कंप्यूटर : एक परिचय (Part – II)

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21. सेलेरोन, पेंटियम और कोर क्रम प्रारूप हैं- [R.A.S./R.T.S. (Pre) 2013]

Correct Answer: (c) कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर के
Solution:
  • सेलेरोन, पेंटियम तथा कोर कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor) के प्रकार हैं।
  • सेलेरोन प्रोसेसर
    • सेलेरोन इंटेल का सबसे बेसिक और किफायती CPU रेंज है
    • जो कम बिजली खपत और कम लागत पर बुनियादी कार्यों जैसे वेब ब्राउज़िंग, ईमेल, ऑफिस डॉक्यूमेंट्स और हल्के मल्टीटास्किंग के लिए बनाया गया है।
    • इसमें आमतौर पर 2 कोर और 2 थ्रेड्स होते हैं, छोटा कैश साइज़ (2-4 MB) और कम क्लॉक स्पीड (1.5-2.5 GHz तक) मिलती है
    • जिससे यह एंट्री-लेवल लैपटॉप, नेटबुक या होम पीसी के लिए उपयुक्त है। उन्नत मॉडल्स में हाइपर-थ्रेडिंग या इंटीग्रेटेड ग्राफिक्स भी हो सकते हैं
    • लेकिन गेमिंग या वीडियो एडिटिंग जैसे भारी कामों में यह कमज़ोर पड़ जाता है।
  • पेंटियम प्रोसेसर
    • पेंटियम, सेलेरोन से थोड़ा ऊपर का मिड-रेंज प्रोसेसर है, जो 1990 के दशक से लोकप्रिय रहा और आज भी बजट गेमिंग, स्ट्रीमिंग, लाइट फोटो एडिटिंग और मल्टीटास्किंग के लिए इस्तेमाल होता है।
    • इसमें 2-4 कोर, 4 थ्रेड्स, बड़ा कैश (4-6 MB) और बेहतर क्लॉक स्पीड (2-3.5 GHz) होता है
    • ही इंटीग्रेटेड UHD ग्राफिक्स जो 1080p वीडियो प्लेबैक को आसानी से हैंडल करता है।
    • पुराने पेंटियम D या ड्यूल-कोर मॉडल्स नेटबर्स्ट आर्किटेक्चर पर आधारित थे
    • जबकि नए कोर-आधारित मॉडल्स (जैसे Pentium Gold) ज्यादा कुशल हैं और 64-बिट सपोर्ट देते हैं।
  • कोर प्रोसेसर सीरीज
    • कोर (Core i3, i5, i7, i9) इंटेल की फ्लैगशिप हाई-परफॉर्मेंस रेंज है, जो प्रोफेशनल वर्कलोड जैसे 4K वीडियो एडिटिंग, 3D रेंडरिंग, हेवी गेमिंग और AI टास्क्स के लिए डिज़ाइन की गई है।
    • i3 में 4 कोर/8 थ्रेड्स, i5 में 6-10 कोर, i7 में 8-16 कोर और i9 में 16+ कोर के साथ टर्बो बूस्ट तक 5+ GHz स्पीड, बड़ा कैश (12-30 MB+) और उन्नत फीचर्स जैसे AVX-512 इंस्ट्रक्शन्स मिलते हैं।
    • ये Alder Lake, Raptor Lake या नई Meteor Lake आर्किटेक्चर पर आधारित होते हैं, जो मल्टी-थ्रेडेड परफॉर्मेंस में श्रेष्ठ हैं।
  • विकास क्रम और इतिहास
    • ये सीरीज इंटेल के प्रोसेसर पदानुक्रम (hierarchy) का हिस्सा हैं
    • सेलेरोन (सबसे नीचे, 1998 से), पेंटियम (मध्य, 1993 से) और कोर (शीर्ष, 2006 से कोर 2 ड्यूो के साथ शुरू)।
    • समय के साथ ये x86 आर्किटेक्चर से हाइब्रिड (P+E कोर) तक विकसित हुए हैं
    • जहां नई जनरेशन (14th Gen Core तक) ज्यादा कोर, बेहतर IPC (Instructions Per Clock) और AI एकeleration प्रदान करती हैं। सेलेरोन/पेंटियम अब कोर i3 के समकक्ष सस्ते विकल्प हैं।
  • चयन टिप्स
    • बजट पीसी के लिए सेलेरोन चुनें।
    • स्टूडेंट/ऑफिस के लिए पेंटियम।
    • गेमिंग/क्रिएटिव वर्क के लिए कोर i5+।
    • हमेशा TDP, जनरेशन (जैसे 13th/14th Gen) और मदरबोर्ड कम्पैटिबिलिटी चेक करें।

22. डायोड किस तरह का उपकरण है? [R.R.B. कोलकाता (असि. लोको. पाय.) परीक्षा, 2008]

