कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (अर्थव्यवस्था)Total Questions: 3211. निम्नलिखित में से कौन-सा कृषि उद्योग के बारे में सही नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)](a) हरित क्रांति ने नई तकनीक की शुरुआत की।(b) हरित क्रांति ने एचवाईवी (HYV) बीजों का उपयोग शुरू किया।(c) हरित क्रांति के परिणामस्वरूप तिलहन में सुधार हुआ।(d) हरित क्रांति ने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में सक्षम बनाया।Correct Answer: (c) हरित क्रांति के परिणामस्वरूप तिलहन में सुधार हुआ।Solution:हरित क्रांति के परिणामस्वरूप खाद्यान्न विशेषकर गेहूं और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई न कि तिलहन में।हरित क्रांति ने नई तकनीक की शुरुआत की, इसने एचवाईवी (HYV) बीजों का उपयोग शुरू कियाइसने भारत को खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में सक्षम बनाया।कृषि‑आधारित उद्योग क्या होते हैं?कृषि‑आधारित उद्योग वे उद्योग हैं जो अपना कच्चा माल मुख्यतः पौधों या पशुओं से प्राप्त कृषि‑उत्पादों से लेते हैं, जैसे कपास, गन्ना, तिलहन, दूध, चमड़ा आदि।इन उद्योगों में कच्चा माल खेतों या पशुपालन से आता हैउद्योग उनमें प्रसंस्करण (processing) या रूपान्तरण कर तैयार या अर्ध‑तैयार वस्तुएँ बनाते हैं।प्रमुख कृषि‑आधारित उद्योगों के उदाहरणकपास वस्त्र उद्योग, जूट उद्योग, चीनी उद्योग, वनस्पति तेल उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण (फल‑सब्जी, आलू, सोयाबीन आदि), डेयरी और चमड़ा उद्योग को सामान्यतः कृषि‑आधारित उद्योग माना जाता है।इनसे अलग जो उद्योग कृषि‑उत्पाद पर निर्भर नहीं होते, जैसे लोहे‑इस्पात, सीमेंट, पेट्रोकेमिकल, ऑटोमोबाइल आदि, वे कृषि‑आधारित नहीं कहलाते।अक्सर पूछे जाने वाले बिंदु (सही / गलत पहचानने के लिए)किसी भी कथन को जाँचने के लिए इन तथ्यों को आधार बना सकते हैं:यदि कोई उद्योग “कपड़ा (सूती, ऊनी, रेशमी, जूट)”, “चीनी”, “कागज़”, “वनस्पति तेल”, “डेयरी”, “खाद्य प्रसंस्करण”, “चमड़ा” से जुड़ा हैतो वह कृषि‑आधारित उद्योग है – ऐसा कथन सामान्यतः सही माना जाएगा।यदि कथन कहे कि “सीमेंट उद्योग कृषि‑आधारित उद्योग है” तो यह सही नहीं हैक्योंकि सीमेंट चूना‑पत्थर आदि खनिजों पर आधारित है, न कि खेती‑किसानी के कच्चे माल पर।यदि कथन कहे कि “कृषि‑आधारित उद्योग अर्थव्यवस्था के विकास में महत्वपूर्ण नहीं हैंतो यह भी गलत माना जाएगा, क्योंकि कृषि‑आधारित उद्योग ग्रामीण रोज़गार, मूल्य संवर्धन और निर्यात में अहम योगदान देते हैं।यदि कोई कथन कहे कि “कृषि‑आधारित उद्योग केवल बड़े‑पैमाने की (large scale) इकाइयाँ होती हैंतो यह भी गलत है; बहुत‑से कृषि‑आधारित उद्योग सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के रूप में चलते हैं।परीक्षाओं में पूछे जाने वाले सामान्य प्रकार के प्रश्नअक्सर प्रश्न इस शैली में होता है:“निम्नलिखित में से कौन‑सा कृषि‑आधारित उद्योग नहीं है?” और विकल्प दिए होते हैं जैसे:(क) कपड़ा उद्योग(ख) चीनी उद्योग(ग) वनस्पति तेल उद्योग(घ) सीमेंट उद्योगऐसी स्थिति में “सीमेंट उद्योग” वाला विकल्प सही उत्तर (यानी कृषि‑आधारित नहीं होने वाला) माना जाता है।इसी प्रकार यदि आपके प्रश्न‑पत्र में कोई कथन यह बताए कि “कृषि उद्योग केवल मत्स्य‑तेल (fish oil) जैसे समुद्री उत्पादों पर आधारित होता हैतो यह भी आंशिक रूप से गलत हो सकता है, क्योंकि ऐसे उद्योग “समुद्री‑आधारित” (marine‑based) की अलग श्रेणी में रखे जाते हैंजबकि कृषि‑आधारित उद्योग सामान्यतः भूमि‑आधारित फसलों और पशुपालन पर आधारित माने जाते हैं।