कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (अर्थव्यवस्था)

Total Questions: 32

1. निम्नलिखित में से कौन-सी हरित क्रांति की हानि नहीं थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 30 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) इसने भारत का अनाज आयात कम कर दिया था।
Solution:
  • हरित क्रांति ने भारत का अनाज आयात कम कर दिया था, क्योंकि भारत अनाज उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया था
  • यह हरित क्रांति की वजह से हुआ। हरित क्रांति के दौरान पेश की गई
  • अधिकांश फसलें गहन फसलें थीं। इसने रसायनों के व्यापक उपयोग को बढ़ावा भी दिया।
  • हरित क्रांति क्या थी?
    • 1960–70 के दशक में नई उच्च उपज किस्मों (HYV seeds), रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और आधुनिक सिंचाई से अनाज उत्पादन बढ़ाने का प्रयास हरित क्रांति कहलाया।
    • इसका मुख्य लक्ष्य खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाकर भुखमरी और अकाल से देश को बचाना था।
  • हरित क्रांति की प्रमुख हानियाँ
    • आमतौर पर पाठ्य‑पुस्तकों व परीक्षाओं में हरित क्रांति के निम्न दुष्प्रभाव बताए जाते हैं:
    • मृदा क्षरण और उर्वरता में कमी – रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी के भौतिक व रासायनिक गुण बिगड़ना, सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी, लवणीयता/क्षारीयता बढ़ना आदि।​
    • कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता – पीड़कनाशकों के अनियंत्रित उपयोग से लाभदायक कीट नष्ट होना, खाद्य‑श्रृंखला व पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव।​
    • जल संसाधनों पर दबाव – HYV फसलों (विशेषकर धान, गेहूँ) को अधिक सिंचाई की आवश्यकता
    • जिसके कारण भू‑जल दोहन, जल‑स्तर में गिरावट और कुछ स्थानों पर जल‑प्रदूषण।​
    • क्षेत्रीय असमानता – लाभ मुख्यतः सिंचित, समतल, अपेक्षाकृत समृद्ध क्षेत्रों (जैसे पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश) को मिला; वर्षा‑निर्भर व पिछड़े क्षेत्रों को अपेक्षाकृत कम लाभ, जिससे क्षेत्रीय असमानताएँ बढ़ीं।​
    • सामाजिक‑आर्थिक असमानता – बड़े व मध्यम किसान अधिक पूँजी और साधन जुटा सके, छोटे व सीमांत किसानों की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही, जिससे आय में असमानता बढ़ी।​
    • स्वास्थ्य व पर्यावरणीय जोखिम – रासायनिक उर्वरकों‑कीटनाशकों के अवशेष से मानव व पशुओं के स्वास्थ्य पर बुरा असर, जलस्रोतों का यूट्रोफिकेशन और जैव विविधता में कमी।​
    • इन सबको “हरित क्रांति की हानियाँ/नकारात्मक प्रभाव” माना जाता है।
  • जो हानि नहीं थी (सामान्य पैटर्न)
    • परीक्षा में प्रश्न प्रायः इस तरह होता है:
    • “निम्नलिखित में से कौन‑सा हरित क्रांति का नकारात्मक प्रभाव नहीं है?” या “कौन‑सी हानि नहीं थी?”
