कंप्यूटर : एक परिचय (Part – II)

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11. कंप्यूटर में 'आई सी' का अर्थ होता है- [U.P.P.C.S. (M.) 2004, S.S.C. Section Off. 2006, रेलवे एनटीपीसी 19 अप्रैल, 2016, R.R.B. बंगलौर (A.S.M.) 2004. 2007, R.R.B. इलाहाबाद (A.S.M.) 2007, रेलवे एनटीपीसी 28 अप्रैल, 2016, M.P. P.C.S. (P.) 2000, R.A.S/R.T.S. (P.) 2012, Chhattisgarh P.C.S. (P.) 2013, U.P.P.S.C. (R.i.) 2014]

Correct Answer: (c) एकीकृत परिपथ
Solution:
  • इलेक्ट्रॉनिक्स या कंप्यूटर के संदर्भ में एकीकृत परिपथ या इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) को 'माइक्रोसर्किट', 'माइक्रोचिप', 'सिलिकॉन चिप' या 'चिप' के नाम से भी जाना जाता है।
  • यह एक अर्द्धचालक पदार्थ (Semi-Conductor Material) के वेफर पर बना हुआ इलेक्ट्रॉनिक परिपथ (Electronic Circuit) होता है
  • जिसमें प्रतिरोध, संधारित्र (Capacitor) आदि के अलावा डायोड, ट्रांजिस्टर आदि अर्द्धचालक अवयव निर्मित किए जाते हैं।
  • आईसी की परिभाषा
    • आईसी एक अर्धचालक सामग्री, मुख्य रूप से सिलिकॉन चिप पर निर्मित इलेक्ट्रॉनिक परिपथ है
    • जिसमें सैकड़ों से लेकर अरबों तक छोटे-छोटे घटक एक ही संरचना में जुड़े होते हैं।
    • यह पारंपरिक अलग-अलग घटकों वाले सर्किट की तुलना में बहुत छोटा, कुशल और सस्ता होता है।
    • कंप्यूटर के सीपीयू, मेमोरी चिप्स और अन्य प्रोसेसिंग यूनिट इसी आईसी तकनीक पर आधारित होते हैं।
  • कार्य सिद्धांत
    • आईसी का मूल सिद्धांत ऑन-चिप फैब्रिकेशन है
    • जिसमें फोटोलिथोग्राफी जैसी प्रक्रियाओं से सिलिकॉन वेफर पर परत-दर-परत घटक बनाए जाते हैं।
    • यह डिजिटल (लॉजिक गेट्स, माइक्रोप्रोसेसर) या एनालॉग (एम्पलीफायर, सेंसर) सिग्नल्स को प्रोसेस करता है।
    • बिजली की कम खपत, उच्च गति और छोटे आकार के कारण यह आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स का आधार है।
  • प्रकार
  • आईसी मुख्य रूप से चार श्रेणियों में बांटे जाते हैं:
    • डिजिटल आईसी: लॉजिक गेट्स, माइक्रोप्रोसेसर (जैसे CPU चिप्स) के लिए।​
    • एनालॉग आईसी: सिग्नल एम्पलीफिकेशन और फिल्टरिंग के लिए।
    • मिश्रित सिग्नल आईसी: डिजिटल और एनालॉग दोनों को संभालते हैं, जैसे एडीसी/डीएसी।
    • मेमोरी आईसी: रैम, रॉम या फ्लैश मेमोरी के रूप में डेटा स्टोरेज।
  • कंप्यूटर में उपयोग
  • कंप्यूटर में आईसी हर जगह मौजूद हैं:
    • माइक्रोप्रोसेसर: इंटेल या AMD चिप्स जो गणना और नियंत्रण करते हैं।
    • मेमोरी चिप्स: RAM, ROM डेटा संग्रहण के लिए।
    • ग्राफिक्स कार्ड: GPU आईसी जटिल ग्राफिक्स प्रोसेसिंग।
    • मदरबोर्ड: चिपसेट आईसी डेटा ट्रांसफर नियंत्रित करते हैं।
  • लाभ
    • आकार में छोटा, जिससे लैपटॉप और स्मार्टफोन संभव हुए।
    • कम बिजली खपत और उच्च विश्वसनीयता।
    • कम लागत में जटिल सर्किट निर्माण।
    • उच्च गति (GHz स्तर पर काम)।
  • इतिहास संक्षेप में
    • 1958 में जैक किल्बी (टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स) और रॉबर्ट नोयस ने आईसी का आविष्कार किया।
    • 1960 के दशक से कंप्यूटर क्रांति का आधार बने। आज नैनोमीटर स्केल (5nm से कम) पर बनते हैं।​
  • निर्माण प्रक्रिया (संक्षिप्त)
    • सिलिकॉन वेफर तैयार करना।
    • डोपिंग से ट्रांजिस्टर बनाना।
    • इंटरकनेक्ट्स जोड़ना।
    • पैकेजिंग।​

12. सिलिकॉन की परत चढ़ी इंटीग्रेटेड सर्किट चिप (IC Chip) के विकास का श्रेय किसको जाता है? [R.B.I. (Asst.) Exam. 21.07.2013]

