कंप्यूटर : एक परिचय (Part – IV)

Total Questions: 50

11. उस नई तकनीक को क्या कहते हैं, जो एक कृत्रिम दुनिया के सृजन की क्षमता प्रदान करती है और उसमें लोग परस्पर अंतःक्रिया भी करने लगते हैं? [S.S.C. CPO परीक्षा, 2011]

Correct Answer: (b) आभासी वास्तविकता
Solution:
  • आभासी वास्तविकता (Virtual Reality) यह तकनीक है, जो एक कृत्रिम दुनिया के सूजन की क्षमता प्रदान करती है और उसमें लोग परस्पर अंतः क्रिया भी करने लगते हैं।
  • VR क्या है?
    • जो वास्तविक दुनिया की नकल करता है। यह हेडसेट, सेंसर और कंट्रोलर जैसे हार्डवेयर के माध्यम से उपयोगकर्ता को यह अनुभव कराती है
    • वे उस कृत्रिम दुनिया में मौजूद हैं। उपयोगकर्ता न केवल देख सकते हैं, बल्कि चल सकते हैं, वस्तुओं को छू सकते हैं और अन्य लोगों के साथ बातचीत भी कर सकते हैं।​
  • VR कैसे काम करती है?
    • VR सिस्टम में मुख्य रूप से तीन तत्व होते हैं: हेड-माउंटेड डिस्प्ले (HMD) जो आंखों के सामने 360-डिग्री इमेज दिखाता है
    • मोशन ट्रैकर्स जो सिर और हाथों की गतिविधियों को कैप्चर करते हैं, तथा कंप्यूटिंग सॉफ्टवेयर जो रीयल-टाइम में पर्यावरण को अपडेट करता है।
    • स्टीरियोस्कोपिक विजन और स्पेशियल ऑडियो से गहराई और ध्वनि का भ्रम पैदा होता है।
    • उदाहरणस्वरूप, Oculus Quest या PlayStation VR जैसे डिवाइस इस तकनीक पर आधारित हैं।​
  • VR के उपयोग
    • गेमिंग और मनोरंजन: Fortnite या Beat Saber जैसे गेम्स में खिलाड़ी पूरी दुनिया में खो जाते हैं।
    • शिक्षा और प्रशिक्षण: मेडिकल छात्र सर्जरी का अभ्यास करते हैं बिना रोगी को जोखिम में डाले; NASA अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के लिए VR का उपयोग करता है।
    • चिकित्सा: PTSD या फोबिया के इलाज में VR थेरेपी प्रभावी है, जहां मरीज नियंत्रित वातावरण में सामना करते हैं।
    • रियल एस्टेट: खरीदार घरों को वर्चुअल टूर ले सकते हैं बिना वहां जाएं।
    • सामाजिक अंतर्क्रिया: VRChat या Horizon Worlds जैसे प्लेटफॉर्म पर लोग अवतार बनाकर मिलते-जुलते हैं।​
  • VR का इतिहास
    • 1960 के दशक में इवान सUTHERLAND ने पहला HMD बनाया
    • लेकिन व्यावसायिक सफलता 2010 के बाद आई जब Oculus Rift ने क्राउडफंडिंग से धूम मचाई।
    • 2016 में Oculus Rift, HTC Vive और PlayStation VR लॉन्च हुए।
    • 2026 तक, Apple Vision Pro और Meta Quest 4 जैसे डिवाइस ने इसे मुख्यधारा बना दिया है।​
  • 2026 में VR की प्रगति
    • CES 2026 में VR ने humanoid robots और AI के साथ एकीकरण दिखाया
    • जहां उपयोगकर्ता कृत्रिम दुनिया से रोबोट्स को नियंत्रित कर सकते हैं।
    • Neuralink जैसी तकनीकें ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस जोड़ रही हैं
    • जिससे विचारों से ही VR में घूमना संभव हो रहा है। भारत में JioGlass AR/VR हाइब्रिड मुख्यधारा में आया है।​​
  • चुनौतियां
    • VR से मोशन सिकनेस, हाई लागत (₹20,000 से ₹1 लाख) और प्राइवेसी मुद्दे आते हैं।
    • लंबे उपयोग से आंखों पर तनाव भी पड़ता है।
    • भविष्य में 8K रेजोल्यूशन और हल्के हेडसेट इन समस्याओं को हल करेंगे।​
  • भविष्य की संभावनाएं
    • 2026-2027 तक Metaverse पूरी तरह विकसित होगा, जहां काम, शिक्षा और सामाजिक जीवन VR में शिफ्ट हो जाएगा।
    • AI से उत्पन्न कंटेंट रीयल-टाइम बदलेगा, जैसे व्यक्तिगत कहानियां।
    • भारत सरकार AI Impact Summit 2026 में VR को शिक्षा के लिए बढ़ावा दे रही है।​

