एग्रीकल्चर इंस्पेक्टर (कृषि विभाग) परीक्षा 2017 (द्वितीय पाली)

Total Questions: 100

91. एक जैविक खेत में मृदा की अवस्था के बारे में, निम्नलिखित कौन सा वक्तव्य सही नहीं है?

Correct Answer: (2) उच्चतर जल धारण क्षमता
Solution:जैविक खाद से जल धारण क्षमता और मृदा संरचना में सुधार आती है। इसके प्रयोग से मृदा का जैविक स्तर बढ़ता है जिससे लाभकारी जीवाणुओं की संख्या बढ़ जाती है और मृदा काफी उपजाऊ बनी रहती है। पौधे वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्त्वों जैसे नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश तथा काफी मात्रा में गौण पोषक तत्त्वों की पूर्ति जैविक खादों के प्रयोग से ही हो जाती है।

92. निम्नलिखित कौन सा कचरा वानस्पतिक खाद बनाने के लिए प्रयोग किया जा सकता है?

Correct Answer: (4) टीबैग, कॉफी चूरा, कॉफी फिल्टर और पेपर टॉवल
Solution:कम्पोस्ट खाद उस खाद को कहते हैं जिसमें फसलों के अवशेष, घास आदि को जानवर से प्राप्त कचरा व गोबर को एक साथ एक निर्धारित गड्ढे में सड़ाकर बनाई जाती है। इसके लिए 10 फीट × 5 फीट × 4 फीट लंबाई, चौड़ाई व गहराई का गड्ढ़ा बनाकर उसकी चुनाई अंदर से ईंट द्वारा कर दी जाती है। इसके बाद फसलों के अवशेष सड़ा भूसा, पुआल व घास एवं पशुओं से प्राप्त गोबर को एक के बाद एक तल के रूप में लगाकर गड्ढ़ा भर दिया जाता है। गड्‌ढ़ा भर जाने के बाद मिट्टी से ढ़क दिया जाता है। इस प्रकार 6 माह में खाद सड़कर तैयार हो जाती है।

93. वानस्पतिक खाद डालने हेतु प्रयुक्त भूरी सामग्री _______ से समृद्ध होती है

Correct Answer: (3) कार्बन
Solution:वानस्पति खाद मिट्टी में पोषक तत्त्वों की उपलब्धता का इजाफा करता है। इसमें नाइट्रोजन, कार्बन, अमोनिया आदि प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।

94. हरित खाद के लिए उपयुक्त एक फलीदार फसल कौन सी है?

Correct Answer: (1) लोबिया
Solution:हरी खाद का अर्थ उन पत्तीदार फसलों से है, जिनकी वृद्धि शीघ्र हो तथा काफी मात्रा में बड़ी होने पर फूल-फल आने से पहले उन्हें जोतकर मिट्टी में दबा दिया जाता है। फलतः मृदा में ये फसलें सूक्ष्म जीवों द्वारा विच्छेदित होकर मृदा में ह्यूयमस तथा पौधों के पोषक तत्त्वों की मात्रा में वृद्धि करती है। जैसे- सनई, कैंचा, उर्द, मूंग, लोबिया एवं सैजी।

95. निम्नलिखित का मिलान करें और सही विकल्प पर निशान लगाएँ

स्तम्भ-Iस्तम्भ-II
A. नाइट्रिकारी जीवाणु(i) जैव भार उत्पादन की उच्च दर
B. एजोटोबैक्टर(ii) हरित पर्णधारी खाद्य फसल
C. सेस्बेनिया(iii) मूल ग्रंथि
D. पोंगामिया(iv) जैव उर्वरक

Code :

ABCD
(1)iiiiviii
(2)iiviiiii
(3)iiiiviii
(4)iviiiiii
Correct Answer: (1) iii iv i ii
Solution:
स्तंभ Iस्तंभ II
(i) नाइट्रिकारी जीवाणुमूल ग्रंथि
(ii) एजोटोबैक्टरजैव उर्वरक
(iii) सेस्बेनियाजैव भार उत्पादन की उच्च दर
(iv) पोंगामियाहरित पर्णधारी खाद्य फसल

96. जल, स्थान, प्रकाश और खनिजों के लिए फसल पादपों से प्रतिस्पर्धा करते हैं।

Correct Answer: (1) अपतृण (खरपतवार)
Solution:खरपतवार फसलों से तीव्र प्रतिस्पर्धा करके भूमि में निहित नमी एवं पोषक तत्त्वों के अधिकांश भाग को शोषित कर लेते हैं। फलस्वरूप फसल की विकास गति धीमी पड़ जाती है तथा पैदावार कम हो जाती है। प्रमुख खरपतवारः बेसक, कनकी, महकुआ, फुलवारी आदि।

97. अपतृणों (खरपतवार) को नियंत्रित करने की एक विधिः

Correct Answer: (4) घास-पात से ढकना
Solution:खरपतवार नियंत्रणः

(i) हाथों से खरपतवार निकालना - हाथों से खींचकर खरपतवारों को निकालना या खुरपी, हँसिया, कुदाल आदि से निकालना।

(ii) मशीन से खरपतवार निकालना - जैसे रोटर वेटर से खरपतवार निकालना।

98. नाइट्रोजन की अल्पता के लक्षण पहले _____ पत्तियों में दिखाई देते हैं।

Correct Answer: (1) पुरानी
Solution:पौधे नाइट्रोजन वायुमण्डल से प्राप्त करते हैं। यह तत्त्व पौधों में प्रोटीन तथा न्यूक्लिक अम्ल के निर्माण के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी होते हैं। इसकी कमी से पौधों की वृद्धि रूक जाती है, जबकि इसकी अधिकता होने से पौधों में फूल विलम्ब से उगते हैं। नाइट्रोजन की अल्पता के लक्षण पहले पुरानी पत्तियों में दिखा देता है।

99. पुष्पोद्यान लगाने की सतगुनी प्रणाली को _____ प्रणाली भी कहा जाता है।

Correct Answer: (4) षटकोणीय
Solution:पुष्पोद्यान लगाने की अनेक प्रणालियाँ विश्वभर में प्रचलित हैं। परन्तु आयताकार पुष्पोद्यान प्रणाली सर्वाधिक प्रचलित हैं। इसके अंतर्गत आयताकार क्यारियाँ बनाकर उनमें पुष्प रोपे (लगाए) जाते हैं।

100. बागवानी फसलों में पीड़क उपचार का सिद्धांत कौन सा है?

Correct Answer: (2) उन्मूलन
Solution:बागवानी फसलों में पीड़क उपचार का सिद्धांत उन्मूलन है।