।आर्द्रता का प्रभाव विस्तार सेआर्द्रता हवा में जलवाष्प की मात्रा को दर्शाती है। जब हवा शुष्क (कम आर्द्रता) होती हैतो उसके पास अधिक जल अणुओं को समाहित करने की क्षमता रहती हैजिससे वाष्प दाब का अंतर बढ़ता है और वाष्पीकरण तेजी से होता हैउदाहरणस्वरूप, गर्मियों में शुष्क मौसम में कपड़े जल्दी सूखते हैंजबकि वर्षा के दिनों में अधिक नमी के कारण सूखने में देरी होती हैवैज्ञानिक रूप से, वाष्पीकरण दर = k (P_s - P_a), जहां P_s द्रव का वाष्प दाब और P_a हवा का आंशिक दाब हैआर्द्रता कम होने से P_a घटता है ।व्यावहारिक महत्वकृषि में सिंचाई, मौसम पूर्वानुमान और शीतलन प्रक्रियाओं (जैसे पसीना वाष्पित होकर ठंडक पैदा करता है)यह सिद्धांत उपयोगी है। जलवायु परिवर्तन से आर्द्रता में उतार-चढ़ाव सूखा या बाढ़ को प्रभावित करता हैकम आर्द्रता वाले क्षेत्रों में जल संरक्षण आवश्यक हो जाता है।4. निम्नलिखित में से कौन-सा ऊष्मामिति (calorimetry) की प्रक्रिया का सबसे अच्छा वर्णन करता है? [MTS (T-I) 14 सितंबर, 2023 (III-पाली)](a) बल की मात्रा का मापन(b) संपीडन सामर्थ्य की मात्रा का मापन(c) स्थानांतरित ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा का मापन(d) बिजली की मात्रा का मापनCorrect Answer: (c) स्थानांतरित ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा का मापनSolution:स्थानांतरित ऊष्मा ऊर्जा की मात्रा का मापन ऊष्मामिति (Calorimetry) की प्रक्रिया का सबसे अच्छा वर्णन करता है।ऊष्मामिति (Calorimetry) के लिए जो उपकरण उपयोग में लाए जाते हैं, उन्हें ऊष्मामापी (Calorimeter) कहा जाता है।मूल सिद्धांतऊष्मामिति में दो निकायों (जैसे गर्म वस्तु और ठंडा जल) को अलग-अलग तापमान पर मिश्रित किया जाता है।उच्च तापमान वाला निकाय ऊष्मा छोड़ता है, जबकि निम्न तापमान वाला ऊष्मा ग्रहण करता हैजब तक दोनों समान अंतिम तापमान पर न पहुँच जाएँ।गर्म निकाय द्वारा छोड़ी गई ऊष्मा ठंडे निकाय द्वारा ग्रहण की गई ऊष्मा के बराबर होती हैजो ऊष्मा ऊर्जा संरक्षण के नियम को दर्शाता है।प्रकारप्रत्यक्ष ऊष्मामिति: कैलोरीमीटर के उपयोग से ऊष्मा की सीधी मापजैसे तापमापी द्वारा ताप परिवर्तन। इसमें मिश्रण विधि या शीतलीकरण विधि शामिल है।अप्रत्यक्ष ऊष्मामिति: ऑक्सीजन की मात्रा या अन्य अप्रत्यक्ष मापदंडों से ऊष्मा गणना, मुख्यतः जैविक प्रक्रियाओं में।तापपरिवर्तन ऊष्मामिति: विशिष्ट ऊष्मा (Cp या Cv) मापने के लिए जल या अन्य द्रव का उपयोग।प्रक्रियाप्रक्रिया में गर्म वस्तु को ठंडे जल से भरे कैलोरीमीटर में डाला जाता है।अंतिम तापमान मापकर सूत्र Q_खो = Q_प्राप्त से विशिष्ट ऊष्मा, गुप्त ऊष्मा आदि ज्ञात की जाती है।उदाहरण: यदि m1 ग्राम वस्तु t1 ताप से t अंतिम ताप पर आती हैm2 ग्राम जल t2 से t तक, तो m1 S1 (t1 - t) = m2 S2 (t - t2), जहाँ S विशिष्ट ऊष्मा है।महत्वपूर्ण विधियाँमिश्रण विधि: दो द्रवों या ठोस-द्रव मिश्रण से ऊष्मा विनिमय।