Correct Answer: (e) जे.एस. किल्बी
Solution:
  • सिलिकॉन की परत चढ़ी इंटीग्रेटेड सर्किट चिप (IC Chip) के विकास का श्रेय जे. एस. किल्बी (J.S.Kilby) को जाता है
  • जिन्होंने वर्ष 1958 में IC का निर्माण किया। इन्हें वर्ष 2000 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
  • मूल आविष्कार: जैक किल्बी
    • 1958 में टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स (Texas Instruments) के इंजीनियर जैक किल्बी ने यह विचार रखा
    • ट्रांजिस्टर, डायोड, रेसिस्टर और कैपेसिटर जैसे सभी अवयवों को एक ही सेमीकंडक्टर ब्लॉक (जर्मेनियम या सिलिकॉन) पर एकीकृत किया जा सकता है।
    • 12 सितम्बर 1958 को उन्होंने जर्मेनियम (germanium) पर बना पहला कार्यशील इंटीग्रेटेड सर्किट (solid circuit) अपने प्रबंधन को दिखाया
    • जिसमें अलग–अलग एलिमेंट्स को बारीक सोने की तारों (flying wires) से जोड़ा गया था।
    • यह चिप सचमुच पहला IC थी, लेकिन यह न जर्मेनियम के कारण और न ही हाथ से की जाने वाली वायरिंग के कारण बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए व्यावहारिक थी।
    • किल्बी को इस आविष्कार के लिए 2000 का नोबेल पुरस्कार भी मिला, जिसमें उन्हें IC के सह–आविष्कारक के रूप में मान्यता दी गई।
  • सिलिकॉन परत (planar silicon) वाली IC: रॉबर्ट नॉइस
    • Fairchild Semiconductor में भौतिक विज्ञानी जीन होएर्नी (Jean Hoerni) ने 1957–59 के आसपास planar process विकसित किया
    • जिसमें सिलिकॉन की सतह को सिलिकॉन डाइऑक्साइड (SiO₂) की
    • पतली परत से ढककर, उसी समतल सतह पर विश्वसनीय ट्रांजिस्टर बनाए जा सकते थे।
    • इसी planar तकनीक के आधार पर रॉबर्ट नॉइस ने 1959 में यह विचार रखा कि सिलिकॉन वेफर पर बने सभी डिवाइस (ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर आदि) को ऊपर जमा की गई
    • एल्युमिनियम की धातु लाइनों से
    • जोड़ा जा सकता है, यानी पूरा परिपथ एक ही सिलिकॉन चिप पर और उसी की सतह पर बनी धातु लाइनों से इंटरकनेक्ट हो।
    • नॉइस का आविष्कार “monolithic integrated circuit” कहलाया, जिसमें पूरा सर्किट एक ही सिलिकॉन चिप के अंदर बनता है
    • किसी उड़ती हुई तार (flying wire) की जरूरत नहीं होती, जिससे बड़े पैमाने पर उत्पादन (mass production) संभव हुआ।
    • IEEE और अन्य ऐतिहासिक अभिलेख नॉइस की इस सिलिकॉन–आधारित मोनोलिथिक IC को “पहला व्यावहारिक (commercially producible) सिलिकॉन इंटीग्रेटेड सर्किट” मानते हैं।
  • क्यों अक्सर “सिलिकॉन IC” = रॉबर्ट नॉइस?
    • आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप, और लगभग सारी डिजिटल VLSI तकनीक silicon planar process पर आधारित है
    • जिसका औद्योगिक रूप नॉइस के मोनोलिथिक सिलिकॉन IC से निकला।
    • किल्बी की जर्मेनियम और flying-wire वाली चिप ने यह रास्ता दिखाया कि इंटीग्रेशन संभव है
    • मगर नॉइस की planar सिलिकॉन चिप ने इसे व्यावहारिक, सस्ता और भरोसेमंद बनाया; इसी से सिलिकॉन वैली का वास्तविक “सिलिकॉन” युग शुरू हुआ।

13. आधुनिक कंप्यूटरों का लघु-रूपकरण सम्भव हो सका है निम्न के प्रयोग से- [U.P.P.C.S. (Pre) 2007]