    • ऐसे विकल्पों में जो बातें हरित क्रांति की उपलब्धि या सकारात्मक परिणाम हैं, वे “हानि नहीं” मानी जातीं, जैसे:
    • खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि (गेहूँ, चावल आदि का उत्पादन बढ़ना)।​
    • खाद्य‑सुरक्षा में सुधार तथा अकाल की स्थिति में कमी आना।​
    • सिंचाई, सड़क, भंडारण आदि कृषि अवसंरचना में सुधार होना।​
    • इसलिए, यदि विकल्पों में हों:
  • मृदा क्षरण
    • भू‑जल स्तर में कमी
    • क्षेत्रीय असमानता में वृद्धि
    • खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि
    • तो “हरित क्रांति की हानि नहीं थी” वाला सही उत्तर होगा:
    • खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि – क्योंकि यह हरित क्रांति की प्रमुख उपलब्धि है, हानि नहीं।​

2. पूर्वी भारत में हरित क्रांति की शुरुआत करने के संदर्भ में बीजीआरईआई (BGREI) नामक एक योजना शुरू की गई थी। यह योजना कब शुरू की गई थी? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 2010-11
Solution:
  • पूर्वी भारत में 'चावल आधारित फसल प्रणालियों' की उत्पादकता को सीमित करने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए
  • पूर्वी भारत में हरित क्रांति लाना (बीजीआरईआई)" कार्यक्रम वर्ष 2010-11 में शुरू किया गया था।
  • योजना का उद्देश्य
    • BGREI (Bringing Green Revolution to Eastern India) का मुख्य लक्ष्य पूर्वी राज्यों में हरित क्रांति लाने के लिए बाधाओं को दूर करना था।
    • यह योजना उच्च उपज वाली बीज किस्मों, कृषि मशीनरी, उर्वरकों, कीटनाशकों और कृषि ज्ञान के प्रसार पर केंद्रित है।
    • असम, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे सात राज्यों में लागू की गई।​
  • कार्यान्वयन और कवरेज
    • यह चावल उत्पादन को बढ़ावा देकर खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करती है, जहां पहले उत्पादकता कम थी।
    • कार्यक्रम में नई तकनीकों का अपनाना और किसानों को प्रशिक्षण देना प्रमुख घटक हैं।​
  • पृष्ठभूमि संदर्भ
    • भारत में मूल हरित क्रांति 1960 के दशक में पंजाब, हरियाणा जैसे पश्चिमी क्षेत्रों में शुरू हुई थी
    • लेकिन पूर्वी भारत पिछड़ गया। BGREI इसी अंतर को पाटने के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई।
    • यह RKVY के तहत वित्त पोषित है और लंबे समय से उत्पादकता वृद्धि में योगदान दे रही है।

3. निम्नलिखित में से कौन भारत में हरित क्रांति की शुरुआत से संबंधित नहीं हैं? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) इंद्र कुमार गुजराल
Solution:
  • हरित क्रांति नॉर्मन बोरलॉग द्वारा शुरू किया गया एक प्रयास था। इन्हें विश्व में हरित क्रांति के जनक के रूप में जाना जाता है।
  • भारत में हरित क्रांति का नेतृत्व मुख्य रूप से एम.एस. स्वामीनाथन द्वारा किया गया।
  • अतः भारत में हरित क्रांति के जनक एम.एस. स्वामीनाथन को माना जाता है।
  • वंदना शिवा को हरित क्रांति के एक आलोचक के रूप में जाना जाता है। इंद्र कुमार गुजराल का संबंध हरित क्रांति से नहीं है।
  • प्रमुख व्यक्ति
    • उन्होंने नॉर्मन बोरलॉग (विश्व हरित क्रांति के जनक) को भारत बुलाया और HYV गेहूं की किस्मों को अनुकूलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
    • चिदंबरम सुब्रमण्यम 1960 के दशक में खाद्य एवं कृषि मंत्री के रूप में नीतिगत समर्थन प्रदान करने वाले प्रमुख नेता थे।​
  • असंबंधित व्यक्ति
