Correct Answer: (c) (iii), (iv) और (i)
Solution:इतिहास को उपलब्ध स्रोतों के आधार पर दो भागों में बांटा गया है- (i) प्रागैतिहासिक काल तथा (ii) ऐतिहासिक काल। ऐसा काल जिसका ज्ञान पुरातात्विक साक्ष्यों के आधार पर हो, उसे प्रागैतिहासिक काल कहते हैं, जबकि ऐतिहासिक काल का लिखित साक्ष्य उपलब्ध है। प्रश्न में दिए गए विकल्पों में से बुद्ध, नवाब तथा महाराज के संबंध में पर्याप्त प्रामाणिक लिखित साक्ष्य उपलब्ध हैं, जबकि राम के संबंध में जानकारी रामायण महाकाव्य से ही हो पाती है। यह भी लिखित महाकाव्य है, लेकिन इसे प्रामाणिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता है। रामायण कालीन स्थलों से प्राप्त पुरातात्विक साक्ष्यों का रामायण में उल्लिखित घटनाओं से सामंजस्य स्थापित अभी तक पूर्ण रूप से नहीं हो पाया है। अभी इस पर शोध कार्य जारी है। साक्ष्यों में सामंजस्य का अभाव इसलिए भी है कि रामायण महाकाव्य की रचना, घटना के बहुत बाद में की गई है। अतः उस काल से संबंधित स्तरों से मिले साक्ष्य से इसकी पुष्टि नहीं हो पाती। चूंकि रामायण को ऐतिहासिक साक्ष्य नहीं माना जाता, साथ ही राम के बारे में जानकारी अन्य किसी ग्रंथ से न होने के कारण 'राम' को ऐतिहासिक पूर्वकाल में नहीं रखा जा सकता। हालांकि इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।