गुप्त ऊष्मा विधि: हिम द्रवण या वाष्पीकरण से, जैसे गर्म वस्तु हिम को पिघलाती है5. आदर्श गैसों के मिश्रण का कुल दाब आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है। यह ....... का आंशिक दाब का नियम है। [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (IV-पाली)](a) बायल(b) डाल्टन(c) चार्ल्स(d) आवगाद्रोCorrect Answer: (b) डाल्टनSolution:परस्पर क्रिया न करने वाली आदर्श गैसों के मिश्रण का कुल दाब आंशिक दाब के योग के बराबर होता है। यह डाल्टन के आंशिक दाब का नियम है।Pt=P1+P2....... Pnजहां P₁, P2, ....... P. प्रत्येक घटक गैस का आंशिक दाब है।आदर्श गैसों के मिश्रण का कुल दाब उसके प्रत्येक गैस के आंशिक दाबों के योग के बराबर होता है।यह डाल्टन के आंशिक दाब के नियम (Dalton's Law of Partial Pressures) का स्पष्ट वर्णन है।यह नियम गैसों के व्यवहार को समझने में मौलिक है।डाल्टन के नियम का कथनडाल्टन का आंशिक दाब का नियम बताता हैगैर-अभिक्रियाशील (अक्रियाशील) आदर्श गैसों के मिश्रण में कुल दाब (P_total) मिश्रण में मौजूद प्रत्येक गैस के आंशिक दाब (p1, p2, p3, ...) के योग के बराबर होता है।गणितीय रूप से: Ptotal=p1+p2+p3+⋯+pnPtotal=p1+p2+p3+⋯+pn, जहाँ प्रत्येक आंशिक दाब pi=niRTVpi=VniRT हैn_i गैस i के मोल, R गैस स्थिरांक, T तापमान और V मिश्रण का आयतन।यह नियम इस धारणा पर आधारित है कि मिश्रण में गैसें एक-दूसरे से स्वतंत्र रूप से व्यवहार करती हैंबिना किसी महत्वपूर्ण अंतर्क्रिया के।व्युत्पत्ति आदर्श गैस समीकरण सेआदर्श गैस समीकरण PV=nRTPV=nRT प्रत्येक गैस पर अलग-अलग लागू होता है।यदि मिश्रण में g1, g2, ..., gn गैसें हों, तो प्रत्येक के लिए कुल दाब के लिए कुल मोलइसलिए PtotalV=ntotalRTPtotalV=ntotalRT, जो Ptotal=∑piPtotal=∑pi देता है।गतिज सिद्धांत से, प्रत्येक गैस के अणुओं की गति स्वतंत्र होती है, इसलिए दाब योगफल के रूप में जुड़ते हैंआंशिक दाब की गणनाआंशिक दाब मोल भिन्न (mole fraction) से भी निकाला जाता हैpi=xiPtotalpi=xiPtotal, जहाँ xi=nintotalxi=ntotalni उदाहरण: 1 मोल O2 (p1 = 0.21 atm वायुमंडल में) और 4 मोल N2 (p2 = 0.79 atm) का मिश्रण कुल 1 atm दाब पर।यह नियम वायुमंडलीय दाब, डाइविंग मिश्रणों आदि में उपयोगी है।6. ऊष्मा ऊर्जा के अनुप्रयोग से बर्फ-टुकड़े के परमाणु कंपन करने लगते हैं। एक बिंदु पर, परमाणुओं में इतनी अधिक ऊर्जा होती है कि वे अपनी स्थिर स्थिति से अलग हो जाते हैं और स्थिर संरचना खो देते हैं। इसे हम जल निर्माण के रूप में देख सकते हैं। इस विशेष बिंदु को क्या कहा जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) मृदुकरणांक(b) अपघटन ताप(c) गलनांक(d) क्वथनांकCorrect Answer: (c) गलनांकSolution:ऊष्मा ऊर्जा के अनुप्रयोग से किसी पदार्थ का ठोस अवस्था से द्रव अवस्था में रूपांतरित होनाजिस ताप पर घटित होता है उसे गलनांक के रूप में परिभाषित किया जाता है।