कंप्यूटर : एक परिचय (Part – II)

Total Questions: 50

1. दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटरों में कौन-से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का प्रयोग किया गया था। [MPPCS Pre Exam, 2023]

Correct Answer: (c) ट्रांजिस्टर
Solution:
  • कंप्यूटर की दूसरी पीढ़ी में हार्डवेयर के रूप में ट्रांजिस्टर नामक इलेक्ट्रानिक उपकरण का प्रयोग किया गया था।
  • ट्रांजिस्टर तीन टर्मिनल वाला एक सेमीकंडक्टर डिवाइस है जिसका उपयोग एम्लीफायर व इलेक्ट्रानिक स्विच आदि के रूप में होता है।
  • दूसरी पीढ़ी का कालखंड
    • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर लगभग 1955 से 1964-65 तक विकसित हुए।
    • इस अवधि में बेल लेबोरेट्रीज़ द्वारा 1947 में आविष्कृत ट्रांजिस्टर का व्यावसायिक उपयोग शुरू हुआ।
    • ट्रांजिस्टर ने वैक्यूम ट्यूबों की कमियों जैसे अधिक गर्मी, बड़ा आकार और बार-बार खराब होने की समस्या को दूर किया।
    • इससे कंप्यूटर उद्योग में तेज़ी आई और व्यावसायिक उपयोग बढ़ा।
  • ट्रांजिस्टर की विशेषताएँ और लाभ
    • ट्रांजिस्टर एक अर्धचालक उपकरण है जो बिजली के प्रवाह को नियंत्रित करता है, एम्पलीफायर या स्विच के रूप में काम करता है।
    • आकार में छोटा: एक ट्रांजिस्टर वैक्यूम ट्यूब जितना ही कार्य करता था
    • लेकिन बहुत छोटा था, जिससे कंप्यूटर का आकार 51 वर्ग फीट तक सिमट गया।​
    • कम ऊर्जा खपत: ये कम बिजली इस्तेमाल करते थे और गर्म नहीं होते थे।​
    • तेज़ गति: माइक्रोसेकंड में गणना कर लेते थे, जो पहली पीढ़ी से बेहतर था।
    • विश्वसनीयता: रखरखाव आसान और टूटने की संभावना कम।
  • अन्य उपयोग किए गए उपकरण
    • मेमोरी: चुंबकीय कोर मेमोरी, जो छोटे चुंबकीय रिंग्स से बनी होती थी।​
    • इनपुट/आउटपुट: पंच कार्ड (Punch Cards) और प्रिंटआउट।​
    • भाषाएँ: असेंबली लैंग्वेज और हाई-लेवल भाषाएँ जैसे COBOL, FORTRAN।​​
    • सिस्टम: बैच प्रोसेसिंग और मल्टी-प्रोग्रामिंग ऑपरेटिंग सिस्टम।

2. कंप्यूटर की निम्नलिखित पीढ़ियों में से किसमें ट्रांजिस्टर की तकनीक का उपयोग सबसे पहली बार किया गया था? [SSC CGL Tier-11 03/03/2023]