    • निम्नलिखित में से पी. चिदंबरम हरित क्रांति की शुरुआत से संबंधित नहीं हैं।
    • वे 1960 के दशक में सक्रिय राजनीति या कृषि क्षेत्र में प्रमुख भूमिका में नहीं थे
    • बल्कि बाद के दशकों (1980-90 के दशक और उसके बाद) में वित्त मंत्री आदि के रूप में जाने जाते हैं।
    • अन्य विकल्प जैसे एम.एस. स्वामीनाथन, नॉर्मन बोरलॉग और सी. सुब्रमण्यम (चिदंबरम सुब्रमण्यम) सीधे इसकी शुरुआत से जुड़े थे।​
  • ऐतिहासिक संदर्भ
    • हरित क्रांति की शुरुआत 1961 में स्वामीनाथन द्वारा बोरलॉग को आमंत्रित करने से प्रेरित हुई
    • लेकिन वास्तविक कार्यक्रम 1965-66 में HYV बीजों के विस्तार से शुरू हुआ।
    • यह भारत को खाद्य आयात पर निर्भरता से मुक्त करने के उद्देश्य से लाया गया
    • जिससे गेहूं और चावल उत्पादन में क्रांतिकारी वृद्धि हुई। हालांकि, इसकी शुरुआत मुख्यतः गेहूं पर केंद्रित रही।​
  • प्रभाव और सीमाएं
    • हरित क्रांति ने 1967-78 तक पंजाब-हरियाणा में अभूतपूर्व सफलता दी
    • लेकिन जल स्तर गिरावट, मिट्टी क्षरण जैसी समस्याएं भी पैदा कीं।
    • बाद के चरणों (1991-2003) में अन्य फसलों को शामिल किया गया
    • लेकिन प्रारंभिक चरण से पी. चिदंबरम का कोई सीधा संबंध नहीं था।​

4. निम्नलिखित में से किसने भारत में कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए सदाबहार क्रांति शब्द का प्रयोग किया था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) एम.एस. स्वामीनाथन
Solution:
  • सदाबहार क्रांति शब्द का प्रयोग डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन द्वारा अल्पकालिक और दीर्घकालिक खाद्य उत्पादन लक्ष्यों से समझौता किए बिना
  • उत्पादन और उत्पादकता में सुधार लाने की रणनीति का वर्णन करने के लिए किया गया था।
  • इनका कहना था कि - "पारिस्थितिकी को नुकसान पहुंचाए बिना निरंतर उत्पादकता प्राप्त करना ही सदाबहार क्रांति है।"
  • सदाबहार क्रांति का अर्थ
    •  स्वामीनाथन ने इसे 1990 के दशक में प्रस्तुत किया
    • ताकि कृषि उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो सके बिना मिट्टी, पानी और जैव विविधता को नुकसान पहुंचाए
    • इसका मुख्य उद्देश्य उत्पादकता बढ़ाना, छोटे किसानों को लाभ पहुंचाना और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों का सामना करना है.​
  • एम.एस. स्वामीनाथन की भूमिका
    • एम.एस. स्वामीनाथन को भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है
    • जिन्होंने नॉर्मन बोरलॉग के उच्च उपज वाले गेहूं बीजों को भारत में अपनाया
    • उन्होंने सदाबहार क्रांति की अवधारणा गढ़ी
    • जिसमें जैव प्रौद्योगिकी, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन और पानी के कुशल उपयोग पर जोर दिया गया
    • स्वामीनाथन ने 1980-90 के दशक में राष्ट्रीय कृषि आयोग की सिफारिशों के माध्यम से इसे प्रचारित किया.​
  • हरित क्रांति से अंतर
    • हरित क्रांति ने 1967-78 के बीच गेहूं और चावल उत्पादन को दोगुना किया
    • लेकिन रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता घटी
    • सदाबहार क्रांति पर्यावरण-अनुकूल है, जिसमें जैविक खेती, फसल चक्रण और सूक्ष्म सिंचाई को बढ़ावा दिया जाता है ताकि उत्पादन सदैव बना रहे.​
  • प्रमुख विशेषताएं
    • टिकाऊ उत्पादकता: प्रति हेक्टेयर उपज बढ़ाना बिना संसाधनों के क्षरण के।
    • छोटे किसानों पर फोकस: कम जमीन वाले किसानों के लिए प्रौद्योगिकी पहुंच।
