कंप्यूटर : एक परिचय (Part – I)

Total Questions: 50

31. 'स्टोर्ड प्रोग्राम' की अवधारणा किसने शुरू की थी? [S.S.C. संयुक्त हायर सेकण्डरी (10+2) स्तरीय परीक्षा, 2013]

Correct Answer: (a) जॉन वॉन न्यूमैन्न
Solution:
  • कंप्यूटर के संदर्भ में 'स्टोर्ड प्रोग्राम' की अवधारणा (Concept) 1940 के दशक में कंप्यूटर वैज्ञानिक जॉन वॉन न्यूमैन्न (John Von Neumann) ने शुरू की थी।
  • स्टोर्ड प्रोग्राम क्या है?
    • स्टोर्ड प्रोग्राम की अवधारणा के अनुसार, कंप्यूटर के निर्देश (प्रोग्राम) और डेटा दोनों को एक ही मेमोरी में बाइनरी रूप में संग्रहीत किया जाता है।
    • इससे कंप्यूटर स्वयं निर्देशों को पढ़ सकता है, निष्पादित कर सकता है
    • यहां तक कि उन्हें मध्यवर्ती गणनाओं के आधार पर संशोधित भी कर सकता है।
    • यह विचार पुराने कंप्यूटरों से अलग था, जहां निर्देश हार्डवायर्ड या अलग प्लगबोर्ड पर सेट किए जाते थे।
  • जॉन वॉन न्यूमैन का योगदान
    • जॉन वॉन न्यूमैन, एक हंगेरियन-अमेरिकी गणितज्ञ और भौतिक विज्ञानी, ने 1945 के लिए एक रिपोर्ट में इस अवधारणा को विस्तार से प्रस्तुत किया।
    • इस रिपोर्ट को "First Draft of a Report on the EDVAC" के नाम से जाना जाता है। उन्होंने प्रस्तावित किया
    • मेमोरी में प्रोग्राम को संग्रहीत करने से कंप्यूटर अधिक लचीला और सामान्य उद्देश्य वाला बनेगा।
    • यह वॉन न्यूमैन आर्किटेक्चर के रूप में प्रसिद्ध हो गया, जो आज अधिकांश कंप्यूटरों में उपयोग होता है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1940 के दशक में, द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी सेना के लिए ENIAC जैसे कंप्यूटर बन रहे थे
    • लेकिन वे प्रोग्राम को मेमोरी में स्टोर नहीं कर पाते थे—प्रोग्राम बदलने के लिए वायरींग बदलनी पड़ती थी।
    • वॉन न्यूमैन ने ENIAC प्रोजेक्ट में शामिल होकर EDVAC के डिजाइन में सुधार किया।
    • हालांकि, इस विचार की जड़ें पहले के कार्यों जैसे एलन ट्यूरिंग के यूनिवर्सल ट्यूरिंग मशीन (1936) में भी दिखती हैं
    • लेकिन वॉन न्यूमैन ने इसे व्यावहारिक इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर के लिए लागू किया।
  • प्रभाव और महत्व
    • इस अवधारणा ने कंप्यूटिंग को क्रांति दी, क्योंकि इससे सॉफ्टवेयर को आसानी से बदला जा सकता है
    • बिना हार्डवेयर बदलें। आज के स्मार्टफोन, लैपटॉप और सुपरकंप्यूटर सभी इसी पर आधारित हैं।
    • हालांकि, आधुनिक चुनौतियां जैसे वॉन न्यूमैन बॉटलनेक (मेमोरी और प्रोसेसर के बीच डेटा ट्रांसफर की सीमा) अब हल करने की कोशिश हो रही है।
  • विवाद और स्पष्टीकरण
    • कुछ इतिहासकारों का मानना है कि यह विचार वॉन न्यूमैन के अलावा EDVAC टीम (जैसे प्रेस्पर एकर्ट और जॉन मोचली) का भी था
    • लेकिन वॉन न्यूमैन की रिपोर्ट ने इसे लोकप्रिय बनाया।
    • भारत में प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे SSC, UPSC में यह प्रश्न आम है, और उत्तर हमेशा जॉन वॉन न्यूमैन ही होता है।

32. गणना यंत्र अबेकस (Abacus) का आविष्कार किसने किया था?