Correct Answer: (d) दूसरा
Solution:
  • ट्रांजिस्टर तकनीक का उपयोग कंप्यूटर में द्वितीय पीढ़ी में किया गया था।
  • कंप्यूटर पीढ़ियों का अवलोकन
    • कंप्यूटर का विकास पांच मुख्य पीढ़ियों में विभाजित है, जो मुख्य रूप से हार्डवेयर तकनीक पर आधारित हैं।
    • पहली पीढ़ी (1940-1956) वैक्यूम ट्यूब्स पर निर्भर थी, जैसे ENIAC, जो विशाल, गर्मी उत्पन्न करने वाले और अविश्वसनीय थे।
    • दूसरी पीढ़ी (1956-1964) में ट्रांजिस्टर ने वैक्यूम ट्यूब्स की जगह ली
    • जिससे कंप्यूटर छोटे, तेज, कम बिजली खपत वाले और विश्वसनीय बने।
    • तीसरी पीढ़ी (1964-1971) में एकीकृत सर्किट (IC) आए, चौथी (1971-1990) में माइक्रोप्रोसेसर, और पांचवीं (1990-वर्तमान) में AI व क्वांटम तकनीक।
  • ट्रांजिस्टर का आविष्कार पहला उपयोग
    • ट्रांजिस्टर का आविष्कार 1947 में बेल लैबोरेटरीज के वाल्टर ब्रेटेन, जॉन बार्डीन और विलियम शॉकले ने किया था।
    • कंप्यूटर में इसका व्यावसायिक उपयोग सबसे पहले 1956 में TX-0 कंप्यूटर में हुआ
    • जो MIT द्वारा विकसित किया गया। इससे पहले की पहली पीढ़ी पूरी तरह वैक्यूम ट्यूब्स (जैसे EDSAC, EDVAC, UNIVAC-1) पर आधारित थी।
    • ट्रांजिस्टर ने स्विचिंग और एम्पलीफिकेशन को छोटे सिलिकॉन चिप्स पर संभव बनाया।
  • दूसरी पीढ़ी की विशेषताएं
    • इस पीढ़ी के कंप्यूटर ट्रांजिस्टर पर पूरी तरह आधारित थे, जो वैक्यूम ट्यूब्स से 100 गुना छोटे और 10 गुना तेज थे।
    • इनमें मैग्नेटिक कोर मेमोरी, असेंबली और हाई-लेवल भाषाएं (जैसे FORTRAN, COBOL, ALGOL) का विकास हुआ।
    • आकार कम होने से कमर्शियल उपयोग बढ़ा, लेकिन अभी भी रूम साइज के थे। उदाहरण: IBM 1401, PDP-1, IBM 7094।
  • अन्य पीढ़ियों में ट्रांजिस्टर की भूमिका
    • ट्रांजिस्टर केवल दूसरी पीढ़ी की पहचान था; बाद की पीढ़ियों में यह IC और माइक्रोप्रोसेसर का आधार बना।
    • तीसरी पीढ़ी में जैक किल्बी के IC ने कई ट्रांजिस्टरों को एक चिप पर समाहित किया।
    • चौथी पीढ़ी में माइक्रोप्रोसेसर (जैसे Intel 4004, 1971) ने बिलियन्स ट्रांजिस्टरों को संभव बनाया। लेकिन सबसे पहला व्यापक उपयोग दूसरी पीढ़ी में ही हुआ।​
  • प्रभाव महत्व
    • ट्रांजिस्टर ने कंप्यूटर को सरकारी-वैज्ञानिक उपयोग से व्यावसायिक क्षेत्र में पहुंचाया, लागत घटाई (ENIAC: $4 लाख डॉलर बनाम IBM 1401: $20,000) और विश्वसनीयता बढ़ाई।
    • इससे डेटा प्रोसेसिंग, बैंकिंग, रेलवे रिजर्वेशन संभव हुए।
    • आज के अरबों ट्रांजिस्टर वाले चिप्स (जैसे Apple M1) इसी की देन हैं।

3. द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) में वैक्यूम ट्यूब के स्थान पर किसका प्रयोग किया गया?