    • जैव विविधता संरक्षण: पारंपरिक बीजों और आधुनिक तकनीक का मिश्रण.​
    • यह क्रांति आज भी भारत की कृषि नीतियों, जैसे राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन, को प्रभावित करती है.​

5. 2022 तक की स्थिति के अनुसार, ज्वार का अग्रणी उत्पादक राज्य कौन-सा था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) महाराष्ट्र
Solution:
  • 2022 तक की स्थिति के अनुसार, ज्वार का अग्रणी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है, जो कुल उत्पादन का लगभग 37.53 प्रतिशत उत्पादित करता है
  • कर्नाटक ज्वार का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। वर्ष 2023-24 (2nd A.E.) में भी ज्वार का शीर्ष उत्पादक राज्य महाराष्ट्र ही है
  • जिसका कुल उत्पादन में योगदान 34.8 प्रतिशत है। दूसरे स्थान पर कर्नाटक तथा तीसरे स्थान पर राजस्थान है।
  • महाराष्ट्र में ज्वार उत्पादन की स्थिति
    • महाराष्ट्र में ज्वार प्रमुख मोटे अनाज की फसल के रूप में बड़े क्षेत्र में उगाई जाती है
    • इसे राज्य का सबसे बड़ा ज्वार उत्पादक होने का मुख्य कारण क्षेत्रफल व कुल उत्पादन दोनों में बढ़त माना जाता है।​
    • एक कृषि सूचना स्रोत के अनुसार “महाराष्ट्र भारत में सर्वाधिक ज्वार उत्पादक राज्य है
    • कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश (बुंदेलखंड) और तमिलनाडु अन्य प्रमुख उत्पादक राज्य हैं।​
  • अन्य प्रमुख ज्वार उत्पादक राज्य
    • महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्यों का स्थान आता है
    • कुछ स्रोतों में महाराष्ट्र और कर्नाटक द्वारा भारत के ज्वार उत्पादन का बड़ा भाग (आधे से अधिक हिस्से के आसपास) योगदान बताया गया है।​
    • मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, उत्तर प्रदेश (विशेषकर बुंदेलखंड क्षेत्र), तमिलनाडु आदि राज्य भी ज्वार उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं
    • हालांकि कुल उत्पादन की दृष्टि से महाराष्ट्र उनसे आगे रहता है।​
  • ज्वार फसल का महत्व
    • ज्वार को भारत की प्रमुख मोटे अनाज वाली फसल माना जाता है
    • यह ख़रीफ़ के साथ कई राज्यों में रबी सीजन में भी बोई जाती है; विशेष रूप से शुष्क एवं अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए यह उपयुक्त है।​
    • ज्वार में प्रोटीन, फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्त्व प्रचुर मात्रा में होते हैं
    • इसका उपयोग रोटी, दलिया तथा अन्य पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता है, जिससे यह पोषण सुरक्षा की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।​
  • निष्कर्ष (मुख्य बात)
    • उपलब्ध कृषि व परीक्षा-आधारित आधिकारिक व शिक्षण स्रोतों से स्पष्ट है
    • 2022 तक “ज्वार का अग्रणी/सबसे बड़ा उत्पादक राज्य” पूछे जाने पर मानक उत्तर महाराष्ट्र ही स्वीकार किया जाता है।​

6. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत में वर्ष 2021-22 में ....... मिलियन टन के रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन होने का अनुमान है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 3 दिसंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) 316.06
Solution:
  • प्रश्नकाल हेतु विकल्प (a) सही उत्तर था। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा वर्ष 2023-24 (3rd A.E.) में 328.9 मिलियन टन के रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन होने का अनुमान लगाया गया है।
