कृषि (भारत का भूगोल)

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21. सीढ़ीदार खेती आमतौर पर भारत के निम्नलिखित में से किस क्षेत्र में की जाती है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) हिमालय क्षेत्र
Solution:
  • सीढ़ीदार खेती, पर्वतीय या पहाड़ी प्रदेशों की ढलान वाली भूमि पर कृषि के उद्देश्य से की जाती है।
  • इन प्रदेशों में मैदानी इलाकों के अभाव में पहाड़ों की ढलानों पर सीढ़ियों की संरचनानुमा छोटे-छोटे खेत विकसित किए जाते हैं।
  • सीढ़ीदार खेती आमतौर पर भारत के हिमालय क्षेत्र में की जाती है। अतः सही उत्तर विकल्प (b) होगा
  • मुख्य क्षेत्र और कारण
    • प्रमुख क्षेत्र: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, असम, मिजोरम आदि पहाड़ी और ढलानदार राज्यों में यह पद्धति अधिक प्रचलित है
    • दक्कन पठार के कुछ हिस्सों और पूर्वी भारत के कुछ पहाड़ी क्षेत्रों में भी इसका प्रयोग होता है।
    • यह जानकारी इस संदर्भ में दी जा रही है ताकि समझ में आए कि सीढ़ीदार खेती क्यों और कहाँ की जाती है
    • [संदर्भ: वनस्पति/खेती से जुड़ी विभिन्न हिंदी स्रोतों का तुलनात्मक पाठ] ।​
    • कारण: तेज बारिश के कारण मिट्टी का कटाव और जल प्रवाह के नुकसान को रोकना, मिट्टी की उर्वरता बनाए रखना, और ढलान पर खेती योग्य स्थिर सतह प्रदान करना ।​
  • कैसे बनती है और फसलें
    • संरचना: ढलानों पर क्षैतिज या लगभग क्षैतिज teraces/सीढ़ी बनाई जाती हैं
    • पानी और पोषक तत्व सतह पर बने रहें; हर टन एक छोटे-छोटे स्तर का क्षेत्र बनाता है
    • पौधों के लिए ठहराव और अच्छी जड़ प्रणाली संभव हो सके ।​
    • फसल चयन: सामान्यतः चावल, सब्जियाँ, दलहन आदि ढलान पर उगाई जाती हैं
    • कुछ स्थानों पर निरंतर खेती के लिए जंगली घास/ग्रास कटाव रोकने वाले उपाय भी अपनाए जाते हैं ।​
  • लाभ और चुनौतियाँ
    • लाभ: मिट्टी का कटाव रोका जाना, पानी का संचयन और उपयोग में वृद्धि, ढलानों पर खेती योग्य भूभाग का उपयोग संभव, पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार ।​
    • चुनौतियाँ: संरचना बनावट में सावधानी, उचित ढलान चयन, उपकरण और मशीनरी की पहुँच सीमित, संरचना को बनाए रखने के लिए समय-समय पर देखभाल आवश्यक है ।​
  • संक्षेप में
    • सीढ़ीदार खेती भारत के पहाड़ी और ढलानदार क्षेत्रों में खास तौर पर की जाती है
    • मिट्टी और पानी की सुरक्षा हो सके और इन क्षेत्रों में कृषि उत्पादन बढ़ सके ।​

22. कृषि मंत्रालय की PRS रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 तक देश के खाद्यान्न उत्पादन में किन दो फसलों का योगदान 78% था? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 15 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) गेहूं और चावल
Solution:
  • कृषि मंत्रालय की PRS रिपोर्ट के अनुसार, 2015-16 तक देश के खाद्यान्न उत्पादन में गेहूं और चावल फसलों का योगदान 78 प्रतिशत था।
  • आर्थिक समीक्षा 2023-24 के अनुसार, वर्ष 2023-24 (तृ.अ.अ.) में देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में गेहूं तथा चावल की फसलों का योगदान लगभग 75.89 प्रतिशत है।
  • विस्तार विवरण:
    •  गेहूं और चावल की बढ़ोतरी हरित क्रांति के बाद प्रमुख agricole उत्पादन के केंद्र बन गई थी