Correct Answer: (b) ट्रांजिस्टर
Solution:
  • द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) में वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) के स्थान पर ट्रांजिस्टर का प्रयोग किया गया।
  • ट्रांजिस्टर का आविष्कार और महत्व
    • ट्रांजिस्टर का आविष्कार 1947 में बेल लैबोरेटरीज में जॉन बार्डीन, वाल्टर ब्रेटेन और विलियम शॉकले ने किया था।
    • यह वैक्यूम ट्यूब की तुलना में छोटा, कम बिजली खपत करने वाला, कम गर्मी उत्पन्न करने वाला और अधिक विश्वसनीय था।
    • दूसरी पीढ़ी (लगभग 1956-1963 या 1955-1964 तक) में इस बदलाव ने कंप्यूटरों को बड़े कक्षों से सामान्य कमरों में लाने योग्य बना दिया।
  • दूसरी पीढ़ी की मुख्य विशेषताएँ
    • ट्रांजिस्टर आधारित: वैक्यूम ट्यूबों के स्थान पर सिलिकॉन या जर्मेनियम जैसे अर्धचालक पदार्थों से बने ट्रांजिस्टरों का उपयोग, जो स्विचिंग और एम्पलीफिकेशन के लिए बेहतर थे।
    • भंडारण माध्यम: मैग्नेटिक कोर मेमोरी और मैग्नेटिक टेप का प्रचलन, जो पंच कार्ड्स से अधिक कुशल थे।
    • प्रोग्रामिंग भाषाएँ: असेंबली भाषा से आगे बढ़ते हुए FORTRAN और COBOL जैसी हाई-लेवल भाषाओं का विकास।
    • आकार और लागत: कंप्यूटर छोटे, तेज़, सस्ते और कम रखरखाव वाले हो गए। पहले की पीढ़ी में वैक्यूम ट्यूबों से गर्मी और बिजली की अधिक खपत होती थी।​
  • प्रमुख उदाहरण
    • दूसरी पीढ़ी के प्रसिद्ध कंप्यूटरों में IBM 1401, IBM 7094, UNIVAC III, CDC 1604 और PDP-1 शामिल हैं।
    • ये मुख्य रूप से व्यावसायिक डेटा प्रोसेसिंग, वैज्ञानिक गणना और इंजीनियरिंग कार्यों के लिए इस्तेमाल होते थे।
    • IBM 1401 ने व्यवसायों में व्यापक लोकप्रियता प्राप्त की क्योंकि यह किफायती और बहुमुखी था।​​
  • लाभ और सीमाएँ
  • लाभ:
    • गति में वृद्धि (माइक्रोसेकंड स्तर पर प्रोसेसिंग)।
    • विश्वसनीयता बढ़ी, क्योंकि ट्रांजिस्टर जलने या फटने का खतरा कम था।
    • ऊर्जा दक्षता: वैक्यूम ट्यूबों की तुलना में 1/10 बिजली खपत।
  • सीमाएँ:
    • अभी भी बड़े आकार के (कमरे भर)।
    • हैंडवायरिंग और असेंबली भाषा पर निर्भरता बनी रही।
    • तीसरी पीढ़ी (IC) आने तक मॉड्यूलर डिज़ाइन सीमित था।

4. ट्रांजिस्टर (Transistor) की खोज किस पीढ़ी में हुई थी?

Correct Answer: (a) प्रथम पीढ़ी
Solution:
  • ट्रांजिस्टर (Transistor) की खोज प्रथम पीढ़ी (First Generation) के दौरान हुई थी
  • जबकि इसका उपयोग द्वितीय पीदी (Second Generation) में हुई।
  • ट्रांजिस्टर का आविष्कार
    • ट्रांजिस्टर का आविष्कार अमेरिका की बेल लेबोरेटरीज में 23 दिसंबर 1947 को हुआ था।
    • इसे वाल्टर एच. ब्रैटेन, जॉन बार्डीन और विलियम बी. शॉकले ने共同 रूप से विकसित किया।
    • इन तीनों वैज्ञानिकों को 1956 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार इस उपलब्धि के लिए मिला।
    • ट्रांजिस्टर ने वैक्यूम ट्यूब्स की जगह ली, जो पहले पीढ़ी के कंप्यूटरों में इस्तेमाल होती थीं।​
  • कंप्यूटर पीढ़ियों का संक्षिप्त अवलोकन
    • कंप्यूटरों की पीढ़ियों को तकनीकी विकास के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है:
    • प्रथम पीढ़ी (1940-1956): वैक्यूम ट्यूब्स पर आधारित, जैसे ENIAC। ये बड़े, गर्मी पैदा करने वाले और अविश्वसनीय थे।​
    • द्वितीय पीढ़ी (1956-1963): ट्रांजिस्टर का युग। ये छोटे, तेज, कम ऊर्जा वाले और विश्वसनीय थे।
    • तृतीय पीढ़ी (1964-1971): एकीकृत सर्किट (IC) का उपयोग।​
      ट्रांजिस्टर ने कंप्यूटरों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य बनाया।​
  • दूसरी पीढ़ी में ट्रांजिस्टर का उपयोग
    • दूसरी पीढ़ी के कंप्यूटर पूरी तरह ट्रांजिस्टर आधारित थे। TX-0 (1956) पहला ऐसा कंप्यूटर था
    • जिसमें ट्रांजिस्टर लगाए गए। इनमें चुंबकीय कोर मेमोरी, असेंबली लैंग्वेज और बैच प्रोसेसिंग का इस्तेमाल होता था।
    • इनपुट के लिए पंच कार्ड और आउटपुट के लिए प्रिंटर होते थे।
    • उदाहरण: IBM 1401, PDP-1, UNIVAC 1107। आकार कम हुआ (कमरे के बजाय अलमारी जितना), गति बढ़ी (माइक्रोसेकंड में काम) और लागत घटी।
  • ट्रांजिस्टर के फायदे और प्रभाव
    • आकार और वजन: वैक्यूम ट्यूब से 100 गुना छोटे।​
    • गति: मिलीसेकंड से माइक्रोसेकंड तक।​
    • विश्वसनीयता: कम खराबी, कम गर्मी।
    • लागत: सस्ते उत्पादन।
    • इसने कंप्यूटर को व्यवसाय, विज्ञान और रक्षा में लोकप्रिय बनाया।
    • 1960 के दशक तक ये मुख्यधारा बने रहे, जब IC ने तीसरी पीढ़ी शुरू की।
  • ट्रांजिस्टर का कार्य सिद्धांत (संक्षेप में)
    • ट्रांजिस्टर तीन भागों वाला सेमीकंडक्टर डिवाइस है: एमिटर, बेस, कलेक्टर। यह करंट को नियंत्रित करता है
    • जैसे स्विच या एम्पलीफायर। सिलिकॉन जैसे सेमीकंडक्टर में NPN या PNP प्रकार।
    • बेस पर सिग्नल देकर बड़े करंट को कंट्रोल करता है। आज स्मार्टफोन से सुपरकंप्यूटर तक हर जगह मौजूद।