  • जबकि वर्ष 2022-23 के लिए यह 329.7 मिलियन टन दर्ज है।
  • प्रमुख फसलों का उत्पादन
    • चावल का उत्पादन 127.93 मिलियन टन अनुमानित था
    • जो विगत पांच वर्षों के औसत 116.44 मिलियन टन से 11.49 मिलियन टन अधिक रहा।
    • गेहूं का उत्पादन रिकॉर्ड 111.32 मिलियन टन रहा
    • जो पांच वर्षों के औसत 103.88 मिलियन टन से 7.44 मिलियन टन ज्यादा था।
    • पोषक/मोटे अनाज 49.86 मिलियन टन और दलहन 26.96 मिलियन टन का अनुमान लगाया गया
    • जो क्रमशः 3.28 मिलियन टन और 3.14 मिलियन टन अधिक थे।​
  • तुलनात्मक वृद्धि
    • यह कुल उत्पादन विगत पांच वर्षों (2016-17 से 2020-21) के औसत खाद्यान्न उत्पादन से 25.35 मिलियन टन अधिक था।
    • अन्य फसलों में कपास का उत्पादन 34.06 मिलियन गांठें (170 किग्रा. प्रति गांठ) और पटसन-मेस्टा 9.57 मिलियन गांठें (180 किग्रा. प्रति गांठ) अनुमानित हुआ।
    • यह आंकड़ा किसानों की मेहनत, सरकारी नीतियों और अनुकूल मौसम का परिणाम माना गया।​
  • बाद के अनुमान
    • ध्यान दें कि दूसरे अग्रिम अनुमान के बाद चौथे अग्रिम अनुमान में खाद्यान्न उत्पादन को 315.72 मिलियन टन संशोधित किया गया
    • जिसमें चावल 130.29 मिलियन टन और गेहूं 106.84 मिलियन टन रहा।
    • फिर भी, मूल दूसरे अनुमान ने रिकॉर्ड उत्पादन की शुरुआती आशा जताई थी।​

7. निम्न में से किस रबी फसल के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में पिछले वर्ष की तुलना में 2021-22 के विपणन सत्र में 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई थी? [CGL (T-I) 13 अप्रैल, 2022 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) गेहूं
Solution:
  • गेहूं (रबी फसल) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में पिछले वर्ष की तुलना में 2021-22 के विपणन सत्र में 50 रुपये/ क्विंटल की वृद्धि की गई थी।
  • विपणन सत्र 2024-25 के लिए गेहूं के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 150 रुपये की वृद्धि की गई है।
  • MSP वृद्धि का विवरण
    • गेहूं का MSP 1925 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 1975 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया
    • जो 50 रुपये की वृद्धि दर्शाता है (लगभग 2.6% की बढ़ोतरी)।
    • यह वृद्धि स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप थी
    • जिसमें उत्पादन लागत पर कम से कम 1.5 गुना MSP सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया।
    • गेहूं किसानों को इस नए MSP से उत्पादन लागत पर 106% मुनाफा होने का सरकारी दावा किया गया।​
  • अन्य रबी फसलों की तुलना
    • चना: MSP में 225 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि, नया मूल्य 5100 रुपये।​
    • मसूर: MSP में 300 रुपये प्रति क्विंटल की उच्चतम वृद्धि, नया मूल्य 5100 रुपये।​
    • रेपसीड/सरसों: 225 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि, नया मूल्य 4650 रुपये।​
    • जौ: 75 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि, नया मूल्य 1600 रुपये।​
    • कुसुम्भ: 112 रुपये प्रति क्विंटल वृद्धि।​
    • केवल गेहूं ही वह फसल है जहां वृद्धि ठीक 50 रुपये रही, जबकि अन्य फसलों में यह इससे कहीं अधिक थी।​
  • नीतिगत पृष्ठभूमि
    • यह घोषणा केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा की गई और इसका उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना था।