परिभाषागलनांक वह तापमान है जहाँ ठोस पदार्थ द्रव में बदलने लगता है।इस बिंदु पर परमाणु या अणुओं को पर्याप्त ऊष्मा ऊर्जा मिलती हैजिससे वे अपनी निश्चित क्रिस्टलीय संरचना खो देते हैं ।प्रक्रियाऊष्मा प्रदान करने पर बर्फ के अणु पहले कंपन बढ़ाते हैंफिर गलनांक पर अंतर-आणविक बंधन टूटते हैं, परिणामस्वरूप संरचना ढीली पड़ती हैपिघलना शुरू हो जाता है। इस दौरान तापमान स्थिर रहता है क्योंकि ऊर्जा गुप्त ऊष्मा के रूप में उपयोग होती हैअन्य बिंदुओं से अंतरक्वथनांक: द्रव से गैस में परिवर्तन (पानी के लिए 100°C)।अपघटन तापमान: रासायनिक विघटन।नरमकरण बिंदु: अनाकार पदार्थों का विकृत होना ।7. खाना पकाने की किस विधि में भोजन को ऊष्मा के स्रोत पर धीरे-धीरे गर्म किया जाता है और आग के संबंध में भोजन की स्थिति के आधार पर उच्च ताप और वायु संवहन द्वारा पकाया जाता है? [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (II-पाली)](a) ब्रेजिंग(b) स्टूइंग(c) स्पिट-रोस्टिंग(d) पोचिंगCorrect Answer: (c) स्पिट-रोस्टिंगSolution:खाना पकाने की स्पिट-रोस्टिंग विधि में भोजन को ऊष्मा के स्रोत पर धीरे-धीरे गर्म किया जाता हैआग के संबंध में भोजन की स्थिति के आधार पर उच्च ताप और वायु संवहन द्वारा पकाया जाता है।विधि का विवरणस्पिट रोस्टिंग एक प्राचीन शुष्क ऊष्मा पकाने की तकनीक हैजो मुख्य रूप से बड़े मांस के टुकड़ों जैसे पूरे चिकन, भेड़ का मांस या सूअर के टुकड़ों के लिए उपयोग की जाती है।भोजन को स्पिट पर बांधकर ओपन फ्लेम (खुली आग) या चारकोल ग्रिल के ऊपर 150-190 डिग्री सेल्सियस तापमान पर घुमाया जाता हैजिससे ऊष्मा समान रूप से चारों ओर फैलती है।घुमाने से भोजन का एक हिस्सा कभी आग के करीब (उच्च ताप) तो कभी दूर (मध्यम संवहन) होता रहता हैजो समान पकाव सुनिश्चित करता है।ऊष्मा स्थानांतरण की प्रक्रियाइसमें विकिरण (radiation), संवहन (convection) और संचालन (conduction) तीनों कार्य करते हैं।आग से निकलने वाली गर्म हवा भोजन के चारों ओर घूमती हैजिससे वायु संवहन द्वारा ऊष्मा भोजन की सतह तक पहुंचती है।स्पिट का धीरे-धीरे घुमना भोजन को बिना जलाए अंदर तक पकाने में मदद करता हैबाहरी परत क्रिस्पी हो जाती है जबकि अंदर रसदार रहता है।तापमान नियंत्रण के लिए आग की दूरी और घुमाने की गति महत्वपूर्ण होती है।फायदे और नुकसानयह विधि स्वादिष्ट सुगंध और सुनहरा रंग प्रदान करती हैपोषक तत्वों को आंशिक रूप से संरक्षित रखती है।हालांकि, अधिक समय लगता है और धुंए से वसा कम होती है।घर पर इलेक्ट्रिक रोटिसरी या पारंपरिक भाटी ओवन में किया जा सकता है।