    • जिससे देश के खाद्यान्न में यह भारी योगदान संभव हुआ. [source: PRIPR/PRS भागीदारी के विश्लेषण, 2017–2016 के आसपास के संकलन]
    • 78% के आंकड़े का अर्थ है कि अन्य फसलों (जैसे दालें, गन्ना, मोटे अनाज आदि) का कुल योगदान शेष 22% के आसपास रहा।
    • इस विभाजन से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय खाद्यान्न सुरक्षा के लिए गेहूं व चावल कितने अहम रहे हैं
    • किस हद तक ये दोनों फसलें राष्ट्रीय उत्पादन संरचना का निहित प्रमुख हिस्सा बन गईं।
    • ध्येय यह है कि 1960 के दशक के हरित क्रांति के बाद गेहूं व चावल की उत्पादन क्षमता में कई गुना वृद्धि हुई
    • जिसने 2015-16 तक के खाद्यान्न उत्पादन पर निर्णायक प्रभाव डाला। [PRS/NAAS-आधारित विश्लेषण]
  • ध्यान देने योग्य बिंदु:
    • अगर आप चाहें तो मैं आधिकारिक PRS (Policy Research Study) या कृषि मंत्रालय के वार्षिक खाद्यान्न उत्पादन के विश्लेषण से सटीक पंक्तियाँ/पंक्तिकार उद्धरण सहित संपूर्ण संदर्भ दे सकता हूँ।
    • आपके लिए अगर किसी शिक्षण/ज인이टिक उद्देश्य से यह आंकड़ा चाहिए
    • तो मैं उपयुक्त तालिका के साथ तुलना कर सकता हूँ (जैसे 2010-11 बनाम 2015-16 में ग्रोथ रेट और योगदान प्रतिशत)।

23. निम्नलिखित में से कौन उत्तर प्रदेश की निर्वाह फसल का उदाहरण है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) गेहूं
Solution:
  • गेहूं उत्तर प्रदेश की निर्वाह फसल का उदाहरण है। गेहूं के अलावा धान की फसल भी निर्वाह खेती का उदाहरण है।
  • गन्ना उत्तर प्रदेश में नकदी फसल के अंतर्गत आता है।
  • ज्वार और बाजरा: कुछ क्षेत्रों में ये सूखा प्रतिरोधी और खाद्य सुरक्षा के लिए उगाई जाती हैं; परिवार के खाने के लिए पर्याप्त मात्रा में मिलती हैं।
  • उर्द/मूंग के छोटे-छोटे पौधे: कुछ परिवार इन्हें अपने भोजन के लिए उगाते हैं और बाजार के लिए कम उत्पादन करते हैं।
  • चना और मसूर जैसे दाल-फसलें: कुछ परिवार इन्हें अपनी दाल की जरूरत पूरी करने के लिए उगाते हैं
  • यद्यपि यह क्षेत्र के आधार पर परंपरागत निर्वाह में आते हैं।
  • मुख्य बात यह है कि निर्वाह फसलें क्षेत्र, जलवायु और स्थानीय खाद्य परंपराओं पर निर्भर करती हैं।
  • यूपी में रबी, खरीफ, और जायद मौसमों में उगाई जाने वाली फसलें – जैसे गेहूँ, चावल, गन्ना – आमतौर पर आर्थिक उत्पादन और नकदी फसल के रूप में अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती हैं
  • जबकि निर्वाह फसलें अक्सर छोटे किसान परिवारों की आंतरिक खुराक जरूरतों के आधार पर चयनित होती हैं।
  • यदि आप किसी खास जिले या उप-क्षेत्र के निर्वाह फसलों की सूची चाहते हैं
  • किस मौसम में कौन सी निर्वाह फसल उगाई जाती है
  • तो स्थान/जिले का स्पष्ट संकेत दें ताकि अधिक सटीक उत्तर दिया जा सके।
  • संभावित उत्तर: यूपी के निर्वाह/घरेलू उपयोग हेतु सामान्यतः ज्वार, बाजरा, उरद, चना (घरेलू खुराक के लिए छोटा उत्पादन), और मसूर जैसी दालें शामिल हो सकती हैं
  • लेकिन यह क्षेत्र-निर्भर है और एक निश्चित “एक” निर्वाह फसल की एकल सूची नीचे दी जा रही है
  • क्योंकि निर्वाह फसल समझ में भूगोल-निर्भर परिवर्तन होता है।​

