कला एवं संस्कृति (राजस्थान) (Part-1)

Total Questions: 55

11. जयपुर राज्य के कारखाने का नाम, जहां कलाकार चित्र और लघु चित्र बनाते थे? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2013]

Correct Answer: (c) सूरतखाना
Solution:जयपुर राज्य के कारखाने का नाम सूरतखाना था, जहां कलाकार चित्र और लघु चित्र बनाते थे।

12. सुप्रसिद्ध चित्र 'बणी-ठणी' किस शैली का है? [I.A.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (d) किशनगढ़ शैली
Solution:बणी-ठणी चित्र किशनगढ़ शैली से संबंधित है। इस चित्र के चित्रकार निहाल चंद हैं। इस चित्र में एक ऐसी महिला को दर्शाया गया है, जो सुंदर एवं आकर्षक है। बणी-ठणी राजस्थान की किशनगढ़ रियासत के तत्कालीन शासक राजा सावंत सिंह की प्रेमिका थीं। राजा सामंत सिंह श्रृंगार प्रिय एवं अच्छे साहित्यकार थे, जो नागरीदास के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनकी प्रेमिका बणी-ठणी राधा का सौंदर्य, इनके काव्य पर आधारित है।

13. 'बणी ठणी' किस चित्र शैली से संबंधित थी? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2008]

Correct Answer: (b) किशनगढ़ शैली
Solution:बणी-ठणी चित्र किशनगढ़ शैली से संबंधित है। इस चित्र के चित्रकार निहाल चंद हैं। इस चित्र में एक ऐसी महिला को दर्शाया गया है, जो सुंदर एवं आकर्षक है। बणी-ठणी राजस्थान की किशनगढ़ रियासत के तत्कालीन शासक राजा सावंत सिंह की प्रेमिका थीं। राजा सामंत सिंह श्रृंगार प्रिय एवं अच्छे साहित्यकार थे, जो नागरीदास के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनकी प्रेमिका बणी-ठणी राधा का सौंदर्य, इनके काव्य पर आधारित है।

14. निम्नलिखित में से कौन-सा चित्रकार अलवर शैली की चित्रकला से संबंधित नहीं है? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2018]

Correct Answer: (c) नानकराम
Solution:अलवर शैली की चित्रकला का विकास अलवर रियासत के संस्थापक राव राजा प्रतापसिंह के काल में प्रारंभ हुआ। यह शैली जयसिंह के शासनकाल (1892-1937 ई.) के अंत तक जारी रही। इस शैली के प्रमुख कलाकार डालूराम, बलदेव, सालिगराम, जमनादास, छोटेलाल, बकसाराम और नंदराम हैं।

15. जमनादास, छोटेलाल, बकसाराम व नंदराम चित्रकला की किस शैली से संबद्ध हैं? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2013]

Correct Answer: (b) अलवर शैली
Solution:अलवर शैली की चित्रकला का विकास अलवर रियासत के संस्थापक राव राजा प्रतापसिंह के काल में प्रारंभ हुआ। यह शैली जयसिंह के शासनकाल (1892-1937 ई.) के अंत तक जारी रही। इस शैली के प्रमुख कलाकार डालूराम, बलदेव, सालिगराम, जमनादास, छोटेलाल, बकसाराम और नंदराम हैं।

16. प्रसिद्ध चित्रकार मुहम्मद शाह जयपुर के किस महाराजा का दरबारी चित्रकार था? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2023]

Correct Answer: (d) सवाई जय सिंह
Solution:सवाई जय सिंह (1699-1743 ई.) ने 1727 ई. में अपने नाम पर एक नई राजधानी जयपुर की स्थापना की। उनके शासन काल में जयपुर चित्रकला शैली संपन्न हुई और एक नामांकित स्वतंत्र शैली के रूप में उभरी। मुहम्मद शाह एवं साहिबराम उनके दरबारी चित्रकार थे।

17. राजस्थान के रीति-रिवाजों में 'आंणौ' क्या है? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2021]

Correct Answer: (c) विवाह के पश्चात दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजना
Solution:राजस्थान के रीति-रिवाजों में 'आंणौ' (Aanau) विवाह के पश्चात दुल्हन को दूसरी बार ससुराल भेजना है।

18. राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोकवाद्य, जिसकी डोरी में तनाव के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं- [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2013]

Correct Answer: (b) रावलों की मादल
Solution:'रावलों की मादल' राजस्थान का एकमात्र ऐसा लोकवाद्य है, जिसकी डोरी में तनाव के लिए पखावज की तरह लकड़ी के गुटके डाले जाते हैं।

19. निम्नलिखित में से कौन-सा सुषिर वाद्य नहीं है? [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2013]

(i) सुरनाई

(ii) अलगोजा

(iii) नागफणी

(iv) कमायचा

सही विकल्प चुनिए-

Correct Answer: (d) केवल (iv)
Solution:जिन वाद्य यंत्रों को फूंक से बजाया जाता है, सुषिर वाद्य यंत्र कहलाते हैं। प्रमुख सुषिर वाद्य यंत्र इस प्रकार हैं-

सुरनाई-इस वाद्य यंत्र को ढोली और लेगा जाति के लोग विवाह आदि मांगलिक अवसरों पर बजाते हैं।

अलगोजा- यह नाक की सांस से बजाया जाता है। ग्रामीण मीणा आदिवासियों में इसका प्रचलन है।

नागफणी- यह पीतल का सुषिर वाद्य है। होठों द्वारा ताकत से फूंक देने पर इसका वादन होता है।

'कमायचा'- नामक वाद्य यंत्र गज (शीशम की लकड़ी और घोड़े के बाल से बने) से इसे बजाया जाता है।

20. सूची-I एवं सूची-II को सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए- [R.A.S./R.T.S. (Pre), 2018]

लोक वाद्य यंत्रप्रख्यात कलाकार
A. भपंग1. सदीक खां
B. नड़2. जहूर खां
C. अलगोजा3. कर्णा भील
D. खड़ताल4. रामनाथ चौधरी

कूट:

ABCD
(a)(ii)(iii)(iv)(i)
(b)(iv)(iii)(ii)(i)
(c)(i)(ii)(iii)(iv)
(d)(ii)(i)(iii)(iv)
Correct Answer: (a)
Solution:सही सुमेलित हैं-
लोक वाद्य यंत्रप्रख्यात कलाकार
A. भपंगजहूर खां
B. नड़कर्णा भील
C. अलगोजारामनाथ चौधरी
D. खड़तालसदीक खां