अब आप कैसे उत्तर तय करें?जब आपके सामने वास्तविक प्रश्न‑पत्र में चार या पाँच कथन हों, तो:जिस कथन में ऐसा उद्योग लिखा हो जो खेती या पशुपालन से कच्चा माल नहीं लेताजैसे सीमेंट, इस्पात, पेट्रोकेमिकल आदि) – वही कृषि‑उद्योग के बारे में सही नहीं (गलत) कथन होगा।या जो कथन कृषि‑आधारित उद्योग की भूमिका, कच्चे माल के स्रोत या पैमाने के बारे में ऊपर लिखे तथ्यों से टकराता हो, उसे भी “सही नहीं” मानेंगे।12. कौन-सा पड़ोसी देश 2020-21 में मात्रा और मूल्य दोनों के मामले में 54 प्रतिशत से अधिक की सबसे बड़ी हिस्सेदारी के साथ भारत से गेहूं निर्यात के शीर्ष गंतव्य के रूप में उभरा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (I-पाली)](a) श्रीलंका(b) बांग्लादेश(c) नेपाल(d) भूटानCorrect Answer: (b) बांग्लादेशSolution:प्रश्नकाल हेतु विकल्प (b) सही उत्तर था। वर्ष 2023-24 के संदर्भ में विकल्प (c) नेपाल सही उत्तर है।नेपाल 2023-24 में मात्रा और मूल्य दोनों के मामले में सबसे बड़ी हिस्सेदारी के साथ भारत से गेहूं निर्यात के शीर्ष गंतव्य के रूप में उभरा।क्यों बांग्लादेश?बांग्लादेश भारत का निकटतम पड़ोसी है, जिसकी लंबी साझा सीमा व्यापार को आसान बनाती है।कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का गेहूं निर्यात मुख्यतः पड़ोसी देशों को होता हैजिसमें बांग्लादेश ने मात्रा और मूल्य में 54% से ज्यादा हिस्सा लिया।यह निर्भरता बांग्लादेश की खाद्य सुरक्षा को मजबूत करती हैक्योंकि भारतीय गेहूं की गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धी कीमतें वहां उच्च मांग पैदा करती हैं।भौगोलिक निकटता परिवहन लागत कम रखती है, जिससे यह व्यापार दोनों देशों के लिए लाभकारी रहा।आंकड़ों का अवलोकन2020-21 में भारत ने नए बाजारों जैसे यमन, अफगानिस्तान, कतर और इंडोनेशिया में प्रवेश कियालेकिन शीर्ष 10 गंतव्यों में बांग्लादेश का दबदबा रहा।व्यापारिक महत्वयह निर्यात भारत के कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देता है, रोजगार सृजन करता हैदोनों देशों के आर्थिक संबंध मजबूत करता है। बांग्लादेश में भारतीय गेहूं की मांग निरंतर बनी रहीजो 2020-21 के बाद भी जारी रही। APEDA की बी2बी प्रदर्शनियों और विपणन अभियानों ने इस वृद्धि को संभव बनाया।कुल मिलाकर, वैश्विक गेहूं उत्पादन में भारत की 14% हिस्सेदारी के बावजूद निर्यात में इसकी भूमिका उभर रही है।13. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय 2022 के अनुसार, अंगूर का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) आंध्र प्रदेश(b) अरुणाचल प्रदेश(c) महाराष्ट्र(d) पश्चिम बंगालCorrect Answer: (c) महाराष्ट्रSolution:वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय 2022 तथा अद्यतन आंकड़ों के अनुसार भी अंगूर का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य महाराष्ट्र है। उसके बाद कर्नाटक का स्थान आता है।महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा अंगूर उत्पादक राज्य है।उत्पादन आंकड़े2021-22 के आंकड़ों में महाराष्ट्र ने लगभग 24,66,290 टन अंगूर का उत्पादन किया, जो राष्ट्रीय कुल का 70.67% है।कर्नाटक दूसरे स्थान पर है (8,54,660 टन, 24.49%)।अन्य राज्य जैसे तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और असम का योगदान क्रमशः 1.43% और कम है।प्रमुख क्षेत्रमहाराष्ट्र में नासिक जिले को "भारत की अंगूर राजधानी" कहा जाता है, जहां व्यापक खेती होती है।सांगली, पुणे और सोलापुर भी प्रमुख केंद्र हैं।