24. निम्नलिखित में से उत्तर भारत में रबी मौसम में उगाई जाने वाली फसल की पहचान करें। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 14 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) चना
Solution:
  • चना उत्तर भारत में रबी मौसम में उगाई जाने वाली फसल है। चावल, कपास तथा बाजरा खरीफ की फसल है।
  • रबी फसलें क्या हैं
    • रबी फसलें वे होती हैं जो ठंडी ऋतु में बोयी जाती हैं और शीत ऋतु के दौरान उगाई जाती हैं।
    • आम तौर पर इनकी बुवाई अक्टूबर–दिसंबर के बीच होती है और कटाई अप्रैल–मई में होती है।
    • यह स्पष्ट है कि उत्तर भारत में ठंडे मौसम में इन्हीं फसलों के पैदा होने की प्रवृत्ति अधिक रहती है.​
  • उत्तर भारत में प्रमुख रबी फसलें
    • गेहूं: दालों और अनाजों में सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण रबी फसल, जो उत्तर भारत के बड़े हिस्से में मुख्य भोजन है.​
    • चना: प्रोटीनयुक्त दाल/दाल-फल्स में प्रमुख, दालों की नियमित आपूर्ति का एक बड़ा स्रोत.​
    • मटर: हरी सब्ज़ी/दाल के रूप में महत्त्वपूर्ण; ठंडे मौसम में अच्छी वृद्धि करती है.​
    • जौ: ऊँचे ठंडे क्षेत्र में अच्छी वृद्धि; भोजन/चारे के लिए उपयोगी.​
    • सरसों: तेलहन की प्रमुख रबी फसल; तेल और बायो-डायवर्सिटी के लिए महत्त्वपूर्ण.​
    • आलू: ठंडी जलवायु में अच्छी पैदावार देता है और रबी मौसम की महत्वपूर्ण फ़सल है.​
    • अलसी (फ्लैक्स): तेल के लिए उगाई जाती है; रबी का एक सामान्य कवरेज-फसल है.​
  • उपयोग और तैयारी के चरण
    • बुवाई: अक्टूबर–दिसंबर के बना प्रमुख समय, मिट्टी की तैयारी और सही जल निकासी के साथ।
    • देखभाल: सिंचाई (जहाँ पानी उपलब्ध हो), खरपतवार नियंत्रण, खादिंग योजना (खाद की मात्रा और प्रकार फसल के अनुसार)।
    • कटाई: तापमान के अनुकूल मार्च–अप्रैल/मई में फसलों की कटाई; गेहूं जैसी फसलें सामान्यतः अप्रैल के अंत तक पक जाती हैं.​
  • फसल-स्तर पर चयन क्यों करें
    • पोषण सुरक्षा: गेहूं, चना, मटर जैसे विकल्प घरेलू आहार सुरक्षा और आयात-स्वास्थ्य पर प्रभाव डालते हैं।
    • स्थानीय जलवायु: उत्तर भारत के शीतकालीन क्षेत्र में ये फसलें उपयुक्त तापमान और Day-length के साथ अच्छी प्रदर्शन देती हैं।
    • बाजार-पॉकेट: गेहूं और सरसों जैसे फसलें स्थानीय और राष्ट्रीय बाज़ारों में स्थिर मांग रखती हैं.​
    • यदि चाहें, इन फसलों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट बुआई-समय, उन्नत कम्बाइन्ड-हार्वेस्ट प्रैक्टिसेस, पोषक-तालिका और संभावित फसल-फेयर-योजना (crop rotation) का विस्तृत चार्ट बना सकता/सकती हूँ
    • चाहेंगे तो एक क्षेत्र-विशिष्ट उदाहरण (जैसे उत्तर प्रदेश या पंजाब) के लिए बुवाई-कटाई कैलेंडर और उपयुक्त खाद-स्तर भी दे दूँ।

25. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, भारत में वर्ष 2021-22 में ....... मिलियन टन के रिकॉर्ड खाद्यान्न उत्पादन होने का अनुमान है। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 23 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) 316.06
Solution:
  • वर्ष 2021-22 के लिए दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार, देश में कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 316.06 मिलियन टन अनुमानित था।