Correct Answer: (c) आरेखीय
Solution:
  • विद्युत परिपथ (Electric Circuit) के संदर्भ में आरेखीय युक्ति (Non-liner Device) एक ऐसा विद्युत उपकरण है, जिसमें विद्युत धारा तथा वोल्टेज के मध्य रेखीय संबंध नहीं होता है।
  • डायोड ● (Diode) इसका एक प्रमुख उदाहरण है।
  • डायोड की परिभाषा
    • डायोड का मुख्य कार्य धारा को एक दिशा (फॉरवर्ड बायस) में बहुत कम प्रतिरोध के साथ बहने देना है
    • जबकि विपरीत दिशा (रिवर्स बायस) में उच्च प्रतिरोध प्रदान करना। यह PN जंक्शन से निर्मित होता है
    • जहां P-टाइप (पॉजिटिव होल्स) और N-टाइप (निगेटिव इलेक्ट्रॉन्स) अर्धचालक सामग्री जुड़ती हैं।
    • जब फॉरवर्ड बायस में वोल्टेज लगाया जाता है, तो जंक्शन बैरियर कम हो जाता है और धारा बहने लगती है; रिवर्स बायस में बैरियर बढ़ जाता है।
  • डायोड का प्रतीक और संरचना
    • डायोड का प्रतीक एक तीर के आकार का होता है जो धारा की दिशा दर्शाता है
    • कैथोड सिरे पर एक क्रॉस लाइन होती है। अनोड (+) सिरा तीर के सिरे से जुड़ता है
    • कैथोड (-) सिरा क्रॉस से। सामान्यतः सिलिकॉन या जर्मेनियम से बनाया जाता है, जिसमें दो टर्मिनल होते हैं।​
  • कार्य सिद्धांत
    • फॉरवर्ड बायस में, P-साइड को पॉजिटिव और N-साइड को नेगेटिव वोल्टेज देकर इलेक्ट्रॉन्स और होल्स जंक्शन की ओर बढ़ते हैं
    • जिससे डिप्लिशन क्षेत्र संकरित हो जाता है। रिवर्स बायस में, दोनों चार्ज विपरीत दिशा में चले जाते हैं
    • डिप्लिशन क्षेत्र फैलता है और धारा अवरुद्ध हो जाती है (ब्रेकडाउन को छोड़कर)।
    • थ्रेशोल्ड वोल्टेज (सिलिकॉन के लिए 0.7V) पार होने पर ही फॉरवर्ड कंडक्शन शुरू होता है।​​
  • डायोड के प्रकार
    • डायोड कई प्रकार के होते हैं, प्रत्येक का विशिष्ट उपयोग:
    • PN जंक्शन डायोड: सामान्य रेक्टिफायर, सबसे बुनियादी।​
    • जेनर डायोड: रिवर्स बायस में ब्रेकडाउन पर स्थिर वोल्टेज बनाए रखता है, वोल्टेज रेगुलेटर के रूप में।
    • लाइट एमिटिंग डायोड (LED): फॉरवर्ड बायस में प्रकाश उत्सर्जित करता है, डिस्प्ले में उपयोग।​
    • स्कॉटकी डायोड: धातु-अर्धचालक जंक्शन, कम थ्रेशोल्ड वोल्टेज (0.2-0.3V), हाई स्पीड स्विचिंग।​
    • टनल डायोड: नेगेटिव रेसिस्टेंस, हाई फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटर।
    • फोटोडायोड: प्रकाश पर धारा उत्पन्न करता है, सेंसर में।​
    • अन्य: वेरेक्टर (कैपेसिटर के रूप में), PIN डायोड (RF स्विच), लेजर डायोड।​
  • उपयोग और अनुप्रयोग
    • डायोड का उपयोग दिष्टकरण (AC को DC), वोल्टेज क्लैंपिंग, सिग्नल मॉडुलेशन, प्रोटेक्शन सर्किट आदि में होता है।
    • पावर सप्लाई, चार्जर, LED लाइट्स, रेडियो, टेलीविजन और कम्प्यूटर परिपथों में आवश्यक।
    • आजकल अर्धचालक डायोड वैक्यूम डायोडों से कहीं अधिक कुशल हैं।
  • विशेषताएं और सीमाएं
    • डायोड की फॉरवर्ड करंट 1mA से 100A तक, रिवर्स वोल्टेज 50V से 10kV तक हो सकती है।
    • गर्मी से क्षति का खतरा, इसलिए हीट सिंक की जरूरत। आधुनिक डायोड शॉकले, तापमान प्रतिरोधी होते हैं।​

23. सामान्य तापक्रम पर सिलिकॉन डायोड का रोचिका विभव क्या होता है? [R.R.B. कोलकाता (असि. लोको पाय.) परीक्षा, 2008]

