कार्बनिक रसायन (रसायन विज्ञान)

Total Questions: 17

1. ऑक्सोलेन (Oxolane) किस यौगिक का पर्याय है, जिसका आणविक सूत्र (CH₂)₃CH₂O है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) टेट्राहाइड्रोफ्यूरैन
Solution:
  • ऑक्सोलेन (Oxolane) टेट्राहाइड्रोफ्यूरैन का पर्याय है
  • जिसका आणविक सूत्र (CH₂)₃CH₂O है।
  • इसका उपयोग प्रायः पॉलिमर नामक सामग्री बनाने के लिए किया जाता है। इसकी स्थिरता उच्च होती है।
  • रासायनिक संरचना
    • इसका संरचनात्मक सूत्र C₁CCOC₁ (SMILES नोटेशन) है
    • जो इसे स्थिर और कम चिपचिपाहट वाला बनाता है।
    • यह फ्यूरान (C₄H₄O) का हाइड्रोजनated रूप है, इसलिए नाम टेट्राहाइड्रोफ्यूरान पड़ा।
  • भौतिक गुण
    • यह एक रंगहीन, अत्यधिक वाष्पशील तरल है
    • जिसमें ईथर जैसी हल्की गंध होती है।
    • इसका घनत्व 0.8876 g/cm³ (20°C पर), उबलने का तापमान 66°C, और जमने का तापमान -108.4°C है।
    • यह पानी और अधिकांश कार्बनिक विलायकों में पूर्णतः घुलनशील होता है
    • जो इसे एक मजबूत ध्रुवीय अप्रोটिक विलायक बनाता है।
  • रासायनिक गुण
    • ऑक्सोलेन डाइएथिल ईथर से अधिक क्षारीय होता है और Li⁺, Mg²⁺ जैसे धातु आयनों के साथ मजबूत कॉम्प्लेक्स बनाता है।
    • यह हाइड्रोबोरेशन अभिक्रियाओं, ऑर्गेनोमेटालिक यौगिकों (जैसे ग्रिग्नार्ड रिएजेंट्स) और पॉलीमराइजेशन के लिए आदर्श विलायक है।
    • हालांकि, यह हवा में पेरोक्साइड बनाकर विस्फोटक हो सकता है
    • इसलिए स्टेबलाइजर्स के साथ संग्रहीत किया जाता है।
  • उत्पादन विधि
    • मुख्यतः 1,4-ब्यूटानेडायॉल (BDO) के अम्ल-उत्प्रेरित डिहाइड्रेशन से बनाया जाता है।
    • अन्य तरीके फ्यूरान का हाइड्रोजनेशन या 1,4-डाइक्लोरोब्यूटेन का सोडियम के साथ उपचार हैं।
    • यह प्रक्रिया उच्च शुद्धता वाली पैदावार देती है।
  • उपयोग
    • पॉलीमर उद्योग: PTMEG (पॉलीटेट्रामेथाइलीन ईथर ग्लाइकॉल) बनाने में, जो स्पैंडेक्स, थर्मोप्लास्टिक पॉलीयूरेथेन्स के लिए आधार है।
    • रासायनिक संश्लेषण: कोटिंग्स, चिपकने वाले, फार्मास्यूटिकल्स और लिथियम धातु बैटरी में सह-विलायक के रूप में।
    • अन्य: ऑर्गेनोमेटालिक संश्लेषण और रिएक्शन मीडियम।
  • सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रभाव
    • यह ज्वलनशील और संभवतः कैंसरजनक है, इसलिए हैंडलिंग में सावधानी बरतनी चाहिए।
    • पर्यावरण में यह जैव-निम्नीकरणीय है लेकिन बड़े पैमाने पर रिसाव से जल प्रदूषण हो सकता है।

2. ....... एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला कार्बनिक यौगिक है, जिसका सूत्र (C₆H₅)₂CO होता है। [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) बेन्जोफीनोन
Solution:
  • बेन्जोफीनोन (Benzophenone) एक कार्बनिक यौगिक है, जिसका रासायनिक सूत्र
  • यह एक कीटोन है जिसमें दो फेनिल समूह एक कार्बोनिल समूह से जुड़े होते हैं
  • बेंज़ोफिनोन एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला कार्बनिक यौगिक है
