कोशिका (जीव विज्ञान) (भाग-I)

Total Questions: 35

11. अस्थि मज्जा में पाई जाने वाली कौन-सी कोशिका शरीर के लिए मरम्मत प्रणाली के रूप में कार्य करती है? [MTS (T-I) 11 सितंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (a) मूल कोशिकाएं
Solution:
  • अस्थि मज्जा में पाई जाने वाली मूल कोशिकाएं (stem cells) आजीवन शरीर में रक्त का उत्पादन करती हैं
  • एवं शरीर के लिए मरम्मत प्रणाली के रूप में कार्य करती हैं। मूल कोशिकाएं अविभेदित कोशिकाएं होती हैं
  • जिसमें रक्त, तंत्रिका, मांसपेशियों, हृदय ग्रंथियों एवं त्वचा कोशिकाओं सहित शरीर की लगभग सभी प्रकार की कोशिकाओं को बनाने की क्षमता होती है।
  • अस्थि मज्जा का परिचय
    • लाल अस्थि मज्जा में हेमेटोपोइएटिक स्टेम कोशिकाएँ (HSCs) रक्त कोशिकाएँ बनाती हैं
    • जबकि MSCs मरम्मत और पुनर्जनन में विशेष भूमिका निभाती हैं।
    • ये कोशिकाएँ बहुशक्तिशाली होती हैं, अर्थात ये हड्डी, उपास्थि, मांसपेशी और वसा कोशिकाओं में बदल सकती हैं।​
  • MSCs की मरम्मत प्रक्रिया
    • मेसेंकाइमल स्टेम कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त ऊतक स्थलों पर पहुँचकर सूजन कम करती हैं
    • नई कोशिकाएँ उत्पन्न करती हैं और ऊतक पुनर्जनन को बढ़ावा देती हैं।
    • उदाहरणस्वरूप, हड्डी टूटने पर ये ऑस्टियोब्लास्ट (हड्डी बनाने वाली कोशिकाएँ) बनकर मरम्मत करती हैं।
    • ये कोशिकाएँ साइटोकाइन्स और ग्रोथ फैक्टर्स छोड़ती हैं जो पड़ोसी कोशिकाओं को सक्रिय करती हैं।​
  • अन्य कोशिकाओं से अंतर
    • हेमेटोपोइएटिक स्टेम कोशिकाएँ (HSCs): मुख्यतः रक्त कोशिकाएँ (RBC, WBC, प्लेटलेट्स) बनाती हैं, मरम्मत नहीं।​
    • पीली मज्जा की कोशिकाएँ: वसा भंडारण करती हैं, लेकिन आवश्यकता पर लाल मज्जा में बदल सकती हैं।​
    • MSCs विशेष रूप से ऊतक मरम्मत के लिए जानी जाती हैं
    • जबकि अन्य स्टेम कोशिकाएँ रक्त उत्पादन पर केंद्रित रहती हैं।
  • चिकित्सकीय महत्व
    • इन कोशिकाओं का उपयोग बोन मैरो ट्रांसप्लांट में किया जाता है
    • जहाँ क्षतिग्रस्त मज्जा को बदलकर कैंसर या एनीमिया का इलाज होता है।
    • ऑटोलॉगस ट्रांसप्लांट में रोगी की अपनी MSCs वापस डाली जाती हैं।
    • हृदयाघात या चोटों में भी रिगेनेरेटिव थेरेपी के लिए MSCs इंजेक्ट की जाती हैं।

12. गॉल्जी उपकरण में मौजूद चपटी झिल्ली से घिरी थैलियां किस नाम से जानी जाती हैं? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (II-पाली)]

