कंप्यूटर : एक परिचय (Part – I)

Total Questions: 50

11. बुनियादी कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र में............ शामिल होते हैं। [S.B.L. (C.G.) 03.06.12 (Ε.Τ.)]

Correct Answer: (a) इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट
Solution:
  • बुनियादी कंप्यूटर प्रोसेसिंग चक्र (Processing Cycle) में इनपुट, प्रोसेसिंग और आउटपुट शामिल होते हैं।
  • इसमें इनपुट किए गए डेटा को प्रोसेस कर आउटपुट प्राप्त किया जाता है तथा भविष्य में पुनः उपयोग (re-use) के लिए स्टोर भी किया जाता है।
  • इनपुट चरण (Input Phase)
    • इनपुट चरण में उपयोगकर्ता द्वारा डेटा और निर्देश कंप्यूटर में डाले जाते हैं।
    • कीबोर्ड, माउस, स्कैनर, माइक्रोफोन जैसी इनपुट डिवाइसेस के माध्यम से कच्चा डेटा (Raw Data) सिस्टम में प्रवेश करता है।
    • यह डेटा बाइनरी कोड (0 और 1) में परिवर्तित होकर मेमोरी में भेजा जाता है
    • CPU आगे प्रोसेस कर सके। उदाहरणस्वरूप, यदि आप 25 और 5 नंबर्स एंटर करते हैं, तो कंप्यूटर उन्हें इनपुट के रूप में स्वीकार करता है।​
  • प्रोसेसिंग चरण (Processing Phase)
    • यह चक्र का केंद्रीय भाग है, जहाँ Central Processing Unit (CPU) कार्य करता है।
    • CPU में तीन मुख्य घटक होते हैं: ALU (Arithmetic Logic Unit) जो गणितीय (जोड़, घटाव, गुणा, भाग) और तार्किक ऑपरेशन (तुलना, AND/OR/NOT) करता है
    • CU (Control Unit) जो सभी निर्देशों का नियंत्रण और समन्वय करता है; तथा Registers जो डेटा को अस्थायी रूप से स्टोर करते हैं।
    • प्रोसेसिंग के दौरान निर्देश Fetch-Decode-Execute चक्र (Instruction Cycle या Fetch-Execute Cycle) दोहराया जाता है
    • पहले मेमोरी से निर्देश लाया जाता है (Fetch), फिर समझा जाता है (Decode), और अंत में निष्पादित किया जाता है
    • (Execute)। यह चरण RAM/ROM जैसी मेमोरी के साथ मिलकर काम करता है, जिससे डेटा तेजी से संसाधित होता है।​
  • आउटपुट चरण (Output Phase)
    • प्रोसेसिंग के बाद परिणाम (जैसे 25 ÷ 5 = 5) उपयोगकर्ता को दिखाया जाता है।
    • मॉनिटर, प्रिंटर, स्पीकर जैसी आउटपुट डिवाइसेस मानव-पठनीय रूप (Text, Image, Sound) में जानकारी प्रदान करती हैं।
    • आउटपुट को हार्ड कॉपी (प्रिंटेड) या सॉफ्ट कॉपी (स्क्रीन पर) रूप में प्राप्त किया जा सकता है, जैसे लेजर प्रिंटर या LCD डिस्प्ले।​​
  • अतिरिक्त चरण: स्टोरेज और IPO मॉडल
    • कई स्रोतों में बुनियादी चक्र को IPO मॉडल (Input-Process-Output) कहा जाता है
    • लेकिन विस्तार में स्टोरेज (Storage) को चौथा चरण जोड़ा जाता है।
    • प्राइमरी मेमोरी (RAM, ROM) अस्थायी स्टोरेज करती है, जबकि सेकेंडरी मेमोरी (हार्ड डिस्क, SSD, पेन ड्राइव) स्थायी रूप से डेटा रखती है।
    • कुछ आधुनिक विवरणों में कम्युनिकेशन (Communication) को पाँचवाँ चरण माना जाता है, जो नेटवर्किंग के माध्यम से डेटा शेयरिंग करता है।
  • विस्तृत उदाहरण: गणना प्रक्रिया
    • मान लीजिए आप कैलकुलेटर ऐप में 25 + 30 एंटर करते हैं:
    • इनपुट: कीबोर्ड से 25 और 30 दर्ज → बाइनरी में कन्वर्ट।
    • प्रोसेसिंग: CPU ALU द्वारा जोड़ गणना करता है → 55 प्राप्त।
    • आउटपुट: स्क्रीन पर 55 दिखाया जाता है।
    • स्टोरेज: परिणाम HDD में सेव हो सकता है।​

12. सूचना के नियंत्रण के अंतर्गत ऑपरेट करने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जो डेटा को स्वीकार कर सकती है, डेटा को प्रोसेस कर सकती है, आउटपुट प्रोड्यूस करती है और भविष्य में प्रयोग के लिए परिणामों को स्टोर करती है- [S.B.I. (C.G.) 03.06.12 (Ε.Τ.)]

