Solution:लाठी खेला भारतीय उपमहाद्वीप, विशेष रूप से बंगाल क्षेत्र (भारत और बांग्लादेश) की एक पारंपरिक मार्शल आर्ट और स्व-रक्षा तकनीक है। इसमें लाठी या छड़ी का उपयोग करके युद्ध कौशल का प्रदर्शन किया जाता है। इसके अभ्यासी को 'लठियल' कहा जाता है।
• कलारीपयट्टू केरल का एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जो "युद्ध के मैदान की कला" का अभ्यास है। यह भारत की सबसे पुरानी जीवित मार्शल आर्ट मानी जाती है, जिसकी उत्पत्ति केरल में हुई और जिसमें शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण के साथ-साथ विभिन्न हथियारों का उपयोग शामिल है।
• सिलंबम तमिलनाडु की एक प्राचीन और पारंपरिक हथियार-आधारित मार्शल आर्ट है, जो 2,500 से अधिक वर्षों से चली आ रही है। यह कला विशेष रूप से बांस की लाठी (पेरंबू) को घुमाने पर आधारित है, जिसमें तीव्र गति, पैरों का नियंत्रण और शारीरिक संतुलन अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह आत्मरक्षा के साथ-साथ शारीरिक फिटनेस का भी एक उत्तम साधन है।
• गतका पंजाब की एक पारंपरिक और प्राचीन सिख मार्शल आर्ट (युद्ध कला) है, जो मुख्य रूप से निहंग सिखों द्वारा विकसित की गई थी। यह लाठी (सॉटी) और ढाल के साथ लड़ी जाती है, जिसमें तलवारों का उपयोग भी शामिल है। यह आत्मरक्षा, शारीरिक फिटनेस और आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक है और आमतौर पर सिख त्योहारों और नगर कीर्तनों में प्रदर्शित की जाती है।