Correct Answer: (b) समाकलित परिपथ चिप्स
Solution:
  • इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit) एक सूक्ष्म इलेक्ट्रॉनिक सर्किट है। वर्ष 1958 में अपने आविष्कार के बाद यह ट्रांजिस्टर के स्थान पर कंप्यूटरों में प्रयुक्त होने लगा।
  • समाकलित परिपथ (Integrated Circuit) चिप्स अर्थात इंटीग्रेटेड सर्किट से ही आधुनिक कंप्यूटरों का लघु-रूपकरण (Miniaturization) संभव हो सका।
  • लघु-रूपकरण का ऐतिहासिक विकास
    • कंप्यूटरों की शुरुआती पीढ़ियों में वैक्यूम ट्यूब्स का उपयोग होता था, जो बड़े, गर्म और बिजली की भारी खपत करने वाले थे।
    • 1940-50 के दशक में ट्रांजिस्टर ने वैक्यूम ट्यूब्स की जगह ली, जिससे पहला बड़ा आकार में कमी आई—ट्रांजिस्टर छोटे थे
    • कम गर्मी पैदा करते थे और अधिक विश्वसनीय। लेकिन वास्तविक लघु-रूपकरण 1960 के दशक में आया जब जैक किल्बी और रॉबर्ट नोइस ने इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) का आविष्कार किया।
    • IC एक ही चिप पर सैकड़ों-हजारों ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर और कैपेसिटर एकीकृत करता है, जिससे सर्किट बोर्ड छोटे हो गए।
  • समाकलित परिपथ चिप्स की भूमिका
    • मुख्य कारण: ICs ने हजारों घटकों को सिलिकॉन चिप पर फोटोलिथोग्राफी प्रक्रिया से उकेरा
    • जिससे आकार 1/1000 गुना कम हो गया। मूर का नियम (Gordon Moore, 1965) कहता है
    • ट्रांजिस्टर की संख्या हर 2 वर्ष में दोगुनी होती जाती है, जो लघुकरण को तेज करता है।
    • प्रक्रियाएं: VLSI (Very Large Scale Integration) और ULSI (Ultra Large Scale Integration) तकनीकों से अब एक चिप पर अरबों ट्रांजिस्टर फिट हो जाते हैं
    • (जैसे आज के 3nm या 2nm प्रोसेस)।
    • उदाहरण: पुराने ENIAC कंप्यूटर में 18,000 वैक्यूम ट्यूब्स थे, जो एक कमरे भरते थे। आज का iPhone उससे लाखों गुना शक्तिश्कषाली है, लेकिन हथेली में।
  • आधुनिक प्रभाव और भविष्य
    • ICs ने न केवल आकार कम किया, बल्कि गति बढ़ाई (GHz स्तर), लागत घटाई (मास प्रोडक्शन) और ऊर्जा दक्षता लाई।
    • आज 5G चिप्स, AI प्रोसेसर (जैसे Apple M2 या Qualcomm Snapdragon) इसी तकनीक पर हैं।
    • भविष्य में 1nm चिप्स और 3D स्टैकिंग से और लघुकरण होगा। भारत में भी चिप निर्माण (जैसे Tata Electronics) इसी पर आधारित है।

14. आई.सी. के वर्गीकरण का आधार है- [U.P. Lower Sub. (Mains) 2015]

Correct Answer: (a) ट्रांजिस्टरों की संख्या
Solution:
  • एकल चिप (Single Chip) में लगाए जा सकने वाले ट्रांजिस्टरों की संख्या के आधार पर IC's को मुख्यतः 5 प्रकारों में विभाजित किया जा सकता है-
  • SSI (Small Scale Integration)
  • MSI (Medium Scale Integration) 00
  • LSI (Large Scale Integration)
  • VLSI (Very Large Scale Integration)
  • ULSI (Ultra Large Scale Integration)
  • ट्रांजिस्टर संख्या पर आधारित वर्गीकरण
    • आई.सी. को मुख्य रूप से चार स्तरों में वर्गीकृत किया जाता है, जो एकीकरण के पैमाने पर निर्भर करता है:
    • SSI (Small Scale Integration): 100 ट्रांजिस्टरों से कम। इसमें बेसिक गेट्स और फ्लिप-फ्लॉप्स जैसे सरल सर्किट होते हैं, जैसे लॉजिक गेट्स।
    • MSI (Medium Scale Integration): 100 से 1000 ट्रांजिस्टर। मल्टीप्लेक्सर, काउंटर और रजिस्टर जैसे मध्यम जटिलता वाले सर्किट आते हैं।​
    • LSI (Large Scale Integration): 1000 से 1,00,000 ट्रांजिस्टर। माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप्स और छोटे प्रोसेसर इस श्रेणी में हैं।
    • VLSI (Very Large Scale Integration): 1,00,000 से अधिक ट्रांजिस्टर। आधुनिक माइक्रोप्रोसेसर, GPU और बड़े चिपसेट इससे संबंधित हैं।​
    • यह वर्गीकरण 1970 के दशक से प्रचलित है और मूर के नियम (ट्रांजिस्टर दोगुना होना) के साथ विकसित हुआ।​
  • निर्माण विधि पर आधारित वर्गीकरण
    • मोनोलिथिक आई.सी.: एक ही सिलिकॉन वेफर पर सभी कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं। सबसे सामान्य प्रकार, सस्ता और छोटा।​
    • हाइब्रिड आई.सी.: अलग-अलग चिप्स को एक पैकेज में जोड़ा जाता है। विशेष अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी।​​
  • कार्यप्रणाली पर आधारित वर्गीकरण
    • डिजिटल आई.सी.: बाइनरी सिग्नल (0/1) पर काम करते हैं, जैसे लॉजिक गेट्स, मेमोरी।​
    • एनालॉग आई.सी.: सतत सिग्नल हैंडल करते हैं, जैसे एम्पलीफायर, ऑसिलेटर।​
    • मिश्रित सिग्नल आई.सी.: दोनों डिजिटल और एनालॉग फंक्शनलिटी।​
  • अन्य आधार
    • कार्य के आधार पर: मेमोरी आई.सी., माइक्रोप्रोसेसर आई.सी., पावर मैनेजमेंट आई.सी. आदि।
    • प्रौद्योगिकी पर: CMOS, TTL, ECL आदि फैमिली।

