काली मिट्टी (मिट्टियां)

Total Questions: 16

11. मालवा पठार की प्रमुख मिट्टी है- [U.P.P.S.C. (GIC) 2010]

Correct Answer: (a) काली मिट्टी
Solution:पश्चिमी भारत की काली मिट्टी का निर्माण लावा से हुआ है। इसलिए इसे लावा मिट्टी भी कहते हैं। मालवा का पठार इसी दक्कन ट्रैप की काली मिट्टी क्षेत्र के अंतर्गत आता है।

12. इस मृदा को सिंचाई की कम आवश्यकता होती है, क्योंकि वह नमी रोक कर रखती है। वह कौन-सी है? [Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003 U.P.P.C.S. (Pre) 2010]

Correct Answer: (b) काली
Solution:काली मिट्टियों (Black Soils) में तीव्र जल धारण क्षमता पाई जाती है। यह भीगने पर ठोस एवं चिपचिपी हो जाती है तथा सूखने पर आंकुचित एवं दरारयुक्त हो जाती है। इसीलिए इन्हें स्वतः जुताई वाली मिट्टी भी कहा जाता है। इन्हें सिंचाई की कम आवश्यकता पड़ती है। अतः उत्तर विकल्प (b) सही है।

13. निम्नलिखित कथनों में कौन सही नहीं है? [U.P.P.C.S. (Pre) 2018]

Correct Answer: (d) काली मिट्टी हिमालय क्षेत्र में पाई जाती है।
Solution:काली मिट्टी भारत के दक्कन पठार में लगभग 5.46 लाख वर्ग किमी. में पाई जाती है। इसमें जल धारण की उच्च क्षमता होती है तथा इसमें लौहांश की मात्रा अधिक पाई जाती है। यह हिमालय क्षेत्र में नहीं पाई जाती है।

14. झारखंड में काली मिट्टी कहां पाई जाती है? [Jharkhand P.C.S. (Mains) 2016]

Correct Answer: (c) राजमहल पहाड़ी प्रदेश
Solution:राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) की रिपोर्ट के अनुसार झारखंड में काली मिट्टी, राजमहल क्षेत्र में पाई जाती है।

15. 'रेगुर' (Regur) किसका नाम है? [M.P.P.C.S. (Pre) 2013 44th B.P.S.C. (Pre) 2000,1998]

Correct Answer: (c) काली मिट्टी
Solution:काली मिट्टी को स्थानीय रूप से रेगुर/रेगड़ (Regur) या कपास मिट्टी या उष्णकटिबन्धीय चेर्नोजेम (Chernozem) आदि अलग-अलग नामों से जाना जाता है। भारत में इस मिट्टी का विस्तार मुख्यतः महाराष्ट्र और साथ ही पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों के क्षेत्र पर मिलता है। महाराष्ट्र में रेगुर मिट्टी का विस्तार सर्वाधिक है।

16. रेगुर (Regur) मिट्टी सबसे ज्यादा है- [44th B.P.S.C. (Pre) 2000]

Correct Answer: (a) महाराष्ट्र में
Solution:काली मिट्टी को स्थानीय रूप से रेगुर/रेगड़ (Regur) या कपास मिट्टी या उष्णकटिबन्धीय चेर्नोजेम (Chernozem) आदि अलग-अलग नामों से जाना जाता है। भारत में इस मिट्टी का विस्तार मुख्यतः महाराष्ट्र और साथ ही पश्चिमी मध्य प्रदेश, गुजरात आदि राज्यों के क्षेत्र पर मिलता है। महाराष्ट्र में रेगुर मिट्टी का विस्तार सर्वाधिक है।