  • जिसका सूत्र (C₆H₅)₂CO होता है। यह डायफेनिलकीटोन के नाम से भी जाना जाता है
  • विभिन्न पौधों व प्राकृतिक स्रोतों में मौजूद रहता है।
  • रासायनिक संरचना
    • बेंज़ोफिनोन का आणविक सूत्र C₁₃H₁₀O है
    • जिसमें दो फेनिल समूह (C₆H₅) एक कार्बोनिल समूह (C=O) से जुड़े होते हैं।
    • यह एक एरोमैटिक कीटोन है जो क्रिस्टलीय ठोस रूप में पाया जाता है।
    • इसकी IUPAC नामावली डायफेनिलमेथनोन है, जो इसकी स्थिर संरचना को दर्शाता है।
  • प्राकृतिक स्रोत
    • यह कई पौधों जैसे कैसिया, मोमोर्डिका चारान्टिया (करेला), और कुछ फल-फूलों की छाल व पत्तियों में ग्लाइकोसाइड रूप में प्राकृतिक रूप से विद्यमान रहता है।
    • कड़वे बादाम के तेल और कुछ सुगंधित पौधों में भी इसके अवशेष पाए जाते हैं।
    • पर्यावरणीय अपघटन या एंजाइमेटिक प्रक्रियाओं द्वारा यह मुक्त रूप ले लेता है।
  • भौतिक गुण
    • बेंज़ोफिनोन सफेद से हल्के पीले रंग का क्रिस्टलीय पाउडर होता है
    • जिसका गलनांक 47-49°C और क्वथनांक 305°C है।
    • यह पानी में अल्पघुलनशील लेकिन अल्कोहल, ईथर और बेंजीन में अच्छी घुलनशीलता दर्शाता है।
    • इसकी विशेष चमकदार प्रकृति और UV अवशोषण गुण इसे प्रकाश-संवेदनशील बनाते हैं।
  • रासायनिक गुण
    • यह कीटोन होने के कारण न्यूक्लियोफिलिक एडिशन अभिक्रियाओं जैसे रिडक्शन (सोडियम बोरोहाइड्राइड से) या ग्रिग्नार्ड रिएजेंट्स के साथ प्रतिक्रिया करता है।
    • ऑक्सीकरण प्रतिरोधी होने से स्थिर रहता है
    • लेकिन मजबूत अम्ल या क्षार में विघटित हो सकता है।
    • UV प्रकाश में फोटोकेमिकल रिएक्शन के लिए जाना जाता है।
  • उत्पादन विधि
    • प्राकृतिक निष्कर्षण के अलावा, औद्योगिक रूप से बेंजीन के फ्रिडेल-क्राफ्ट्स एसिलेशन से बनाया जाता है।
    • अन्य तरीके फिनेनॉन के ऑक्सीकरण या बेंजोइक अम्ल से संश्लेषण हैं।
    • उच्च शुद्धता के लिए क्रिस्टलीकरण प्रक्रिया अपनाई जाती है।
  • उपयोग
    • सुगंध और इत्र उद्योग: वैनिला जैसी गंध प्रदान करने के लिए।
    • फोटोइनिशिएटर्स: UV क्यूरिंग इंक, कोटिंग्स और एडहेसिव्स में।
    • फार्मास्यूटिकल्स: दवाओं के मध्यवर्ती यौगिक के रूप में।
    • कॉस्मेटिक्स: सनस्क्रीन में UV फिल्टर के रूप में।
  • सुरक्षा संबंधी जानकारी
    • यह त्वचा और आंखों को जलन पैदा कर सकता है, तथा लंबे संपर्क से एलर्जी उत्पन्न हो सकती है।
    • पर्यावरण में जैव-जमा होने की संभावना कम है, लेकिन उचित वेंटिलेशन में उपयोग करें।

3. 1,3-डाइमेथिलबेंजीन को निम्न में से किस रूप में भी जाना जाता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) m-जाइलीन
Solution:
  • 1, 3-डाइमेथिलबेंजीन को m-Xylene के रूप में भी जाना जाता है।
  • इसका रासायनिक सूत्र (CH₃)₂C₆H₄  है।
  • इसकी रासायनिक संरचना इसका अनुप्रयोग सफाई एजेंट (Cleaning Agent) के रूप में किया जाता है।
  • रासायनिक संरचना
    • रासायनिक सूत्र C₆H₄(CH₃)₂ या C₈H₁₀ है।
    • बेंजीन के छह कार्बन परमाणुओं में से पहले और तीसरे पर मिथाइल समूह लगे होते हैं
