कृषि (भारत का भूगोल)

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31. फसलों का कौन-सा समूह रेशेदार फसलों से संबंधित है और भारत में बड़े पैमाने पर उत्पादित किया जाता है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) जूट और भांग
Solution:
  • जूट और भांग समूह की फसलें रेशेदार फसलों से संबंधित हैं।
  • जूट के रेशे बोरी, चटाई, रस्सी आदि बनाने के काम में आते हैं।
  • विस्तृत विवरण
    • समूह की परिभाषा: रेशेदार फसलें वे पौधे होती हैं
    • जिनके तंतु मुख्य उपयोग के लिए निकाले जाते हैं
    • जैसे कपास के नरम तंतु और जूट के मजबूत तंतु।
    • कपास और जूट इन फसलों के सबसे महत्वपूर्ण रेशेदार गुणों के कारण भारत में व्यापक उत्पादन के लिए जाने जाते हैं।​
  • प्रमुख रेशेदार फसलें
    • कपास: भारत का एक प्रमुख रेशेदार फसल है और कपास के तंतु से वस्त्र उद्योग में अत्यधिक उपयोग होता है।
    • भारत विश्व का एक बड़ा कपास उत्पादक देश है और क्षेत्रीय विविधताएं जैसे पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात आदि में कपास की कृषि मुख्य है।​
    • जूट: भारत में जूट का उत्पादन बहुत व्यापक है, विशेषकर पश्चिम बंगाल, बिहार और असम जैसे राज्यों में।
    • जूट को “गोल्डन फाइबर” के रूप में भी जाना जाता है और इसका उपयोग बोरे, रस्सी, पेपर और वस्त्रों के लिए किया जाता है।​
  • अन्य रेशेदार फसलें
    • भांग (Hemp): कुछ क्षेत्रों में उगाई जाती है, परन्तु कपास और जूट की तुलना में भारत में इसकी पैमाने पर उपस्थिति कम है
    • इसका औद्योगिक उपयोग फैब्रिक और अन्य रेशेदार उत्पादों में पाया जाता है।​
  • कृषि-आर्थिक महत्व
    • रेशेदार फसलें ग्रामीण अर्थव्यवस्था और रोजगार में योगदान देती हैं
    • जूट और कपास के उत्पादन से संबंधित उद्योगों (कपड़ा, बैग, रस्सी आदि) का गतिशीलता ग्रामीण क्षेत्रों में मजबूत रहती है।​
    • यदि चाहें तो अधिक गहराई से विश्लेषण कर सकता हूँ:
    • इन फसलों के प्रमुख राज्य-वार वितरण और उत्पादन मात्रा
    • रेशेदार फसलों के लिए उपज बढ़ाने के लिए अपनाई जाने वाली आधुनिक कृषि तकनीकें
    • भारत के लिए रेशेदार फसलों की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति
  • उद्धरण
    • कपास और जूट भारत के प्रमुख रेशेदार फसलें हैं, जिनका व्यापक उत्पादन होता है.​
    • जूट भारत के प्रमुख रेशेदार फसलों में से एक है
    • इसे बड़े पैमाने पर पश्चिम बंगाल, बिहार, असम आदि में उगाया जाता है.​

32. निम्नलिखित में से किस फसल को बंगाल का "सुनहरा रेशा" (Golden Fibre) कहा जाता है? [MTS (T-I) 16 मई, 2023 (II-पाली), MTS (T-I) 11 मई, 2023 (I-पाला)]

Correct Answer: (d) जूट
Solution:
  • जूट को बंगाल का "सुनहरा रेशा" (Golden Fibre) कहा जाता है।
  • जूट का उपयोग बोरी, चटाई, रस्सी, सूत, कालीन आदि बनाने में किया जाता है।
  • जूट को 'सुनहरा रेशा' इस लिए कहा जाता है, क्योंकि इसका रंग सुनहरा होता है।