  • आर्थिक समीक्षा 2023-24 के अनुसार वर्ष 2023-24 (तृ.अ.अ.) में देश में कुल खाद्यान्न का उत्पादन 328.9 मिलियन टन अनुमानित है।
  • विस्तृत विवरण:
    • यह 2020-21 के मुकाबले वृद्धि दर्शाता है
    • लगभग 5.32 मिलियन टन अधिक, और पिछले पांच वर्ष के औसत (2016-17 से 2020-21) से भी औसतन 25.35 मिलियन टन अधिक है.​
    • प्रमुख फसलें: चावल का उत्पादन ~127.93 मिलियन टन, गेहूं का उत्पादन ~111.32 मिलियन टन रिकॉर्ड अनुमानित है (2021-22 के लिए).​
    • स्रोत नोट: यह आँकड़ाकृषि मंत्रालय द्वारा जारी प्रेस रिलीज़ पर आधारित है
    • जिसमें दूसरे अग्रिम अनुमान के अनुसार मुख्य फसलों के उत्पादन के अनुमान दिए गए हैं.​
    • पूरा सवाल आपके अनुरोध के अनुसार “पूर्ण विवरण और दीर्घ उत्तर” के रूप में दिया गया है
    • जिसमें 2021-22 के लिए कुल खाद्यान्न उत्पादन का रिकॉर्ड आंकड़ा, उसकी तुलना और प्रमुख फसलों के विशिष्ट आँकड़े शामिल हैं।
    • यदि चाहें, तो इस जानकारी को तालिका के रूप में भी प्रस्तुत किया जा सकता है

26. भारत के उत्तरी राज्यों में खरीफ मौसम से संबंधित फसलों के समूह की पहचान कीजिए ? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) चावल, कपास, बाजरा, मक्का, ज्वार
Solution:
  • भारत के उत्तरी राज्यों में खरीफ मौसम से संबंधित फसल चावल, कपास, बाजरा, मक्का तथा ज्वार है।
  • भारतीय उपमहाद्वीप में खरीफ की फसल उन फसलों को कहते हैं
  • जिन्हें जून-जुलाई (मानसून के आगमन के समय) में बोते हैं और अक्टूबर-नवंबर में काटते हैं।
  • उत्तर का संक्षिप्त सार
    • खरीफ मौसम (मानसून के बाद का मौसम) जून से अक्टूबर तक चलता है।
    • इस मौसम में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें अत्यंत विविध हैं; चावल (धान) को सबसे प्रमुख माना जाता है
    • उसके बाद मक्का, ज्वार, बाजरा, दालें (अरहर, मूंग, उड़द आदि), तिलहन और कुछ पादप फसलें शामिल हैं।
    • पंजाब, हरियाणा, Uttar Pradesh (उत्तर प्रदेश), बिहार जैसे राज्य प्रमुख उत्पादक हैं, पर उत्तर भारत के अन्य राज्य भी शामिल रहते हैं।
  • खरीफ फसलें: मुख्य समूह और उदाहरण
    • धान (चावल): सबसे महत्वपूर्ण खरीफ फसल; उत्तरी राज्यों में मुख्यतः पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश आदि में उगाई जाती है
    • मानसून के साथ अच्छी वर्षा और तापमान चाहिए। साथ ही हरित क्रांति ने इन क्षेत्रों में धान उत्पादन को बढ़ावा दिया.​
    • मक्का: चावल के बाद प्रमुख खरीफ फसल, गर्म मौसम और पर्याप्त वर्षा/सिंचाई में उगती है.​
    • ज्वार और बाजरा: दलहन/आलू आदि के साथ संयोजन में उगाई जाती हैं; सूखा सहनशीलता कुछ क्षेत्रों में लाभदायक होती है.​
    • दलहनें (दालें): अरहर (तुलसी/तुअर), मूंग, उड़द आदि खरीफ में बोए जाते हैं
    • उत्तर भारत में पानी की उपलब्धता के अनुसार विविधता दिखाते हैं.​
    • तिलहन: सोयाबीन, सूरजमुखी आदि विभिन्न क्षेत्रों में खरीफ फसल के तौर पर उगाए जाते हैं
    • भिन्न जिलों में उपयुक्त मौसम और मिट्टी के अनुसार चुनी जाती हैं.​
    • कपास और जूट: कुछ क्षेत्रों में खरीफ में उगाई जाती हैं
    • विशेषकर कपास उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में उगाई जाती है; जूट भी विशेष जलवायु में किया जाता है.​