अनुकूल जलवायु और उन्नत तकनीकें जैसे ड्रिप सिंचाई इसकी सफलता का कारण हैं।आर्थिक महत्वमहाराष्ट्र से अंगूर का बड़ा हिस्सा निर्यात होता है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजारों में लोकप्रिय है।प्रमुख किस्में सुल्ताना, अनाब-ए-शाही, शरद सीडलेस और थॉम्पसन सीडलेस हैं।यह उद्योग लाखों किसानों को रोजगार देता है और किशमिश, जूस तथा वाइन उत्पादन को बढ़ावा देता है।14. . सिंचाई सुविधाओं और कीटनाशकों/उर्वरकों की आवश्यकता के कारण, हरित क्रांति के पहले चरण में कुछ समृद्ध राज्य जैसे ....... लाभान्वित हुए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 29 नवंबर, 2023 (II-पाली)](a) पंजाब, आंध्र प्रदेश और बिहार(b) पंजाब, अरुणाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश(c) पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु(d) पंजाब, आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेशCorrect Answer: (c) पंजाब, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडुSolution:सिंचाई सुविधाओं और कीटनाशकों/उर्वरकों की आवश्यकता के कारण, हरित क्रांति के पहले चरण में कुछ समृद्ध राज्य जैसे- पंजाब, हरियाणा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु लाभान्वित हुए।हरित क्रांति का पहला चरणहरित क्रांति का पहला चरण 1960 के दशक के मध्य से 1970 के प्रारंभ तक चलाजब गेहूं की उच्च उपज वाली किस्मों को सबसे पहले पेश किया गया। यह चरण क्षेत्र-विशेष और फसल-विशेष थाजिसमें सिंचाई की उपलब्धता और रासायनिक इनपुट्स (उर्वरक, कीटनाशक) का उपयोग निर्णायक कारक साबित हुआ।पंजाब में कृषि अवसंरचना पहले से विकसित थीजबकि हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश ने अपनी निकटता और विस्तार योग्य सिंचाई सुविधाओं का लाभ उठाया।लाभान्वित राज्यों की सूचीपंजाब: सर्वाधिक लाभान्वित राज्य, जहां नहर सिंचाई और ट्यूबवेल प्रणाली ने गेहूं उत्पादन को कई गुना बढ़ाया।हरियाणा: पंजाब के समान जलवायु और सिंचाई संसाधनों के कारण तेजी से प्रगति की।पश्चिमी उत्तर प्रदेश: गंगा नहर प्रणाली के कारण उर्वरकों और HYV बीजों का प्रभावी उपयोग संभव हुआ।ये राज्य पहले से समृद्ध थे, क्योंकि यहां भूमि उपजाऊ, जल उपलब्ध और बड़े किसान सक्रिय थे।कारण: सिंचाई और रसायनों की भूमिकाहरित क्रांति ने HYV बीजों को बढ़ावा दिया, जो अधिक पानी, उर्वरकों और कीटनाशकों की मांग करते थे।1960 में कुल सिंचित क्षेत्र मात्र 30 मिलियन हेक्टेयर था, इसलिए नहरें, बांध और पंपों का विस्तार आवश्यक था।इन राज्यों में रासायनिक उर्वरकों का बड़े पैमाने पर उपयोग हुआजिससे गहन खेती संभव हुई, लेकिन पूर्वी भारत जैसे वर्षा-निर्भर क्षेत्र पिछड़ गए।प्रभाव और असमानताएंइससे खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल हुई, विशेषकर गेहूं में।हालांकि, क्षेत्रीय असमानता बढ़ी, क्योंकि बिहार, पूर्वी यूपी जैसे राज्य लाभ से वंचित रहे।भूजल स्तर गिरा और मिट्टी में रसायनों का अत्यधिक उपयोग पर्यावरणीय समस्याएं पैदा कर गया।फिर भी, इन समृद्ध राज्यों ने भारत को अन्न भंडार बनाया।15. कृषि क्षेत्र, ....... का एक हिस्सा है। [CGL (T-I) 20 जुलाई, 2023 (II-पाली)](a) द्वितीयक क्षेत्र(b) चतुर्थक क्षेत्र(c) तृतीयक क्षेत्र(d) प्राथमिक क्षेत्रCorrect Answer: (d) प्राथमिक क्षेत्रSolution:कृषि क्षेत्र प्राथमिक क्षेत्र का हिस्सा है। प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत कृषि, वानिकी, मत्स्यपालन, पशुपालन, खनन आदि शामिल किए जाते हैं।