कृषि (भारत का भूगोल)

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11. हरित क्रांति के दूसरे चरण के संबंध में इनमें से कौन-सा कथन सही है ? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) इसमें 1980 के दशक की अवधि शामिल की गई थी।
Solution:
  • हरित क्रांति का दूसरा चरण 1980 के दशक में प्रारंभ किया गया था।
  • इसका दूसरा चरण वर्ष 1981 से 1995 तक की अवधि को माना जाता है।
  • इस चरण के तहत सिंचाई सुविधाओं से वंचित रहने वाले राज्यों को प्राथमिकता दी गई थी।
  • जबकि हरित क्रांति के प्रथम चरण (वर्ष 1966-1981) के तहत ही पंजाब तथा उत्तर प्रदेश को आच्छादित किया गया था।
  • समय-संदर्भ और उद्देश्य
    • यह चरण अधिक विविधीकरण और जल-संरक्षण को प्राथमिकता देता है ताकि उत्पादन स्थिर और दीर्घकालीन हो सके।​
  • लक्षित क्षेत्र और तकनीकियाँ
    • इस चरण में यह माना गया कि केवल पंजाब-हरियाणा जैसे सिंचित क्षेत्रों तक सीमित न रहें बल्कि अन्य कम अनुकूल क्षेत्रों में भी उन्नत किस्में, जल प्रबंधन, और कृषि तकनीकों को अपनाया जाए।
    • इसमें सूखा-प्रतिरोधी किस्में, जल्दी पकने वाले जीनोमिक स्रोत, और integrated pest management (कीट नियंत्रण) जैसी कार्रवाइयाँ समाहित की गईं।​
  • उत्पादन और कृषि प्रणाली पर प्रभाव
    • दूसरे चरण ने कुल मिलाकर उत्पादन वृद्धि के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा को मजबूत किया और दीर्घकालीन कृषि विकास की दिशा में योगदान दिया।
    • यह चरण पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने और स्थायी कृषि practices को अपनाने पर भी बल देता रहा।​
  • पहली बनाम दूसरी चरण की तुलना
    • पहला चरण (1960s-1970s) HYV बीज, उर्वरक, और सिंचाई जैसी मौलिक तकनीकों पर केंद्रित था
    • मुख्यतः अधिक सिंचित क्षेत्रों को लक्ष्य बना था।
    • दूसरा चरण (1980s) इन सफलताओं को फैलाने, जल-संरक्षण, रोग-कीट नियंत्रण के एकीकृत उपायों और कम अनुकूल क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने पर केंद्रित रहा।
    • इसलिए यह कहना गलत होगा कि दूसरा चरण 1960–70 के दशक को शामिल नहीं करता
    • बल्कि यह 1980 के दशक के दौरान हुआ और उसी समयकाल में यह विकसित हुआ।​
  • कुछ प्रमुख बिंदु (संक्षेप)
    • दूसरा चरण: 1980s में हुआ​
    • उद्देश्य: कम अनुकूल क्षेत्रों में उत्पादन बढ़ाने, जल-संरक्षण, स्थायित्व

12. भारत में जायद के मौसम में निम्न में से कौन-सी फसल उगाई जाती है? [CGL (T-I) 21 जुलाई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) खीरा
Solution:
  • जायद की फसल की बुवाई मार्च-अप्रैल में की जाती है तथा मई-जून के बीच में कटाई की जाती है।
  • इस मौसम में उगाई जानी वाली प्रमुख फसलें तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, मूंग, उड़द आदि हैं।
  • मुख्य फसलें (जायद) विवरण
    • ताजा फल और सब्ज़ियाँ: तरबूज, खरबूजा, खीरा, ककड़ी, करेला आदि गर्मियों की सब्जियाँ जिनमें स्वाद और कीमतें उच्च होती हैं
    • इन्हें सिंचित खेतों में उगाने की प्रवृत्ति अधिक होती है, ताकि पानी की उपलब्धता का नियंत्रण संभव हो.​
    • दलहन और तिलहन: मूंग, उड़द, सूरजमुखी जैसे दालों के साथ कुछ हल्के तिलहन
    • इनकी बुवाई तथा कटाई तेजी के कारण जायद क्षेत्र में सामान्य है.​
    • अनाज: मक्का, जौ, ज्वार, बाजरा आदि गर्मी-उपयुक्त अनाज जिनकी बोाई मार्च-अप्रैल में अधिक होती है और कटाई जून तक हो सकती है.​