  • विस्तार से:
    • परिभाषा और नामकरण: जूट एक प्राकृतिक रेशा है
    • जिसे उसके चमकीले सुनहरे-भूरे रंग के कारण प्रायः “गोल्डन फाइबर” या “Golden Fibre” कहा जाता है
    • यह नाम बंगाल क्षेत्र के ऐतिहासिक जूट उत्पादन के साथ जुड़ा हुआ है
    • जहाँ यह फसल दशकों से मुख्य नकदी फसल रही है.​
    • भूगोलिक उपयुक्तता: बंगाल डेल्टा जैसी जल-आधारित उपजाऊ मिट्टी और गर्म, आर्द्र जलवायु जूट के लिए आदर्श होती है
    • हर वर्ष नए जलोद्धार के साथ मिट्टी पुनः उर्वरित होती है
    • यही कारण है कि सारी दुनिया में जूट उत्पादन का बड़ा केंद्र बंगाल ही बना रहता है.​
    • उत्पादन क्षेत्र: पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश और असम जैसे क्षेत्र जूट के प्रमुख उत्पादक माने जाते हैं; भारत में पश्चिम बंगाल सबसे प्रमुख केंद्र है.​
    • उपयोग: जूट से बैग (गन्नी/गानी बैग), रस्सियाँ, कपड़े, कालीन आदि बनते हैं
    • कृषि-उत्पादन और वस्त्र उद्योग दोनों में इसकी मांग बनी रहती है.​
    • आर्थिक महत्व: जूट का ऊँचा नकद मूल्य और स्थानीय-आर्थिक योगदान इसे “Golden Fibre” के रूप में पहचान देता है.​
  • क्यों यह फसल महत्वपूर्ण है:
    • पर्यावरणीय: यह प्राकृतिक रیشہ है, जिससे प्लास्टिक या सिंथेटिक विकल्पों के मुकाबले पर्यावरण-मैत्रीपूर्ण विकल्प बनता है.
    • सामाजिक: बंगाल के किसान समुदायों के लिए यह एक प्रमुख आय-स्रोत रहा है
    • जहाँ जल-भराव वाले क्षेत्र इसकी खेती के लिए उपयुक्त माने जाते हैं.
  • अगर चाहें, ऐसे प्रश्नों के लिए मैं:
    • जूट के जैव-वैकल्पिक गुण (जैसे फाइबर संरचना, पत्तन/रेसिंग प्रक्रिया) के बारे में विवरण दे सकता हूँ।
    • जूट के प्रमुख उपयोगों के लिए एक छोटा-सा तुलना-टेबल बनाकर दे सकता हूँ।
    • पश्चिम बंगाल में जूट उद्योग की ऐतिहासिक विकास यात्रा का संक्षिप्त समयरेखा दे सकता हूँ।

33. निम्नलिखित में से कौन-सी असम में बहुतायत में पाई जाने वाली एक रोपण फसल है? [CHSL (T-I) 17 अगस्त, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) चाय
Solution:
  • चाय की खेती असम में बहुतायत में पाई जाने वाली एक रोपण फसल है।
  • मक्का तथा चावल खरीफ की फसल है तथा गेहूं रबी की फसल है।
  • मुख्य बिंदु
    • असम की कृषि संरचना में चाय एक प्रमुख रोपण फसल है, लेकिन इस क्षेत्र में चाय के अलावा बहुविध रोपण और कृषि-आधारित फसलें भी उगती हैं।
    • चावल असम में राइज़-आधारित खेती है, पर इसे “रोपण फसल” की परिभाषा में शामिल नहीं किया जाता
    • यह बार-बार बुवाई से नहीं, बल्कि मौसमी धनी-हवा पद्धति से उगता है; फिर भी यह असम की सबसे अधिक cultivated फसल है.​
    • अन्य प्रमुख कृषि उपज़ों में केला, नारियल, सुपारी, काली मिर्च और गन्ना जैसी फसलें छोटे-स्तर पर उगाई जाती हैं
    • वे जापानी-स्तर या बड़े पैमाने पर रोपण फसल के तौर पर व्यापक नहीं मानी जातीं
    • इनमें चाय के साथ सिक्वेन्स/फसल-बंधन की विविधता मिलती है.​