Correct Answer: (a) चीन
Solution:
  • गणना यंत्र (Calculation Machine) अबेकस (Abacus) का आविष्कार चीन द्वारा किया गया माना जाता है।
  • प्रारंभिक उत्पत्ति
    • अबेकस की शुरुआत उंगलियों, पत्थरों या रेत पर रेखाएँ खींचकर की गई गणनाओं से हुई।
    • मेसोपोटामिया के सुमेरियन लोगों ने इसे लकड़ी या पत्थर की फ्रेम में मोतियों या पत्थरों के साथ व्यवस्थित रूप दिया
    • जो जोड़, घटाव, गुणा और भाग जैसी बुनियादी गणनाओं के लिए उपयोगी था।
    • कोई विशिष्ट व्यक्ति इसके निर्माता के रूप में दर्ज नहीं है, बल्कि इसे सामूहिक सांस्कृतिक विकास माना जाता है।
    • मिस्र में भी 2000 ईसा पूर्व के आसपास समान उपकरणों के चित्र मिले हैं।
  • विभिन्न संस्कृतियों में विकास
    • चीन में सुानपान (Suanpan) नामक अबेकस का रूप 2nd शताब्दी ईसा पूर्व से प्रचलित हुआ
    • जिसमें 2 ऊपरी और 5 निचले मोती होते थे; यह मिंग राजवंश (14वीं शताब्दी) में लोकप्रिय हुआ।​
    • ग्रीस और रोम में रोमन अबेकस विकसित हुआ, जिसमें कांस्य प्लेट पर खांचे और मोती होते थे, जो व्यापारिक गणनाओं के लिए आदर्श था।​
    • जापान में सोरोबान (Soroban) 17वीं शताब्दी में आया, जो आज भी एशिया में गणितीय प्रशिक्षण के लिए उपयोग होता है।​
      ये सभी रूप मूल मेसोपोटामियन डिज़ाइन से प्रेरित थे, लेकिन स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार संशोधित किए गए।
  • कार्यप्रणाली और महत्व
    • अबेकस एक यांत्रिक कैलकुलेटर था, जिसमें ऊर्ध्वाधर छड़ें या तार होते थे जिन पर मोती सरकाए जाते थे
    • नीचे का मोती इकाई का 1 मान रखता, ऊपर का 5 या 10। यह मानव इतिहास का पहला पोर्टेबल गणना यंत्र था
    • जो बड़े संख्याओं की त्वरित गणना सक्षम बनाता था।
    • आधुनिक कंप्यूटरों के विकास में यह आधारभूत कदम था, क्योंकि इसने द्विआधारी प्रणाली जैसी अवधारणाओं को प्रभावित किया।​
  • आधुनिक उपयोग और विरासत
    • आज अबेकस मुख्यतः बच्चों के मानसिक गणित प्रशिक्षण के लिए उपयोग होता है
    • विशेषकर जापान और चीन में प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं।
    • क्रैनमर अबेकस जैसे अनुकूलित संस्करण अंधे व्यक्तियों के लिए विकसित किए गए।
    • हालांकि इलेक्ट्रॉनिक कैलकुलेटरों ने इसे प्रतिस्थापित कर दिया, लेकिन यह गणितीय सोच की नींव बनी रही।