    • चावल (गर्मी धान) और अन्य क्षेत्रों में चयनित फसलें: कुछ जगहों पर धान की गर्मी-धान किस्में भी जायद में उगाई जाती हैं, विशेषकर सिंचित क्षेत्रों में.​
  • राज्य-स्तरीय रुझान
    • उत्तर भारत के कई प्रमुख राज्यों में जायद फसलें मार्च से जून के दौरान बोई जाती हैं
    • जून तक फसलें तैयार हो जाती हैं, जबकि खरीफ और रबी की फसलें मानसून और ठंडे मौसम के अनुरूप होती हैं.​
    • पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रदेशों में जायद की प्रमुखता होती है
    • जहां सिंचित भूमि उपलब्ध होती है और गर्म मौसम का लाभ उठाया जाता है.​
  • जायद बनाम अन्य मौसमी फसलें (संक्षेप में)
    • खरीफ: जून से सितंबर/अक्टूबर तक; प्रमुख फसलें धान, मक्का, कपास आदि. जायद इस मौसम के बीच एक अल्पकालिक गर्मी-उपयुक्त मौसम है.​
    • रबी: अक्टूबर/नवंबर से मार्च तक; प्रमुख फसलें गेहूं, सरसों आदि. जायद इन दोनों के बीच का छोटा स्पैन है.​
  • फसल चयन के आधार
    • जलवायु: गर्मी और सूखा सहन होने चाहिए
    • पानी की उपलब्धता सीमित हो तो भी उगाई जा सकने वाली फसलें प्राथमिकता पाती हैं.​
    • प्रशिक्षण और सिंचाई: अधिकतर जायद फसलें सिंचित भूमि पर उगाई जाती हैं
    • बफर जल प्रबंधन संभव रहता है.​
    • फसल चक्र: जायद फसलें खरीफ-रबी के बीच का अंतराल भरती हैं
    • फसल चक्र को समयानुसार संतुलित करती हैं.​

13. निम्नलिखित में से किस फसल को उत्तम अनाज में वर्गीकृत किया गया है? [CHSL (T-I) 4 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) गेहूं
Solution:
  • गेहूं की फसल को उत्तम अनाज में वर्गीकृत किया गया है। रागी, बाजरा, ज्वार आदि मोटे अनाज की श्रेणी में आते हैं।
  • मक्का और बाजरे का उपयोग पशु चारे के रूप में भी किया जाता है।
  • परिभाषा और पृष्ठभूमि
    • उत्तम अनाज (fine grain) एक विशिष्ट वर्गीकरण शब्द है जो प्रमुख तौर पर उन फसलों के लिए प्रयुक्त होता है
    • जिनकी दाने सूक्ष्म आकार के होते हैं और जिनका उपयोग विशेष प्रकार के आटे, प flour, या व्यावसायिक खाद्य उत्पादों में किया जाता है।
    • गेहूं इसी श्रेणी में प्रमुख उदाहरण के तौर पर जाना जाता है
    • जबकि अन्य मोटे अनाज (जैसे बाजरा, ज्वार) को सामान्य or coarse grains माना जाता है ।​
  • क्यों गेहूं को उत्तम अनाज कहा जाता है
    • गेहूं के आटे की महीन बनावट और परिष्कृत रूप ( refined flour) के लिए उपयुक्त डंठल और ग्लूटेन संरचना इसे विभिन्न प्रकार के प्रसंस्करण योग्य उत्पादों—रोटियाँ, बेकरी उत्पाद, पास्ता आदि—में उपयुक्त बनाती है
    • इसलिए इसे उत्तम अनाज के रूप में वर्गीकृत किया जाता है ।​
    • भारत के संदर्भ में भी गेहूं को खाद्यान्न की उच्च-चालक और प्रमुख फसल माना गया है
    • यह देश के ठंडे/ऊष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में व्यापक तौर पर उगाई जाती है
    • प्रमुख आहार के रूप में भूमिका निभाती है ।​
  • अन्य संबंधित बिंदु (परीक्षण/शिक्षा पर केंद्रित)
    • अभिलेखों के अनुसार, कई शिक्षा-समर्पित स्रोतों में गेहूं को उत्तम अनाज के रूप में पहचाना गया है
    • जबकि बाजरा आदि कुछ स्रोतों में मोटे अनाज के रूप में भी सूचीबद्ध होते हैं
    • यह वर्गीकरण क्षेत्रीय तथा पाठ्यक्रम-दर-निर्देशों पर निर्भर कर सकता है ।​
    • अनाज के प्रकार और उनकी कृषि-जलवायु विविधताओं का संक्षिप्त भेद भी नोट किया जाता है
    • चावल और गेहूं भारत की प्रमुख खाद्य फसलें मानी जाती हैं