5. इंटेल 8085 माइक्रोप्रोसेसर ___ जेनेरेशन का है। [BPSC PRT Exam, 15.12.2023]

Correct Answer: (b) द्वितीय
Solution:
  • इन्टेल 8085 माइक्रोप्रोसेसर द्वितीय जेनेरेशन का है। यह 8-bit जनरल परपज, NMOS Microprocessor होता है
  • जो 64 K memory को address कर सकता है। यह 40 पिन का एक LSI chip होता है जिसे +5 वोल्ट की एकल डी. सी. वोल्टता आपूर्ति की आवश्यकता होती है
  • एवं यह 3MHZ एकल कला (Single Phase) क्लॉक पर संचालित (Operate) करता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    •  सिंगल +5V पावर सप्लाई का उपयोग करता है, जो इसे पहले के प्रोसेसरों से सरल बनाता है।
    • दूसरी पीढ़ी के माइक्रोप्रोसेसर 1970 के मध्य में उभरे, जिनमें बेहतर प्रदर्शन, विस्तृत इंस्ट्रक्शन सेट और अधिक क्षमताएं थीं।
    • पहली पीढ़ी (जैसे 4004, 8008) सरल थीं, जबकि तीसरी पीढ़ी (8086, 8088) 1970 के अंत में आई।
  • प्रमुख विशेषताएं
    • आर्किटेक्चर: 8-बिट डेटा बस, 16-बिट एड्रेस बस (64KB मेमोरी एड्रेसिंग), 16-बिट प्रोग्राम काउंटर और स्टैक पॉइंटर।
    • रजिस्टर: छह जनरल-पर्पस रजिस्टर (B, C, D, E, H, L) जो पेयर (BC, DE, HL) में 16-बिट ऑपरेशन कर सकते हैं, प्लस एक्सेलरेटर और फ्लैग्स।​
    • क्लॉक स्पीड: 3.2 MHz तक, 74 इंस्ट्रक्शन सेट के साथ।
    • पिन्स: 40-पिन DIP पैकेज, जिसमें AD0-AD7 मल्टीप्लेक्स्ड लाइनें शामिल हैं।​
  • कार्यक्षमता और उपयोग
    • 8085 में ALU, रजिस्टर ऐरे, इंटरप्ट कंट्रोल और टाइमिंग सर्किट शामिल हैं
    • जो इसे एम्बेडेड सिस्टम, प्रारंभिक पर्सनल कंप्यूटर और इंडस्ट्रियल कंट्रोल के लिए आदर्श बनाते हैं।
    • यह 8080 से बाइनरी संगत था, लेकिन सस्ता और आसान एकीकरण वाला। आज भी इंजीनियरिंग कोर्सेज में पढ़ाया जाता है।
    • इसके सिग्नल्स में ALE, RD, WR, IO/M आदि शामिल हैं जो मेमोरी और I/O ऑपरेशन को नियंत्रित करते हैं।