    • जो ortho, meta, para नामकरण के अनुसार मेटा स्थिति में होते हैं।
    • इसकी आणविक संरचना निम्नलिखित है:
  • अन्य नाम
    • m-Xylene या Meta-xylene: सबसे सामान्य वैकल्पिक नाम, विशेष रूप से रसायन विज्ञान और उद्योग में उपयोग।
    • 1,3-Dimethylbenzene: IUPAC (अंतर्राष्ट्रीय शुद्ध एवं प्रयोक्ता नामकरण) नाम।
    • कभी-कभी m-Dimethylbenzene भी कहा जाता है, लेकिन यह कम प्रचलित है।
    • ज़ाइलीन शब्द ग्रीक शब्द "xylon" (लकड़ी) से आया है
    • क्योंकि इन्हें मूल रूप से लकड़ी के आसवन से प्राप्त किया गया था।
  • भौतिक गुण
    • दिखावट: रंगहीन तरल।
    • गंध: सुगंधित, मीठी गंध।
    • उबलने का बिंदु: 139.1°C।
    • गलने का बिंदु: -47.4°C।
    • घुलनशीलता: पानी में लगभग अघुलनुशील, लेकिन जैविक विलायकों जैसे इथेनॉल, ईथर में घुलनशील।
    • फ्लैश पॉइंट: 25°C (ज्वलनशील)।
    • ये गुण इसे औद्योगिक विलायक के रूप में उपयुक्त बनाते हैं।
  • रासायनिक गुण
    • नाइट्रीकरण: नाइट्रेटिंग मिश्रण (HNO₃ + H₂SO₄) से m-नाइट्रो-1,3-डाइमेथिलबेंजीन बनता है, क्योंकि मिथाइल समूह ortho-para निर्देशक हैं।
    • सल्फोनेशन: सल्फ्यूरिक अम्ल से m-ज़ाइलीन सल्फोनिक अम्ल।
    • ऑक्सीकरण: KMnO₄ या CrO₃ से दोनों मिथाइल समूह -COOH में बदलकर isophthalic acid (1,3-benzenedicarboxylic acid) बनता है।
    • हैलोजनेशन: FeCl₃ उत्प्रेरक में क्लोरीनीकरण से रिंग पर Cl जुड़ता है।
    • यह स्थिर यौगिक है लेकिन ऑक्सीकरण एजेंट्स से प्रभावित होता है।
  • उत्पादन विधियाँ
    • कच्चे तेल आसवन: नेफ्था या सुधारित गैसोलीन के कैटेलिटिक रिफॉर्मिंग से BTX (बेंजीन, टोल्यूनि, ज़ाइलीन) मिश्रण प्राप्त, फिर distillation या adsorption से अलग।
    • टोल्यूनि डाइऐल्काइलेशन: टोल्यूनि को मिथेनॉल के साथ AlCl₃ उत्प्रेरक में।
    • व्यावसायिक उत्पादन: UOP या Mobil प्रक्रियाओं से, जहां 20-25% m-ज़ाइलीन प्राप्त होता है।
    • वैश्विक उत्पादन में m-ज़ाइलीन का हिस्सा लगभग 40% होता है।
  • उपयोग
    • रासायनिक मध्यवर्ती: Isophthalic acid के लिए, जो polyester रेजिन, कोटिंग्स में उपयोग।
    • विलायक: पेंट्स, लाह, चिपकने वाले।
    • पॉलीएस्टर्स: PET बोतलें, फिल्में।
    • अन्य: कीटनाशक, दवाएँ, सुगंध।
    • उद्योग में p-ज़ाइलीन सबसे अधिक मांग वाला है, लेकिन m-ज़ाइलीन का उपयोग विशेष रेजिन में।
  • स्वास्थ्य एवं सुरक्षा
    • विषाक्तता: श्वास या त्वचा संपर्क से सिरदर्द, चक्कर। LD50 (चूहा, मौखिक): 5000 mg/kg।
    • पर्यावरण: जल प्रदूषणकारी, biodegradation धीमी।
    • सुरक्षा: अच्छा वेंटिलेशन, PPE उपयोग। OSHA सीमा: 100 ppm।

4. निम्नलिखित में से किसने खोज की थी कि डाईबोरेन, एल्डिहाइड और कीटोन के साथ अभिक्रिया करके डाईअल्कोक्सीबोरेन बनाता है, जिसका जल द्वारा जलीय अपघटन होने पर एल्कोहल बनता है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) एच. सी. ब्राउन
Solution:
  • एच.सी. ब्राउन (H.C. Brown) ने खोज की थी
  • डाईबोरेन एल्डिहाइड और कीटोन के साथ अभिक्रिया करके डाइअल्कोक्सीबोरेन बनाता है
  • जिसका जल द्वारा जलीय अपघटन होने पर एल्कोहल बनता है।
  • डाई बोरेन एक ज्वलनशील गैस है, जो वायु और नमी के प्रति अत्यधिक प्रतिक्रियाशील है।
  • खोजकर्ता का परिचय
    • Herbert C. Brown (1912-2004) एक अमेरिकी रसायनशास्त्री थे
    • जिन्हें 1979 में ऑर्गेनोबोरेन रसायन के लिए नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
    • उन्होंने शिकागो विश्वविद्यालय से 1938 में रसायनशास्त्र में पीएचडी प्राप्त की।
    • बोरोन यौगिकों पर उनके कार्य ने कार्बनिक संश्लेषण को क्रांतिकारी बदलाव दिया।
  • अभिक्रिया का विवरण
    • डाइबोरेन (B₂H₆) एक रिड्यूसिंग एजेंट है
    • जो कार्बोनिल यौगिकों (RCHO या R₂CO) के साथ निम्न अभिक्रिया करता है:
    • हाइड्रोजनेशन
    • B₂H₆ + 6 RCHO → 2 B(OR)₃ + 6 H₂
    • यहाँ डाइअल्कोक्सीबोरेन या ट्रायल्कोक्सीबोरेन इंटरमीडिएट बनता है।
    • जल अपघटन
    • B(OR)₃ + 3 H₂O → B(OH)₃ + 3 RCH₂OH
    • एल्डिहाइड से प्राइमरी एल्कोहल (RCH₂OH) बनता है
    • जबकि कीटोन से भी प्राइमरी एल्कोहल ही प्राप्त होता है (स्टीरियोसेलेक्टिव)।
    • यह अभिक्रिया साफ़, उच्च उपज वाली और चुनिंदा होती है।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • खोज का समय: 1950 के दशक में, जब बोरोन हाइड्राइड्स का अध्ययन प्रारंभिक चरण में था।
    • प्रकाशन: Brown ने 1955-56 में जर्नल ऑफ अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में इसकी रिपोर्ट की।
    • पहले के कार्य: Brown ने पहले डाइबोरन संश्लेषण (नेथिलबोरोनेट से) विकसित किया
    • जो WWII के बाद विकसित हुआ।
    • यह खोज NaBH₄ या LiAlH₄ जैसे अन्य रिड्यूसेंट्स से बेहतर विकल्प प्रदान करती है
    • क्योंकि यह स्टेरियोकेमिस्ट्री नियंत्रित करती है।
  • अभिक्रिया का तंत्र
    • बोरोन का न्यूक्लियोफिलिक हमला कार्बोनिल कार्बन पर।
    • हाइड्राइड ट्रांसफर से C=O → C-O-B बॉन्ड।
    • तीन कार्बोनिल प्रति BH₃ यूनिट।
    • हाइड्रोलिसिस से B-C बॉन्ड टूटकर एल्कोहल।
  • अन्य उपयोग और महत्व
    • संश्लेषण में: हाइड्रोबोरेशन-ऑक्सीडेशन का आधार, जो अल्कीन से एंटी-मार्कोव्निकोव एल्कोहल बनाता है।
    • चुनौतियाँ: डाइबोरेन विषैला और ज्वलनशील है, इसलिए सुरक्षित विकल्प जैसे 9-BBN बाद में विकसित।
    • नोबेल योगदान: Brown के बोरोन कार्य ने जटिल प्राकृतिक उत्पाद संश्लेषण सक्षम किया।

5. CH₃CH₂OH और O₂ की अभिक्रिया से बनने वाला उत्पाद क्या है? [CGL (T-I) 17 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) CO₂ + H₂O → ऊष्मा और प्रकाश
Solution:
  • CH₃CH₂OH + 3O₂ → 2CO₂ + 3H₂O + ऊष्मा और प्रकाश जब कोई एक दूसरे के साथ प्रतिक्रिया करते हैं
  • तो दहन प्रतिक्रिया होती है। दहन प्रतिक्रिया का उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड और पानी है।