Correct Answer: (b) कंप्यूटर
Solution:
  • कंप्यूटर सूचना के नियंत्रण (Information Control) के अंतर्गत संचालन करने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है
  • जो डेटा स्वीकार करने के साथ-साथ डेटा को प्रोसेस कर सकती है
  • आउटपुट प्रोड्यूस करती है और भविष्य में प्रयोग के लिए परिणामों को संचित (Store) करती है।
  • कंप्यूटर की परिभाषा
    • कंप्यूटर को सामान्यतः एक स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक मशीन कहा जाता है जो उपयोगकर्ता से कच्चे डेटा और निर्देश प्राप्त करता है
    • उसे तर्कपूर्ण तरीके से प्रोसेस करता है, परिणामस्वरूप जानकारी (इनफॉर्मेशन) पैदा करता है
    • इसे स्थायी रूप से स्टोर कर सकता है। यह प्रक्रिया IPOS चक्र (Input-Process-Output-Storage) पर आधारित होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, कीबोर्ड से टाइप किया गया टेक्स्ट डेटा इनपुट होता है
    • जो CPU द्वारा संसाधित होकर स्क्रीन पर दिखाई देता है और हार्ड डिस्क में सेव हो जाता है।
  • इनपुट स्वीकार करना:
    • उपयोगकर्ता से डेटा लेना, जैसे टेक्स्ट, इमेज या ध्वनि।
    • प्रोसेसिंग: डेटा पर गणना, तुलना या लॉजिकल ऑपरेशन करना।
    • आउटपुट उत्पादन: संसाधित डेटा को उपयोगी रूप में प्रस्तुत करना।
    • स्टोरेज: परिणामों को मेमोरी या स्टोरेज डिवाइस में रखना।
  • विस्तृत कार्यप्रक्रिया
  • इनपुट चरण
    • कंप्यूटर इनपुट डिवाइसों से डेटा ग्रहण करता है, जो बाइनरी कोड (0 और 1) में परिवर्तित हो जाता है।
    • उदाहरण: कीबोर्ड से 'A' दबाने पर ASCII कोड 65 उत्पन्न होता है। यह डेटा मुख्य मेमोरी में भेजा जाता है।
  • प्रोसेसिंग चरण
    • CPU डेटा पर अंकगणितीय (जोड़, घटाव), तार्किक (AND, OR) और नियंत्रण ऑपरेशन करता है।
    • नियंत्रण यूनिट (CU) सभी भागों को समन्वयित करती है
    • जबकि अरिथमेटिक लॉजिक यूनिट (ALU) गणनाएं करती है। प्रोसेसिंग के दौरान डेटा RAM में रखा जाता है।
  • आउटपुट चरण
    • प्रोसेस्ड डेटा को आउटपुट डिवाइस पर भेजा जाता है
    • जैसे मॉनिटर पर टेक्स्ट दिखाना या प्रिंटर से प्रिंट लेना। यह मानव-पठनीय रूप में होता है।​
  • स्टोरेज चरण
    • परिणाम हार्ड डिस्क, SSD या क्लाउड में संग्रहीत होते हैं।
    • RAM अस्थायी स्टोरेज है (पावर ऑफ होने पर डेटा मिट जाता है
    • जबकि सेकेंडरी स्टोरेज स्थायी है। डेटा पुनर्प्राप्ति और संचरण भी संभव है।
  • कंप्यूटर की विशेषताएं
    • गति: सेकंडों में लाखों गणनाएं।
    • सटीकता: त्रुटि मानवीय इनपुट पर निर्भर।
    • भंडारण क्षमता: टेराबाइट्स तक डेटा रख सकता है।
    • दिलेरता: थकान या भावनाओं से प्रभावित नहीं।
    • बहुमुखी प्रतिभा: विभिन्न कार्य जैसे गेमिंग, कैलकुलेशन, AI।​
  • प्रकार और उदाहरण
    • व्यक्तिगत कंप्यूटर: डेस्कटॉप, लैपटॉप।
    • सर्वर: डेटा स्टोरेज के लिए।
    • मोबाइल डिवाइस: स्मार्टफोन, जो समान सिद्धांत पर कार्य करते हैं।​
    • यह इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस आधुनिक जीवन का आधार है, जो डेटा को कुशलतापूर्वक नियंत्रित करता है।​

13. कंप्यूटर पर सेव (Save) की गई फाइल को फाइंड और लोड करने के लिए निम्नलिखित में से किस विकल्प का प्रयोग किया जाता है? [S.S.C. मल्टी टॉस्किंग परीक्षा, 2014]