Correct Answer: (d) कुंड
Solution:
  • गॉल्जी उपकरण में मौजूद चपटी झिल्ली से घिरी थैलियां कुंड (cisternae) के नाम से जानी जाती हैं।
  • कुंड (cisternae) गॉल्जी उपकरण की क्रियात्मक इकाई होती है।
  • गॉल्जी उपकरण की खोज सर्वप्रथम कैमिलो गॉल्जी (Camillo Golgi) ने किया
  • इसे लाइपोकॉण्ड्रिया भी कहते हैं तथा पौधों में इसे डिक्टियोसोम कहते हैं।
  • गॉल्जी उपकरण का परिचय
    • इसकी खोज 1898 में इतालवी वैज्ञानिक कैमिलो गॉल्जी ने की थी।
    • यह एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम (ER) से प्राप्त पदार्थों को प्राप्त करके उन्हें परिपक्व बनाता है
    • कोशिका के विभिन्न भागों या बाहर भेजता है।​
  • सिस्टर्नी की संरचना
    • सिस्टर्नी चपटी, थैलीनुमा संरचनाएँ होती हैं जो एक-दूसरे के ऊपर समानांतर ढेर के रूप में व्यवस्थित रहती हैं।
    • प्रत्येक सिस्टर्नी की मोटाई लगभग 0.5-1 माइक्रोमीटर होती है
    • ये एकल इकाई के बजाय स्टैक (dictyosomes) में पाई जाती हैं।
    • सीआईएस फेस (Cis face): ER के निकट, प्राप्त करने वाला सिरा जहाँ कच्चे प्रोटीन आते हैं।
    • ट्रांस फेस (Trans face): कोशिका झिल्ली की ओर, जहाँ परिपक्व पुटिकाएँ निकलती हैं।
    • एक कोशिका में 40-80 सिस्टर्नी स्टैक हो सकते हैं, जो पादप कोशिकाओं में अधिक संख्या में बिखरे रहते हैं।​
  • कार्य और प्रक्रिया
    • सिस्टर्नी प्रोटीनों पर ग्लाइकोसिलेशन (शर्करा जोड़ना), सल्फेटेशन और पैकेजिंग करती हैं। उदाहरण के लिए:
    • सीआईएस सिस्टर्नी में प्रोटीन संशोधन शुरू होता है।
    • मध्य सिस्टर्नी में परिपक्वता।
    • ट्रांस सिस्टर्नी से स्रावी पुटिकाएँ (secretory vesicles) बनकर लाइसोसोम या प्लाज्मा झिल्ली की ओर जाती हैं।
    • ये थैलियाँ साइटोकायलेकुलस (glycolipids) और ग्लाइकोप्रोटीन्स का उत्पादन करती हैं।​
  • चिकित्सकीय और जैविक महत्व
    • सिस्टर्नी की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली से लाइसोसोमल स्टोरेज विकार या कैंसर जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं।
    • पादप कोशिकाओं में इन्हें डिक्टियोसोम्स कहा जाता है जो सेल वॉल निर्माण में सहायक हैं।
    • स्टेम कोशिका अनुसंधान में गॉल्जी सिस्टर्नी को लक्षित करके ऊतक इंजीनियरिंग की जाती है।​

13. कोशिका भित्ति की अधिकांश यांत्रिक शक्ति (mechanical strength) के लिए उत्तरदायी प्राथमिक संरचनात्मक घटक कौन-सा है? [MTS (T-I) 08 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) सेल्यूलोज
Solution:
  • कोशिका भित्ति की अधिकांश यांत्रिक शक्ति (Mechanical strength) के लिए उत्तरदायी प्राथमिक संरचनात्मक घटक सेल्यूलोज होता है।
  • पौधों में कोशिका भित्ति प्रमुख रूप से कार्बोहाइड्रेट पॉलिमर सेल्यूलोज के मजबूत तंतुओं से बनी होती है।
  • कोशिका भित्ति जीवद्रव्य का स्रावित पदार्थ है। यह कोशिका की प्रतिकूल वातावरण से रक्षा करती है
  • एक कोशिका को दूसरी कोशिकाओं से अलग करती है।
  • यह कोशिका को शक्तिशाली बनाती है और कोशिकाओं को एक निश्चित आकार प्रदान करती है।
  • सेलुलोज की संरचना
    • सेलुलोज एक जटिल कार्बोहाइड्रेट या पॉलीसैकेराइड है
    • जिसमें β(1→4) ग्लाइकोसिडिक बंधनों से जुड़ी D-ग्लूकोज इकाइयों की लंबी रैखिक श्रृंखला होती है।
    • ये श्रृंखलाएँ हाइड्रोजन बंधनों द्वारा क्रिस्टलीय माइक्रोफाइब्रिल्स बनाती हैं
    • जो कोशिका भित्ति को मजबूत बनाते हैं।
    • पृथ्वी पर सबसे प्रचुर कार्बनिक पदार्थ होने के कारण यह वनस्पति द्रव्यमान का लगभग 33% हिस्सा बनाता है।​
  • कोशिका भित्ति के घटक
    • कोशिका भित्ति मुख्य रूप से तीन परतों से बनी होती है
    • मध्य पटलिका (पेक्टिन से बनी), प्राथमिक भित्ति (सेलुलोज, हेमीसेलुलोज और पेक्टिन)
    • द्वितीयक भित्ति (सेलुलोज के साथ लिग्निन आदि)। प्राथमिक भित्ति में माइक्रोफाइब्रिल्स लचीली व्यवस्था में होते हैं
    • जबकि द्वितीयक भित्ति में ये घनीभूत होकर अधिक मजबूती देते हैं। तृतीयक भित्ति कुछ कोशिकाओं में पाई जाती है।​
  • यांत्रिक शक्ति का कार्य
    • सेलुलोज माइक्रोफाइब्रिल्स कोशिका भित्ति को स्फीत दबाव (turgor pressure) सहने की क्षमता देते हैं
    • जिससे कोशिका आकार बनाए रखती है। ये फाइब्रिल्स विभिन्न दिशाओं में व्यवस्थित होकर तनाव विस्थापन प्रदान करते हैं।
    • लिग्निन द्वितीयक भित्ति में संपीड़न शक्ति बढ़ाता है, लेकिन प्राथमिक यांत्रिक मजबूती सेलुलोज से आती है।​
  • अन्य घटकों की भूमिका
    • हेमीसेलुलोज और पेक्टिन सेलुलोज को जोड़ते हैं, लेकिन मजबूती नहीं देते।
    • लिग्निन कुछ ऊतकों (जैसे काठ) में अतिरिक्त कठोरता देता है। काइटिन कवकों में पाया जाता है, न कि पादपों में।​

