कंप्यूटर : एक परिचय (Part – IV)

Total Questions: 50

1. निम्न में क्या सामान्यतः गणना नहीं कर सकता ? [रेलवे एनटीपीसी ऑनलाइन (मुख्य) परीक्षा, 19 जनवरी, 2017 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) प्रिंटर
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में प्रिंटर को छोड़ शेष सभी परिकलित (Calculation) के रूप में भी कार्य कर सकते हैं अर्थात गणना कर सकते हैं
  • जबकि प्रिंटर हार्ड कॉपी या कागज / पेपर के रूप में आउटपुट या प्रिंट आउट हेतु प्रयुक्त होता है।
  • निम्न में से क्या सामान्यतः गणना नहीं किया जा सकता?
  • विकल्प:
    • परिमेय संख्याएँ (Rational numbers)
    • पूर्णांक (Integers)
    • अपरिमेय संख्याएँ (Irrational numbers)
    • प्राकृत संख्याएँ (Natural numbers)
  • उत्तर: अपरिमेय संख्याएँ (Irrational numbers) ।​
  • क्यों अपरिमेय संख्याएँ गणना नहीं की जा सकतीं?
    • अपरिमेय संख्याएँ (जैसे √2, √3, π, e) ऐसी संख्याएँ होती हैं जिन्हें दो पूर्णांकों p/q के रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता
    • जहाँ q ≠ 0। इनके दशमलव प्रसार अनंत और आवर्ती नहीं होते, इसलिए इन्हें सटीक रूप से गिना या व्यक्त नहीं किया जा सकता।
    • परिमेय संख्याएँ (जैसे 1/2 = 0.5) को आसानी से गिना जा सकता है क्योंकि इनका दशमलव प्रसार या तो समाप्त हो जाता है या आवर्ती होता है।
    • पूर्णांक (जैसे 5, -3) पहले से ही गिनती योग्य हैं।
    • प्राकृत संख्याएँ (1, 2, 3...) गणना का आधार हैं।
    • लेकिन अपरिमेय संख्याएँ अनंत दशमलव वाली होती हैं, जैसे √2 = 1.414213562... (कभी समाप्त नहीं होता)
    • इसलिए इन्हें पूर्णतः गणना या मापन नहीं किया जा सकता। इन्हें केवल सन्निकर्ष (approximation) से व्यक्त करते हैं ।​
  • गणितीय प्रमाण (√2 अपरिमेय क्यों है?)
    • मान लीजिए √2 परिमेय है, अर्थात √2 = p/q (जहाँ p, q सहअभाज्य पूर्णांक, q ≠ 0)।
    • दोनों पक्षों को वर्ग करें: 2 = p²/q² ⇒ p² = 2q²।
    • p² सम (even) है, इसलिए p सम है (p = 2k)।
    • तब (2k)² = 2q² ⇒ 4k² = 2q² ⇒ q² = 2k² ⇒ q भी सम है।
  • अन्य संभावित संदर्भ
    • कभी-कभी प्रश्न गणितीय प्रक्रियाओं पर होता है:
    • निम्न में से कौन-सी गणितीय प्रक्रिया नहीं है?
    • विकल्प: समस्या समाधान, दृश्यीकरण, निरूपण, अनुकूलन।
    • यहाँ अनुकूलन (adaptation) गणितीय नहीं, बल्कि जीवविज्ञान/विज्ञान से संबंधित है
    • इसलिए गणना योग्य नहीं । लेकिन संख्या पद्धति संदर्भ में अपरिमेय ही मुख्य उत्तर है।​
  • वास्तविक जीवन उदाहरण
    • π (3.14159...) का उपयोग वृत्त की परिधि में होता है, लेकिन सटीक मान कभी नहीं मिलता—हम 3.14 लेते हैं।
    • √7 ≈ 2.64575... अनंत दशमलव, गणना असंभव।
    • यही कारण है कि संख्या रेखा पर इन्हें सन्निकर्ष से निरूपित करते हैं।

2. निम्न में कौन-सा एक कंप्यूटर पद नहीं है? [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002-03]