    • अगर आप “रोपण फसल” की स्पष्ट परिभाषा मानते हैं—जो एक बार लगाने पर कई वर्षों तक उत्पादन देती है
    • तो असम में चाय, कॉफी, रबर, नारियल, सुपारी आदि प्रमुख रोपण फसलें मानी जाती हैं
    • इनमें से असम में सबसे ज्यादा परिचित और व्यापक रोपण फसल चाय है, जबकि अन्य क्षेत्रों में नारियल/सुपारी आदि भी होती हैं
    • किंतु असम में चाय के तुलनात्मक रूप से अधिक प्रभाव के कारण यह एक प्रमुख संदर्भ है.​
    • अंततः, “असम में बहुतायत में पाई जाने वाली एक रोपण फसल” के तौर पर चाय सबसे अधिक पहचान योग्य उदाहरण है
    • यदि लक्ष्य रोपण के साथ कृषि-आय का स्थायित्व हो, तो क्षेत्रीय विविधता को ध्यान में रखना चहिए
    • चावल सामान्यतः सबसे बड़ी खेती है पर उसे रोपण फसल नहीं कहा जाता, जबकि चाय एक स्पष्ट रोपण फसल के रूप में उल्लेखित है.​​
  • संकेतित स्रोत (उद्धरण)
    • असम में चाय के अलावा चावल और अन्य फसलों की खेती की चर्चा, साथ हीipan के अनुसार असम की खेती की विविधता.​
    • रोपण फसल की परिभाषा और चाय/गन्ना के रोपण रूप में उल्लेख.​
    • भारत के अभ्यास में असम का संदर्भ देते हुए प्रमुख रोपण फसलें/चाय का उल्लेख.​
    • एक तालिका बनाकर “रोपण फसल” के रूप में चाय, कॉफी, रबर, नारियल, सुपारी आदि और असम में इनका प्रचलन/आर्थिक महत्व
    • एक सेक्शन में “मुख्य खाद्य फसलें” के रूप में चावल (धान) की उपज और उसकी भूमिका
    • एक सेक्शन में “अन्य फसलें” जैसे केला, नारियल, काली मिर्च आदि का उल्लेख और उनके वितरण क्षेत्र

34. निम्नलिखित में से कौन-सा कारक भारत में सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को बढ़ावा देने वाले कारकों में से एक नहीं है? [CHSL (T-I) 07 अगस्त, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (b) शुष्क जलवायु
Solution:
  • भारत में कपास की खेती से सूती वस्त्र उद्योग को कच्चा माल प्राप्त होता है।
  • सूती वस्त्र उद्योग में श्रम की उपलब्धता, कपास की उपलब्धता तथा बंदरगाहों की समीपता सहायक होते हैं
  • जबकि शुष्क जलवायु सहायक कारकों की श्रेणी में नहीं आता है।
  • संक्षिप्त उत्तर
    • विदेश से आयात कर का भारी होना (heavy import duty on imported cotton textiles) ऐसा कारक नहीं है
    • जो स्थानीयकरण को बढ़ावा देता हो; बल्कि यह स्थानीय उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मकता को मजबूत कर सकता है
    • या कम कर देता है depending on policy context. सामान्यतः सूती वस्त्र उद्योग के स्थानीयकरण को बढ़ाने वाले कारक केंद्रित रहते हैं
    • स्थानीय कपास का उत्पादन, उपयुक्त जलवायु, सस्ती मजदूरी, परिवहन सुविधाएँ, आवश्यक मशीनरी की उपलब्धता, सरकारी संरक्षण/सहायता, उपभोक्ता बाजार का निकट होना, ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता, आदि
    • अतः “विदेशी सूती वस्त्रों पर भारी आयात कर का होना”—अगर यह आयात कर के कारण होता है