Correct Answer: (a) 0.7V
Solution:
  • सामान्य तापक्रम पर सिलिकॉन डायोड का रोचिका विभव (Barrier Potential) 0.7V होता है।
  • सिलिकॉन डायोड अर्द्धचालक (Semi-Conductor) डायोड होता है।
  • रोचिका विभव क्या है?
    • रोचिका विभव PN जंक्शन पर स्वाभाविक रूप से बनने वाला विभव अंतर है
    • जो अर्धचालक सामग्री के दो भागों (P-प्रकार और N-प्रकार) के बीच आयनों के कारण उत्पन्न होता है।
    • P-क्षेत्र में होल्स और N-क्षेत्र में इलेक्ट्रॉन्स डोपिंग से आते हैं, लेकिन जंक्शन पर इलेक्ट्रॉन्स और होल्स की पुनर्संयोजन से अवक्षय पर्त (depletion layer) बनती है।
    • यह पर्त धनात्मक और ऋणात्मक आवेशों से चार्ज हो जाती है, जिससे लगभग 0.7 V का विभव रोधक बनता है
    • सिलिकॉन में। यह रोधक अग्र पूर्वी धारा को रोकता है जब तक बाहरी वोल्टेज इससे अधिक न हो।
    • जर्मेनियम डायोड में यह 0.3 V होता है, लेकिन सिलिकॉन अधिक स्थिर होने से पसंद किया जाता है।​
  • तापमान पर निर्भरता
    • सामान्य ताप पर (25°C) सिलिकॉन डायोड का रोचिका विभव 0.6 से 0.7 V के बीच होता है, जो डोपिंग सांद्रता और निर्माण प्रक्रिया पर थोड़ा निर्भर करता है।
    • तापमान बढ़ने पर यह घटता है—प्रति डिग्री सेल्सियस लगभग 2 mV की कमी। उदाहरणस्वरूप, 100°C पर यह 0.55 V रह जाता है।
    • यह इसलिए क्योंकि उच्च ताप पर कैरियर सांद्रता बढ़ती है, जिससे जंक्शन विभव कम होता है। सूत्र रूप में:  वोल्ट, जहाँ T सेल्सियस में है।​​
  • VI विशेषता वक्र
    • सिलिकॉन डायोड का वोल्टेज-करंट (VI) वक्र दिखाता है कि 0.7 V से पहले धारा नगण्य रहती है
    • उसके बाद घातीय वृद्धि होती है। शॉकले डायोड समीकरण: , जहाँ  mV (सामान्य ताप पर),  सिलिकॉन के लिए। इससे स्पष्ट है
    • 0.7 V पर धारा तेजी से बहने लगती है। व्यावहारिक परिपथों में इसे 0.7 V ड्रॉप मानकर डिज़ाइन किया जाता है।

24. तृतीय जेनेरेशन माइक्रोप्रोसेसर का अधिकतम मेमोरी साइज है [BPSC PRT 15.12.2023]

Correct Answer: (b) 16MB
Solution:
  • तृतीय जेनेरेशन माइक्रोप्रोसेसर में (इंटीग्रेटेड सर्किट (Integrated Circuit-IC) ने ट्रांजिस्टर का स्थान ले लिया था।
  • इस पीढी में मैग्नेटिक मेमोरी की क्षमता में वृद्धि हुई थी तथा इस पीढ़ी में प्रयुक्त माइक्रोप्रोसेसर की क्षमता 64MB होती थी।
  • तृतीय पीढ़ी की परिभाषा
    • तृतीय पीढ़ी के माइक्रोप्रोसेसर 1970 के दशक के अंत से 1980 के दशक की शुरुआत के थे
    • जो HMOS (High-speed MOS) तकनीक पर आधारित 16-बिट चिप्स थे।
    • इनमें इंटेल 8086 (1978), Zilog Z8000 और Motorola 68000 प्रमुख थे। ये द्वितीय पीढ़ी (जैसे 8085, 8-बिट) से तेज और घने थे।​
  • मेमोरी साइज की गणना
    • इंटेल 8086 में 20 एड्रेस लाइन्स (A0-A19) थीं, जो  बाइट्स यानी 1 MB अधिकतम फिजिकल मेमोरी एड्रेस कर सकती थीं।
    • सेगमेंटेशन के कारण रियल मोड में 1 MB ही सीमा थी
    • जबकि प्रोटेक्टेड मोड (80286 से) में 16 MB तक संभव था। कुछ शैक्षणिक सामग्री में 1 MB से 16 MB का रेंज बताया गया है।​
  • विवाद और भ्रम
    • कुछ भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे BPSC) में 4 GB को सही उत्तर माना गया, लेकिन तकनीकी रूप से यह गलत है
    • क्योंकि 32-बिट (चतुर्थ पीढ़ी, 80386) से पहले 4 GB संभव नहीं था।
    • वास्तविक उत्तर 16 MB या 1 MB है। यूट्यूब वीडियो में भी इस पर बहस है।
  • तुलना अन्य पीढ़ियों से
    • प्रथम पीढ़ी (4-बिट): 64 KB तक।
    • द्वितीय पीढ़ी (8-बिट, 8085): 64 KB।
    • तृतीय (16-बिट): 1-16 MB।
    • चतुर्थ (32-बिट): 4 GB।​