12. Blue Pacific क्या है? [R.R.B. गोपाल (S.C./E.C.R.C.) परीक्षा, 2006]

Correct Answer: (a) कंप्यूटर
Solution:
  • ASCI ब्लू पैसिफिक आई.बी.एम. द्वारा निर्मित सुपर कंप्यूटर है। इसे वर्ष 1998 में बनाया गया था।
  • उत्पत्ति और परिभाषा
    • Blue Pacific शब्द की शुरुआत 2017 में समोआ में पैसिफिक आइलैंड्स फोरम (PIF) में हुई थी।
    • यह प्रशांत महासागर के लगभग 30 मिलियन वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को कवर करता है, जिसमें 14 राष्ट्र, हजारों द्वीप और करीब 30 लाख लोग शामिल हैं।
    • यह अवधारणा द्वीपों को छोटे भौगोलिक क्षेत्रों के बजाय विशाल "समुद्री महाद्वीप" के रूप में देखती है, जो साझा संस्कृति, भूगोल और चुनौतियों से जुड़े हैं।​​
    • PIF इसकी मुख्य संस्था है, जो जलवायु परिवर्तन, भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा और सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करती है।​
  • प्रमुख चुनौतियाँ
    • क्षेत्र जलवायु परिवर्तन से बुरी तरह प्रभावित है, जैसे समुद्र स्तर वृद्धि और तूफान, जो छोटे द्वीपों को निगल सकती है।
    • अतिशय मछली पकड़ना, समुद्री प्रदूषण और आर्थिक विकास की कमी अन्य मुद्दे हैं।​
    • चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा ने इसे रणनीतिक बना दिया है, जहां सोलोमन आइलैंड्स जैसे समझौते चिंता बढ़ाते हैं।​
  • वैश्विक महत्व
    • Blue Pacific प्रशांत द्वीप राष्ट्रों को वैश्विक मंचों पर एकजुट आवाज देता है, जहां वे अक्सर उपेक्षित रहते हैं।​
    • यह समुद्री संसाधनों, व्यापार मार्गों और प्राकृतिक संसाधनों (जैसे खनिज) के कारण महत्वपूर्ण है, जो पश्चिमी प्रशांत संकट (जैसे ताइवान) में भूमिका निभा सकता है।​
    • 2022 से अमेरिका ने BLUE Pacific Act जैसे कदम उठाए, जो सुरक्षा, व्यापार और क्षमता निर्माण पर जोर देते हैं।​
  • साझेदारियाँ और भविष्य
    • EU, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और हाल ही में भारत जैसे देश सहयोग बढ़ा रहे हैं—जैसे जलवायु अनुकूलन, समुद्री सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था।
    • भारत की "ग्रीन सागर" विजन और इंडो-पैसिफिक ओशन इनिशिएटिव Blue Pacific के साथ मेल खाती है, जो संप्रभुता और पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित है।​

13. _______अत्यधिक सूक्ष्म स्तर पर डिवाइसों का निर्माण करने हेतु नैनो स्ट्रक्चर्स के प्रयोग पर विचार करता है। [IBPS BANK CLERK EXAM-2017 (Online)]