    • स्थानीयकरण के पक्ष में कारक नहीं माना जाएगा; बल्कि आयात शुल्क का स्तर विनिर्माण प्रतिस्पर्धा पर निर्भर होता है
    • कभी-कभी यह आयात-विरोधी नीति के रूप में स्थानीयकरण को बढ़ावा दे सकता है
    • सामान्यतः इसे स्थानीयकरण के सीधे कारण के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया जाता है।
  • मुख्य बिंदु और विस्तृत विश्लेषण
  • स्थानीयकरण के सामान्य कारक
    • कच्चे माल की उपलब्धता: कपास भारत के कई प्रमुख कपास क्षेत्रों में उगता है
    • जिससे कच्चे माल की आपूर्ति सुनिश्चित रहती है। यह स्थानीयकरण को बाध्य नहीं करता, बल्कि कपास के निकटता से लागत कम होती है और उत्पादन में स्थिरता बढ़ती है.​
    • जलवायु और जल सुरक्षा: उपयुक्त नम जल और शुद्ध जल उपलब्धता—कपास के बड़े पैमाने पर उत्पादन हेतु आवश्यक है.​
    • श्रम लागत और दक्षता: सस्ते तथा कुशल श्रमिक मिलना स्थानीय इकाइयों के लिए लाभदायक है.​
    • स्थानिक और सस्ती मशीनरी/पुनःउपकरण: वस्त्र निर्माण के उपकरणों की उपलब्धता स्थानीय उद्योग को सक्षम बनाती है.​
    • परिवहन सुविधाएं और बाजार निकटता: वाहनों, रेलवे/पोर्ट सुविधाओं के माध्यम से वितरण आसान रहता है
    • उपभोक्ता बाजार तेजी से पहुंचता है.​
    • सरकारी संरक्षण और नीति समर्थन: नीति के जरिये प्रोत्साहन, कर सेवाओं में छूट आदि स्थानीय उत्पादन को बढ़ाते हैं.​
    • ऊर्जा संसाधन: पर्याप्त बिजली/ऊर्जा एक मजबूत आधार है.​
  • आयात कर का प्रभाव
    • आयात कर (import duty) एक नीति उपकरण है जिसका उद्देश्य आयातित वस्त्रों पर दबाव डालकर घरेलू उत्पादन को संरक्षित करना होता है।
    • यह स्थानीयकरण के पक्ष में एक समर्थक कदम बन सकता है
    • यदि विदेश वस्त्रों के मुकाबले घरेलू वस्त्र महत्त्वपूर्ण लागत-लाभ के कारण प्रतिस्पर्धी बन जाएँ, लेकिन यह स्वयं में “स्थानीयकरण के कारक” के रूप में सूचीबद्ध नहीं किया जाता है; बल्कि यह नीति-आधारित कारक है।
    • इसलिए इसे अक्सर “स्थानीयकरण के कारणों” के तौर पर नहीं गिना जाता है
    • बल्कि उद्योग संरक्षण/नीति के हिस्से के रूप में माना जाता है।
    • इस कारण यह विकल्प प्रश्न के अनुसार “स्थानीयकरण को बढ़ावा देने वाले कारक” की सूची में नहीं आता, बल्कि एक नीति-यांत्रिक कारक है
    • जो स्थानीय उद्योग की स्थितियों पर निर्भर करता है।
  • अन्य राज्यों के वितरण और केंद्र
    • गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे केंद्रों में स्थानीयकरण हुआ है
    • क्योंकि इन जगहों पर कच्चा माल, जलवायु, मजदूरी, और बाजार उपलब्ध होते हैं ।​

35. मई 2022 तक, भारत में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन-सा है? [MTS (T-I) 15 मई, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) महाराष्ट्र
Solution:
  • मई, 2022 तक महाराष्ट्र भारत में चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है, उसके पश्चात उत्तर प्रदेश राज्य का स्थान आता है।