6. IBM 7094 और IBM1620 किस पीढ़ी (Generation) का उदाहरण है?

Correct Answer: (b) द्वितीय पीढ़ी
Solution:
  • IBM 7094 और IBM 1620 द्वितीय पीढ़ी (Second Generation) के उदाहरण हैं।
  • दूसरी पीढ़ी की विशेषताएं
    • दूसरी पीढ़ी (लगभग 1959-1965) के कंप्यूटर वैक्यूम ट्यूब्स से ट्रांजिस्टर की ओर संक्रमण का दौर था।
    • ट्रांजिस्टर ने आकार कम किया, गर्मी घटाई, विश्वसनीयता बढ़ाई और गति तेज की।
    • फेराइट कोर मेमोरी का उपयोग हुआ, जो मैग्नेटिक ड्रम से बेहतर था।
    • इनमें असेंबली लैंग्वेज और शुरुआती हाई-लेवल लैंग्वेज जैसे FORTRAN का समर्थन था।
  • IBM 7094 का विवरण
    • IBM 7094 एक शक्तिशाली मुख्यफ्रेम था, जो 1960 में लॉन्च हुआ। यह IBM 7090 का उत्तराधिकारी था
    • NASA के Gemini/Apollo मिशनों तथा USAF के मिसाइल सिस्टम में इस्तेमाल हुआ।
    • इसमें 7 इंडेक्स रजिस्टर और हार्डवेयर फ्लोटिंग-पॉइंट सपोर्ट था।
    • Model II (1963) में पाइपलाइनिंग से गति दोगुनी हो गई। लगभग 255 यूनिट बने।
  • IBM 1620 का विवरण
    • IBM 1620 एक सस्ता वैज्ञानिक मिनी कंप्यूटर था
    • 1959 में घोषित। इसे "CAE" (कम्प्यूटर फॉर अमेरिकन एजुकेशन) भी कहा गया।
    • मॉडल I में 20,000-60,000 डेसिमल डिजिट मेमोरी (कोर-आधारित) थी, 50 kHz स्पीड पर।
    • मॉडल II (1963) में मेमोरी साइकिल 10 μs हो गई। लगभग 2,000 यूनिट बिके
    • 1970 तक। यह फैक्टरी कंट्रोल (IBM 1710/1720) में भी लगा।

7. प्रचालन तंत्र (Operating System) का इस्तेमाल कब हुआ ?

Correct Answer: (b) द्वितीय पीढ़ी
Solution:
  • प्रचालन तंत्र (Operating System) का सर्वप्रथम प्रयोग द्वितीय पीढ़ी में किया गया था।
  • प्रारंभिक विकास (1940-1950)
    •  मशीन भाषा में प्रोग्रामिंग की जाती थी, और कार्य सरल गणनाओं तक सीमित थे।
    • 1956 में GM-NAA I/O को पहला वास्तविक ऑपरेटिंग सिस्टम माना जाता है
    • जिसे जनरल मोटर्स ने IBM 704 के लिए बनाया।
    • यह Resident Monitor पर आधारित था, जो टेप या पंच कार्ड से प्रोग्राम लोड करता था।
  • बैच प्रोसेसिंग युग (1950-1960)
    • इस दौर में बैच प्रोसेसिंग सिस्टम आए, जहां जॉब्स को बैच में एकत्रित कर संसाधित किया जाता था।
    • कोई इंटरैक्टिव उपयोग नहीं था। 1962 में Atlas Supervisor को पहला आधुनिक OS कहा जाता है
    • जिसमें वर्चुअल मेमोरी की सुविधा थी। IBM के OS/360 जैसे सिस्टम मेनफ्रेम कंप्यूटरों के लिए बने।
  • मल्टीप्रोग्रामिंग और टाइम-शेयरिंग (1960-1970)
    • 1960 के दशक में मल्टीप्रोग्रामिंग OS विकसित हुए, जो एक साथ कई प्रोग्राम चलाने की अनुमति देते थे।
    • DEC PDP-1 (1961) जैसे मिनीकंप्यूटरों ने इसे बढ़ावा दिया।
    • 1969 में बेल लैब्स में Ken Thompson और Dennis Ritchie ने UNIX का विकास शुरू किया
    • जो मल्टीटास्किंग और मल्टीयूजर था। 1970 में Unix ने PDP-7 पर मेमोरी मैनेजमेंट और प्रोटेक्शन प्रदान किया।​​
  • पर्सनल कंप्यूटिंग का उदय (1970-1980)
    • 1975 में Microsoft की स्थापना हुई। 1981 में MS-DOS जारी हुआ
    • जो IBM PC के लिए था। 1985 में Windows 1.0 आया, जिसमें GUI की शुरुआत हुई।
    • Xerox Alto (1973) ने GUI का प्रारंभिक प्रभाव डाला, हालांकि व्यावसायिक रूप से असफल रहा।​​
  • आधुनिक युग और ओपन सोर्स (1990 से अब तक)
    • 17 सितंबर 1991 को Linus Torvalds ने Linux कर्नेल जारी किया
    • जो ओपन-सोर्स Unix-जैसा OS बना। Windows के संस्करण जैसे 95, XP, 10 और 11 लोकप्रिय हुए।
    • मोबाइल OS में Symbian (1998), iOS (2007) और Android (2008) प्रमुख हैं।
    • आज क्लाउड, IoT और AI पर आधारित OS जैसे Chrome OS और HarmonyOS विकसित हो रहे हैं।​