25. ऑनलाइन सिस्टम का विकास हुआ था-

Correct Answer: (c) तृतीय पीढ़ी
Solution:
  • ऑनलाइन पद्धति (Online System) का विकास तृतीय पीढ़ी (Third Generation) में हुआ था।
  • आवश्यकता संग्रहण और विश्लेषण
    • ऑनलाइन सिस्टम विकसित करने का पहला चरण आवश्यकताओं का संग्रहण होता है
    • जहां ग्राहकों, हितधारकों और उपयोगकर्ताओं से इनपुट लिया जाता है।
    • इसमें सिस्टम के उद्देश्य, फीचर्स, उपयोगकर्ता की अपेक्षाएं और तकनीकी बाधाओं का विश्लेषण किया जाता है।
    • यह चरण जोखिमों की पहचान करता है और परियोजना के दायरे को स्पष्ट करता है, ताकि बाद के चरण सुचारू रूप से चल सकें।​
  • व्यवहार्यता अध्ययन
    • इसके बाद व्यवहार्यता अध्ययन किया जाता है
    • जिसमें तकनीकी, आर्थिक, कानूनी और परिचालन व्यवहार्यता की जांच होती है।
    • टीम यह तय करती है कि क्या सिस्टम बनाना व्यावहारिक है
    • बजट और समयसीमा के अंदर संभव है या नहीं। यदि व्यवहार्य न हो, तो परियोजना रद्द या संशोधित की जा सकती है।​
  • सिस्टम डिजाइन
    • डिजाइन चरण में सिस्टम की वास्तुकला तैयार की जाती है
    • जिसमें डेटाबेस डिजाइन, यूजर इंटरफेस (UI/UX), नेटवर्क संरचना और सुरक्षा मॉडल शामिल होते हैं।
    • हाई-लेवल डिजाइन (HLD) समग्र आर्किटेक्चर पर फोकस करता है
    • जबकि लो-लेवल डिजाइन (LLD) मॉड्यूल-स्तरीय विवरण देता है। यह चरण कोडिंग के लिए ब्लूप्रिंट का काम करता है।
  • कोडिंग और विकास
    • कोडिंग चरण में डेवलपर्स प्रोग्रामिंग भाषाओं जैसे Java, Python, PHP या JavaScript का उपयोग करके सिस्टम बनाते हैं।
    • कार्य को मॉड्यूल में विभाजित किया जाता है, जैसे फ्रंटएंड (React/Angular), बैकएंड (Node.js/Spring Boot) और डेटाबेस (MySQL/MongoDB)।
    • आधुनिक ऑनलाइन सिस्टम क्लाउड प्लेटफॉर्म्स जैसे AWS या Azure पर विकसित होते हैं, जो स्केलेबिलिटी सुनिश्चित करते हैं। यह सबसे समय लेने वाला चरण है।​
  • परीक्षण
    • विकास के बाद परीक्षण चरण आता है, जिसमें यूनिट टेस्टिंग, इंटीग्रेशन टेस्टिंग, सिस्टम टेस्टिंग और यूजर एक्सेप्टेंस टेस्टिंग (UAT) शामिल होती है।
    • बग्स, प्रदर्शन मुद्दे और सुरक्षा कमजोरियों की जांच की जाती है। टूल्स जैसे Selenium, JUnit या Postman का उपयोग होता है।
    • ऑनलाइन सिस्टम के लिए लोड टेस्टिंग महत्वपूर्ण है ताकि लाखों यूजर्स को हैंडल कर सके।
  • तैनाती और स्थापना
    • परीक्षण सफल होने पर सिस्टम को प्रोडक्शन में तैनात किया जाता है।
    • CI/CD पाइपलाइन्स (Jenkins, GitHub Actions) का उपयोग ऑटोमेटेड डिप्लॉयमेंट के लिए होता है।
    • डाउनटाइम कम करने के लिए ब्लू-ग्रीन डिप्लॉयमेंट या कैनरी रिलीज अपनाई जाती है।​
  • रखरखाव और अपडेट
    • तैनाती के बाद रखरखाव चरण शुरू होता है, जिसमें बग फिक्स, फीचर अपडेट, स्केलिंग और सुरक्षा पैच शामिल हैं।
    • ऑनलाइन सिस्टम के लिए मॉनिटरिंग टूल्स जैसे Prometheus या New Relic उपयोग होते हैं। एजाइल मॉडल में यह निरंतर प्रक्रिया है।​
  • प्रमुख SDLC मॉडल्स
    • ऑनलाइन सिस्टम के विकास में विभिन्न मॉडल अपनाए जाते हैं:
    • वाटरफॉल मॉडल: चरणबद्ध और रैखिक, छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए उपयुक्त।​
    • एजाइल मॉडल: इटरेटिव, स्क्रम या कांबन के साथ, बदलावों को तेजी से समाहित करता है।​
    • स्पाइरल मॉडल: जोखिम-केंद्रित, बड़े और जटिल सिस्टम के लिए।​
    • डेवऑप्स: विकास और ऑपरेशन्स का एकीकरण, CI/CD पर फोकस।​
  • आधुनिक ट्रेंड्स
    • आजकल ऑनलाइन सिस्टम माइक्रोसर्विसेज आर्किटेक्चर, API-फर्स्ट डिजाइन, AI/ML इंटीग्रेशन और कंटेनराइजेशन (Docker, Kubernetes) पर आधारित होते हैं।
    • IoT और 5G के साथ इंटरनेट का विकास भी इन्हें प्रभावित करता है, जहां ARPANET से शुरू होकर TCP/IP ने आधार दिया।
  • चुनौतियां और सर्वोत्तम प्रथाएं
    • चुनौतियां включают डेटा सिक्योरिटी (GDPR अनुपालन), स्केलेबिलिटी और डाउनटाइम।
    • सर्वोत्तम प्रथाएं: वर्शन कंट्रोल (Git), कोड रिव्यू, TDD (टेस्ट-ड्रिवन डेवलपमेंट) और यूजर फीडबैक लूप।
    • भारत जैसे देशों में, पैनिपत जैसी जगहों पर भी स्टार्टअप्स इन प्रक्रियाओं से ई-कॉमर्स या एजुकेशन प्लेटफॉर्म विकसित कर रहे हैं।

26. चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों के निर्माण में प्रयोग किया जाता है- [S.S.C. मैट्रिक स्तरीय परीक्षा, 2008, S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-1) परीक्षा, 2011]

Correct Answer: (d) सूक्ष्म संधारित्रों का
Solution:
  • निर्वात ट्यूबों (Vacuum Tube) का प्रयोग पहली पीढ़ी के कंप्यूटरों में (1942-1955), ट्रांजिस्टरों का प्रयोग द्वितीय पीदी (Second Generation) के कंप्यूटरों में (1955-64), आईसी चिपों (Integrated Circuit Chip) का प्रयोग तृतीय पीढ़ी (1964-75) तथा माइक्रोप्रोसेसर (सूक्ष्म संधारित्रों) का प्रयोग चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों (1975 - वर्तमान) में किया गया।
  • समयावधि और परिचय
    • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों की शुरुआत 1971 में हुई, जब इंटेल ने पहला माइक्रोप्रोसेसर 4004 लॉन्च किया।
    • यह पीढ़ी 1980-90 के दशक तक प्रमुख रही और इसमें संपूर्ण CPU को एक ही चिप पर समेट लिया गया।
    • इससे पहले की पीढ़ियों (वैक्यूम ट्यूब, ट्रांजिस्टर, IC) की तुलना में ये छोटे, तेज़ और सस्ते थे। पर्सनल कंप्यूटर (PC) जैसे IBM PC इसी पीढ़ी के उत्पाद थे।
  • मुख्य तकनीकें
    • माइक्रोप्रोसेसर: यह सबसे महत्वपूर्ण घटक था, जैसे Intel 8080, Motorola 6800। एक चिप में हजारों ट्रांजिस्टर एकीकृत हो गए, जिससे प्रसंस्करण शक्ति बढ़ी।
    • VLSI सर्किट: Very Large Scale Integration से लाखों ट्रांजिस्टर एक चिप पर फिट हो गए, जिससे LSI (Large Scale Integration) से आगे बढ़ा।​​
    • मेमोरी: सेमीकंडक्टर RAM और ROM का व्यापक उपयोग, फ्लॉपी डिस्क और हार्ड डिस्क स्टोरेज।​
    • इनपुट-आउटपुट: कीबोर्ड, माउस, ग्राफिकल डिस्प्ले (GUI) और प्रिंटर।​
  • विशेषताएँ
    • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटर छोटे आकार के, कम बिजली खपत वाले और विश्वसनीय थे।
    • वे मल्टीटास्किंग, नेटवर्किंग (LAN, इंटरनेट का प्रारंभ) और रीयल-टाइम प्रोसेसिंग सपोर्ट करते थे।
    • गति नैनोसेकंड स्तर की थी, और हीट कम उत्पन्न होती थी। ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे MS-DOS, Windows, UNIX आए।
  • लाभ
    • आकार में कमी: डेस्कटॉप से लैपटॉप तक संभव।
    • लागत में कमी: घरेलू उपयोग के लिए सस्ते।
    • गति और क्षमता: बिलियन कैलकुलेशन प्रति सेकंड (मेगाher兹)।
    • नेटवर्किंग: TCP/IP प्रोटोकॉल से इंटरनेट का आधार।
    • भाषाएँ: BASIC, C, Pascal, Fortran, COBOL।​
  • हानियाँ
    • माइक्रोप्रोसेसर निर्माण जटिल और महंगा था, एयर कंडीशनिंग की कुछ जरूरत पड़ती थी।
    • वायरस और सॉफ्टवेयर जटिलताएँ नई चुनौतियाँ थीं। फिर भी, इस पीढ़ी ने डिजिटल क्रांति की नींव रखी।​
  • प्रभाव
    • इस पीढ़ी ने पर्सनल कंप्यूटिंग को आम बनाया
    • जिससे आज का स्मार्टफोन और क्लाउड कंप्यूटिंग संभव हुआ।
    • भारत जैसे देशों में भी PC क्रांति इसी से शुरू हुई।