    • जबकि अन्य जैसे बाजरा आदि क्षेत्र-विशिष्ट होते हैं ।​
  • निष्कर्ष
    • इस प्रश्न के अनुसार सही उत्तर गेहूं है, जिसे उत्तम अनाज के रूप में वर्गीकृत किया गया है
    • विशेषकर इसके डंडे/आटे की उच्च-गुणवत्ता और प्रसंस्करण-उपयुक्तता के कारण ।​
  • संदर्भ/स्रोत
    • गेहूं को उत्तम अनाज के रूप में वर्गीकृत किया गया है.​
    • भारत में प्रमुख खाद्य फसलों में गेहूं और चावल के महत्व पर सूचना मिलती है.​

14. रबी की फसल किस महीने में बोई जाती है? [CHSL (T-I) 11 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) अक्टूबर-दिसंबर
Solution:
  • रबी की फसल की बुवाई अक्टूबर से दिसंबर (मुख्यतः अक्टूबर- नवंबर) के मध्य की जाती है।
  • जबकि इनकी कटाई मार्च से अप्रैल के मध्य की जाती है। रबी की प्रमुख फसलें इस प्रकार हैं-गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों आदि।
  • मुख्य बिंदु
    • बुवाई का मानसून के समाप्त होते ही शुरू होना: रबी फसलें उन क्षेत्रों में बोई जाती हैं
    • जहाँ वर्षा कम होती है या ठंडी मौसम में जलवायु अनुकूल रहती है
    • ताकि ठंडे तापमान में पौध विकसित हो सकें। वहीं खरीफ फसलें मानसून के दौरान बोई जाती हैं।
    • प्रमुख रबी फसलें: गेहूं, जौ, चना, मसूर, सरसों/कलसी, मूंगफली (कुछ क्षेत्रों में), मटर आदि शामिल हैं।
    • फसल चयन क्षेत्रीय जलवायु और मिट्टी पर निर्भर करता है।
    • तापमान और आर्द्रता: रबी के लिए ठंडा तापमान उचित होता है
    • बीज जमावट और अंकुरण goed हो सके; फसल पकने के समय शुष्क, ठंडी हवा से लाभ मिलता है।
    • इसका अर्थ है कि ठंडा मौसम बुवाई के समय लाभकारी है
    • पकने के दौरान सूखा/शुष्क वातावरण आवश्यक होता है।
    • कटाई का समय: आम तौर पर फरवरी– मार्च के अंत से अप्रैल तक कटाई शुरू होती है
    • कुछ क्षेत्रों में फरवरी से शुरू होकर मार्च के अंत तक चलती है।
    • कटाई के बाद फसल को सुखाकर मुड़ाई/गहनी की प्रक्रिया की जाती है।
    • क्षेत्रीय विविधता: भारत के उत्तर-पश्चिमी और मध्य भागों में पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के कारण कभी-कभी बोआई समय और कटाई की विंडो में बदलाव होता है
    • इसका असर वर्षा-सहिष्णुता और फसल सुरक्षा पर पड़ता है
    • [उच्चारण: मौसम परिवर्तन के कारण बुवाई की सही तिथि क्षेत्र के अनुसार भिन्न हो सकती है]।
    • [उदा: स्थानीय समाचार/फार्मिंग ब्रीफिंग में बोआई विंडो की धीमी प्रगति की रिपोर्टें भी मिलती हैं]
  • बढ़िया फसल योजना कैसे करें
    • क्षेत्रीय मौसम निधि: अपने जिले/तालुक/confidence के अनुसार बुवाई का आदर्श समय देखें; कई जगह नवंबर-दिसंबर ही बुवाई का प्रमुख समय होता है।
    • जल स्रोत योजना: रबी में जल की उपलब्धता साल भर में कम होती है
    • इसलिए सिंचाई योजना पहले से बनाकर रखें।
    • रोग-कीट नियंत्रण: ठंडी मौसम में उभरने वाले सामान्य रोगों/कीटों के लिए पूर्व-निवारण उपाय रखें।
    • योजना के अनुसार फसल चयन: मिट्टी की प्रकार, नमी स्तर, और उपलब्ध फसल बीज के अनुसार गेहूं, चना, सरसों आदि की प्रमुख रबी फसलें आमतौर पर उगाई जाती हैं।

15. भारत दालों का ....... उत्पादक और दालों का ....... उपभोक्ता है। [CHSL (T-I) 10 मार्च, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) सबसे बड़ा, सबसे बड़ा
Solution:
  • भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है।
  • भारत में दलहन के रूप में मुख्य रूप से अरहर, चना, मटर, मसूर आदि की पैदावार होती है
