कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र (अर्थव्यवस्था)

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31. 2022 में, केंद्र ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुद्दों पर गौर करने के लिए पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव ....... की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया। [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) संजय अग्रवाल
Solution:
  • जुलाई, 2022 में केंद्र सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के मुद्दों पर विचार करने के लिए एक समिति का गठन किया था।
  • इस समिति के अध्यक्ष पूर्व केंद्रीय कृषि सचिव संजय अग्रवाल थे।
  • समिति का गठन
    • यह 26 सदस्यीय समिति 17-18 जुलाई 2022 को कृषि मंत्रालय द्वारा बनाई गई थी।
    • इसका मुख्य उद्देश्य MSP व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और किसान हितैषी बनाना था।
    • समिति में नीति आयोग सदस्य रमेश चंद, कृषि अर्थशास्त्री सीएससी शेखर, सुखपाल सिंह, सीएसीपी सदस्य नवीन पी सिंह जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं।
  • समिति के कार्य
    • समिति को निम्नलिखित मुद्दों पर सुझाव देने का निर्देश दिया गया:
    • MSP सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक तंत्र विकसित करना।
    • शून्य बजट प्राकृतिक खेती (Zero Budget Natural Farming) को बढ़ावा देना।
    • फसल विविधीकरण, बाजार सुधार और सीएसीपी को अधिक स्वायत्तता प्रदान करना।
  • पृष्ठभूमि
    • यह समिति 2020-21 के किसान आंदोलन के बाद बने वादे के तहत गठित की गई
    • जब तीन कृषि कानूनों को निरस्त किया गया। हालांकि, MSP की कानूनी गारंटी पर स्पष्ट चर्चा अधिसूचना में नहीं थी।
    • किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें शामिल किए गए।

32. भारत सरकार की सितंबर, 2020 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारत सरकार द्वारा पिछले 6 वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दरों पर कितना भुगतान किया गया है? [CGL (T-I) 18 अप्रैल, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 7 लाख करोड़ रु.
Solution:
  • भारत सरकार की सितंबर, 2020 की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार
  • भारत सरकार द्वारा पिछले 6 वर्षों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दरों पर 7 लाख करोड़ रु. का भुगतान किया गया है।
  • प्रेस विज्ञप्ति का संदर्भ
    • यह जानकारी आर्थिक मामलों की केंद्रीय कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक से जुड़ी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई
    • जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की।
    • विज्ञप्ति में वर्तमान सरकार द्वारा MSP व्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को बेहतर मूल्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
    • इसी संदर्भ में रबी विपणन सीजन 2021-22 के लिए 6 रबी फसलों (गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों, कुसुम) के MSP में वृद्धि की घोषणा भी की गई
    • जो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप थी।
  • MSP भुगतान का विस्तार
    • भुगतान वृद्धि: पिछले 6 वर्षों में MSP पर खरीद का मूल्य 7 लाख करोड़ रुपये पहुंचा
    • जो पूर्ववर्ती UPA सरकार के 6 वर्षों (2004-05 से 2009-10) के भुगतान से लगभग दोगुना था। इससे किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिला।
    • उदाहरण वृद्धि: मसूर के MSP में 300 रुपये/क्विंटल, चना व सरसों में 225 रुपये/क्विंटल, कुसुम में 112 रुपये/क्विंटल
    • जौ में 75 रुपये/क्विंटल और गेहूं में 50 रुपये/क्विंटल की बढ़ोतरी की गई।
    • MSP 22 अनिवार्य फसलों (खरीफ की 14, रबी की 6 और 2 व्यावसायिक) के लिए निर्धारित होती है
    • जिसकी सिफारिश कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) करता है। यह व्यवस्था फसल मूल्यों में गिरावट से किसानों की रक्षा करती है।
  • MSP का महत्व
    • MSP भारत सरकार का बाजार हस्तक्षेप उपकरण है, जो खरीफ व रबी फसलों पर लागू होता है।
    • सितंबर 2020 के समय यह घोषणा किसान आंदोलनों के बीच हुई
    • जब सरकार ने MSP को कानूनी गारंटी देने से इंकार किया लेकिन खरीद बढ़ाने का आश्वासन दिया।
    • कुल मिलाकर, यह भुगतान किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य से जुड़ा था।