Correct Answer: (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Solution:
  • कंप्यूटर दो प्रकार के होते हैं- (i) एनालॉग कंप्यूटर (ii) डिजिटल कंप्यूटर। कंप्यूटर बाइनरी भाषा (Binary Language) को समझता है।
  • कंप्यूटर की आई.सी. (चिप) (I.C.) सिलिका की बनी होती है।
  • कंप्यूटर मुख्यतः तीन मोड में कार्य करता है- (i) रियल मोड, (ii) प्रोटेक्टेड मोड तथा (iii) वर्चुअल रियल मोड ।
  • सामान्य विकल्प और उदाहरण
    • इन प्रश्नों के सामान्य विकल्प होते हैं: माइक्रोप्रोसेसर (Micro Processor), मिनी कंप्यूटर (Mini Computer), मेनफ्रेम (Mainframe), सुपर कंप्यूटर (Super Computer)।
    • इनमें माइक्रोप्रोसेसर एक कंप्यूटर का "पद" या प्रकार नहीं है, बल्कि यह कंप्यूटर का एक आंतरिक घटक (CPU का मुख्य चिप) है।
    • मिनी कंप्यूटर छोटे-मध्यम संगठनों के लिए मध्यम आकार का कंप्यूटर होता है
    • जबकि मेनफ्रेम बड़े डेटा प्रोसेसिंग के लिए और सुपर कंप्यूटर वैज्ञानिक गणनाओं के लिए होते हैं।
  • कंप्यूटर के मान्य पद/प्रकार (आकार के आधार पर)
    • कंप्यूटर को आकार और शक्ति के आधार पर निम्न मुख्य पदों में वर्गीकृत किया जाता है:
    • सुपर कंप्यूटर: सबसे शक्तिशाली, मौसम पूर्वानुमान, परमाणु अनुसंधान के लिए। उदाहरण: भारत का PARAM।
    • मेनफ्रेम कंप्यूटर: बड़े संगठनों (बैंक, एयरलाइंस) के लिए, हजारों यूजर्स संभालते हैं।
    • मिनी कंप्यूटर: मध्यम स्तर के कार्यों के लिए, जैसे लैब या छोटे बिजनेस।
    • माइक्रो कंप्यूटर: व्यक्तिगत उपयोग के लिए (PC, लैपटॉप)।
    • ये सभी पूर्ण प्रणालियां हैं, जबकि माइक्रोप्रोसेसर केवल एक प्रोसेसर चिप है जो इनमें लगा होता है।​
  • अन्य वर्गीकरण (कार्यप्रणाली के आधार पर)
    • एनालॉग कंप्यूटर: निरंतर डेटा (जैसे तापमान) मापने के लिए।
    • डिजिटल कंप्यूटर: असतत डेटा (0/1) पर आधारित, दैनिक उपयोग के लिए।
    • हाइब्रिड कंप्यूटर: दोनों का संयोजन, चिकित्सा उपकरणों में।
    • इनमें से कोई भी "पद नहीं" नहीं है; ये वैध श्रेणियां हैं।
  • क्यों माइक्रोप्रोसेसर गलत विकल्प है?
    • माइक्रोप्रोसेसर 1971 में इंटेल 4004 से विकसित हुआ, जो CPU का एकीकृत सर्किट है।
    • यह कंप्यूटर का हिस्सा है, न कि स्वतंत्र कंप्यूटर प्रकार। परीक्षाओं में यह ट्रिक प्रश्न होता है
    • जो घटक (component) और प्रकार (type) में भ्रम पैदा करता है।
    • यदि विकल्प अलग हों, जैसे "पेपर" या "समझ", तो वे स्पष्ट रूप से कंप्यूटर घटक या कार्य नहीं हैं।

3. डेटा रूपांतरण के साथ क्या सच नहीं है? [रेलवे एनटीपीसी ऑनलाइन परीक्षा, 19 अप्रैल, 2016 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) अन्य मॉड्यूल से डेटा प्राप्त करना
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में, अन्य मॉड्यूल से डेटा प्राप्त करना डेटा रूपांतरण के संबंध में सच नहीं है
  • क्योंकि इस प्रक्रिया (Process) में डेटा एक संस्करण (Version) से दूसरे संस्करण (Version) में अपग्रेड या कनवर्ट होता है।
  • अतः इस कार्य के लिए किसी अन्य मॉड्यूल से डेटा प्राप्त करने की आवश्यकता नहीं होगी बल्कि यह कार्य लेगासी सिस्टम के डेटा से होगा।
  • डेटा रूपांतरण क्या होता है?
    • डेटा रूपांतरण का मतलब है किसी डेटा को एक फॉर्मेट/संरचना से दूसरे फॉर्मेट/संरचना में बदलना ताकि उसे बेहतर तरह से समझा, प्रोसेस, स्टोर या विश्लेषित किया जा सके।
    • इसका उद्देश्य डेटा को सुलभ, सुरक्षित और एनालिसिस के लिए उपयुक्त बनाना होता है, सिर्फ़ “स्थान बदलना” नहीं।​
    • यह प्रक्रिया अकसर ETL (Extract–Transform–Load) का हिस्सा होती है, जहाँ:
    • Extract: अलग–अलग स्रोतों से डेटा निकालते हैं
    • Transform: उसे साफ़, बदला और संरचित करते हैं
    • Load: लक्ष्य सिस्टम (डेटा वेयरहाउस, रिपोर्टिंग सिस्टम) में लोड करते हैं​
  • उदाहरण:
    • आपके पास Excel में “DD/MM/YYYY” फॉर्मेट में तारीख़ें हैं
    • रिपोर्टिंग टूल को “YYYY-MM-DD” चाहिए, तो आप डेटा रूपांतरण करके तारीख़ का फॉर्मेट बदलते हैं।​
  • डेटा रूपांतरण से जुड़ी सही बातें
    • इन बातों को आम तौर पर “डेटा रूपांतरण के बारे में सत्य” माना जाता है:
  • पुरानी सिस्टम से डेटा प्राप्त करना
    • डेटा अक्सर पुराने लेगेसी सिस्टम, फ़ाइलों, या डेटाबेस से निकाला जाता है
    • फिर रूपांतरण कर के नए सिस्टम/डेटा मॉडल में फिट किया जाता है।​
    • यह डेटा माइग्रेशन प्रोजेक्ट्स में कॉमन स्टेप है, जहाँ पहले डेटा एक्स्ट्रैक्ट, फिर ट्रांसफॉर्म किया जाता है।​​
  • दूसरे मॉड्यूल या सिस्टम से डेटा प्राप्त करना
    • एक ही एंटरप्राइज़ के अलग–अलग मॉड्यूल (जैसे HR, Finance, Sales) अक्सर अलग डेटा स्ट्रक्चर रखते हैं; रूपांतरण के द्वारा इन्हें एक कॉमन फ़ॉर्मेट में लाया जाता है।
    • जैसे ERP के एक मॉड्यूल से डेटा लेकर BI (Business Intelligence) सिस्टम में भेजने से पहले डेटा को ट्रांसफॉर्म किया जाता है।​
  • मानक इम्पोर्ट प्रोग्राम या टूल का उपयोग हो सकता है
    • कई टूल/सॉफ्टवेयर (ETL, Power Query, Power BI आदि) में पहले से बने इम्पोर्ट व ट्रांसफॉर्मेशन फ़ंक्शन होते हैं
    • जिनका इस्तेमाल कर के डेटा को साफ़, मर्ज, स्प्लिट, एनकोड आदि किया जाता है।​​
    • ये टूल प्रक्रिया को ऑटोमेट और सरल बनाते हैं ताकि मैन्युअल गलती कम हो।