प्राथमिक क्षेत्र की परिभाषाप्राथमिक क्षेत्र में वे सभी गतिविधियां शामिल हैं जो प्राकृतिक संसाधनों के प्रत्यक्ष निष्कर्षण या उत्पादन पर आधारित होती हैंजैसे कृषि, पशुपालन, मत्स्य पालन, खनन और वानिकी। कृषि इस क्षेत्र का सबसे प्रमुख घटक हैक्योंकि यह मानव जीवन के लिए आवश्यक खाद्य पदार्थों का मुख्य स्रोत है।भारत जैसे विकासशील देशों में यह क्षेत्र कुल कार्यबल का लगभग 42-46% हिस्सा रोजगार देता हैसकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 16-18% योगदान रखता है।कृषि क्षेत्र का महत्वकृषि केवल खाद्य उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है।यह खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करता है, किसानों को आय प्रदान करता हैकृषि-आधारित उद्योगों जैसे कपड़ा, चीनी मिलों तथा खाद्य प्रसंस्करण को कच्चा माल उपलब्ध कराता है।इसके अलावा, यह निर्यात व्यापार में भी योगदान देता है, जैसे चावल, गेहूं, चाय, कॉफी और मसाले।भारत में मानसून पर इसकी निर्भरता प्रमुख विशेषता है, जो फसल चक्र को प्रभावित करती है।भारतीय संदर्भ में कृषिभारत में कृषि क्षेत्र की विशेषताएं विविध जलवायु, मिट्टी और फसल पैटर्न पर आधारित हैं।मुख्य फसलें चावल, गेहूं, दालें, तिलहन, कपास और गन्ना हैं, जो खरीफ और रबी मौसम में उगाई जाती हैं।2025-26 के केंद्रीय बजट में कृषि के लिए 1.52 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गएजिसमें अनुसंधान, सिंचाई और किसान कल्याण पर जोर है।चुनौतियां जैसे छोटे जोत आकार, जलवायु परिवर्तन, कम उत्पादकता और कर्ज के बावजूदयोजनाएं जैसे पीएम किसान, एटीएमए और पीएमकेवीवाई किसानों को सशक्त बना रही हैं।चुनौतियां और भविष्यकृषि क्षेत्र छोटे खेतों, मानसून निर्भरता, कम पूंजी निवेश और बाजार पहुंच की कमी से जूझ रहा है।आधुनिकीकरण जैसे उन्नत बीज, यंत्रीकरण, जैविक खेती और डिजिटल तकनीक अपनाने से उत्पादकता बढ़ सकती है।सतत विकास के लिए जल संरक्षण, मिट्टी स्वास्थ्य और जलवायु-अनुकूल फसलें आवश्यक हैं, जो भारत को खाद्य अधिशेष वाला देश बनाए रखेंगी।16. कृषि का व्यावसायीकरण ....... का एक संकेत है। [CGL (T-1) 27 जुलाई, 2023 (I-पाली)](a) आय अधिशेष(b) विपणन योग्य अधिशेष(c) उत्पादकों का अधिशेष(d) उपभोक्ता अधिशेषCorrect Answer: (b) विपणन योग्य अधिशेषSolution:प्रश्नगत विकल्पों में विपणन योग्य अधिशेष, कृषि के व्यावसायीकरण का एक संकेत है।कृषि के व्यावसायीकरण से तात्पर्य ऐसी प्रक्रिया से हैजिसमें खाद्यान्न फसलों को व्यक्तिगत उपयोग अथवा पारिवारिक निर्वाह हेतु उत्पादित न करके बाजार आधारित व्यवस्था के तहत उत्पादित किया जाता है।कृषि का व्यावसायीकरण क्या हैयह वही प्रक्रिया है जब कृषि गतिविधियाँ सिर्फ परिवार-आधारित खपत तक सीमित नहीं रहतींबल्कि बाजार-उन्मुख बन जाती हैं। इसमें उत्पादन, प्रबंधन, विपणन, प्रसंस्करण और वितरण जैसी कृषि-व्यवसायिक गतिविधियाँ शामिल होती हैं।यह एक संपूर्ण तरकीब है जो किसानों को आय वृद्धि और निर्यात-उन्मुखता की दिशा में ले जाती है ।जब कृषि का व्यावसायीकरण होता है, तो विपणन योग्य अधिशेष बढ़ते हैंयानी किसान द्वारा घरेलू जरूरतों के बाद ऐसी चीजें जो बाजार में बेचने के लिए बचती हैंउनकी मात्रा और अहमियत दोनों बढ़ती हैं। यह अधिशेष आय के स्रोत बन सकता है और कृषकों की आय में वृद्धि का कारण बनता है ।व्यावसायीकरण के कारण और चालक तत्वबाजार के बढ़ते संपर्क: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों के साथ जुड़े बिना कृषि अधिक एकीकृत नहीं रह सकती।निर्यात अवसरों का विस्तार और बाज़ार-उन्मुखताओं के कारण उत्पादकता व विविधता बढ़ती है ।