8. डिजिटल कंप्यूटर विकसित किया गया- [Uttarakhand P.C.S.(Mains) 2002]

Correct Answer: (c) यू.एस.ए. में
Solution:
  • डिजिटल कंप्यूटर का विकास (Development) यू.एस.ए. में हुआ था।
  • प्रारंभिक यांत्रिक चरण (1600-1800)
    • 19वीं शताब्दी में चार्ल्स बैबेज ने 1822 में 'डिफरेंस इंजन' और बाद में 'एनालिटिकल इंजन' डिज़ाइन किया, जो प्रोग्रामेबल था
    • पंच कार्ड्स पर काम करता था, लेकिन इसे पूरा नहीं बनाया जा सका।
    • ये मशीनें डिजिटल अवधारणा की शुरुआत थीं, क्योंकि ये विवेकपूर्ण (discrete) संख्याओं पर आधारित थीं।
  • विद्युत-यांत्रिक विकास (1900-1940)
    • 1900 के दशक में हर्मन होलरिथ की पंच कार्ड टेबुलेटिंग मशीन ने डेटा प्रोसेसिंग को तेज किया, जिसका उपयोग अमेरिकी जनगणना में हुआ।​
    • 1941 में जर्मन इंजीनियर कॉनराड ज़ूस ने Z3 बनाया
    • जो पहला प्रोग्रामेबल इलेक्ट्रो-मैकेनिकल डिजिटल कंप्यूटर था।​
    • 1944 में हार्वर्ड मार्क I (IBM के सहयोग से होवार्ड एकन द्वारा) विकसित हुआ
    • जो रिले-आधारित पहला बड़े पैमाने का डिजिटल कंप्यूटर था और जटिल गणनाएं करता था।​
  • पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर (1940s)
    • 1940 के दशक में वास्तविक क्रांति आई। 1939-1942 में जॉन एटनासॉफ और क्लिफर्ड बेरी ने एटनासॉफ-बेरी कंप्यूटर (ABC) बनाया
    • जो वैक्यूम ट्यूब्स पर आधारित पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कंप्यूटर था।​
    • 1945 में ENIAC (Electronic Numerical Integrator and Computer) को जॉन मॉचली और जे. प्रेस्पर एकर्ट ने अमेरिका में विकसित किया।
    • यह 18,000 वैक्यूम ट्यूब्स, 70,000 रजिस्टरों वाला विशालकाय मशीन था
    • जो 5,000 जोड़ प्रति सेकंड करती थी और द्वितीय विश्व युद्ध के बैलिस्टिक कैलकुलेशन के लिए बनी।
    • ENIAC प्रोग्रामेबल था (वायरिंग से), लेकिन स्टोरेज प्रोग्राम अवधारणा बाद में आई।
  • ट्रांजिस्टर युग और स्टोरेज प्रोग्राम (1950s)
    • 1947 में ट्रांजिस्टर का आविष्कार (बेल लैब्स: बैर्डीन, ब्रैटेन, शॉकले) ने वैक्यूम ट्यूब्स को बदल दिया, जिससे कंप्यूटर छोटे और कुशल बने।​
    • 1951 में UNIVAC I पहला व्यावसायिक डिजिटल कंप्यूटर था, जो जनगणना और मौसम पूर्वानुमान के लिए इस्तेमाल हुआ।​
    • जॉन वॉन न्यूमैन की 'EDVAC रिपोर्ट' (1945) ने स्टोरेज प्रोग्राम (RAM में प्रोग्राम रखना) की अवधारणा दी, जो आधुनिक कंप्यूटरों की आधारशिला बनी।
  • आधुनिक डिजिटल कंप्यूटर (1960s से अब तक)
    • 1960s में मेनफ्रेम कंप्यूटर जैसे IBM System/360 आए। 1971 में इंटेल 4004 पहला माइक्रोप्रोसेसर बना।​
    • माइक्रोसॉफ्ट और ऐप्पल ने 1970-80s में पर्सनल कंप्यूटर (PC) लोकप्रिय किए, जैसे Altair 8800, Apple II।
    • आज सुपरकंप्यूटर (जैसे Frontier), लैपटॉप, स्मार्टफोन सभी डिजिटल हैं, जो बाइनरी कोड (0/1) पर चलते हैं।​
  • भारत में डिजिटल कंप्यूटर का विकास
    • 1955 में कोलकाता के ISI में HEC-2M पहला डिजिटल कंप्यूटर आया।​
    • 1960s में TIFR ने TDC-12 जैसे ट्रांजिस्टर-आधारित कंप्यूटर विकसित किए।
    • आज भारत IT हब है, ISRO/DRDO सुपरकंप्यूटर बनाते हैं।​