Correct Answer: (d) ओपन कमांड को सेलेक्ट करना
Solution:
  • कंप्यूटर पर सेव (Save) की गई फाइल को फाइंड और लोड करने के लिए ओपन कमांड (Open Command) को सेलेक्ट करने वाले विकल्प का प्रयोग किया जाता है।
  • ओपन कमांड क्या है?
    • ओपन कमांड एक स्टैंडर्ड फीचर है जो उपयोगकर्ता को अपनी हार्ड डिस्क, USB ड्राइव या क्लाउड स्टोरेज से पहले से सेव की गई
    • किसी भी फाइल को ब्राउज करके चुनने और उसे मेमोरी में लोड करने की सुविधा देता है। जब आप इसे चुनते हैं
    • तो एक डायलॉग बॉक्स खुलता है जहां आप फाइलों की लिस्ट देख सकते हैं, सर्च कर सकते हैं
    • लोकेशन बदल सकते हैं। उदाहरण के लिए, MS Office में Ctrl + O शॉर्टकट से यह कमांड तुरंत सक्रिय हो जाता है।​
  • अन्य विकल्पों से अंतर
    • क्लोज (Close) कमांड: यह वर्तमान ओपन फाइल को बंद करता है, लेकिन कोई नई फाइल लोड नहीं करता।
    • न्यू (New) कमांड: नई खाली फाइल बनाता है, पुरानी सेव फाइल को फाइंड या लोड नहीं करता।
    • सेव (Save) कमांड: मौजूदा फाइल को अपडेट करता है या नई फाइल को पहली बार सेव करता है, लेकिन फाइंडिंग का काम नहीं करता।​
  • ओपन कमांड कैसे काम करता है?
    • File मेनू पर क्लिक करें या Ctrl + O दबाएं।
    • ओपन डायलॉग में फाइल टाइप (जैसे .docx, .pdf) चुनें।
    • फाइल नाम टाइप करें या ब्राउज करके लोकेशन पर जाएं।
    • ओपन बटन पर क्लिक करें—फाइल लोड हो जाएगी और एडिटिंग के लिए तैयार।
    • विंडोज एक्सप्लोरर या मैक फाइंडर से भी फाइल सिलेक्ट कर डबल-क्लिक से लोड कर सकते हैं।​
  • फाइल फाइंडिंग के अतिरिक्त तरीके
    • यदि ओपन डायलॉग में फाइल न मिले, तो विंडोज सर्च बार (Win + S), रीसेंट फाइल्स (File > Open Recent) या थर्ड-पार्टी टूल्स जैसे Everything सर्च का उपयोग करें।
    • मैक पर Spotlight (Cmd + Space) फाइल्स को तेजी से ढूंढता है।​
    • यह प्रक्रिया सभी ऑपरेटिंग सिस्टम्स (Windows, macOS, Linux) में समान रूप से काम करती है और फाइल मैनेजमेंट का बेसिक हिस्सा है।

14. कंप्यूटर किस माध्यम से आंकड़ों (Data) को ग्रहण करता है?