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • भारत विश्व में दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है, जबकि देश ही नहीं बल्कि वैश्विक खपत का एक बड़ा हिस्सा भी भारत में ही होता है।
    • साथ ही, भारत दालों का बड़ा आयातक भी है, जिसे आत्मनिर्भरता बढ़ाने के प्रयास वर्षों से जारी हैं।​
  • भारत दालों का उत्पादक
    • भारत वैश्विक दाल उत्पादन का प्रमुख हिस्सा संभालता है
    • यह दावा कई ठोस आँकड़ों से समर्थित है जिसमें वैश्विक उत्पादन का लगभग एक चौथाई हिस्सा भारत से आता है।
    • यह स्थिति दालों के लिए भारत की कृषि-तंत्र की परिधि और किसानों की उत्पादकता को दर्शाती है।​
    • हालिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत में दालों का उत्पादन लगातार वृद्धि की राह पर है
    • 2024–25 के आस-पास उत्पादन स्तर लगभग 252 लाख टन (तीसरे अग्रिम अनुमान) तक पहुँच चुका है
    • जिसे राष्ट्रीय पोषण सुरक्षा कार्यक्रमों के साथ जोड़ा गया है।
    • इससे साफ दिखता है कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि की प्रवृत्ति मजबूती से बनी हुई है।​
  • भारत दालों का उपभोक्ता
    • विश्व खपत के संदर्भ में भारत दालों का एक बड़ा उपभोक्ता है
    • जिसे वैश्विक खपत का लगभग 27% के करीब माना गया है।
    • यह दर्शाता है कि भारत की दालों पर निर्भरता केवल उत्पादन तक सीमित नहीं है
    • बल्कि घरेलू खपत का एक बड़ा हिस्सा भी देश में ही है।​
    • दालों की आयात-निर्भरता परिप्रेक्ष्य में भी ध्यान देने योग्य है: हाल के वर्षों में आयात का स्तर उच्च रहा है
    • सरकार ने आयात-निर्भरता कम करने तथा घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिये कार्यक्रम चालू किये हैं।
    • उदाहरण के तौर पर, 2023–24 में आयात मात्रा उल्लेखनीय रही है
    • आत्मनिर्भरता उन्नयन के लिए नीति-उद्देश्य स्पष्ट हैं।​
  • उत्पादन और आत्मनिर्भरता के प्रयास
    • सरकार ने दालों की आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए 2025–26 से 2030–31 के दौरान क्रियान्वयन हेतु आत्मनिर्भरता मिशन को मंजूरी दी है
    • जिसका उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता घटाना और पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
    • यह स्पष्ट करता है कि सरकार दालों के संदर्भ में दीर्घकालिक सुरक्षा और किसानों की आय को उन्नत करने के लिए नीतिगत ढांचे बना रही है।​
    • OECD-FAO Agricultural Outlook 2025–2034 के अनुसार आने वाले वर्षों में भारत में दाल उत्पादन वृद्धि की संभावना प्रबल है
    • जिससे 80 लाख टन के बराबर वृद्धि संभव मानी जा रही है।
    • यह अध्ययन बताता है कि उन्नत तकनीक, बुआई-व्यवस्था में विस्तार, और फसली सुधार उत्पादन वृद्धि के प्रमुख चालक होंगे।​
  • कौन से दालें प्रमुख हैं
    • भारत में प्रमुख दालों में चना, मूंग, उड़द, मोठ/तुर आदि शामिल हैं
    • इनका आहार-व्यापक प्रभाव और प्रोटीन-स्रोत के रूप में महत्व है।
    • इसके अलावा पत्तेदार और स्वादिष्ट पकवानों में भी इन दालों का व्यापक उपयोग होता है।​
  • निष्कर्ष
    • संक्षेप में, भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक है
    • वैश्विक दाल खपत में उसका हिस्सा बड़ा रहा है, जबकि घरेलू खपत के साथ आयात-अवरोध भी एक चुनौती बना हुआ है।