Correct Answer: (a) नैनो टेक्नोलॉजी
Solution:
  • नैनो टेक्नोलॉजी अत्यधिक सूक्ष्म स्तर पर उपकरणों (Devices) का निर्माण करने हेतु नैनो स्ट्रक्चर्स के प्रयोग पर विचार करता है।
  • नैनोस्ट्रक्चर्स क्या हैं?
    •  जैसे नैनोट्यूब्स, नैनोवायर्स, नैनोपार्टिकल्स और क्वांटम डॉट्स।
    • इनकी अनोखी गुणधर्में—जैसे बढ़ी हुई मजबूती, विद्युत चालकता या प्रतिक्रियाशीलता—नैनोस्केल पर सतह क्षेत्र और क्वांटम प्रभावों के कारण उत्पन्न होती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, कार्बन नैनोट्यूब्स स्टील से 100 गुना मजबूत होते हैं।
  • निर्माण विधियां
    • नैनोस्ट्रक्चर्स के निर्माण के दो मुख्य दृष्टिकोण हैं:
    • टॉप-डाउन अप्रोच: बड़ी सामग्री को काटकर या उत्क्लंभन द्वारा छोटा बनाना, जैसे फोटोलिथोग्राफी या इलेक्ट्रॉन बीम लिथोग्राफी।
    • यह इंटीग्रेटेड सर्किट्स में 130 नैनोमीटर तक संरचनाएं बनाने के लिए उपयोगी है।​
    • बॉटम-अप अप्रोच: परमाणुओं या अणुओं को जोड़कर निर्माण, जैसे रासायनिक वाष्प संश्लेषण (CVD) या स्व-संयोजन।
    • यह आणविक सटीकता प्रदान करता है और क्वांटम कंप्यूटिंग डिवाइसों के लिए आदर्श है।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स में अनुप्रयोग
    • नैनोस्ट्रक्चर्स सीपीयू ट्रांजिस्टरों को 2-5 नैनोमीटर तक छोटा बनाते हैं, जिससे गति बढ़ती है और ऊर्जा खपत घटती है।
    • नैनोचिप्स स्मार्टफोन्स, लैपटॉप्स में प्रयुक्त होते हैं
    • जबकि नैनोट्यूब्स लचीले डिस्प्ले और उच्च-क्षमता बैटरी बनाते हैं। क्वांटम डॉट्स LED और सेंसरों में रंग सटीकता बढ़ाते हैं।
  • चिकित्सा क्षेत्र में उपयोग
    • नैनोस्ट्रक्चर्स से बायोसेंसर, लक्षित दवा वितरण प्रणाली और इम्प्लांटेबल डिवाइस जैसे पेसमेकर बनते हैं।
    • नैनोरॉबोट्स कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर सकते हैं
    • बिना स्वस्थ ऊतकों को हानि पहुंचाए। नैनोपार्टिकल्स दवाओं की घुलनशीलता बढ़ाते हैं।
  • अन्य उद्योगों में लाभ
    • ऑटोमोटिव: नैनोकोटिंग्स संक्षारण प्रतिरोध बढ़ाती हैं, ईंधन दक्षता सुधारती हैं।
    • ऊर्जा: नैनोस्ट्रक्चर्स सौर सेल दक्षता को 40% तक ले जाते हैं।​
    • पर्यावरण: नैनोफिल्टर्स जल शुद्धिकरण में भारी धातुओं को हटाते हैं।​
  • चुनौतियां और भविष्य
    • निर्माण में उच्च लागत, विषाक्तता जोखिम और नियामक मुद्दे बाधाएं हैं।
    • फिर भी, 2026 तक नैनोचिप्स और डिवाइसों का व्यावसायीकरण बढ़ेगा। भारत का नैनोमिशन इन क्षेत्रों में निवेश कर रहा है।

14. कंप्यूटर के क्षेत्र में उभर रही नवीन प्रौद्योगिकी है- [S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-I) परीक्षा, 2014]

Correct Answer: (b) पैरेलल प्रोसेसिंग सिस्टम
Solution:
  • दिए गए विकल्पों में से कंप्यूटर के क्षेत्र में उभर रही नवीन प्रौद्योगिकी पैरेलल प्रोसेसिंग सिस्टम (Parallel Processing System) है।
  • क्वांटम कंप्यूटिंग
    • क्वांटम कंप्यूटिंग पारंपरिक बिट्स के बजाय क्यूबिट्स का उपयोग करती है
    • जो सुपरपोजिशन और एंटैंगलमेंट के सिद्धांतों पर काम करती हैं।
    • इससे जटिल समस्याएँ जैसे दवा खोज, क्रिप्टोग्राफी और जलवायु मॉडलिंग कुछ मिनटों में हल हो सकती हैं
    • जबकि सामान्य कंप्यूटरों को इसके लिए ब्रह्मांड की उम्र जितना समय लगे।
    • 2026 तक, गूगल का विलो चिप जैसे विकास क्वांटम को व्यावसायिक रूप से उपयोगी बना देंगे।​
  • एज एआई और क्लाउड एआई
    • एज एआई डेटा प्रोसेसिंग को डिवाइस स्तर पर ले जाती है, जिससे देरी कम होती है और गोपनीयता बढ़ती है
    • स्मार्ट सिटीज़ और ऑटोनॉमस वाहनों के लिए आदर्श। क्लाउड एआई बड़े डेटा पर निर्भर है
    • लेकिन 2026 में एज का बोलबाला होगा, जैसे humanoid रोबोट्स (टेस्ला ऑप्टिमस) में। यह 70% कार्यों को स्वचालित कर सकता है।​
  • जनरेटिव एआई और एआई एजेंट्स
    • जनरेटिव एआई (जैसे चैटजीपीटी के उत्तराधिकारी) कंटेंट, कोड और डिज़ाइन जनरेट करती है।
    • 2026 में Devin AI जैसे एजेंट्स स्वायत्त रूप से प्रोजेक्ट्स पूरा करेंगे, low-code/no-code प्लेटफॉर्म्स के साथ।
    • कार्यस्थलों में 'सिमेंटिक आर्किटेक्ट' जैसे नए रोल उभरेंगे, जहाँ मानवीय समझ AI को निर्देशित करेगी।​​
  • न्यूरालिंक और वियरेबल्स
    • न्यूरालिंक ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस मस्तिष्क को सीधे डिवाइसेस से जोड़ता है
    • जिससे विचारों से नियंत्रण संभव होगा।
    • AR ग्लासेज़ और एडवांस्ड वियरेबल्स स्वास्थ्य मॉनिटरिंग और वर्चुअल रियलिटी को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएंगे।​
  • कोबोट्स और पॉली-फंक्शनल रोबोट्स
    • कोबोट्स मनुष्यों के साथ सहयोग करते हैं, जैसे BMW फैक्ट्रियों में। 2026 में ये 40+ उद्योगों को प्रभावित करेंगे
    • उत्पादकता बढ़ाते हुए। क्वांटम एकेलरेटेड कंप्यूटिंग इनकी ऑप्टिमाइज़ेशन करेगी।
  • कार्बन नैनोट्यूब ट्रांजिस्टर
    • सिलिकॉन ट्रांजिस्टरों की जगह कार्बन नैनोट्यूब छोटे, शक्तिशाली और ऊर्जा-कुशल डिवाइसेस बनाते हैं
    • स्मार्टफोन से सुपरकंप्यूटर तक। स्टैनफोर्ड के 2013 प्रयोग से यह व्यावसायिक हो रहा है।​