Correct Answer: (b) इनपुट
Solution:
  • कंप्यूटर, इनपुट युक्तियों (Input Devices) के माध्यम से आंकड़ों (Data) को ग्रहण करता है।
  • इनपुट डिवाइस क्या हैं?
    • इनपुट डिवाइस वे हार्डवेयर हैं जो उपयोगकर्ता या पर्यावरण से डेटा को कंप्यूटर में भेजते हैं।
    • सबसे सामान्य उदाहरण कीबोर्ड है, जो टेक्स्ट, नंबर्स और कमांड्स को टाइप करके भेजता है।
    • माउस पॉइंटिंग और क्लिकिंग के जरिए ग्राफिकल इंटरफेस को नियंत्रित करता है।​
  • मुख्य इनपुट डिवाइसों के प्रकार
    • कंप्यूटर कई तरह के इनपुट माध्यमों से डेटा ग्रहण करता है:
    • कीबोर्ड: अक्षर, संख्याएं और विशेष चिन्ह टाइप करने के लिए। यह सबसे पुराना और बहुमुखी माध्यम है।
    • माउस/ट्रैकबॉल: कर्सर मूवमेंट, क्लिक और ड्रैग के लिए। ऑप्टिकल माउस प्रकाश सेंसर का उपयोग करता है।
    • स्कैनर: कागज, फोटो या दस्तावेजों को डिजिटल इमेज में बदलता है। फ्लैटबेड स्कैनर सामान्य है।
    • माइक्रोफोन: आवाज को ऑडियो सिग्नल में कन्वर्ट करता है, जैसे स्पीच रिकग्निशन के लिए।
    • वेब कैमरा: वीडियो और इमेज कैप्चर करता है, वीडियो कॉलिंग में उपयोगी।
    • टचस्क्रीन: उंगलों से सीधे टच करके इनपुट, स्मार्टफोन और टैबलेट में लोकप्रिय।
    • जॉयस्टिक/गेमपैड: गेमिंग के लिए मूवमेंट और बटनों से इनपुट।
    • बायोमेट्रिक स्कैनर: फिंगरप्रिंट, रेटिना या फेस रिकग्निशन से सुरक्षित डेटा ग्रहण।
    • ये डिवाइस डेटा को बाइनरी फॉर्म (0 और 1) में बदलते हैं, जो कंप्यूटर की भाषा है।​
  • डेटा ग्रहण की प्रक्रिया
    • डेटा ग्रहण की प्रक्रिया चार चरणों में होती है:
    • कैप्चरिंग: डिवाइस डेटा को सेंसर के जरिए कैद करता है, जैसे कैमरा लाइट को पिक्सेल में बदलता है।
    • कन्वर्शन: एनालॉग सिग्नल को डिजिटल (बाइनरी) में बदलना, एडॉक्स (Analog-to-Digital) कन्वर्टर द्वारा।
    • ट्रांसमिशन: USB, ब्लूटूथ, वाई-फाई या सीरियल पोर्ट जैसे माध्यमों से CPU या मेमोरी तक भेजा जाता है।
    • स्टोरेज/प्रोसेसिंग: RAM में अस्थायी स्टोरेज, फिर प्रोसेसर द्वारा गणना।
    • उदाहरण: कीबोर्ड से टाइप किया 'A' को ASCII कोड 65 में बदलकर भेजा जाता है।​
  • उन्नत और विशेष माध्यम
    • आधुनिक कंप्यूटर IoT डिवाइसों से भी डेटा ग्रहण करते हैं:
    • सेंसर्स: टेम्परेचर, प्रेशर या मोशन सेंसर रियल-टाइम डेटा भेजते हैं, जैसे स्मार्ट होम में।
    • नेटवर्क इंटरफेस: इंटरनेट से डेटा डाउनलोड, क्लाउड स्टोरेज से।
    • OCR स्कैनर: प्रिंटेड टेक्स्ट को पढ़कर डिजिटल बनाता है।
    • GPU इनपुट: ग्राफिक्स कार्ड गेमिंग या AI ट्रेनिंग के लिए वीडियो डेटा ग्रहण करता है।
    • ये माध्यम डेटा को तेजी से और सटीकता से ग्रहण करते हैं, जिससे प्रोसेसिंग तेज होती है।​
  • बाइनरी रूपांतरण का महत्व
    • सभी डेटा अंततः बाइनरी कोड में बदल जाता है। एक बाइट 8 बिट्स से बनी होती है
    • जैसे 01001011)। इससे कंप्यूटर तेजी से कैलकुलेशन कर पाता है।
    • उदाहरण: एक फोटो के पिक्सेल को RGB वैल्यूज में बाइनरी में स्टोर किया जाता है।​
  • लाभ और सीमाएं
    • इनपुट माध्यमों से डेटा ग्रहण तेज, सटीक और बड़ी मात्रा में संभव है
    • लेकिन वायरस या गलत इनपुट से समस्या हो सकती है।
    • हस्तलिखित विधियों की तुलना में कंप्यूटर 100% सटीकता देता है।​

15. कंप्यूटर की शक्ति मापी जाती है-

Correct Answer: (d) वर्ड-लेंथ
Solution:
  • कंप्यूटर की शक्ति (Power) वर्ड-लेंथ (Word-Length) द्वारा मापी जाती है।
  • वर्ड लेंथ (Word Length)
    • कंप्यूटर की मूल शक्ति को वर्ड लेंथ से मापा जाता है, जो बताता है कि प्रोसेसर एक बार में कितने बिट्स का डेटा प्रोसेस कर सकता है।
    • 32-बिट प्रोसेसर एक समय में 32 बिट्स हैंडल करता है, जबकि 64-बिट प्रोसेसर 64 बिट्स को एक साथ प्रोसेस कर अधिक जटिल गणनाएं तेजी से करता है।​
    • लंबी वर्ड लेंथ से बड़ी संख्याओं पर तेज运算 और अधिक मेमोरी एड्रेसिंग संभव होती है, जो आधुनिक कंप्यूटरों को शक्तिशाली बनाती है।
  • क्लॉक स्पीड (Clock Speed)
    • प्रोसेसर की गति हर्ट्ज (Hz) में मापी जाती है, जैसे मेगाहर्ट्ज (MHz) या गीगाहर्ट्ज (GHz)।
    • एक 3.5 GHz प्रोसेसर प्रति सेकंड 3.5 अरब चक्र पूरा करता है, जो निर्देशों की निष्पादन गति निर्धारित करता है।​
    • हालांकि, केवल स्पीड पर्याप्त नहीं; कोर की संख्या (जैसे क्वाड-कोर या 16-कोर) और थ्रेडिंग भी कुल शक्ति बढ़ाती है।​
  • मेमोरी और स्टोरेज
    • शक्ति में RAM (रैम) और स्टोरेज महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
    • अधिक RAM (जैसे 32GB या 128GB) से एक साथ कई प्रोग्राम चलते हैं बिना धीमे हुए।​
    • SSD स्टोरेज HDD से तेज होता है, जो बूट टाइम और डेटा एक्सेस को सुधारता है।

16. निम्न में से कौन-सा कंप्यूटर का बुनियादी कार्य नहीं है? [I.B.P.S. (C.G.) 27.11.11 (Ε.Τ.)]