    • सरकार की आत्मनिर्भरता और उत्पादन वृद्धि की योजनाओं के साथ, आने वाले वर्षों में दालों की आत्मनिर्भरता और किसानों की आय में वृद्धि के अवसर बढ़ सकते हैं।

16. खरीफ की फसलों की कटाई कब की जाती है? [CHSL (T-I) 14 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) अक्टूबर - नवंबर
Solution:
  • भारतवर्ष में तीन प्रकार की फसलें उगाई जाती हैं- (1) रबी (2) खरीफ एवं (3) जायद। रबी की बुआई मुख्यत
  • अक्टूबर-नवंबर में तथा कटाई मार्च-अप्रैल में, खरीफ की बुवाई जून-जुलाई में तथा कटाई अक्टूबर - नवंबर में की जाती है।
  • जायद फसलों की बुवाई मार्च-अप्रैल में की जाती है
  • इसकी कटाई जून तक कर ली जाती है। इनमें मुख्यतः सब्जियां उगाई जाती हैं।
  • खरीफ फसलें क्या हैं
    • खरीफ फसलें वर्षा ऋतु या मानसून पर निर्भर होती हैं
    • जिनकी बुवाई जून-जुलाई में पहली अच्छी बारिश के साथ की जाती है।
    • ये फसलें गर्मी, उच्च आर्द्रता और पर्याप्त जल की आवश्यकता रखती हैं
    • इनकी अवधि लगभग 3-5 महीने की होती है। भारत में ये फसलें कृषि का प्रमुख हिस्सा हैं
    • क्योंकि मानसून देश की 70% से अधिक वर्षा प्रदान करता है।​
  • कटाई का सामान्य समय
    • खरीफ फसलों की कटाई सितंबर के अंत से अक्टूबर-नवंबर तक होती है
    • जब फसलें पूरी तरह पक जाती हैं और दाने सख्त हो जाते हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, धान, मक्का और बाजरा जैसी फसलें सितंबर-अक्टूबर में कटाई योग्य हो जाती हैं।
    • क्षेत्रीय जलवायु के आधार पर यह समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है, जैसे दक्षिण भारत में नवंबर तक विलंब।​
  • प्रमुख खरीफ फसलें और उनकी कटाई
    • धान (चावल): जुलाई में बुवाई, सितंबर-अक्टूबर में कटाई; बालियां पीली पड़ने पर तैयार।​
    • मक्का: जून-जुलाई बुवाई, सितंबर अंत में कटाई जब दाने सुनहरे और सख्त हों।​
    • बाजरा, ज्वार: जून बुवाई, सितंबर-अक्टूबर कटाई; सूखे मौसम में पकना तेज।​
    • दालें (मूंग, उड़द, अरहर): जुलाई बुवाई, अक्टूबर तक कटाई जब 80-90% पॉड्स सूखें।​
    • कपास, सोयाबीन: जून-जुलाई बुवाई, अक्टूबर-नवंबर कटाई; कपास के बाल खुलने पर।​
  • कटाई के कारक और सावधानियां
    • कटाई का समय फसल की किस्म, मिट्टी, वर्षा मात्रा और तापमान पर निर्भर करता है
    • जल्दी या देरी से कटाई उपज हानि का कारण बनती है।
    • किसानों को हार्वेस्टर, थ्रेशर की जांच, मजदूर व्यवस्था और मौसम पूर्वानुमान पर ध्यान देना चाहिए।
    • सितंबर अंत में कई फसलें तैयार हो जाती हैं, इसलिए गुणवत्ता बनाए रखने हेतु 85-90% पकाव जरूरी।​
  • क्षेत्रीय भिन्नताएं
    • उत्तर भारत (पंजाब, UP) में सितंबर-अक्टूबर, जबकि दक्षिण (आंध्र, तमिलनाडु) में अक्टूबर-नवंबर तक कटाई।
    • पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र जैसे राज्य मानसून वितरण के कारण भिन्न समय अपनाते हैं।
    • जलवायु परिवर्तन से अनियमित मानसून कटाई में चुनौतियां बढ़ा रहा है।​

17. निम्नलिखित में से किसे भारत में एक फसल के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया गया है? [CHSL (T-I) 20 मार्च, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) निशा
Solution:
  • निशा को भारत में एक फसल के तौर पर वर्गीकृत नहीं किया गया है।
  • भारत में तीन फसली मौसम होते हैं-रबी, खरीफ और जायद। रबी की फसल अक्टूबर से नवंबर तक बोई जाती है।
  • खरीफ फसलों की बुआई जून से जुलाई के बीच (मानसून के आगमन के साथ) तथा जायद फसलों की बुआई मार्च से अप्रैल के बीच की जाती है।