  • ऊष्मा और प्रकाश जब कोई एक दूसरे के साथ प्रतिक्रिया करते हैं
  • तो दहन प्रतिक्रिया होती है। दहन प्रतिक्रिया का उत्पाद कार्बन डाइऑक्साइड और पानी है।
  • संतुलित समीकरण
    • पूर्ण दहन के लिए संतुलित रासायनिक समीकरण निम्नलिखित है
    • इसमें इथेनॉल के एक अणु को तीन ऑक्सीजन अणुओं की आवश्यकता होती है
    • क्योंकि इथेनॉल में दो कार्बन परमाणु, छह हाइड्रोजन और एक ऑक्सीजन पहले से मौजूद होते हैं।
  • अभिक्रिया का तंत्र
    • दहन प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से होती है।
    • पहले इथेनॉल रेडिकल्स (जैसे CH₃CH₂O- या CH₃CHOH- ) बनते हैं
    • जो ऑक्सीजन के साथ संयोजित होकर CO और CO₂ के मध्यवर्ती बनाते हैं।
    • पर्याप्त O₂ होने पर ये पूर्णतः CO₂ में ऑक्सीकृत हो जाते हैं
    • जबकि हाइड्रोजन H₂O बनाता है. सीमित ऑक्सीजन में अधूरा दहन होता है
    • जिसमें CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) या काजल (soot) भी बन सकता है।
  • ऊर्जा और अनुप्रयोग
    • यह अभिक्रिया लगभग 1367 kJ/mol ऊर्जा मुक्त करती है
    • जो इथेनॉल को जैव ईंधन के रूप में उपयोगी बनाती है
    • उदाहरणस्वरूप, वाहनों में इथेनॉल-गैसोलीन मिश्रण इसी दहन पर आधारित होता है।
    • प्रयोगशाला में इसे Bunsen बर्नर या मोमबत्ती की लौ से देखा जा सकता है।
  • अन्य संभावित अभिक्रियाएँ
    • यदि अभिक्रिया नियंत्रित ऑक्सीकरण (जैसे KMnO₄ के साथ) हो
    • तो उत्पाद एसिटाल्डिहाइड (CH₃CHO) या एसिटिक अम्ल (CH₃COOH) हो सकता है
    • लेकिन O₂ के साथ सामान्य स्थिति में दहन प्रमुख है
    • वास्तविक परिस्थितियों में तापमान और उत्प्रेरक प्रभाव डालते हैं।

6. निम्नलिखित में से कौन-सा कार्बनिक यौगिक ओलेफिएंट गैस का पर्याय है, जिसका इस्तेमाल संवेदनाहरक, प्रशीतक और अन्य रसायनों को बनाने के लिए किया जाता है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) एथिलीन
Solution:
  • एथिलीन एक कार्बनिक यौगिक ओलेफिएंट गैस का पर्याय है
  • जिसका संवेदनाहरक, प्रशीतक और अन्य रसायनों को बनाने के लिए किया जाता है। एथिलीन का रासायनिक सूत्र C₂H₄ है।
  • एलिफैटिक यौगिकों का परिचय
    • एलिफैटिक यौगिक कार्बनिक रसायन के वे यौगिक हैं
    • जिनमें खुली श्रृंखला या चक्रीय लेकिन गैर-अरोमैटिक संरचना होती है।
    • इनमें ऐल्केन, ऐल्कीन, ऐल्काइन और उनके व्युत्पन्न शामिल हैं
    • जो ओलेफिन (असंतृप्त हाइड्रोकार्बन) गैसों से संबंधित होते हैं।
    • फ्रेयॉन विशेष रूप से क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) या हाइड्रोक्लोरोफ्लोरोकार्बन (HCFCs) हैं
    • जो फ्लोरीन, कार्बन, हाइड्रोजन, क्लोरीन या ब्रोमीन से बने होते हैं।
  • फ्रेयॉन के रासायनिक गुण
    • फ्रेयॉन के निम्न उबाल बिंदु, कम पृष्ठ तनाव और कम श्यानता इन्हें आदर्श बनाते हैं।
    • ये स्थिर, गैर-ज्वलनशील और गैरविषैले होते हैं
    • जिससे ये प्रशीतन यंत्रों, एयर कंडीशनर और स्प्रे कैन के प्रणोदक के रूप में उपयोगी सिद्ध हुए।