Correct Answer: (e) टेक्स्ट को स्कैन करना
Solution:
  • टेक्स्ट को स्कैन करना कंप्यूटर का बुनियादी कार्य (Basic Work) नहीं है। यह कार्य स्कैनर द्वारा किया जाता है
  • स्वैन की हुई कॉपी कंप्यूटर के माध्यम से संचित या मुद्रित (Store or Print) की जाती है। अन्य विकल्पों के कार्य कंप्यूटर के बुनियादी कार्यों में शामिल हैं।
  • कंप्यूटर के बुनियादी कार्य
    • कंप्यूटर एक इलेक्ट्रॉनिक मशीन है जो डेटा को स्वीकार करता है, उसे संसाधित करता है, परिणाम देता है
    • जानकारी को संग्रहीत रखता है। इसके चार या पांच मुख्य कार्य होते हैं
    • इनपुट (डेटा ग्रहण करना), प्रोसेसिंग (गणना और तर्क करना), आउटपुट (परिणाम दिखाना), स्टोरेज (संग्रहण) और कंट्रोल (समन्वय)। ये कार्य CPU, मेमोरी और I/O डिवाइसेस के माध्यम से पूरे होते हैं।
  • विकल्पों का विश्लेषण
    • सामान्य प्रश्नों में विकल्प होते हैं जैसे:
    • (A) डाटा को प्रोसैस करना
    • (B) टैक्सट को स्कैन करना
    • (C) इनपुट को स्वीकार करना
    • (D) डाटा को स्टोर करना
  • प्रत्येक कार्य की विस्तृत व्याख्या
    • इनपुट (Input): कीबोर्ड, माउस या स्कैनर से डेटा लेना। यह पहला चरण है जहाँ उपयोगकर्ता निर्देश देता है।​
    • प्रोसेसिंग (Processing): CPU डेटा पर गणितीय या लॉजिकल ऑपरेशन करता है, जैसे जोड़-घटाव या निर्णय लेना। यह कंप्यूटर का हृदय है।
    • आउटपुट (Output): मॉनिटर या प्रिंटर पर परिणाम दिखाना। प्रोसेस्ड डेटा उपयोगी रूप में आता है।​
    • स्टोरेज (Storage): HDD/SSD में डेटा रखना, ताकि बाद में उपयोग हो सके। RAM अस्थायी, सेकेंडरी स्थायी स्टोरेज है।​
    • कंट्रोल (Control): ALU और CU समन्वय करते हैं, सभी कार्यों को नियंत्रित रखते हैं। कुछ स्रोत इसे पांचवां कार्य मानते हैं।
  • क्यों "टैक्सट को स्कैन करना" नहीं है बुनियादी?
    • स्कैनिंग एक एप्लीकेशन या перифери कार्य है, न कि हर कंप्यूटर का मूल फंक्शन। बिना स्कैनर के भी कंप्यूटर काम करता है
    • लेकिन बिना इनपुट/प्रोसेसिंग के नहीं। यह प्रश्न प्रतियोगी परीक्षाओं में आता है ताकि बेसिक फंक्शंस स्पष्ट हों।