15. कंप्यूटरों के लिए 'आई सी-चिप्स' प्रायः किस पदार्थ की बनी होती है? [S.S.C. स्नातक स्तरीय परीक्षा, 2006, 2008]

Correct Answer: (a) सिलिकॉन
Solution:
  • सिलिकॉन एक रासायनिक तत्व (Chemical Element) है, जिसका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 14 है।
  • यह एक अर्द्धचालक पदार्थ है। कंप्यूटर की आई.सी. चिप्स या माइक्रोचिप्स मुख्यतः इसी तत्व की बनी होती है।
  • सिलिकॉन का महत्व
    •  मुख्य रूप से रेत (सिलिका) के रूप में। आईसी चिप्स में इसका उपयोग इसलिए होता है क्योंकि यह अर्धचालक गुणों वाला होता है
    • यानी यह कुछ स्थितियों में विद्युत का संचालन करता है और अन्य में अवरोधक की तरह कार्य करता है।
    • डोपिंग प्रक्रिया से इसके गुणों को नियंत्रित करके ट्रांजिस्टर, डायोड और अन्य घटक बनाए जाते हैं।
  • निर्माण प्रक्रिया
    • आईसी चिप्स बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध सिलिकॉन क्रिस्टल को बढ़ाया जाता है, फिर इसे पतली वेफर (डिस्क) में काटा जाता है।
    • उसके बाद फोटोलिथोग्राफी, एचिंग, डोपिंग और धातु जमा करने जैसी जटिल प्रक्रियाओं से अरबों ट्रांजिस्टर बनाए जाते हैं।
    • यह सब क्लीनरूम में होता है ताकि कोई धूल कण प्रदूषण न करे। आधुनिक चिप्स में 5 नैनोमीटर तक की तकनीक पहुँच चुकी है।
  • अन्य सामग्रियाँ और विकल्प
    • हालाँकि सिलिकॉन प्रमुख है, चिप्स में अन्य पदार्थ भी उपयोग होते हैं
    • जैसे गैलियम आर्सेनाइड (उच्च-आवृत्ति अनुप्रयोगों के लिए), इंडियम फॉस्फाइड या कार्बाइड।
    • पैकेजिंग में प्लास्टिक, सिरेमिक और सोना-तांबा वायर बाइंडिंग के लिए लगाए जाते हैं।
    • भविष्य में सिलिकॉन की सीमाओं को पार करने के लिए ग्राफीन या कार्बन नैनोट्यूब पर शोध हो रहा है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1958 में जैक किल्बी और रॉबर्ट नोइस ने पहली आईसी चिप का आविष्कार किया, जो सिलिकॉन पर आधारित थी।
    • आज के प्रोसेसर जैसे इंटेल या AMD चिप्स में अरबों ट्रांजिस्टर सिलिकॉन वेफर पर बने होते हैं।
    • भारत जैसे देशों में भी बेंगलुरु और नोएडा में सिलिकॉन चिप निर्माण इकाइयाँ विकसित हो रही हैं।

16. संगणकों में प्रयुक्त आई.सी. (I.C.) चिप प्रायः निम्नलिखित से बनाए जाते हैं- [U.P.P.C.S. (M.) 2006, Uttarakhand P.C.S. (P.) 2006, Jharkhand P.C.S. (P.) 2010, U.P.U.D.A./L.D.A. (Μ.) Uttarakhand P.C.S. (P.) 2010, U.P.P.C.S. (P.) 2002, U.P.P.C.S. (P.) 2004, Uttarakhand P.C.S. (P.) 2007, IBPS BANK CLERK EXAM-2016]