14. किस प्रक्रिया को कभी-कभी 'न्यूनीकरण विभाजन' (Reduction Division) कहा जाता है, क्योंकि यह शुक्राणु और अंडे बनाने के लिए गुणसूत्रों की संख्या को सामान्य संख्या से आधा कर देता है? [MTS (T-I) 06 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (d) अर्धसूत्री विभाजन
Solution:
  • अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis): यह एक विशेष प्रकार का कोशिका विभाजन है
  • जो लैंगिक प्रजनन करने वाले जीवों में युग्मक (gametes - शुक्राणु और अंडे) बनाने के लिए होता है।
  • इस प्रक्रिया में, एक द्विगुणित (diploid) जनक कोशिका दो क्रमिक विभाजनों से गुजरती है
  • जिसके परिणामस्वरूप चार अगुणित (haploid) संतति कोशिकाएं बनती हैं।
  • प्रत्येक संतति कोशिका में मूल जनक कोशिका की तुलना में गुणसूत्रों की संख्या आधी होती है।
  • इसलिए इसे न्यूनीकरण विभाजन (Reduction Division) कहा जाता है।
  • न्यूनीकरण विभाजन का कारण
    •  जिससे प्रत्येक संतति कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या आधी रह जाती है।​​
    • मानव में, द्विगुणित कोशिकाओं में 46 गुणसूत्र (23 जोड़े) होते हैं
    • लेकिन अर्धसूत्री विभाजन के बाद युग्मक में केवल 23 गुणसूत्र बचते हैं।​
    • यह प्रक्रिया लैंगिक प्रजनन के लिए आवश्यक है
    • क्योंकि निषेचन पर दो अगुणित युग्मकों के मिलने से द्विगुणित युग्मनज (46 गुणसूत्र) बनता है।​
  • अर्धसूत्री विभाजन की प्रक्रिया
    • अर्धसूत्री विभाजन दो चरणों में होता है: अर्धसूत्री विभाजन I
    • (न्यूनीकरण चरण) और अर्धसूत्री विभाजन II (समान विभाजन चरण)।
    • प्रोफेज I: गुणसूत्र संकुचित होते हैं, समजात जोड़े बनते हैं
    • (सिनैप्सिस), और क्रॉसिंग ओवर से आनुवंशिक विविधता उत्पन्न होती है।
    • मेटाफेज I: जोड़े कोशिका प्लेट पर व्यवस्थित होते हैं।
    • एनाफेज I: समजात गुणसूत्र अलग होकर विपरीत ध्रुवों पर जाते हैं—यह मुख्य न्यूनीकरण कदम है।​
    • टेलोफेज I: दो अगुणित कोशिकाएँ बनती हैं।
    • अर्धसूत्री II सूत्रीविभाजन जैसा होता है, लेकिन बिना डीएनए प्रतिकृति के, जो चार अगुणित युग्मक बनाता है।​
  • महत्वपूर्ण विशेषताएँ
    • नर में: एक प्राथमिक शुक्राणु माता कोशिका चार कार्यात्मक शुक्राणु बनाती है।​
    • मादा में: एक प्राथमिक अंडाणु माता कोशिका एक कार्यात्मक अंडाणु और तीन ध्रुवीय पिंड बनाती है
    • (पौधों में भी तीन नष्ट हो जाते हैं)।​
    • आनुवंशिक विविधता क्रॉसिंग ओवर और स्वतंत्र असортиमेंट से आती है, जो विकास के लिए जरूरी है।​
    • यह केवल जनन कोशिकाओं (germ cells) में होता है, जबकि सूत्रीविभाजन शारीरिक कोशिकाओं के लिए है।