15. भारत में सूचना क्रांति के जनक माने जाते हैं-

Correct Answer: (a) राजीव गांधी
Solution:
  • भारत में सूचना क्रांति का जनक राजीव गांधी को माना जाता है।
  • राजीव गांधी का योगदान
    • राजीव गांधी ने 1984 में प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया।
    • उन्होंने कंप्यूटर को प्रतिबंधित विषय मानने वाली नीतियों को समाप्त कर इसे आम लोगों तक पहुंचाया, जिससे आईटी क्षेत्र में क्रांति आई।
    • उनके नेतृत्व में 1984 में सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (C-DOT) की स्थापना हुई
    • जो स्वदेशी दूरसंचार तकनीक विकसित करने का केंद्र बना। इससे ग्रामीण क्षेत्रों तक टेलीफोन पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त हुआ।
    • राजीव गांधी ने सैम पित्रोदा को संचार प्रौद्योगिकी सलाहकार नियुक्त किया, जिन्होंने कंप्यूटरीकरण और दूरसंचार नेटवर्क को मजबूत किया।
    • 1986 में राष्ट्रीय सूचना नीति लागू कर उन्होंने 21वीं सदी को आईटी का युग बनाने का सपना देखा।
  • अन्य प्रमुख नाम
    • कुछ संदर्भों में रंगास्वामी नरसिम्हन को भारत में कंप्यूटर विज्ञान का जनक कहा जाता है
    • क्योंकि उनके नेतृत्व में 1950-60 के दशक में TIFRAC (भारत का पहला स्वदेशी कंप्यूटर) विकसित हुआ। हालांकि, यह हार्डवेयर-केंद्रित था, न कि व्यापक सूचना क्रांति।​
    • सैम पित्रोदा को भी भारतीय सूचना क्रांति का जनक माना जाता है
    • खासकर दूरसंचार क्रांति के लिए, लेकिन वे राजीव गांधी के सलाहकार थे।​
  • प्रमुख पहलें और प्रभाव
    • राजीव गांधी के कार्यकाल में ये कदम उठाए गए:
    • कंप्यूटर आयात पर प्रतिबंध हटाया: 1984-85 में विदेशी कंप्यूटरों को अनुमति दी, जिससे सॉफ्टवेयर उद्योग फला-फूला।
    • पंचायती राज और सूचना प्रौद्योगिकी: 73वें-74वें संशोधन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर तकनीक का उपयोग बढ़ाया।
    • सॉफ्टवेयर निर्यात नीति: 1986 में सॉफ्टवेयर को निर्यात-उन्मुख उद्योग बनाया, जो 1990 के बाद भारत को आईटी हब बना गया।
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • 1980 के दशक में भारत आर्थिक संकट में था, लेकिन राजीव गांधी ने युवा ऊर्जा से प्रेरित होकर तकनीक को प्राथमिकता दी।
    • उनके शासन में भारत ने वैश्विक स्तर पर आईटी में पहचान बनाई, जो आज बेंगलुरु, हैदराबाद जैसे आईटी हब्स के रूप में दिखता है। 1991 के उदारीकरण ने इसे और गति दी।
    • उन्हें "डिजिटल इंडिया के वास्तुकार" भी कहा जाता है
    • क्योंकि उनकी नीतियां वर्तमान डिजिटल इंडिया अभियान की नींव बनीं। 1998 में भारत सरकार ने आईटी को "भविष्य" घोषित किया।​
  • विवाद और विरासत
    • कुछ आलोचक मानते हैं कि क्रांति का श्रेय सैम पित्रोदा या नरसिम्हन को अधिक मिलना चाहिए
    • लेकिन राजनीतिक नेतृत्व के कारण राजीव गांधी को यह उपाधि प्रमुखता से मिली।
    • आज भी कांग्रेस और समर्थक उन्हें सूचना क्रांति के जनक के रूप में याद करते है
    • जबकि तकनीकी इतिहासकार हार्डवेयर योगदान को अलग मानते हैं।​​

16. विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का अधिकाधिक उपयोग रणनीति है- [U.P. Lower Sub. (Pre) 1998]

Correct Answer: (d) आंध्र प्रदेश सरकार की
Solution:
  • विकास के लिए सूचना प्रौद्योगिकी (Information Technology) का अधिकाधिक उपयोग रणनीति आंध्र प्रदेश सरकार की है
  • जो श्री चंद्रबाबू नायडू (Chandrababu Naidu) के मुख्यमंत्रित्व काल (1999-2004) में प्रारंभ की गई थी।
  • आईटी की प्रमुख भूमिका
    • सूचना प्रौद्योगिकी विकास प्रक्रिया को गति प्रदान करती है क्योंकि यह सूचना के प्रवाह को तेज, सस्ता और व्यापक बनाती है।
    • उदाहरणस्वरूप, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) जैसे UPI और आधार ने वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया है
    • जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बैंकिंग सेवाएं पहुंच गई हैं। इसके अलावा, AI-संचालित शासन प्रणालियां कल्याण योजनाओं में रिसाव को कम करती हैं
    • नीति कार्यान्वयन को वास्तविक समय में प्रभावी बनाती हैं।
  • आर्थिक विकास में योगदान
    • आईटी आर्थिक वृद्धि का इंजन है, जो नई नौकरियां सृजित करती है और उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाती है।
    • भारत में आईटी क्षेत्र ने निर्यात को बढ़ाया है और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत किया
    • जिससे जीडीपी में योगदान 8-10% तक पहुंच गया।
    • क्लाउड कंप्यूटिंग, AI और मशीन लर्निंग जैसी तकनीकें कृषि, विनिर्माण और ई-कॉमर्स में उत्पादकता बढ़ाती हैं
    • जिससे छोटे व्यवसाय भी वैश्विक बाजार से जुड़ पाते हैं।
  • सामाजिक विकास के आयाम
    • शिक्षा: ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म जैसे SWAYAM और DIKSHA ने दूरदराज के क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाई, डिजिटल विभाजन को कम किया।
    • स्वास्थ्य: टेलीमेडिसिन और AI-आधारित डायग्नोस्टिक्स ने महामारी जैसी स्थितियों में सेवाओं को विस्तारित किया।
    • कृषि: डिजिटल मार्केटप्लेस (e-NAM) और ड्रोन तकनीक ने किसानों को सटीक खेती और बेहतर मूल्य प्रदान किए।
  • शासन और प्रशासन में परिवर्तन
    • आईटी ने पारदर्शिता बढ़ाई है, जैसे डिजिटल इंडिया पहल के तहत डिजिटल लॉकर और ई-गवर्नेंस ने भ्रष्टाचार रोका।
    • वियतनाम जैसे देशों की तरह भारत भी डिजिटल सरकार, अर्थव्यवस्था और समाज निर्माण पर जोर दे रहा है
    • जहां बिग डेटा और AI निर्णय लेने को मजबूत करते हैं। यह रणनीति राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती है।
  • चुनौतियां और समाधान
    • ये चुनौतियां हैं, लेकिन टीआईएफपी जैसे कार्यक्रम स्थानीय क्षमता निर्माण पर केंद्रित हैं।​
  • भारत की रणनीतिक पहलें
    • भारत का टेकेड (2021-2030) विजन आईटी को विकास का आधार बनाता है
    • जिसमें DPI का विस्तार स्वास्थ्य, शिक्षा तक हो रहा है।
    • अनुसंधान-विकास में निवेश, ओपन सोर्स तकनीक और स्वदेशी सामग्री पर जोर से भारत वैश्विक दक्षिण का नेता बन रहा है।
    • निजी-सरकारी साझेदारी से स्थानीय समाधान विकसित हो रहे हैं।
  • भविष्य की संभावनाएं
    • आईटी का अधिकाधिक उपयोग सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को प्राप्त करने में सहायक होगा।
    • 2030 तक डिजिटल अर्थव्यवस्था $1 ट्रिलियन तक पहुंच सकती है
    • बशर्ते समावेशी नीतियां अपनाई जाएं। यह रणनीति न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक न्याय भी सुनिश्चित करेगी।