Correct Answer: (c) सिलिकॉन से
Solution:
  • सिलिकॉन एक रासायनिक तत्व (Chemical Element) है, जिसका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 14 है।
  • यह एक अर्द्धचालक पदार्थ है। कंप्यूटर की आई.सी. चिप्स या माइक्रोचिप्स मुख्यतः इसी तत्व की बनी होती है।
  • आई.सी. चिप क्या होती है?
    • I.C. (Integrated Circuit) एक बहुत छोटी इलेक्ट्रॉनिक चिप होती है
    • जिसमें हजारों–लाखों या आजकल अरबों ट्रांजिस्टर, रजिस्टर, डायोड आदि एक ही छोटे से टुकड़े पर बनाए जाते हैं।
    • इन्हीं I.C. चिप्स से माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी, लॉजिक सर्किट आदि बनते हैं
    • जो कंप्यूटर, मोबाइल, टीवी, ऑटोमोबाइल आदि के दिमाग की तरह काम करते हैं।
  • यह चिप किस पदार्थ से बनती है?
    • कंप्यूटर में प्रयुक्त I.C. चिप्स सामान्यतः सिलिकॉन (Silicon) नामक अर्धचालक तत्व से बनी होती हैं।
    • सिलिकॉन का परमाणु क्रमांक 14 है
    • यह एक प्रमुख सेमीकंडक्टर सामग्री है, जिससे अधिकांश आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की चिप्स बनाई जाती हैं।​
  • सिलिकॉन ही क्यों चुना जाता है?
    • सिलिकॉन एक अर्धचालक (semiconductor) है, जिसकी चालकता धातु (conductors) और कुचालक (insulators) के बीच होती है
    • इसे आसानी से डोपिंग करके p‑type और n‑type क्षेत्र बनाए जा सकते हैं, जिससे ट्रांजिस्टर बनाना संभव होता है।​
    • यह पृथ्वी की पपड़ी में बहुत प्रचुर मात्रा में मिलता है (मुख्य रूप से सिलिका / रेत के रूप में), इसलिए सस्ता और उपलब्ध है
    • साथ ही उच्च तापमान पर भी स्थिर रहता है, जो इसे चिप निर्माण के लिए आदर्श बनाता है।
  • सिलिकॉन से I.C. चिप बनने की रूपरेखा (संक्षेप में)
    • सबसे पहले रेत (silica) से सिलिकॉन को बहुत शुद्ध करके एक बड़ा single‑crystal ingot बनाया जाता है
    • फिर उसे पतली डिस्क जैसे वेफर (wafer) में काटा और पॉलिश किया जाता है।​
    • इन सिलिकॉन वेफर पर photolithography, etching, doping, thin‑film deposition आदि सूक्ष्म प्रक्रियाओं से नैनोमीटर स्तर पर ट्रांजिस्टर और अन्य घटकों के पैटर्न बनाए जाते हैं
    • फिर मेटल लेयर से आपसी कनेक्शन बनते हैं।
    • अंत में वेफर को छोटे-छोटे टुकड़ों (dies) में काटकर पैकेजिंग की जाती है
    • जिन्हें हम बाजार में दिखने वाली काली/हरे रंग की IC चिप के रूप में पहचानते हैं।
  • परीक्षा के लिए निष्कर्ष (की लाइन)
    • वस्तुनिष्ठ प्रश्नों में जब पूछा जाए: “संगणकों में प्रयुक्त I.C. चिप प्रायः किससे बनाई जाती हैं
    • कंप्यूटरों के लिए I.C. चिप्स प्रायः किस पदार्थ की बनी होती हैं?”, तो उत्तर लिखना है: सिलिकॉन।

17. कंप्यूटर में इस्तेमाल होने वाली इंटीग्रेटेड सर्किट (आईसी) चिप्स बनाने में निम्नलिखित में से कौन-से रासायनिक तत्व, टेट्रावायलेट उपधातु का इस्तेमाल किया जाता है? [रेलवे एनटीपीसी ऑनलाइन परीक्षा, 30 अप्रैल, 2016 (1-पाली)]