15. 1873 ई. में, ब्लैक रिएक्शन तकनीक (black reaction technique) से रंगे (stained), तंत्रिका ऊतक (nerve tissue) की पहली तस्वीर किसने प्रकाशित की, जिसमें संपूर्ण तंत्रिका कोशिका का वर्णन किया गया था? [MTS (T-I) 01 सितंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) कैमिलो गॉल्जी
Solution:
  • कैमिलो गॉल्जी (Camillo Golgi) एक इतालवी चिकित्सक और वैज्ञानिक थे।
  • उन्होंने 1873 में "ब्लैक रिएक्शन" (जिसे अब गॉल्जी स्टेन कहा जाता है
  • नामक एक स्टैनिंग तकनीक विकसित की। इस तकनीक ने उन्हें तंत्रिका ऊतक में पूरी न्यूरॉन संरचना
  • जिसमें कोशिका काय, डेंड्राइट्स और एक्सॉन शामिल हैं
  • स्पष्ट रूप से देखने और चित्रित करने में सक्षम बनाया। इस खोज ने तंत्रिका विज्ञान के क्षेत्र में क्रांति ला दी।
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
    • उस समय पारंपरिक रंगाई विधियों से तंत्रिका कोशिकाओं को अलग-अलग देखना लगभग असंभव था
    • क्योंकि वे घनीभूत और हल्की संरचनाओं वाली होती थीं।
    • गोल्गी की ब्लैक रिएक्शन (या गोल्गी स्टेन) ने चयनात्मक रूप से केवल कुछ न्यूरॉन्स (लगभग 1 में से 1000) को काला रंग दिया
    • जिससे कोशिका शरीर, डेंड्राइट्स और ऐक्सॉन स्पष्ट रूप से पारदर्शी पृष्ठभूमि पर दिखाई दिए।​
  • तकनीक का विवरण
    • ब्लैक रिएक्शन में तंत्रिका ऊतक को पहले फॉर्मेलिन में फिक्स किया जाता है
    • फिर पोटैशियम डाइक्रोमेट में डुबोया जाता है और उसके बाद सिल्वर नाइट्रेट में।
    • इससे सिल्वर क्रोमेट के सूक्ष्म क्रिस्टल बनते हैं जो चयनित न्यूरॉन्स को गहरा काला रंग देते हैं।
    • यह संयोगवश खोजी गई विधि थी
    • जिसे गोल्गी ने वर्षों तक परिष्कृत किया और 1873 में अपनी पहली प्रकाशना में चित्रों
    • जिन्हें ऐतिहासिक रूप से 'तस्वीरें' कहा जाता है
    • के साथ संपूर्ण तंत्रिका कोशिका का वर्णन किया। हिंदी में इसे 'काली अभिक्रिया' कहा जाता है
    • जो न्यूरोएनाटॉमी में मील का पत्थर साबित हुई।​
  • वैज्ञानिक प्रभाव
    • इस तकनीक ने न्यूरोएनाटॉमी को बदल दिया, गोल्गी के रेटिकुलर सिद्धांत (तंत्रिका तंत्र एक सतत जाल है
    • को समर्थन दिया, हालांकि बाद में न्यूरॉन सिद्धांत (न्यूरॉन्स अलग-अलग इकाइयाँ हैं) प्रबल हुआ।
    • संतियागो रामॉन वाई काजल जैसे वैज्ञानिकों ने इसे अपनाकर न्यूरॉन सिद्धांत स्थापित किया।
    • 1906 में गोल्गी और काजल को तंत्रिका तंत्र के अध्ययन के लिए फिजियोलॉजी या मेडिसिन में नोबेल पुरस्कार मिला।
    • आज भी यह तकनीक न्यूरोसाइंस में उपयोग होती है।​
  • हिंदी में अतिरिक्त जानकारी
    • टेस्टबुक जैसे स्रोतों के अनुसार, कैमिलो गोल्गी ने 1873 में ब्लैक रिएक्शन विकसित की
    • जिससे तंत्रिका कोशिकाओं की जटिल संरचना और नेटवर्क को देखना संभव हुआ।
    • सिल्वर क्रोमेट से कुछ कोशिकाएँ पूर्ण रूप से रंग जाती हैं, जिससे न्यूरॉन सिद्धांत की स्थापना में मदद मिली।
    • गोल्गी ने गोल्गी उपकरण की भी खोज की, जो कोशिकाओं में प्रोटीन प्रसंस्करण करता है।​