33. अबेकस (Abacus) का उपयोग किया जाता है-

Correct Answer: (d) सभी
Solution:
  • अबेकस (Abacus) का उपयोग व्यापारिक गणनाओं में, जोड़ में, घटाना इत्यादि कार्यों में किया जाता है।
  • अबेकस क्या है?
    • अबेकस एक यांत्रिक फ्रेम है जिसमें लकड़ी या धातु की छड़ें होती हैं, जिन पर मोतियां (beads) सरकाई जाती हैं।
    • यह दो भागों में विभाजित होता है: ऊपरी भाग (जहां 1 या 2 मोतियां होती हैं
    • प्रत्येक का मूल्य 5) और निचला भाग (4 या 5 मोतियां, प्रत्येक का मूल्य 1)।
    • केंद्र में एक बार होता है जो दोनों को अलग करता है।
    • विभिन्न संस्कृतियों में इसके रूप अलग हैं, जैसे चीनी सुयानपन (suanpan) या जापानी सोरोबन।
  • ऐतिहासिक उपयोग
    • प्राचीन काल से अबेकस का उपयोग व्यापारियों, लेखाकारों और गणितज्ञों द्वारा किया जाता रहा है।
    • अफ्रीका, एशिया (विशेषकर चीन, जापान) और यूरोप में इसके प्रमाण मिलते हैं।
    • मेसोपोटामिया (लगभग 2700 ईसा पूर्व) से इसके शुरुआती रूप दिखते हैं
    • मध्ययुग में यह व्यापार गणनाओं के लिए आवश्यक था। आधुनिक कंप्यूटरों के विकास में भी यह बुनियादी गणना का प्रतीक माना जाता है।
    • यह डेनिश स्कूल अबेकस का उदाहरण है, जो प्रारंभिक शिक्षा में मोतियों को सरकाकर गिनती सिखाने के लिए इस्तेमाल होता था।
  • मुख्य उपयोग
    • अबेकस का प्राथमिक उपयोग गणितीय गणनाओं के लिए है:
    • गिनती और स्थान मूल्य: प्रत्येक कॉलम दस के घात (units, tens, hundreds) का प्रतिनिधित्व करता है।
    • जोड़-घटाव: मोतियों को ऊपर या नीचे सरकाकर संख्याएं बनाई और बदली जाती हैं।
    • गुणा-भाग: दोहराई गई जोड़ या विशेष तकनीकों से।
    • उन्नत गणनाएं: दशमलव, वर्गमूल, घनमूल भी संभव।
    • निचली कक्षाओं (कक्षा 1-5) में यह संख्या प्रणाली समझने के लिए आदर्श है।​
  • शैक्षिक लाभ
    • आजकल अबेकस बच्चों के मस्तिष्क विकास के लिए क्लासेस में सिखाया जाता है:
    • दोनों मस्तिष्क गोलार्धों (दाएं-बाएं) का समन्वय बढ़ाता है—बाएं हाथ दाएं मस्तिष्क को, दाएं हाथ बाएं को उत्तेजित करता है।
    • एकाग्रता, स्मृति, कल्पना शक्ति, श्रवण कौशल, गति और सटीकता में सुधार।
    • 3 स्तरों के बाद बच्चे मानसिक अबेकस (mental abacus) की कल्पना कर बिना उपकरण के तेज गणना कर लेते हैं—NON-अबेकस छात्रों से 6 गुना तेज।
    • यह गणित में रुचि, धैर्य, आत्मविश्वास और स्थानिक क्षमता बढ़ाता है।​
    • रूसी स्कोटी अबेकस विभिन्न रंगों की मोतियों से गणनाओं को दर्शाता है।​
  • उपयोग कैसे करें (उदाहरण)
    • मान लीजिए सुयानपन अबेकस:
    • संख्या 23 सेट करें: दूसरी कॉलम में ऊपर 2 मोतियां (10+10), नीचे 3 मोतियां।
    • जोड़ 15: पहली कॉलम में 1 ऊपर (10), दूसरी में 1 नीचे (5)—कुल 38।
    • घटाव 20: दूसरी कॉलम से 2 ऊपर मोतियां नीचे करें।
    • उन्नत स्तर पर उंगलियों से बिना अबेकस के ही गणना।
  • आधुनिक प्रासंगिकता
    • कैलकुलेटर के युग में भी अबेकस मानसिक गणना के लिए उपयोगी है।
    • भारत में Indian Abacus जैसी संस्थाएं 6-13 वर्ष के बच्चों को प्रशिक्षित करती हैं।
    • यह IQ बढ़ाने और प्रतियोगिताओं (जैसे मैथ्स ऑलंपियाड) में मदद करता है।

34. टेब्युलेटर, जिसका उपयोग सांख्यिकीय सूचनाओं को संसाधित करने हेतु कार्ड्स को पंच करने के लिए किया जाता है, का आविष्कार किसने किया था? [UP SI/ASI 05.12.2021 (1" Shift)]