पूंजी और तकनीक की पहुंच: आधुनिक बीज, उर्वरक, कीटनाशक, सिंचाई सुविधाएँ और कृषि यांत्रिकी, इन सभी के लिए पूंजी जुटाने की आवश्यकता होती हैजो अक्सर विपणन और वितरित उद्योगों के साथ जुड़कर विकसित होती है ।सुधारित विपणन और भंडारण तंत्र: संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन का विकास होने से कृषकों को अधिक मूल्य प्राप्त होता हैफसल-आय में स्थिरता आती है ।कृषि-उद्योग-चक्र: उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और वितरण तक का समन्वय बड़ा कृषि-व्यवसाय बनाता हैजो बड़े पैमाने पर स्थापित एग्रो-उद्योगों की तरफ जाता है ।हरित क्रांति और व्यावसायीकरण की भूमिकाहरित क्रांति ने नई किस्मों, उन्नत सिंचाई और उर्वरकों/किटनाशकों के व्यापक प्रयोग को जन्म दियाजिससे उत्पादकता बढ़ी और बाजार-उन्मुखता तेज हुई। यह व्यावसायीकरण के लिए एक प्रमुख प्रोत्साहन रहाहालांकि इसके साथ पर्यावरणीय और सामाजिक समस्याएं भी आईं, जैसे मिट्टी का क्षरण, जल प्रदूषण और छोटे किसानों का दबना ।अतः हरित क्रांति ने व्यावसायीकरण को सही दिशा में बढ़ाने के अवसर भी दिएइसे संतुलित तरीके से अपनाने की जरूरत है ताकि दीर्घकालिक स्थिरता बनी रहे ।विकास और नतीजे (फायदे)उत्पादकता और आय में वृद्धि: विपणन-उन्मुख फसलें और विविधता, दोनों से किसानों की आय बढ़ती हैरोजगार अवसर बनते हैं। इससे ग्रामीण आय-स्रोतों में विविधता आती है ।निर्यात वृद्धि और विदेशी मुद्रा अर्जन: निर्यात-उन्मुख कृषि उत्पादों का निर्माण होने से देश की विदेशी मुद्रा आय बढ़ सकती है ।कृषि-भंडारण-प्रसंस्करण में उन्नति: विपणन-संरचना, भंडारण और प्रसंस्करण के क्षेत्र विकसित होते हैंजिससे शेष मूल्य बढ़ता है और किसानों को बेहतर मूल्य मिलता है ।जोखिम और चुनौतियाँपर्यावरणीय प्रभाव: अत्यधिक रसायनों का उपयोग, जल-अपव्यय और मिट्टी की जमावट जैसी समस्याएँ देखने को मिलती हैंअगर सतत अभ्यास नहीं अपनाए जाएं तो दीर्घकालिक नुकसान हो सकता है ।छोटे कृषकों की असुरक्षा: बड़े प्रोसेसिंग-आधार और बाजार-एकीकरण के कारण छोटे किसान पीछे छूट सकते हैंउनका भागीदारी बनाये रखना नीति-निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती है ।मूल्य अस्थिरता: बाजार मूल्य में उतार-चढ़ाव किसानों की आय को स्थिर नहीं बनाते, इसलिए जोखिम-हैंडलिंग और मॉडर्न मार्केटिंग मॉडल जरूरी हैं ।कृषि व्यावसायीकरण के साथ नयी संवहनीयता के संकेतकृषक आय में सुधार के साथ-साथ कृषि-उद्योगों का उदय और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती संभव है यदि:मूल्य-चेन प्रबंधन (production to market) मजबूत हो।छोटे किसानों की भागीदारी सुनिश्चित हो और उनकी पहुँच-योग्यता बढ़े।पर्यावरणीय सुरक्षा मानदंडों के साथ आधुनिक तकनीक अपनाई जाए।कृषि-भंडारण, प्रसंस्करण और निर्यात-आधारित रणनीतियाँ स्पष्ट हों।संक्षेप मेंकृषि का व्यावसायीकरण एक संपूर्ण परिवर्तन है जो उत्पादन से लेकर विपणन और वितरण तक के हर पड़ाव को व्यावसायिक बनाता है।यह किसान-आय बढ़ाने के लिए उत्तम अवसर देता है, बशर्ते सतत विकास, जोखिम-प्रबंधन और पर्यावरणीय सावधानियाँ साथ-साथ अपनाई जाएँ।इससे ग्रामीण विकास, रोजगार और विदेशी मुद्रा कमाई जैसी सकारात्मक दिशा नहीं रह सकतीं, बशर्ते नकारात्मक प्रभावों पर नियंत्रण किया जाए ।17. निम्नलिखित में से भिन्न की पहचान करें। [CGL (T-I) 26 जुलाई, 2023 (IV-पाली)](a) हरित क्रांति(b) आधुनिक कृषि तकनीक(c) श्वेत क्रांति(d) बीज-उर्वरक जल तकनीकCorrect Answer: (c) श्वेत क्रांतिSolution:प्रश्नगत विकल्पों में हरित क्रांति, आधुनिक कृषि तकनीक तथा बीज उर्वरक तकनीक के संबंध कृषि से हैं, जबकि श्वेत क्रांति का संबंध दुग्ध उत्पादन से है।