Correct Answer: (d) तीजा मांजी का मंदिर
Solution:जोधपुर नरेश मानसिंह की तीसरी रानी भटियाणी प्रतापकुंवरी भगवान राम की अनन्य उपासिका थी। उसने राम भक्ति पर आधारित सैकड़ों पदों की रचना की। महाराजा मानसिंह की मृत्यु (1843 ई.) के 6 वर्ष बाद चंद्र ग्रहण पड़ने वाला था। ग्रहण पर दान देने के लिए रानी ने एक मंदिर का निर्माण कराया तथा जयपुर से राम, लक्ष्मण तथा सीता की प्रतिमाएं मंगवाकर स्थापित की। 1849 ई. में जब चंद्रग्रहण हुआ तो रानी ने नागौर से निरंजनी संप्रदाय के महंत मोतीराम को वह मंदिर भेंट कर दी। कुछ माह बाद ही यह मंदिर जमीन में धंस गया। अपना संकल्प खंडित होते देखकर रानी ने जमीन खरीदकर एक नया मंदिर बनवाया, जो अब तीजा मांजी का मंदिर कहलाता है। 1857 ई. में जब इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा हुई, तब राजमाता प्रताप कुंवरी और जोधपुर नरेश तखत सिंह तीन दिन तक मंदिर परिसर में ही रहे। राजा तखत सिंह ने इस मंदिर को बावड़ी गांव की दो बीघा जमीन भेंट की थी।