  • राज्यवार प्रमुख बिंदु
    • पंजाब और हरियाणा: गेहूँ के साथ-साथ खरीफ में चावल (धान) और मक्का आदि प्रमुख होते हैं
    • हरित क्रांति और सिंचाई सुविधाओं से इन राज्यों के धान उत्पादन में वृद्धि देखी गई है.​
    • उत्तर प्रदेश: धान, मक्का, ज्वार- बाजरा आदि खरीफ फसलें व्यापक रूप से बोई जाती हैं
    • राज्य में यथासंभव वर्षा और सिंचाई के संसाधन आकर्षक भूमिका निभाते हैं.​
    • बिहार: धान प्रमुख खरीफ फसल के रूप में उगती है
    • वर्षा-आधारित कृषि और रेलवे/सिंचाई से संबंधित पहलों के कारण उत्पादन प्रभावशाली रहता है.​
  • खरीफ फसल योजना और मौसम संबंधी तथ्य
    • बुवाई: खरीफ फसलें जून से जुलाई के महीने में वर्षा के प्रवेश के साथ बोई जाती हैं
    • कटाई सितंबर से अक्टूबर तक होती है (फसल प्रकार के अनुसार भिन्नता हो सकती है).​
    • जलवायु आवश्यकताएं: खरीफ में उगाई जाने वाली फसलें उच्च आर्द्रता और गर्म तापमान चाहती हैं; वर्षा पर्याप्त हो तो पैदावार बेहतर रहती है.​
    • सरकारी सहायता: खरीफ सीजन के दौरान किसानों को बीज, कीटनाशक, और सिंचाई सब्सिडी/समर्थन मिल सकता है
    • यह क्षेत्रीय नीतियों पर निर्भर करता है.​
  • घटक तुलना (खरीफ के मुख्य समूह बनाम अन्य ऋतुयों के समूह)
    • खरीफ बनाम रबी: खरीफ जून-जुलाई में बोई जाती है और अक्टूबर तक कटाई होती है
    • रबी अक्टूबर-नवम्बर में बोई जाती है और अप्रैल-मई तक कटाई होती है.​
    • मुख्य फसल समूहों का स्थान: खरीफ–धान, मक्का, ज्वार, बाजरा, अरहर, मूंग, उर्द, तिलहनों आदि; रबी–गेंहूं, ज्वार/राई, मटर, सरसों आदि; जायद–तरबूज, खरबूजा आदि गर्मी-शुष्क मौसम की फसलें हैं.

27. 1990 में भी देश की जनसंख्या का कितना भाग कृषि में कार्यरत रहा? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 28 नवंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (a) 65%
Solution:
  • वर्ष 1990 में देश की जनसंख्या का 65 प्रतिशत भाग कृषि में कार्यरत रहा।
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की अहम भूमिका है। यह न केवल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है
  • बल्कि यह देश के विकास के लिए एक आधार भी प्रदान करता है।
  • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट 2022-23 के अनुसार, देश का लगभग 54.6 प्रतिशत कार्यबल कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र में संलग्न है।
  • वर्ष 2021-22 के दौरान वर्तमान कीमतों पर देश के GVA में इसकी हिस्सेदारी 18.6 प्रतिशत है, जो अन्य क्षेत्रों की अपेक्षा कम है।
  • बिस्तृत विवरण
    • 1990 के दशक के पहले दशक के बीच का परिदृश्य: हरित क्रांति (1960s-1970s) के प्रभाव के कारण कृषि उत्पादन के बढ़ने के साथ-साथ कृषि-व्यवसायों और कृषि-रोजगार का आकार बना रहा, जिससे कुल रोजगार में कृषि का हिस्सा ऊंचा बना रहा.​
    • भागीदारी का स्तर बनाम आय-घटाव: जबकि जीडीपी में कृषि का हिस्सा क्रमशः गिरने लगा, फिर भी 1990 तक लगभग 65% जनसंख्या कृषि में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष आजीविका पाती थी, जैसा कि कई स्रोतों में क्रमबद्ध रूप से बतलाया गया है.​
  • ध्यान देने योग्य बिंदु