4. डेटा की इंटेग्रिटी (अखंडता) में बाधा आने का एक कारण है- [I.B.P.S. (Clerk) Exam. 14.12.2013, 15.12.2012]

Correct Answer: (e) डेटा की अतिरेकता
Solution:
  • डेटा की इंटेब्रिटी से आशय आंकड़ों की निरंतरता तथा उसकी शुद्धत्ता (Accuracy) से है।
  • डेटा की इंटेब्रिटी में बाधा आने का प्रमुख कारण, डेटा की अतिरेकता (Data Redundancy) है।
  • कैश फाइल्स के कारण कभी-कभी इसकी अखंडता में बाधा आने लगती है।
  • मुख्य कारण
    • डेटा अखंडता में बाधा का एक प्रमुख कारण हार्डवेयर विफलताएं हैं
    • जैसे डिस्क क्रैश या मेमोरी त्रुटियां, जो डेटा को भ्रष्ट (corrupt) कर सकती हैं।
    • इसके अलावा, सॉफ्टवेयर बग्स या प्रोग्रामिंग त्रुटियां भी डेटा को अमान्य बना देती हैं
    • खासकर जब डेटाबेस में गलत क्वेरी चलाई जाती है। मानवीय भूलें, जैसे गलत डेटा इनपुट या अनधिकृत संशोधन, भी आम समस्या हैं।
  • विस्तृत व्याख्या
  • तकनीकी विफलताएं
    • हार्डवेयर समस्याएं: सर्वर या स्टोरेज डिवाइस की खराबी से डेटा ब्लॉक खराब हो जाते हैं, जिससे पढ़ने-लिखने में त्रुटि आती है।
    • सॉफ्टवेयर त्रुटियां: DBMS (डेटाबेस मैनेजमेंट सिस्टम) में बग्स या अपडेट के दौरान कॉन्फ़िगरेशन गलतियां डेटा की असंगति पैदा करती हैं।
    • नेटवर्क इश्यू: डेटा ट्रांसमिशन के दौरान पैकेट लॉस या इंटरफेरेंस से डेटा बदल जाता है।
  • मानवीय कारक
    • त्रुटिपूर्ण इनपुट: उपयोगकर्ता द्वारा गलत डेटा दर्ज करना, जैसे गलत तारीख या अमान्य मान।
    • अनधिकृत पहुंच: हैकर्स या इंसाइडर थ्रेट्स द्वारा डेटा में छेड़छाड़, जो इंटेग्रिटी कंस्ट्रेंट्स को तोड़ती है।
    • प्रशिक्षण की कमी: ऑपरेटरों को प्रोटोकॉल न पता होने से संग्रहण प्रक्रिया में यादृच्छिक या व्यवस्थित त्रुटियां होती हैं।
  • बाहरी खतरनाकें
    • मैलवेयर और साइबर हमले: वायरस, रैनसमवेयर या SQL इंजेक्शन से डेटा दूषित हो जाता है।
    • प्राकृतिक आपदाएं: बाढ़, आग या बिजली कटौती से बैकअप सिस्टम फेल हो जाते हैं।
    • सिस्टम ओवरलोड: उच्च ट्रांजैक्शन वॉल्यूम से डेडलॉक या ट्रांजैक्शन रोलबैक में त्रुटि।​
  • प्रभाव और उदाहरण
    • डेटा अखंडता भंग होने पर निर्णय लेने में गलतियां होती हैं, जैसे बैंकिंग में गलत बैलेंस दिखना।
    • उदाहरणस्वरूप, एक ई-कॉमर्स डेटाबेस में स्टॉक काउंट गलत होने से ओवरसेलिंग हो जाती है।
    • DBMS में इंटेग्रिटी कंस्ट्रेंट्स (जैसे प्राइमरी की, फॉरेन की) इनकी रक्षा करते हैं, लेकिन उनकी कमी या उल्लंघन से समस्या बढ़ती है।
  • रोकथाम के उपाय
    • बैकअप और रिकवरी: नियमित बैकअप और RAID सिस्टम का उपयोग।
    • कंस्ट्रेंट्स लागू करना: NOT NULL, UNIQUE, CHECK कंस्ट्रेंट्स से अमान्य डेटा रोका जाता है।
    • एन्क्रिप्शन और ऑडिटिंग: चेकसम, हैशिंग और लॉगिंग से परिवर्तनों की निगरानी।
    • गुणवत्ता आश्वासन: डेटा संग्रह में मानकीकृत प्रोटोकॉल।

