Correct Answer: (c) हरित क्रांति के कारण शहरी से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवास में वृद्धि हुई।
Solution:- विकल्प (c) को छोड़कर अन्य सभी विकल्प हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभावों में शामिल हैं।
- हरित क्रांति के फलस्वरूप केवल मध्यम तथा बड़े किसान ही नई तकनीक से लाभान्वित हुए।
- इससे लघु किसान, जिनकी कृषि क्षेत्र में अधिक भागीदारी है, अछूते रहे। इनके कारण लघु किसानों का ग्रामीण क्षेत्रों से शहरी क्षेत्रों की ओर विस्थापन बढ़ा।
- मुख्य नकारात्मक प्रभाव
- हरित क्रांति के प्रमुख नकारात्मक प्रभावों में रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता में कमी
- मृदा क्षरण, लवणीकरण और अम्लीकरण शामिल हैं। जल संसाधनों का अंधाधुंध दोहन सिंचाई के लिए हुआ
- जिससे भूजल स्तर गिरा और जल संकट उत्पन्न हुआ। फसल विविधता की कमी से जैव विविधता का ह्रास हुआ
- एकल फसलों (जैसे गेहूं-चावल) पर निर्भरता बढ़ी, और छोटे किसानों के लिए मशीनरी तथा रसायनों का बोझ असहनीय साबित हुआ।
- जो नकारात्मक प्रभाव नहीं है
- हरित क्रांति के नकारात्मक प्रभावों में शहरी से ग्रामीण क्षेत्रों की ओर प्रवासन में वृद्धि नहीं आता
- वास्तव में, इसके विपरीत ग्रामीण से शहरी प्रवासन बढ़ा क्योंकि बड़े किसानों को लाभ हुआ
- छोटे किसान तथा भूमिहीन मजदूर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए।
- अन्य सामान्य विकल्प जैसे "बढ़ती कीमतें और नकद भुगतान" या "बांधों का निर्माण" भी कभी-कभी भ्रमित किए जाते हैं
- ये या तो सकारात्मक परिणाम हैं या हरित क्रांति से असंबंधित।
- सामाजिक-आर्थिक असर
- सामाजिक असमानता बढ़ी क्योंकि बड़े किसान (पंजाब, हरियाणा जैसे क्षेत्रों में) उच्च उपज वाली बीजों, उर्वरकों और सिंचाई से लाभान्वित हुए
- जबकि छोटे तथा सीमांत किसान कर्ज के जाल में फंसे और भूमिहीन श्रमिक बन गए।
- ग्रामीण गरीबी, स्वास्थ्य समस्याएं (रसायनों से प्रदूषण) और ऋण जाल की समस्या उभरी।
- पर्यावरणीय रूप से, जल प्रदूषण, यूट्रोफिकेशन और लाभकारी कीटों का नुकसान हुआ।
- दीर्घकालिक परिणाम
- रासायनिक इनपुट्स ने मिट्टी के सूक्ष्मजीवों को नष्ट किया, जिससे दीर्घकालिक उत्पादकता घटी।
- पारंपरिक फसलों की आनुवंशिक विविधता कम हुई, फसलें रोगों के प्रति संवेदनशील हो गईं।
- आज भी नई हरित क्रांति की मांग मृदा स्वास्थ्य सुधार और टिकाऊ कृषि के लिए हो रही है।