    • हालांकि, ओजोन परत को नुकसान पहुंचाने के कारण इनका उपयोग अब सीमित है।
  • उपयोग के क्षेत्र
    • प्रशीतक (Refrigerants): फ्रिज, फ्रीजर और एसी में R-12, R-22 जैसे फ्रेयॉन का व्यापक उपयोग।
    • संवेदनाहारी (Anesthetics): चिकित्सा में सांस लेने योग्य गैसों के रूप में।
    • अन्य रसायन: एरोसोल, सॉल्वेंट्स, फोम उत्पादन और कीटनाशकों में।
    • ये यौगिक 1930 से औद्योगिक स्तर पर प्रयुक्त हो रहे हैं।
  • पर्यावरणीय प्रभाव
    • फ्रेयॉन ओजोन क्षय का प्रमुख कारण बने
    • जिसके फलस्वरूप मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल (1987) द्वारा इनका वैश्विक चरणबद्ध उन्मूलन किया गया।
    • विकल्प जैसे HFCs विकसित हुए, लेकिन फ्रेयॉन अभी भी ऐतिहासिक महत्व रखते हैं।

7. असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के दहन पर उत्पन्न ज्वाला का रंग कैसा होता है? [CHSL (T-I) 25 जुलाई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) पीला
Solution:
  • कार्बन के द्वि-आबंध या त्रि-आबंध की उपस्थिति के कारण
  • असंतृप्त हाइड्रोकार्बन के दहन पर उत्पन्न होने वाली ज्वाला का रंग पीला होता है
  • जबकि एकल बंध की उपस्थिति के कारण संतृप्त हाइड्रोकार्बन के दहन पर उत्पन्न ज्वाला का रंग नीला होता है।
  • असंतृप्त हाइड्रोकार्बन क्या हैं
    • असंतृप्त हाइड्रोकार्बन वे कार्बनिक यौगिक हैं
    • जिनमें कार्बन परमाणुओं के बीच कम से कम एक दोहरा या तिहरा बंध होता है
    • जैसे एल्कीन (C=C) और एल्काइन (C≡C)।
    • उदाहरणस्वरूप, एथीन (C2H4) और एथाइन (C2H2)। ये संतृप्त हाइड्रोकार्बन (जैसे एल्केन) से भिन्न होते हैं
    • क्योंकि इनमें हाइड्रोजन की मात्रा कम होती है।
  • दहन प्रक्रिया का विवरण
    • दहन के दौरान ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा न मिलने पर अपूर्ण दहन होता है
    • जिसमें कार्बन कण (कार्बन सोल) बनते हैं। ये कण गर्म होकर पीले रंग की चमक पैदा करते हैं
    • जिसे लुमिनस फ्लेम (प्रकाशित ज्वाला) कहते हैं।
    • साथ ही, CO (कार्बन मोनोऑक्साइड) और कालिख (C) भी उत्पन्न होती है।
    • संतृप्त हाइड्रोकार्बन पूर्ण दहन पर नीली ज्वाला देते हैं क्योंकि वे पूरी तरह CO2 और H2O में बदल जाते हैं।
  • व्यावहारिक उदाहरण
    • पेट्रोलियम उत्पादों जैसे मोमबत्ती या पैराफिन वैक्स (मुख्यतः असंतृप्त) को जलाने पर पीली ज्वाला दिखती है।
    • प्रयोगशाला में बुनसन बर्नर पर एथीन गैस जलाने से यही देखा जाता है।
    • पर्याप्त हवा मिलने पर ज्वाला नीली हो सकती है, लेकिन सामान्यतः पीली ही रहती है।

8. आणविक सूत्र C₂H वाला निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक एसीटिलीन के हाइड्राइड से प्राप्त होता है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) एथीनिल
Solution:
  • आणविक सूत्र C₂H वाला एथीनाइल (Ethynyl) यौगिक एसीटिलीन के हाइड्राइड से प्राप्त होता है।