Correct Answer: (c) हरमन होलेरिथ
Solution:
  • टेबुलेटर जिसका आविष्कार हरमन होलेरिथ (Herman Hollerith) द्वारा 1890 की अमेरिकी जनगणना के डेटा को संसाधित करने में मदद करने के लिए किया गया था।
  • यह एक इलेक्ट्रोमैकेनिकल मशीन थी जिसका उपयोग सांख्यिकीय सूचनाओं को संसाधित करने हेतु कार्ड्स को पंच करने के लिए किया जाता है।
  • हरमन होलेरिथ का परिचय
    • हरमन होलेरिथ एक अमेरिकी इंजीनियर और आविष्कारक थे, जिन्होंने 19वीं सदी के अंत में डेटा प्रोसेसिंग की दुनिया में क्रांति ला दी।
    • उनका जन्म 1860 में न्यूयॉर्क में हुआ था और वे कोलंबिया विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित थे।
    • उन्होंने 1880 के दशक में अमेरिकी जनगणना की जटिलताओं को देखते हुए एक कुशल प्रणाली विकसित की, जो मैनुअल गणना से बहुत तेज थी।​
  • टेब्युलेटर का आविष्कार और विकास
    • टेब्युलेटर, जिसे टैबुलेटिंग मशीन भी कहा जाता है, का आविष्कार होलेरिथ ने 1880 के दशक के अंत में किया।
    • यह एक इलेक्ट्रो-मैकेनिकल डिवाइस था जो पंच कार्ड्स पर छिद्रों (पंच) के माध्यम से डेटा पढ़ता, वर्गीकृत करता और सांख्यिकीय आंकड़ों को संसाधित करता था।
    • 1889 में उन्होंने इसका पेटेंट प्राप्त किया। यह मशीन विद्युत धारा का उपयोग करके छिद्रों का पता लगाती थी
    • काउंटर को सक्रिय करती थी, जिससे लाखों रिकॉर्ड्स को मिनटों में प्रोसेस किया जा सकता था।
  • पंच कार्ड्स की भूमिका
    • टेब्युलेटर पंच कार्ड्स पर निर्भर था, लेकिन ध्यान दें कि पंच कार्ड्स का मूल विचार 1801 में फ्रांसीसी इंजीनियर जोसेफ मैरी जैक्वार्ड ने जेक्वार्ड लूम के लिए दिया था।
    • होलेरिथ ने इस तकनीक को अपनाया और इसे सांख्यिकीय डेटा के लिए अनुकूलित किया।
    • उनके कार्ड्स पर आयताकार छिद्र होते थे, जो मशीन द्वारा आसानी से पढ़े जा सकते थे।
    • टेब्युलेटर कार्ड्स को पंच करने के लिए अलग पंचिंग डिवाइस का उपयोग करता था।​
  • 1890 अमेरिकी जनगणना में उपयोग
    • टेब्युलेटर का सबसे बड़ा परीक्षण 1890 की अमेरिकी जनगणना में हुआ।
    • पारंपरिक विधि से जनगणना में 7-8 वर्ष लगते थे, लेकिन होलेरिथ की मशीन ने इसे केवल 2-3 महीनों में पूरा कर दिया।
    • इससे 62 मिलियन लोगों का डेटा संसाधित हुआ और लाखों डॉलर की बचत हुई।
    • इस सफलता के बाद यूएस सेंसस ब्यूरो ने उनकी टैबुलेटिंग मशीन कंपनी को अनुबंध दिया, जो बाद में आईबीएम का आधार बनी।
  • तकनीकी विशेषताएं
    • इनपुट: पंच कार्ड्स पर डेटा पंचिंग।
    • प्रोसेसिंग: विद्युत सर्किट और मैकेनिकल काउंटर डेटा को वर्गीकृत करते थे।
    • आउटपुट: सॉर्टर और प्रिंटर के साथ संख्यात्मक तालिकाएं।
    • यह मशीन 80-कॉलम कार्ड्स का उपयोग करती थी
    • जो 12 पंक्तियों में डेटा स्टोर करती थी। बाद के संस्करणों में सॉर्टिंग और अरिथमेटिक क्षमताएं जोड़ी गईं।​
  • ऐतिहासिक महत्व
    • होलेरिथ का टेब्युलेटर आधुनिक कंप्यूटिंग का अग्रदूत था। इसने डेटा प्रोसेसिंग को स्वचालित किया
    • 20वीं सदी में व्यवसायों, सरकारों तथा आईबीएम जैसी कंपनियों द्वारा उपयोग हुआ।
    • 1930 के दशक तक यह प्रचलित रहा, जब इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटरों ने इसे बदल दिया। होलेरिथ को "आधुनिक डेटा प्रोसेसिंग का जनक" कहा जाता है।
  • अन्य संबंधित तथ्य
    • होलेरिथ ने 1896 में टैबुलेटिंग मशीन कंपनी स्थापित की, जो 1911 में कंप्यूटिंग-टैबुलेटिंग-रिकॉर्डिंग कंपनी बनी और 1924 में आईबीएम के नाम से जानी गई।
    • उनकी तकनीक ने 1900, 1910 आदि जनगणनाओं में भी काम किया।
    • हालांकि, पंच कार्ड का श्रेय जैक्वार्ड को जाता है, लेकिन टेब्युलेटर का विद्युत-यांत्रिक एकीकरण होलेरिथ की देन है।​

35. पास्कल एडिंग मशीन बनाने वाले ब्लेज पास्कल किस देश के निवासी थे? [I.B.P.S. (Clerk) Exam. 22.12.2012]