5. स्टोरेज की थोड़ी सी जगह में बहुत-सी फाइलों को स्टोर करने के लिए निम्न में से किसका प्रयोग किया जा सकता है? [I.B.P.S. (C.G.) 27.11.11 (Ε.Τ.)]

Correct Answer: (e) फाइल कम्प्रैशन
Solution:
  • यदि स्टोरेज में जगह कम हो और बहुत सी फाइलों को संचित (Store) करना हो, तो फाइलों को कम्प्रैस करके स्टोर करना ही उचित होता है।
  • कम्प्रेशन क्या है?
    • फाइल कम्प्रेशन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें फाइलों या डेटा के अंदर दोहराव (redundancy) या अनावश्यक हिस्सों को हटाकर उनका आकार घटाया जाता है।
    • इससे बिना गुणवत्ता खराब किए जगह बचाई जाती है। उदाहरण के लिए, एक 1 GB की वीडियो फाइल को कम्प्रेस करके 200-300 MB में बदल दिया जा सकता है।
  • यह दो प्रकार का होता है:
    • लॉसलेस कम्प्रेशन: मूल डेटा पूरी तरह बहाल हो जाता है, जैसे ZIP या PNG फॉर्मेट।
    • लॉसाई कम्प्रेशन: थोड़ी गुणवत्ता खो जाती है लेकिन आकार बहुत कम हो जाता है, जैसे JPEG या MP3।
  • कैसे काम करता है?
    • कम्प्रेशन एल्गोरिदम दोहराए जाने वाले पैटर्न को पहचानते हैं। जैसे, टेक्स्ट फाइल में "the" शब्द बार-बार आता है
    • तो उसे छोटे कोड से बदल दिया जाता है। इमेज में पड़ोसी पिक्सेल के समान रंगों को ग्रुप करके स्पेस बचाया जाता है। डीकम्प्रेशन पर सब उल्टा प्रोसेस हो जाता है।​
  • लोकप्रिय कम्प्रेशन टूल्स
    • ZIP: सबसे आम, विंडोज़ में बिल्ट-इन। कई फाइलों को एक साथ कम्प्रेस करता है।
    • RAR/7-Zip: ज्यादा कुशल, पासवर्ड प्रोटेक्शन के साथ।
    • GZIP: वेबसाइट्स पर पेज लोडिंग तेज करने के लिए।
    • ये टूल्स मुफ्त हैं और 90% तक स्पेस बचा सकते हैं।
  • फायदे
    • जगह की बचत: 10 GB डेटा को 2-3 GB में स्टोर।
    • ट्रांसफर स्पीड: ईमेल या क्लाउड पर तेज अपलोड/डाउनलोड।
    • बैकअप आसान: पुरानी ड्राइव में ज्यादा फिट।
    • कॉस्ट सेविंग: कम स्टोरेज हार्डवेयर खरीदें।
  • नुकसान सावधानियां
    • कम्प्रेशन CPU इस्तेमाल करता है, इसलिए पुराने कंप्यूटर पर धीमा।
    • लॉसाई में क्वालिटी लॉस हो सकता है अगर बार-बार कम्प्रेस करें।
    • हमेशा डीकम्प्रेस टेस्ट करें। एन्क्रिप्टेड ZIP सुरक्षित रहता है।​
  • अन्य विकल्प
    • यदि कम्प्रेशन न हो तो क्लाउड (Google Drive), डुप्लिकेट क्लीनर ऐप्स या फाइल सिस्टम ऑप्टिमाइजेशन (जैसे NTFS) आजमाएं
    • लेकिन कम्प्रेशन सबसे प्रभावी है सीमित लोकल स्पेस के लिए।

6. यदि किसी मौजूदा डाक्युमेंट को किसी दूसरे नाम से सेव करना हो, तो क्या करना चाहिए? [S.B.I. (C.G.) 08.11.09 (Ε.Τ.)]