  • वर्ष 2022-23 के आंकड़ों के अनुसार, भी चीनी उत्पादन में महाराष्ट्र तथा उत्तर प्रदेश क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान पर हैं।
  • प्रमुख आँकड़े (संक्षेप)
    • महाराष्ट्र: 2021-22 पेराई वर्ष में लगभग 138 लाख टन चीनी उत्पादन, और उससे आगे की मौजूदा रुझानों में महाराष्ट्र शीर्ष पर बना रहा।​
    • उत्तर प्रदेश: 2021-22 में करीब 105 लाख टन चीनी उत्पादन, जिसके साथ महाराष्ट्र के बराबर या उससे नीचे हो सकता था
    • मई 2022 तक Maharashtra के शीर्ष स्थान को बनाए रखना बताया गया है।​
    • 2022-23 के सीजन में उत्तर प्रदेश ने कुछ जगहों पर उल्लेखित उत्पादन दिखाया, पर सामान्य प्रवृत्ति में महाराष्ट्र ही अग्रणी रहा।​
  • गन्ना क्षेत्र और उत्पादन संरचना
    • महाराष्ट्र में गन्ने की खेती और मिलें सहकारी प्रणाली के साथ एकीकृत हैं
    • देश के कुल चीनी उत्पादन में बड़ा हिस्सा योगदान करते हैं।​
    • उत्तर प्रदेश भी एक विशाल गन्ना उत्पादक राज्य है और चीनी मिलें स्थापित हैं
    • किंतु मई 2022 तक के आँकड़े महाराष्ट्र को शीर्ष स्थान देता है।​
  • असमर्थन बिंदु
    • चीनी उत्पादन वार्षिक, पेराई वर्ष के चौकस आंकड़े और स्रोत-आउटपुट के अनुसार साल-दर-साल भिन्न हो सकते हैं।
    • 2022 के अंत तक के आंकड़े एक-दूसरे से थोड़ा भिन्न दे सकते हैं
    • लेकिन मई 2022 तक के प्रमुख संदर्भ महाराष्ट्र को उच्चतम उत्पादनकर्ता के रूप में प्रस्तुत करते हैं।​

36. नवंबर, 2022 तक निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य भारत में कपास का अग्रणी उत्पादक है? [MTS (T-I) 02 मई, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (c) गुजरात
Solution:
  • नवंबर, 2022 तक गुजरात राज्य भारत में कपास का अग्रणी उत्पादक है।
  • गुजरात की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां कपास उत्पादन के लिए आदर्श हैं
  • कपास की खेती के लिए उपयुक्त हैं।
  • विस्तार:
    • गुजरात के बाद महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश आदि राज्य आते हैं
    • परंतु गुजरात प्रमुख नेता बना रहा है
    • क्योंकि इसकी जलवायु, मिट्टी और फसल के लिए अनुकूल स्थितियाँ कपास उत्पादन के लिए आदर्श मानी जाती हैं।​
    • उपलब्ध हालिया स्रोतों के अनुसार नवंबर 2022 तक गुजरात ही भारत का कपास का अग्रणी उत्पादक राज्य के तौर पर मान्यता प्राप्त रहा है
    • जबकि अन्य राज्यों के हिस्से क्रमशः कम रहते हैं ।​
  • नीचे एक संक्षिप्त तुलना दी जा रही है (स्थिति 2022 तक के सामान्य प्रवृत्ति के अनुसार):
    • गुजरात: प्रमुख योगदान ~उच्चतम हिस्सेदारी, देश के कुल उत्पादन का लगभग 25–30%+
    • महाराष्ट्र: प्रथम या दूसरे स्थान पर आने के अवसर, गुजरात के बाद बड़ा योगदान
    • तेलंगाना/आंध्र प्रदेश: क्रमशः पीछे के स्थानों पर
    • यदि चाहें, तो मैं नवीनतम आँकड़े भी तलाशकर 2022 के अंत तक के विशिष्ट प्रतिशत साझा कर सकता हूँ
    • इसे स्रोतों के साथ संक्षेप में तालिका के रूप में प्रस्तुत कर दूँ।