  • फसलें और उनके वर्गीकरण के संभावित स्पष्टीकरण
    •  जिनकी खेती बड़े भूखंडों पर, एकाधिक वर्षों तक एक ही पौधे की किस्म (जैसे कॉफी, कोकोआ, चाय, रबर) पर केंद्रित होती है
    • उत्पादन अक्सर वस्तुभिन्नी (industrial) व्यापारों के लिए होता है।
    • भारत में पारंपरिक बाजरा या दालों जैसी फसलों को इस श्रेणी में नहीं गिना जाता
    • क्योंकि इनकी खेती व्यापक भू-भाग में विविध कृषि-उत्पादन के साथ होती है
    • आज भी घरेलू खपत मुख्य रहता है [संदर्भ: सामान्य कृषिपद्धति और पाठ्यपुस्तक समीक्षा]।
    • cereals/food crops: बाजरा, गेहूं, चना आदि मुख्य खाद्य अनाज हैं
    • जिनकी खेती क्षेत्रीय जलवायु के अनुसार खानापूर्ति के लिए होती है
    • plantation crop नहीं मानी जातीं [संदर्भ: सामान्य कृषि इतिहास/पाठ्यपुस्तकें]।
    • cash crops: गन्ना, कपास जैसी फसलें व्यापारिक मूल्य के कारण “Cash crops” के रूप में प्रसिद्ध हैं
    • इन्हें भी plantation crop के समान नहीं कहा जाता
    • ये अक्सर छोटे- बड़े खेतों में रोपण-आधारित, फसल-आय के अंतरालों में उगती हैं
    • क्लासिकल plantation मॉडल से भिन्न होती हैं [स्रोत-समरी]।
  • नोट्स और सीमाओं के बारे में
    • कुछ अध्ययन/सारांशों में बाजरा को plantation crop के रूप में सूचीित किया जा सकता है
    • व्यापक कृषि-विकल्प के अनुसार इसे आम तौर पर plantation crop नहीं माना जाता।
    • इसलिए definitive answer के लिए मानक कृषि संहिताओं/सरकारी स्रोतों के साथ मिलान आवश्यक है।
    • यदि आवश्यकता हो, तो मैं विश्वसनीय सरकारी पन्नों (जैसे कृषि विज्ञान संस्थान, मंत्रालय के डाटाबेस) से नवीनतम और सटीक वर्गीकरण ढूंढ कर दे सकता हूँ और हर दावे के साथ संदर्भ दूँ।

18. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य 2020 तक भारत में ज्वार का सबसे बड़ा उत्पादक है? [CHSL (T-I) 14 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (c) महाराष्ट्र
Solution:
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2020 तक भारत में ज्वार का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य महाराष्ट्र था।
  • एग्रीकल्चरल स्टैस्टिक्स एट ए ग्लैंस 2022 के अनुसार, वर्ष 2021-22 (च.अ.अ.) में भारत में ज्वार के तीन शीर्ष उत्पादक राज्य क्रमशः इस प्रकार हैं
  • महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा राजस्थान।
  • विस्तृत विवरण
    • पृष्ठभूमि: भारत में ज्वार एक प्रमुख खरीफ/खरीफ-रबी संयुक्त फसल है
    • जो मुख्यतः अर्ध-शुष्क और निम्न वर्षा वाले क्षेत्रों में उगाई जाती है।
    • महाराष्ट्र ने दशकों से ज्वार उत्पादन में प्रमुख स्थान बनाए रखा है
    • खासकर पूर्वी कोंकण-पूर्वी महाराष्ट्र के जिलों और मराठवाड़ा क्षेत्र में।
    • उत्पादन ड्राइवर्स: जल निकासी वाली हल्की मिट्टी, अनुकूल वर्षा–आधारित कृषि मॉडल, और बड़े क्षेत्रीय उत्पादन क्षेत्रों के कारण महाराष्ट्र ज्वार का अग्रणी उत्पादक बना हुआ है।
    • साथ ही, क्षेत्रीय विविधताएं (जैसे सोलापुर, अहमदनगर, औरंगाबाद आदि जिलों में उत्पादन अधिक होता है) महाराष्ट्र के शीर्ष स्थान को मजबूती देती हैं।
    • अन्य प्रमुख राज्य: महाराष्ट्र के बाद कर्नाटक और राजस्थान जैसे राज्य आते हैं
    • जो ज्वार उत्पादन में क्रमशः दुसरे और तीसरे स्थान पर आ सकते हैं।
    • यह वितरण समय के साथ कुछ वर्षों में परिवर्तन का संकेत देता है
