Solution:'नंदिनी कृषक समृद्धि योजना' की शुरुआत राज्य में मवेशियों की नस्ल में सुधार एवं दूध उत्पादन बढ़ाने हेतु नंद बाबा मिशन के एक हिस्से के रूप में की गई। प्रथम चरण (2023-24) में प्रदेश के 10 मंडल मुख्यालयों के जनपदों अयोध्या, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, लखनऊ, कानपुर, झांसी, मेरठ, आगरा एवं बरेली में संचालित की जा रही है। प्रथम चरण में प्रदेश में 25 दुधारू गायों की 35 इकाइयां स्थापित की जाएंगी। दुधारू गायों में साहीवाल, गिर, थारपारकर एवं गंगातीरी प्रजाति की गायें ही सम्मिलित की जाएंगी। परंतु गंगातीरी नस्ल की गोवंश वाली इकाइयों में अधिकतम पांच गंगातीरी गोवंश अनुमन्य होंगे। परियोजना के वित्तीय उपाशय का आकलन गोवंश क्रय एवं अवस्थापना पर व्यय तथा इकाई संचालन पर व्यय के अनुसार निर्धारित किया गया है। परियोजना के दो विकल्प होंगे-(1 ) लागत 6250000 रुपये साहीवाल अथवा गिर अथवा थारपारकर नस्ल के 25 गोवंश हेतु 100000 रुपये प्रति गोवंश के आधार पर आगणन किया जाएगा।
(2) लागत 6100000 रुपये साहीवाल अथवा गिर अथवा थारपारकर नस्ल के 20 गोवंश के साथ-साथ गंगातीरी नस्ल की अधिकतम 5 गोवंश। गंगातीरी गोवंश क्रय का मूल्य 70000 रुपये प्रति गोवंश के आधार पर आगणित किया जाएगा तथा साहीवाल अथवा गिर अथवा थारपारकर नस्ल की गायों का आगणन 100000 रुपये प्रति गोवंश के आधार पर किया जाएगा। कुल अनुदान परियोजना लागत का 50 प्रतिशत देय होगा।
उद्देश्य
राज्य में उच्च उत्पादन क्षमता के गोवंश का संवर्धन,
पशुओं की दुग्ध उत्पादन क्षमता में वृद्धि,
राज्य में पशुपालकों हेतु उच्च उत्पादन क्षमता के गोवंश की
उपलब्धता सुनिश्चित करना,
रोजगार के अवसर प्रदान करना तथा
पशुपालकों की आय को बढ़ाना।
लाभार्थी का चयन :
(i) लाभार्थी की पात्रता :
(क) लाभार्थी स्थानीय निवासी होना चाहिए।
(ख) लाभार्थी का आधारकार्ड अथवा पहचान-पत्र होना चाहिए।
(ग) गोपालन अथवा महिष पालन का कम-से-कम तीन वर्षों का अनुभव होना चाहिए तथा इसका प्रमाण संबंधित मुख्य पशु चिकित्साधिकारी द्वारा दिया गया हो।
(घ) इकाई स्थापना हेतु लगभग 0.5 एकड़ भूमि आवश्यक होगी।
(ङ) इसके अतिरिक्त लगभग 1.5 एकड़ की भूमि चारा उत्पादन हेतु स्वयं की अथवा पैतृक /साझेदारी अथवा न्यूनतम 07 वर्षों के लिए पंजीकृत अनुबंध पर ली गई हो तथा भूमि परियोजना के अनुकूल (जलभराव इत्यादि से मुक्त) हो।
(च) पूर्व में संचालित कामधेनु अथवा मिनी कामधेनु अथवा माइक्रो कामधेनु योजना के लाभार्थियों को इस योजना का लाभ नहीं दिया जा सकेगा।