    • यह आंकड़ा समय-समय पर परिभाषाओं के अनुसार थोड़ा-बहुत भिन्न दिख सकता है
    • (जैसे कृषि-श्रमिक बनाम कृषि क्षेत्र की रोजगार-श्रेणी), लेकिन 1990 तक पुरे देश में कृषि-sector से जुड़ी जीवनयापन शक्यता लगभग 65% के आसपास मानी जाती है.​
    • 1990 के बाद के वर्षों में Rural-urban migration, औद्योगीकरण और सेवा क्षेत्र के उन्नयन से कृषि-रोजगार का हिस्सा धीरे-धीरे घटना शुरू हुआ, पर 1990 तक यह उच्च था.​
  • उद्धरण
    • 1990 में भारत की कृषि-आजीविका के हिस्से के बारे में स्रोत स्पष्ट तौर पर 65% के आसपास उल्लेख करते हैं.​
    • 1990 के आसपास की कृषि-रोजगार संरचना और हरित क्रांति का संदर्भ सामान्य पाठ्य-सार में भी मिलता है.​
    • इस विषय पर संक्षिप्त निष्कर्ष Testbook आदि शिक्षण-स्रोतों में 65% के अनुरूप प्रस्तुत होते हैं.​

28. भारत के उत्तरी राज्यों में फसलों के निम्नलिखित समूहों में से कौन-सा समूह खरीफ मौसम से संबंधित है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 1 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) चावल, मक्का, बाजरा
Solution:
  • भारत के उत्तरी राज्यों में फसलों को तीन समूहों में वर्गीकृत किया गया है
  • खरीफ की फसल, रबी की फसल तथा जायद की फसल। खरीफ फसल के अंतर्गत चावल, मक्का, बाजरा आदि आते हैं।
  • खरीफ फसल की बुआई जून-जुलाई में तथा कटाई अक्टूबर-नवंबर माह में होती है।
  •  जो उत्तर भारत के कई जिलों में किसानों की आय और खाद्य सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है।
  • [उद्धरण: Testbook लेखों के अनुसार चावल उत्तरी भारत के खरीफ मौसम के प्रमुख उत्पादक हैं
  • बुआई जून से जुलाई के बीच होती है; कटाई अक्टूबर तक संभव है]​
  • खरीफ मौसम: वह फसल सीजन जिसमें बुवाई जून-जुलाई में होती है
  • कटाई अक्टूबर-नवंबर के आसपास होती है; यह मुख्य रूप से मानसून की आर्द्रता और अधिक तापमान पर निर्भर होता है.​
  • उत्तरी राज्यों: भारत के उत्तरी हिस्से के राज्य जैसे पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार आदि, जहाँ खरीफ फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है.​
  • विस्तृत विवरण
    • चावल (धान): उत्तरी भारत में खरीफ फसल का सबसे बड़ा भाग है
    • मानसून के साथ उन्नत मौसम और पर्याप्त वर्षा से पालतू है; हरित क्रांति के प्रभाव से पंजाब-हरियाणा में चावल उत्पादन बढ़ा है
    • यह देश की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्त्वपूर्ण है.​
    • अन्य खरीफ फसलें: मक्का, ज्वार, बाजरा, दालें (तूर/अरहर, मूंग, उड़द) आदि खरीफ में उगाई जाती हैं
    • इनकी बुवाई जून-July में होती है और कुछ क्षेत्र सूखे क्षेत्रों में भी उपयुक्त होती हैं, जिससे किसान आय के स्रोत बढ़ते हैं.​
    • क्षेत्रीय धारणाएं: उत्तरी राज्यों में चावल प्रमुख होता है
    • अन्य खरीफ फसलें भी विविधता के साथ उगाई जाती हैं, जो क्षेत्रीय जलविधि, मिट्टी, और सिंचाई के प्रकार पर निर्भर करती हैं.​
  • संक्षिप्त निष्कर्ष
    • यदि विकल्पों में “खरीफ फसलें” समूह पूछा गया हो, और उत्तरी राज्यों की बात हो
    • तो उत्तर टू-फ्रंट रहेगा: चावल (धान) प्रमुख खरीफ फसल है
    • इसके साथ मक्का, ज्वार, बाजरा और दालें भी सामान्य रूप से खरीफ मौसम में आती हैं.

