Solution:वर्ष 2015 में पेरिस जलवायु समझौते में की गई अपनी प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2030 तक गैर-जीवाश्म ईंधन स्रोतों से स्थापित विद्युत क्षमता का 40 प्रतिशत हासिल करने के लिए विभिन्न नीतिगत उपाय किए हैं। किसानों को ऊर्जा और जल सुरक्षा प्रदान करने और उनकी आमदनी बढ़ाने, खेती के क्षेत्र को डीजल से मुक्त करने तथा पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करने के लिए भारत सरकार ने फरवरी, 2019 में पीएम-कुसुम योजना को मंजूरी दी थी। P.M. - KUSUM (प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान) का उद्देश्य सौर ऊर्जा की स्थापना करना तथा पंप सेटों को सौर ऊर्जा से जोड़कर किसानों की डीजल पर निर्भरता को समाप्त करना है।'पीएम कुसुम' से संबंधित अद्यतन (23 दिसंबर, 2023 को जारी) जानकारी निम्न है प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम-कुसुम) के मुख्य उद्देश्यों में कृषि क्षेत्र का डी- डीजलीकरण, किसानों को जल एवं ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण प्रदूषण पर रोक लगाना शामिल है। इस योजना के तीन घटक हैं जिनमें 34,422 करोड़ रुपये की कुल केंद्रीय वित्तीय सहायता के साथ 31 मार्च, 2026 तक 34.8 गीगावॉट की सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित है।
इस योजना की अन्य मुख्य विशेषताएं निम्नलिखित हैं-
घटक लक्ष्य एवं मानदंड-
यह योजना मांग पर आधारित है और योजना के लिए जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, कार्यान्वयन के लिए देश के सभी किसानों के लिए खुली हुई है।
घटक ए : किसानों की बंजर/परती/चरागाह/दलदली/कृषि योग्य भूमि पर 10,000 मेगावॉट के विकेंद्रीकृत ग्राउंड स्टिल्ट माउंटेड सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना। ऐसे संयंत्र व्यक्तिगत किसान, सौर ऊर्जा डेवलपर, सहकारी समितियों, पंचायतों और किसान उत्पादक संगठनों द्वारा स्थापित किए जा सकते हैं।
घटक बीः ऑफ-ग्रिड क्षेत्रों में 14 लाख स्वचालित सौर पंपों की स्थापना।
घटक-सी : (i) व्यक्तिगत पंप सौरकरण और (ii) फीडर स्तर सौरकरण के माध्यम से 35 लाख ग्रिड से जुड़े कृषि पंपों का सौरकरण।
घटक-बी और घटक-सी के अंतर्गत लाभार्थी व्यक्तिगत किसान, जल उपयोगकर्ता संघ, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां और समुदाय/क्लस्टर आधारित सिंचाई प्रणाली शामिल हो सकते हैं। पीएम-कुसुम के अंतर्गत राज्यवार लक्ष्य या निधि आवंटन नहीं किया जाता है, क्योंकि यह एक मांग आधारित योजना है। इसके अतिरिक्त, कतिपय लक्ष्यों की प्राप्ति करने पर राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों की निधियां जारी की जाती हैं।