Correct Answer: (b) सेव ऐज कमांड का प्रयोग करें
Solution:
  • किसी मौजूदा दस्तावेज (Document) को किसी दूसरे नाम से किसी ड्राइव, डेस्कटॉप या माई डाक्युमेंट में सेव करने के लिए सेव ऐज (Save As) कांड का प्रयोग करना चाहिए।
  • MS Word में प्रक्रिया
    • File टैब क्लिक करें।
    • Save As चुनें (या Ctrl + Shift + S शॉर्टकट दबाएँ)।
    • लोकेशन चुनें (जैसे Desktop या OneDrive)।
    • File Name फ़ील्ड में नया नाम लिखें, जैसे "नया_दस्तावेज़.docx"।
    • File Type में .docx या अन्य फ़ॉर्मेट चुनें यदि ज़रूरी हो।
    • Save पर क्लिक करें।
    • अब आपके पास मूल फ़ाइल के साथ-साथ नई फ़ाइल भी होगी।
    • यदि आप Excel या PowerPoint में हैं, तो प्रक्रिया समान है—File > Save As।
  • Google Docs में तरीका
    • दस्तावेज़ खोलें।
    • File > Download > Microsoft Word (.docx) चुनें।
    • या Version history > Name a version से नया वर्शन बनाएँ।
    • नए नाम से अपलोड या सेव करें।
    • यह क्लाउड-आधारित है, इसलिए ऑफ़लाइन सेव के लिए Download ज़रूरी।
  • अन्य सॉफ़्टवेयर में
    • Notepad/TextEdit: File > Save As, नया नाम चुनें।
    • Adobe Photoshop: Image > Duplicate या File > Save As।
    • Windows Explorer: फ़ाइल पर राइट-क्लिक > Copy > Paste as नया नाम।
    • Save As हमेशा मूल फ़ाइल को सुरक्षित रखता है, जबकि सामान्य Save बदलाव ओवरराइट करता है।​​
  • फायदे और सावधानियाँ
    • Save As से बैकअप आसान होता है और प्रयोग के लिए नई कॉपी मिलती है।
    • फ़ाइल नाम में विशेष अक्षर (/ \ : * ? ") न डालें, वरना त्रुटि आएगी।​
    • यदि फ़ाइल लॉक हो या परमिशन न हो, तो लोकेशन बदलें या Admin मोड में चलाएँ।
    • यह विधि सभी आधुनिक वर्ज़न (Word 2016-2021, Office 365) में काम करती है।​

7. अनुकरण एक प्रक्रिया है जिसमें- [D.M.R.C. परीक्षा, 2002]