Correct Answer: (c) सिलिकॉन
Solution:
  • सिलिकॉन एक रासायनिक तत्व (Chemical Element) है, जिसका परमाणु क्रमांक (Atomic Number) 14 है।
  • यह एक अर्द्धचालक पदार्थ है। कंप्यूटर की आई.सी. चिप्स या माइक्रोचिप्स मुख्यतः इसी तत्व की बनी होती है।
  • टेट्रावेलेंट उपधातु का अर्थ
    • टेट्रावेलेंट का मतलब है कि सिलिकॉन परमाणु चार बंधन (covalent bonds) बना सकता है। कार्बन भी टेट्रावेलेंट है
    • लेकिन सिलिकॉन का परमाणु आकार बड़ा होने से यह उच्च तापमान पर स्थिर रहता है
    • विद्युत चालकता को नियंत्रित करने के लिए आसानी से डोप (impurities मिलाकर) किया जा सकता है।
    • यही गुण IC चिप्स में ट्रांजिस्टर, डायोड और अन्य घटकों को बनाने में उपयोगी बनाता है।
  • IC चिप्स निर्माण प्रक्रिया
    • IC चिप्स बनाने की प्रक्रिया अत्यंत जटिल और स्वच्छ कमर (cleanroom) में होती है। मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
    • कच्चे माल की शुद्धिकरण: रेत से सिलिका निकालकर 99.9999% शुद्ध सिलिकॉन क्रिस्टल बनाया जाता है।
    • Czochralski विधि से एक बड़ा सिलिकॉन इंगॉट (क्रिस्टल सिलेंडर) तैयार किया जाता है।​​
    • वेफर निर्माण: इंगॉट को पतली डिस्क (वेफर) में काटा जाता है, जो 0.5-1 मिमी मोटी होती है।
    • इसे पॉलिश करके चमकदार बनाया जाता है। एक वेफर से सैकड़ों चिप्स बनती हैं।​
    • फोटोलिथोग्राफी: प्रकाश-संवेदी रसायन (photoresist) लगाकर UV लाइट से पैटर्न उकेरा जाता है। यह ट्रांजिस्टर के गेट, सोर्स और ड्रेन बनाता है।​
    • डोपिंग: फॉस्फोरस (N-type) या बोरॉन (P-type) जैसे अशुद्धियां मिलाकर चालकता बदली जाती है। इससे PN जंक्शन बनते हैं।
    • एचिंग और डिपॉजिशन: रसायनों से अनावश्यक सिलिकॉन हटाया जाता है।
    • धातुएं जैसे एल्यूमिनियम या कॉपर तारों (interconnects) के लिए जमा की जाती हैं।​
    • टेस्टिंग और पैकेजिंग: चिप टेस्ट की जाती है, फिर प्लास्टिक या सिरेमिक पैकेज में बंद कर पिन लगाए जाते हैं।
    • यह प्रक्रिया नैनोमीटर स्तर (जैसे 3nm या 2nm नोड्स) पर होती है, जहां अरबों ट्रांजिस्टर समा जाते हैं।​
  • सिलिकॉन के लाभ
    • अर्धचालक गुण: शुद्ध सिलिकॉन इन्सुलेटर है, लेकिन डोपिंग से कंडक्टर या अर्धचालक बन जाता है।
    • उपलब्धता: सस्ता और प्रचुर।
    • स्थिरता: उच्च तापमान सहन करता है।
    • आधुनिक चिप्स (जैसे Intel, TSMC) में सिलिकॉन ही मुख्य है, हालांकि GaAs या SiC जैसे विकल्प विशेष उपयोगों में हैं।
  • ऐतिहासिक महत्व
    • IC का आविष्कार 1958 में जैक किल्बी और रॉबर्ट नॉयस ने किया।
    • तीसरी पीढ़ी के कंप्यूटर (1965-71) में IC का उपयोग शुरू हुआ
    • जो वर्तमान माइक्रोप्रोसेसर का आधार बने। आज 2026 में, 1 चिप में 100 अरब+ ट्रांजिस्टर होते हैं।

18. सिलिकॉन है- [R.R.B. अहमदाबाद (A.S.M.) परीक्षा, 2004]

Correct Answer: (b) सेमी कंडक्टर
Solution:
  • सिलिकॉन एक अर्द्ध-चालक (Semi-Conductor) है। इसका प्रयोग कंप्यूटर के चिप बनाने में किया जाता है।
  • सेमी कंडक्टर की प्रतिरोधकता (Resistivity) चालक (Conductor) और कुचालक के बीच होती है। जर्मेनियम और सेलेनियम भी सेमी कंडक्टर होते हैं।
  • सिलिकॉन क्या है?
    • सिलिकॉन (प्रतीक: Si, परमाणु संख्या: 14) आवर्त सारणी के 14वें स्थान पर स्थित एक धात्विक अधातु (मेटालॉइड) है।
    • यह स्वतंत्र अवस्था में प्रकृति में नहीं मिलता, बल्कि मुख्य रूप से सिलिका (SiO₂) या रेत के रूप में पाया जाता है।
    • इसकी खोज 1824 में स्वीडिश रसायनशास्त्री जोन्स जैकब बर्जेलियस ने की थी।
    • सिलिकॉन क्रिस्टलीय और अमॉर्फ दोनों रूपों में उपलब्ध होता है
    • जिसमें क्रिस्टलीय रूप धातु जैसी चमक और विद्युत चालकता प्रदर्शित करता है।
  • भौतिक गुण
    • सिलिकॉन का गलनांक 1414°C (1687 K) और क्वथनांक 3265°C (3538 K) है, जो इसे उच्च तापमान वाले अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त बनाता है।
    • इसकी विशिष्ट गुरुत्वाकर्षण 2.33 g/cm³, परमाणु व्यास 1.32 एंगस्ट्रॉम और विशिष्ट ताप 0.162 कैलोरी है।
    • यह कांच से भी कठोर होता है और अच्छा थर्मल इन्सुलेटर है। उच्च शुद्धता वाले सिलिकॉन का उपयोग अर्धचालक के रूप में होता है
    • जहां इसकी विद्युत चालकता डोपिंग द्वारा नियंत्रित की जा सकती है।​
  • रासायनिक गुण
    • सिलिकॉन अम्लों और क्षारों के प्रति प्रतिरोधी है, लेकिन फ्लोरीन और क्लोरीन से आसानी से अभिक्रिया करता है
    • जिससे SiF₄ या SiCl₄ बनता है। उच्च ताप पर यह ऑक्सीजन, जलवाष्प और धातुओं से प्रतिक्रिया करता है।
    • सिलिकेट्स (जैसे Na₂SiO₃) और सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) इसके प्रमुख यौगिक हैं।
    • यह सिलिकॉन बहुलक (सिलिकॉन रबर) भी बनाता है, जो लचीला और तापमान प्रतिरोधी होता है।
  • उत्पादन विधि
    • सिलिकॉन का उत्पादन मुख्य रूप से क्वार्ट्ज (SiO₂) को कार्बन के साथ उच्च ताप (2000°C) पर विद्युत भट्टी में अभिक्रिया कराकर किया जाता है
    • SiO₂ + 2C → Si + 2CO। शुद्ध सिलिकॉन के लिए इसे आगे ट्रेज़ोर विधि या जोन रिफाइनिंग द्वारा शुद्ध किया जाता है। सौर ग्रेड सिलिकॉन रेत और कोयले से प्राप्त होता है।​
  • प्रमुख उपयोग
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और अर्धचालक
    • सिलिकॉन कंप्यूटर चिप्स, माइक्रोप्रोसेसर, ट्रांजिस्टर और सोलर पैनलों का आधार है।
    • इसकी अर्धचालक प्रकृति डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक्स को संभव बनाती है।
  • निर्माण उद्योग
    • सिलिकॉन सीलेंट बाथरूम, रसोई, शॉवर, एक्वेरियम और ग्लास जॉइनरी में पानी रिसाव रोकने के लिए उपयोग होता है।
    • यह इन्सुलेशन, दरारें भरने और थर्मल इन्सुलेशन में भी काम आता है।
  • धातुकर्म और रसायन
    • सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) अपघर्षक के रूप में, जबकि लोहा, एल्यूमीनियम, तांबा और मैंगनीज की मिश्र धातुओं में डी-ऑक्सीडाइजर के रूप में प्रयुक्त होता है।
    • कांच, सीमेंट और साबुन निर्माण में भी भूमिका है।
  • अन्य अनुप्रयोग
    • सिलिकॉन रबर चिकित्सा उपकरण, ऑटोमोटिव पार्ट्स, रसोई बर्तन और कोस्मेटिक्स में लचीलापन प्रदान करता है।
    • सौर ऊर्जा में सिलिकॉन वेफर्स पैनलों का मूल बनाते हैं।