Correct Answer: (e) फ्रांस
Solution:
  • पास्कल एडिंग मशीन बनाने वाले ब्लेज पास्कल (Blaise Pascal) फ्रांसीसी गणितज्ञ, भौतिकविद (Physicist) और धार्मिक दार्शनिक (Religious Philosopher) थे।
  • इन्होंने पास्कलाइन नामक पहला यांत्रिक कैलकुलेटर (Mechanical Calculator) का विकास (Invention) किया था।
  • उनका जन्म और देश
    • ब्लेज पास्कल का जन्म 19 जून, 1623 को फ्रांस के क्लेरमों‑फेरां (Clermont‑Ferrand) नामक शहर में हुआ था
    • जो फ्रांस के ऑवेर्न (Auvergne) क्षेत्र में स्थित है।
    • इस प्रकार वे पूरे जीवन में फ्रांसीसी नागरिक रहे और उनकी राष्ट्रीयता “फ्रांसीसी” ही मानी जाती है।​
  • पास्कल एडिंग मशीन (Pascaline) का आविष्कार
    • 1642 में, केवल लगभग 18–19 वर्ष की उम्र में, ब्लेज पास्कल ने अपने पिता की टैक्स और लेखा‑कार्यों को आसान बनाने के लिए एक मैकेनिकल गणना मशीन “पास्कलाइन” या पास्कल एडिंग मशीन बनाई।
    • यह मशीन इतिहास में पहली प्रकार की कार्यक्षम मैकेनिकल एडिंग मशीन मानी जाती है, जो जोड़ और घटाव की क्रियाएँ कर सकती थी।
  • उनका देश और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
    • फ्रांसीसी समाज और राजनीतिक व्यवस्था में टैक्स‑संग्रहण और प्रशासनिक गणना बहुत महत्वपूर्ण थे
    • इसलिए पास्कल के पिता को भी बहुत‑से अंकगणितीय कार्य करने पड़ते थे
    • जिससे ब्लेज को गणना‑मशीन बनाने का प्रेरणा मिली। वह आधुनिक यूरोपीय विज्ञान और दर्शन के उस महत्वपूर्ण फ्रांसीसी परंपरा का हिस्सा थे
    • जिसमें रेने देकार्त, गैलिलियो के विचारों के फ्रांसीसी अध्ययन, और दबाव, निर्वात, द्रव‑विज्ञान जैसे विषयों का विशेष योगदान शामिल है।
  • उनका देश में जीवन और मृत्यु
    • ब्लेज पास्कल अपने संपूर्ण जीवनकाल (1623–1662) में फ्रांस के अंदर ही रहे – सर्वप्रथम ऑवेर्न में, फिर पेरिस और अन्य फ्रांसीसी शहरों में।
    • उनका देहांत 19 अगस्त, 1662 को पेरिस में फ्रांस में ही हुआ
    • जिससे स्पष्ट होता है कि वे जन्म से मृत्यु तक के दौरान फ्रांस के नागरिक और निवासी ही रहे।
  • संक्षेप में उत्तर
    • इस प्रकार, पास्कल एडिंग मशीन बनाने वाले ब्लेज पास्कल फ्रांस के निवासी थे
    • वे फ्रांस में जन्मे, फ्रांस में ही विज्ञान, गणित और दर्शन में काम किया, और फ्रांस में ही अपना जीवन समाप्त किया।

36. प्रयोगशाला 'समीर' की स्थापना किस वर्ष हुई थी।

Correct Answer: (c) 1984
Solution:
  • प्रयोगशाला 'समीर' की स्थापना वर्ष 1984 में हुई थी।
  • समीर (SAMEER) आर एफ एवं माइक्रोवेव सिस्टम (RF & Microwave System) के क्षेत्र में अनुसंधान, डिजाइन और विकास के लिए समर्पित प्रमुख अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला है।
  • समीर का पूरा नाम और उद्देश्य
    • समीर का पूरा नाम सोसायटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च है।
    • इसका मुख्य उद्देश्य माइक्रोवेव इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी, आरएफ एवं माइक्रोवेव सिस्टम के क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) कार्य करना है।
    • यह ताटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च (TIFR), मुंबई के माइक्रोवेव इंजीनियरिंग ग्रुप का एक ऑफशूट है
    • जो 1977 में स्थापित स्पेशल माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स यूनिट (SMPU) से विकसित हुआ।
  • स्थापना का इतिहास
    • समीर की स्थापना 1984 में मुंबई में की गई थी, जब यह भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के तहत स्वतंत्र आरएंडडी प्रयोगशाला बनी।
    • 1988 में इसे अपने वर्तमान स्थान, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT बॉम्बे), मुंबईに移ाया गया।
    • इससे पहले, यह TIFR से जुड़ी थी। बाद में संगठन का विस्तार हुआ: 1987 में चेन्नई का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स सेंटर समीर में विलय हो गया
    • 1994 में कोलकाता में मिलिमीटर वेव टेक्नोलॉजी के लिए एक नया केंद्र स्थापित किया गया।
  • संगठन की संरचना
    • वर्तमान में समीर के तीन मुख्य केंद्र हैं:
    • मुंबई केंद्र: मुख्यालय, माइक्रोवेव और आरएफ सिस्टम पर फोकस।
    • चेन्नई केंद्र: इलेक्ट्रोमैग्नेटिक्स और संबंधित तकनीकों पर कार्य।
    • कोलकाता केंद्र: मिलिमीटर वेव और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी पर अनुसंधान।
      यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अधीन एक स्वायत्त संस्था है
    • जो रक्षा, संचार, मौसम विज्ञान और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में योगदान देती है।
  • महत्वपूर्ण उपलब्धियां और भूमिका
    • समीर ने रडार सिस्टम, सैटेलाइट कम्युनिकेशन, मौसम रडार और माइक्रोवेव उपकरणों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
    • उदाहरणस्वरूप, यह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और इसरो जैसे संगठनों के साथ सहयोग करता है।
    • 2019-20 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, यह RF एवं माइक्रोवेव सिस्टम के विशेषज्ञ के रूप में जाना जाता है।
  • वर्तमान स्थिति (मार्च 2026 तक)
    • समीर आज भी सक्रिय है और डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है।
    • इसकी आधिकारिक वेबसाइट (sameer.gov.in) पर नवीनतम प्रोजेक्ट्स और रिपोर्ट्स उपलब्ध हैं।
    • यह भारत की स्वदेशी तकनीक विकास में अग्रणी भूमिका निभा रही है।