16. लाखों झिल्ली-बद्ध राइबोसोमों से युक्त कौन-सा कोशिकांग कुछ प्रोटीनों के उत्पादन, वलयन, गुणवत्ता नियंत्रण और प्रेषण की प्रक्रिया में शामिल होता है? [Phase-XI 30 जून, 2023 (IV-पाली)]

Correct Answer: (b) रुक्ष अंतः प्रद्रव्यी जालिका
Solution:
  • रुक्ष अंतः प्रद्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum - RER): यह एंडोप्लाज्मिक रेटिकुलम का एक हिस्सा है
  • जो अपनी बाहरी सतह पर बड़ी संख्या में राइबोसोम (Ribosomes) से ढका होता है
  • जिससे यह खुरदुरा या रुक्ष दिखाई देता है। ये राइबोसोम विशेष रूप से उन प्रोटीनों का संश्लेषण करते हैं
  • जो कोशिका से बाहर स्रावित होने वाले होते हैं
  • जो अन्य झिल्ली-बद्ध अंगकों (जैसे लाइसोसोम, गॉल्जीकाय) में समाहित होने वाले होते हैं।
  • RER में इन प्रोटीनों का उत्पादन, वलयन (folding) और गुणवत्ता नियंत्रण होता है।
  • त्रुटिपूर्ण वलयन वाले प्रोटीनों को अक्सर यहीं नष्ट कर दिया जाता है।
  • संरचना
    • विशेष रूप से वे प्रोटीन जो स्रावित होते हैं या झिल्ली में एकीकृत होते हैं।
    • रफ ER सिस्टर्ना (चपटी थैलियां), नलिकाएं और पुटिकाओं से बना होता है, जो चिकने ER से भिन्न है।​
  • प्रोटीन उत्पादन
    • राइबोसोम RER पर mRNA पढ़कर अमीनो अम्लों को जोड़ते हैं
    • जिससे नया पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला बनती है। यह श्रृंखला संश्लेषण के दौरान ही ER झिल्ली में प्रवेश कर जाती है
    • जहां यह लुमेन (आंतरिक गुहा) में पहुंचती है। यह सह-अनुवादात्मक प्रक्रिया प्रोटीन को साइटोसॉल से अलग रखती है।​
  • वलयन (फोल्डिंग)
    • ER लुमेन में प्रोटीन चैपरोन प्रोटीन (जैसे BiP) और एंजाइमों द्वारा सही तीन-आयामी आकार ग्रहण करते हैं।
    • डिसल्फाइड बॉन्ड बनते हैं और ग्लाइकोसिलेशन होता है, जो प्रोटीन को स्थिर बनाता है।
    • गलत फोल्डिंग वाले प्रोटीन को पुनः फोल्ड किया जाता है।​
  • गुणवत्ता नियंत्रण
    • ER गुणवत्ता नियंत्रण (ERQC) प्रोटीन की जांच करता है; सही फोल्ड न होने पर वे ER में बंधे रहते हैं।
    • अनफोल्डेड प्रोटीन प्रतिक्रिया (UPR) सक्रिय होकर दोषपूर्ण प्रोटीन को ER-संबद्ध डिग्रेडेशन (ERAD) द्वारा प्रोटीजोम में भेज देता है।
    • यह कोशिका को विषाक्त प्रोटीन से बचाता है।​
  • प्रेषण
    • सही प्रोटीन वेसिकल्स में पैक होकर गॉल्जी उपकरण भेजे जाते हैं
    • जहां आगे संशोधन होता है। यहां से वे लाइसोसोम, प्लाज्मा झिल्ली या बाहर स्रावित हो जाते हैं।
    • यह secretory पथ कोशिका के निर्यात को नियंत्रित करता है।​
  • महत्व
    • RER की कमी से प्रोटीन संबंधी रोग जैसे अल्जाइमर या डायबिटीज हो सकते हैं।
    • यह कोशिका होमियोस्टेसिस बनाए रखता है।​

