Correct Answer: (c) प्रौद्योगिकी कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन कैसे ला सकती है।
Solution:- प्रौद्योगिकी कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन कैसे ला सकती है। हरित क्रांति का उदाहरण है।
- प्रौद्योगिकी का प्रभाव
- हरित क्रांति ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सामाजिक-आर्थिक संरचना में एकीकृत करके कृषि को आधुनिक बनाया।
- उच्च उपज वाली गेहूं और चावल की किस्में, जैसे नॉर्मन बोरलॉग द्वारा विकसित मेक्सिकन गेहूं, भारत में एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में अपनाई गईं।
- इससे 1967-68 में गेहूं उत्पादन दोगुना हो गया, जिसने भारत को खाद्य आयात पर निर्भरता से मुक्त किया।
- यह परिवर्तन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, भूमि स्वामित्व और वर्ग संबंधों में आमूलचूल बदलाव लाया।
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
- 1960 के मध्य में खाद्य संकट के बीच इंदिरा गांधी सरकार ने इसे बढ़ावा दिया।
- गहन कृषि जिला कार्यक्रम (IADP) के तहत 7 जिलों में प्रयोग सफल रहा
- जिसे 1966-67 में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में यह सबसे प्रभावी रही
- जहां सिंचाई और उर्वरक उपलब्धता अधिक थी।
- सकारात्मक प्रभाव
- खाद्यान्न उत्पादन 1960 के 50 मिलियन टन से 1970 तक 100 मिलियन टन से अधिक हो गया।
- आत्मनिर्भरता हासिल हुई, जिससे "भिखारी का कटोरा" वाली छवि समाप्त हुई।
- ग्रामीण आय में वृद्धि, नए अभिजात वर्ग का उदय और कृषि का व्यावसायीकरण हुआ।
- नकारात्मक प्रभाव
- हालांकि सफल, इसने क्षेत्रीय असमानताएं बढ़ाईं—पंजाब जैसे क्षेत्र लाभान्वित हुए, जबकि पूर्वी और दक्षिणी भारत पिछड़ गए।
- मिट्टी की उर्वरता घटी, जलभराव और रासायनिक प्रदूषण बढ़ा।
- छोटे किसानों को लाभ कम मिला, जिससे सामाजिक तनाव उत्पन्न हुए।
- दीर्घकालिक महत्व
- हरित क्रांति ने सिद्ध किया कि प्रौद्योगिकी सामाजिक परिवर्तन का उत्प्रेरक बन सकती है
- लेकिन संतुलित विकास आवश्यक है।
- बाद में हरित क्रांति 2.0 जैसे प्रयासों ने दालें और तिलहन पर फोकस किया। यह कृषि नीतियों का आधार बनी रही।