17. डेटा के प्रेषण की गति को मापने के लिए सामान्यतः प्रयुक्त एकक है- [S.S.C. संयुक्त स्नातक स्तरीय (Tier-I) परीक्षा, 2011]

Correct Answer: (c) बिट प्रति सेकंड
Solution:
  • डेटा के प्रेषण की गति बिट प्रति सेकंड (bps) में मापी जाती है।
  • यह डिजिटल संचार में डेटा ट्रांसमिशन की मूलभूत इकाई है, जो प्रति सेकंड भेजे या प्राप्त किए जाने वाले बिट्स की संख्या को दर्शाता है।
  • bps क्या है?
    • बिट प्रति सेकंड (bits per second) डेटा ट्रांसमिशन की सबसे छोटी और बुनियादी इकाई है।
    • एक बिट या तो 0 या 1 का मान रखता है, और bps बताता है कि एक सेकंड में कितने ऐसे बिट्स का प्रवाह हो रहा है।
    • उदाहरण के लिए, 56 kbps का मतलब है 56,000 बिट्स प्रति सेकंड। यह इकाई 1960 के दशक से नेटवर्किंग और कंप्यूटर संचार में मानक है।
  • उच्चतर एकक
    • Kbps (Kilobits per second): 1 kbps = 1,000 bps। पुराने डायल-अप मॉडेम जैसे 56 kbps इसी में मापे जाते थे।
    • Mbps (Megabits per second): 1 Mbps = 1,000 kbps या 1 मिलियन bps। ब्रॉडबैंड इंटरनेट (जैसे 100 Mbps) इसी का उपयोग करते हैं।
    • Gbps (Gigabits per second): 1 Gbps = 1,000 Mbps। फाइबर ऑप्टिक नेटवर्क और 5G में आम।
    • Tbps (Terabits per second): आधुनिक डेटा सेंटर्स में उपयोग, 1 Tbps = 1,000 Gbps।
    • ये एकक बाइनरी प्रणाली पर आधारित हैं, जहां 'k' = 10^3, 'M' = 10^6, आदि।
    • कभी-कभी 'Ki' (kibibits = 2^10 = 1,024) का उपयोग होता है, लेकिन सामान्यतः दशमलव प्रणाली प्रचलित है।​
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • डायल-अप: 56 kbps – धीमा, वेब पेज लोड में मिनट लगते।
    • ब्रॉडबैंड: 100 Mbps – HD वीडियो स्ट्रीमिंग आसान।
    • फाइबर: 1 Gbps+ – 4K स्ट्रीमिंग, क्लाउड गेमिंग।
    • 5G: 10 Gbps तक – रियल-टाइम VR/AR संभव। उच्च गति मल्टीमीडिया, क्लाउड कंप्यूटिंग के लिए जरूरी।
  • महत्व और प्रभाव
    • ट्रांसमिशन गति नेटवर्क लेटेंसी, बैंडविड्थ और माध्यम (कॉपर, फाइबर, वायरलेस) पर निर्भर करती है।
    • उच्च bps से डेटा लॉस कम होता है, विशेषकर IoT, AI और बिग डेटा में। भारत में Jio/Airtel के 5G में 1 Gbps+ स्पीड आम।​
  • सीमाएँ
    • थ्रूपुट vs स्पीड: bps अधिकतम क्षमता है; वास्तविक गति ओवरहेड से कम।
    • बिट vs बाइट: कभी भ्रम—Mbps इंटरनेट स्पीड बिट्स में, MB/s डाउनलोड बाइट्स में।

18. बैंकों में पहली बार कंप्यूटर पर आधारित 'ऑटोमेटेड टेलर मशीन' यानी 'एटीएम' का प्रयोग कब हुआ? [R.B.I. (Asst.) Exam. 21.07.2013]