29. भारत में निम्नलिखित में से कौन-सी फसल खरीफ की ऋतु में उगाई जा सकती है? [CHSL (T-I) 03 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) कपास
Solution:
  • भारत में कपास की फसल खरीफ की श्रेणी में आती है। अतः यह फसल खरीफ की ऋतु में उगाई जा सकती है। चना, गेहूं तथा सरसों रबी ऋतु की फसलें हैं।
  • खरीफ ऋतु की परिभाषा और समय
    • खरीफ फसलें मानसून पर निर्भर होती हैं और जून-July में बीज बोए जाते हैं, सितंबर-अक्टूबर तक कटाई के लिए तैयार होती हैं.​
    • यह फसलें बड़े पैमाने पर खेतों में भारी वर्षा और गर्म मौसम के अनुकूल होती हैं.​
  • खरीफ में उगाई जाने वाली प्रमुख फसलें
    • चावल (धान): भारत की सबसे प्रमुख खरीफ फसल, विशेषकर बंगाल, उत्तर प्रदेश, पंजाब आदि मौसम में पकती है
    • मॉनसून की बारिश से पानी की जरूरत पूरी की जाती है.​
    • कपास: एक महत्त्वपूर्ण खरीफ फसल है जिसे गर्म और नमीयुक्त मौसम में उगाया जाता है
    • प्रमुख उत्पादक राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब आदि हैं.​
    • मूंगफली: दक्षिणी और पश्चिमी भारत में खरीफ सीजन में बोई जाती है
    • अच्छे वर्षा और तापमान की अनुकूलता चाहिए.​
    • मूंग (मूँग/वर्षा-जनित दाल): खरीफ की दालों में प्रमुख है, ठंडी-गर्म ऋतु के संयोजन में उगती है लेकिन मानसून शुरू के साथ शुरू होती है.​
    • उड़द (काला चना): खरीफ अवधि की प्रमुख वेजिटेबल-फसल के साथ-साथ दाल के लिए उगाई जाती है; मॉनसून-उत्पादन के कारण खूब पसंदीदा है.​
    • अरहर (तुअर): खरीफ में उगाई जाने वाली दालें, विशेषकर उत्तर भारत के कई भागों में प्रमुख है.​
    • ज्वार और बाजरा: मानसून के समय उगाई जाने वाली दलह नहीं बल्कि अनाज फसलें, खाद्यान्न के रूप में मजबूत विकल्प हैं.​
    • मक्का: खरीफ में उगाई जाने वाली प्रमुख किरासन/खाद्यान्न फसल, विविध जलवायु में उग सकती है.​
    • सोयाबीन: खरीफ में उगाई जाने वाली तेल-बीज वाली फसल, जहां वर्षा और मिट्टी की जल-संबंधी परिस्थितियाँ अनुकूल हों.​
    • गन्ना: कुछ क्षेत्रों में खरीफ-पूर्व और खरीफ के बीच का फसल-पैटर्न; जल-उपयोग और समय-सारिणी क्षेत्र-विशिष्ट है.​
  • कम-ज्यादा उपयुक्तता के संकेत
    • खरीफ फसलें अधिक पानी मांगती हैं और मानसून के साथ सीधे जुड़ी रहती हैं
    • इसलिए वर्षा-आधारित कृषि के लिए उपयुक्त मानी जाती हैं.​
    • गेहूँ जैसे रबी फसलें खरीफ नहीं होतीं; वे रबी सीजन में बोई और काटी जाती हैं
    • जबकि गेहूं सामान्यतः रबी फसल है, न कि खरीफ.​
  • फसल-चयन के लिए दुविधाओं पर मार्गदर्शक
    • जल उपलब्धता: यदि मानसून के रूप में वर्षा अच्छी हो, तो चावल, मूंगफली, और मूंग जैसी जल-आश्रित फसलें अधिक लाभकारी रहती हैं.​
    • मिट्टी प्रकार: कपास और गन्ना जैसे कुछ फसलें विशेष मिट्टी-स्थिति (दुमट्टी, काली मिट्टी) में बेहतर विकसित होती हैं.​
