Correct Answer: (c) ईसवी सन् के अंतिम दोनों शब्दों के शून्य हो जाने की दशा में उनका प्रतिस्थानी ढूंढना
Solution:- सन् 2000 के आगमन से पूर्व यह दहशत विद्यमान थी कि इस सन् के आखिरी दोनों अंक शून्य हैं
- इसलिए कहीं कंप्यूटरों की कार्यप्रणाली न प्रभावित हो जाए।
- इस समस्या के निदान में भारी व्यय (Heavy Expenditure) की आशंका व्यक्त की गई थी। इसे ही Y2K समस्या कहते हैं।
- समस्या का मूल कारण
- बैंकिंग में चेक वैलिडेशन फेल हो जाता।
- बिजली ग्रिड, रेलवे, हवाई जहाजों के नेविगेशन सिस्टम प्रभावित होते।
- सरकारी रिकॉर्ड्स, मेडिकल उपकरण और सैटेलाइट्स ठप हो सकते।
- यह "मिलियन बग" कहलाया क्योंकि करोड़ों लाइनों के कोड में सुधार की जरूरत थी।
- दुनिया भर में आशंका थी कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को अरबों डॉलर का नुकसान होगा।
- वैश्विक प्रभाव और तैयारी
- 1990 के दशक में अमेरिका, यूरोप जैसी अर्थव्यवस्थाओं ने Y2K को राष्ट्रीय संकट माना।
- अनुमानित खर्च 200-600 अरब डॉलर तक था—सॉफ्टवेयर अपडेट, टेस्टिंग और नए हार्डवेयर पर।
- NASA ने अंतरिक्ष मिशनों को रोका।
- न्यूयॉर्क में टाइम्स स्क्वायर पर विशेष सुरक्षा।
- कई देशों ने कानून बनाए कि कंपनियां Y2K-कम्प्लायंट साबित करें।
- फिर भी, 1 जनवरी 2000 को कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
- तैयारी के कारण समस्या न्यूनतम रही—कुछ छोटे बग्स जैसे ATM या न्यूजीलैंड में कुछ सिस्टम्स।
- भारत की भूमिका
- भारत ने Y2K को अवसर में बदला। बेंगलुरु जैसे शहरों में Infosys, TCS, Wipro ने विदेशी कंपनियों के लिए कोड ठीक किया।
- लगभग 15 लाख भारतीय इंजीनियर्स ने काम किया, जिससे IT निर्यात बढ़ा और "सिलिकॉन वैली ऑफ इंडिया" की पहचान बनी।
पीएम नरेंद्र मोदी ने 2020 के संबोधन में इसका जिक्र किया, भारतीय मेहनत का उदाहरण देते हुए।
- सबक और समान समस्याएं
- Y2K ने सॉफ्टवेयर टेस्टिंग, बैकअप और फॉरवर्ड थिंकिंग की सीख दी।
- आज "2038 प्रॉब्लम" जैसी चुनौतियां हैं, जहां 32-बिट सिस्टम्स 2038 में Unix टाइम ओवरफ्लो कर सकते हैं।
- कुल मिलाकर, Y2K हाइप ज्यादा था लेकिन तैयारी ने साबित किया कि पूर्वानुमान से संकट टाला जा सकता है।