8. ....... के अनुसार, आंतरिक ऊर्जा अवस्था का एक कार्य है, और आंतरिक ऊर्जा में हुई वृद्धि प्रणाली को आपूर्ति की गई ऊष्मा और प्रणाली द्वारा किए गए कार्य के योग के बराबर होती है। [CHSL (T-I) 1 फरवरी, 2017 (I-पाली)](a) ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम(b) हुक का नियम(c) कूलंब का नियम(d) फैराडे का नियमCorrect Answer: (a) ऊष्मागतिकी का प्रथम नियमSolution:ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, किसी निकाय को दी जाने वाली ऊष्मा दो भागों में विभक्त होती हैअर्थात जो ऊर्जा ΔQ निकाय को दी जाती हैउसका कुछ अंश निकाय की आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि (ΔU) करता है।तथा शेष परिवेश पर किए गए कार्य में व्यय होती है।यह नियम मुख्यतः ऊर्जा के संरक्षण को प्रदर्शित करता है।आंतरिक ऊर्जा की परिभाषाआंतरिक ऊर्जा किसी प्रणाली के सभी अणुओं की गतिज ऊर्जा (जैसे अनुवाद गति, घूर्णन, कंपन) और स्थितिज ऊर्जा (अणुओं के बीच अन्योन्यक्रिया) का योग हैयह प्रणाली के तापमान, दाब, आयतन और पदार्थ की प्रकृति पर निर्भर करती है।आंतरिक ऊर्जा हमेशा परिवर्तन (ΔU) के रूप में मापी जाती हैक्योंकि पूर्ण मान निर्धारित करना कठिन होता है।उदाहरणस्वरूप, आदर्श गैस में ΔU केवल तापमान पर निर्भर करती है(ΔU = nC_v ΔT), जबकि वास्तविक गैसों में अन्य कारकों का प्रभाव पड़ता है ।ऊष्मागतिकी का प्रथम नियमऊष्मागतिकी का प्रथम नियम गणितीय रूप से ΔU = Q - W या कभी-कभी ΔU = Q + W (संकेत सम्मेलन पर निर्भर) के रूप में व्यक्त होता है । यहाँ Q धनात्मक होती हैजब प्रणाली को ऊष्मा मिलती है, और W धनात्मक होती है जब प्रणाली कार्य करती है(जैसे गैस विस्तार में पिस्टन धकेलना)। ऊर्जा संरक्षण के अनुसार, प्रणाली में प्रवेश करने वाली कुल ऊर्जा (Q) से प्रणाली द्वारा बाहर जाने वाली ऊर्जा (W) घटाने पर शेष आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है। यह नियम जूल के समतुल्य सिद्धांत पर आधारित है, जो प्रयोगों से सिद्ध हुआ ।ऊष्मा और कार्य का योगप्रणाली को आपूर्ति की गई ऊष्मा (Q) तापमान अंतर से स्थानांतरित ऊर्जा हैजबकि कार्य (W) यांत्रिक रूप से होता है, जैसे W = PΔV (स्थिर दाब पर) ।यदि प्रणाली को 25 J ऊष्मा मिलती है और यह 45 J कार्य करती हैतो ΔU = 25 - 45 = -20 J, अर्थात् आंतरिक ऊर्जा घटती है ।यह योग दर्शाता है कि ऊष्मा का कुछ भाग कार्य में बदल जाता हैशेष आंतरिक ऊर्जा बढ़ाता है। विभिन्न प्रक्रियाओं में:समतापीय प्रक्रिया (ΔT=0): ΔU=0, अतः Q=W।अदियाबेटिक प्रक्रिया (Q=0): ΔU=-W।समपीठी प्रक्रिया (ΔV=0): W=0, अतः ΔU=Q ।9. ....... में ऊष्मा गर्म पदार्थ से ठंडे पदार्थ में स्थानांतरित होने वाली ऊर्जा का एक प्रकार है। [CHSL (T-I) 06 अगस्त, 2021 (I-पाली)](a) घर्षण(b) गुरुत्वाकर्षण(c) चुंबक(d) ऊष्मागतिकीCorrect Answer: (d) ऊष्मागतिकीSolution:ऊष्मा एवं ऊर्जा के विभिन्न रूपों का संबंध व्यक्त करने वाले अध्ययन को ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) कहते हैं।ऊष्मा के स्थानांतरण, अर्थात अधिक ताप वाली (गर्म) वस्तु से कम ताप वाली (ठंडी) वस्तु की ओर ताप का स्थानांतरण एक प्रकार की ऊष्मीय गति है।