  • एथीनाइल समूह R–C≡CH सूत्र के साथ एक कार्यात्मक समूह है।
  • यह एक कम हाइड्रोजन परमाणु वाला एसीटिलीन अणु है।
  • एसीटिलीन की संरचना
    • एसीटिलीन एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है
    • जिसमें दो कार्बन परमाणुओं के बीच त्रिगुण बंध (एक सिग्मा और दो पाई बंध) होता है।
    • इसका आणविक सूत्र C₂H₂ है, और यह गैसीय अवस्था में रंगहीन गैस के रूप में विद्यमान रहता है।
    • प्रत्येक कार्बन परमाणु का संकरण sp होता है, जिससे इसकी संरचना रैखिक (180° बंध कोण) बनती है।
  • हाइड्राइड (हाइड्रोजनेशन) अभिक्रिया
    • "एसीटिलीन के हाइड्राइड" से तात्पर्य एसीटिलीन के साथ हाइड्रोजन गैस (H₂) की अभिक्रिया से है।
    • पूर्ण हाइड्रोजनेशन से एथेन (C₂H₆) बनता है, लेकिन आंशिक हाइड्रोजनेशन से C₂H₄ प्राप्त होता है:
    • C₂H₂ + H₂ → C₂H₄ (उत्प्रेरक: Pd/BaSO₄ या Ni, नियंत्रित स्थितियों में)।
    • यह अभिक्रिया त्रिगुण बंध को द्विगुण बंध में परिवर्तित कर देती है, जिससे एथिलीन बनता है।
    • एथिलीन भी एक असंतृप्त यौगिक है, जिसका उपयोग प्लास्टिक उद्योग में प्रमुख रूप से होता है।
  • अन्य विकल्पों का विश्लेषण
    • प्रश्न में "निम्नलिखित में से कौन-सा" संकेत देता है कि बहुविकल्पीय प्रश्न हो सकता है।
    • सामान्य विकल्पों में C₂H₆ (एथेन, पूर्ण हाइड्रोजनेशन से), C₂H₂ स्वयं, या अन्य यौगिक
    • जैसे C₂H₅OH (हाइड्रेशन से) आ सकते हैं।
    • लेकिन C₂H सूत्र वाला कोई स्थिर यौगिक नहीं होता। सही उत्तर स्पष्ट रूप से C₂H₄ (एथिलीन) है
    • क्योंकि आंशिक हाइड्राइड से यही प्राप्ति प्रमाणित है।
  • व्यावहारिक महत्व
    • यह अभिक्रिया औद्योगिक स्तर पर महत्वपूर्ण है
    • जहां एसीटिलीन से एथिलीन बनाकर पॉलीथीन आदि प्लास्टिक उत्पादित किए जाते हैं।
    • नियंत्रित तापमान (लगभग 200-300°C) और उत्प्रेरक से अवांछित पूर्ण हाइड्रोजनेशन रोका जाता है।

9. ऐलिलऐमीन (allylamine) का IUPAC नाम क्या है, जिसका उपयोग दवाएं और अन्य रसायनों को बनाने के लिए किया जाता है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (d) 2-प्रोपेन-1-ऐमीन
Solution:
  • ऐलिलऐमीन (Allylamine) का IUPAC नाम 2 प्रोपेन 1-ऐमीन है
  • जिसका उपयोग दवाएं और अन्य रसायनों को बनाने के लिए किया जाता है।
  • एलिलऐमीन का रासायनिक सूत्र C₃H₇N है। यह रंगहीन द्रव सबसे सरल स्थिर असंतृप्त अमीन है।
  • रासायनिक गुण
    • ऐलिलऐमीन एक रंगहीन, तीक्ष्ण गंध वाला तरल होता है जो जल में अत्यधिक घुलनशील है।
    • इसका आणविक सूत्र C₃H₇N है
    • यह असंतृप्त ऐमीन होने के कारण डबल बॉन्ड वाली प्रोपीन श्रृंखला से जुड़ा होता है।
    • यह हवा के संपर्क में अमोनिया जैसी गंध छोड़ता है और क्षारीय प्रकृति का होता है।
  • संरचना और नामकरण
    • संरचना में पहला कार्बन डबल बॉन्ड से जुड़ा होता है
    • (CH₂=CH-), दूसरा कार्बन मध्य में, और तीसरा कार्बन अमीनो समूह (-CH₂-NH₂) से बंधा होता है।
    • IUPAC नामकरण में सबसे लंबी श्रृंखला प्रोपीन (propene) को आधार बनाया जाता है