37. भारत की सिलिकॉन वैली कहां स्थित है? [R.B.I. (Asst.) Exam. 21.07.2013 SSC Phase XII 2024]

Correct Answer: (e) बंगलुरू
Solution:
  • बंगलुरू को भारत की सिलिकॉन वैली कहा जाता है।
  • बंगलुरू में नेटसर्व टेक्नोलॉजीज, याहू, आरैकल एचपी, लेनोवो तथा कॉग्नीजेंट जैसी IT कंपनियों के कार्यालय मौजूद हैं। यही कारण है
  • इसे सिलिकॉन वैली कहा जाता है।
  • भारत की सिलिकॉन वैली कर्नाटक राज्य की राजधानी बेंगलुरु (बैंगलोर) में स्थित है।
  • यह नाम इस शहर को सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सॉफ्टवेयर उद्योग के वैश्विक केंद्र के रूप में मिला है।
  • स्थान और भौगोलिक विशेषताएं
    • बेंगलुरु दक्कन पठार पर मैसूर पठार के हिस्से में बसा है, जो समुद्र तल से लगभग 900 मीटर ऊंचाई पर स्थित है।
    • शहर का क्षेत्रफल करीब 741 वर्ग किलोमीटर है और यह पूरे वर्ष मध्यम जलवायु के लिए प्रसिद्ध है
    • जिसे "गार्डन सिटी" भी कहा जाता है। इसकी ऊंचाई और मौसम ने इसे आईटी कंपनियों के लिए आदर्श बनाया है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1980 के दशक में भारत सरकार की सॉफ्टवेयर निर्यात नीतियों और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स जैसी विदेशी कंपनियों के निवेश से बेंगलुरु का उदय हुआ।
    • 1990 के दशक तक यहाँ इन्फोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी कंपनियाँ स्थापित हो गईं।
    • अमेरिका की मूल सिलिकॉन वैली (कैलिफोर्निया) की तुलना में यहाँ सिलिकॉन चिप्स से ज्यादा सॉफ्टवेयर विकास पर फोकस रहा।
  • प्रमुख आईटी क्षेत्र
    • शहर के इलेक्ट्रॉनिक सिटी, व्हाइटफील्ड, होसर रोड और कई एसईजेड (विशेष आर्थिक क्षेत्र) आईटी हब हैं।
    • यहाँ 10,000 से अधिक स्टार्टअप्स हैं और 2025 तक यह भारत का 40% से ज्यादा आईटी निर्यात करता है।
    • गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एप्पल और अमेज़न जैसी वैश्विक दिग्गजों के बड़े कैंपस यहाँ हैं।
  • आर्थिक महत्व
    • बेंगलुरु भारत की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला शहर है, जिसका जीडीपी 2025 में 110 बिलियन डॉलर से अधिक है।
    • यह लाखों नौकरियाँ पैदा करता है और स्टार्टअप इकोसिस्टम में देश का नंबर एक शहर है।
    • हाल ही में यहाँ 129 शीर्ष उद्यमी सक्रिय हैं, जो मुंबई और दिल्ली से आगे है।
  • चुनौतियाँ और भविष्य
    • ट्रैफिक जाम, पानी की कमी और बढ़ती लागत चुनौतियाँ हैं।
    • सरकार दूसरी सिलिकॉन वैली (500 एकड़ में) बनाने की योजना बना रही है
    • बोझ कम हो। फिर भी, बेंगलुरु नवाचार का प्रतीक बना रहेगा।

38. इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग स्थित है- [U.P.U.D.A/L.D.A. (Pre) 2006, Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2012]

Correct Answer: (b) देहरादून में
Solution:
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेसिंग देहरादून में स्थित है।
  • स्थापना और इतिहास
    • यह संस्थान 1966 में भारतीय अंतरिक्ष विभाग (DOS) के तहत स्थापित किया गया था।
    • पहले इसे भारतीय फोटो व्याख्या संस्थान (Indian Photo Interpretation Institute) के नाम से जाना जाता था
    • जो सर्वे ऑफ इंडिया के संरक्षण में शुरू हुआ। 27 मई 1972 को कालिदास रोड पर इसका भवन बनाया गया।
  • उद्देश्य और कार्यक्षेत्र
    • IIRS रिमोट सेंसिंग, जियोइनफॉर्मेटिक्स, जीपीएस तकनीक में अनुसंधान, उच्च शिक्षा और प्रशिक्षण का प्रमुख केंद्र है।
    • यह प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और भू-सूचना विज्ञान के क्षेत्र में क्षमता निर्माण करता है।
    • संस्थान भारत और विदेशों से आने वाले उपयोगकर्ताओं के लिए विभिन्न अवधि (एक सप्ताह से दो वर्ष) के पाठ्यक्रम चलाता है
    • संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध एशिया-प्रशांत अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा केंद्र (CSSTE-AP) को समर्थन प्रदान करता है।
  • नेतृत्व और सहयोग
    • वर्तमान में इसका निदेशक डॉ. आर.पी. सिंह या प्रकाश चौहान हैं।
    • IIRS ने अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ क्षमता निर्माण, फैकल्टी आदान-प्रदान और अनुसंधान में सहयोग किया है।
    • यह ISRO का एक महत्वपूर्ण केंद्र है जो सुदूर संवेदन तकनीकों को स्थानांतरित करने में सक्रिय भूमिका निभाता है।

39. कंप्यूटर निम्न में से कौन-सा कार्य नहीं करता? [M.P.P.C.S. (Pre) 2015]

Correct Answer: (c) अंडरस्टैंडिंग
Solution:
  • कंप्यूटर उपयोगकर्ता (User) द्वारा दिए गए कार्य को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निर्देशानुसार विश्लेषण (Analysis) कर अपेक्षित जानकारी उपलब्ध कराता है।
  • यह पूरी प्रक्रिया (Process) एक चरणबद्ध तरीके (Ordered Form) से संपन्न होती है-
    • इनपुटिंग
    • प्रोसेसिंग
    • कंप्यूटिंग
    • आउटपुटिंग
    • स्टोरेज
  • कंप्यूटर के मुख्य कार्य
    • कंप्यूटर के पांच मूलभूत कार्य होते हैं: इनपुट (डेटा प्राप्त करना), प्रोसेसिंग (डेटा संसाधित करना), आउटपुट (परिणाम देना), स्टोरेज (डेटा संग्रहीत करना) और कंट्रोल (सभी प्रक्रियाओं को नियंत्रित करना)।
    • इनपुट: कीबोर्ड, माउस, स्कैनर आदि से डेटा और निर्देश प्राप्त करता है, जैसे टाइपिंग या क्लिक करना।​
    • प्रोसेसिंग: CPU इनपुट डेटा को गणना, तुलना या विश्लेषण करके उपयोगी जानकारी में बदलता है।​
    • आउटपुट: मॉनिटर, प्रिंटर आदि से परिणाम दिखाता या प्रिंट करता है।​
    • स्टोरेज: हार्ड डिस्क, SSD या क्लाउड में डेटा लंबे समय तक रखता है।​
    • कंट्रोल: कंट्रोल यूनिट सभी भागों को समन्वयित करती है ताकि सही क्रम में कार्य हो।​
    • ये कार्य कंप्यूटर को तेज, सटीक और बहुमुखी बनाते हैं, लेकिन यह हमेशा मानव द्वारा दिए गए निर्देशों पर चलता है।​
  • कंप्यूटर द्वारा किए जाने वाले कार्य
    • कंप्यूटर समझना (Understanding) या स्वतंत्र निर्णय लेना जैसा कार्य नहीं करता।
    • यह केवल दिए गए एल्गोरिदम या प्रोग्राम के अनुसार मैकेनिकल तरीके से काम करता है, बिना भावनाओं, तर्क या संदर्भ समझे।
  • क्यों नहीं कर सकता समझ?
    • कंप्यूटर बाइनरी कोड (0 और 1) पर आधारित है, जो गणितीय संचालन करता है, लेकिन मानवीय बुद्धि या अंतर्ज्ञान की कमी है।​
    • उदाहरण: अगर आप पूछें "बारिश हो रही है, छाता लाओ", तो कंप्यूटर केवल शब्द संसाधित करेगा
    • लेकिन मौसम समझकर खुद निर्णय नहीं लेगा—इसके लिए AI प्रोग्रामिंग चाहिए।​
    • मानव स्पर्श आवश्यक है: कंप्यूटर प्रोग्राम्ड होता है, स्वयं सोच नहीं सकता।​
  • कंप्यूटर की विशेषताएं जो कार्य सीमित करती हैं
    • उच्च गति: सेकंडों में अरबों गणनाएं, लेकिन बिना समझे।​
    • सटीकता: 100% सही अगर इनपुट सही, अन्यथा "गार्बेज इन, गार्बेज आउट"।​
    • निर्भरता: बिना बिजली/प्रोग्राम के निष्क्रिय।​