17. कोशिका के उस प्रकार की पहचान करें जो लंबी और शाखित है- [Phase-XI 28 जून, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (c) तंत्रिका कोशिका
Solution:
  • तंत्रिका कोशिका
    •  ये वे कोशिकाएँ हैं जो तंत्रिका तंत्र की मूल इकाई हैं।
    • वे अपनी लंबी, शाखित संरचना के लिए जानी जाती हैं
    • जिसमें एक कोशिका काय (cell body), एक लंबा एक्सॉन (axon) और कई डेंड्राइट्स (dendrites) शामिल होते हैं।
    • यह लंबी और शाखित संरचना उन्हें शरीर के विभिन्न हिस्सों में विद्युत संकेतों को लंबी दूरी तक भेजने और प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।
  • कार्य
    • तंत्रिका कोशिकाएँ संवेदी जानकारी को मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं
    • मोटर प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करती हैं तथा विचार, स्मृति और सीखने जैसी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती हैं।
    • सिनैप्स नामक जंक्शन पर न्यूरोट्रांसमीटर के माध्यम से एक न्यूरॉन दूसरे को संकेत भेजता है।
    • ये कोशिकाएँ मांसपेशियों के संकुचन, हृदय गति और पाचन जैसे शारीरिक कार्यों को भी विनियमित करती हैं।​
  • अन्य कोशिकाओं से अंतर
    • पेशी कोशिकाएँ भी लंबी होती हैं, लेकिन वे मुख्यतः धारीदार और संकुचनकारी होती हैं
    • शाखित नहीं। लाल रक्त कोशिकाएँ गोलाकार और चपटी होती हैं, जबकि श्वेत रक्त कोशिकाएँ अमीबानुमा।
    • स्तंभाकार उपकला कोशिकाएँ लंबी लेकिन अशाखित होती हैं।
    • तंत्रिका कोशिकाएँ अपनी विशिष्ट लंबाई और शाखाओं के कारण ही सबसे स्पष्ट रूप से पहचानी जाती हैं।​

18. कोशिका झिल्ली के विषय में सही कथन की पहचान कीजिए। [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (c) कोशिका झिल्ली कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और प्रोटीन से बनी होती है।
Solution:
  • कोशिका झिल्ली (जिसे प्लाज्मा झिल्ली भी कहा जाता है) एक जटिल संरचना है जो मुख्य रूप से बनी होती है:
  • लिपिड (Lipids): विशेष रूप से फॉस्फोलिपिड्स (phospholipids) की एक द्विपरत
  • जो झिल्ली की मूल संरचना बनाती है।
  • प्रोटीन (Proteins): ये लिपिड द्विपरत में एम्बेडेड होते हैं या उससे जुड़े होते हैं।
  • ये विभिन्न कार्य करते हैं जैसे कि चैनलों, वाहकों, रिसेप्टर्स और एंजाइमों के रूप में।
  • कार्बोहाइड्रेट (Carbohydrates): ये लिपिड (ग्लाइकोलिपिड्स) या प्रोटीन (ग्लाइकोप्रोटीन) से जुड़े होते हैं
  • कोशिका की सतह पर पाए जाते हैं।
  • ये कोशिका पहचान, कोशिका आसंजन और सिग्नलिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • इसलिए, सबसे सटीक कथन यह है
  • कोशिका झिल्ली कार्बोहाइड्रेट, लिपिड और प्रोटीन से बनी होती है।
  • संरचना
    •  प्रोटीन इस झिल्ली में एम्बेडेड होते हैं, जो अभिन्न (integral) या परिधीय (peripheral) प्रकार के होते हैं
    • ये परिवहन, संकेतन और कोशिका संपर्क में भूमिका निभाते हैं। कोलेस्ट्रॉल झिल्ली की तरलता को नियंत्रित करता है
    • जबकि कार्बोहाइड्रेट ग्लाइकोप्रोटीन या ग्लाइकोलिपिड के रूप में मौजूद रहते हैं जो कोशिका पहचान में सहायक होते हैं।​
  • कार्य
    • कोशिका झिल्ली कोशिका को आकार प्रदान करती है और साइटोप्लाज्म को बनाए रखती है।
    • यह चयनात्मक पारगम्यता के माध्यम से पोषक तत्वों को अंदर लेने और अपशिष्ट को बाहर निकालने का कार्य करती है
    • जिसमें निष्क्रिय परिवहन (diffusion, osmosis) और सक्रिय परिवहन (पंप जैसे Na+-K+ पंप) शामिल हैं।
    • इसके अलावा, यह कोशिका संकेतन (cell signaling), एंडोसाइटोसिस, एक्सोसाइटोसिस और कोशिका आसंजन (cell adhesion) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।​
  • मॉडल और विशेषताएं
    • सिंगर और निकोलसन द्वारा प्रस्तावित फ्लूइड मोज़ेक मॉडल के अनुसार, झिल्ली तरल मोज़ेक जैसी होती है
    • जहां लिपिड और प्रोटीन गतिशील रूप से व्यवस्थित रहते हैं। यह लचीली और पुनर्जनन करने वाली होती है
    • जो विभिन्न तापमानों पर अपनी तरल अवस्था बनाए रखती है।
    • पादप कोशिकाओं में यह कोशिका भित्ति के अंदर स्थित होती है
    • जबकि जंतु कोशिकाओं में सबसे बाहरी परत के रूप में कार्य करती है।​
  • महत्वपूर्ण कथन
    • कोशिका झिल्ली पूर्ण पारगम्य नहीं बल्कि चयनात्मक पारगम्य होती है
    • इसलिए "पूर्ण पारगम्य झिल्ली" कथन असत्य है। यह कोशिका की सबसे बाहरी परत (जंतु कोशिकाओं में) होती है
    • पदार्थों की गति को नियंत्रित करती है, अतः क और ग कथन सत्य हैं।
    • मानव कोशिका में प्रोटीन लगभग 50%, लिपिड 40% और कार्बोहाइड्रेट 10% होते हैं।​