17. निम्न में से सूचना (Information) के गुण हैं-

Correct Answer: (d) सभी
Solution:
  • सूचना (Information) के गुण संक्षिप्तता, अर्थपूर्णता, यथार्थता इत्यादि हैं।
  • सूचना के प्रमुख गुण
    • सटीकता (Accuracy): सूचना वास्तविकता को सही ढंग से प्रतिबिंबित करती है और त्रुटिरहित होती है। गलत सूचना से निर्णय लेने में हानि हो सकती है।
    • प्रासंगिकता (Relevance): सूचना उपयोगकर्ता की आवश्यकता और संदर्भ से जुड़ी होनी चाहिए। अनुपयुक्त सूचना व्यर्थ होती है।
    • पूर्णता (Completeness): सूचना में सभी आवश्यक विवरण शामिल होने चाहिए, ताकि आंशिक जानकारी से गलत निष्कर्ष न निकले।
    • समयबद्धता (Timeliness): सूचना सही समय पर उपलब्ध होनी चाहिए। पुरानी सूचना अप्रासंगिक हो जाती है।
    • संक्षिप्तता (Conciseness): सूचना संक्षिप्त और स्पष्ट होनी चाहिए, बिना अनावश्यक विवरण के।
    • विश्वसनीयता (Reliability): सूचना स्रोत पर भरोसा किया जा सके और पूर्वानुमान योग्य हो।​
    • अर्थपूर्णता (Meaningfulness): सूचना व्यर्थ न होकर अर्थपूर्ण और समझने योग्य हो।
    • उपलब्धता (Availability): सूचना आसानी से सुलभ होनी चाहिए।​
    • शुद्धता या यथार्थता (Purity/Truthfulness): सूचना सत्य और निष्पक्ष हो।
    • कार्यसंपादन में सहायक (Helpful in Execution): सूचना निर्णय और कार्यान्वयन में सहायता करे।​
  • विस्तृत व्याख्या
  • सटीकता का महत्व
    • सटीक सूचना निर्णय प्रक्रिया का आधार होती है।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि कोई कंपनी बिक्री पूर्वानुमान के लिए गलत आंकड़ों का उपयोग करे, तो संसाधन गलत आवंटित हो सकते हैं
    • जिससे आर्थिक हानि हो। उच्च गुणवत्ता वाली सूचना त्रुटियों से मुक्त होती है।
  • प्रासंगिकता और पूर्णता
    • प्रासंगिक सूचना वह होती है जो "क्या, क्यों, कब, कहाँ, कौन" जैसे प्रश्नों का उत्तर दे।
    • पूर्णता सुनिश्चित करती है कि कोई महत्वपूर्ण डेटा छूट न जाए। अपूर्ण सूचना से गलत निर्णय हो सकते हैं।​​

18. कंप्यूटर के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन गलत है? [D.M.R.C. परीक्षा, 2002]

Correct Answer: (d) यह अप्रतिबंधित ढंग से अपनी सूचना तक पहुंचता है
Solution:
  • कंप्यूटर एक तार्किक मशीन (Logical Machine) है और सूचना (Information) को प्रोसेस करती है, इससे जो भी सूचना स्टोर होती है
  • उस तक पहुंच जाती है। इसमें कोई भावावेग नहीं होता, इसकी अपनी कोई भावना या चाहत नहीं होती है।
  • सामान्य कथन 1: "कंप्यूटर में सामान्य बोध (common sense) होता है"
    • कंप्यूटर एक मशीन है जो केवल पहले से लिखे गए निर्देशों (instructions) या प्रोग्राम के अनुसार काम करता है।
    • उसके पास इंसान जैसा सामान्य बोध या निर्णय लेने की स्वतंत्र क्षमता नहीं होती। उदाहरण के लिए
    • यदि आप कंप्यूटर को कहें "बारिश हो रही है, छाता ले लो", तो वह समझ नहीं पाएगा क्योंकि यह प्रोग्राम नहीं है।
    • केवल AI जैसी उन्नत तकनीकें (जैसे आज के मॉडल) इसमें कुछ हद तक सफल हैं
    • लेकिन बुनियादी कंप्यूटर में यह कमी है। यही कारण है
    • कंप्यूटर को "डंब मशीन" भी कहा जाता है – यह सही-गलत की पहचान स्वयं नहीं कर सकता।
  • सामान्य कथन 2: "कंप्यूटर कभी गलती नहीं करता"
    • कंप्यूटर स्वयं गलती नहीं करता यदि इनपुट और प्रोग्राम सही हों (GIGO सिद्धांत: Garbage In, Garbage Out)।
    • लेकिन यदि प्रोग्राम में बग हो या डेटा गलत हो, तो आउटपुट गलत आएगा।
    • उदाहरण: यदि आप 2+2 को 5 के रूप में प्रोग्राम करेंगे, तो कंप्यूटर 5 ही देगा।
    • इसलिए, "कभी गलती नहीं करता" पूर्ण रूप से सही नहीं
    • क्योंकि यह मानवीय इनपुट पर निर्भर है। कई परीक्षाओं में यही कथन गलत चुना जाता है।
  • सामान्य कथन 3: "कंप्यूटर बिना निर्देश के काम कर सकता है"
    • कंप्यूटर पूरी तरह निर्भर (dependent) होता है प्रोग्राम या ऑपरेटिंग सिस्टम के निर्देशों पर।
    • बिना सॉफ्टवेयर के यह एक निष्क्रिय बॉक्स मात्र है।
    • उदाहरण: एक नया कंप्यूटर बिना BIOS या OS के बूट नहीं होगा।
    • यह कथन अक्सर सही/गलत प्रश्नों में आता है और स्पष्ट रूप से गलत है।
  • सामान्य कथन 4: "कंप्यूटर उच्च गति से कार्य करता है"
    • आधुनिक कंप्यूटर बिलियन निर्देश प्रति सेकंड (GHz) संसाधित करते हैं।
    • उदाहरण: Intel Core i9 प्रोसेसर 5 GHz तक स्पीड देता है, जो इंसानी गति से लाखों गुना तेज है।
  • सामान्य कथन 5: "कंप्यूटर विशाल डेटा को लंबे समय तक स्टोर कर सकता है"
    • यह कथन सही है।
    • हार्ड डिस्क, SSD, क्लाउड स्टोरेज आदि से टेराबाइट्स डेटा वर्षों तक सुरक्षित रहता है।
    • उदाहरण: Google Drive या OneDrive अनंतकालिक भंडारण प्रदान करते हैं।
  • सबसे गलत कथन की पहचान
    • उपरोक्त में से सबसे स्पष्ट रूप से गलत कथन है: "कंप्यूटर में सामान्य बोध होता है" या "कंप्यूटर बिना निर्देश के काम कर सकता है"।
    • परीक्षाओं (जैसे SSC, UPSC, Railway) में अक्सर "कंप्यूटर में IQ या intelligence होती है" या "कंप्यूटर स्वयं निर्णय ले सकता है
    • जैसे कथन गलत माने जाते हैं। कारण: कंप्यूटर में I (Intelligence) की कमी है
    • यह केवल ALU (Arithmetic Logic Unit) और Control Unit पर आधारित है, कोई स्वतंत्र सोच नहीं।
  • कंप्यूटर की सीमाएं (Limitations) विस्तार से
    • कंप्यूटर की कमजोरियां समझने के लिए निम्नलिखित बिंदु महत्वपूर्ण हैं:
    • कोई IQ नहीं: इंसान की तरह तर्क नहीं कर सकता।
    • निर्भरता: बिजली, प्रोग्राम, रखरखाव पर निर्भर।
    • कोई रचनात्मकता नहीं: नई चीजें स्वयं नहीं बना सकता।
    • वायरस/हैकिंग का खतरा: साइबर हमलों से प्रभावित।
    • रोजगार हानि: ऑटोमेशन से नौकरियां कम।