27. 'वीएलएसआई' इंटीग्रेटेड सर्किट्स निर्माण करने की एक प्रक्रिया है। वीएलएसआई का विस्तारित रूप है: [LIC AAO EXAM-2016 (Online)]

Correct Answer: (a) वेरी-लार्ज स्केल इंटीग्रेशन
Solution:
  • 'वीएलएसआई इंटीग्रेटेड परिपथ (IC) का निर्माण करने की एक प्रक्रिया (Process) है।
  • वीएलएसआई, वेरी-लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (Very Large Scale Integration) का संक्षिप्त रूप है।
  • इस तकनीक का उपयोग चतुर्थ पीढ़ी के कंप्यूटरों में हुआ था।
  • इस तकनीक के उपयोग से माइक्रोप्रोसेसर का निर्माण हुआ जिससे कंप्यूटर के आकार में कमी और क्षमता में वृद्धि हुई।
  • VLSI की परिभाषा
    • VLSI एक उन्नत तकनीक है जो इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में जटिल डिजिटल और एनालॉग सर्किट्स को छोटे आकार में बनाने के लिए इस्तेमाल होती है।
    • 1970 के दशक में इसकी शुरुआत हुई, जब अर्धचालक प्रौद्योगिकी विकसित हुई।
    • इसमें सिलिकॉन वाफर पर परत-दर-परत संरचनाएं बनाई जाती हैं
    • जो माइक्रोप्रोसेसर, मेमोरी चिप्स और अन्य उपकरणों को शक्तिशाली बनाती हैं।
  • निर्माण प्रक्रिया के मुख्य चरण
    • VLSI निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है जो साफ कमरों (क्लीनरूम) में होती है। मुख्य चरण निम्नलिखित हैं:
    • सिलिकॉन वाफर निर्माण: उच्च शुद्धता वाले सिलिकॉन क्रिस्टल से पतली वाफर बनाई जाती है।​
    • ऑक्सीडेशन: सिलिकॉन परत पर सिलिकॉन डाइऑक्साइड की परत बनाई जाती है, जो इन्सुलेशन प्रदान करती है।
    • फोटोलिथोग्राफी: मास्क के माध्यम से प्रकाश डालकर पैटर्न बनाया जाता है, जो फोटोरेजिस्ट को प्रभावित करता है।
    • एचिंग: अनावश्यक सामग्री को रासायनिक या प्लाज्मा से हटाया जाता है।
    • आयन इम्प्लांटेशन और डिफ्यूजन: डॉपेंट अशुद्धियां डाली जाती हैं ताकि सेमीकंडक्टर गुण प्राप्त हों।​
    • डिपोजिशन और मेटलाइजेशन: नई परतें जोड़ी जाती हैं और धातु कनेक्शन बनाए जाते हैं।
    • टेस्टिंग, असेंबली और पैकेजिंग: चिप की जांच और अंतिम पैकिंग।​
    • ये चरण कई बार दोहराए जाते हैं ताकि बहु-परत संरचना बने।​
  • VLSI के लाभ और अनुप्रयोग
    • VLSI से चिप्स छोटे, कम ऊर्जा वाले और उच्च प्रदर्शन वाले बनते हैं।
    • यह स्मार्टफोन, कंप्यूटर, संचार उपकरणों और मेडिकल डिवाइसेज में उपयोग होता है।
    • आधुनिक फैब्रिकेशन प्लांट्स (फैब्स) में अरबों ट्रांजिस्टर एक चिप पर एकीकृत होते हैं।​​
  • विकास का इतिहास संक्षेप में
    • SSI (Small Scale Integration) से शुरू होकर VLSI ने ULSI (Ultra Large Scale Integration) तक पहुंच बनाई।
    • यह मोबाइल कंप्यूटिंग और पोर्टेबल डिवाइसेज की मांग को पूरा करता है।​​

28. .......... पीढ़ी के कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर तकनीक का प्रयोग करके विकसित किए गए थे। [UPPCL TG-2 Exam-2019]