भिन्न की पहचान करने का प्रश्न अधूरा लगता है क्योंकि विकल्प (जैसे 1/2, 3/4 आदि) प्रदान नहीं किए गए हैं।फिर भी, भिन्नों के संदर्भ में "भिन्न की पहचान" सामान्यतः उचित भिन्न (proper fraction), अनुचित भिन्न (improper fraction)मिश्रित भिन्न या बड़ी-छोटी भिन्न की पहचान को संदर्भित करता है। नीचे पूर्ण विस्तार से सभी प्रकारों की व्याख्या दी गई है।भिन्न क्या है?भिन्न दो संख्याओं से बनती है: ऊपरी भाग अंश (numerator) और निचला भाग हर (denominator)।उदाहरण: 3443 में 3 अंश है और 4 हर। हर कभी शून्य नहीं हो सकता।उचित भिन्न की पहचानउचित भिन्न वह होती है जिसमें अंश हर से छोटा होता है (अंश<हरअंश<हर)।यह 1 से हमेशा छोटी होती है।उदाहरण: 25,71052,107।यदि विकल्पों में 5775 हो लेकिन 3223 भी हो, तो 3223 उचित नहीं क्योंकि 3 > 2।अनुचित भिन्न की पहचानअनुचित भिन्न वह होती है जिसमें अंश हर से बड़ा या बराबर होता है (अंश≥हरअंश≥हर)।यह 1 या उससे बड़ी हो सकती है।उदाहरण: 53,4435,44。परीक्षाओं में अक्सर अनुचित भिन्न को "भिन्न" (odd one out) माना जाता है यदि बाकी उचित हों।मिश्रित भिन्न की पहचानमिश्रित भिन्न पूर्णांक और उचित भिन्न का संयोजन होती है।उदाहरण: 213231 (जो 7337 के बराबर है)।पहचान: इसमें पूर्ण संख्या + भिन्न दिखती है।बड़ी या छोटी भिन्न की पहचानयदि विकल्प भिन्नें हैं जैसे 23,34,1232,43,21, तो तुलना के तरीके:हर समान हो तो: बड़ा अंश = बड़ी भिन्न। जैसे 35>2553>52。अंश समान हो तो: छोटा हर = बड़ी भिन्न। जैसे 23>2532>52。दोनों अलग: क्रॉस गुणा करें या दशमलव में बदलें। ab?cdba?dc → a×d?b×ca×d?b×c。अन्य भिन्न प्रकारसमान भिन्न: समान हर। जैसे 25=41052=104。असमान भिन्न: अलग हर।समपूर्ण भिन्न: 44=144=1。यदि विकल्प दिए होते (जैसे आयतन, ऊँचाई, छोटा), तो "छोटा" भिन्न होता क्योंकि बाकी माप इकाइयाँ हैं।पूर्ण प्रश्न दोहराएँ तो सटीक उत्तर दूँगा।18. 2011 की जनगणना के अनुसार भारत में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत हिस्सा कितना है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (IV-पाली)](a) 55.6%(b) 54.6%(c) 44.6%(d) 64.6%Correct Answer: (b) 54.6%Solution:2011 की जनगणना के अनुसार, भारत में कृषि श्रमिकों का प्रतिशत हिस्सा 54.6 प्रतिशत था। इससे तात्पर्य यह हैभारत के कुल कार्यबल का आधे से अधिक हिस्सा कृषि कार्यों में संलग्न था।NSSO द्वारा जारी आकड़ों के अनुसार, वर्ष 2022-23 के दौरान कुल कार्यबल का लगभग 45.76 प्रतिशत हिस्सा कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों में लगा हुआ है।ध्यातव्य है कि कृषि क्षेत्र, भारत के सकल मूल्य संवर्धन (GVA) में लगभग 15 प्रतिशत का योगदान देता है।विस्तारपूर्वक विवरणपरिभाषा और दायरा: कृषि क्षेत्र में काम करने वाले सभी मनुष्यों को किसान और कृषि मजदूर दोनों परिभाषित किया गया हैयानी जिनका मुख्य रोजगार कृषि से जुड़ा होता है, वे इस समूह में गिने जाते हैं.नगर और ग्रामीण विभाजन: यह आंकड़ा मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र की गतिविधियों का परिणाम हैजहां कृषि रोजगार का हिस्सा अधिक होता है; ग्रामीण-शहरी बदलावों के कारण 2001 की तुलना में इस हिस्से में गिरावट दर्ज की गई है.तुलनात्मक संदर्भ: 2001 में कृषि श्रमिकों का हिस्सा लगभग 58.2% थाजो 2011 में घटकर 54.6% रहा; इसे औद्योगिकीकरण, सेवा क्षेत्र के उन्नयन और प्रवास के कारण समझा जाता है.