19. त्रुटि मुक्त गणना करने की क्षमता, एक कंप्यूटर की..... विशेषता का प्रतिनिधित्व करती है। [UPPCL TG-2 Exam-2019]

Correct Answer: (c) शुद्धता
Solution:
  • त्रुटि-मुक्त (Error-Free) गणना करने की क्षमता, एक कंप्यूटर की परिशुद्धता (Accuracy) का वर्णन करता है। कंप्यूटर की विशेषताएं निम्न हैं-
  • (a) High Speed (उच्च गति), (b) Accuracy (परिशुद्धता), (c) Storage Capability (भंडारण क्षमता), (d) Versatility (बहुमुखी प्रतिभा), (e) Reliability (स्थिरता), (1) Automation (स्वचालन) (g) Reduction in Paperwork और Cost (मूल्य व कागजी कार्यवाही में कमी)
  • सटीकता क्या है?
    • सटीकता कंप्यूटर की वह क्षमता है जिसमें यह ALU (Arithmetic Logic Unit) और FPU (Floating Point Unit) के माध्यम से नियतात्मक (deterministic) अंकगणितीय तथा तार्किक संचालन करता है।
    • सही एल्गोरिदम और डेटा दिए जाने पर परिणाम हमेशा समान, सटीक और दोहराने योग्य होते हैं।
    • त्रुटि-जांच तंत्र जैसे समता जांच (parity check), ECC मेमोरी (Error-Correcting Code) तथा चेकसम (checksum) डेटा की अखंडता बनाए रखते हैं
    • जिससे प्रसंस्करण तथा भंडारण के दौरान त्रुटियाँ न्यूनतम रहती हैं।
    • कंप्यूटर स्वयं "गलतियाँ" नहीं करता; कोई भी त्रुटि मुख्यतः मानवीय कारकों से उत्पन्न होती है
    • जैसे गलत इनपुट डेटा, प्रोग्रामिंग त्रुटि या प्रतिनिधित्व सीमाएँ (जैसे फ्लोटिंग-पॉइंट राउंडिंग)।
    • उदाहरणस्वरूप, यदि 10 विभिन्न संख्याओं का गुणनखंड मांगा जाए, तो मनुष्य कई बार भूल कर सकता है, किंतु कंप्यूटर इसे 100% शुद्धता से पूर्ण करता है।
  • वास्तविक उदाहरण और महत्व
    • वैज्ञानिक सिमुलेशन, वित्तीय मॉडलिंग या अंतरिक्ष मिशनों में सटीकता जीवनरक्षक सिद्ध होती है।
    • जैसे, NASA के कैलकुलेशन्स में मामूली त्रुटि भी आपदा निमंत्रण है, किंतु कंप्यूटर की सटीकता इसे रोकती है।
    • GIGO सिद्धांत (Garbage In, Garbage Out) पर आधारित यह विशेषता सुनिश्चित करती है कि सही इनपुट पर आउटपुट सत्यापित होता है।​
    • आधुनिक कंप्यूटर्स में क्वांटम त्रुटि सुधार कोड्स तथा AI-आधारित वैलिडेशन इस सटीकता को और मजबूत करते हैं, पर मूल सिद्धांत अपरिवर्तित है।
    • इस प्रकार, त्रुटि-मुक्त गणना कंप्यूटर को मनुष्य से श्रेष्ठ बनाती है।

20. कंप्यूटरों के संदर्भ में कम्पैटिबिलिटी का क्या अर्थ है? [I.B.P.S. (C.G.) 11.12.11 (Μ.Τ.)]