    • जहां डबल बॉन्ड की स्थिति 2 पर और एमाइन गुट की स्थिति 1 पर होती है
    • इसलिए प्रोप-2-एन-1-एमाइन। अन्य नाम जैसे 2-प्रोपेन-1-एमाइन भी प्रचलित हैं
    • लेकिन प्रोप-2-एन-1-एमाइन मानक IUPAC नाम है।
  • उपयोग
    • ऐलिलऐमीन का प्रमुख उपयोग दवाओं के निर्माण में होता है
    • जैसे एंटीहिस्टामाइन, एंटीफंगल एजेंट (जैसे नायस्टेटिन), और कैंसर रोधी दवाएं।
    • इसके अलावा, यह कीटनाशक, रेजिन, प्लास्टिक, और अन्य रासायनिक मध्यवर्ती पदार्थों के उत्पादन में प्रयुक्त होता है।
    • औद्योगिक रूप से यह ऐलिल क्लोराइड और अमोनिया की अभिक्रिया से बनाया जाता है।
  • अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
    • यह अत्यंत ज्वलनशील और विषाक्त होता है
    • इसलिए हैंडलिंग में सावधानी बरतनी चाहिए।
    • प्रोपेन-1-एमाइन से भिन्न, इसमें डबल बॉन्ड होने से इसकी अभिक्रियाशीलता अधिक होती है।
    • विकिपीडिया और PubChem जैसे स्रोत इसे औषधीय रसायन के रूप में मान्यता देते हैं।

10. अत्यधिक सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ एथेनॉल को गर्म करने से निम्न में से क्या उत्पन्न होता है? [CHSL (T-I) 10 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) एथीन
Solution:
  • अत्यधिक सांद्र सल्फ्यूरिक अम्ल के साथ एथेनॉल को गर्म करने से एथीन उत्पन्न होता है।
  • यह एक निर्जलीकरण अभिकारक के रूप में कार्य करता है। इसकी गंध तीक्ष्ण होती है।
  • अभिक्रिया का समीकरण
    • अभिक्रिया सामान्यतः 443 K (170°C) तापमान पर होती है
    • यहाँ सांद्र H₂SO₄ निर्जलीकरण एजेंट के रूप में कार्य करता है
    • जो एथेनॉल के -OH समूह को प्रोटोनेट करके जल के रूप में निकाल देता है।
  • तंत्र (Mechanism)
    • अभिक्रिया E1 उन्मूलन तंत्र द्वारा चलती है:
    • H₂SO₄ एथेनॉल के ऑक्सीजन पर H⁺ दान करता है
    • जिससे ऑक्सोनियम आयन (CH₃CH₂OH₂⁺) बनता है
    • इस आयन से H₂O अलग हो जाता है, कार्बोकेशन (CH₃CH₂⁺) मध्यवर्ती बनता है।
    • कार्बोकेशन से β-हाइड्रोजन निकलने पर डबल बॉन्ड बनता है, जिससे एथीन प्राप्त होता है।
  • स्थितिजन्य भिन्नताएँ
    • 413 K पर: डाइएथिल ईथर (C₂H₅OC₂H₅) बनता है (इंटरमॉलीक्यूलर डिहाइड्रेशन)।
    • >443 K पर: एथीन प्रमुख उत्पाद।
    • यदि अम्ल की मात्रा कम हो: एस्टरिफिकेशन हो सकता है
    • लेकिन अत्यधिक सांद्रता में निर्जलीकरण वरीय होता है।
  • गुण और उपयोग
    • एथीन एक रंगहीन, गंधहीन गैस है जो पॉलीथीन, PVC आदि के उत्पादन में प्रयुक्त होती है।
    • यह ज्वलनशील है और पोटैशियम परमैंगनेट विलयन से डीकोलराइज होता है
    • (डबल बॉन्ड की पुष्टि)। अभिक्रिया प्रयोगशाला में एथीन गैस उत्पादन का मानक तरीका है।
  • सावधानियाँ
    • अभिक्रिया एक्सोथर्मिक होती है; अम्ल को धीरे-धीरे मिलाएं।
    • एथीन गैसीय होने से संग्रहण के लिए डिलीवरी ट्यूब और जल अपवर्जक प्रयोग करें।
    • यह औद्योगिक प्लास्टिक निर्माण का आधार है।