  • उद्धरण:
    • गुजरात भारत का कपास का प्रमुख उत्पादक है
    • कुल उत्पादन का लगभग 30% तक योगदान देता है ।​
    • 2022 तक गुजरात ही सबसे बड़ा उत्पादक रहा है
    • अन्य प्रमुख राज्य महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के साथ क्रम बदलते रहे ।​

37. कपड़ा मंत्रालय 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, कौन-सा राज्य कपास का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) महाराष्ट्र
Solution:
  • कपास को 'व्हाइट गोल्ड ऑफ इंडिया' के नाम से भी जाना जाता है।
  • इसका उपयोग कपड़े बनाने में किया जाता है।
  • वस्त्र मंत्रालय द्वारा जारी 2022-23 की रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र राज्य कपास उत्पादन में दूसरे स्थान पर है।
  • कपड़ा मंत्रालय 2022-23 रिपोर्ट से प्रमुख बिंदु
    • गुजरात लगभग सबसे बड़े कपास उत्पादक राज्य के रूप में स्थिर है, जहाँ उत्पादन की मात्रा बहुत ऊँची है.​
    • उससे पीछे महाराष्ट्र और अन्य बड़े राज्य आते हैं, जिनमें तेलंगाना, राजस्थान आदि भी कपास उत्पादन में भूमिका निभाते हैं.​
    • 2022-23 के लिए राज्यवार क्षेत्रफल और उत्पादन जानकारी कपास उत्पादन एवं उपभोग समिति (COCPC) के अनुमान/बहीखाते में दर्ज है
    • जिसमें गुजरात के साथ महाराष्ट्र का क्रम भी स्पष्ट दिखता है.​
  • महत्वपूर्ण नोट्स और संदर्भ
    • गुजरात के अलावा महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर होने की सामान्य तौर पर पुष्टि की जाती है
    • हाल के वर्षी आंकड़े में गुजरात की बढ़त स्पष्ट रहती है और महाराष्ट्र अक्सर दूसरे स्थान पर आता है.​
    • COCPसी के 2022-23 और 2023-24 के संयुक्त डाटा में राज्यों के क्षेत्रफल और उत्पादन की तालिकाएं दी गई हैं
    • जिनसे राज्यवार रैंकिंग स्पष्ट होती है.​
    • कुछ स्रोत 2022-23 के लिए गुजरात-के-बाद महाराष्ट्र को दूसरे स्थान पर बतातें हैं
    • अन्य बाररल्स में यह क्रम थोड़ा भिन्न हो सकता है
    • सामान्य प्रवृत्ति यही है कि गुजरात पहले और महाराष्ट्र दो द्वारा पीछे है.​​
  • अगर चाहें, इस विषय पर मैं:
    • आधिकारिक COCPसी ( कपास उत्पादन एवं उपभोग समिति) की 2022-23 रिपोर्ट से सीधे तालिकाओं के उद्धरणों के साथ सटीक क्रम दे सकता हूँ।
    • राज्यवार उत्पादन, क्षेत्रफल और उपज के संपूर्ण डेटा को तालिका के रूप में प्रस्तुत कर सकता हूँ ताकि आप तुलना कर सकें।

38. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल काली मिट्टी के लिए सबसे उपयुक्त है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) कपास
Solution:
  • काली मिट्टी कपास की खेती के लिए सबसे उपयुक्त होती है
  • क्योंकि काली मिट्टी में अधिक समय तक नमी बरकरार रहती है।
  • काली मिट्टी में लोहा, चूना, कैल्सियम, पोटॉश, एल्युमीनियम एवं मैग्नीशियम कार्बोनेट की अधिकता तथा नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं ह्यूमस की कमी पाई जाती है।