40. कंप्यूटर जनरेशन का I से V का सही अनुक्रम चुनें- [रेलवे एनटीपीसी ऑनलाइन परीक्षा, 31 मार्च, 2016 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) वैक्यूम ट्यूब, ट्रांजिस्टर, एकीकृत सर्किट, वीएलएसआई (VLSI) माइक्रोप्रोसेसर, यूएलएसआई (ULSI) माइक्रोप्रोसेसर
Solution:
  • कंप्यूटर की पांच प्रमुख पीढ़ियां एवं उनके विवरण-
  • पहली पीढ़ी (1942-1955), वैक्यूम ट्यूब (Vacuum Tube) आधारित
  • दूसरी पीढ़ी: (1955-1964), ट्रांजिस्टर तकनीक पर अत्धारित
  • तीसरी पीढ़ी (1964-1975), एकीकृत परिपथ (Integrated Circuit) पर आधारित
  • चौथी पीढ़ी (1975- वर्तमान), वीएलएसआई Very Large Scale Integration (VLSI) माइक्रोप्रोसेसर पर आधारित पांचवीं पीढ़ी (वर्तमान भविष्य), कृत्रिम वैद्धिक (Artificial
  • Intelligence) आधारित
  • पहली पीढ़ी (1946-1956)
    • इस पीढ़ी के कंप्यूटर वैक्यूम ट्यूब तकनीक पर आधारित थे
    • जो बहुत बड़े आकार के, अधिक बिजली खपत वाले और गर्मी उत्पन्न करने वाले होते थे।
    • ENIAC पहला इलेक्ट्रॉनिक कंप्यूटर था, जो मुख्य रूप से वैज्ञानिक गणनाओं के लिए इस्तेमाल होता था।
    • मशीन भाषा ही एकमात्र प्रोग्रामिंग भाषा थी, और रखरखाव बहुत कठिन था।
  • दूसरी पीढ़ी (1956-1964)
    • ट्रांजिस्टर के आविष्कार ने वैक्यूम ट्यूब को बदल दिया, जिससे कंप्यूटर छोटे, तेज़, विश्वसनीय और कम बिजली खपत वाले बने।
    • FORTRAN और COBOL जैसी हाई-लेवल भाषाओं का विकास हुआ।
    • इस पीढ़ी में IBM 1401 जैसे कंप्यूटर व्यावसायिक उपयोग के लिए लोकप्रिय हुए।
  • तीसरी पीढ़ी (1964-1971)
    • इंटीग्रेटेड सर्किट (IC) के उपयोग से कंप्यूटर और छोटे तथा सस्ते हो गए। कीबोर्ड, मॉनिटर और ऑपरेटिंग सिस्टम जैसे सुविधाएँ आईं।
    • IBM 370 जैसे मॉडल मल्टीप्रोग्रामिंग सपोर्ट करते थे, जिससे कई प्रोग्राम एक साथ चल सकते थे।
  • चौथी पीढ़ी (1971-1990)
    • माइक्रोप्रोसेसर (VLSI - Very Large Scale Integration) के युग में पर्सनल कंप्यूटर (PC) का जन्म हुआ
    • जैसे IBM PC। GUI (ग्राफिकल यूजर इंटरफेस), माउस और इंटरनेट की शुरुआत हुई। हार्ड डिस्क, फ्लॉपी ड्राइव जैसी स्टोरेज तकनीकें आम हो गईं।
  • पाँचवीं पीढ़ी (1985-वर्तमान)
    • ULSI (Ultra Large Scale Integration), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), न्यूरल नेटवर्क और वॉयस रिकग्निशन पर केंद्रित।
    • जापान का Fifth Generation Computer Project AI पर फोकस करता था।
    • आज के स्मार्टफोन, क्लाउड कंप्यूटिंग और मशीन लर्निंग इसी पीढ़ी के उदाहरण हैं।​​