Correct Answer: (a) चौथी
Solution:
  • चौथी पीढ़ी (Fourth Generation) के कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर तकनीक (Technique) का प्रयोग करके विकसित (Develop) किए गए थे।
  • चौथी पीढ़ी के कंप्यूटरों में कंप्यूटर माइक्रोप्रोसेसर का प्रयोग किया जाता था।
  • इस समय के कंप्यूटरों में ULSI का प्रयोग आरंभ हुआ था।
  • ULSI तथा VLSI के प्रयोग द्वारा कंप्यूटर का आकार छोटा हो गया और क्षमता में वृद्धि हो गई।
  • मुख्य तकनीक: माइक्रोप्रोसेसर
    • इस पीढ़ी की आधारशिला VLSI (Very Large Scale Integration) तकनीक थी
    • जिसमें हजारों एकीकृत परिपथों (ICs) को एक सिलिकॉन चिप में एकीकृत किया गया।
    • पहला माइक्रोप्रोसेसर Intel 4004 था, जो 1971 में जारी हुआ और 4-बिट प्रोसेसर था।
    • बाद में Intel 8088, 80286 जैसे उन्नत माइक्रोप्रोसेसर्स आए, जिन्होंने कंप्यूटरों को मल्टीटास्किंग और रीयल-टाइम प्रोसेसिंग सक्षम बनाया।
    • माइक्रोप्रोसेसर ने पहले की पीढ़ियों की तुलना में गति बढ़ाई (माइक्रोसेकंड से नैनोसेकंड तक), बिजली की खपत घटाई और आकार न्यूनतम किया।
  • विशेषताएँ
    • आकार और लागत: बड़े मेनफ्रेम से लैपटॉप/डेस्कटॉप तक छोटे हो गए, जिससे घरेलू उपयोग संभव हुआ।
    • भाषाएँ: C, C++, Visual Basic जैसी हाई-लेवल भाषाओं का समर्थन; GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस), माउस और कीबोर्ड का प्रचलन।
    • सॉफ्टवेयर: ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे MS-DOS, Windows; नेटवर्किंग और इंटरनेट की शुरुआत।
    • फायदे: विश्वसनीयता बढ़ी, रखरखाव आसान, मल्टीयूज़र सिस्टम संभव।
  • पिछली पीढ़ियों से अंतर
    • पहली पीढ़ी (1940-1956): वैक्यूम ट्यूब्स—बड़े, गर्म, धीमे।
    • दूसरी (1956-1963): ट्रांजिस्टर—छोटे लेकिन महंगे।
    • तीसरी (1964-1971): ICs—बहुकार्य लेकिन अभी भी बड़े।
    • चौथी पीढ़ी ने माइक्रोप्रोसेसर से व्यक्तिगत कंप्यूटिंग को जन्म दिया, जो पांचवीं पीढ़ी (AI-आधारित) की नींव बनी।
  • प्रभाव और महत्व
    • इस पीढ़ी ने कंप्यूटर को आम लोगों तक पहुँचाया, जिससे शिक्षा, व्यवसाय और मनोरंजन में क्रांति आई।
    • इंटरनेट, सॉफ्टवेयर उद्योग और मोबाइल डिवाइसेज़ का आधार यही था।
    • आज भी अधिकांश PC इसी तकनीक पर आधारित हैं, हालांकि उन्नत रूप में।