  • मुख्य बिंदु और विस्तृत विवरण
    • धान (धान की फसल): काली मिट्टी में पोषक तत्व और जल धारण क्षमता अच्छी होती है
    • जिससे धान की पैदावार समर्थित होती है, विशेषकर रोग-नियंत्रण और उर्वरक उपयोग के संतुलन के साथ.​
    • गेहूं और ज्वार/बाजरा: इन सामान्य अनाज फसलों के लिए भी काली मिट्टी उपयुक्त रहती है
    • क्योंकि इनमें नमी बनाए रखने की गुणवत्ता अच्छी होती है और मिट्टी में मौज़ूद पोषक तत्व फसल को समर्थित रहते हैं.​
    • दलहनी फसलें (मसूर, चना, मूंग): काली मिट्टी इन फसलों के लिए भी उपयुक्त होती है
    • क्योंकि जलधारण क्षमता और मिट्टी की मिनरल सामग्री इन फसलों के लिए लाभदायक साबित होती है.​
    • तिलहन और नकदी फसलें (सूरजमुखी, अलसी, मूंगफली): इन फसलों के लिए भी काली मिट्टी उपयुक्त रहती है
    • क्योंकि यह मिट्टी नमी को अधिक समय तक बनाए रखती है, जिससे तिलहन की फसलें बेहतर उत्पादन दे सकती हैं.​
  • कौन-सी फसलें किस स्थिति में चुनें
    • पहली प्राथमिकता: कपास, क्योंकि यह सबसे प्रसिद्ध और उपयुक्त फसल मानी जाती है
    • फिर धान और गेहूं जैसी बुनियादी खाद्यान्न फसलें भी ভালো प्रदर्शन दिखाती हैं.​
    • छोटे से लेकर मध्यम स्तर के किसान, जहां पानी की उपलब्धता सीमित हो, वहां मसूर, चना जैसे दलहनी फसलें बेहतर विकल्प रह सकती हैं
    • ताकि मिट्टी का संतुलन बना रहे और भागीदारी फसलों के अंतर्गत फसल चक्र बदला जा सके.​
    • नकदी फसल चयन: यदि बाज़ार मूल्य और फसल चक्र की परियोजना हो, तो सूरजमुखी, अलसी, मूंगफली जैसी तिलहन फसलें काली मिट्टी में अच्छा प्रदर्शन देती हैं.​
  • बातचीत के तुरंत उपयोगी सुझाव
    • मिट्टी का स्वास्थ्य बनाए रखें: ब्लैक सोइल में अच्छी जल निकासी सुनिश्चित करें, बगैर जलभराव के समय में चक्र में बदलाव करें, और गहराई तक जुताई करें ताकि पानी और ऑक्सीजन दोनों संचरण बना रहे.​
    • मल्चिंग और संतुलित उर्वरक: फसल-चक्र के अनुसार पूरी मात्रा में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश और सूक्ष्म तत्व का संतुलन बनाएं; काली मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी के स्थानों पर नियंत्रित पूरक दें ताकि पौधों को तेज़ वृद्धि मिले.​
    • जल प्रबंधन: बारिश या सिंचाई के अनुसार पानी के स्टोर को नियंत्रित करें ताकि नमी सतह पर ही नहीं भीतर भी बनी रहे; खासकर कपास और धान जैसे घटित जल-आवश्यक फसलों के लिए यह महत्वपूर्ण है.​

39. निम्नलिखित में से कौन-सा भारत में एक प्रमुख जूट उत्पादक राज्य नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 24 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (d) तेलंगाना
Solution:
  • प्रश्नगत विकल्पों में तेलंगाना भारत में एक प्रमुख जूट उत्पादक राज्य नहीं है।
  • जूट की फसल पश्चिम बंगाल, ओडिशा, बिहार, आंध्र प्रदेश, असम, छत्तीसगढ़, नगालैंड, त्रिपुरा और मेघालय में उगाई जाती है।