19. सिलिकॉन आमतौर पर प्रयुक्त होने वाला.....है। [रेलवे एनटीपीसी ऑनलाइन (मुख्य) परीक्षा, 19 जनवरी, 2017 (11-पाली)]

Correct Answer: (a) अर्द्धचालक
Solution:
  • सिलिकॉन आमतौर पर प्रयुक्त होने वाला अर्द्धचालक (Semi-conductor) है। अर्द्धचालक उन पदार्थों को कहते हैं
  • जिनकी विद्युत चालकता चालकों (जैसे- तांबा) से कम किंतु अचालकों (जैसे कांच) से अधिक होती है।
  • सिलिकॉन की खोज स्वीडिश रसायनशास्त्री जॉस जैकब बर्जेलियस (Jons Jacob Berzelius) ने की थी
  • सिलिकॉन क्या है?
    •  यह मुख्य रूप से रेत (सिलिका, SiO2) से प्राप्त किया जाता है और धात्विक रूप में चमकदार ग्रे रंग का होता है।
    • वहीं, सिलिकॉन (Silicone) इसके बहुलक यौगिक हैं, जो रबर जैसी लचीली, उष्मारोधी और जलरोधी सामग्री के रूप में जाने जाते हैं।
    • ये दोनों रूप अलग-अलग हैं, लेकिन अक्सर भ्रमित हो जाते हैं—सिलिकॉन तत्व है, जबकि सिलिकॉन सिंथेटिक पॉलीमर।
  • मुख्य गुण
    • सिलिकॉन के प्रमुख गुणों में उच्च गलनांक (1414°C), विद्युत चालकता (अर्धचालक के रूप में), रासायनिक स्थिरता, जल और ऑक्सीजन प्रतिरोध शामिल हैं।
    • सिलिकॉन पॉलीमर लचीले, पारदर्शी, गैर-विषैले और तापमान के चरम (-50°C से 250°C तक) सहन करने वाले होते हैं।
    • ये गुण इन्हें आदर्श बनाते हैं, जैसे कि वे आसानी से खिंचाव लेते हैं, दरार नहीं पड़तीं और पर्यावरणीय क्षरण से बचे रहते हैं।
  • निर्माण उद्योग में उपयोग
    • सिलिकॉन का सबसे सामान्य उपयोग सीलेंट और चिपकने वाले के रूप में होता है।
    • बाथरूम, रसोई में शॉवर, सिंक, बाथटब के आसपास पानी के रिसाव रोकने के लिए सिलिकॉन सीलेंट लगाया जाता है
    • जो नमी प्रतिरोधी होता है। खिड़की-दरवाजों की ग्लास जॉइनरी में फ्रेम को मजबूत करने
    • इमारतों की दीवारों में दरारें भरने और थर्मल इन्सुलेशन के लिए भी इस्तेमाल होता है।
    • एक्वेरियम बनाने में यह पानी की जकड़न प्रदान करता है, जिससे मछलियां सुरक्षित रहती हैं।​​
  • इलेक्ट्रॉनिक्स और प्रौद्योगिकी में
    • सिलिकॉन अर्धचालक के रूप में माइक्रोचिप्स, ट्रांजिस्टर और इंटीग्रेटेड सर्किट्स में आधारभूत है
    • जिस कारण अमेरिका के सिलिकॉन वैली को इलेक्ट्रॉनिक्स हब कहा जाता है।
    • सौर पैनलों, सौर कोशिकाओं और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के निर्माण में धात्विक सिलिकॉन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    • यह एल्यूमीनियम मिश्र धातु, स्टेनलेस स्टील को मजबूत बनाने के लिए मिश्रण एजेंट के रूप में भी काम करता है।
  • चिकित्सा और दैनिक उपयोग
    • चिकित्सा में सिलिकॉन ब्रेस्ट इम्प्लांट्स, सर्जिकल उपकरण, चूवन के छेद बंद करने (सीलेंट) और स्नेहक के रूप में प्रयुक्त होता है।
    • रसोई के बर्तनों में नॉन-स्टिक कोटिंग, बेकरी उपकरण और भोजन सुरक्षित सामग्री के लिए आदर्श है।
    • सौंदर्य प्रसाधनों में त्वचा, बालों और नाखूनों को मजबूत करने हेतु सिलिकॉन खनिज लाभकारी है।
  • अन्य उपयोग
    • सिलिकॉन कार्बाइड (SiC) बनाने में, जो अपघर्षक के रूप में काम आता है।​
    • सीमेंट, कांच और रेफ्रेक्टरी सामग्री के उत्पादन में।
    • कृषि में सिलिकॉन खाद (एमॉर्फस सिलिका) पौधों को रोग प्रतिरोधी बनाता है।​
    • ऑटोमोटिव उद्योग में ताप प्रतिरोधी भागों के लिए।