    • सरकार ने कुल 6 रबी फसलों (गेहूं, जौ, चना, मसूर, रेपसीड/सरसों, कुसुम्भ) के लिए MSP निर्धारित किया
    • जो किसानों को लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए था। यह 2018-19 के बजट घोषणा के अनुरूप था
    • जहां MSP को उत्पादन लागत का 1.5 गुना रखने का वादा किया गया।​
  • प्रभाव और महत्व
    • इस MSP वृद्धि से गेहूं उत्पादक राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा आदि में किसानों को सीधा लाभ मिला।
    • कुल मिलाकर रबी फसलों के उत्पादन लक्ष्य में भी वृद्धि की योजना बनी
    • जैसे सरसों का लक्ष्य 92 लाख टन से 125 लाख टन।
    • यह कदम वनस्पति तेल आयात कम करने और किसान आय दोगुनी करने की दिशा में था।​

8. मानव विकास रिपोर्ट 2021-22 के अनुसार 191 देशों में भारत का कौन-सा स्थान है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) 132
Solution:
  • मानव विकास रिपोर्ट 2021/2022 के अनुसार, सूचकांक में शामिल कुल 191 देशों की सूची में शीर्ष स्थान पर स्विट्जरलैंड तथा अंतिम स्थान पर दक्षिण सूडान स्थित था।
  • मानव विकास रिपोर्ट, 2023/2024 के अनुसार, 193 देशों की मानव विकास सूची में भारत का स्थान 134वां है।
  • इस सूची में शीर्ष स्थान पर स्विट्जरलैंड तथा अंतिम स्थान पर सोमालिया है।
  • रिपोर्ट का अवलोकन
    • लेकिन इसका स्कोर वैश्विक औसत 0.732 से काफी नीचे था।
    • भारत का स्थान 2020 के 131वें से गिरकर 132वां हो गया, जो कोविड-19 महामारी के प्रभाव को दर्शाता है।​
  • भारत के प्रदर्शन के प्रमुख बिंदु
    • भारत का HDI स्कोर 0.633 था, जो 2020 के 0.645 से कम था, मुख्य रूप से जीवन प्रत्याशा में गिरावट के कारण।
    • पड़ोसी देशों जैसे श्रीलंका, भूटान और बांग्लादेश से भारत नीचे रहा।
    • तीन दशकों में पहली बार लगातार दो वर्षों में स्कोर में गिरावट दर्ज की गई।​
  • वैश्विक संदर्भ
    • रिपोर्ट में 191 देशों और क्षेत्रों का मूल्यांकन किया गया, जहां स्विट्जरलैंड शीर्ष पर था।
    • भारत मध्यम विकास श्रेणी में आता है, लेकिन लैंगिक असमानता सूचकांक में 122वां स्थान प्राप्त हुआ।
    • रिपोर्ट ने 'लोकतंत्र विरोधाभास' जैसे मुद्दों पर भी प्रकाश डाला।​
  • बाद की प्रगति
    • 2023/24 की रिपोर्ट में भारत 193 देशों में 134वें स्थान पर पहुंचा
    • लेकिन 1990 से 2022 तक कुल 48.4% सुधार हुआ। यह दर्शाता है
    • लंबी अवधि में प्रगति जारी है, हालांकि अल्पकालिक चुनौतियां बनी हुई हैं।​

9. हरित क्रांति किसका उदाहरण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 22, 23 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) प्रौद्योगिकी कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन कैसे ला सकती है।
Solution:
  • प्रौद्योगिकी कृषि उत्पादन में क्रांतिकारी परिवर्तन कैसे ला सकती है। हरित क्रांति का उदाहरण है।
  • प्रौद्योगिकी का प्रभाव
    • हरित क्रांति ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सामाजिक-आर्थिक संरचना में एकीकृत करके कृषि को आधुनिक बनाया।
    • उच्च उपज वाली गेहूं और चावल की किस्में, जैसे नॉर्मन बोरलॉग द्वारा विकसित मेक्सिकन गेहूं, भारत में एम.एस. स्वामीनाथन के नेतृत्व में अपनाई गईं।
    • इससे 1967-68 में गेहूं उत्पादन दोगुना हो गया, जिसने भारत को खाद्य आयात पर निर्भरता से मुक्त किया।