Correct Answer: (c) वास्तविक भौतिक सिस्टम के सदृश क्रियाएं उत्पन्न करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम और प्रोग्राम का प्रयोग किया जाता है।
Solution:
  • अनुकरण प्रक्रिया (Simulation Process) में वास्तविक भौतिक सिस्टम (Physical System) के सदृश क्रियाएं उत्पन्न करने के लिए कंप्यूटर सिस्टम और प्रोग्राम का प्रयोग किया जाता है।
  • अनुकरण की परिभाषाएँ
    • अनुकरण को विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग ढंग से परिभाषित किया है।
    • मैक्डूगल के अनुसार, "एक व्यक्ति द्वारा दूसरों की क्रियाओं या शारीरिक गतिविधियों की नकल करने की प्रक्रिया को अनुकरण कहते हैं।
    • वहीं, कैज एवं शैन्क के मत में, "अनुकरण प्रेरणा और प्रतिक्रिया के बीच वह सम्बन्ध है
    • जिसमें प्रतिक्रिया प्रेरणा उत्पन्न करती है या उससे मिलती-जुलती होती है।
    • अल्बर्ट बँडुरा इसे परानुभव के माध्यम से ज्ञान प्राप्ति की प्रक्रिया मानते हैं
    • जिसमें ग्रहण, आत्मसातकरण और उत्क्षेपण की तीन अवस्थाएँ शामिल हैं।
  • अनुकरण की विशेषताएँ
    • अनुकरण कई विशिष्ट गुणों से युक्त होता है।
    • यह यांत्रिक और कार्यात्मक प्रक्रिया है, जिसमें व्यक्ति प्रयत्नपूर्वक दूसरे के व्यवहार की पुनरावृत्ति करता है।​
    • अधिगम की सरल तकनीक होने के कारण यह विशेष रूप से बच्चों में प्राकृतिक रूप से पाया जाता है।​
    • इसमें चेतन (जागरूक) और अचेतन (अवचेतन) दोनों रूप हो सकते हैं।​
    • तादात्मीकरण (समानता की भावना) भी इसमें निहित रहता है।​
  • अनुकरण के प्रकार
    • अनुकरण को मुख्य रूप से दो आधारों पर वर्गीकृत किया जाता है।
    • चेतन अनुकरण: जब व्यक्ति जानबूझकर किसी आकर्षक व्यवहार की नकल करता है, जैसे बच्चा शिक्षक की लेखन शैली अपनाता है।
    • अचेतन अनुकरण: बिना सोचे-समझे होने वाला अनुकरण, जैसे परिवार के सदस्यों की बोलचाल की आदतें अपनाना।​
    • इसके अतिरिक्त, भावनात्मक, बौद्धिक और मोटर अनुकरण जैसे प्रकार भी देखे जाते हैं।​
  • अनुकरण के नियम या सिद्धांत
    • अनुकरण की प्रक्रिया कुछ निश्चित नियमों पर आधारित होती है, जिन्हें गैब्रियल टार्ड ने प्रतिपादित किया।
    • ऊपर से नीचे की ओर: उच्च वर्ग या प्रभावशाली व्यक्ति (जैसे सेलिब्रिटी) का अनुकरण निम्न वर्ग करता है।
    • अंदर से बाहर की ओर: पहले परिवार और निकटतम समूह का, फिर बाहरी समाज का अनुकरण।
    • ज्यामितीय क्रम में: अनुकरण की गति तेजी से बढ़ती जाती है, जैसे फैशन ट्रेंड्स का प्रसार।​
    • इसके अलावा, पुरस्कृत व्यवहार का अनुकरण होता है
    • जबकि दंडित व्यवहार से बचा जाता है। प्रयत्न-त्रुटि के आधार पर ही अनुकरण सफल होता है।
  • अनुकरण का महत्व
    • अनुकरण शिक्षा और समाजीकरण में आधारभूत है। बच्चे भाषा, सामाजिक नियम, कौशल और नैतिक मूल्य इसी से सीखते हैं।
    • विद्यालयों में शिक्षक आदर्श बनकर छात्रों को गणित, विज्ञान या कला सिखाते हैं।
    • सामाजिक स्तर पर यह संस्कृति का संरक्षण करता है, लेकिन नकारात्मक व्यवहार (जैसे हिंसा) का प्रसार भी कर सकता है।
    • बँडुरा के सामाजिक अधिगम सिद्धांत में अनुकरण को केंद्रीय स्थान दिया गया है।
  • अनुकरण के लाभ और सीमाएँ
  • लाभ:
    • तेज और जोखिम-रहित अधिगम: बच्चे दूसरों के प्रयासों से सीखते हैं।
    • कौशल विकास: नृत्य, संगीत या खेल में उपयोगी।
    • सामाजिक अनुकूलन: समूह में घुलमिल जाना।​
  • सीमाएँ:
    • यांत्रिक होने से रचनात्मकता की कमी।
    • गलत आदर्शों का अनुसरण, जैसे अपराधी प्रवृत्ति।
    • व्यक्तिगत भिन्नताओं की अनदेखी।​
  • अनुकरण के उदाहरण
    • बच्चा माता-पिता की खाना पकाने की क्रिया देखकर सीखता है।
    • युवा अभिनेता की स्टाइल कॉपी करता है।

8. किसी कार्य को अंजाम देते समय CPU में बाधा डालने वाले सिग्नल जो कार्य के प्रारंभ अथवा समाप्त होने का द्योतक है, कहलाता है- [High Court RO/ARO Exam-2009]