29. VLSI और ULSI का प्रयोग आरंभ हुआ था-

Correct Answer: (d) चतुर्थ पीढ़ी में
Solution:
  • VLSI एवं ULSI (Ultra Large Scale Integration) का प्रयोग चतुर्थ पीढ़ी (Fourth Generation) में प्रारंभ हुआ था।
  • VLSI का आरंभ
    • VLSI का विकास 1970 की दशक में हुआ। 1964 में General Microelectronics ने पहला व्यावसायिक MOS IC लॉन्च किया
    • लेकिन 1970 के प्रारंभ तक MOS तकनीक ने 10,000 से अधिक ट्रांजिस्टरों को एक चिप पर समाहित करने की क्षमता प्रदान की।
    • इससे पहले SSI (Small Scale Integration, 1960s, 10-100 गेट्स), MSI (Medium Scale, 100-1000 गेट्स) और LSI (Large Scale, 1971, 1000+ गेट्स) चरण थे।
    • VLSI ने 10,000 से लाखों ट्रांजिस्टरों (tens to hundreds of thousands) को एक सिलिकॉन चिप पर इंटीग्रेट किया, जो कंप्यूटरों को छोटा, तेज और सस्ता बनाया।
    • Intel का 1971 का पहला माइक्रोप्रोसेसर (4004) इसकी शुरुआत का प्रतीक था।
    • 1970-80 के दशक में VLSI ने पर्सनल कंप्यूटर, मोबाइल फोन और अन्य उपकरणों को जन्म दिया।​
  • ULSI का विकास
    • VLSI integrated-circuit die.
    • ULSI VLSI का उत्तराधिकारी है, जो 1980-90 के दशक में उभरा। यह अरबों ट्रांजिस्टरों को एक चिप पर समाहित करता है, जैसे Pentium माइक्रोप्रोसेसर।
    • कंप्यूटर की पांचवीं पीढ़ी (1990s से) में VLSI को ULSI में परिवर्तित किया गया
    • जिससे सैकड़ों मिलियन या बिलियन ट्रांजिस्टर संभव हुए। यह System-on-Chip (SoC) और AI चिप्स के लिए आधार बना।
    • ULSI ने LSI/VLSI से आगे बढ़कर शक्ति दक्षता और जटिलता बढ़ाई। आज के प्रोसेसर (जैसे Intel Core या ARM चिप्स) ULSI सिद्धांतों पर आधारित हैं।​
    • यह VLSI चिप का डाई फोटो दर्शाता है, जिसमें जटिल सर्किटरी दिखाई देती है।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1947: Bell Labs में ट्रांजिस्टर का आविष्कार (Atalla और Kahng ने 1959 में MOS ट्रांजिस्टर विकसित किया)।​
    • 1958: IC का आविष्कार (Jack Kilby, Robert Noyce)।​
    • 1970s: VLSI का व्यावसायिक उपयोग, MOS तकनीक से।​
    • 1990s: ULSI का उदय, बिलियन ट्रांजिस्टर चिप्स।​
    • इन तकनीकों ने मूर के नियम (ट्रांजिस्टर दोगुना हर 2 वर्ष) को साकार किया।
  • आधुनिक प्रभाव
    • VLSI/ULSI ने स्मार्टफोन, AI, IoT और 5G को संभव बनाया।
    • आज 3nm प्रोसेस में अरबों ट्रांजिस्टर होते हैं, जो ऊर्जा बचत और उच्च प्रदर्शन देते हैं।​

30. एलएसआई का विस्तारित रूप क्या है? [IBPS BANK CLERK EXAM-2016 (Online)]

Correct Answer: (a) लार्ज स्केल इंटीग्रेशन
Solution:
  • एलएसआई (LSI) का विस्तारित रूप लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (Large Scale Integration) है।
  • यह एकल सिलिकॉन सेमीकंडक्टर माइक्रोचिप (Single silicon semiconductor microchip) पर हजारों ट्रांजिस्टर को एकीकृत या एम्बेडिंग (Integrating or Imbedding) करने की प्रक्रिया (Process) है।
  • लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (कंप्यूटर हार्डवेयर संदर्भ)
    •  यह तकनीक माइक्रोप्रोसेसर और मेमोरी चिप्स के निर्माण में महत्वपूर्ण रही।​
    • आजकल इसे वेरी लार्ज स्केल इंटीग्रेशन (VLSI) ने प्रतिस्थापित कर दिया है, लेकिन LSI ने इंटीग्रेटेड सर्किट्स के विकास में आधारभूत भूमिका निभाई।
    • उदाहरणस्वरूप, LSI चिप्स में 100 से 1000 ट्रांजिस्टर होते हैं, जो छोटे गैजेट्स जैसे कैलकुलेटर में उपयोगी साबित हुए।​
  • लेटेंट सेमांटिक इंडेक्सिंग (एसईओ और सर्च संदर्भ)
    • यह सर्च इंजनों (जैसे गूगल) द्वारा उपयोग की जाने वाली विधि है
    • जो मुख्य कीवर्ड से संबंधित समानार्थी या संदर्भित शब्दों (LSI कीवर्ड्स) को पहचानती है।
    • इससे कंटेंट की प्रासंगिकता बढ़ती है और कीवर्ड स्टफिंग से बचाव होता है।​​
    • LSI कीवर्ड्स लॉन्ग-टेल कीवर्ड्स की तरह काम करते हैं, जो कम प्रतिस्पर्धा में बेहतर रैंकिंग देते हैं।
    • उदाहरण: "मोबाइल फोन" के लिए LSI हो सकते हैं "स्मार्टफोन कीमत", "एंड्रॉयड फोन मॉडल"।
    • गूगल के अपडेट्स (जैसे Hummingbird) ने इसे प्रमुख बनाया, जिससे कंटेंट क्रॉलिंग अधिक सटीक हुई।
  • अन्य संभावित अर्थ
    • कुछ क्षेत्रों में LSI का मतलब लिवेस्टॉक इंस्पेक्टर (पशुधन निरीक्षक) भी हो सकता है, खासकर सरकारी नौकरियों में। लेकिन यह कम प्रचलित है।​
    • इन सभी संदर्भों में LSI का चयन क्वेरी के हिसाब से होता है—तकनीकी प्रश्नों में हार्डवेयर, डिजिटल मार्केटिंग में SEO।​