अतः यह ऊष्मा गतिकी के अंतर्गत आता है।ऊष्मा की परिभाषायह स्थानांतरण स्वतः होता है जब तक दोनों पदार्थ एक ही तापमान पर न पहुँच जाएँ।ऊष्मा को जूल या कैलोरी में मापा जाता है।ऊष्मा स्थानांतरण के तरीकेऊष्मा तीन मुख्य तरीकों से स्थानांतरित होती है।चालन ठोस पदार्थों में कणों की कंपन से होता हैजैसे लोहे की छड़ के एक सिरे को गर्म करने पर दूसरा सिरा गर्म हो जाता है।संवहन तरल और गैसों में गर्म पदार्थ के ऊपर उठने से होता हैजैसे उबलते पानी में। विकिरण विद्युतचुंबकीय तरंगों द्वारा बिना माध्यम के होता हैजैसे सूर्य की गर्मी पृथ्वी तक पहुँचती है।ऊष्मप्रवैगिकी का महत्वऊष्मप्रवैगिकी गर्मी, कार्य, तापमान और ऊर्जा के रूपांतरण का अध्ययन करती है।इसके चार नियम ऊर्जा संरक्षण और दिशा निर्धारित करते हैंजैसे प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का।यह इंजनों, रेफ्रिजरेटर और मौसम प्रणालियों की समझ के लिए आधारभूत है।दैनिक जीवन में उदाहरणचाय ठंडी होने पर संवहन और विकिरण से ऊष्मा हवा में चली जाती है।कुकर में चालन से भोजन जल्दी पकता है। इन प्रक्रियाओं से ऊर्जा दक्षता बढ़ती है।10. किसी मोमबत्ती की ज्वाला के पूर्ण दहन के बाह्य क्षेत्र का रंग कैसा होता है? [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (I-पाली)](a) काला(b) नारंगी(c) नीला(d) पीलाCorrect Answer: (c) नीलाSolution:मोमबत्ती की ज्वाला के पूर्ण दहन के बाह्य क्षेत्र का रंग, गर्म ऑक्सीजन युक्त नीला होता हैजो मोमबत्ती के ईंधन के कुशल वायु की उपस्थिति में दहन के कारण होता है।पीली ज्वाला अपूर्ण दहन का परिणाम होती है, जबकि नारंगी ज्वाला मध्यवर्ती दहन का परिणाम होती है।ज्वाला के तीन मुख्य क्षेत्र यह सबसे ठंडा भाग होता है। मध्य क्षेत्र पीला और चमकदार होता हैजहाँ आंशिक दहन से कार्बन कण जलते हैं, जिससे धुआं और कालिख बनती है।बाह्य क्षेत्र की विशेषताएँबाह्य क्षेत्र नीले रंग का होता है क्योंकि यहाँ पूर्ण दहन प्रक्रिया होती है।ऑक्सीजन युक्त हवा की उपस्थिति से ईंधन पूरी तरह जल जाता हैजिससे अधिकतम ऊष्मा और प्रकाश उत्पन्न होता है।यह क्षेत्र ज्वाला का सबसे गर्म भाग (लगभग 1400°C) होता है और ज्योतिहीन (non-luminous) प्रकृति का होता है।दहन प्रक्रिया का विज्ञानमोमबत्ती जलने पर मोम वाष्पीकृत होकर गैस बनता हैजो ऑक्सीजन के साथ अभिक्रिया करता है।बाहरी क्षेत्र में CO₂ और H₂O जैसे पूर्ण दहन उत्पाद बनते हैं।अपर्याप्त ऑक्सीजन होने पर पीला रंग दिखता हैक्योंकि कार्बन कण incandesce होकर चमकते हैं।नीला रंग उच्च तापमान पर दहन गैसों की उत्सर्जन रेखाओं से उत्पन्न होता है।व्यावहारिक महत्वयह संरचना दहन की दक्षता दर्शाती है।रसोई गैस के बर्नर पर नीली ज्वाला पूर्ण दहन का संकेत है जो ऊर्जा बचाती है।मोमबत्ती प्रयोग से छात्र दहन के विभिन्न चरण समझ सकते हैं।हवा की गति बढ़ाने पर बाहरी क्षेत्र फैलता है।Submit Quiz