Correct Answer: (a) 1970 में
Solution:
  • बैंकों में पहली बार कंप्यूटर पर आधारित 'ऑटोमेटेड टेलर मशीन' (ATM) का प्रयोग 27 जून, 1967 को उत्तरी लंदन के बारक्लेज बैंक (Barclay's Bank) में हुआ था।
  • विश्व के पहले ATM के आविष्कारक John Shepherd Barron थे। जबकि आयोग ने इसका उत्तर विकल्प (a) माना है।
  • एटीएम का प्रारंभिक विकास
    • एटीएम की अवधारणा 1960 के दशक में शुरू हुई, जब बैंकिंग में स्वचालन की जरूरत महसूस हुई।
    • जॉन शेफर्ड-बैरन को यह विचार एक रविवार को आया, जब वे बैंक बंद होने के कारण नकदी नहीं निकाल पाए।
    • उन्होंने डे ला रू नामक ब्रिटिश प्रिंटिंग कंपनी के साथ मिलकर पहली मशीन बनाई
    • जो कागजी चेक (वाउचर) पर पिन नंबर के आधार पर नकदी देती थी।
    • शुरुआती एटीएम पूरी तरह कंप्यूटर आधारित नहीं थे
    • लेकिन इनमें बुनियादी इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और मैग्नेटिक इंक का उपयोग होता था, जो बाद में डिजिटल तकनीक से विकसित हुआ।​
    • पहली मशीन को रीगन स्ट्रीट पर लगाया गया और इसका उद्घाटन अभिनेता रेगर्न डी'मैथ ने किया।
    • उपयोगकर्ता को 10 शिलिंग के नोट मिलते थे, और प्रति दिन अधिकतम 10 नोट निकाले जा सकते थे।
    • इसकी सफलता ने बैंकिंग क्रांति ला दी, क्योंकि इससे ग्राहकों को काउंटर पर लाइन न लगानी पड़ी।​
  • वैश्विक प्रसार
    • 1969 में अमेरिका के केमिकल बैंक ने न्यूयॉर्क में पहला एटीएम लगाया, जिसे डॉनाल्ड वेटजेल ने डिजाइन किया।
    • जापान में 1966 के आसपास प्रायोगिक उपयोग हुआ, लेकिन व्यापक स्वीकृति 1970 के दशक में मिली।
    • 1980 तक अमेरिका में जमा-निकासी दोनों सुविधाएं आम हो गईं।
    • प्लास्टिक कार्ड और मैग्नेटिक स्ट्रिप का उपयोग 1970-80 के दशक में बढ़ा, जो आधुनिक कंप्यूटर-आधारित एटीएम की नींव बना।
  • भारत में एटीएम की शुरुआत
    • भारत में पहला एटीएम 15 अगस्त 1987 (या 1987 में) को मुंबई के एचएसबीसी बैंक की शाखा में स्थापित किया गया।
    • इसके बाद 10 वर्षों में संख्या 1500 तक पहुंची। 1997 में भारतीय बैंक संघ (IBA) ने 'स्वधान' नेटवर्क शुरू किया
    • जिसका उद्घाटन दिल्ली में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने किया। आज भारत में 2.5 लाख से अधिक एटीएम हैं, जो डिजिटल बैंकिंग का आधार बने हैं।
  • तकनीकी विकास और प्रभाव
    • प्रारंभिक एटीएम केवल नकदी निकासी के लिए थे, लेकिन कंप्यूटर तकनीक के साथ बैलेंस चेक, ट्रांसफर, बिल पेमेंट जैसी सुविधाएं जुड़ीं।
    • आज बायोमेट्रिक, कार्डलेस और मोबाइल एटीएम आम हैं। इसने बैंकिंग को 24/7 उपलब्ध बनाया
    • लागत घटाई और वित्तीय समावेशन बढ़ाया। एटीएम ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को सरल बनाया, खासकर विकासशील देशों में।

19. निम्नलिखित में से कंप्यूटर से जुड़े किस व्यक्ति ने 'बिजनेस@ द स्पीड ऑफ थॉट' पुस्तक लिखी है? [R.B.I. (Asst.) Exam. 21.07.2013]