Correct Answer: (c) सॉफ्टवेयर कंप्यूटर पर चलने में समर्थ है
Solution:
  • किसी कंप्यूटर के संदर्भ में किसी सॉफ्टवेयर की सुसंगतता (Compatibility) का अर्थ है
  • वह सॉफ्टवेयर उस कंप्यूटर पर चलने या संचालित (Operate) होने में समर्थ है।
  • कम्पैटिबिलिटी के प्रकार
    • कम्पैटिबिलिटी मुख्य रूप से चार श्रेणियों में विभाजित होती है।
    • हार्डवेयर कम्पैटिबिलिटी: यह तब होती है जब कोई नया हार्डवेयर कंपोनेंट (जैसे ग्राफिक्स कार्ड, RAM या SSD) मॉदरबोर्ड, प्रोसेसर या अन्य मौजूदा हार्डवेयर के साथ संगत हो।
    • उदाहरणस्वरूप, DDR4 RAM DDR3 स्लॉट में फिट नहीं होगा।​
    • सॉफ्टवेयर कम्पैटिबिलिटी: सॉफ्टवेयर किसी विशिष्ट ऑपरेटिंग सिस्टम (जैसे Windows 11 या Linux) या हार्डवेयर कॉन्फ़िगरेशन पर सुचारु रूप से इंस्टॉल और चल सके।
    • पुराना सॉफ्टवेयर नई OS पर क्रैश हो सकता है।
    • बैकवर्ड कम्पैटिबिलिटी: नया सिस्टम पुराने सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर को सपोर्ट करे, जैसे Windows 11 में पुराने Windows 10 ऐप्स चलना।​
    • फॉरवर्ड कम्पैटिबिलिटी: पुराना सॉफ्टवेयर भविष्य के अपडेट्स को सहन करे, हालांकि यह कम आम है।
  • कम्पैटिबिलिटी की जाँच कैसे करें
    • कम्पैटिबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए कई तरीके अपनाए जाते हैं।
    • सिस्टम रिक्वायरमेंट्स चेक: सॉफ्टवेयर की न्यूनतम आवश्यकताएँ (CPU, RAM, OS वर्शन) से तुलना करें।
    • ड्राइवर अपडेट: हार्डवेयर के लिए नवीनतम ड्राइवर इंस्टॉल करें, क्योंकि पुराने ड्राइवर असंगति पैदा करते हैं।
    • वर्चुअल मशीन या एमुलेटर: संगतता टेस्ट करने के लिए VMware या VirtualBox का उपयोग।
    • ऑनलाइन टूल्स: PCPartPicker जैसी साइट्स हार्डवेयर संगतता चेक करती हैं।
  • प्रभावित करने वाले कारक
    • कई तत्व कम्पैटिबिलिटी को प्रभावित करते हैं।
    • आर्किटेक्चर: x86 बनाम ARM प्रोसेसर; Intel CPU AMD सॉकेट पर नहीं चलेगा।
    • OS वर्शन: Windows 7 सॉफ्टवेयर Windows 11 पर हमेशा संगत नहीं होता।
    • API और लाइब्रेरी: सॉफ्टवेयर पुरानी DirectX वर्शन पर निर्भर हो सकता है।
    • फ़र्मवेयर/BIOS: पुराना BIOS नया CPU सपोर्ट न करे।
  • असंगति (Incompatibility) के परिणाम
    • असंगति से सिस्टम क्रैश, ब्लू स्क्रीन ऑफ डेथ (BSOD), धीमी गति या डेटा हानि हो सकती है।
    • उदाहरण: Windows 11 में TPM 2.0 अनिवार्य है
    • बिना इसके पुराने PC अपग्रेड नहीं होंगे।
    • डेवलपर्स संगतता मोड (Compatibility Mode) प्रदान करते हैं।​
  • समाधान रणनीतियाँ
    • लंबे समय के लिए कम्पैटिबिलिटी बनाए रखने हेतु।
    • मानकीकरण: PCIe, USB-C जैसे यूनिवर्सल स्टैंडर्ड अपनाएँ।
    • वर्चुअलाइजेशन: संगतता मुद्दों से बचने हेतु Docker या VMs।
    • अपडेट्स: नियमित OS और सॉफ्टवेयर अपडेट।
    • क्लाउड कंप्यूटिंग: प्लेटफ़ॉर्म-स्वतंत्र ऐप्स जैसे SaaS (Google Workspace)।