9. निम्नलिखित में से कौन तीसरी पीढ़ी संगणक का मुख्य इलेक्ट्रॉनिक अवयव है? [U.P.P.C.S. (Mains) 2016]

Correct Answer: (d) समेकित परिपथ
Solution:
  • तीसरी पीढ़ी संगणक (Third Generation Computer) का प्रारंभ1964 से हुआ।
  • इसका मुख्य इलेक्ट्रॉनिक अवयव (Component) समेकित परिपथ (Integrated Circuit) है, जो कई ट्रांजिस्टरों से युक्त एक उपकरण (Device) होता
  • पीढ़ियों का संक्षिप्त इतिहास
    • संगणकों की पीढ़ियाँ उनके मुख्य इलेक्ट्रॉनिक अवयवों के आधार पर वर्गीकृत की जाती हैं।
    • पहली पीढ़ी (1940-1956) में वैक्यूम ट्यूब, दूसरी पीढ़ी (1956-1963) में ट्रांजिस्टर, तीसरी पीढ़ी (1964-1971) में समेकित परिपथ, चौथी में माइक्रोप्रोसेसर और पाँचवीं में कृत्रिम बुद्धिमत्ता प्रमुख हैं।
    • तीसरी पीढ़ी ने संगणकों को व्यावसायिक रूप से सुलभ बनाया।
  • समेकित परिपथ क्या है?
    • समेकित परिपथ एक सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है जिसमें कई ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर, कैपेसिटर और डायोड एक ही सिलिकॉन चिप पर एकीकृत होते हैं।
    • 1958 में जैक किल्बी और रॉबर्ट नोइस ने इसका आविष्कार किया।
    • इससे संगणकों का आकार घटा, गति बढ़ी (सैकड़ों हजार से लाखों निर्देश प्रति सेकंड) और बिजली खपत कम हुई।
  • तीसरी पीढ़ी की विशेषताएँ
    • आकार और लागत: ट्रांजिस्टर से छोटे और सस्ते संगणक बने, जैसे IBM-360 सीरीज़।
    • इनपुट-आउटपुट: पंच कार्ड के बजाय कीबोर्ड और मॉनिटर का उपयोग।​​
    • सॉफ़्टवेयर: हाई-लेवल भाषाएँ जैसे COBOL, FORTRAN, BASIC; मल्टीप्रोग्रामिंग और टाइम-शेयरिंग ऑपरेटिंग सिस्टम।
    • मेमोरी: सेमीकंडक्टर मेमोरी का प्रारंभिक उपयोग।​
    • लाभ: कम गर्मी, उच्च विश्वसनीयता, कम रखरखाव।​
  • अन्य विकल्पों से तुलना
    • प्रश्न में दिए विकल्प जैसे इलेट्रॉनिक ट्यूब (पहली पीढ़ी), ट्रांजिस्टर (दूसरी पीढ़ी), प्रकाशीय तन्तु (आधुनिक नेटवर्किंग) तीसरी पीढ़ी के नहीं हैं। केवल समेकित परिपथ ही इस पीढ़ी की पहचान है।​
  • प्रभाव और विरासत
    • इस पीढ़ी ने संगणकों को बड़े संगठनों से आम उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाया
    • जिससे डेटा प्रोसेसिंग क्रांति हुई। आज के माइक्रोचिप्स इसी की विस्तारित रूप हैं।

10. एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) संबंधित है-

Correct Answer: (b) तृतीय पीढ़ी
Solution:
  • एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) तृतीय पीढ़ी (Third Generation) से संबंधित है।
  • परिभाषा और मूल अवधारणा
    • एकीकृत परिपथ वह परिपथ है जिसमें आवश्यक सभी घटक (ट्रांजिस्टर, डायोड, प्रतिरोध, संधारित्र आदि
    • उनके बीच की जोड़ (इंटरकनेक्शन) एक ही अर्धचालक प्लेट/चिप पर निर्मित होती हैं, अलग‑अलग नहीं लगाई जातीं।
    • आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युग में कम्प्यूटर, मोबाइल, टीवी, कार, मेडिकल उपकरण आदि लगभग सभी में किसी न किसी रूप में आई‑सी प्रयोग होती है।
  • आई‑सी किनसे और किससे संबंधित है?
  • एकीकृत परिपथ संबंधित है:
    • अर्धचालक प्रौद्योगिकी (Semiconductor Technology) – ज़्यादातर आई‑सी सिलिकॉन वेफ़र से बनते हैं; सिलिकॉन के भीतर ही सभी अवयव बनाए जाते हैं।
    • इलेक्ट्रॉनिक अवयवों के एकीकरण से – ट्रांजिस्टर, डायोड, रेसिस्टर, कैपेसिटर, इंडक्टर आदि को एक साथ, बहुत निकट रखकर, एक ही चिप पर गढ़ा जाता है।
    • डिजिटल और एनालॉग परिपथों से – कुछ आई‑सी केवल डिजिटल संकेत (0/1) पर काम करते हैं, कुछ केवल एनालॉग, और कुछ दोनों (मिश्रित‑सिग्नल)।
    • सूक्ष्मकरण (Miniaturization) और बड़े पैमाने पर उत्पादन से – इन्हें फोटोलिथोग्राफी आदि प्रक्रियाओं से करोड़ों की संख्या में एक साथ तैयार किया जाता है
    • इसलिए आकार बहुत छोटा और लागत कम होती है।
  • मुख्य प्रकार – कार्य के आधार पर
  • एनालॉग IC
    • ये सतत (continuous) सिग्नलों पर कार्य करते हैं, जैसे ऑडियो, तापमान, वोल्टेज आदि।
    • उदाहरण: ऑपरेशनल एम्प्लीफायर (Op‑Amp), ऑडियो एम्प्लीफायर, फ़िल्टर, वोल्टेज रेगुलेटर आदि।
  • डिजिटल IC
    • ये केवल दो स्तरों के सिग्नल (0 और 1) पर काम करते हैं, यानी लॉजिक सर्किट पर आधारित होते हैं।
    • इनमें लॉजिक गेट, फ्लिप‑फ्लॉप, काउंटर, माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप आदि आते हैं।
  • मिश्रित‑सिग्नल (Mixed‑Signal) IC
    • इनमें एनालॉग और डिजिटल दोनों भाग होते हैं
    • जैसे ADC (Analog‑to‑Digital Converter), DAC (Digital‑to‑Analog Converter), मॉडेम, RF IC आदि।
  • अनुप्रयोग‑विशिष्ट (ASIC, Power IC आदि)
    • ASIC (Application‑Specific Integrated Circuit) किसी विशेष कार्य/उत्पाद के लिए डिजाइन किए जाते हैं, जैसे मोबाइल प्रोसेसर, नेटवर्किंग चिप इत्यादि।
    • Power IC उच्च शक्ति या पावर कंट्रोल (SMPS, मोटर ड्राइव, बैटरी मैनेजमेंट) के लिए बनाए जाते हैं।