महिलाओं का योगदान: 2011 की जनगणना के अनुसार कुल कृषि श्रम शक्ति में महिलाओं का हिस्सा भी महत्वपूर्ण रहाअक्सर प्रमुख हिस्सा महिला श्रमिकों के रूप में दर्ज किया गया थाऊँच-नीच क्षेत्रीय विभाजन के कारण यह हिस्सेदारी स्थान-स्थान पर भिन्न है.महत्वपूर्ण बिंदुयह परिवर्तन भारत की समग्र विकास प्रक्रिया का भाग हैजिसमें कृषि से अन्य क्षेत्रों की ओर रोजगार के प्रवाह बढ़ रहा है।हालांकि अभी भी ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा हिस्सा कृषि से जुड़ा हैजिससे कृषि क्षेत्र की नीतियाँ और किसानों की आय-स्थिति महत्वपूर्ण बनी रहती है.2011 के बाद के वर्षों में भी कृषि के हिस्से में क्रमिक गिरावट के संकेत मिलते रहेलेकिन संख्यात्मक तौर पर कुल रोजगार में कृषि का योगदान अभी भी निर्णायक बना हुआ है.उद्धरण2011 की जनगणना के अनुसार कृषि क्षेत्र में काम करने वाले व्यक्तियों का हिस्सा 54.6% है.पूर्व और तुलनात्मक आँकड़े के लिए 2001 में यह हिस्सा लगभग 58.2% था, जिससे गिरावट दिखती है.कृषि क्षेत्र के भीतर किसान और कृषि मजदूर दोनों आते हैं; 2011 के आँकड़े इन्हीं दोनों समूहों को समाहित करते हैं.19. निम्नलिखित में से कौन-सी हरित क्रांति की विशेषताएं रही है? [CGL (T-I) 19 जुलाई, 2023 (I-पाली)]A. फसल उत्पादकता में उछाल।B. व्यावसायिक खेती से निर्वाह खेती की ओर झुकाव।C. रकबे (एकड़) में वृद्धि।(a) केवल A और B(b) केवल A और C(c) केवल B और C(d) सभी A, B और CCorrect Answer: (b) केवल A और CSolution:भारत में हरित क्रांति का प्रारंभ वर्ष 1966-67 हुआ था। इसके द्वारा भारत में उच्च उत्पादक बीजों का प्रयोग प्रारंभ हुआ।इसके प्रयोग से गेहूं, धान जैसी फसलों के उत्पादन में वृद्धि होने के साथ-साथ इन फसलों के रकबे (क्षेत्र) में भी वृद्धि हुई।प्रमुख विशेषताएंउन्नत बीजों का उपयोग (HYV seeds): उच्च उपज देने वाली नई बीज किस्मों का चयन और उनका बड़े पैमाने पर प्रमाणिकरणएक ही क्षेत्र में अधिक मात्रा में उत्पादन संभव हो सके.रसायनों का व्यापक उपयोग: नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों, कीटनाशकों और खरपतवारनाशकों का बढ़ा हुआ प्रयोग ताकि फसल क्षति कम हो और उपज बढ़े.सिंचाई और जल-व्यवस्थापन: समुचित और अधिक सिंचाई प्रणालियों के विकास, पम्पिंग सुविधाओं और नहर-नालों की वृद्धि के साथ वर्षा-आधारित खेती से जल-आश्रित फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि.मौखिक और त्वरित उत्पादन-आधारित खेती: कृषि के मशीनरीकरण, जैसे ड्रिल, हार्डवेयर, फार्म होयल्स आदि, ताकि उत्पादन प्रक्रिया तेज और कुशल बने.दोहरी फसल/बरसात-गुणक योजना: एक वर्ष में दो फसल चक्र प्राप्त करने हेतु मौसम-आधारित योजनाओं और विविध-फसल-घटना की रणनीतियाँ अपनाई गईंसार्वजनिक पूंजी और संस्थागत सहयोग: ग्रामीण विकास, बुनियादी ढांचे, कृषि अनुसंधान संस्थानों (जैसे ICAR) और योजना के माध्यम से प्रोत्साहन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना.खाद्यान्न आत्मनिर्भरता (खाद्य सुरक्षा): बड़े पैमाने पर गेहूं-चावल जैसे प्रमुख अनाजों की उत्पादन वृद्धि के कारण देश की खाद्य सुरक्षा में उल्लेखनीय सुधार.लाभ और परिणामखाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि और आत्मनिर्भरता: उपज बढ़ने से देश की खाद्य मांग पूरी होने लगी.किसानों की आय और जीवनस्तर में सुधार की प्रवृत्ति: बेहतर पैदावार के कारण किसानों की आय में वृद्धि के संकेत मिलते हैं.बड़े विपणन योग्य अधिशेष: उत्पादन में वृद्धि से बाज़ार में अधिक अनाज उपलब्ध हुआजिसकी वजह से निर्यात-आय और घरेलू मूल्य स्थिरीकरण के अवसर बढ़े.