    • बाज़ार-आकर्षण: कीमतों और बाजार मांग के हिसाब से मूंगफली, सोयाबीन, और कपास जैसे फसलों का चयन लाभदायक हो सकता है.​

30. कपास को उगने के लिए ....... तापमान, हल्की बारिश या सिंचाई, पाले (frost) से मुक्त ....... दिन और तेज धूप की आवश्यकता होती है। [CHSL (T-I) 16 अगस्त, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (a) उच्च, 210
Solution:
  • कपास की खेती के लिए 25°C से 35°C का उच्च तापमान, 210 दिन की पाला एवं ओला रहित अवधि, स्वच्छ आकाश, तेज व चमकदार धूप तथा 75 से 100 सेमी. वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
  • तापमान
    • कपास उष्णकटिबंधीय-उपोष्णकटिबंधीय फसल है; इसकी विकास के लिए उचित तापमान 21°C से 30°C के बीच माना जाता है
    • इस रेंज में वृद्धि और फूल खिलाड़ी प्रभावी रहते हैं
    • अत्यधिक ठंड से बचना चाहिए; नियमित रूप से पके हुए बालों के लिए पर्याप्त गर्मी चाहिए. [उपलब्ध जानकारी के अनुसार तापमान रेंज स्पष्ट की जाती है, 21–30°C अक्सर उद्धृत होता है] [2025-05-25 संदर्भ]
  • वर्षा/सिंचाई
    • कपास के लिए जल आवश्यकता मौसमी वर्षा के साथ-साथ हल्की वर्षा या सिंचाई द्वारा पूरी की जा सकती है
    • अत्यधिक वर्षा से रेशों की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है; इसलिए नमी का सही संतुलन जरूरी है. [Testbook-उद्धरण]
    • सामान्य तौर पर 50–75 सेमी वार्षिक वर्षा (या समकक्ष सिंचाई) पर्याप्त मानी जाती है
    • ताकि पौधे को शुरुआती वृद्धि और फूल के लिए पर्याप्त नमी मिल सके. [Doubtnut/ग्लोबल स्रोत]
  • पाला ( Frost ) से मुक्त दिन
    • पाले से मुक्त (फrost-free) दिनों की संख्या लगभग 210 दिन मानी जाती है
    • ताकि कपास का पूरा विकास चक्र संचालित होकर फसल पूरी तरह से परिपक्व हो सके
    • यह लंबा उगाने वाला मौसम कपास के लिए आवश्यक रहता है. [Testbook/कई स्रोत]
  • धूप और प्रकाश
    • तेज धूप का पर्याप्त होना आवश्यक है ताकि प्रकाश संश्लेषण सुचारु हो और बीज से बालों तक रेशों का निर्माण ठीक से संभव हो सके
    • दिन के उजाले में फूल बनने और रेशों के विकसित होने की प्रक्रिया बेहतर होती है. [Testbook/संदर्भ]
  • मिट्टी और जल समस्या
    • कपास विभिन्न मिट्टी में उग सकती है
    • लेकिन डेक्कन पठार की काली मिट्टी जैसी नमी-धारण क्षमता tinggi मृदाओं में यह सबसे अच्छा प्रदर्शन करती है
    • सूखा और जलधारण दोनों का संतुलन उपयुक्त हो।
    • साथ ही उचित जल निकासी सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि जड़ें सड़ें नहीं. [Byju's/Doubtnut]
  • मौसम-आधारित तलों-फसल रणनीति
    • खरीफ मौसम में दक्षिण-पश्चिम मानसून की शुरुआत के साथ बरसात के मौसम में अधिकांश क्षेत्र कपास उगाते हैं
    • फूलने के बाद धूप-शुष्क मौसम अधिक उपयुक्त होता है ताकि रेशों की गुणवत्ता बनी रहे. क्षेत्र-specific पैटर्न स्थान-पर निर्भर होते हैं.