Correct Answer: (d) एक सुपर कंप्यूटर
Solution:- वर्ष 1998 में भारतीय वैज्ञानिकों ने सुपर कंप्यूटर परम-10000 बनाकर एक नई मिसाल कायम की।
- इस कंप्यूटर का निर्माण पुणे स्थित सी-डैक संस्था (Organisation) के कार्यकारी निदेशक डॉ. विजय पी. मटकर (Dr. Vijay P. Bhatkar) के निर्देशन में हुआ।
- तकनीकी विनिर्देश
- परम-10000 कई स्वतंत्र नोड्स पर आधारित था, जहां प्रत्येक नोड सन एंटरप्राइज 250 सर्वर पर चलता था।
- हर सर्वर में दो 400 MHz UltraSPARC II प्रोसेसर लगे थे, जो SMPs (सिमेट्रिक मल्टीप्रोसेसर) क्लस्टर पर UNIX ऑपरेटिंग सिस्टम का उपयोग करते थे।
- बेस कॉन्फ़िगरेशन में 3 कम्प्यूट नोड्स और 1 सर्वर नोड शामिल थे, जिसकी अधिकतम गति 6.4 GFLOPS (गिगाफ्लॉपिंग पॉइंट ऑपरेशंस पर सेकंड) थी।
- एक सामान्य सिस्टम में 160 CPU होते थे, जो 100 GFLOPS तक की क्षमता प्रदान करता था
- इसे आसानी से TFLOPS स्तर तक स्केल किया जा सकता था।
- यह रूस और सिंगापुर जैसे देशों को निर्यात किया गया, जो भारत की सुपरकम्प्यूटिंग क्षमता का प्रमाण था।
- विकास का इतिहास
- परम श्रृंखला की शुरुआत 1987 में हुई, जब अमेरिका ने भारत को सुपरकंप्यूटर निर्यात करने से इंकार कर दिया।
- डॉ. विजय भटकर के नेतृत्व में सी-डैक ने 1991 में परम-8000 विकसित किया
- जो भारत का पहला गीगास्केल सुपरकंप्यूटर था। उसके बाद परम-9900/AA आया, और 1998 में परम-10000 ने श्रृंखला को नई ऊंचाई दी।
- यह मॉडल वैज्ञानिक अनुसंधान, मौसम पूर्वानुमान, और जटिल गणनाओं के लिए डिज़ाइन किया गया था।
- सी-डैक पुणे में इसका विकास हुआ, और यह भारत की स्वदेशी तकनीक पर जोर देने का प्रतीक बना।
- महत्वपूर्ण उपलब्धियां
- निर्यात सफलता: रूस के आरआईसीसीआर को 8-नोड वाला परम-10000 सप्लाई किया गया।
- प्रदर्शन: 1 खरब गणनाएं प्रति सेकंड (कुछ स्रोतों में उल्लेखित), जो उस समय की वैश्विक चुनौतियों के बीच उल्लेखनीय था।
- विरासत: इसने परम पद्मा (2002, 1 TFLOPS) जैसे बाद के मॉडलों का आधार तैयार किया, जो TOP500 सूची में शामिल हुआ।