Correct Answer: (d) व्यवधान
Solution:
  • व्यवधान (Interrupt) एक ऐसा इनपुट सिग्नल है, जो किसी कार्य को करते समय CPU को यह संकेत देता है
  • उस कार्य को रोककर किसी तत्काल आवश्यकता वाले कार्य को किया जाए।
  • Interrupts का उपयोग सामान्यतः हार्डवेयर डिवाइसों में इलेक्ट्रॉनिक या फिजिकल अवस्था परिवर्तनों (जिन पर ध्यान देने की आवश्यकता है
  • इंगित करने के लिए किया जाता है। इनका प्रयोग कंप्यूटर मल्टीटॉरिकग के क्रियान्वयन (Execution) (विशेषकर रियल टाइम कंप्यूटिंग) में व्यापक रूप से किया जाता है।
  • रुकावटें क्या हैं?
    • रुकावटें हार्डवेयर या सॉफ्टवेयर द्वारा उत्पन्न सिग्नल हैं जो CPU को सूचित करते हैं कि कोई महत्वपूर्ण घटना घटित हुई है
    • जैसे I/O डिवाइस से डेटा तैयार होना, टाइमर समाप्त होना या कोई त्रुटि। जब CPU किसी प्रोग्राम को निष्पादित कर रहा होता है
    • तब रुकावट आने पर वर्तमान कार्य को रोककर रुकावट सेवा रूटीन (Interrupt Service Routine - ISR) को चलाया जाता है।
    • कार्य पूरा होने पर CPU मूल प्रोग्राम पर लौट आता है। यह प्रक्रिया मल्टीटास्किंग और कुशल संसाधन उपयोग को संभव बनाती है।​
  • रुकावटों के प्रकार
    • रुकावटों को मुख्यतः तीन श्रेणियों में बांटा जाता है:
    • हार्डवेयर रुकावटें: बाहरी डिवाइस जैसे कीबोर्ड, माउस, डिस्क या प्रिंटर से उत्पन्न। उदाहरण: कीबोर्ड दबाने पर सिग्नल। ये कार्य प्रारंभ या समाप्ति का संकेत देते हैं।
    • सॉफ्टवेयर रुकावटें: प्रोग्राम द्वारा ट्रिगर की जाती हैं, जैसे डिवाइजन बाय जीरो या ट्रैप। ये सॉफ्टवेयर त्रुटियों या विशेष कॉल्स के लिए होती हैं।
    • अतंर्रुकाव रुकावटें (Exceptions): CPU आंतरिक रूप से उत्पन्न, जैसे पेज फॉल्ट या अवैध निर्देश।​
  • रुकावट कैसे कार्य करती हैं?
    • CPU निर्देश चक्र (Fetch-Decode-Execute) में कार्यरत रहता है। रुकावट आने पर:
    • CPU वर्तमान प्रोग्राम काउंटर (PC) और रजिस्टरों की स्थिति को स्टैक में सहेजता है।
    • रुकावट वेक्टर टेबल (Interrupt Vector Table) से ISR का पता प्राप्त करता है।
    • ISR निष्पादित होता है, जो संबंधित कार्य संभालता है (जैसे डेटा ट्रांसफर पूरा करना)।
    • ISR समाप्त होने पर IRET निर्देश से मूल स्थिति पुनर्स्थापित होती है।
    • यह प्रक्रिया वर्तमान निर्देश के पूर्ण निष्पादन के बाद ही शुरू होती है, ताकि डेटा अखंडता बनी रहे।
  • महत्व और लाभ
    • रुकावटें CPU को व्यस्त रखे बिना I/O कार्यों को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने में मदद करती हैं।
    • पोलिंग (Polling) विधि के विपरीत, जहां CPU बार-बार डिवाइस स्थिति जांचता है
    • रुकावटें केवल आवश्यकता पर सक्रिय होती हैं। इससे CPU उपयोगिता बढ़ती है
    • सिस्टम रिस्पॉन्स समय कम होता है। आधुनिक ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे Linux या Windows इन्हीं पर निर्भर हैं।​
  • उदाहरण
    • मान लीजिए डिस्क से डेटा पढ़ा जा रहा है। डिस्क नियंत्रक कार्य समाप्त होने पर हार्डवेयर रुकावट भेजता है।
    • CPU वर्तमान कार्य रोककर डेटा को मेमोरी में कॉपी करता है और फिर जारी रखता है।
    • इसी प्रकार, टाइमर रुकावट मल्टीटास्किंग के लिए कार्य स्विचिंग का संकेत देती है।

9. योजना बनाने में प्रयुक्त डेटा यंत्र प्रायः कहा जाता है- [Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2006]