Correct Answer: (e) बिल गेट्स
Solution:
  • वर्ष 1999 में लिखी गई पुस्तक 'बिजनेस द स्पीड ऑफ थॉट' (Business @ The Speed of Thought Succeeding in the digital economy) के लेखक संयुक्त रूप से बिल गेट्स (Bill Gates) और कोलिन्स हॅनिग्वे (Kolins Hemingway) है।
  • इस प्रश्न का सही उत्तर है: बिल गेट्स
  • किसने पुस्तक लिखी?
    • ‘Business @ the Speed of Thought’ (अक्सर लिखा जाता है
    • Business @ the Speed of Thought: Using a Digital Nervous System) पुस्तक माइक्रोसॉफ्ट के सह–संस्थापक बिल गेट्स ने लिखी है।
    • इसे बिल गेट्स ने कॉलिन्स हेमिंग्वे के साथ मिलकर वर्ष 1999 में प्रकाशित किया था।
    • अर्थात प्रश्न में दिए गए विकल्पों (कंप्यूटर से जुड़े व्यक्तियों) में से सही विकल्प बिल गेट्स है
    • जो विश्व‑प्रसिद्ध सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक और प्रौद्योगिकी उद्यमी हैं।
  • पुस्तक का विषय और महत्व (विस्तृत जानकारी)
    • यह किताब दिखाती है कि कैसे सूचना प्रौद्योगिकी और बिजनेस को एक साथ जोड़कर कंपनियाँ तेजी से निर्णय ले सकती हैं और प्रतिस्पर्धा में बढ़त पा सकती हैं।
    • पुस्तक में “Digital Nervous System” की अवधारणा दी गई है, यानी किसी संगठन के अंदर सूचनाओं का प्रवाह वैसे ही तेज़ और सहज हो, जैसे मानव शरीर में नसों के जरिए संदेश चलते हैं।
    • बिल गेट्स बताते हैं कि इंटरनेट, नेटवर्किंग और डेटा‑आधारित निर्णय (data‑driven decision making) की मदद से कारोबार रोज़मर्रा के कामों से लेकर दीर्घकालिक रणनीति तक को पूरी तरह बदल सकता है।
  • कंप्यूटर से जुड़ाव
    • बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन के सह–संस्थापक हैं, जो विंडोज़ जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम और ऑफिस सॉफ्टवेयर के लिए जानी जाती है
    • इसी कारण वे सीधे तौर पर कंप्यूटर और सूचना‑प्रौद्योगिकी जगत से जुड़े प्रमुख व्यक्तियों में गिने जाते हैं।
    • इस किताब में भी वे अपने तकनीकी अनुभव के आधार पर बताते हैं
    • भविष्य का ई‑बिजनेस, डिजिटल टूल्स, ई‑मेल, नेटवर्क और डेटाबेस का कुशल उपयोग किए बिना सफल नहीं हो सकता।​
    • इसलिए परीक्षा या सामान्य ज्ञान के संदर्भ में जब पूछा जाए –
    • “‘बिजनेस@ द स्पीड ऑफ थॉट’ पुस्तक किसने लिखी है?”
    • तो उत्तर लिखिए: बिल गेट्स।

20. एस.एम.एस. का अर्थ है- [Uttaranchal P.C.S. (Pre) 2003]

Correct Answer: (b) शार्ट मैसेजिंग सर्विस
Solution:
  • एस.एम.एस. (SMS) का अर्थ शार्ट मैसेजिंग सर्विस (Short) Messaging Service) है। इसका प्रयोग मोबाइल फोन से संदेशों (Massages) के आदान-प्रदान के लिए किया जाता है।
  • इतिहास और विकास
    • एस.एम.एस. की शुरुआत 1980 के दशक में हुई, जब जीएसएम (Global System for Mobile Communications) मानक विकसित किया गया।
    • पहला एस.एम.एस. संदेश 3 दिसंबर 1992 को ब्रिटेन में भेजा गया था। आज यह व्यक्तिगत संचार से लेकर व्यवसायिक मार्केटिंग तक इस्तेमाल होता है।
  • एस.एम.एस. कैसे काम करता है
    • प्रेषक संदेश लिखकर "भेजें" दबाता है, जो सेलुलर नेटवर्क के माध्यम से निकटतम एसएमएससी (Short Message Service Center) पहुंचता है।
    • एसएमएससी संदेश को स्टोर करता है, प्राप्तकर्ता के नेटवर्क को फॉरवर्ड करता है, और डिवाइस उपलब्ध होने पर डिलीवर करता है।
    • अगर डिवाइस ऑफ हो, तो संदेश कुछ समय तक स्टोर रहता है और बाद में डिलीवर होता है।​
  • विशेषताएं और सीमाएं
    • लंबाई: 160 अक्षर (अंग्रेजी में); यूनिकोड (हिंदी आदि) में 70 अक्षर। लंबे संदेश कंसेटेनेटेड हो जाते हैं।
    • एमएमएस से अंतर: एस.एम.एस. केवल टेक्स्ट है, जबकि एमएमएस (मल्टीमीडिया मैसेज सर्विस) इमेज, वीडियो भेज सकती है।
    • लाभ: तेज, विश्वसनीय, इंटरनेट-मुक्त; नुकसान: चरित्र सीमा और कोई एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन नहीं।
  • उपयोग और महत्व
    • भारत जैसे देशों में एस.एम.एस. अभी भी लोकप्रिय है, खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और 2जी नेटवर्क पर।
    • बैंकिंग OTP, अलर्ट, प्रोमोशन के लिए व्यापक रूप से उपयोग होता है।
    • व्हाट्सएप जैसे ऐप्स के आने के बाद भी, इसकी पहुंच 100% है।