19. निम्नलिखित में से कौन-सा कथन, एंटीऑक्सीडेंट के संबंध में सत्य नहीं है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (III-पाली)]

Correct Answer: (b) पशु उत्पाद एंटीऑक्सीडेंट का प्रमुख स्रोत हैं।
Solution:
  • पशु उत्पाद एंटीऑक्सीडेंट का प्रमुख स्रोत हैं। - यह कथन सत्य नहीं है
  • एंटीऑक्सीडेंट के प्रमुख स्रोत आमतौर पर पौधे-आधारित खाद्य पदार्थ होते हैं
  • जैसे फल (बेरीज, खट्टे फल), सब्जियां (पालक, ब्रोकोली), नट्स, बीज और साबुत अनाज।
  • जबकि कुछ पशु उत्पादों में कुछ एंटीऑक्सीडेंट हो सकते हैं, वे प्रमुख स्रोत नहीं होते।
  • एंटीऑक्सीडेंट क्या हैं?
    • एंटीऑक्सीडेंट ऐसे रसायन हैं जो फ्री रेडिकल्स (अस्थिर अणु) को न्यूट्रलाइज करते हैं
    • जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ये मुख्यतः पौधों से प्राप्त होते हैं
    • जैसे विटामिन सी, ई, बीटा-कैरोटीन, फ्लेवोनॉइड्स और पॉलीफेनॉल्स।
    • शरीर स्वाभाविक रूप से भी कुछ एंटीऑक्सीडेंट एंजाइम्स (जैसे सुपरऑक्साइड डिसम्यूटेज, कैटालेज) बनाता है।
    • ये कैंसर, हृदय रोग और उम्र बढ़ने जैसी समस्याओं से बचाव में सहायक होते हैं
    • लेकिन अत्यधिक सप्लीमेंट्स हानिकारक सिद्ध हो सकते हैं।​
  • असत्य कथन की पहचान
    • प्रश्नों में अक्सर "पशु उत्पाद (मांस, दूध आदि) एंटीऑक्सीडेंट का मुख्य स्रोत हैं" वाला कथन गलत होता है।
    • वास्तव में, एंटीऑक्सीडेंट का प्रमुख स्रोत फल, सब्जियां, अनाज और नट्स जैसे पादप-आधारित भोजन हैं।
    • पशु उत्पादों में विटामिन ई या सेलेनियम सीमित मात्रा में हो सकता है
    • लेकिन ये मुख्य स्रोत नहीं। उदाहरणस्वरूप, विटामिन सी केवल पौधों में प्रचुर है, पशु उत्पादों में नहीं।​
  • अन्य सामान्य गलत धारणाएं
    • एंटीऑक्सीडेंट के बारे में कई मिथक हैं जो सत्य नहीं:
    • सभी एंटीऑक्सीडेंट सप्लीमेंट्स सुरक्षित हैं: उच्च खुराक कैंसर या मृत्यु दर बढ़ा सकती है
    • जैसा कुछ अध्ययनों में पाया गया।​
    • विटामिन डी (कॉलेकैल्सिफेरॉल) एंटीऑक्सीडेंट है: यह हड्डी स्वास्थ्य के लिए विटामिन है
    • एंटीऑक्सीडेंट गुण नहीं रखता।​
    • एंटीऑक्सीडेंट सभी रोगों का रामबाण हैं: ये सहायक हैं, लेकिन दवाओं का स्थान नहीं लेते।​
  • लाभ और सावधानियां
    • फल-सब्जियों से प्राकृतिक एंटीऑक्सीडेंट प्रतिरक्षा मजबूत करते हैं और सूजन कम करते हैं।
    • हालांकि, धूम्रपानियों या रोगियों को सप्लीमेंट्स से बचना चाहिए
    • क्योंकि ये हानि पहुंचा सकते हैं। संतुलित आहार ही सर्वोत्तम है।​

