Solution:विकल्पों में से केवल डम्हल नृत्य राजस्थान में नहीं किया जाता है।
• डम्हल जम्मू और कश्मीर में वाटल जनजाति द्वारा किया जाने वाला नृत्य है।
• डम्हल नृत्य केवल वाटल जनजाति के पुरुष-लोक नर्तकों द्वारा किया जाता है।
• घूमर, कठपुतली, गेर और कालबेलिया राजस्थान के पारंपरिक नृत्य हैं।
प्रमुख लोक नृत्य:
• घूमर: राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध और राज्य नृत्य है, जो गोलाकार घूमते हुए महिलाओं द्वारा किया जाता है, और ढोल-नगाड़े के साथ होता है।
• कालबेलिया: सपेरा समुदाय द्वारा किया जाने वाला यह नृत्य यूनेस्को की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत सूची में शामिल है (गुलाबो सपेरा प्रसिद्ध नृत्यांगना हैं)।
• गैर: मेवाड़ और मारवाड़ में लोकप्रिय, पुरुष रंगीन छड़ियों के साथ घेरे में नृत्य करते हैं।
• चकरी: हाड़ौती क्षेत्र (बूंदी) का महिला प्रधान, तेज गति और चकरीदार घूर्णन वाला नृत्य।
• भवाई: सिर पर रखे मटकों के साथ संतुलन बनाते हुए किया जाने वाला आकर्षक नृत्य।
• ढोल: सिरोही क्षेत्र का, ढोल की थाप पर जोश के साथ किया जाने वाला नृत्य।
• कच्ची घोड़ी: शेखावाटी क्षेत्र का, नकली घोड़ी पर बैठकर किया जाने वाला हास्य और मनोरंजन से भरा नृत्य।
• गवरी (राई): भील जनजाति का, शिव-पार्वती के कथानक पर आधारित, एक माह तक चलने वाला नृत्य-नाटिका।
• चरी: किशनगढ़ क्षेत्र का, सिर पर चरी (मिट्टी का घड़ा) रखकर नृत्य करना।
• बागड़िया: कालबेलिया स्त्रियों द्वारा भीख मांगते समय चंग वाद्य यंत्र के साथ किया जाने वाला नृत्य।
अन्य जनजातीय नृत्य:
• भील: युद्ध, रमणी, प्याली, गैर, गवरी, घूमरा, द्विचक्री।
• गरासिया: गौर, लूर, मादल, मोररिया, ज्वारा, बाल, रायड़, कूद, दोहा।
• शहरिया: शाहाबाद (बारां) के आसपास प्रचलित।