20. छोटे सिलिकॉन चिप पर ट्रांजिस्टरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट सहित कंप्लीट इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को............ कहते हैं। [R.B.I. (Asst.) Exam. 29.04.2012 S.B.I. (C.G) 15.11.2009 (Ε.Τ)]

Correct Answer: (d) इंटीग्रेटेड सर्किट
Solution:
  • छोटे सिलिकॉन चिप पर ट्रांजिस्टरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक कम्पोनेंट सहित कंप्लीट इलेक्ट्रॉनिक सर्किट को एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) कहते हैं।
  • इंटीग्रेटेड सर्किट क्या है?
    • इंटीग्रेटेड सर्किट एक छोटी सिलिकॉन चिप होती है
    • जिसमें ट्रांजिस्टर, रेसिस्टर, कैपेसिटर और डायोड जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक घटक एक ही सब्स्ट्रेट पर निर्मित होते हैं।
    • ये घटक धातु की पतली परतों से जुड़े होते हैं
    • जो पूर्ण कार्यशील सर्किट बनाते हैं। यह तकनीक इलेक्ट्रॉनिक्स को छोटा, तेज और सस्ता बनाती है।
  • इतिहास और विकास
    • 1958 में जैक किल्बी और रॉबर्ट नोइस ने IC का आविष्कार किया, जिसने इलेक्ट्रॉनिक्स क्रांति लाई।
    • पहले IC में कुछ ट्रांजिस्टर होते थे, लेकिन आज के मॉडर्न चिप्स में अरबों ट्रांजिस्टर समा जाते हैं।
    • मूर का नियम बताता है कि हर 2 वर्षों में ट्रांजिस्टर की संख्या दोगुनी हो जाती है।​
  • प्रकार
    • एनालॉग IC: सिग्नल को एम्प्लिफाई या फिल्टर करते हैं, जैसे ऑडियो एम्प्लिफायर।
    • डिजिटल IC: बाइनरी लॉजिक पर काम करते हैं, जैसे माइक्रोप्रोसेसर और मेमोरी चिप्स।
    • मिश्रित सिग्नल IC: दोनों एनालॉग और डिजिटल फंक्शन वाले, जैसे स्मार्टफोन चिप्स।​
  • निर्माण प्रक्रिया
    • IC बनाना फोटोलिथोग्राफी पर आधारित है:
    • सिलिकॉन वेफर तैयार करना।
    • फोटोरेजिस्ट लगाकर पैटर्न एच करना।
    • डोपिंग से ट्रांजिस्टर बनाना।
    • मेटलाइजेशन से कनेक्शन जोड़ना।
    • टेस्टिंग और पैकेजिंग। यह प्रक्रिया क्लीनरूम में होती है।​
  • अनुप्रयोग
    • कंप्यूटर्स: CPU, GPU जैसे Intel Core या AMD Ryzen।
    • मोबाइल: Qualcomm Snapdragon चिप्स।
    • ऑटोमोटिव: ECU, सेंसर।
    • मेडिकल: पेसमेकर, इमेजिंग डिवाइसेज।
    • आज हर इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस में IC होते हैं।
  • लाभ और चुनौतियाँ
    • IC से सर्किट छोटे, विश्वसनीय और कम ऊर्जा वाले बने।
    • लेकिन नैनोस्केल पर क्वांटम प्रभाव चुनौती हैं।
    • भविष्य में 2D सामग्री जैसे ग्राफीन उपयोग हो सकते हैं।​