  • पटसन विकास निदेशालय के वर्ष 2021- 22 के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल का देश के कुल कच्चे जूट उत्पादन में भागीदारी लगभग 82.31 प्रतिशत है।
  • प्रमुख जूट उत्पादक राज्यों की तस्वीर
    • पश्चिम बंगाल: भारत का सबसे बड़ा जूट उत्पादक राज्य है और देश के कुल जूट उत्पादन में उसका बड़ा हिस्सा आता है
    • जलवायु, जल संसाधन और गंगा डेल्टा जैसी मिट्टी जूट की खेती के लिए आदर्श मानी जाती हैं
    • यह जानकारी कई शिक्षण सामग्री और स्टडी क्वेश्चन में भी दर्ज है। [citation][citation]
    • अन्य प्रमुख राज्य: असम, बिहार, ओडिशा, और कभी-कभी अन्य पूर्वी रीजन के राज्य भी जूट उत्पादन में योगदान करते हैं
    • परंतु पश्चिम बंगाल का हिस्सा पहले स्थान पर बना रहता है. [citation][citation]
  • क्यों पश्चिम बंगाल अग्रणी है
    • जलवायु: गर्म और आर्द्र मौसम जूट के लिए उपयुक्त है, जिससे फसल अच्छी विकसित होती है. [citation]
    • मिट्टी: जलोढ़ मिट्टी, खासकर गंगा-डेल्टा क्षेत्र, पोषक तत्वों से भरपूर होती है जो जूट के लिए अनुकूल है. [citation]
    • जल संसाधन: नदियों से पुनः पूरित जलस्रोत जूट की बड़ी मात्रा के लिए आवश्यक जल आपूर्ति प्रदान करते हैं. [citation]
  • निम्नलिखित का स्पष्ट फर्क (टेबल रूप में, संक्षेप)
    • प्रमुखता: पश्चिम बंगाल > असम, बिहार, ओडिशा
    • कारण: बंगाल में जूट के लिए जलवायु, मिट्टी, और जल संसाधन सबसे अधिक अनुकूल
    • योगदान: बंगाल देश के कुल जूट उत्पादन का सबसे बड़ा हिस्सा देता है
  • ध्यान दें
    • भारत में जूट उत्पादन का वैश्विक संदर्भ भी यही बताता है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा जूट उत्पादक देश है
    • जिसमें बंगाल की भूमिका प्राथमिक मानी जाती है. [citation][citation]

40. निम्नलिखित में से कौन-सा राज्य/केंद्रशासित प्रदेश केसर का अग्रणी उत्पादक है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 2 दिसंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (b) जम्मू और कश्मीर
Solution:
  • जम्मू और कश्मीर केसर का अग्रणी उत्पादक राज्य है।
  • विस्तारपूर्ण विवरण:
    • केसर: केसर क्रोकस सैटिवस परिवार की ताजेपन, रंग और सुगंध के लिए प्रसिद्ध मसाला है
    • भारत में इसका प्रमुख उत्पादन कश्मीर घाटी के क्षेत्रों में होता है।​
    • क्षेत्रीय संदर्भ: जम्मू-कश्मीर दशकों से केसर उत्पादन का मुख्य केंद्र रहा है
    • खासकर पंपोर और आसपास के जिलों में, जहाँ जलवायु और मिट्टी इस फ़सल के लिए अनुकूल माने जाते हैं।​
    • अन्य उल्लेखित तथ्य: भारत GI टैग के तहत कश्मीरी केसर को मान्यता प्राप्त है
    • ईरान भी विश्व का बड़ा केसर उत्पादक है, पर भारत में सर्वाधिक मात्रा जम्मू-कश्मीर से ही निकलती है।​
    • समान्य प्रसार: हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में केसर उत्पादन नहीं है
    •  इसलिए निष्कर्ष स्पष्ट है कि केसर का अग्रणी उत्पादन जम्मू-कश्मीर में होता है।