ध्यान देने योग्य निष्कर्ष (समकालीन परिप्रेक्ष्य में)हरित क्रांति की शाखाओं में लाभ के साथ कुछ नकारात्मक प्रभाव भी जुड़े रहेजैसे जल-आपूर्ति की कमी-गंभीरता, भूजल-अवधारणा में गिरावट, रासायनिक उर्वरकों और पेस्टिसाइड्स के स्वास्थ्य-परาประण और पर्यावरणीय असरकिसान-केन्द्रित नीति-निर्माण की जरूरतों में अंतराल.यद्यपि इसकी तकनीकी और संरचनात्मक वृद्धि ने भारत को वैश्विक खाद्यान्न-स्तर पर मजबूत बनायास्थिर दीर्घकालिक सुधार के लिए सतत कृषि-प्रथाओं, जैव विविधताजल-व्यवस्थापन के सुधरे हुए मॉडल, और टिकाऊ उर्वरक-नियंत्रण की दिशा में कदम आवश्यक हैं.उद्धरणहरित क्रांति की विशेषताएं, उन्नत बीज और उर्वरक/कीटनाशक का व्यापक प्रयोगसिंचाई एवं मशीनरीकरण आदि के बारे में संपूर्ण विवरण के लिए देखें: हरित क्रांति: परिभाषा, हरित क्रांति की विशेषताएं, योजनाएं, Drishti IAS का हरित क्रांति पन्ना.दोहरी फसल, जल-प्रबंधन और उच्च उपज वाले बीजों के उपयोग जैसे तत्वों का विस्तृत वर्णन ।20. हरित क्रांति के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? [CHSL (T-I) 02 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]i. 'हरित क्रांति' (Green revolution) शब्द का प्रयोग सर विलियम गौड (Sir William Gaud) ने किया था।ii. नॉर्मन बोरलॉग (Norman Borlaug) को हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।iii. एमएस रंधावा को भारत में हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।(a) केवल i और iii(b) केवल i और ii(c) केवल iii(d) केवल iiCorrect Answer: (b) केवल i और iiSolution:'हरित क्रांति' शब्द का प्रयोग सर विलियम गॉड (गौड) ने किया था।वैश्विक स्तर पर हरित क्रांति का जनक नॉर्मन अर्नेस्ट बोरलॉग को और भारत में हरित क्रांति का जनक एम.एस. स्वामीनाथन को माना जाता है।भारत में हरित क्रांति का प्रारंभ 1966-67 में हुआ।मुख्य कथनों का विश्लेषणहरित क्रांति से जुड़े प्रमुख कथनों की जांच से पता चलता है कि निम्नलिखित सभी सही हैं:कथन I: हरित क्रांति के आने के बाद भारत आत्मनिर्भर बन गया। यह पूरी तरह सही हैक्योंकि 1967-68 तक गेहूं और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई, जिससे भारत खाद्यान्न आयात पर निर्भरता से मुक्त हो गया।कथन II: हरित क्रांति के कारण एक ही फसल को बार-बार उगाने से मिट्टी में पोषक तत्वों की हानि होने लगी। HYV बीजों की एक ही फसल (जैसे गेहूं-चावल) की दोहराई जाने वाली खेती ने मिट्टी से नाइट्रोजन, फॉस्फोरस जैसे तत्वों को तेजी से निकाल लिया।कथन III: हरित क्रांति के कारण ताजे भूजल की कमी हो गई। गहन सिंचाई (ट्यूबवेल और नहरों) के कारण पंजाबहरियाणा जैसे क्षेत्रों में भूजल स्तर तेजी से गिरा, खासकर जल-गहन फसलों के लिए।सकारात्मक प्रभावहरित क्रांति ने खाद्यान्न उत्पादन को 50 मिलियन टन से बढ़ाकर 130 मिलियन टन तक पहुंचाया। बड़े किसानों को विशेष लाभ हुआजिन्होंने मशीनरी और उर्वरकों में निवेश किया।इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हुई और पूंजीवादी खेती को बढ़ावा मिला।नकारात्मक प्रभावरासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी का स्वास्थ्य बिगड़ा, जल प्रदूषण बढ़ा तथा जैव विविधता प्रभावित हुई।छोटे किसानों के लिए यह असमानता का कारण बनी, क्योंकि HYV तकनीक बड़े पैमाने पर ही लाभदायक थी।ऐतिहासिक पृष्ठभूमिनॉर्मन बोरलॉग को 'हरित क्रांति का जनक' कहा जाता है, जबकि भारत में एम.एस. स्वामीनाथन ने इसका नेतृत्व किया।1965-67 के सूखे के बाद यह शुरू हुईजिसका उद्देश्य भुखमरी रोकना और लंबे समय में कृषि आधुनिकीकरण था।Submit Quiz« Previous1234Next »