20. कोशिकीय अंगकों और सतह स्थलाकृति प्रतिबिंबन के लिए कोशिका जैविकी शोध में किस तकनीक का उपयोग किया जाता है? [दिल्ली पुलिस कांस्टेबिल 21 नवंबर, 2023 (I-पाली)]

Correct Answer: (a) क्रमवीक्षण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी
Solution:
  • क्रमवीक्षण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी (Scanning Electron Microscopy - SEM)
    • यह एक शक्तिशाली सूक्ष्मदर्शी तकनीक है
    • जिसका उपयोग किसी नमूने की सतह स्थलाकृति और संरचना की विस्तृत, उच्च-रिज़ॉल्यूशन वाली छवियाँ प्राप्त करने के लिए किया जाता है।
    • SEM एक केंद्रित इलेक्ट्रॉन बीम का उपयोग नमूने की सतह को स्कैन करने के लिए करता है
    • उत्सर्जित या परावर्तित इलेक्ट्रॉनों का पता लगाकर एक छवि बनाता है।
    • यह कोशिका अंगकों की बाहरी सतहों और कोशिका की समग्र 3D संरचना को देखने के लिए आदर्श है।
  • SEM का कार्य सिद्धांत
    • SEM में इलेक्ट्रॉनों की एक केंद्रित किरण को कोशिका नमूने की सतह पर स्कैन किया जाता है
    • जिससे माध्यमिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं। ये इलेक्ट्रॉन डिटेक्टर द्वारा एकत्रित होकर चित्र बनाते हैं
    • जो नैनोमीटर स्तर तक की विस्तृत जानकारी देते हैं।
    • कोशिकाओं को विशेष रूप से तय (fixed), निर्वातित (dehydrated) और धातु-लेपित (metal-coated) किया जाता है
    • ताकि वे इलेक्ट्रॉन बीम सहन कर सकें और सतह स्थलाकृति स्पष्ट दिखे।​
  • कोशिकीय अंगकों का प्रतिबिंबन
    • SEM कोशिका सतह पर स्थित अंगकों जैसे माइटोकॉन्ड्रिया के बाहरी भाग
    • लाइसोसोम या सिलिया-फ्लैजेला की संरचना को इमेज करता है।
    • यह तकनीक आंतरिक अंगकों के लिए सीमित है
    • लेकिन सतह-आधारित अध्ययन जैसे कैंसर कोशिकाओं की माइक्रोविली या बैक्टीरिया की सतह बनावट के लिए आदर्श है।
    • नैनोस्केल रिज़ॉल्यूशन (1-10 nm) के कारण यह जैविक नमूनों की आकृति विज्ञान (morphology) समझने में महत्वपूर्ण है।​
  • अन्य सहायक तकनीकें
    • ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शिकी (TEM): आंतरिक अंगकों की 2D छवियों के लिए उपयोगी, लेकिन सतह स्थलाकृति के लिए SEM बेहतर।​
    • अवस्था विपर्यासी सूक्ष्मदर्शिकी (Phase Contrast Microscopy): जीवित कोशिकाओं में कंट्रास्ट बढ़ाने के लिए
    • लेकिन उच्च रिज़ॉल्यूशन नहीं।​
    • प्रतिदीप्ति सूक्ष्मदर्शिकी (Fluorescence Microscopy): विशिष्ट अंगकों को चिह्नित करने के लिए
    • सतह के बजाय कार्यात्मक इमेजिंग पर केंद्रित।​
  • अनुप्रयोग और सीमाएं
    • SEM का उपयोग कैंसर अनुसंधान, ऊतक इंजीनियरिंग और पाथोलॉजी में होता है
    • जहां सतह परिवर्तनों का अध्ययन आवश्यक है।
    • सीमाएं: जीवित कोशिकाओं पर सीधा उपयोग नहीं, नमूना तैयारी जटिल।
    • आधुनिक cryo-SEM जैसी प्रगतियां जीवित-जैसे स्थितियों में इमेजिंग सक्षम बनाती हैं।
    • कोशिका विज्ञान में सूक्ष्मदर्शी तकनीकें समग्र रूप से क्रांतिकारी रही हैं।