    • यह परिवर्तन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, भूमि स्वामित्व और वर्ग संबंधों में आमूलचूल बदलाव लाया।​
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • 1960 के मध्य में खाद्य संकट के बीच इंदिरा गांधी सरकार ने इसे बढ़ावा दिया।
    • गहन कृषि जिला कार्यक्रम (IADP) के तहत 7 जिलों में प्रयोग सफल रहा
    • जिसे 1966-67 में राष्ट्रीय स्तर पर विस्तारित किया गया। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे क्षेत्रों में यह सबसे प्रभावी रही
    • जहां सिंचाई और उर्वरक उपलब्धता अधिक थी।​
  • सकारात्मक प्रभाव
    • खाद्यान्न उत्पादन 1960 के 50 मिलियन टन से 1970 तक 100 मिलियन टन से अधिक हो गया।
    • आत्मनिर्भरता हासिल हुई, जिससे "भिखारी का कटोरा" वाली छवि समाप्त हुई।
    • ग्रामीण आय में वृद्धि, नए अभिजात वर्ग का उदय और कृषि का व्यावसायीकरण हुआ।​
  • नकारात्मक प्रभाव
    • हालांकि सफल, इसने क्षेत्रीय असमानताएं बढ़ाईं—पंजाब जैसे क्षेत्र लाभान्वित हुए, जबकि पूर्वी और दक्षिणी भारत पिछड़ गए।
    • मिट्टी की उर्वरता घटी, जलभराव और रासायनिक प्रदूषण बढ़ा।
    • छोटे किसानों को लाभ कम मिला, जिससे सामाजिक तनाव उत्पन्न हुए।​​
  • दीर्घकालिक महत्व
    • हरित क्रांति ने सिद्ध किया कि प्रौद्योगिकी सामाजिक परिवर्तन का उत्प्रेरक बन सकती है
    • लेकिन संतुलित विकास आवश्यक है।
    • बाद में हरित क्रांति 2.0 जैसे प्रयासों ने दालें और तिलहन पर फोकस किया। यह कृषि नीतियों का आधार बनी रही।​

10. कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (Agricultural and Processed food products Export Development Authority-APEDA) 2021-2022 के अनुसार, आम के उत्पादन में भारत के किस राज्य का प्रथम स्थान है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) उत्तर प्रदेश
Solution:
  • APEDA 2021-22 तथा वर्ष 2023-24 (2nd A.E.) के अनुसार भी आम के उत्पादन में उत्तर प्रदेश प्रथम स्थान पर है।
  • वैश्विक स्तर पर भारत आम का सबसे बड़ा उत्पादक देश है।
  • APEDA का परिचय
    • कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक निकाय है
    • जिसकी स्थापना 1985 में की गई थी। यह कृषि उत्पादों जैसे फल, सब्जियां, मांस, डेयरी और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात को बढ़ावा देने का कार्य करता है।
    • APEDA द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्टें उत्पादन, निर्यात और राज्यवार आंकड़ों का महत्वपूर्ण स्रोत हैं।​
  • आम उत्पादन में शीर्ष राज्य
    • APEDA के अनुसार, 2021-2022 में आम उगाने वाले प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल हैं।
    • उत्तर प्रदेश पहले स्थान पर है, जो आम की विविध किस्मों जैसे दशहरी, लंगड़ा और चूसा का प्रमुख उत्पादक है।
    • अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश का जलवायु और मिट्टी आम की खेती के लिए आदर्श है, जिससे यह उत्पादन में अग्रणी बना रहता है।​
  • उत्पादन आंकड़ों का महत्व
    • APEDA की रिपोर्टें न केवल उत्पादन मात्रा बल्कि निर्यात क्षमता और गुणवत्ता मानकों पर भी प्रकाश डालती हैं।
    • आम निर्यात में भारत का योगदान वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण है
    • जिसमें ताजे फल, गूदा और प्रसंस्कृत उत्पाद शामिल हैं। 2021-2022 के आंकड़े किसानों, निर्यातकों और नीति-निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हुए।​