Correct Answer: (a) योजना विश्लेषण यंत्र
Solution:
  • निर्णय विश्लेषण यंत्र (Decision Making Machine) एक प्रकार का यंत्र (Device) है
  • जिसमें किसी प्रकार के कार्य के लिए प्रयुक्त होने वाली योजना का विश्लेषण किया जाता है
  • जबकि योजना बनाने में प्रयुक्त डेटा यंत्र को योजना विश्लेषण यंत्र कहते हैं।
  • निर्णय विश्लेषण यंत्र क्या है?
    • निर्णय विश्लेषण यंत्र (Decision Analysis Tool) वे सॉफ्टवेयर या कंप्यूटर-आधारित सिस्टम हैं
    • जो योजना निर्माण के दौरान उपलब्ध डेटा को विश्लेषण करके विभिन्न विकल्पों का मूल्यांकन करते हैं
    • ये यंत्र डेटा को इनपुट के रूप में लेकर संभावित परिणामों, जोखिमों और लाभों की गणना करते हैं
    • जिससे योजना अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी बनती है।
    • उदाहरणस्वरूप, व्यवसायिक योजनाओं, सरकारी नीतियों या परियोजना प्रबंधन में ये उपयोगी होते हैं।
  • योजना निर्माण में इसकी भूमिका
    • योजना बनाने के प्रक्रिया में डेटा यंत्र का उपयोग डेटा संग्रह, विश्लेषण और पूर्वानुमान के लिए किया जाता है।
    • सरकारी स्तर पर, जैसे भारत में पंचवर्षीय योजनाओं या विकास परियोजनाओं में, ये यंत्र आंकड़ों को संसाधित करके संसाधनों का इष्टतम आवंटन सुनिश्चित करते हैं।
    • निजी क्षेत्र में, ये मार्केट ट्रेंड्स, वित्तीय मॉडलिंग और जोखिम मूल्यांकन के लिए प्रयुक्त होते हैं, जिससे निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज और सटीक हो जाती है।
  • कार्यप्रणाली और उदाहरण
    • ये यंत्र मूल रूप से हार्ड डिस्क पर निवेश-निर्गम प्रणाली पर कार्य करते हैं
    • जहां डेटा को प्रोसेस करके ग्राफ, चार्ट या रिपोर्ट उत्पन्न की जाती है।
    • उदाहरण 1: एनालॉग कंप्यूटर कारों में गति मापक के रूप में कार्य करते हैं, जो वास्तविक समय डेटा से योजना (जैसे ड्राइविंग रणनीति) बनाते हैं।​
    • उदाहरण 2: आधुनिक सॉफ्टवेयर जैसे MS Project या Gantt चार्ट टूल्स, जो परियोजना की समयरेखा और संसाधनों की योजना बनाते हैं।​
    • उदाहरण 3: परिवार नियोजन या स्वास्थ्य योजनाओं में डेटा विश्लेषण से उपलब्धि स्तर (ELA) की निगरानी।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएं
    • डेटा प्रबंधन: प्राथमिक और द्वितीयक डेटा को संग्रहित और विश्लेषित करना।
    • विश्वसनीयता: सटीक डेटा पर आधारित पूर्वानुमान, जो योजना की सफलता सुनिश्चित करता है।​
    • लागत प्रभावी: कम संसाधनों में जटिल गणनाएं, जैसे आर्थिक पूर्वानुमान या उत्पादन नियंत्रण।

10. सूचना प्रौद्योगिकी (संशोधन) अधिनियम, 2008, 27 अक्टूबर.... को लागू हुआ। [उ.प्र. पुलिस कांस्टेबिल पुनर्परीक्षा 26 अक्टूबर, 2018 (1-पॉली)]

Correct Answer: (a) 2009
Solution:
  • सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) अधिनियम, 2008, 27 अक्टूबर, 2009 को प्रभावी हुआ।
  • पारित और अधिसूचना की प्रक्रिया
    • यह अधिनियम 22 दिसंबर 2008 को लोकसभा में बिना बहस के पारित हुआ
    • 23 दिसंबर 2008 को राज्यसभा से स्वीकृति मिली। 5 फरवरी 2009 को राष्ट्रपति की सहमति के बाद इसे अधिनियमित किया गया, लेकिन पूर्ण प्रवर्तन 27 अक्टूबर 2009 को हुआ।
    • मूल अधिनियम 17 अक्टूबर 2000 से प्रभावी था, जो इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन और डिजिटल हस्ताक्षरों को कानूनी मान्यता देता था।
    • संशोधन ने साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए व्यापक बदलाव किए।
  • प्रमुख संशोधन और नई धाराएँ
    • संशोधन ने साइबर सुरक्षा पर विशेष जोर दिया, जिसमें साइबर आतंकवाद (धारा 66F) और डेटा संरक्षण संबंधी प्रावधान जोड़े गए।
    • इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर' शब्द को पेश किया गया, जो डिजिटल हस्ताक्षर की जगह लेता है।
    • नई धाराएँ जैसे धारा 66A (अपमानजनक जानकारी भेजना, बाद में असंवैधानिक घोषित), 69 (सूचना अवरोधन), 69A (ब्लॉकिंग ऑफ़ कंटेंट), 69B (मॉनिटरिंग एजेंसी) जोड़ी गईं।
    • यह अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों से निपटने के लिए भी विस्तारित हुआ।
    • जांच प्रक्रिया में बदलाव आया, जहाँ डीएसपी स्तर से इंस्पेक्टर तक जांच का अधिकार दिया गया। कॉर्पोरेट डेटा सुरक्षा (धारा 43A) और मुआवजे के प्रावधान मजबूत किए गए।​
  • उद्देश्य और प्रभाव
    • अधिनियम का मुख्य लक्ष्य साइबर अपराधों से निपटना, डेटा गोपनीयता सुनिश्चित करना और ई-गवर्नेंस को बढ़ावा देना था।
    • इसने मध्यस्थों (इंटरमीडियरीज़) की जिम्मेदारी बढ़ाई, जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को कंटेंट हटाने के निर्देश।
    • IT अधिनियम 2000 के तहत 7 अपराध थे, जबकि संशोधन ने इन्हें 17 तक बढ़ाया। सजा में उम्रकैद तक के प्रावधान साइबर आतंकवाद के लिए जोड़े गए।​
  • विवाद और बाद के विकास
    • धारा 66A पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होने के कारण 2015 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे असंवैधानिक घोषित किया।
    • अधिनियम ने डिजिटल इंडिया को गति दी, लेकिन डेटा प्राइवेसी के लिए बाद में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 आया।​