    • स्रोतों में संगतता: विभिन्न शैक्षणिक/प्रश्नोत्तर स्रोत भी यही निष्कर्ष देते हैं
    • 2020 तक महाराष्ट्र भारत का सबसे बड़ा ज्वार उत्पादक राज्य रहा है
    • इसके साथ महाराष्ट्र का योगदान पूरे प्रकाशन क्षेत्रों में उच्च रहा है।
  • ध्यान दें
    • क्षेत्रीय उत्पादन आंकड़े साल-दर-वर्ष अंतर के साथ बदलते रहते हैं
    • नवीनतम कृषि वर्षवार डेटा के लिए राज्य कृषि विभागों या केंद्रीय किसान आयोग (DAC&FW) की ताजा वार्षिक बरोबरी देखना लाभकारी होगा।

19. निम्नलिखित में से किस फसल का वर्णन इस प्रकार किया गया है - 'यह एक ऐसी फसल है, जिसका उपयोग भोजन और चारे दोनों के रूप में किया जाता है। यह एक खरीफ की फसल है, जिसे 21°C से 27°C के बीच तापमान की आवश्यकता होती है और यह पुरानी जलोढ़ मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ती है? [CGL (T-I) 12 अप्रैल, 2022 (I-पाती), C.P.O.S.L. (T-I) 11 नवंबर, 2022 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मक्का
Solution:
  • मक्का मुख्यतः खरीफ की फसल है, जिसे 21°C से 27°C के बीच तापमान की आवश्यकता होती है
  • यह पुरानी जलोढ़ मिट्टी में अच्छी तरह से बढ़ती है।
  • विस्तृत विवरण:
    • उपयोग: मक्का खाने के साथ चारे के रूप में भी प्रयोग होता है; מגוון खाद्य पदार्थ और पशुधन आहार के लिए मुख्य स्रोत माना जाता है.​
    • प्रकार: यह खरीफ फसल है, जिसे वर्षा आधारित मौसम में उगाया जाता है
    • मिट्टी और जलवायु: पुरानी जलोढ़ मिट्टी में भी इसका अच्छा विकास होता है
    • यह मिट्टी तलछट से बनी नदियों की जमा बार बार पुनः उभरती परिस्थितियों में उगता है.​
    • अतिरिक्त उपयोग: इथेनॉल, स्टार्च आदि उद्योगिक उत्पाद बनाने में भी मक्का का इस्तेमाल होता है.​
  • संदर्भ (उद्धरण):
    • मक्का के बारे में स्पष्ट रूप से कहा गया है
    • यह भोजन और चारे दोनों के लिए प्रयोग होता है
    • यह खरीफ फसल है जिसकी तापमान आवश्यकता 21–27°C है तथा पुरानी जलोढ़ मिट्टी में अच्छी तरह उगती है.​
    • अन्य स्रोतों का भी समान उल्लेख मिलता है
    • मक्का ऐसा कपास/धान नहीं है जो चारे के लिए प्रसिद्ध हो, बल्कि यही वह फसल है
    • जिसे दोनों प्रकार के उपयोगों के लिए जाना जाता है.​

20. चावल की खेती के संदर्भ में, राज्य और फसल के प्रकार का कौन-सा/से युग्म सुमेलित है/हैं? [C.P.O.S.L. (T-I) 10 नवंबर, 2022 (II-पाली)]

I. पंजाब - निर्वाह फसल

II. ओडिशा - वाणिज्यिक फसल

Correct Answer: (c) न तो I और न ही II
Solution:
  • हरियाणा और पंजाब में चावल वाणिज्यिक फसल है, जबकि ओडिशा में चावल निर्वाह (जीविका) फसल है।
  • अतः न तो युग्म I सही है और न ही युग्म II सही है।
  • चावल की खेती व्यापक रूप से प्रमुखतः खरीफ मौसम में होती है
  • यह आर्द्र, गर्म जलवायु में सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
  • इसके लिए तापमान लगभग 25°C से ऊपर चाहिए और वर्षा 1000 mm से अधिक या समान जलवृष्टि की जरूरत पड़ती है
  • जबकि कम वर्षा वाले क्षेत्रों में सिंचाई-सहायता आवश्यक होती है
  • यह वाकई में डेल्टा और नदी घाटियों में अधिक प्रचलित है
  • जहां जलोढ़ मिट्टी चावल के लिए आदर्श मानी जाती है.​
  • भारत में चावल उत्पादन के प्रमुख राज्य सामान्यतः पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब तथा अन्य पूर्वी/पूर्वोत्तर राज्यों जैसे असम, Odisha आदि के साथ जुड़ते हैं
  • पश्चिम बंगाल सबसे अधिक उत्पादन वाला राज्य माना जाता है
