Correct Answer: (d) (IT Act, 2000) आई टी अधिनियम, 2000
Solution:- आई-टी अधिनियम, 2000 (IT Act, 2000) भारत में ई-गवर्नेस के लिए आरंभिक विधिक ढॉचा (initial legal Framework) उपलब्ध कराता है।
- इस अधिनियम का वर्ष 2008 में संशोधन किया गया, जिसे आई टी (संशोधन) अधिनियम 2008 के नाम से जाना जाता है।
- अधिनियम का परिचय
- 9 जून 2000 को राष्ट्रपति के. आर. नारायणन द्वारा हस्ताक्षरित किया गया। यह भारत का पहला ऐसा कानून था
- जो इलेक्ट्रॉनिक वाणिज्य, डिजिटल हस्ताक्षरों और साइबर अपराधों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया।
- ई-गवर्नेंस के संदर्भ में, यह अधिनियम इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को कागजी दस्तावेजों के समान वैधता प्रदान करता है
- जिससे सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना संभव हो सका।
- ई-गवर्नेंस के लिए प्रमुख प्रावधान
- यह अधिनियम ई-गवर्नेंस को कई तरीकों से समर्थन देता है:
- इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और डिजिटल हस्ताक्षर की मान्यता: धारा 5 डिजिटल हस्ताक्षर को कानूनी रूप से मान्य बनाती है
- जो सरकारी दस्तावेजों की इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग और सत्यापन को सुगम बनाती है।
- सरकारी कार्यों का डिजिटलीकरण: धारा 6 और 7 के तहत, सरकार इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से सूचनाएं जारी कर सकती है
- इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स को आधिकारिक दस्तावेज मान सकती है। इससे ई-फाइलिंग, ऑनलाइन आवेदन और डिजिटल प्रमाण-पत्र संभव हुए।
- सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन: अधिनियम सुरक्षित डिजिटल लेनदेन के लिए दिशानिर्देश देता है
- जो ई-गवर्नेंस पहलों जैसे डिजिटल इंडिया, आधार, डिजीलॉकर आदि के लिए आधारभूत है।
- ऐतिहासिक महत्व और विकास
- IT Act, 2000 ने भारत को दुनिया के 12वें देश के रूप में स्थापित किया जो आईटी के लिए अलग विधान रखता है।
- इससे पहले, ई-गवर्नेंस के लिए कोई स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं था, और कागजी प्रक्रियाएं ही प्रचलित थीं।
- 2008 में इसके संशोधन ने साइबर सुरक्षा और डेटा प्रोटेक्शन को मजबूत किया, लेकिन मूल अधिनियम ही प्रारंभिक ढांचा है।
- राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP, 2006) और डिजिटल इंडिया (2015) जैसी योजनाएं इसी पर आधारित हैं।
- अन्य विकल्पों से तुलना
- भारतीय दंड संहिता (IPC): यह सामान्य आपराधिक कानून है, ई-गवर्नेंस के लिए विशिष्ट प्रावधान नहीं रखता।
- IT (संशोधन) अधिनियम, 2008: यह मूल अधिनियम का विस्तार है, प्रारंभिक नहीं।
- गवर्नेंस एक्ट: ऐसा कोई विशिष्ट अधिनियम भारत में ई-गवर्नेंस के लिए नहीं है।
- प्रभाव और वर्तमान स्थिति
- इस अधिनियम ने UMANG ऐप, eCourts, DigiLocker जैसी पहलों को जन्म दिया।
- CERT-In (धारा 70B) की स्थापना से साइबर सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
- मार्च 2026 तक, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 ने इसे पूरक बनाया
- लेकिन IT Act मूल आधार बना हुआ है। यह अधिनियम न केवल ई-गवर्नेंस को कानूनी बल देता है
- बल्कि नागरिकों और सरकार के बीच डिजिटल पुल का निर्माण करता है।