  • जबकि उत्तर प्रदेश और पंजाब भी बड़े योगदान करते हैं
  • यह तीनों राज्य मिलकर देश के कुल चावल उत्पादन का बड़ा हिस्सा प्रस्तुत करते हैं, विशेषकर पूर्वी और उत्तर-पूर्वी जलवायु क्षेत्रों में.​
  • क्षेत्रीय विभाजन के अनुसार भारत के प्रमुख चावल-उद्योग क्षेत्र:
    • उत्तर-पूर्वी क्षेत्र: असम आदि में अधिकांश वर्षा आधारित चावल-उत्पादन; जलोढ़ मिट्टी और भारी वर्षा उपयुक्तता के कारण जल्दी से बारिश-आधारित फसल चक्र के साथ उगाई जाती है.​
    • पूर्वी क्षेत्र: बिहार, झारखंड, बंगाल आदि में गंगा-यमुना डेल्टा में उच्च उत्पादन
    • ये क्षेत्र चावल के राष्ट्रीय उत्पादन में बड़ा भाग देते हैं.​
    • पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु आदि में बारिश-पर निर्भर क्षेत्र के साथ सिंचाई पर भी निर्भर फसल। पंजाब/हरियाणा के कुछ कम वर्षा वाले क्षेत्रों में भी चावल उगाया जाता है
    • क्योंकि नहरों/डेल्टा-तालाबों से सिंचाई उपलब्ध है.​
    • डेल्टा और जलोढ़ मिट्टी वाले क्षेत्र: गोदावरी-क्रिश्ना-केावेरी डेल्टा आदि चावल उत्पादन के लिए उच्च-उत्पादन क्षमताएं दिखाते हैं.​
  • फसल-प्रकार (युग्मन) के संदर्भ में जिन्हें अक्सर देखा जाता है:
    • प्रमुख चावल प्रकार R1, R2, R3 जैसे टैगिंग वाले आकलन-उत्पादन रिकॉर्ड में कुछ अध्ययन राज्यों के विविध प्रकारों की भागीदारी दिखाते हैं
    • सामान्यतः एतिहासिक तौर पर ज्यादातर चावल प्रजातियाँ इंडियन राइस की विविधता-समुदाय में शामिल रही हैं (जैसे IR36 जैसी कटियाँ आदि).​
    • भारत में खरीफ चावल (rice) के लिए उन्नत/उच्च-उत्पादन रेसिपी और आधुनिक प्रजनन कई राज्यों में उपलब्ध हैं
    • जिनसे क्षेत्र-विशिष्ट चयन संभव होता है.​​
  • जलवायु- मिट्टी आवश्यकताएं:
    • जल-संरक्षण की स्थिति में चावल के लिए उच्च तापमान और वर्षा आवश्यकता; जल-समृद्ध क्षेत्रों में जल-सिंचित फसल के रूप में उगना सामान्य है
    • मिट्टी: डेल्टा-जमीनी, लौहमिट्टी, और उर्वर जलोढ़ मिट्टी चावल के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है
    • शुष्क या कम जल-संपीड़ित क्षेत्रों में भी गहराई से सिंचाई कर के उगाया जा सकता है.​
  • उपज और योगदान के ब्योरे:
    • भारत में चावल का उत्पादन देश की कुल कृषि-भूमि का एक प्रमुख हिस्सा है
    • कुल आहार में चावल की योगदान के कारण देश के खाद्य सुरक्षा पर बड़ा प्रभाव है
    • पश्चिम बंगाल का योगदान विशेष रूप से उच्च रहता है.​
  • जलवायु-ऋतु संबंधी संक्षेप:
    • खरीफ फसल के मौसम (नवंबर-जुलाई के आस-पास बोवाई/काटाई) में गर्मी/आर्द्र जलवायु लाभकारी रहती है
    • दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरूआत से चावल की बुवाई अधिकतर जुड़ी रहती है.​
  • टिप्पणियाँ और स्पष्टताएं
    • राज्य-फसल युग्मन के सुसंगत विवरण क्षेत्रीय भू-आकृति, नदी घाटियों, डेल्टा क्षेत्रों और जल-स्रोतों के उपलब्धता पर निर्भर करते हैं
    • पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और पंजाब भारत के प्रमुख चावल-उत्पादन राज्यों की सूची में सबसे प्रमुख हैं
    • क्षेत्रीय विविधता के कारण अन्य राज्यों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है.​
    • चावल की खेती में जलवायु और मिट्टी की अनुकूलता को ध्यान में रखकर कृषि-पद्धतियाँ (जैसे डेल्टा-फार्मिंग, सिंचाई-आधारित कृत्रिम वर्षा) विकसित की गई हैं
    • जिससे विभिन्न राज्यों में फसल-युग्मन में विविधता रहती है